नव वर्ष २०१६ की हार्दिक शुभकामनाएं।

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र्षकी हार्दिशुकानाएं

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मेरे सभी प्रिय पाठक मित्रों आप सभी काे नव वर्ष २०१६ की हार्दिक शुभकामनाएं।

हर चीज़ बदलती है इस जहाँ में।
पुराना साल जा रहा है नया साल आ रहा है॥

नया दिन नया सवेरा नया साल…..
लाये ख़ुशियाँ सब के जीवन में॥

दुआ करते है भगवान से कि जो किसी को।
चाहिये वो मिल जाये इस नये साल में॥

आपको यह नया साल मुबारक हो।
मेरी ढेर सारी शुभकामनायो के संग॥

चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहे फूलों की तरह।
चारो तरफ़ सुन्दरता ही सुंदरता दिखे सुंदर फूलों की तरह॥

©- विमल गांधी 
Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता साझा करने के लिए।

विमल गांधी जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “विमल गांधी जी” की कविताआे के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

2015 में इन 6 तरीकों से दिल और दिमाग को देंं नया जीवन।

Kmsraj51 की कलम से…..

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 2015 में इन 6 तरीकों से दिल और दिमाग को देंं नया जीवन।

हमारे अंदर ढेर सारी गलत आदतें होती हैं, जिन्हें हम छोड़ने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन छोड़ नहीं पाते। दरअसल, गलत आदतों के पीछे कुछ कारण होते हैं, जैसे हमारा अकेलापन, नेगेटिव विचार, धोखा मिलना। लाइफ में कोई भी तकलीफ या परेशानी होने पर हम उन्हें दूर करने के चक्कर में गलत आदतों को अपना लेते हैं। आज हम आपको साल के पहले दिन एक नए तरीके से लाइफ की शुरुआत करने के लिए कुछ सलाह दे रहे हैं। इन तरीकों से आप अपनी परेशानी से दूर कर सकते हैं और दर्द से निकल सकते हैं।

1-इमोशनल दर्द को कम करें
शारीरिक दर्द से कहीं ज़्यादा दिल को लगी चोट का दर्द होता है। अगर कोई बात आपके दिल को चुभ रही है, तो जितना जल्दी हो सके, उससे निकलने की कोशिश करें। आपको कहीं से रिजेक्ट कर दिया गया हो, आप एग्जामिनेशन या किसी टेस्ट में फेल हो गए हों, या किसी वज़ह से आपका मूड खराब है, तो इससे हल्के में न लें। जितना जल्दी हो सके, इसके लिए सही रास्ता निकालें। दर्द कैसा भी हो, ज्यादा दिन रहने से घाव ही बनाता है। इसलिए अपने को लेकर हमेशा सतर्क रहें और दर्द से राहत दिलाने में किसी की मदद लें।
ज़्यादा दिन खुद को अकेले रखने से भी दिल और शरीर को दर्द का एहसास होता है। रिसर्च के अनुसार, अकेले रहने से जल्दी मरने की संभावना 14 फीसदी बढ़ जाती है। अकेलेपन को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है कि फैमिली के साथ रहें। अपने करीबी लोगों की एक लिस्ट बनाएं और उनके साथ फोन या सोशल साइट के जरिए जुड़े रहें। बिजी लाइफ में से कुछ समय निकाल कर दोस्तों और फैमिली के साथ समय बिताएं। कभी-कभी दोस्तों के साथ मिलने की भी प्लानिंग करें। इससे आपकी आउटिंग हो जाएगी और आपको बिजी लाइफ में थोड़ा ब्रेक मिल जाएगा।
2-अकेलेपन के निकलने के लिए कोई रास्ता खोजें
दिल में हुआ घाव ज़्यादा दर्द देता है। इसलिए जितना जल्दी हो सके इस दर्द को दूर करने की कोशिश करें। एक बार किसी भी काम में नाकामयाबी मिलने पर हम खुद को बेकार और नाकारा महसूस करने लगते हैं और आगे भी लाइफ में फेल होने का डर लगा रहता है। लाइफ में कभी भी ऐसी नकारात्मक स्थिति होने पर कोशिश करें कि जल्दी से जल्द इस दिक्कत से बाहर हो जाएं। दरअसल, जैसा हम सोचते हैं, हमारा दिमाग वैसे ही काम करने लगता है। इसलिए जिन बातों या चीज़ों से आपको डर रहता है, उन्हें दिमाग से दूर रखें। लाइफ में आगे बढ़ने के लिए प्लानिंग करना शुरू करें, खुद को बिजी रखें।
3-इमोशनल फीलिंग को कम करें
आपका आत्मसम्मान एक तरह से इमोशनल इम्यून सिस्टन की तरह है, जो आपके लचीलेपन को बढ़ाता है और स्ट्रेस और चिंता से बचाता है। आप अपने दिमाग में जिस भी तरह के विचार रखेंगे, उसी तरह से आप इमोशनली स्ट्रॉन्ग होंगे। इसलिए अच्छे विचारों को दिल में जगह दें। नेगेटिव विचारों से दूरी बनाए रखें और कोशिश करें कि दिल और दिमाग पर गलत विचार हावी न हों।
4-आत्मसम्मान को बचा कर रखें
किसी भी तरह के रिजेक्शन के बाद खुद को फिर से पॉजिटिव बनाए रखना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन यह ज़रूरी है। एक बार असफलता मिलने के बाद हम खुद को बेकार और किसी काम के लायक नहीं समझते, लेकिन ऐसा नहीं है। लाइफ में ऊपर उठने के लिए रिजेक्शन भी ज़रूरी है। इसलिए आपको जहां से भी, जैसे भी रिजेक्शन मिला है, उसे सही और पॉजिटिव तरीके से लें। इससे लाइफ में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। इन सबके अलावा, रिजेक्शन से निकलने के लिए सबसे अच्छा तरीका है कि आप खुद को एक अच्छे दोस्त की तरह ट्रीट करें। दिल की आवाज सुनें, खुद को समझें और खुद का ही सपोर्ट करें।
5-रिजेक्शन के बाद भी हार न मानें
कभी-कभी गलत विचार या बिना किसी बात के दिमाग में नेगेटिव विचार आने से मूड खराब हो जाता है। ज्यादा दिन मूड ऑफ रहने से दिमाग में नेगेटिव विचार अपनी जगह बनाने लगते हैं। इस तरह की दिक्कत से उभरने के लिए दूसरी बातों पर ध्यान देना शुरू करें, जैसे फोन से बात करें या सोशल साइट पर मैसेज-चैट करें, किसी फैमिली मेंबर से बात करें। गलत विचार दिमाग तक न जाएं, इससे पहले उन्हें वहीं खत्म कर दें। खुद को स्ट्रॉन्ग रखने के लिए नेगेटिव विचारों से दूरी बनाए रखना ज़रूरी है।
6-नेगेटिव विचारों से लड़ें
सबसे पहले आपको अपने बारे में पता होना चाहिए कि आप किस तरह की बातों से इमोशनली हर्ट फील करते हैं, साथ ही उससे निकलने का सही तरीका भी पता होना चाहिए। रिजेक्शन, अकेलापन, शर्मिंदा महसूस होने पर या दूसरे इमोशनल घाव से उभरने के लिए कारगर तरीकों को अपनाएं। कुछ लोग स्ट्रेस और टेंशन को दूर करने के लिए शॉपिंग करते हैं, क्योंकि उनको पता है कि इस तरह से स्ट्रेस कम होगा। उसी तरह से आपको अपने बारे में पता होना चाहिए कि आपको किस बात से किस तरह से राहत मिलती है।  लाइफ में अगर आपको दर्द से निकलने के तरीकों के बारे में पता चल जाए, तो आप कभी भी किसी परेशानी से घिर नहीं सकते हैं।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

 

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The Seven Relationships With The Supreme

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The Seven Relationships With The Supreme

Every soul has a close relationship with the Supreme (God), but we simply forget it as we become over-involved in, attached to and distracted by our life on the physical plane and our different relationships with different physical beings during our journey of births and rebirths. Spirituality makes us realize the need of restoring our connection with God, which has either broken or has become loose. It also makes us realize that this connection needs to be a very deep and personal one.

God plays many roles, just as a good parent, being one, but will play many roles while bringing up his or her child. Each role consists of different spiritual characteristics and virtues of God, expressed by Him. Take a few moments to think about the main roles that God plays in our life and identify the main virtues and characteristics which He expresses e.g. in the role of Father He demonstrates the art of living to us and how to perform right karmas. In the role of Mother he gives spiritual sustenance, in the form of virtues like peace, love and joy to us. In the role of Teacher, he showers us with true knowledge of the spirit or the soul. These are just a few examples. We suggest you do your own thinking about seven different roles that God plays: Father, Mother, Teacher, Guide (or Guru), Companion (or Beloved), Friend, Child and how he plays them. Once you have done this inner thinking exercise, experience each of these seven roles on each of the seven different days of the week, one role per day. Feel Him being in that role for you and then note what you feel exactly and how you relate to Him. Also identify the spiritual characteristics and virtues that it brings out from within you.

– Message –

Your powerful stage keeps you constant in spite of the changing circumstances.

Checking: In the different circumstances that you face throughout the day, check if you are able to maintain the same mood. See if you are able to maintain the same stage whatever the circumstances you are faced with.

Practice: Each morning, take a strong thought, ‘I am powerful and I perform each task with this awareness. Even when things go wrong I don’t forget what I originally am.’ When you practice in this way, you’ll not change your mood with the changing circumstances.

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The Creations Of The Mind

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The Creations Of The Mind

Scientists have learned a lot about our physical functioning, but most admit that what actually keeps a human being alive is a mystery not completely solved. Rising above being just a product of chemical and electrical activity in the brain, as believed by many of us, spirituality orients me and trains me to come close to my real self, my spiritual self. Before I was a stranger to my own self, unaware of what is going inside my consciousness and distant from my own self. The first step in coming close to myself is that I learn to use the energy of my mind in the most effective way possible. For this, I decide to find a place where, each day, I can sit for a few minutes without interruptions, in order to focus on the self and explore the inner world of the creations of the mind – my thoughts, feelings, attitudes and emotions.

There has been a lot of conflicting views in the world about what the mind is and how it works. In the teachings of meditation by the Brahma Kumaris, the mind, which gives rise to my thoughts, feelings, attitudes and emotions, is seen as a faculty of the soul, not the body. It is rather like the difference between a television set and the movies seen on that set. The movies originate in the minds of the directors, not in the television set itself. The television set is just a medium for displaying the movies. So it is with all these four creations (thoughts, feelings, attitudes and emotions). These originate in the non-physical consciousness and not in the physical brain. The brain is just a processor of them and the body is a medium via which all four are displayed or brought onto expressions, physical gestures, words and actions. When I realize this, and really understand this difference, it very empowering. I am then able to use the power of discrimination to make choices between thoughts, feelings, attitudes and emotions that are useful and empowering for myself and others, and those that bring me down.

– Message –

Truth is effective when it is combined with tact.

Expression: I usually react when something goes wrong. In the heat of the moment I give corrections and others don’t seem to understand. Then I tend to become confused, as it is difficult to make a choice whether to leave the situation as it is or to prove my point to the others.

Experience: Unless truth is combined with tact I cannot make people realise their mistakes. When I find something going wrong, I need to wait for the right time for saying what I have to. I also need to tell it in a way that the other person can understand. Only then will my words have their impact on others.

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जीवन में सबसे बड़ी ख़ुशी तथा चुनाैती उस काम काे करने में है जिसे लाेग कहते हैं कि “तुम नहीं कर सकते”।

 -पूज्य आचार्य श्री बाल कृष्ण जी महाराज

 

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Radiating Positive And Powerful Energy

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Radiating Positive And Powerful Energy

Radiating Positive And Powerful Energy

You will notice many people in your life who are very much in need of love but they attract the opposite energy. This is because the negative energy of lack of love for the self and low self esteem which they continuously radiate causes them to attract that same negative energy from others. In the same way, there are many people who are very much in need of success but they attract failure repeatedly. Failure is directly related to the quality of energy we radiate i.e. how positive and powerful our expectations of success are. Once we set the goals that we wish to reach, we need to be careful that we move towards our aim without creating the negative energy of fear inside our consciousness. Failure appears when we make an effort to achieve those goals and we damage the result or attract failure without us desiring so, simply because of our fears of failure.Even then, if at that step we feel that we have failed, we need to have a positive and constructive attitude.

We need to emerge the power to face and power of acceptance inside us. That way our creative energies will flow and we will carry on going forward without the failure (whether real or only perceived by us to be real but actually not real) becoming an obstacle in our path from doing so. Although at that time it may seem as though we have missed an opportunity or that some openings have closed for us, have faith and be fearless. If we are fearless and radiate positive and powerful energy, other possibilities will open up. We have this deep rooted belief that our fear will keep us safe, and we treat it like a comfort zone, a red signal that tells us that we should stop. Creating a time every day to do something that you fear, helps you to re-condition yourself internally to begin to see the fear as a green signal and to develop inner courage, so that you can move towards your goal of success. Each day, do what you fear and the fear will soon be removed.

<> Message <>

Understanding brings happiness.

Expression: Happiness lies in understanding the secret of whatever is happening. When one is able ot remain happy in this way, he is able to spread this happiness to those around too, influencing the lives of all.

Experience: When I am able to remain happy under all circumstances, I am able to be free from the influence of others’ negativity. Instead I will be able to become a major source of positive influence to those around me.

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बिन्दु रूप में स्थित रहो तो समस्याओं को सेकण्ड में बिन्दु लगा सकेंगे।

तैयारी इतनी खामोशी से करो की सफलता शोर मचा दे |

 ~KMSRAJ51

 

 

 

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Understanding The Birth-Life-Death-Rebirth Cycle

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Understanding The Birth-Life-Death-Rebirth Cycle – Part 1

The realization of the self as a soul, an eternal (always existing) energy, naturally leads to the following questions:

Where is the soul before it comes into a physical body? 
Where does the soul go after it leaves it? 
What is the purpose of the world drama? 

These are questions that deeply concern human beings, yet until now there isn’t 100% conclusive proof of life after death.

The images of “fires of hell” and a heavenly world beyond the clouds are talked about in the world’s religions. Yet to the rational and logical minded, the states of living forever tortured in holes of fire (hell) or on the other hand relaxing in complete happiness in a fairy-tale kingdom (heaven), seem far away from the reality of the present.

Most accept that there is some order to the world creation, but viewing our drama through spectacles of body-consciousness it is impossible to see it, as the soul is imprisoned by bodily needs and sensual desires. In body-consciousness the soul is unable to see anything clearly. Only when we are at the point of death does one think about life after death. At funerals, everyone faces the new absence of a loved person, the departure of the personality and the temporary nature of the physical body. Everyone wishes that the person who has died will go to heaven and not to hell.

 

Message 

To be successful I need to have the balance between the head and the heart. 

Projection: In my interactions with others, I sometimes only use my head, i.e., my logic. I am very logical and understand the facts very clearly. But if I keep myself limited only to the facts, I tend to forget to use my heart. I then am not available to the other person and fail to understand him.

Solution: In order to be successful in my interactions with others I need to have the right balance between my head and my heart. I need to see beyond what the facts say and try to listen and understand the other person too. When I do this I will not hurt people with my attitude but will be able to maintain harmonious relationships.

 

Understanding The Birth-Life-Death-Rebirth Cycle – Part 2

We subconsciously know that we are souls. Birth, life and death are just stages in existence. In fact all natural processes can be found to have a beginning, a middle, an end and a new beginning to continue the cycle. The soul takes a bodily form, gives life to it and after a period of time, long or short, leaves it and takes another suited to the continuation of its role. As long as the soul is in the body, the body grows like a plant from baby to child, youth to maturity. It then begins to decay and finally becomes unusable. The moment the soul leaves the body, the body becomes like a dead log of a tree. It immediately starts to decompose and eventually goes back to dust.

Again the soul moves into a foetus inside the womb of a mother. After time it emerges as a newborn baby and immediately begins to show the sanskars it had developed in its previous life. It is the same soul but in a new physical situation. Thus death is merely the means by which a complete change of circumstances and environment for the soul takes place. Time never kills the soul, but the body, being a part of nature or matter, obeys the law of decay that everything new becomes old and eventually finishes. The molecular components of this body disintegrate only to re-integrate as another form (body) some time later.

The process of birth-life-death-rebirth is also eternal (without a beginning or an end). It has always been going on and will continue. The soul comes into the body, expresses a role and experiences the results of that for a certain time, then leaves it, and the process starts again. Similarly, souls come into this world, remain here as actors for a number of births and then return to the region from which they come, for rest. This process also starts again. The pattern is a cyclic one. This is called the eternal world cycle.

Message 

To make thoughts as pure as the actions is to be truly elevated. 

Projection: There is usually attention on the self not to perform any negative acts. There is also considerable attention not to speak any words that are harmful or negative. But very rarely is there that attention on the thoughts. Because of this a lot of negative thoughts tend to remain in the intellect causing trouble for me.

Solution: I need to understand the fact that my thoughts form the basis for my words and actions. The more I pay attention to make my thoughts positive, the more it will make a positive impact on my words and actions too. Constant awareness of a positive thought enables me to maintain my own inner positivity.

 
In Spiritual Service,
Brahma Kumaris 

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

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Negative Control And Positive Influence

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Negative Control And Positive Influence 

The power of influence in relationships is extraordinary, but it practically disappears when we try to exercise control and force.

You can influence anyone positively in many ways:

• encouraging,

• sharing,

• listening,

• communicating in the right way. 

In negative control we generate stress, frustration and anger. In positive influence the energy flows in a relaxed way with harmony and is not threatening, respecting each one for their specialty and allowing each one to be as they are.

In order to influence positively we need the power of discrimination and judgement in relation to what to say and what to do e.g. when you believe that the other person is the problem; generally the problem is not what others say or do, but rather how you perceive them. The way that you judge is what creates your negative feelings about them. We have the choice to perceive others as a threat, as a problem, or as an opportunity; an opportunity for learning, for change, for dialogue and understanding. We can choose to have compassion (kindness); to feel that the other is a problem indicates a lack of compassion.

Message for the day 08-07-2014

The way to control the mind is to talk to it with love.

Projection: Whenever I find my mind wandering I try to control it with force. I try to pull the mind and order it not to think about something. Yet I find that, the more I try to force the mind not to go in a particular direction, the more it tends to go there.

Solution: The only way to control the mind is to talk to it with love. Just as I would explain to a child, I need to explain to it with love. This will make my mind my friend and I will be able to concentrate even in any undesirable situations.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

 

 

“तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है, समझता हूँ”

kmsraj51 की कलम से…..

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KR VISHWAS

“तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है, समझता हूँ ,

तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है, समझता हूँ ,

तुम्हें मैं भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नहीं लेकिन ,

तुम्हीं को भूलना सबसे जरूरी है, समझता हूँ …!”

 

 

 

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Stress Management !!

 

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Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

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Soul Sustenance 18-04-2014
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Stress Management 

Standing Back, Observing and Steering – 

Standing Back : We can do this individually or as a team, when stressful situations occur. We may take a few minutes to stand back mentally and physically from the situation or scene. 

Observing : The next step is to re-view the situation, as if we are an onlooker or a detached observer. Being as silent as possible, we can ask ourselves if the thoughts we are having are the ones we wish to keep, if they are going where we would choose them to. 

Steering : In the resulting silence, it is possible to steer (change direction) our thinking to where we want it to be; perhaps to personal affirmations (positive thoughts) we use to calm us. The affirmations can be: ‘I am aware of myself as calm and peaceful or, ….as happy and satisfied’, etc. 

This technique changes our attitudes and feelings, which influences positively the situation as well as how others respond. 

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Message for the day 18-04-2014
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To have a clear aim of where the action will lead is to be successful in everything. 

Expression: Many a times it so happens that one acts immediately seeing a situation. But the one who is successful analyses the situation and predicts the outcome of the action that he performs and then acts keeping the end result in mind. Because of knowing the consequences of the actions before actually performing that action, he is able to continue putting in effort in spite of the challenges and difficulties. So he continues to give his best to the task. 

Experience: When I am able to give time to myself to think before performing any action, I am able to take the opportunity to be clear in my thinking. The consequences of the action I wish to take are clear in my mind and so, the action taken to overcome the situation is right. Hence, I receive easy and sure success. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

 

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Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

 

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Soul Sustenance 17-04-2014
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The Pledge Of Responsibility 

A very important aspect of progress in the self and my relationships, which we all desire is restoring a sense of responsibility in my inner world, so that by doing that, I and others around me are benefitted. Even on a physical or non-spiritual level, someone who is responsible while playing his/her role or performing his/her duties either in the family, at the workplace or in some other setting e.g. a club group or a team in a particular sport or a social service group, not only feels content with his/her actions himself/herself but spreads ripples of contentment to others and receives similar energy from each one he/she is involved with. In the same way on an emotional or spiritual level, when I start my day I need to remind myself of my responsibility towards myself.I need to remind myself that I am responsible for the choices I make in my life which influence and color everyone around me. So do my thoughts, feelings, the way my personality functions internally and externally the whole day and my responses to people and situations, for all of which I am responsible. 

It is like taking a pledge of responsibility with the self in the morning that today I will not create a single thought, word or action which is against the texture of my innate, positive nature i.e. irresponsible. And what will provide my pledge the much required strength of determination? An injection of positive thoughts, emotions and sanskaras within me in the morning, using a suitable technique of self empowerment like meditation or spiritual study or some other. By taking such a pledge of responsibility and by watering it with the energy of my attention from time to time during the day, I am able to implement it and can make a difference to not only the people around me, but to a lot more than that. In this way, as I change, the world around me changes, because the energy I create in my inner world starts flowing into my circumstances, my interactions, my sphere of karmas, etc. to make them positive, which benefits me in return in the form of a cyclic process. As I take this pledge and abide by it for a few days, I start realizing the immense potential that it possesses. 

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Message for the day 17-04-2014
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To transform waste into something purposeful and powerful is to remain light. 

Expression: To successfully transform something waste into something powerful and meaningful is to look beyond the situation and see what it has to teach. When there is the ability to do this, there is the ability to go on in spite of the most challenging obstacles. There is the deep understanding that nothing happens without a purpose. There is no time or energy wasted in wasteful company. 

Experience: When I understand the significance of everything that happens, I am able to transform in a second. So I am able to remain light because I am able to put in sincere effort and free myself from the burden of waste. I also find that there is no problem in my relationships too, as I am able to understand others and behave accordingly. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

 

 

 

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 By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

100 शब्द – एक सफल जीवन के लिए-(100 Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

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वादा खुद से कर के निकले हैं।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ वादा खुद से कर के निकले हैं। ϒ

वादा खुद से कर के निकले हैं।
अब कदम रुक सकते नहीं।
लक्ष्य हासिल किये बिना…
थक के बैठ सकते नहीं।

विपत्ति का सामना जो हंस के कर पायेगा।
जग में उसी का नाम रह जाएगा।
तपने उपरान्त सोने की पहचान बनती है।
सतत परिश्रम ही इंसान बनाती है।

हार के जो बैठ गए घर में…
उनका खुद भी साथ नहीं देता है।
हिम्मत कर के जो उतरते हैं सागर में।
ख़ुदा खुद ही उसे तिनके का सहारा देता है।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
of,,  https://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51