“एक क्रोध आपको कितनी तरह की हानि पहुंचाता है”


kmsraj51 की कलम से …..
TajMahal1890-kms

“एक क्रोध आपको कितनी तरह की हानि पहुंचाता है”

कई लोगों का स्वभाव होता है बात बात पर उत्तेजित हो जाना। मर्यादाएं भूल जाना। किसी पर भी फूट पडऩा। ऐसे लोग अक्सर सिर्फ नुकसान ही उठाते हैं। खुद के स्वास्थ्य का भी, संबंधों का भी और छवि का भी। हमेशा ध्यान रखें अपनी छवि का। लोग अक्सर अपनी छवि को लेकर लापरवाह होते हैं। हम जब भी परिवार में, समाज में होते हैं तो भूल जाते हैं कि हमारी इमेज क्या है और हम कैसा व्यवहार कर रहे हैं। निजी जीवन में तो और भी ज्यादा असावधान होते हैं। अच्छे-अच्छे लोगों का निजी जीवन संधाड़ मार रहा है।

अगर आप बार-बार गुस्सा करते हैं तो सबसे पहले जो चीज खोते हैं वह है आपके संबंध। क्रोध की आग सबसे पहले संबंधों को जलाती है। पुश्तों से चले आ रहे संबंध भी क्षणिक क्रोध की बलि चढ़ते देखे गए हैं। दूसरी चीज हमारे अपनों की हमारे प्रति निष्ठा। रिश्तों में दरार आए तो निष्ठा सबसे पहले दरकती है। फिर जाता है हमारा सम्मान। अगर आप बार बार किसी पर क्रोध करते हैं तो आप उसकी नजर में अपना सम्मान भी गंवाते जाते हैं। इसके बाद बारी आती है अपनी विश्वसनीयता की। हम पर से लोगों का विश्वास उठता जाता है। फिर स्वभाव और स्वास्थ्य। कहने को लोग हमारे साथ दिखते हैं, लेकिन वास्तव में वे होते नहीं है।

समाधान में चलते हैं। हमेशा चेहरे पर मुस्कुराहट रखें। कोई भी बात हो, गहराई से उस पर सोचिए सिर्फ क्षणिक आवेग में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त ना करें। सही समय का इंतजार करें। कृष्ण से सीखिए अपने स्वभाव में कैसे रहें। उन्होंने कभी भी क्षणिक आवेग में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। हमेशा परिस्थिति को गंभीरता से देखते थे। शिशुपाल अपमान करता रहा लेकिन वे सही वक्त का इंतजार करते रहे। वक्त आने पर ही उन्होंने शिशुपाल को मारा।

अपनी दिनचर्या में मेडिटेशन को और चेहरे पर मुस्कुराहट को स्थान दें। ये दोनों चीजें आपके व्यक्तित्व में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं। कभी भी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए आपको तैयार रखेगी।

Note::-
यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है::- kmsraj51@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

——————– —– https://kmsraj51.wordpress.com/ —– ——————

Advertisements

सफलता के लिए ज़रूरी है Focus !!

kmsraj51 की कलम से …..
SUCCESSSuccess Key

यह पोस्ट गोपाल मिश्रा द्वारा प्रस्तुत है…..

सफलता के लिए ज़रूरी है Focus !

ऐसा क्यों होता है कि कई बार सब कुछ होते हुए भी हम वो नहीं कर पाते जिसको करने के बारे में हमने सोचा होता है ….दृढ निश्चय किया होता ……खुद को promise किया होता है कि हमें ये काम करना ही करना है …चाहे जो हो जाए ….!!!

“सब कुछ होते हुए” से मेरा मतलब है आपके पास पर्याप्त talent, पैसा , समय , या ऐसी कोई भी चीज जो उस काम को करने के लिए ज़रूरी है ; होने से है .

2009-10 में मैंने अपने दोस्तों के साथ मिल कर Bodhitree Consulting Group (BCG) की शुरुआत की थी , इसके अंतर्गत हमने कुछ Personality Development ओर Quizzing से related programs भी किये , जो काफी पसंद किये गए ,….पर within 6-7 months BCG को बंद करना पड़ा .

आज जब मैं इस बारे में सोचता हूँ कि आखिर BCG क्यों unsuccessful रहा …तो मुझे ऐसी कोई वजह नहीं दिखती जो इस ओर इशारा करे की हमारे team में Talent, Time , या पैसे की कमी थी ….हमारे अन्दर जोश भी काफी था ….पर फिर भी हम इस venture को successful नहीं बना पाए .

तो आखिर वजह क्या थी ?


Focus-to-Succeeed-150x150Focus On Your Goal


वजह थी FOCUS.

चूँकि BCG शुरू करने का initiative मेरा ही था इसलिए मुझे इसपर पूरी तरह से अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए था …..पर मैं उस वक़्त अपनी Tata Aig की जॉब में इतना अधिक involve था कि मैं BCG पर focus नहीं कर पाया …और सबकुछ होते हुए भी हम इसे सफल नहीं बना पाए .

यह एक शाश्वत सत्य है कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में हम जिस चीज पर ध्यान केन्द्रित करते हैं उस चीज में आश्चर्यजनक रूप से विस्तार होता है . इसलिए सफल होने के लिए हमें अपने चुने हुए लक्ष्य पर पूरी तरह से focussed होना होगा ; और तभी हम उसे हकीकत बनते देख पायेंगे .

Focus करने का क्या अर्थ है ?

एक idea लो . उस idea को अपनी life बना लो – उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो , उस idea को जियो . अपने दिमाग , muscles, nerves, शरीर के हर हिस्से को उस आईडिया में डूब जाने दो , और बाकी सभी ideas को किनारे रख दो . यही सफल होने का तरीका है , यही वो तरीका है जिससे महान लोग निर्मित होते हैं .

Friends, उपरोक्त कथन Swami Vivekananda के हैं और मुझे लगता है कि Focus शब्द को शायद ही इससे अच्छे ढंग से समझा जा सकता है .

इस कथन में जहाँ स्वामी जी ने किसी एक आईडिया को अपनाना आवश्यक बताया है वहीँ दूसरी तरफ इस दौरान अन्य ideas को किनारे रखने के लिए भी कहा है. और सही मायने में यही है Focussed होना.

Focus करता क्या है ?

आपने बचपन में lens ज़रूर use किया होगा ….lens देखने में तो एक साधारण कांच का टुकड़ा लगता है …पर जब हम उसे कागज़ के किसी एक हिस्से पर focus करते हैं तो थोड़ी देर में वो कागज़ जलने लगता है …..

Focus चीजों को संभव बनाता है ….जब आप भी अपने goal पर focused रहते हैं तो मार्ग में आने वाली बाधाएं जल कर ख़ाक हो जाती हैं , आपका रास्ता साफ़ हो जाता है , और आप अपना goal achieve कर पाते हैं . Focus आपको सिर्फ यह नहीं बताता कि करना क्या है , यह भी बताता है कि क्या नहीं करना है .Focus आपको आपके goal से बांधता ही नहीं , आपको बेकार की चीजों में बंधने से बचाता भी है .

मैं हमेशा से सोचता था की मुझे कुछ बड़ा achieve करना है . मेरे लिए बड़े का अर्थ कभी lucrative jobs और अधिक पैसे कमाना नहीं रहा है, हालांकि मैं भी financially abundant होना चाहता हूँ … पर मेरे लिए जो काम बड़ा है वो है अधिक से अधिक लोगों का जीवन बेहतर बनाना . और कुछ हद्द तक मैं ऐसा अपनी NGO Kartavya के through कर पाया …पर वो मेरे लिए satisfactory नहीं था . इसीलिए जब मैंने AchhiKhabar.Com(AKC) की शुरआत की तभी मैंने ठान लिया था की अब मैं अपना पूरा focus इसी एक चीज पर रखूँगा , और तब तक रखूँगा जब तक मैं इसमें सफल नहीं हो जाता , इस दौरान मैं किसी और चीज पर ध्यान नहीं दूंगा …यहाँ तक की अपनी NGO की तरफ भी , और ना ही अपनी जॉब में exceptional होने की कोशिश करूँगा , अब मेरा एक ही लक्ष्य होगा AKC को अपनी पहली major Success Story बनाना . और आज इसे Worl’d Most Read Hindi Blog* बना कर मैं कुछ हद्द तक सफल भी हुआ हूँ , पर अभी भी मैं इसे major success नहीं कह सकता , इसमें कुछ और समय लगेगा. 🙂

क्या Focused रहना आसान है ?

नहीं , पिछले डेढ़ साल में AKC पर अपना focus बनाये रखने के लिए मैंने बहुत सी चीजों को ना कहा है ; including better job opportunities, foreign travel breaks, other promising income generating ideas, etc. Friends, अगर आपको कुछ World Class करना है तो आपको पूरी तरह से उस काम में डूबना होगा और तब तक लगे रहना होगा जब तक की आप अपने efforts को physical reality में तब्दील होते हुए ना देख लें .बीच में बहुत सारे distractions आयेंगे ; पर उस वक़्त आपको अपना focus नहीं loose करना है ….और ऐसा तभी संभव होगा जब आप अपने काम या idea में पूरी तरह से believe करते हैं . इस मुश्किल समय में जब mind में self doubt आने लगता है तब आपका belief system ही आपको distract होने से बचा सकता है . इसलिए काम शुरू करने से पहले ही आप उस पर अच्छी तरह से सोच विचार कर लीजिये , in fact आप अपने friends को आपको उस idea या plan को लेकर challenge करने के लिए भी कह सकते हैं . और अगर कोई भी तर्क -वितर्क आपकी आईडिया को लेकर आपके अन्दर doubt डालता है तो आप उस पर पुनः विचार कर सकते हैं . कुछ शुरू करने से पहले आपका अपने काम के successful होने पर believe करना बहुत ज़रूरी है आगे यही आपके FOCUS को उस पर बनाये रखने में मदद करेगा .

तो क्या focus करने का ये मतलब है कि हम और कोई काम करे ही नहीं ?

नहीं , आप और काम करते हुए भी अपना focus किसी एक चीज पर बनाये रख सकते हैं . For example: Mahendra Singh Dhoni Railways में TTE की job करते थे पर फिर भी उनका focus cricket था . आप रोज TV पर कितने ही singers और dancers को देखते हैं , वो भी और लोगों की तरह पढने जाते हैं या job करते हैं पर उनका focus तो singing या dancing होता है . इसी तरह मैंने आपके साथ World’s Youngest CEO , Suhas Gopinath की story share की थी , पढाई करते वक़्त भी उनका focus अपनी company establish करने का था ; और इसी एकाग्रता के दम पर उन्होंने छोटी सी उम्र में multi million dollar company खड़ी कर दी.

देखिये , जब तक आपके मन का काम आपको financially support नहीं करने लगता तब तक कुछ ना कुछ तो करते रहना होगा ….पर ध्यान देने की बात ये है कि आपको और चीजों को सिर्फ करना है …पर आपने अपने लिए जो Goal decide किया है उसे achieve करने के लिए आपको उसमे डूबना है , और यही आपकी success और failure के बीच का सबसे बड़ा differentiator होगा.

इतना याद रखिये कि अपने जीवन में एक normal focussed व्यक्ति एक talented unfocussed व्यक्ति से कहीं ज्यादा achieve कर सकता है . और सच पूछिए तो अगर हमने इस अनमोल जीवन को छोटी – मोटी चीजें करने में ही बिता दिया तो हमारे life की कोई value नहीं रहेगी …..हमारी अपनी नज़रों में भी ….इसलिए बड़े लक्ष्य बनाइये और उस पर focussed होकर उसे achieve करिए ….तभी जीने का असली मजा है .

—————————————————————–

Post inspired by AKC. I am grateful to Mr. Gopal Mishra & AKC (http://www.achhikhabar.com/) Thanks a lot !!



Note::-
यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है::- kmsraj51@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

——————– https://kmsraj51.wordpress.com/ ——————–

क्या बनना चाहेंगे आप : Fault Finder या Solution Seeker ?

kmsraj51 की कलम से …..
SOLUTION

यह पोस्ट गोपाल मिश्रा द्वारा प्रस्तुत है …..


बात बहुत पुरानी है , 13-14 साल पुरानी ….मैं Gorakhpur से Lucknow या शायद Lucknow से Gorakhpur जा रहा था …train मुसाफिरों से भरी हुई थी , गप लड़ाने वालों के ठहाकों और चाय -समोसा बेचने वालों के शोर के बीच एक तीखी आवाज़ कान के पर्दों को लगभग चीरते हुए मुझसे टकराई ….”सरकार चोर है. ”

और उसके बाद ऐसी लाइनों की झड़ी सी लग गयी ,क्या युवा , क्या अधेड़ और क्या बुजुर्ग हर एक व्यक्ति system को कोसने में लग गया …मैं वहीँ बैठा ये सब सुन रहा था , कुछ देर सुनता रहा , पर किसी को positively बात ना करते देख मुझसे रहा नहीं गया और मैं भी discussion में शामिल हो गया .

मैंने कहा , “ system तो हमी लोगों से बना है , अगर ये गड़बड़ है तो इसे ठीक भी हमी को करना होगा .”
“ हम कैसे ठीक कर सकते हैं , हमारे हाथ में क्या है , ये तो सरकार की जिम्मेदारी है …” ’ उधर से जवाब आया और ऐसे करते-करते बात बहस में बदल गयी …जहाँ तक मुझे याद है मेरी last lines कुछ ऐसे थीं ….”आप नहीं बदल सकते तो न सही मैं बदलूँगा system को …”

Friends, भारत में Fault Finders की कमी नहीं है …करोड़ों हैं …ज़रुरत तो Solution Seekers की है …किसी समस्या को देखकर उसे लगातार कोसना आपको part of problem बना देता है , and in fact ऐसा करके आप problem को बढाते ही हैं घटाते नहीं …so never be a part of problem try to be a part of solution.

क्या होता है जब हम Fault Finding में लगे रहते हैं ?

हम negative सोचते हैं , अपनी energy का गलत इस्तेमाल करते हैं , अपने life में और भी अधिक stress और tension attract करते हैं और सबसे बड़ी चीज हम fault को fault ही रहने देते हैं.

क्या होता है जब हम Solution Seeking में लगे रहते हैं ?

हम positive सोचते हैं , अपनी energy का सही इस्तेमाल करते हैं ,अपनी life में और भी अधिक happiness और self satisfaction attract करते हैं और सबसे बड़ी चीज हम fault को fault नहीं रहने देते उसका solution निकाल लेते हैं .

तो फिर क्या बनना पसंद करेंगे आप Fault Finder या Solution seeker?

फैसला आसान है , हर कोई यही कहेगा की वो solution seeker बनना पसंद करेगा . पर ये बोलने जितना आसान नहीं है . कोई बरसो से fault finding में लगा हो तो ये चीज उसकी habit में आ जाती है .

तो सबसे पहले आप ऐसा करिए की खुद को observe करिए , कहीं ये संक्रमण आपके अन्दर तक तो नहीं फ़ैल गया है , कहीं आप चाय में चीनी कम होने जैसी छोटी सी fault से लेकर चीनीयों की घुसपैठ जैसी गंभीर समस्या तक हर जगह fault ही तो नहीं find करते रहते ???

अब आपको इस संक्रमण को दूर करना होगा , आप इसे कई तरीकों से कर सकते हैं :

For instance जैसे ही आपको लगे कि आपने fault finding चालू कर दी है तो topic को नयी दिशा देते हुए उसके solution के बारे में बात करना शुरू कर दीजिये …. “ सरकार निठल्ली है , भला चीन कैसे हमारी सीमा में घुस सकता है …., हमें अपनी सीमा पर और सैनिक लगाने चाहिए और satellite से नज़र रखनी चाहिए …हमें International community में भी lobbying करनी चाहिए …”
आप मन ही मन ये निश्चय कर सकते हैं कि आज से आप हर एक चीज, हर एक situation चाहे वो कितनी बुरी ही क्यों न हो कुछ न कुछ अच्छा खोज कर दिखायेंगे…
अगर आदत कुछ ज्यादा ही लग गयी है तो आप अपनी फाल्ट फाइंडिंग को लिमिट भी कर सकते हैं…मैं हर रोज अधिक से अधिक तीन बातों पर negatively बात करूँगा..कोटा पूरा होते ही मैं सिर्फ और सिर्फ positive aspects पर फोकस करूँगा….and so on …
Well, हो सकता है कि “ fault finding” आपको आम सी बात लगे , और आप इसे seriously न लें पर यकीन जानिये अगर आप इससे suffer कर रहे हैं तो ये आपके personal development में एक बहुत बड़ा bottleneck है …क्योंकि जब आप अपने mind को fault find करने के लिए train कर देते हैं तो वो सिर्फ सरकार और देश की ही नहीं आपकी अपने लाइफ की भी fault गिनाता रहता है , आप ना जाने कब औरों को कोसते -कोसते खुद को भी कोसने लगते हैं …और इसी का बिगड़ा हुआ रूप depression में बदल जाता है ….मैं आपको डरा नहीं रहा , बस alert कर रहा हूँ , Fault Finder नहीं Solution Seeker बनिए …क्योंकि हर कोई यही चाहता है …आपका देश , आपकी company , आपकी family और आपका inner -self हर कोई यही चाहता है ….so don’t be a Fault Finder be a Solution Seeker.

All the best 🙂

———————————

Post inspired by AKC. I am grateful to Mr. Gopal Mishra & AKC (http://www.achhikhabar.com/) Thanks a lot !!


Note::-
यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है::- kmsraj51@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

————— https://kmsraj51.wordpress.com/ —————–