कहीं आप monkey business में तो नहीं लगे हैं?

Kmsraj51 की कलम से…..

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Beware of Monkey Business

कहीं आप Monkey Business में तो नहीं लगे हैं? 

एक  समय  की  बात  है , एक  गाँव  में  एक  आदमी  आया  और  उसने  गाँव  वालों  से  कहा कि  वो  बन्दर  खरीदने  आया  है , और  वो  एक  बन्दर  के  10 रुपये  देगा . चूँकि  गाँव  में  बहुत  सारे  बन्दर  थे  इसलिए  गाँव  वाले  तुरंत  ही  इस  काम  में  लग  गए .

उस  आदमी  ने  10 रूपये  की  rate से  1000 बन्दर  खरीद  लिए  अब  बंदरों  की  supply काफी  घट  गयी  और  धीरे  धीरे  गाँव  वालों  ने  बन्दर  पकड़ने  का  प्रयास  बंद  कर  दिया . ऐसा  होने पर  उस  आदमी  ने  फिर  घोषणा  की  कि  अब  वो  20 रूपये  में  एक  बन्दर  खरीदेगा . ऐसा  सुनते  ही गाँव  वाले  फिर  से  बंदरों  को  पकड़ने  में  लग  गए .

बहुत  जल्द  बंदरों  की  संख्या  इतनी  घाट  गयी  की  लोग  ये  काम  छोड़  अपने  खेती -बारी  में  लगने  लगे . अब  एक  बन्दर  के  लिए  25 रुपये  दिए  जाने  लगे , पर  उनकी  तादाद  इतनी  कम  हो  चुकी  थी  की  पकड़ना  तो  दूर  उन्हें  देखने  के  लिए  भी  बहुत  मेहनत  करनी  पड़ती  थी .

तब  उस  आदमी  ने  घोषणा  की  कि  वो  एक  बन्दर  के  50 रूपये  देगा . पर  इस  बार  उसकी  जगह  बन्दर  खरीदने  का  काम  उसका  assistant करेगा  क्योंकि  उसे  किसी  ज़रूरी  काम  से  कुछ  दिनों  के  लिए  शहर  जाना  पद  रहा  है . उस  आदमी  की  गैरमौजूदगी   में  assistant ने  गाँव  वालों  से  कहा  कि  वो  पिंजड़े  में  बंद  बंदरों  को  35 रुपये  में  उससे  खरीद  लें  और  जब  उसका  मालिक  वापस  आये  तो  उसे  50 रुपये  में  बेंच  दें .

फिर  क्या  था  गाँव  वाले  ने  अपनी  जमा  पूँजी   बदारों  को   खरीदने  में  लगा  दी . और  उसके  बाद  ना  कभी  वो  आदमी  दिखा  ना  ही  उसका  assistant, बस  चारो  तरफ  बन्दर  ही  बन्दर  थे .

दोस्तों  कुछ  ऐसा  ही  होता  है  जब  Speak Asia जैसी  company अपना  business  फैलाती  है . बिना  ज्यादा  मेहनत  के  जब  पैसा  आता  दीखता  है तो  अच्छे-अच्छे  लोगों  की  आँखें  चौंधिया  जाती  हैं  और  वो  अपने  तर्क  सांगत  दिमाग  की  ना  सुनकर  लालच  में  फँस  जाते  हैं .

जब  Speak Aisa आई  थी  तो  मुझे  भी  कई  लोगों  ने  इस  join करने  के  लिए  कहा  था , पर  मैंने  join नहीं  किया  क्योंकि  मैं  उनके  business model से  संतुष्ट  नहीं  हो  पाया . और  यकीन  जानिये  ज्यादातर  लोग  संतुष्ट  नहीं  हो  पाते  , जब  बहुत  आसानी  से  पैसा  आता  दीखता  है  तो  कहीं  ना  कहीं  आपके  अन्दर  से  आवाज़  आती  है  कि  कहीं  कुछ  गड़बड़  है , पर  हम  ये  सोच  के  पैसे  लगा  देते  हैं  की  अगर  company 6 महीने  और  नहीं  भागी   तो  भी  मेरा  पैसा  निकल  जायेगा .

कई  लोगों  का  पैसा  निकल  भी  जाता  है , पर  जहाँ  एक  आदमी  को  फायदा  होता  है  वहीँ  10 लोगों  का  नुकसान  भी  होता  है  यानि  यदि  आप  अपने  लाभ  के  लिए  किसी  ऐसी  company से  जुड़ते  हैं  तो  आप  कई  लोगों  का  नुकसान  भी  कराते हैं . और  अधिकतर  नुकसान  उठाने  वाले  लोग  आपके  करीबी  होते  हैं . इसलिए  कभी  भी  ऐसे  लुभावने  वादों  में  मत  आइये ; आप  पैसे  तो  गवाएंगे  ही  साथ  में  रिश्तों  में  भी  दरार  पड़  जायेगी .

तो  अब  जब  कभी  कोई  आपसे  बिना  मेहनत  के  पैसा  कमाने   की  बात  करे  आप  उसे  इस  Monkey Business की कहानी सुना  दीजिये  और  अपना  पल्ला  झाड  लीजिये :)

*Monkey Business means mischievous, suspect, dishonest, or meddlesome behaviour or acts

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नोट:- Post inspired by AKC (http://www.achhikhabar.com/). We are grateful to My dear friend Mr. Gopal Mishra & AKC for sharing this inspirational story in Hindi for http://kmsraj51.com/ readers.

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जीवन में सबसे बड़ी ख़ुशी तथा चुनाैती उस काम काे करने में है जिसे लाेग कहते हैं कि “तुम नहीं कर सकते”।

-पूज्य आचार्य श्री बाल कृष्ण जी महाराज

 

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नीम है आपकी सुंदरता का साथी ~ Neem beauty of your partner !!

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नीम के पत्ते को पानी में उबालकर इस पानी को ठंडा करके इससे मुंह धोने पर पिंपल्स दूर होते हैं। नीम की पत्तियों को पीसकर उसके लेप को चेहरे पर लगाने से फुंसियां व मुहांसों के दाग मिट जाते हैं। एक कटोरी गेहूं के आटे में एक चम्मच चंदन पावडर, दो चम्मच शहद और गुलाबजल मिलाकर इस उबटन को चेहरे पर लगाएं। यह एक आसान सौन्दर्य नुस्खा है।

चेहरे के दाग-धब्बे हटाने में नीम का फेस पैक बहुत ही कारगर होता है। नीम के फेस पैक बनाने के लिए चार-पांच ताजी नीम की पत्तियों को मिक्सी में पीसकर उसमें एक चम्मच मुलतानी मिट्टी पावडर मिलाएं। अब इस गाढ़े फेस पैक में थोड़ा गुलाबजल मिलाएं तथा इस पैक को पूरे चेहरे पर लगाएं। पैक के सूखने पर गरम पानी से चेहरा धो लें। नीम रक्त साफ करता है।


neem

दाद,खाज,ब्लडप्रेशर में प्रातः 25 ग्राम नीम की पत्ती का रस लेना लाभदायक है। नीम के पत्ते कीड़े मारते हैं, इसलिए पत्तों को अनाज, कपड़ों में रखते हैं। नीम के तेल से मालिश करने से विभिन्न प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। नीम की पत्तियों को उबालकर और पानी ठंडा करके नहाया जाए तो उससे भी बहुत फायदा होता है। नीम की छाल में ऐसे गुण होते हैं, जो दांतों और मसूढ़ों में लगने वाले तरह-तरह के बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते हैं, जिससे दांत स्वस्थ व मजबूत रहते हैं।

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बोर्ड परीक्षा की तैयारी ~ Board Exam preparation methods !!

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कुछ छात्रों में बोर्ड परीक्षा को लेकर एक अजीब सा डर रहता है। पूरी तैयारी के बावजूद भी उन्हें मुश्किलें आती हैं। बोर्ड परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी के अलावा जरूरी है कि इसे पूर्ण रूप से नियोजित बनाएँ।

व्यवस्थित रूप से की गई पढ़ाई द्वारा कोई भी विद्यार्थी परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकता है। यह आवश्यक है कि पहले अपेक्षाकृत आसान अध्यायों का अध्ययन करके, उसके पश्चात उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम अंक प्राप्त कर सकें। तत्पश्चात अपेक्षाकृत कठिन अध्यायों की ओर जाना चाहिए। परीक्षा में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने के लिए निम्न बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक है-

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* हमेशा लिखकर याद करें। इससे गलतियों की संभावना कम होगी।

* रटकर याद करने से बचें। इससे आशंका पूरी तरह नहीं समाप्त होती है। किसी भी विषय के मूल को पहले समझने का प्रयास करें।
कुछ छात्रों में बोर्ड परीक्षा को लेकर एक अजीब सा डर रहता है। पूरी तैयारी के बावजूद भी उन्हें मुश्किलें आती हैं।
बोर्ड परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी के अलावा जरूरी है कि इसे पूर्ण रूप से नियोजित बनाएँ।

* समय-समय पर अपने पाठ को दोहराते रहें और प्रतिदिन इसके लिए कम से कम आधे घंटे का समय निकालें।

* सैंपल पेपर में से पहले उन प्रश्नों को छाँटकर निकाल लें, जिसके उत्तर आपको नहीं आ रहे हैं।

* अंकों के प्रश्न हल करते वक्त हमेशा फार्मूला लिखें, उसके बाद प्रश्न को इस फार्मूले के आधार पर हल करें।

* हल हो चुके प्रश्नों का महत्व समझें और प्रश्न करने के पश्चात अपने उत्तर को हल से अवश्य मिलाएँ।

* लॉग व एंटीलॉग प्रश्नों का अधिक अभ्यास करें।

* भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र आदि विषयों के फार्मूले बनाकर उन्हें अपने कमरे की दीवार पर लगा लें, जिससे चलते-फिरते आप उन्हें दोहरा सकें।

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नीम है आपकी सुंदरता का साथी ~ Neem beauty of your partner !!

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नीम के पत्ते को पानी में उबालकर इस पानी को ठंडा करके इससे मुंह धोने पर पिंपल्स दूर होते हैं। नीम की पत्तियों को पीसकर उसके लेप को चेहरे पर लगाने से फुंसियां व मुहांसों के दाग मिट जाते हैं। एक कटोरी गेहूं के आटे में एक चम्मच चंदन पावडर, दो चम्मच शहद और गुलाबजल मिलाकर इस उबटन को चेहरे पर लगाएं। यह एक आसान सौन्दर्य नुस्खा है।

चेहरे के दाग-धब्बे हटाने में नीम का फेस पैक बहुत ही कारगर होता है। नीम के फेस पैक बनाने के लिए चार-पांच ताजी नीम की पत्तियों को मिक्सी में पीसकर उसमें एक चम्मच मुलतानी मिट्टी पावडर मिलाएं। अब इस गाढ़े फेस पैक में थोड़ा गुलाबजल मिलाएं तथा इस पैक को पूरे चेहरे पर लगाएं। पैक के सूखने पर गरम पानी से चेहरा धो लें। नीम रक्त साफ करता है।


neem

दाद,खाज,ब्लडप्रेशर में प्रातः 25 ग्राम नीम की पत्ती का रस लेना लाभदायक है। नीम के पत्ते कीड़े मारते हैं, इसलिए पत्तों को अनाज, कपड़ों में रखते हैं। नीम के तेल से मालिश करने से विभिन्न प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। नीम की पत्तियों को उबालकर और पानी ठंडा करके नहाया जाए तो उससे भी बहुत फायदा होता है। नीम की छाल में ऐसे गुण होते हैं, जो दांतों और मसूढ़ों में लगने वाले तरह-तरह के बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते हैं, जिससे दांत स्वस्थ व मजबूत रहते हैं।

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Complete Chanakya Niti in Hindi !!


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$$ चाणक्य नीति हिन्दी में $$

Chanakya


शक्तिशाली लोगों के लिए कौनसा कार्य कटीं है ? व्यापारिओं के लिए कौनसा जगह दूर है, विद्वानों के लिए कोई देश विदेश नहीं है, मधुभाषियों का कोई शत्रु नहीं!!

राजा लोग अपने आस पास अच्छे कुल के लोगो को इसलिए रखते है क्योंकि ऐसे लोग ना आरम्भ मे, ना बीच मे और ना ही अंत मे साथ छोड़कर जाते है!!

जिस तरह सारा वन केवल एक ही पुष्प अवं सुगंध भरे वृक्ष से महक जाता है उसी तरह एक ही गुणवान पुत्र पुरे कुल का नाम बढाता है!!

जिस प्रकार केवल एक सुखा हुआ जलता वृक्ष सम्पूर्ण वन को जला देता है उसी प्रकार एक ही कुपुत्र सरे कुल के मान, मर्यादा और प्रतिष्ठा को नष्ट कर देता है!!

कुल की रक्षा के लिए एक सदस्य का बिलदान दें,गाव की रक्षा के लिए एक कुल का बिलदान दें, देश की रक्षा के लिए एक गाव का बिलदान दें, आतमा की रक्षा के लिए देश का बिलदान दें!!

ऐसे अनेक पुत्र किस काम के जो दुःख और निराशा पैदा करे. इससे तो वह एक ही पुत्र अच्छा है जो समपूणर घर को सहारा और शान्ति पर्दान करे!!

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उस देश मे निवास न करे जहा आपकी कोई इजजत नहीं, जहा आप रोजगार नहीं कमा सकते,
जहा आपके कोई मित्र नहीं और जहा आप कोई ज्ञान आर्जित नहीं कर सकते।।

वहा एक दिन भी ना रके जहा ये पाच ना हो!!
धनवान व्यक्ति ,
विदान व्यक्ति जो शास्त्रों को जानता हो,
राजा,
नदियाँ,
और चिकित्सक !!

बुद्धिमान व्यक्ति ऐसे देश कभी ना जाए जहा …
रोजगार कमाने का कोई माधयम ना हो!
जहा लोग किसी से डरते न हो!
जहा लोगो को किसी बात की लज्जा न हो!!
जहा लोगो के पास बुद्धिमत्ता न हो!
जहा के लोगो की वृत्ति दान धरम करने की ना हो!!

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इन बातो को बार बार गौर करे…
सही समय
सही मित्र
सही ठिकाना
पैसे कमाने के सही साधन
पैसे खर्चा करने के सही तरीके
आपके उर्जा स्रोत!!

आत्याधिक सुन्दरता के कारन सीताहरण हुआ,
अत्यंत घमंड के कारन रावन का अंत हुआ,
अत्यधिक दान देने के कारन रजा बाली को बंधन में बंधना पड़ा,
अतः सर्वत्र अति को त्यागना चाहिए!!

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यदि कर्म का फल तुरन्त नहीं मिलता तो इससे यह नहीं समझ लेना चाहिए कि उसके भले-बुरे परिणाम से हम सदा के लिए बच गयें । कर्म-फल एक ऐसा अमिट तथ्य है जो आज नहीं तो कल भुगतना अवश्य ही पड़ेगा । कभी-कभी इन परिणामों में देर इसलिये होती है कि ईश्वर मानवीय बुद्धि की परीक्षा करना चाहता है कि व्यक्ति अपने कर्तव्य-धर्म समझ सकने और निष्ठापूर्वक पालन करने लायक विवेक बुद्धि संचित कर सका या नहीं । जो दण्ड भय से डरे बिना दुष्कर्मों से बचना मनुष्यता का गौरव समझता है और सदा सत्कर्मों तक ही सीमित रहता है, समझना चाहिए कि उसने सज्जनता की परीक्षा पास कर ली और पशुता से देवत्व की और बढऩे का शुभारम्भ कर दिया ।

लाठी के बल पर जानवरों को इस या उस रास्ते पर चलाया जाता है और अगर ईश्वर भी बलपूर्वक अमुक मार्ग पर चलने के लिए विवश करता तो फिर मनुष्य भी पशुओं की श्रेणी में आता, इससे उसकी स्वतंत्र आत्म-चेतना विकसित हुई या नहीं इसका पता ही नहीं चलता । भगवान ने मनुष्य को भले या बुरे कर्म करने की स्वतंत्रता इसीलिए प्रदान की है कि वह अपने विवेक को विकसित करके भले-बुरे का अन्तर करना सीखे और दुष्परिणामों के शोक-संतापों से बचने एवं सत्परिणामों का आनन्द लेने के लिए स्वत: अपना पथ निर्माण कर सकने में समर्थ हो । अतएव परमेश्वर के लिए यह उचित ही था कि मनुष्य को अपना सबसे बड़ा बुद्धिमान और सबसे जिम्मेदार बेटा समझकर उसे कर्म करने की स्वतंत्रता प्रदान करे और यह देखे कि वह मनुष्यता का उत्तरदायित्व सम्भाल सकने मे समर्थ है या नहीं ? परीक्षा के बिना वास्तविकता का पता भी कैसे चलता और उसे अपनी इस सर्वश्रेष्ठ रचना मनुष्य में कितने श्रम की सार्थकता हुई यह कैसे अनुभव होता । आज नहीं तो कल उसकी व्यवस्था के अनुसार कर्मफल मिलकर ही रहेगा । देर हो सकती है अन्धेर नहीं । ईश्वरीय कठोर व्यवस्था, उचित न्याय और उचित कर्म-फल के आधार पर ही बनी हुई है सो तुरन्त न सही कुछ देर बाद अपने कर्मों का फल भोगने के लिए हर किसी को तैयार रहना चाहिए ।

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हर मित्रता के पीछे कुछ स्वार्थ जरूर छिपा होता है। दुनिया में ऐसी कोई दोस्ती नहीं जिसके पीछे लोगों के अपने हित न छिपे हों, यह कटु सत्य है, लेकिन यही सत्य है। और जो मित्र आपके सामने चिकनी-चुपड़ी बातें करता हो और पीठ पीछे आपके कार्य को बिगाड़ देता हो, उसे त्याग देने में ही भलाई है। चाणक्य कहते हैं कि वह उस बर्तन के समान है, जिसके ऊपर के हिस्से में दूध लगा है परंतु अंदर विष भरा हुआ होता है।

चाणक्य कहते है कि जो व्यक्ति अच्छा मित्र नहीं है उस पर तो विश्वास नहीं करना चाहिए, परंतु इसके साथ ही अच्छे मित्र के संबंद में भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है। अत: सावधानी अत्यंत आवश्यक है।

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=> अपने शत्रु को हमेशा भर्म मे रखो! यदि हम कमजोर है तो अपने शत्रु को दिखाओ की हम ताकतवर है , अगर हम ताकतवर है तो अपने शत्रु को दिखाओ की हम कमजोर है।

=> अगर आप उस के पास ( नजदीक ) हँ तो उसे एहसास दिलाओ की आप उस से दूर है! यदि आप उससे दूर हँ तो उसे एहसास दिलाओ की आप उस से पास है हमेसा शत्रु क मन में भर्म की स्थिति पैदा कर के रखे!

=> अगर कोई सांप जहरीला नहीं है, तब भी उसे फुफकारना नहीं छोड़ना चाहिए। उसी तरह से कमजोर व्यक्ति को भी हर वक्त अपनी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।

=> सबसे बड़ा गुरुमंत्र : कभी भी अपने रहस्यों को किसी के साथ साझा मत करो, यह प्रवृत्ति तुम्हें बर्बाद कर देगी।

=> किसी भी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिए। सीधे तने वाले पेड़ ही सबसे काटे जाते हैं और बहुत ज्यादा ईमानदार लोगों को ही सबसे ज्यादा कष्ट उठाने पड़ते हैं।

=> अपने बच्चे को पहले पांच साल दुलार के साथ पालना चाहिए। अगले पांच साल उसे डांट-फटकार के साथ निगरानी में रखना चाहिए। लेकिन जब बच्चा सोलह साल का हो जाए, तो उसके साथ दोस्त की तरह व्यवहार करना चाहिए। बड़े बच्चे आपके सबसे अच्छे दोस्त होते हैं।

=> दिल में प्यार रखने वाले लोगों को दुख ही झेलने पड़ते हैं। दिल में प्यार पनपने पर बहुत सुख महसूस होता है, मगर इस सुख के साथ एक डर भी अंदर ही अंदर पनपने लगता है, खोने का डर, अधिकार कम होने का डर आदि-आदि। मगर दिल में प्यार पनपे नहीं, ऐसा तो हो नहीं सकता। तो प्यार पनपे मगर कुछ समझदारी के साथ। संक्षेप में कहें तो प्रीति में चालाकी रखने वाले ही अंतत: सुखी रहते हैं।

=> हर मित्रता के पीछे कुछ स्वार्थ जरूर छिपा होता है। दुनिया में ऐसी कोई दोस्ती नहीं जिसके पीछे लोगों के अपने हित न छिपे हों, यह कटु सत्य है, लेकिन यही सत्य है।

=> ऐसा पैसा जो बहुत तकलीफ के बाद मिले, अपना धर्म-ईमान छोड़ने पर मिले या दुश्मनों की चापलूसी से, उनकी सत्ता स्वीकारने से मिले, उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए।

=> नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुंचाने वाली, उनके विश्वासों को छलनी करने वाली बातें करते हैं, दूसरों की बुराई कर खुश हो जाते हैं। मगर ऐसे लोग अपनी बड़ी-बड़ी और झूठी बातों के बुने जाल में खुद भी फंस जाते हैं। जिस तरह से रेत के टीले को अपनी बांबी समझकर सांप घुस जाता है और दम घुटने से उसकी मौत हो जाती है, उसी तरह से ऐसे लोग भी अपनी बुराइयों के बोझ तले मर जाते हैं।

=> जो बीत गया, सो बीत गया। अपने हाथ से कोई गलत काम हो गया हो तो उसकी फिक्र छोड़ते हुए वर्तमान को सलीके से जीकर भविष्य को संवारना चाहिए।

=> असंभव शब्द का इस्तेमाल बुजदिल करते हैं। बहादुर और बुद्धिमान व्यक्ति अपना रास्ता खुद बनाते हैं।

=> संकट काल के लिए धन बचाएं। परिवार पर संकट आए तो धन कुर्बान कर दें। लेकिन अपनी आत्मा की हिफाजत हमें अपने परिवार और धन को भी दांव पर लगाकर करनी चाहिए।

=> भाई-बंधुओं की परख संकट के समय और अपनी स्त्री की परख धन के नष्ट हो जाने पर ही होती है।

=> कष्टों से भी बड़ा कष्ट दूसरों के घर पर रहना है।

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=> चाणक्य कहते है कि जो व्यक्ति अच्छा मित्र नहीं है उस पर तो विश्वास नहीं करना चाहिए, परंतु इसके साथ ही अच्छे मित्र के संबंद में भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है। अत: सावधानी अत्यंत आवश्यक है।

=> चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति को कभी अपने मन का भेद नहीं खोलना चाहिए। उसे जो भी कार्य करना है, उसे अपने मन में रखे और पूरी तन्मयता के साथ समय आने पर उसे पूरा करना चाहिए।

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$$ Chanakya story in hindi $$


एक दिन चाणक्य का एक परिचित उनके पास आया और उत्साह से कहने लगा, ‘आप जानते हैं, अभी-अभी मैंने आपके मित्र के बारे में क्या सुना?’

चाणक्य अपनी तर्क-शक्ति, ज्ञान और व्यवहार-कुशलता के लिए विख्यात थे। उन्होंने अपने परिचित से कहा, ‘आपकी बात मैं सुनूं, इसके पहले मैं चाहूंगा कि आप त्रिगुण परीक्षण से गुजरें।’
उस परिचित ने पूछा, ‘ यह त्रिगुण परीक्षण क्या है?’

चाणक्य ने समझाया , ‘ आप मुझे मेरे मित्र के बारे में बताएं, इससे पहले अच्छा यह होगा कि जो कहें, उसे थोड़ा परख लें, थोड़ा छान लें। इसीलिए मैं इस प्रक्रिया को त्रिगुण परीक्षण कहता हूं। इसकी पहली कसौटी है सत्य। इस कसौटी के अनुसार जानना जरूरी है कि जो आप कहने वाले हैं, वह सत्य है। आप खुद उसके बारे में अच्छी तरह जानते हैं?’

‘नहीं,’ वह आदमी बोला, ‘वास्तव में मैंने इसे कहीं सुना था। खुद देखा या अनुभव नहीं किया था।’

‘ठीक है,’ – चाणक्य ने कहा, ‘आपको पता नहीं है कि यह बात सत्य है या असत्य। दूसरी कसौटी है -‘ अच्छाई। क्या आप मुझे मेरे मित्र की कोई अच्छाई बताने वाले हैं?’
‘नहीं,’ उस व्यक्ति ने कहा। इस पर चाणक्य बोले,’ जो आप कहने वाले हैं, वह न तो सत्य है, न ही अच्छा। चलिए, तीसरा परीक्षण कर ही डालते हैं ।’

‘तीसरी कसौटी है – उपयोगिता। जो आप कहने वाले हैं, वह क्या मेरे लिए उपयोगी है?’

‘नहीं, ऐसा तो नहीं है।’ सुनकर चाणक्य ने आखिरी बात कह दी।’ आप मुझे जो बताने वाले हैं, वह न सत्य है, न अच्छा और न ही उपयोगी, फिर आप मुझे बताना क्यों चाहते हैं?’

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अग्निहोत्र बिनु वेद नहिं, यज्ञ क्रिया बिनु दान ।
भाव बिना नहिं सिध्दि है, सबमें भाव प्रधान ॥

Hindi Meaning –>

बिना अग्निहोत्र के वेदपाठ व्यर्थ है और दान के बिना यज्ञादि कर्म व्यर्थ हैं ।
भाव के बिना सिध्दि नहीं प्राप्त होती इसलिए भाव ही प्रधान है ॥१॥

English Meaning –>
Chanting of the Vedas without making ritualistic sacrifices to the Supreme Lord through the medium of Agni, and sacrifices not followed by bountiful gifts are futile. Perfection can be achieved only through devotion (to the Supreme Lord) for devotion is the basis of all success.

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10 गुना इंटरनेट स्पीड देगा गूगल का नया डाटा सेंटर ~ Google’s new data center offers internet speeds 10 times !!

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** 10 गुना इंटरनेट स्पीड देगा गूगल का नया डाटा सेंटर!! **


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इंटरनेट की दुनिया की सबसे मशहूर कंपनी गूगल ने हाल ही में एशिया में अपने दो नए डाटा सेंटर खोले हैं। टैक्नोलॉजी की दुनिया भर के बाजारों में बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी ने ये कदम उठाया है। एक डाटा सेंटर काउंटी ताइवान और दूसरा जुरोंग वेस्ट, सिंगापुर में खोला गया है। कंपनी ने इन दोनों सेंटर को तैयार करने में कुल मिलाकर 2440 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इन डाटा सेंटरों की मदद से अब इंटरनेट डाटा ट्रैफिक के लोड को कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही गूगल अपने यूजर्स को अब और भी ज्यादा डाटा मुहैया करा सकेगा और इंटरनेट पर सर्च करना 10 गुना तक फास्ट और आसान हो जाएगा।

kms-google
रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान, हांगकांग और सिंगापुर जैसे देश टेक कंपनियों के संचालन के लिए उपयुक्त स्थान माने जाते हैं। इन देशों में डाटा सेंटर का संचालन करने के लिए अच्छे कानून, मजबूत बिजली व्यवस्था, कुशल कर्मचारी और फाइबर ब्रॉडबैंड जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।


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डा़टा सेंटर एक ऐसी जगह होती है, जहां ढेर सारे कंप्यूटर लगे होते हैं। इन कंप्यूटरों में दुनिया भर के जरूरी डाटा स्टोर किए जाते हैं, जिसकी मदद से दुनिया के कोने-कोने में इंटरनेट यूजर्स को डाटा मुहैया कराया जाता है। इंटरनेट पर मिलने वाली सभी जानकारियां इन्हीं डाटा सेंटरों से आती हैं।

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गूगल की स्थापना 1998 में लैरी पेज और सेर्गे ब्रिन ने की थी। आज 15 साल बाद कंपनी की कुल संपत्ति 5,80,415 करोड़ रुपए हो चुकि है। अब गूगल अपने बिजनेस को बढ़ाते हुए ताइवान के डाटा सेंटर के संचालन के लिए 3712 करोड़ रुपए निवेश कर रही है। इसकी मदद से दुनिया भर में बढ़ रही टैक्नोलॉजी की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।


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लगभग 3,10,503 करोड़ रुपए की सालाना (2012) रेवेन्यू वाली कंपनी का ताइवान का ये डाटा सेंटर काफी प्रभावशाली है और पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है।


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इस डाटा सेंटर को रात के समय कंपनी के अंदर के वातावरण को ठंडा रखने और थर्मल ऊर्जा स्टोर करने के लिहाज से बनाया गया है।

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आमतौर पर डाटा सेंटर का वातावरण ठंडा होना चाहिए क्योंकि कंप्यूटरों से निकलने वाली गर्मी सिस्टम को क्षति पहुंचा सकती है। गूगल के मुताबिक, इस कंपनी का कूलिंग सिस्टम इंसुलेटेड टैंक्स के जरिए चलाया जाता है।

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इस डाटा सेंटर में कुल 60 लोगों की टीम के साथ कुछ फुल और पार्ट टाइम कांट्रेक्टर 24 घंटे साइट को चलाते हैं, जिसमें से कुछ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स, मैकेनिकल इंजीनियर्स, कंप्यूटर तकनीशियन और कैटरर भी शामिल हैं।

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एशिया में 2014 तक मोबाइल डाटा ट्रेफिक 68 प्रतिशत तक बढ़ने का अंदेशा है। ये डाटा सेंटर इस ट्रेफिक को नियंत्रित करने में काफी सहयोग करेगी।

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कंपनी के उपाध्यक्ष डाटा सेंटर में सुरक्षा द्वारों की जांच करते हुए।

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दुनिया के सबसे बेहतरीन सर्वर के एक कंप्यूटर के गर्म हो जाने के बाद गूगल की कर्मचारी उसकी जांच करती हुईं।

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कंप्यूटर के खराब मदरबोर्ड की मरम्मत करता हुआ गूगल का कर्मचारी। इस डाटा सेंटर में खराब होने के बाद पुर्जों की पहले मरम्मत की जाती है अगर वो ठीक न हो सकें तो फिर उन्हें तोड़कर रिसाइकिल के लिए दे दिया जाता है।

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जेनरेटर की मरम्मत करते गूगल के तकनीशियन।

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डाटा सेंटर को ठंडा रखने वाले पाइप लाइन की जांच करता गूगल कर्मचारी।

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बैटरी की जांच करते हुए गूगल कर्मचारी। समय-समय पर बैटरियों की जांच की जाती है की वो ठीक से चार्ज हो रहे हैं या नहीं।

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इस डाटा सेंटर में नए जमाने के लिहाज से बनाए गए अति आधुनिक सर्वर देखे जा सकते हैं।

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Soul Sustenance & Message for the day 17-12-2013 !!

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** Soul Sustenance & Message for the day 17-12-2013 **

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Soul Sustenance 17-12-2013
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Living Life On The Surface

In an ideal situation, the thoughts that run in my mind, should be exactly those that I would like and I want. We do exert this control, that we possess, over our thoughts, but it is not complete and it is only sometimes. The more we become completely engrossed in our daily routine, the more our thoughts tend to become reactions to what goes on outside us. That’s when they go out of control and our lives move in an unfocused way. As a result things don’t work out as we might have desired. Then we develop a habit of blaming other people and circumstances, or we justify our pain by telling ourselves we are not very worthy or powerful enough. Often, these two inner strategies go together. The trouble is, both are cover ups, preventing us from going for a long-term solution.

In this way, we tend to live our lives on a very superficial level, without taking the time to find the solution to what is going on wrong inside. Deeper difficulties remain hidden inside. I move from one scene of life to another – eating, watching television, studying in college, getting married, changing jobs, buying a new car or house, etc. without ever stopping. All these are part of living, but if I make them my whole and sole, my foundation, it’s as if I skate across the surface of life without being in touch with the core. As time progresses, an inner shallowness develops. Then the feeling keeps growing inside that ‘there must be more to life than this’. I then, find that my relationships are not working out as I would have hoped and they are lacking in depth.

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Message for the day 17-12-2013
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Easy nature makes tasks easy.

Expression: The ones with an easy nature constantly think of solutions instead of problems. So such individuals are free from the burden of problems and are constantly contributing to make things easy for themselves and others too. The right environment to bring out the best result is naturally created by them.

Experience: When I have an easy nature, I am able to put a full stop in a second with great ease. I am not caught with the waste questions and exclamations. So I am able to enjoy everything that comes my way and move forward constantly with lightness.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris
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अमरूद में छिपे हैं कई गुण, सर्दियों में करें सेवन।

Kmsraj51 की कलम से…..

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अमरूद में छिपे हैं कई गुण, सर्दियों में करें सेवन।

 (Many properties of guava are hidden, the intake in winter)

guava

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किसी भी फल के सेवन से सेहत को फायदा ही पहुंचता है, पर इसमें से एक है अमरूद। विशेषज्ञों के अनुसार, इस फल में कई खास गुण छिपे हैं जो शरीर और सेहत के लिए काफी लाभकारी हैं।अमरूद को तमाम गुणों का खजाना माना जाता है। इसमें फोलेट की अच्छी मात्रा है, जिससे यह महिलाओं में फर्टिलिटी बढ़ाता है। मां बनने की चाहत रखने वाली महिलाओं को अमरूद का सेवन जरूर करना चाहिए। वहीं, डायबिटीज के मरीजों के लिए भी यह काफी फायदेमंद है। अमरूद के सेवन से खून में सुगर का स्तर कम होता है। इसमें फाइबर अधिक मात्रा में होते हैं जो शुगर के अवशोषण और इन्सुलिन बढ़ाने में मदद करते हैं।

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Guava Tree

इसके अलावा, अमरूद में आयोडीन अच्छी मात्रा में पाई जाती है, जिससे थायरॉइड की समस्या में आराम होता है। इससे शरीर का हार्मोनल संतुलन बना रहता है। अमरूद में संतरे के मुकाबले चार गुना अधिक विटामिन सी होता है। विटामिन सी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाते हैं और कैंसर से लड़ने में शरीर की मदद करते हैं। वाकई यह फल शरीर के लिए काफी लाभकारी है।

अमरूद में मौजूद पोटैशियम शरीर में सोडियम के प्रभाव को कम करता है जिससे ब्लड प्रेशर का संतुलन बना रहता है। इसके अलावा, यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। दांत दर्द में इसके पत्ते चबाने से भी काफी आराम मिलता है। इससे कब्ज भी दूर होती है।विशेषज्ञ विशेषकर सर्दियों के मौसम में अमरूद के सेवन की नसीहत देते हैं। अमरूद कई मायनों में सेहतमंद है। यह कई पौष्टिक तत्वों से भरपूर है बल्कि सेहत से जुड़े कई रोगों से दूर रखने में भी मददगार है। अमरूद को जामफल के नाम से भी जाना जाता है। इसका उपयोग कई रूपों में किया जाता है। अमरूद से जैम, जेली आदि चीजें भी बनती हैं, जो बाजार में सहज ही उपलब्‍ध होता है।

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आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

Swami Vivekananda-kmsraj51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

 

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Kmsraj51 – सकारात्मक विचारों का समूह

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** ~ Krishna Mohan Singh(kmsraj51) ~ Great Thoughts of KMSRAJ51 ~ **


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** कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह ….. **


** मेरे कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

** अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

** हमेशा मन को शांत रखना …..

** दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

** हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

** हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

** हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

** हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

** आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

** आपका कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ….. मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ!! …..

** ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!


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About The Author: KMSRAJ51
Krishna Mohan Singh (kmsraj51) is the CEO and Founder of https://kmsraj51.wordpress.com/ . With a long time passion for Entrepreneurship, Self development & Success, KMSRAJ51 started his website with the intention of educating and inspiring likeminded people all over the world to always strive for success no matter what their circumstances. Kmsraj51 passion for what he does shows through the continual growth of https://kmsraj51.wordpress.com/ online community. Follow kmsraj51 on Twitter or keep upto date with him on Facebook: https://www.facebook.com/kmsraj51 & also Google+ kmsraj51 (Krishna Mohan Singh).

Thank`s & Regard`s

Krishna Mohan Singh (कृष्ण मोहन सिंह)
Spiritual Author Cum Spiritual Guru
Always Positive Thinker Cum Motivator
Sr.Administrator (IT-Software, Hardware & Networking)
ID: kmsraj51@yahoo.in

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Soul Sustenance & Message for the day 14-12-2013 !!

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Soul Sustenance 14-12-2013
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Self Empowerment

Meditation, in practice, means to enter, and re-enter, the reservoir of peace inside us whenever we need to during the course of the day. This exercise increases self-control and prevents the explosions and reactions of anger that drain our strength. The easy method is not to expect but to accept: then tolerance and respect make our life far more comfortable.

There may be many shadows and pollutants inside us, but usually our pain is centered around these: I own, I need, I want, mine and I expect. If we learn to recognize the characteristics of such a consciousness, we are in a position to overcome difficult situations and thoughts before they overwhelm us. We simply have to remain awake, and that state of alertness stops these shadows from overpowering us and making us unconscious.

Our needs and wants are truly fulfilled in a healthy way by tuning in to the original resources of the soul, because their fulfillment is not dependent on anyone, or anything from outside. When we sustain ourselves from the inside, then our well-being is secure and progressive. As a result, when we express and show our original qualities of the self to others, whether it is peace, happiness or love, they naturally increase inside. The more we give unconditionally, the more we have. This miracle of ‘quality being’ is the result of natural purity, the original state of selflessness, which God always has and good meditators aspire to return to.

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Message for the day 14-12-2013
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Real contentment spreads happiness to others too.

Expression: When one feels contentment but the others are not able to perceive that contenetment, it means that it is not true contentment. Real contentment is visible in such a way that others too are able to feel the happiness that is created. When there is real contentment, all thoughts, words and actions are filled with quality.

Experience: When I am content, others automatically recognise the contentment within me. They are able to take benefit from my state. Even in the most hopeless state, I find that I become a source of support for those around me. I am able to give hope to the hopeless and help them get back to a state of happiness.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris


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853 साल बाद कल बनेगा ये अद्भुत संयोग, नहीं देख पाएंगे फिर कभी ~ Tomorrow will be an amazing coincidence that 853 years later, will not see ever again !!

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** 853 साल बाद कल बनेगा ये अद्भुत संयोग, नहीं देख पाएंगे फिर कभी!! **

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साल 2013 अपनी समाप्ति की ओर है। साल के अंतिम महीने दिसंबर में आंकड़ों का एक अद्भुत योग बन रहा है। यह योग कल यानी 11 दिसंबर, बुधवार को बनेगा। ऐसा योग हजारों सालों में एक बार ही बनता है। यानी जो लोग ये योग दिसंबर में देख पाएंगे वह दोबारा यह योग कभी नहीं देख पाएंगे। इस बार आंकड़ों का यह संयोग 823 साल बाद बनने जा रहा है।

2


आंकड़ों का यह संयोग बनेगा 11 दिसंबर को। जब सुबह व रात को घड़ी में 8 बजकर 9 मिनट व 10 सेंकेंड होंगे तो उस वक्त तारीख 11 होगी, महीना 12वां होगा और साल 13। यानी इस समय 8, 9, 10, 11, 12, 13 अंक का अभूतपूर्व संयोग बनेगा। इतना ही नहीं, दिसंबर में पांच रविवार, पांच सोमवार व पांच मंगलवार भी होंगे। इस संयोग को मनी बैग्स भी कहा जाता है। आंकड़ों का यह संयोग दिलचस्प होगा।

3


यह संयोग अपने आप में ऐतिहासिक है। इस संयोग का महत्व समझने वाले इस पल को यादगार बनाने व यादें संजोने का भरसक प्रयत्न करेंगे। यह बात अलग है कि सब अपने-अपने तरीके से इस पल को संजोएंगे। कोई इस लग्न में शादी करना चाहेगा। हालांकि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस दिन विवाह के लिए कोई शुभ मूहूर्त नहीं है। यूं तो हर कोई इस अनूठे संयोग को यादगार बनाने की कोशिश करता है लेकिन कुछ संयोग निश्चित हैं। इस संयोग में जो जन्म लेने वाले बच्चों की जन्मतिथि भी इस अद्भुत संयोग में दर्ज हो जाएगी।

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पहली व अंतिम बार आएगा
अंकों का यह खेल इस शताब्दी में पहली और आखिरी बार आएगा। दिनांक 11 अर्थात अंक 2 चंद्रमा ग्रह का अंक है, इसे अति शुभ माना जाता है। शगुन देते समय भी 11 या 101 को प्रमुखता दी जाती है ताकि कार्य शुभ हो व प्रायोजन सफल हो। महीना 12 अर्थात अंक 3 जो गुरु ग्रह का अंक है। वर्ष 2013 अंक 6 को दर्शाता है जो शुक्रग्रह का अंक है।

5

संघर्ष का परिचायक
एक महीने में तीन वारों का पांच बार आना संघर्ष का परिचायक है। ऐसी स्थिति में किसी केंद्रीय नेता का अपमानित होना, दल-बदल की स्थिति से सरकार पर संकट आना, सीमावर्ती देशों से द्वंद्व की स्थिति बनना आम बात है। हालांकि, यह स्थिति शीतकालीन फसलों के लिए लाभदायक रहती है।

6


जन्मदिन होगा यादगार
आंकड़ों के इस संयोग का ज्योतिषीय दृष्टिकोण से तो इतना महत्व नहीं है। क्योंकि इस दिन शादियों का भी कोई मूहूर्त नहीं है लेकिन यह एक यादगार पल है। इसे हर कोई अपने-अपने ढंग से दर्ज कराना चाहेगा। इस मौके पर जन्म लेने वाले बच्चों की जन्मतिथि भी अपने आप में ऐतिहासिक होगी।

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एक मासूम कहानी ~ An innocent story !!

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** एक मासूम कहानी ~ An innocent story **

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एक व्यक्ति आफिस में देर रात तक काम करने के बाद थका-हारा घर पहुंचा . दरवाजा खोलते ही उसने देखा कि उसका छोटा सा बेटा सोने की बजाय उसका इंतज़ार कर रहा है . अन्दर घुसते ही बेटे ने पूछा —“ पापा , क्या मैं आपसे एक प्रश्न पूछ सकता हूँ ?” “ हाँ -हाँ पूछो , क्या पूछना है ?” पिता ने कहा . बेटा – “ पापा , आप एक घंटे में कितना कमा लेते हैं ?” “ इससे तुम्हारा क्या लेना देना …तुम ऐसे बेकार के सवाल क्यों कर रहे हो ?” पिता ने झुंझलाते हुए उत्तर दिया . बेटा – “ मैं बस यूँ ही जाननाचाहता हूँ . प्लीज बताइए कि आप एक घंटे में कितना कमाते हैं ?” पिता ने गुस्से से उसकी तरफ देखते हुए कहा , नहीं बताऊंगा , तुम जाकर सो जाओ “यह सुन बेटा दुखी हो गया …और वह अपने कमरे में चला गया . व्यक्ति अभी भी गुस्से में था और सोच रहा था कि आखिर उसके बेटे ने ऐसा क्यों पूछा ……पर एक -आध घंटा बीतने के बाद वह थोडा शांत हुआ , फिर वह उठ कर बेटे के कमरे में गया और बोला , “ क्या तुम सो रहे हो ?”, “नहीं ” जवाब आया . “ मैं सोच रहा था कि शायद मैंने बेकार में ही तुम्हे डांट दिया ,

दरअसल दिन भर के काम से मैं बहुत थक गया था .” व्यक्ति ने कहा. सारी बेटा “…….मै एक घंटे में १०० रूपया कमा लेता हूँ……. थैंक यूं पापा ” बेटे ने ख़ुशी से बोला और तेजी से उठकर अपनी आलमारी की तरफ गया , वहां से उसने अपने गोल्लक तोड़े और ढेर सारे सिक्के निकाले और धीरे -धीरे उन्हें गिनने लगा . “ पापा मेरे पास 100 रूपये हैं . क्या मैं आपसे आपका एक घंटा खरीद सकता हूँ ? प्लीज आप ये पैसे ले लोजिये और कल घर जल्दी आ जाइये , मैं आपके साथ बैठकर खाना खाना चाहता हूँ .” दोस्तों , इस तेज रफ़्तार जीवन में हम कई बार खुद को इतना व्यस्त कर लेते हैं कि उन लोगो के लिए ही समय नहीं निकाल पाते जो हमारे जीवन में सबसे ज्यादा अहमयित रखते हैं. इसलिए हमें ध्यान रखना होगा कि इस आपा-धापी भरी जिंदगी में भी हम अपने माँ-बाप, जीवन साथी, बच्चों और अभिन्न मित्रों के लिए समय निकालें, वरना एक दिन हमें अहसास होगा कि हमने छोटी-मोटी चीजें पाने के लिए कुछ बहुत बड़ा खो दिया…

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हाथी और छह अंधे व्यक्ति ~ Elephant and six blind men !!

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@@ ** हाथी और छह अंधे व्यक्ति ** @@

6 BLIND MAN
कैसा होता है हाथी ?

बहुत समय पहले की बात है , किसी गावं में 6 अंधे आदमी रहते थे. एक दिन गाँव वालों ने उन्हें बताया , ” अरे , आज गावँ में हाथी आया है.” उन्होंने आज तक बस हाथियों के बारे में सुना था पर कभी छू कर महसूस नहीं किया था. उन्होंने ने निश्चय किया, ” भले ही हम हाथी को देख नहीं सकते , पर आज हम सब चल कर उसे महसूस तो कर सकते हैं ना?” और फिर वो सब उस जगह की तरफ बढ़ चले जहाँ हाथी आया हुआ था.

सभी ने हाथी को छूना शुरू किया.

” मैं समझ गया, हाथी एक खम्भे की तरह होता है”, पहले व्यक्ति ने हाथी का पैर छूते हुए कहा.

“अरे नहीं, हाथी तो रस्सी की तरह होता है.” दूसरे व्यक्ति ने पूँछ पकड़ते हुए कहा.

“मैं बताता हूँ, ये तो पेड़ के तने की तरह है.”, तीसरे व्यक्ति ने सूंढ़ पकड़ते हुए कहा.

” तुम लोग क्या बात कर रहे हो, हाथी एक बड़े हाथ के पंखे की तरह होता है.” , चौथे व्यक्ति ने कान छूते हुए सभी को समझाया.

“नहीं-नहीं , ये तो एक दीवार की तरह है.”, पांचवे व्यक्ति ने पेट पर हाथ रखते हुए कहा.

” ऐसा नहीं है , हाथी तो एक कठोर नली की तरह होता है.”, छठे व्यक्ति ने अपनी बात रखी.

और फिर सभी आपस में बहस करने लगे और खुद को सही साबित करने में लग गए.. ..उनकी बहस तेज होती गयी और ऐसा लगने लगा मानो वो आपस में लड़ ही पड़ेंगे.

तभी वहां से एक बुद्धिमान व्यक्ति गुजर रहा था. वह रुका और उनसे पूछा,” क्या बात है तुम सब आपस में झगड़ क्यों रहे हो?”

” हम यह नहीं तय कर पा रहे हैं कि आखिर हाथी दीखता कैसा है.” , उन्होंने ने उत्तर दिया.

और फिर बारी बारी से उन्होंने अपनी बात उस व्यक्ति को समझाई.

बुद्धिमान व्यक्ति ने सभी की बात शांति से सुनी और बोला ,” तुम सब अपनी-अपनी जगह सही हो. तुम्हारे वर्णन में अंतर इसलिए है क्योंकि तुम सबने हाथी के अलग-अलग भाग छुए

हैं, पर देखा जाए तो तुम लोगो ने जो कुछ भी बताया वो सभी बाते हाथी के वर्णन के लिए सही बैठती हैं.”

” अच्छा !! ऐसा है.” सभी ने एक साथ उत्तर दिया . उसके बाद कोई विवाद नहीं हुआ ,और सभी खुश हो गए कि वो सभी सच कह रहे थे.

दोस्तों, कई बार ऐसा होता है कि हम अपनी बात को लेकर अड़ जाते हैं कि हम ही सही हैं और बाकी सब गलत है. लेकिन यह संभव है कि हमें सिक्के का एक ही पहलु दिख रहा हो और उसके आलावा भी कुछ ऐसे तथ्य हों जो सही हों. इसलिए हमें अपनी बात तो रखनी चाहिए पर दूसरों की बात भी सब्र से सुननी चाहिए , और कभी भी बेकार की बहस में नहीं पड़ना चाहिए. वेदों में भी कहा गया है कि एक सत्य को कई तरीके से बताया जा सकता है. तो , जब अगली बार आप ऐसी किसी बहस में पड़ें तो याद कर लीजियेगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आपके हाथ में सिर्फ पूँछ है और बाकी हिस्से किसी और के पास हैं !!

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Some of My Personal Spiritual Motivational – Positive Thoughts !!

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सकारात्मक विचारों का समूह …..

मेरे कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

हमेशा मन को शांत रखना …..

दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

आपका कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ….. मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ!!

ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!

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परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान।

Kmsraj51 की कलम से…..

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Before the examination, the examination.

शरीर की तरह आपके दिमाग को भी बेहतर काम करने के लिए व्यवस्थित रहना जरूरी है। इसके लिए कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं। इनसे न सिर्फ आपका दिमाग तेज गति से काम करने लगेगा, बल्कि परीक्षा के लिए किसी भी पाठ को याद रखना आसान हो जाएगा।

आप दिमागी कसरत करने के लिए अपने आपको तैयार करें। दिमागी कसरत शारीरिक कसरत से भिन्न होती है। हमारे देश में शतरंज ईजाद किया गया तो इसीलिए कि यह दिमाग की सबसे कठिन और जोरदार कसरत है। खैर शतरंज तो सभी नहीं खेलते हैं, लेकिन क्रासवर्ड पजल्स या कम्प्यूटर पर दिए गए गेम सालिटायर को तो लगभग सभी पसंद करते हैं। आप इनसे शुरुआत कर सकते हैं। आप यदि यह भी नहीं करना चाहते हैं तो आसान तरीका है साधारण स्तर के गुणा-भाग अथवा जोड़-घटाव करना।

हफ्ते में एक बार कोई कविता या जोक याद करने की कोशिश करें। इससे आपका दिमाग शेप में रहेगा और इसकी ताकत भी बढ़ेगी। हमेशा कुछ नया करने की सोच रखिए। नए-नए आइडियाज को सामने आने दें। इसके लिए एक बच्चे की तरह सोचना ही काफी है। बच्चे सकारात्मक ऊर्जा, विस्मित भाव और उत्सुकता से सोचते हैं।

अपने आपको दिवास्वप्न देखने दीजिए। इससे मस्तिष्क तीक्ष्ण होगा और उसकी ताकत भी बढ़ेगी। अपने आपको केवल एक ही व्यक्ति न बनने दें। एक ही व्यक्ति में बहुत सारे व्यक्तित्व पैदा कीजिए। जितने अधिक हो सकें, उतने तरीकों से सोचिए।

परीक्षा का भय?

कई विद्यर्थियों को परीक्षा के बारे में सोचकर ही बेचैनी महसूस होने लगती है। मन में कई विचार घूमने लगते हैं, -‘क्या मैं सभी प्रश्नों का उत्तर दे पाउंगा?’ ‘थोड़ा और पढ़ लेता तो अच्छा होता’आदि। ये विचार लगभग हर विद्यार्थी को परेशान करते हैं। थोड़ा-बहुत दबाव बेहतर प्रदर्शन के लिए मददगार होता है। इससे शरीर में एड्रिनलिन हारमोन स्त्रावित होता है जो व्यक्ति को सचेत और फोकस्ड बनाए रखता है।

हल्का तनाव या दबाव होना स्वाभाविक है लेकिन ज्यादा घबराहट परेशानी का सबब बन जाती है। यह व्यक्ति के चारों ओर एक नकारात्मक घेरा बना देती है और फिर वो एकाग्र होकर सोच-समझ नहीं पाता। इसका बुरा प्रभाव पड़ता है प्रदर्शन पर क्योंकि विद्यार्थी न तो प्रश्नों पर अपना ध्यान केंद्रित कर पाता है और न सटीक उत्तर ही दे पाता है। ऐसे कई उपाय हैं जिनसे परीक्षा का भय दूर किया जा सकता है ताकि विद्यार्थी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।

परीक्षा से पहले।

अपना कोर्स समय रहते पढ़ लें और उसका रिविज़न भी कम से कम एक दिन पहले ही पूरा कर लें। ऐन वक्त तक पढ़ते रहने से तनाव बढ़ता है। चित्त स्थिर रखने और मन शांत करने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं, किसी को संगीत सुनने पर सुकून मिलता है तो किसी को व्यायाम करने से या फिर कुनकुने पानी से स्नान करना भी अच्छा तरीका हो सकता है। अपने लिए रिलेक्स करने का ऐसा ही कोई तरीका चुनें।

परीक्षा के दिन और उससे एक दिन पहले इस तरह के उपाय बहुत फायदेमंद साबित होते हैं। जो कुछ भी आपने पढ़ा है उसे याद रखने में ये सहायक होते हैं और आत्मविश्वास बढ़ताता है। एग्जाम सेंटर का रास्ता पता न होना भी घबराहट का कारण बन सकता है। इस बारे में पहले ही जानकारी जुटा लें और संभव हो तो एक बार खुद वहां जाकर देखें। इससे ऐन वक्त की हड़बड़ी से बच जाएंगे। परीक्षा के नियमों को ध्यान से पढ़ लें। परीक्षा से पहले की रात नींद पूरी करें।

परीक्षा के दौरान।

‘मुझे कुछ नहीं आता’। पढ़ाई नहीं की हो तो ये ख्याल परेशान कर सकता है लेकिन अच्छे से पढ़ने पर भी ऐसे विचार उत्पन्न होना घबराहट के संकेत हैं। तनाव के कारण विद्यार्थी ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। कई तो प्रश्न भी ठीक से नहीं पढ़ पाते हैं। इससे बचने के लिए ये उपाय कर सकते हैं-

A. परीक्षा कक्ष में सही समय पर पहुंचें।

B. कक्ष में पहुंचकर लंबी-गहरी सांसें लें और छोड़ें। घबराहट में अक्सर लोग ठीक से सांस नहीं लेते हैं। गहरी सांस लेते हुए अपनी पीठ एकदम सीधी कर लें।

C. आपके सामने रखी किसी स्थिर निर्जीव वस्तु (दीवार, तस्वीर, आदि) की ओर देखकर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करें।

D. मन में कोई सकारात्मक बात दोहराएं जैसे – मैं ये परीक्षा पास करने वाला हूं। 1-2 मिनिट तक यही दोहराते रहें और फिर सामान्य रुप से सांस लें। शांति अनुभव करेंगे।

E. प्रश्नों को ध्यान से पढ़ें। यदि परीक्षा के बीच बीच फिर से घबराहट होने लगे तो फिर से एकाग्रता के उपाय दोहराएं।

F. प्रश्नपत्र सॉल्व करने की रणनीति तय कर लें। कौनसे प्रश्न पहले सॉल्व करेंगे आदि और बिना समय बर्बाद किए उत्तर लिखना शुरु कर दें।

याददाश्त के टिप्स…..

किसी भी बात को याद रखने के लिए दिमाग उस बात का अर्थ मूल्य और औचित्य के आधार पर तय करता है। दिमाग की प्राथमिकता भी इसी क्रम में काम करती है। याद रखने की सबसे पहली सीढ़ी है अर्थ जानना, अतः किसी भी बात को याद रखने से उसका अर्थ जरूर समझिए।

यदि अर्थ ही समझ में नहीं आया है तो रटने का कोई मतलब नहीं है। इसलिए पहले जिस बात या पाठ को याद रखना है, पहले उसका अर्थ समझिए, फिर उसका महत्व और मूल्य समझिए इसके बाद आपके जीवन में उस बात का क्या औचित्य है यह जानिए।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
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