सन् 1600 बनाम सन् 2014 – 40।

kmsraj51 की कलम से …..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

सन् 1600 बनाम सन् 2014-40 ….. 

वर्तमान दौर चाहे वह राजनीति का हो या आर्थिक या फिर इस देश के चिर-संस्कारों से निर्मित नैतिक मूल्यों का ये सभी एक बहुत ही भयावह दौर से गुजर रहे हैं शायद कुछ लोग जो विद्वता के धनी है इसे संक्रमण काल के नाम से भी जानते हैं तो कुछ लोग इसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोगवाद कह रहे हैं लेकिन यह समय मात्र और मात्र एक सच्चे भारतीय जो इसकी अखंडता एवं गौरवमयी इतिहास से थोड़ा भी सरोकार रखता है, के लिए बहुत ही विषम एवं चिंताजनक है स्पष्ट रुप में कहें तो बहुत ही भयावह है।


इतिहास गवाह है कि इस देश की मिट्टी इतनी उपजाऊ है कि इसने एक से एक संस्कारी महापुरुष तथा देशभक्त पैदा किए हैं लेकिन यह इस मिट्टी का दुर्भाग्य है कि विनाशकारी खरपतवार के रुप में यहां जयचंदों ने भी जन्म लिया है तथा इस पावन धरा को कलंकित किया है। आज का भारत भी इसी दौर से गुजर रहा है जहां ख्ररपतवार इतना बढ़ गया है कि अब पोषक फसलें नज़र ही नहीं आती और यह स्थिती केवल राजनीति ही नहीं कमोबेश हर क्षेत्र की हैं। इसका मात्र और एक मात्र कारण हमारे चिर-संस्कारों एवं मूल्यों का ह्रास होना है। मूल्यों एवं आदर्शों का प्रवाह सदैव शीर्ष से होता है और कहा भी है कि यथा राजा-तथा प्रजा लेकिन आज अपने क्षुद्र स्वार्थों की पूर्ति के लिए हमारे देश के कर्णधार नेतृत्व कर्ताओं ने इस उक्ति को ही बदल दिया और बयान दिया कि जैसी जनता है वैसे ही नेतृत्व कर्ता बनेंगे अर्थात ये लोग जनता के इच्छानुसार ही अपने हित साधन के लिए सारे अपराध एवं भ्रष्ट तंत्र को बढ़ावा दे रहे हैं। आखिर वो कौन सी प्रजा या जनता है जिसने राजा को भ्रष्ट एवं डकैत बनने के लिए जनादेश दिया? शायद इसका उत्तर यह है कि इस देश में जनता या नागरिक नाम की कोई व्यवस्था अब अस्तित्व में ही नहीं है यहां केवल उपभोक्तावादी संस्कृति के पोषक मतदाता रहते हैं जिन्हें कोई भी खरीद सकता है तथा ये तथाकथित मतदाता भोली चिड़ियाओं की भांति किसी भी बहेलिए के जाल में फंसने को आतुर है। फिर चाहे वह बहेलिए देशी हो या विदेशी इससे इनको कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि लालच ने संवेदनाओं को मृत प्राय: कर दिया है। इन चिड़ियाओं को स्वतंत्र आसमान से बेहतर सुख-सुविधा युक्त वो स्वप्निल सोने का पिंजड़ा अधिक रास आने लगा है जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं और जो मात्र और मात्र एक छलावा भर है।

आज इस देश की जनता को देश के प्रोफाईल से अधिक अपना हाई प्रोफाईल प्रिय है कमोबेश आज हमारा देश गुलामी से पहले के उसी दौर से गुजर रहा हैं। जनता विभिन्न मुद्दों पर आपस में बंटी हुई है चाहे वो आरक्षण का मुद्दा हो या राज्यवाद या फिर धर्म या जातिवाद का चारों और विघटनकारी शक्तियों का बोलबाला हैं हर आदमी ने अपने चारों और अपने स्वार्थों का एक घेरा बना रखा है तथा इस घेरे या उसके क्षुद्र स्वार्थों को नुकसान पहुंचाने वाला हर आदमी उसका शत्रु है। इस देश में अपनी जातिगत गौरव गाथा गाने वाले इतने जातिगत व धार्मिक सामाजिक संगठन है जिनको शायद गिनना भी संभव नहीं होगा लेकिन दुर्भाग्य है कि वे महापुरुष जो राष्ट्र के लिए एक होकर लड़े उनको भी इन कम्बख्तों ने अपने स्वार्थ के अनुरुप बांट दिया । आज कहीं भी अखिल भारतीय समाज नाम की कोई संस्था नही है क्योंकि सभी ने अपने आपको कई सांचों में बांट लिया है तथा सभी के अपने अपने हित हैं जिनके लिए वे लड़ रहे है उनकी तरफ से देश भले गर्त में जाए कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन उन्हें यह पता नही कि जब तक यह देश अखंड एवं सुरक्षित है तभी तक उनका या उनके समाज का अस्तित्व है: आज की युवा पीढ़ी को एक अदद नौकरी और सुख सुविधा युक्त घर से अधिक सोचने की जरूरत महसूस नहीं होती देश के विषय में या अपनी सभ्यता संस्कृति के बारे में मनन करने का कोई औचित्य नहीं हैं अपने घर की बनी रोटी भी यदि विदेशी पेकिंग में दी जाती है तो खुशी होती है। आज कमोबेश हर दूसरा आदमी मानसिक गुलामी के दौर से गुजर रहा है राष्ट्र छद्म अराजकता के वातावरण से गुजर रहा है। क्या यही स्वतंत्रता है? विकास के नाम पर अपने स्वाभिमान, राष्ट्रीय संस्कृति को भूलाना तथा भौतिकता के चकाचौंध में प्राकृतिक संसाधनों का बंदरबांट कर देश को रसातल की और ले जाना, क्या आजादी का यही मतलब है?

आज के दौर की तुलना भारत के राजपूतकालीन समय से की जा सकती है जब भारत कई छोटी- छोटी रियासतों में बंटा हुआ था तथा ये रियासतें छुद्र स्वार्थों की पूर्ती हेतु आपस में लड़ती रहती थीं। विलासिता एवं अकर्मण्यता की पर्याय बन चुकी ये रियासतें अंदर से जर्जर हो चुकी थी।परिणामस्वरूप ये रियासतें कमजोर होती गईं विदेशी आक्रांताओं ने अपनी हवस एवं बेलगाम क्षुधा की पूर्ति हेतु इसा पावन धरा को कलुषित किया ताकत का एक बड़ा भाग भारतीय समाज कई बुराईयों जैसे छुआछुत, उच्श्रंखल जातिवाद , संप्रदायवाद इत्यादि में जकड़ा हुआ था तो क्या आज कमोबेश हमारे सामने वही परिदृश्य नहीं दिखाई दे रहा है। किसी ने क्या खूब कहा है कि इतिहास अपनी पुनरावृत्ति करता है पर क्या इतने कम अंतराल पर और क्या हम इससे सीख लेने के बजाय इसकी पुनरावृति होने देंगें। आज ये छोटे-छोटे राज्य जो कि नदी के पानी, भाषा, खनिजों के आधिपत्य के लिए न्यायालय में हाजिरी दे रहे हैं और सैकड़ों पार्टियां जो क्षुद्र स्वार्थों के लिए जनता को सब्ज बाग दिखा कर उनका वोटा हासिल कर रही हैं तत्पश्चात उसी जनता का शोषण तो क्या ये आजादी और उससे भी पूर्व अंग्रेजों के आगमन के समय का परिदृश्य प्रस्तुत नहीं कर रही है तथा जनता लाचार कई मतभेदों में उलझी हुई निरिह बनी सब कुछ सहने को विवश है।अगर इसी का नाम आजादी है तो वह दिन दूर नहीं जब इस देश के गद्दार इस देश की अमूल संपदा के साथ-साथ यहां के कथित मतदाताओं के भविष्य का भी किसी विदेशी के हाथों सौदा कर दें तथा बाद में कहें कि जीडीपी बढ़ाने के लिए यह जरूरी था।
जिस देश के पड़ोसी ताकतवर, कूटनीतिक एवं साम्राज्यवादी हों उस देश का राजनैतिक व नैतिक पतन की ओर अग्रसर होना उसके दुश्मनों के मार्ग को और सुगम बना देता है तथा वह देश बिना किसी युद्ध के ही गुलाम बनाया जा सकता है क्योंकि किसी देश का नेतृत्व ही उस देश की समृद्धि और ताकत का आईना होता है जिसमें उस देश की बाकी आवाम की झलक देखी जा सकती है।

संजय मिश्र “सदांश”

नोट: यह रचना किसी विशेष वर्ग, समुदाय या व्यक्ति विशेष पर आधारित नहीं है, न ही हमारा उद्देश्य किसी के दिल को ठेस पहुंचाना है । यह लेख पूर्ण रुप से मां भारती को समर्पित है। यदि कोई तथ्य किसी से मिलता है तो यह संयोग मात्र होगा।


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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

http://wp.me/p3gkW6-1dk

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

http://wp.me/p3gkW6-mn

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

http://wp.me/p3gkW6-1ep

 

 

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Meditation – Experiencing My Original Home

kmsraj51 की कलम से…..

Soulword_kmsraj51 - Change Y M T

Meditation – Experiencing My Original Home (Part 1)

06-om

 

 

 

 

 

 

 

In meditation, I focus my mind and intellect on that region which is called by names like soul world, paramdham, nirvandham, shantidham and so on. In fact, this is the region where the soul stays, when it has no body. Here the soul stays in the form of a star-like point of light, untouched by matter (five elements including the body). In this world, there exists neither thought, word nor action; just complete stillness, sweet silence and peace. When I first take a physical body, it is from here that I the soul come down into the material world i.e. the earth, which is the field of action.

With the practice of meditation, my third eye (eye of the mind) opens; and I see and experience my original home as an infinite (very large, unmeasurable) world of very subtle (light) golden-red light, situated beyond the physical world of five elements, beyond the sun, moon and stars.


 

Meditation – Experiencing My Original Home (Part 2)

Along with reading over the following words slowly and silently, make a sincere effort to create images of them in the eye of your mind:

I focus myself on the self, the soul, a golden point of light……..
I stay between the eyebrows in the middle of the forehead……..
I radiate golden rays of peace, purity and love in all directions……..
In this awareness of I the soul, with the power of my mind I can travel beyond the limits of my physical organs……..
I visualize myself gradually going out from this physical body……..
I, the sparkling star like energy, fly into the night sky……..
I see myself floating above thousands of buildings and lights……..
Slowly I rise higher and higher to enter space……..
I am surrounded by millions of stars and planets……..
Slowly I see myself flying beyond the world of five elements……..
I, the golden star, enter another world, a soft golden-red light world……..
A world of sweet silence and peace……..
full of peaceful light stretching very very far away……..
I feel pure warmth here, surrounded by light……..
I the point of light shine in this sixth element……..
I am free of all tensions, extremely light………
This is where I belong,
This is my home……..
I recognize this place……..
I had forgotten it, but now I have rediscovered it……..
Spend a few minutes in this positive experience and then gradually come downwards to take your seat back in the physical body.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

brahmakumaris-kmsraj51

 

Note::-

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love-rose-kmsraj51Picture Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

Book-Red-kmsraj51

 

 

 

100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए –

 

(100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

 

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

Soulword_kmsraj51 - Change Y M T

“सफल लोग अपने मस्तिष्क को इस तरह का बना लेते हैं कि उन्हें हर चीज सकारात्मक व खूबसूरत लगती है।”
-KMSRAJ51

“हमारी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपने जीवन का कुछ सेकंड, प्रतिघंटा और प्रतिदिन कैसे बिताते हैं”
-KMSRAJ51

-A Message To All-

मत करो हतोत्साहित अपने शब्दों से ……आने वाली नयी पीढ़ी को ,
वो भी करेंगे कुछ ऐसा एक दिन…. जिसे देखेगा ज़माना ….पकड़ती हुई नयी सीढ़ी को ॥

कुछ भी आप के लिए संभव है ॥

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

~kmsraj51

95+ देश के पाठकों द्वारा पढ़ा जाने वाला हिन्दी वेबसाइट है,, –

https://kmsraj51.wordpress.com/

मैं अपने सभी प्रिय पाठकों का आभारी हूं…..  I am grateful to all my dear readers …..

“तू न हो निराश कभी मन से” book

~Change your mind thoughts~

@2014-all rights reserve under kmsraj51.

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06-om

“प्रेरणादायक हिन्दी उद्धरण और विचार”

Coming Soon Public Book …..

“तू ना हो निराश कभी मन से”
baby-TU NA HO NIRASH KABHI MAN SE

Some Topic of “तू ना हो निराश कभी मन से”

Change your mind thoughts “अपने मन के विचारों को बदलें”

“सफल लोग अपने मस्तिष्क को इस तरह का बना लेते हैं कि उन्हें हर चीज सकारात्मक व खूबसूरत लगती है।”

“हमेशा अपनी आत्मा की पहली आवाज सुनो”

“प्रत्येक कार्य आत्मा की पहली आवाज के अनुसार करो”

“एक अच्छा दिमाग हमेशा जानने के लिए उत्सुक …..”

“कुछ भी आप के लिए संभव है”

“ज्ञान हमेशा शुद्ध और पूरा हो”

“खुशी और सफल जीवन का मार्ग”

“अपने जीवन में निराशाजनक कुछ भी नहीं”

“अपने जीवन में हमेशा सफलता के निकटतम …..

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kmsraj51 की कलम से …..
Indian Flag

“विचार से कार्य की उत्पत्ति होती है, कर्म से आदत की उत्पत्ति होती है और चरित्र से आपके भाग्य की उत्पत्ति होती है।”
– बौद्ध कहावत

“हर सुबह मैं अपनी आँखे खोलता हूँ उस भविष्य को सँवारने के लिए जो मेरे लिए खास है। हर रात मैं अपनी आँखे बंद कर लेता हूँ और देखता हूँ कि मेरा लक्ष्य थोड़ा और मेरे पास है।”
-kmsraj51

“सफल लोग अपने मस्तिष्क को इस तरह का बना लेते हैं कि उन्हें हर चीज सकारात्मक व खूबसूरत लगती है।”
-kmsraj51

“असल में सफल लोग अपने निरंतर विश्वास से जीतते हैं लेकिन वे असफलताओं का मुकाबला भी उसी विश्वास से करते हैं। सफलता के लिए विश्वास पैदा कीजिये। असफल होने पर भी उस विश्वास को कायम रखिये।”
-kmsraj51

“सफल व्यक्ति सकारात्मक ढंग से प्रशंसा करते हैं और हँसी मजाक पर बुरा नहीं मानते। वे उत्साह फैलाते हैं। उनकी सकारात्मकता चारो तरफ़ फैलती है और उसकी खुशबु हर जगह बिखरती रहती है।”
-kmsraj51

“सफल लोग सबकी परवाह करते हैं। उनका यह लिहाज भी उन्हें दूसरों से अलग बनाता है।”
-kmsraj51

“प्रयासों को प्रोत्साहित कीजिये। तुम मुझे प्रोत्साहित करो, में तुम्हें कभी नहीं भूलूंगा।”
-kmsraj51

“बदलती मनः स्थिति ही एक स्वस्थ व रचनाशील व्यक्तित्त्व की निशानी है।”
-kmsraj51

“प्रयास करें अपने मन के छिद्रों को पहचान कर उन्हें भरने का”
-kmsraj51

“सोचें और लिखें : मेरी विशेषताएँ बदलाव की आवश्यकता मैं कैसे बदलाव करना चाहता हूँ जीवन में।”
-kmsraj51

“हम जो भी हैं, जो कुछ भी करते हैं, वह तभी होता है जब हम उसे वास्तव में करना चाहते हैं।”
-kmsraj51

जहाज समंदर के किनारे सर्वाधिक सुरक्षित रहता है। मगर क्या आप नहीं जानते कि उसे किनारे के लिए नहीं, बल्कि समंदर के बीच में जाने के लिए बनाया गया है ?
-kmsraj51

“हमारी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपने जीवन का कुछ सेकंड, प्रतिघंटा और प्रतिदिन कैसे बिताते हैं”
-kmsraj51

“जिसने अपने को वश में कर लिया है, उसकी जीत को देवता भी हार में नहीं बदल सकते”
– महात्मा बुद्ध

“अपनी सृजनात्मकता को तराशते रहिये।”
-kmsraj51

“सफलता सार्वजनिक उत्सव है, जबकि असफलता व्यक्तिगत शोक।”
-kmsraj51

“एकाग्र रहने वाला सदा सफलता का वरण करता है”
-kmsraj51

“कोई भी काम एक दिन में नहीं सफल होता। काम एक पेड़ की तरह होता है। पहले उसकी आत्मा में एक बीज बोया जाता है, हिम्मत की खाद से उसे पोषित किया जाता है और मेहनत के पानी से उसे सींचा जाता है, तब जाकर सालों बाद वह फल देने के लायक होता है”
-kmsraj51

“सफलता के लिए इन्तजार करना आना चाहिए। पौधे से फल की इच्छा रखना मूर्खता से अधिक कुछ भी नही है”
-kmsraj51

“असफलता सफलता प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपने मस्तिष्क को अपना रास्ता स्वयं खोजने की शक्ति दीजिये।
मेहनत कीजिये लेकिन बिना योजना के नहीं”
-kmsraj51

“आकांक्षा क्षणिक नहीं होती, न ही उन्मादी होती है। आवेग कहता है,- रुको मत, चलते रहो। ढ्लो मत, निखरते रहो।”
-kmsraj51

“किसी से अत्यधिक नफ़रत करने का सबसे बुरा असर यह होता है कि आप भी उस व्यक्ति की तरह बनने लगते है।”
– kmsraj51

“ये जरुरी बात नहीं है कि जो लोग आपके सामने आपके बारे में अच्छा बोलते है, वह आपके पीछे भी आपके बारे में यही राय रखते हों।”
-kmsraj51

“जीवन में जोश इस भावना से आता है कि आप उस काम का हिस्सा है जिसमें आप विश्वास रखते है, कुछ ऐसा जो अपने आप से भी बड़ा है।”
-kmsraj51

“अपने गुणों पे घमंड के कारण, व्यक्ति दूसरों के अवगुणों को देखता है और दूसरों के अवगुणों को देख कर, व्यक्ति का घमंड और अधिक मजबूत हो जाता है।”
-kmsraj51

“जब आप एक कठिन दौर से गुजरते हैं, जब सब कुछ आप का विरोध करने लगता है, जब आपको लगता है कि आप एक मिनट भी सहन नहीं कर सकते हैं, कभी हार न माने ! क्योंकि यही वह समय और स्थान है जब आपका अच्छा समय शुरू होगा”
-रूमी

“अगर आप उम्मीद नहीं करेंगे तो आप वह हासिल नहीं कर पाएंगे जो उम्मीद से ज्यादा है। ”
-kmsraj51

“जीवन में कभी भी आशा को न छोड़े क्योंकि आप कभी यह नहीं जान सकते कि आने वाला कल आपके लिए क्या लाने वाला है”
-kmsraj51

“असफलताएँ जीवन का एक हिस्सा है, अगर आप कभी असफल नहीं होंगे तो आप कभी सीखेगें नहीं। जब आप सीखेगें नहीं, परिणाम सवरूप आप में बदलाब नहीं आएगा और न ही आप नई चीज़े सीख पाएंगे ।”
-kmsraj51


“सभी शक्ति तुम्हारे भीतर है, आप उस में विश्वास कर सकते हैं”
-kmsraj51

“हर स्कूल अपने छात्रों के चरित्र में परिलक्षित हो जाता है”
-kmsraj51

“जो तुम्हारी बात सुनते हुए इधर-उधर देखे, उस पर कभी विश्वास न करो”
-चाणक्य

“मेरा ‘डर’ मेरा ही एक हिस्सा है और शायद सबसे सुंदर हिस्सा”
-फ्रांज़ काफ्का”

“जीवन में सफल होना इस लिए भी मुश्किल है कि ज्यादातर लोग आपको आगे बढ़ाने की जगह पीछे खींचना पसंद करते है”
-kmsraj51

“जब ये आपका अपना जीवन है तो आप इसको अपने तरीके से क्यों नहीं जी रहे है”
-kmsraj51

“जिंदगी कितनी खुबसूरत है ये देखने के लिए हमें ज्यादा दूर जाने की जरुरत नहीं है, जहाँ हम अपनी आंखे खोल ले वहीँ हम इसे देख सकते है”
-kmsraj51


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सिक्किम विश्वविद्यालय, गंगटोक, सिक्किम
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तेजपुर विश्वविद्यालय, नापाम, तेजपुर, असम
http://www.tezu.ernet.in

त्रिपुरा विश्वविद्यालय, सूर्यमणिनगर, त्रिपुरा (पश्चिम)
http://www.tripurauniv.in/

विश्व भारती, बिरभुम, पश्चिम बंगाल
http://www.visva-bharati.ac.in

डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, म.प्र.
http://www.dhsgsu.ac.in/

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
http://www.ggu.ac.in

हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर, उत्तराखण्ड
http://hnbgu.ac.in/

फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची
नकली विश्वविद्यालय की राज्यवार सूची
http://www.ugc.ac.in/page/Fake-Universities.aspx

स्कूल/विद्यालयीन शिक्षा
स्कूल रिपोर्ट कार्ड
http://schoolreportcards.in

स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग
http://mhrd.gov.in/schooleducation

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड
http://cbse.nic.in

केन्द्रीय विद्यालय संगठन
http://kvsangathan.nic.in

नवोदय विद्यालय समिति
http://www.navodaya.nic.in/

परमाणु ऊर्जा शिक्षण संस्था
http://www.aees.gov.in

तकनीकी शिक्षा विभाग
तकनीकी शिक्षा
http://mhrd.gov.in/technical_edu_hindi

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद
http://www.aicte-india.org/

छात्रवृत्ति एवं शिक्षा ऋण
राष्ट्रीय प्रतिभा खोज (National Talent Search)
http://www.ncert.nic.in/programmes/talent_exam/index_talent.html

किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना (KVPY)
http://www.kvpy.org.in

छात्रवृत्ति एवं शिक्षा ऋण
http://education.nic.in/scholarship/scholarship.asp

J N Tata Endowment (विदेश में उच्च शिक्षा के लिए)
http://www.dorabjitatatrust.org

CENTRE FOR THE STUDY OF CULTURE AND SOCIETY
http://cscs.res.in/fellowships

भारत की अन्य छात्रवृत्तियों की सूची
http://www.scholarshipsinindia.com/
http://www.dst.gov.in/whats_new/advertisements.htm

सर रतन टाटा ट्रस्ट
http://www.srtt.org

राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र
राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं सूचना स्रोत संस्थान (NISCAIR)
http://www.niscair.res.in

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST)
http://dst.gov.in

विज्ञान प्रसार
http://www.vigyanprasar.gov.in/sitenew/

विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय परिषद (NCSTC)
http://dst.gov.in/scientific-programme/s-t_ncstc.htm

राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (National Council of Science Museums)
http://www.ncsm.gov.in

विज्ञान अकादमी
भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, नई दिल्ली
http://insaindia.org/index.php

भारतीय विज्ञान अकादमी, बेंगलौर
http://www.ias.ac.in

राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, इलाहाबाद
http://nasi.nic.in

हिन्दी भाषा में कार्यरत संस्थाएं
केंद्रीय हिन्दी संस्थान, अगरा
http://www.hindisansthan.org/hi/index.htm

राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, मैसूर
http://www.ntm.org.in

भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर
http://www.ciil.org

शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाएं/गैर सरकारी संगठन (NGO)
एकलव्य
http://eklavya.in

नवनिर्मिति

http://www.navnirmiti.org

दिगंतर
http://www.digantar.org

विक्रम ए साराभाई कम्मुनिटी साइंस सेंटर
http://www.vascsc.org

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट
http://www.dorabjitatatrust.org/

ईस्ट एण्ड वेस्ट एजुकेशनल सोसायटी
http://www.eastwestindia.org

प्रथम
http://www.pratham.org/

अक्षरा
http://www.akshara.org.in/

अजीम प्रेमजी फॉउण्डेशन
http://www.azimpremjifoundation.org/

सेन्टर फॉर एन्वायरमेन्ट एजुकेशन
http://www.ceeindia.org/cee/index.html

मुस्कान
http://www.muskan.org/

idiscoveri
http://www.idiscoveri.com/

मराठी विज्ञान परिषद्
http://www.mavipamumbai.org/

कृष्णमूर्ती फॉउण्डेशन
http://www.kfionline.org/

सेन्टर फॉर लर्निंग
http://www.cfl.in/

Jidnyasa Trust Thane
http://www.jidnyasa.org.in/

ग्राम मंगल
http://www.grammangal.org/

EnviroVigil
http://envirovigil.org/Homepage.html

डोरस्टेप स्कूल
http://www.doorstepschool.org/

विज्ञान आश्रम
http://www.vigyanashram.com/

अगस्तय फॉउन्डेशन
http://www.agastya.org/

नवनिर्मिति
http://www.navnirmiti.org/

मुक्त आंगन विज्ञान शोधिका (पुलस्तय) IUCAA’s Children’s Science Centre
http://www.iucaa.ernet.in/~scipop/Pulastya/index.html

विनिमय
http://www.vinimaytrust.org/

हिन्दी विज्ञान/साहित्यिक पत्रिकाएँ
कविता कोश
http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=कविता_कोश_मुखपृष्ठ

संदर्भ – शिक्षा की त्रैमासिक पत्रिका (एकलव्य)
http://www.eklavya.in/go/index.php?option=com_content&task=category&sectionid=13&id=51&Itemid=72

स्रोत (एकलव्य)
http://eklavya.in/go/index.php?option=com_content&task=category&sectionid=13&id=56&Itemid=81

चकमक (एकलव्य)
http://eklavya.in/go/index.php?option=com_content&task=category&sectionid=13&id=57&Itemid=84

भारत-दर्शन, हिन्दी साहित्यिक पत्रिका
http://www.bharatdarshan.co.nz

वागर्थ हिन्दी मासिक पत्रिका
http://www.bharatiyabhashaparishad.com

अनुभूति
http://www.anubhuti-hindi.org

अभिव्यक्ति
http://www.abhivyakti-hindi.org

अन्यथा
http://www.anyatha.com

हिन्दी नेस्ट डॉट कॉम
http://hindinest.com

शिक्षा विमर्श
http://www.digantar.org/vimarsh

हिन्दी चेतना (कनाडा)
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गीता-कविता
http://www.geeta-kavita.com/Default.asp

हिन्दी मुक्त ज्ञानकोष (Hindi Wikipedia)
हिन्दी मुक्त ज्ञानकोष (wikipedia)
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हिन्दी विकि-शब्दकोश
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इंटरनेट पर हिन्दी के साधन
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सन् 1600 बनाम सन् 2014 – 40 ~ Year 1600 vs. Year 2014 – 40 !!

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kmsraj51 की कलम से …..
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** सन् 1600 बनाम सन् 2014-40 ….. **

वर्तमान दौर चाहे वह राजनीति का हो या आर्थिक या फिर इस देश के चिर-संस्कारों से निर्मित नैतिक मूल्यों का ये सभी एक बहुत ही भयावह दौर से गुजर रहे हैं शायद कुछ लोग जो विद्वता के धनी है इसे संक्रमण काल के नाम से भी जानते हैं तो कुछ लोग इसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोगवाद कह रहे हैं लेकिन यह समय मात्र और मात्र एक सच्चे भारतीय जो इसकी अखंडता एवं गौरवमयी इतिहास से थोड़ा भी सरोकार रखता है, के लिए बहुत ही विषम एवं चिंताजनक है स्पष्ट रुप में कहें तो बहुत ही भयावह है।
इतिहास गवाह है कि इस देश की मिट्टी इतनी उपजाऊ है कि इसने एक से एक संस्कारी महापुरुष तथा देशभक्त पैदा किए हैं लेकिन यह इस मिट्टी का दुर्भाग्य है कि विनाशकारी खरपतवार के रुप में यहां जयचंदों ने भी जन्म लिया है तथा इस पावन धरा को कलंकित किया है। आज का भारत भी इसी दौर से गुजर रहा है जहां ख्ररपतवार इतना बढ़ गया है कि अब पोषक फसलें नज़र ही नहीं आती और यह स्थिती केवल राजनीति ही नहीं कमोबेश हर क्षेत्र की हैं। इसका मात्र और एक मात्र कारण हमारे चिर-संस्कारों एवं मूल्यों का ह्रास होना है। मूल्यों एवं आदर्शों का प्रवाह सदैव शीर्ष से होता है और कहा भी है कि यथा राजा-तथा प्रजा लेकिन आज अपने क्षुद्र स्वार्थों की पूर्ति के लिए हमारे देश के कर्णधार नेतृत्व कर्ताओं ने इस उक्ति को ही बदल दिया और बयान दिया कि जैसी जनता है वैसे ही नेतृत्व कर्ता बनेंगे अर्थात ये लोग जनता के इच्छानुसार ही अपने हित साधन के लिए सारे अपराध एवं भ्रष्ट तंत्र को बढ़ावा दे रहे हैं। आखिर वो कौन सी प्रजा या जनता है जिसने राजा को भ्रष्ट एवं डकैत बनने के लिए जनादेश दिया? शायद इसका उत्तर यह है कि इस देश में जनता या नागरिक नाम की कोई व्यवस्था अब अस्तित्व में ही नहीं है यहां केवल उपभोक्तावादी संस्कृति के पोषक मतदाता रहते हैं जिन्हें कोई भी खरीद सकता है तथा ये तथाकथित मतदाता भोली चिड़ियाओं की भांति किसी भी बहेलिए के जाल में फंसने को आतुर है। फिर चाहे वह बहेलिए देशी हो या विदेशी इससे इनको कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि लालच ने संवेदनाओं को मृत प्राय: कर दिया है। इन चिड़ियाओं को स्वतंत्र आसमान से बेहतर सुख-सुविधा युक्त वो स्वप्निल सोने का पिंजड़ा अधिक रास आने लगा है जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं और जो मात्र और मात्र एक छलावा भर है।

आज इस देश की जनता को देश के प्रोफाईल से अधिक अपना हाई प्रोफाईल प्रिय है कमोबेश आज हमारा देश गुलामी से पहले के उसी दौर से गुजर रहा हैं। जनता विभिन्न मुद्दों पर आपस में बंटी हुई है चाहे वो आरक्षण का मुद्दा हो या राज्यवाद या फिर धर्म या जातिवाद का चारों और विघटनकारी शक्तियों का बोलबाला हैं हर आदमी ने अपने चारों और अपने स्वार्थों का एक घेरा बना रखा है तथा इस घेरे या उसके क्षुद्र स्वार्थों को नुकसान पहुंचाने वाला हर आदमी उसका शत्रु है। इस देश में अपनी जातिगत गौरव गाथा गाने वाले इतने जातिगत व धार्मिक सामाजिक संगठन है जिनको शायद गिनना भी संभव नहीं होगा लेकिन दुर्भाग्य है कि वे महापुरुष जो राष्ट्र के लिए एक होकर लड़े उनको भी इन कम्बख्तों ने अपने स्वार्थ के अनुरुप बांट दिया । आज कहीं भी अखिल भारतीय समाज नाम की कोई संस्था नही है क्योंकि सभी ने अपने आपको कई सांचों में बांट लिया है तथा सभी के अपने अपने हित हैं जिनके लिए वे लड़ रहे है उनकी तरफ से देश भले गर्त में जाए कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन उन्हें यह पता नही कि जब तक यह देश अखंड एवं सुरक्षित है तभी तक उनका या उनके समाज का अस्तित्व है: आज की युवा पीढ़ी को एक अदद नौकरी और सुख सुविधा युक्त घर से अधिक सोचने की जरूरत महसूस नहीं होती देश के विषय में या अपनी सभ्यता संस्कृति के बारे में मनन करने का कोई औचित्य नहीं हैं अपने घर की बनी रोटी भी यदि विदेशी पेकिंग में दी जाती है तो खुशी होती है। आज कमोबेश हर दूसरा आदमी मानसिक गुलामी के दौर से गुजर रहा है राष्ट्र छद्म अराजकता के वातावरण से गुजर रहा है। क्या यही स्वतंत्रता है? विकास के नाम पर अपने स्वाभिमान, राष्ट्रीय संस्कृति को भूलाना तथा भौतिकता के चकाचौंध में प्राकृतिक संसाधनों का बंदरबांट कर देश को रसातल की और ले जाना, क्या आजादी का यही मतलब है?

आज के दौर की तुलना भारत के राजपूतकालीन समय से की जा सकती है जब भारत कई छोटी- छोटी रियासतों में बंटा हुआ था तथा ये रियासतें छुद्र स्वार्थों की पूर्ती हेतु आपस में लड़ती रहती थीं। विलासिता एवं अकर्मण्यता की पर्याय बन चुकी ये रियासतें अंदर से जर्जर हो चुकी थी।परिणामस्वरूप ये रियासतें कमजोर होती गईं विदेशी आक्रांताओं ने अपनी हवस एवं बेलगाम क्षुधा की पूर्ति हेतु इसा पावन धरा को कलुषित किया ताकत का एक बड़ा भाग भारतीय समाज कई बुराईयों जैसे छुआछुत, उच्श्रंखल जातिवाद , संप्रदायवाद इत्यादि में जकड़ा हुआ था तो क्या आज कमोबेश हमारे सामने वही परिदृश्य नहीं दिखाई दे रहा है। किसी ने क्या खूब कहा है कि इतिहास अपनी पुनरावृत्ति करता है पर क्या इतने कम अंतराल पर और क्या हम इससे सीख लेने के बजाय इसकी पुनरावृति होने देंगें। आज ये छोटे-छोटे राज्य जो कि नदी के पानी, भाषा, खनिजों के आधिपत्य के लिए न्यायालय में हाजिरी दे रहे हैं और सैकड़ों पार्टियां जो क्षुद्र स्वार्थों के लिए जनता को सब्ज बाग दिखा कर उनका वोटा हासिल कर रही हैं तत्पश्चात उसी जनता का शोषण तो क्या ये आजादी और उससे भी पूर्व अंग्रेजों के आगमन के समय का परिदृश्य प्रस्तुत नहीं कर रही है तथा जनता लाचार कई मतभेदों में उलझी हुई निरिह बनी सब कुछ सहने को विवश है।अगर इसी का नाम आजादी है तो वह दिन दूर नहीं जब इस देश के गद्दार इस देश की अमूल संपदा के साथ-साथ यहां के कथित मतदाताओं के भविष्य का भी किसी विदेशी के हाथों सौदा कर दें तथा बाद में कहें कि जीडीपी बढ़ाने के लिए यह जरूरी था।
जिस देश के पड़ोसी ताकतवर, कूटनीतिक एवं साम्राज्यवादी हों उस देश का राजनैतिक व नैतिक पतन की ओर अग्रसर होना उसके दुश्मनों के मार्ग को और सुगम बना देता है तथा वह देश बिना किसी युद्ध के ही गुलाम बनाया जा सकता है क्योंकि किसी देश का नेतृत्व ही उस देश की समृद्धि और ताकत का आईना होता है जिसमें उस देश की बाकी आवाम की झलक देखी जा सकती है।

संजय मिश्र “सदांश”

नोट: यह रचना किसी विशेष वर्ग, समुदाय या व्यक्ति विशेष पर आधारित नहीं है, न ही हमारा उद्देश्य किसी के दिल को ठेस पहुंचाना है । यह लेख पूर्ण रुप से मां भारती को समर्पित है। यदि कोई तथ्य किसी से मिलता है तो यह संयोग मात्र होगा।

** Important Note:: यह लेख संजय मिश्रा द्वारा शेयर किया गया है !! https://kmsraj51.wordpress.com/ **
पर ** दिल से धन्यवाद संजय भाई !! **
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** संजय मिश्रा **

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जीवन में सबसे कठिन दौर यह नहीं है जब कोई तुम्हें समझता नहीं है, बल्कि यह तब होता है जब तुम अपने आप को नहीं समझ पाते.

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तुम्हारे न रहने पर
थोड़ा-थोड़ा करके
सचमुच हमने पूरा खो दिया तुम्हें
पछतावा है हमें
तुम्हें खोते देखकर भी
कुछ भी नहीं कर पाये हम,
अब हमारी ऑंखें सूनी हैं,
जिन्हें नहीं भर सकतीं
असंख्य तारों की रोशनी भी
और न ही है कोई हवा
मौजूद इस दुनिया में
जो महसूस करा सके
उपस्‍थिति तुम्हारी,
एक भार जो दबाये रखता था
हर पल हमारे प्रेम के अंग
उठ गया है, तुम्हारे न रहने से
अब कितने हल्के हो गये हैं हम
तिनके की तरह पानी में बहते हुए ।

Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!!

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Thank`s & Regard`s

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Krishna Mohan Singh51(कृष्ण मोहन सिंह51)
Spiritual Author Cum Spiritual Guru
Always Positive Thinker Cum Motivator
Sr.Administrator (IT-Software, Hardware & Networking)
ID: kmsraj51@yahoo.in
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