Cleaning Up The Cupboards Of Your Mind

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT08

ϒ Cleaning Up The Cupboards Of Your Mind ϒ

When you are capable of relaxing, controlling your thought patterns and concentrating, you can reach deeper and more subtle states of meditation from which you connect with your inner potential for peace and purest love (the positive) and on the other hand, you clean out unnecessary memories (the negative). You reach the spiritual power that allows you to transform habits that are not very healthy and the beliefs that sustain them. Out of love and peace you can purify and clear the turbulent (rough) waters that there are at times in the subconscious. When you meditate, you review whether there is something that has influenced you and you clean it out, so that only the highest, the most positive, the most beautiful, remains inside you and comes out of you. Meditation and reflection help you to clean out the register that, from the subconscious, brings about inadequate thoughts and uncontrolled emotions. Cleansing (cleaning up) in depth requires a clear purpose, being prepared to let go of the past; cleansing the wounds and pain accumulated in the store of your inner being; facing the present with dignity, with wisdom and visualizing, with confidence and trust, a future full of positivity.

The first thing that meditation teaches us is to cleanse (clean up) the mind of the useless thoughts that it creates in the present moment. While your mind identifies with these kinds of thoughts and sees them as absolutely normal, it will not be able to concentrate. And if it cannot concentrate, it will not be able to cleanse in depth. Meditation helps you to live through that inner process without pain. From a space of love, experienced in meditation, you feel secure in order to open up the cupboards of your subconscious mind. Do not open them before commencing (beginning) the practice of meditation, because the accumulated pain can be overwhelming and the loneliness experienced, when you see what you find inside, can terrify you. Because you are alone, with yourself, with your past and with your present and you are alone here, with your inner cupboards and your files. In the silence of contemplative meditation you feel a divine energy accompanying you which helps you overcome this fear of loneliness. You feel embraced by the energy and the presence of unconditional love, which it showers on you – it accepts you as you are, which makes the cleaning up process easier.

Message 

The method to finish waste thoughts is to deal with the mind with love.

Expression: When there are waste thoughts in the mind which one tries to stop, it becomes difficult to do that. There is discomfort and difficulty experienced. On the other hand, when the mind is taught to take the right direction with love, there is a quick and dramatic change.

Experience: When I learn the art of speaking to my mind with love, I am able to free myself from waste thoughts without any feelings of suppression. Concentration too becomes easy and all thoughts are directed towards the right direction.

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

 

 

 

 

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बचपन के दिन ही थे बहुत अच्छे।

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KMSRAJ51-CYMT

ϒ बचपन के दिन ही थे बहुत अच्छे। ϒ

याद आते है वाे बचपन के दिन।
जब हम छाेटे थे ताे बडे हाेने के लिये॥

बहुत उत्साहित रहते थे।
बडे हाेने की बहुत चाहत थी॥

जब बडे हुये ताे पता चला कि।
बचपन के दिन ही थे बहुत अच्छे॥

माँ का प्यार पिता का दुलार।
ना रिश्ताे का झंझट ना कल की चिंता॥

ना आज की फ़िक्र, ना ही भविष्य का डर।
ना अधूरे सपनाे का दुँख, ना अधूरे एहसास, का॥

पीछे मुड़ कर देखा ताे दूर है सब अपने।
जिंदगी ने हमें कहा से कहा पहुँचा दिया॥

ना जाने हम क्यों बडे हाे गये।
इस से ताे बचपन के दिन ही थे बहुत अच्छे॥

अब ताे है टूटे सपने अधूरे एहसास।
रिश्ते नाताे का दुँख और हर पल निभाते जायाे दुनियादारी॥

∅- विमल गांधी ∇
Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता साझा करने के लिए।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51

 

 

हमारा अच्छा व्यवहार ही जीवन का निर्माण करता है।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

balloon seller by Urmi Patel (Om drawing classes)

बैलोन-विक्रेता।

हमारा अच्छा व्यवहार ही जीवन का निर्माण करता है।

एक आदमी गुब्बारे बेच कर जीवन-यापन करता था। वह गांव के आस-पास लगने वाली हाटों में जाता और गुब्बारे बेचता। बच्चों को लुभाने के लिए वह तरह-तरह के गुब्बारे रखता। और जब कभी उसे लगता कि बिक्री कम हो रही है, वह झट से एक गुब्बारा हवा में छोड़ देता। यह देखकर बच्चे खुश हो जाते और गुब्बारे खरीदने के लिए पहुंच जाते।

एक दिन वह हाट में गुब्बारे बेच रहा था और बिक्री बढ़ाने के लिए बीच-बीच में गुब्बारे उड़ा रहा था। पास ही खड़ा एक छोटा बच्चा यह सब बड़ी जिज्ञासा से देख रहा था। इस बार जैसे ही गुब्बारे वाले ने एक सफेद गुब्बारा उड़ाया वह तुरंत उसके पास पहुंचा और मासूमियत से बोला,’अगर आप यह काला वाला गुब्बारा छोड़ेंगे तो क्या वह भी ऊपर जाएगा?’

गुब्बारा वाले ने अचरज के साथ उसे देखा और बोला, ‘बिलकुल जाएगा। गुब्बारे का ऊपर जाना इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह किस रंग का है, निर्भर इस पर करता है कि उसके अंदर क्या है।’

ठीक इसी तरह हम इंसानों पर भी यह बात लागू होती है। कोई अपने जीवन में क्या हासिल करेगा, यह उसके बाहरी रंग-रूप पर निर्भर नहीं करता। बल्कि इस पर निर्भर करता है कि उसके अंदर क्या है। हमारा व्यवहार ही हमारा जीवन निर्माण करता है।

एक बूढ़े किसान को सामान ढोने के लिए गधे की जरूरत थी। वह कुम्हार के पास गधा मांगने के लिए गया। कुम्हार गधा नहीं देना चाहता था। उसने कहा- ‘गधा चरने के लिए गया है और रात को देरी से आएगा। गधा यहां होता तो मुझे देने में खुशी होती। पड़ोसी के काम पड़ोसी नहीं तो क्या परदेसी आएगा।’ दोनों के बीच बातचीत का क्रम चल ही रहा था कि बाड़े में बंधे गधे ने एक लंबा आलाप लिया। किसान ने कहा- ‘गधा तो भीतर बंधा है, तुम बहाना बनाने की बजाय सीधे मना कर देते तो मुझे बुरा नहीं लगता।’ कुम्हार ने हंसते हुए कहा- ‘तुम भी अजीब आदमी हो। तुम्हें आदमी की जबान से गधे की जबान पर ज्यादा भरोसा है।’ किसान ने सरलता से कहा- ‘झूठ बोलने वाले आदमी से पशु ज्यादा भरोसेमंद होता है।’ किसान की बात सुनकर कुम्हार बोला- ‘तुम ठीक कहते हो। अब भविष्य में मैं दैनिक जीवन व्यवहार में झूठ बोलने की बजाय सच्ची बात कहना पसंद करूंगा।’ इस तरह की व्यवहार-कुशलता का संकल्प व्यक्ति को हर दृष्टि से बहुत ऊंचा उठा देती है। अपने परिवार के निकट अथवा दूरस्थ व्यक्तियों के साथ, पड़ोसियों के साथ, अपने कर्मचारियों के साथ, सामाजिक सम्पर्कों वाले सभी व्यक्तियों के साथ आप उचित व्यवहार का निर्वाह करते हैं तो व्यवहार कुशल माने जाएंगे। अगर व्यवहार में संवेदनशीलता है, सहयोगी दृष्टिकोण है, आत्मीयता और उदारतापूर्ण व्यवहार है तो आपका व्यक्तित्व और अधिक निखरेगा।

Source: http://navbharattimes.indiatimes.com/

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सूरदास – श्री राम कथा हिंदी में।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ श्री राम कथा। ϒ

सूरदास जी का यह पद बहुत ही सुंदर है, जिसमे माता यशोदा अपने लाल को श्री राम कथा सुना रही हैं।

सुनि सुत, एक कथा कहौं प्यारी।
कमल-नैन मन आनँद उपज्यौ, चतुर-सिरोमनि देत हुँकारी॥

दसरथ नृपति हती रघुबंसी, ताकैं प्रगट भए सुत चारी।
तिन मैं मुख्य राम जो कहियत, जनक-सुता ताकी बर नारी॥

तात-बचन लगि राज तज्यौ तिन, अनुज-घरनि सँग गए बनचारी।
धावत कनक-मृगा के पाछैं, राजिव-लोचन परम उदारी॥

रावन हरन सिया कौ कीन्हौ, सुनि नँद-नंदन नींद निवारी।
चाप-चाप करि उठे सूर-प्रभु. लछिमन देहु, जननि भ्रम भारी॥

भावार्थ :-
माता यशोदा ने कहा – ‘लाल सुनो! एक प्रिय कथा कहती हूँ।’
यह सुनकर कमललोचन श्याम के मन में प्रसन्नता हुई, वे चतुर-शिरोमणि हुँकारी देने लगे।

माता यशोदा ने कहा – ‘महाराज दशरथ नाम के एक रघुवंशी राजा थे, उनके चार पुत्र हुए। उन (पुत्रों) में जो सबसे बड़े थे, उनको राम कहा जाता है; उनकी श्रेष्ठ पत्नी थी राजा जनक की पुत्री सीता। पिता की आज्ञा का पालन करने के लिये उन्होंने राज्य त्याग दिया और छोटे भाई तथा स्त्री के साथ वनवासी होकर चले गये। वहाँ वन में एक दिन जब कमललोचन परम उदार श्रीराम सोने के मृग के पीछे उसको पकड़ने के लिये दौड़ रहे थे, तब रावण ने श्री जानकी का हरण कर लिया।”

सूरदास जी कहते हैं कि इतना सुनते ही नन्दनन्दन ने निद्रा को त्याग दी और वे प्रभु बोल उठे -“लक्ष्मण! धनुष दो, धनुष!’
इससे माता को बड़ी शंका हुई कि मेरे पुत्र को यह क्या हो गया।
जय श्री राम कृष्ण हरि।

©- जया शर्मा किशोरी। 

We are grateful to जया शर्मा किशोरी जी for sharing this inspirational श्री राम कथा in Hindi for Kmsraj51 readers.

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

“श्री हरि कथा”

Kmsraj51 की कलम से…..

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“श्री हरि कथा”

गरुड़जी की जिज्ञासा…..

एक बार भगवान विष्णु गरुड़जी पर सवार होकर कैलाश पर्वत पर जा रहे थे।
रास्ते में गरुड़जी ने देखा कि एक ही दरवाजे पर दो बाराते ठहरी थी।
मामला उनके समझ में नहीं आया।

फिर क्या था, पूछ बैठे प्रभु को।

गरुड़जी बोले! प्रभु ये कैसी अनोखी बात है कि विवाह के लिए कन्या एक और दो बारातें आई है।
मेरी तो समझ में कुछ नहीं आ राह है।

प्रभु बोले- हां एक ही कन्या से विवाह के लिए दो अलग अलग जगह से बारातें आई है।
एक बारात पिता द्वारा पसंद किये गये लड़के की है, और दूसरी माता द्वारा पसंद किये गये लड़के की है।

यह सुनकर गरुड़जी बोले- आखिर विवाह किसके साथ होगा?

प्रभु बोले- जिसे माता ने पसंद किया और बुलाया है उसी के साथ कन्या का विवाह होगा।

भगवान की बाते सुनकर गरुड़जी चुप हो गए और भगवान को कैलाश पर पहुंचाकर कौतुहल वस पुनः वापस उसी जगह आ गए जहां दोनों बारातें ठहरी थी।

गरुड़जी ने मन में विचार किया कि यदि मैं माता के बुलाए गए वर को यहां से हटा दूं तो कैसे विवाह संभव होगा।

फिर क्या था; उन्होंने भगवद्विधान को देखने की जिज्ञासा के लिए तुरन्त ही उस वर को उठाया और ले जाकर समुद्र के एक टापु पर धर दिए।

ऐसा कर गरुड़जी थोड़ी देर के लिए ठहरे भी नहीं थे कि उनके मन में अचानक विचार दौड़ा कि मैं तो इस लड़के को यहां उठा लाया हूँ पर यहां तो खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं है, ऐसे में इस निर्जन टापु पर तो यह भूखा ही मर जाएगा और वहां सारी बारात मजे से छप्पन भोग का आनन्द लेंगी, यह कतई उचित नहीं है।
इसका पाप अवश्य ही मुझे लगेगा।
मुझे इसके लिए भी खाने का कुछ इंतजाम तो करना ही चाहिए।

यदि विधि का विधान देखना है तो थोड़ा परिश्रम तो मुझे करना ही पड़ेगा।

और ऐसा विचार कर वे वापस उसी स्थान पर फिर से आ गए।

इधर कन्या के घर पर स्थिति यह थी कि वर के लापता हो जाने से कन्या की माता को बड़ी निराशा हो रही थी।
परन्तु अब भी वह अपने हठ पर अडिग थी।
अतः कन्या को एक भारी टोकरी में बैठाकर ऊपर से फल-फूल, मेवा-मिष्ठान्न आदि सजा कर रख दिया, जिसमें कि भोजन-सामग्री ले जाने के निमित्त वर पक्ष
से लोग आए थे।

माता द्वारा उसी टोकरी में कन्या को छिपाकर भेजने के पीछे उसकी ये मंशा थी कि वर पक्ष के लोग कन्या को अपने घर ले जाकर वर को खोजकर उन दोनों का ब्याह करा देंगे।
माता ने अपना यह भाव किसी तरह होने वाले समधि को सूचित भी कर दिया।

अब संयोग की बात देखिये, आंगन में रखी उसी टोकरी को जिसमे कन्या की माता ने विविध फल-मेवा, मिष्ठान्नादि से भर कर कन्या को छिपाया था, गरुड़जी ने उसे भरा देखकर उठाया और ले उड़े।

उस टोकरी को ले जाकर गरुड़जी ने उसी निर्जन टापू पर जहां पहले से ही वर को उठा ले जाकर उन्होंने रखा था, वर के सामने रख दिया।

इधर भूख के मारे व्याकुल हो रहे वर ने ज्यों ही अपने सामने भोज्य सामग्रियों से भरी टोकरी को देखा तो बाज की तरह उस पर झपटा।
उसने टोकरी से जैसे ही खाने के लिए फल आदि निकालना शुरू किया तो देखा कि उसमें सोलहों श्रृंगार किए वह युवती बैठी है जिससे कि उसका विवाह होना था।

गरुड़जी यह सब देख कर दंग रह गए।

उन्हें निश्चय हो गया कि :–‘हरि इच्छा बलवान।’

‘राम कीन्ह चाहैं सोई होई।
करै अन्यथा आस नहिं कोई।’

फिर तो शुभ मुहुर्त विचारकर स्वयं गरुड़जी ने ही पुरोहिताई का कर्तव्य निभाया।
वेदमंत्रों से विधिपूर्वक विवाह कार्य सम्पन्न कराकर वर-वधु को आशीर्वाद दिया और उन्हें पुनः उनके घर पहुंचाया।

तत्पश्चात प्रभु के पास आकर सारा वृत्तांत निवादन किए और प्रभु पर अधिकार समझ झुंझलाकर बोले- प्रभो! आपने अच्छी लीला करी, सारा ब्याह कार्य हमीं से करवा लिया।

भगवान गरुड़जी की बातों को सुनकर मन्द-मन्द मुस्कुरा रहे थे।

जया शर्मा किशोरी।

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प्रियतम पहली बार लिख रही, चिट्ठी तुमको प्यार की।

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ϒ प्रियतम पहली बार लिख रही, चिट्ठी तुमको प्यार की। ϒ

प्रियतम पहली बार लिख रही, चिट्ठी तुमको प्यार की।

इस आशा के साथ, कि समझो भाषा प्रेमालाप की।
प्रियतम पहली बार लिख रही, चिट्ठी तुमको प्यार की।

अक्षर बन कर जनम लिया है, मेरे दिल के भावों ने।
दबे हुए जो बरसों से थे लिखा उन्हीं जज्बातों ने।

शब्द नहीं लिखे हैं,इसमें भाषा हृदयोद्गार की।
आशा है, सम्मान करोगे, भेंट हमारे प्यार की।

प्रियतम पहली बार लिख रही, चिट्ठी तुमको प्यार की।

तुम्हें दृष्टि भर जिस दिन देखा उन सतरंगी रंगों में।
भूल गयी मैं रंग पुराने, जितने खिले थे यादों में।

उसी समय से पढ़नी सीखी, गीता तेरे प्यार की।
प्रियतम पहली बार गा रहा, मधुर रागिनी प्यार की।

प्रियतम पहली बार लिख रही, चिट्ठी तुमको प्यार की।

अंतिम शब्द तुम्हारे ऐसे लिखे हुए मानस पट पर।
कभी नहीं मिट पाएंगे ये जब तक जीवन है पट पर।

निज मन की बतलाऊँ कैसे? बातें हैं अहसास की।
बहुत आ रही मुझे प्रियतम याद तुम्हारे प्यार की।

प्रियतम पहली बार लिख रही, चिट्ठी तुमको प्यार की।

इस आशा के साथ, कि समझो भाषा प्रेमालाप की।
प्रियतम पहली बार लिख रही, चिट्ठी तुमको प्यार की।

जय-जय श्री राधे॥

© जया शर्मा किशोरी।

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* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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जागिये हे मातृ शक्ति।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

जागिये हे मातृ शक्ति।

आधुनिकता के नाम पर आज की आधुनिक नारी खुद को मातृ सुख से वंचित रखकर बहुत बड़ा पाप कर रही हैं।

जागिये हे मातृ शक्ति…………!!

जागिये हे मातृ शक्ति, नींद में क्यों सो रही,
बंद कर संतान को तुम, क्यों निपूती हो रही।

जागिये हे हिन्दू जननी, नींद में क्यों सो रही,
वंश अपना नाश कर तुम, क्यों निपूती हो रही।।टेर।।

यह सकल सृष्टी तुम्हारी, तुम्हीं पालन हार हो।
नाश अब तुम कर रही, है दुःख बड़ा हमको यही।।१।।

माँ अगर नहीं बनती नहीं तुम, हो कहो किस काम की।
छनिक सुख की लालसा से, बीज विष के बो रही।।२।।

गर्भ पात कराय के तुम, डाकिनी क्यों बन रही।
ख रही बच्चों को कुछ माता की कीर्ति खो रही।।३।।

है भयंकर पाप इसका, ब्रह्महत्या से बड़ा।
करके अपनी दुर्गति क्यों, पाप सर पर ढो रही।।४।।

छोड़ सुख आराम हिन्दू, वंश की रच्छा करो।
अन्न जल भगवान देते, बात सच्ची है सही।।५।।

जागिये हे मातृ शक्ति, नींद में क्यों सो रही,
बंद कर संतान को तुम, क्यों निपूती हो रही।

जागिये हे हिन्दू जननी, नींद से क्यों सो रही,
वंश अपना नाश कर तुम, क्यों निपूती हो रही।।टेर।।

चेतावनी पद संग्रह पुस्तक से, भजन ‘जागिये हे मातृ शक्ति’,
भजन संख्या २१७, पृष्ठ संख्या १०९, पुस्तक कोड १४२,
गीताप्रेस गोरखपुर, भारत

– जया शर्मा किशोरी।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

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KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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