कर्तव्य की उपेक्षा।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ कर्तव्य की उपेक्षा। ϒ

kmsraj51-dereliction-of-duty

एक सेठ के पास बहुत सारी गायें थी। उसने उनकी देखभाल के लिए दाे नाैकर रखे। कुछ दिनाें के बाद पता चला कि गायें बहुत दुबली हाे गई हैं और कुछ मर भी चुकी हैं। सेठ को इस पर बहुत गुस्सा आया। उसने इसके लिए दाेनाें नाैकराें काे जिम्मेदार ठहराया। जांच करने पर पता चला कि दाेनाें नाैकर अपने-अपने व्यसनाें में लगे रहे। एक काे जुआ खेलने की आदत थी। गायाें की देखभाल करने में उसका मन नहीं लगता था।

अक्सर वह जुआ खेलने बैठ जाता और गायाें की देखभाल नहीं हाे पाती थी। यही बात दुसरे के साथ भी थी। वह पूजा-पाठ का व्यसनी था। वह गायाे की तरफ ध्यान नहीं देता और पूजा-पाठ में लगा रहता था। सेठ दाेनाें काे राजा के पास ले गया। राजा काे उनके बारे में फैसला करना था। लाेगाें काे लगा कि राजा पूजा-पाठ करने वाले नाैकर काे क्षमा कर देगा। लेकिन राजा ने दाेनाें काे समान दंड दिया और कहा कर्तव्य की उपेक्षा अपराध है चाहे वह किसी भी कारण से किया जाए।

प्यारे दोस्तों – जब भी कभी काेई भी जिम्मेदारी वाला कार्य आपके ऊपर हाे, अर्थांत आपके ऊपर निर्भर हाे ताे सही समय पर कार्य काे प्रधानता देते हुए सही तरह से करें।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

भाई से भाई का सच्चा स्नेह।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-KMS

ϒ भाई से भाई का सच्चा स्नेह। ϒ

BTA-KMSRAJ51

सेठ धर्मदास को फल खाने का बहुत शौक था। वो रोज तरह – तरह के फल खरीदते थे। एक दिन वो संतरे खरीद रहे थे कि अचानक खरीदते -खरीदते, उनका मन किया और उन्होंने एक फांक खायी, खाते ही वो दंग रह गये और उन्होंने विक्रेता से पूछा;???

क्या ये संतर विदेश से आये हैं? इतने स्वादिष्ट संतरे मैने कभी नहीं खाये।

विक्रेता ने बताया कि ये संतरे इसी शहर के हैं, और आज एक बूढा आदमी उसे बेच कर गया है।

सेठ जी, स्वाद का रहस्य जानने के लिए बूढ़े के पास गये और उनसे पूछा कि आपके संतरे के स्वाद का रहस्य क्या हैं?

बूढ़े व्यक्ति ने कहा: “भाई के प्रति भाई का प्यार।”

सेठ जी ने कहा वो कैसे मैं समझा नहीं।

तब बूढ़े व्यक्ति ने कहा कि ये पेड़ उसकी माँ ने लगाया था। उसके जन्म से पहले। जब माँ इस पेड़ में रोज पानी डालती थी तब मैं माँ से पूछता था।

“माँ तुम इस पेड़ में रोज पानी लगाती हो, इसका कितना ध्यान रखती हो, ये कौन है? इससे हमको क्या फायदा होगा?

तब माँ ने कहा बेटा – ये तेरा बड़ा भाई है। तू हमेशा इसका ख्याल रखना, इसको कभी ना काटना, ये तेरा साथ तब भी देगा जब तुझे अपने ठुकरा देंगे।”

तब से मुझे भी इस से प्यार हो गया और मैने इसे अपना बड़ा भाई माना और अपनी हर खुशी, हर गम इसके साथ साझा किया। समय बीतता चला गया, मैं अमेरिका चला गया और बहुत पैसा वाला बन गया, माँ और अपने इस भाई को भूल गया ।

मेरे दो बच्चे हुए, धीरे – धीरे समय ने चक्र चलाया, मुझे बिजनेस में घाटा हुआ, मेरे सब मित्र, पत्नी, बच्चे मेरा साथ छोड़ गये।

सब अपने – अपने शेयर बेच कर अलग हो गए।

मैंने अपनी सारी संपत्ति बेच कर कर्ज पटाया।

मैं अपनों के बेगानेपन, अकेलेपन, निराशा, हताशा से टूट गया।

फिर मुझे बचपन में माता की बात याद आई, मेरे पास यहाँ Return आने लायक पैसे बचे थे।

फिर मैं अपने इस टूटे – फूटे घर वापस आया, आते ही मैं अपने इस भाई से मिलकर खूब रोया। फिर मैंने इसकी देखरेख की और आज ये अपने छोटे, बूढ़े भाई को सहारा दे रहा है।

मेरे प्रति जो इसके अंदर प्यार है, वो इसके फलों में स्वाद बनकर आता है। मेरा ये भाई आज भी मेरे साथ खड़ा है।

सेठ जी ने मुड़कर देखा तो पेड़ स्वीकृति में हिल रहा था ।

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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ईश्वर से सच्चा प्रेम।

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ϒ ईश्वर से सच्चा प्रेम। ϒ

गाँव की एक अहीर बाला दूध बेचने के लिये रोजाना दूसरे गाँव जाती। रास्ते में एक नदी पड़ती। नदी किनारे दूध का डिब्बा खोलती और उसमें से एक लोटा दूध निकालती। दूध के डिब्बे में एक लोटा पानी मिलाती और नदी पार के गाँव की ओर चल पड़ती दूध बेचने। यह उसकी रोज की दिनचर्या थी।

नदी किनारे एक वृक्ष पर संत मलूकदास जी जप माला फेरते हुऐ इस अहीर बाला की गतिविधियों को रोज आश्चर्य से देखा करते। एक दिन उनसे रहा नहीं गया और ऊपर से आवाज लगा ही दी।

बेटी सुनो।

हाँ – बाबा, बोलिये ना।

बुरा न मानो तो तुमसे एक बात पूछना चाहता हूँ।

पूछिये ना बाबा, आपकी बात भी कोई बुरा मानने की होती है क्या?

बेटी – मैं रोज देखता हूँ। तुम यहाँ आती हो। दूध के डिब्बे में से एक लोटा दूध निकालती हो और डिब्बे में एक लोटा पानी मिला देती हो। क्यों करती हो तुम ऐसा?

लड़की ने नज़रें नीची कर ली।

कहा – बाबा, मैं जिस गाँव में दूध बेचने जाती हूँ ना….. वहाँ मेरी सगाई पक्की हुई है। मेरे वो वहीं रहते हैं। जबसे सगाई हुई है मैं रोज एक लोटा दूध उन्हें लेजाकर देती हूँ। दूध कम न पड़े इसलिये एक लोटा पानी डिब्बे में मिला देती हूँ।

पगली तू ये क्या कर रही है?

कभी हिसाब भी लगाया है तूने? कितना दूध – पानी कर चुकी है अभी तक तू। अपने मंगेतर के लिये?

लड़की नें नज़रें तनिक उठाते हुऐ उत्तर दिया – बाबा, जब सारा जीवन ही उसे सौंपने का फैसला हो गया तो फिर हिसाब क्या लगाना? जितना दे सकी दिया… जितना दे सकूंगी देती रहूंगी।

मलूक दास जी के हाथ से माला छूट कर नदी में जा गिरी। उस अहीर बाला के पाँव पकड़ लिये उन्होंने। बोले – बेटी, तूने तो मेरी आँखें ही खोल दी। माला का हिसाब लगाते-लगाते मैंने तो जप का मतलब ही नहीं समझा। जब सारा जीवन ही उसे सौंप दिया तो क्या हिसाब रखना? कितनी माला फेर ली?

यह है वास्तविक प्रेम ईश्वर से …..

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निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

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* चांदी की छड़ी।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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वस्तुओं को बर्वाद ना करें।

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ϒ वस्तुओं को बर्वाद ना करें। ϒ

भगवान् बुद्ध के एक अनुयायी ने कहा – प्रभु!

मुझे आपसे एक निवेदन करना है।
बुद्ध : बताओ क्या कहना है ?

अनुयायी : मेरे वस्त्र पुराने हो चुके हैं। अब ये पहनने लायक नहीं रहे। कृपया मुझे नए वस्त्र देने का कष्ट करें।

बुद्ध ने अनुयायी के वस्त्र देखे, वे सचमुच बिलकुल जीर्ण हो चुके थे और जगह जगह से घिस चुके थे।

इसलिए उन्होंने एक अन्य अनुयायी को नए वस्त्र देने का आदेश दे दिए। कुछ दिनों बाद बुद्ध अनुयायी के घर पहुंचे।

बुद्ध : क्या तुम अपने नए वस्त्रों में आराम से हो ? तुम्हे और कुछ तो नहीं चाहिए?

अनुयायी : धन्यवाद प्रभु। मैं इन वस्त्रों में बिलकुल आराम से हूँ और मुझे और कुछ नहीं चाहिए।

बुद्ध : अब जबकि तुम्हारे पास नए वस्त्र हैं तो तुमने पुराने वस्त्रों का क्या किया?

अनुयायी : मैं अब उसे ओढने के लिए प्रयोग कर रहा हूँ ?

बुद्ध : तो तुमने अपनी पुरानी ओढ़नी का क्या किया?

अनुयायी : जी मैंने उसे खिड़की पर परदे की जगह लगा दिया है।

बुद्ध : तो क्या तुमने पुराने परदे फ़ेंक दिए ?

अनुयायी : जी नहीं, मैंने उसके चार टुकड़े किये और उनका प्रयोग रसोई में गरम पतीलों को आग से उतारने के लिए कर रहा हूँ।

बुद्ध : तो फिर रसॊइ के पुराने कपड़ों का क्या किया ?

अनुयायी : अब मैं उन्हें पोछा लगाने के लिए प्रयोग करूँगा।

बुद्ध : तो तुम्हारा पुराना पोछा क्या हुआ?

अनुयायी : प्रभु वो अब इतना तार – तार हो चुका था कि उसका कुछ नहीं किया जा सकता था। इसलिए मैंने उसका एक – एक धागा अलग कर दिए की बातियाँ तैयार कर लीं …. उन्ही में से एक कल रात आपके कक्ष में प्रकाशित था।

बुद्ध अनुयायी से संतुष्ट हो गए। वे प्रसन्न थे कि उनका शिष्य वस्तुओं को बर्वाद नहीं करता और उसमे समझ है कि उनका उपयोग किस तरह से किया जा सकता है।

मित्रों, आज जब प्राकृतिक संसाधन दिन – प्रतिदिन कम होते जा रहे हैं ऐसे में हमें भी कोशिश करनी चाहिए कि चीजों को बर्वाद ना करें और अपने छोटे छोटे प्रयत्नों से इस धरा को सुरक्षित बना कर रखें।

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लघुकथा – खीर।

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Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ लघुकथा – खीर। ϒ

लघुकथा - खीर-KMSRAJ51

बेटा सुबह दस बजे खाना खाकर चला जाता था। बूढ़े पिताजी को आंख से न के बराबर दिखाई देता था। पिताजी दोपहर में खाना खाते थे।
इत्तेफाक से एक दिन जैसे ही बेटा खाने बैठा, पिता जी को आवाज लगा दी …..  “खाना खा लीजिये पिताजी।”

पत्नी ने मना करते हुये कहा : अभी उनका खाना खाने का टाईम नहीं हुआ है।

बेटे की आवाज सुनकर पिताजी बेटे के पास आकर बैठ गये तो बेटे ने अपनी थाली पिताजी की ओर बढ़ा दी।

खाना खाते वक्त पिताजी ने खुशी जाहिर की :

“अरे वाह। आज तो बहु ने खीर बनाया है।
आज भोजन करने में बहुत आनन्द आ रहा है बेटा।
बहुत दिनों से खीर खाने की इच्छा हो रही थी।”

बेटे का दिल धक से रह गया। बहुत मुश्किल से अपनी सिसकियों को रोक पाया।
आखों से लगातार आंसू झरने लगे।
.
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____ ….. क्योंकि खीर तो रोज ही बनती थी।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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स्वामी विवेकानंद के जीवन से – उत्कृष्ट सोच।

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ϒ स्वामी विवेकानंद के जीवन से – उत्कृष्ट सोच। ϒ

Swami-Vivekananda Kmsraj51

एकबार एक विदेशी सुंदर लड़की ने स्वामी विवेकानन्द जी से कहा “मैं आपसे शादी करना चाहती हूँ”. (एक विदेशी महिला ने विवेकानंद से कहा।)

विवेकानंद ने पूछा – “क्यों देवी, पर मैं तो ब्रह्मचारी हूँ?”

महिला ने जवाब दिया – “क्योंकि मुझें आपके जैसा ही एक पुत्र चाहिए, जो पूरी दुनिया में मेरा नाम रौशन करे और वो केवल आपसे शादी करके ही मिल सकता है मुझें।”

“इसका और एक उपाय है”- विवेकानंद जी कहते हैं …..

विदेशी महिला पूछती है – “क्या?”

विवेकानंद जी ने मुस्कुराते हुए कहा -“आप मुझे ही अपना पुत्र मान लीजिये और आप मेरी माँ बन जाइए ऐसे में आपको मेरे जैसा
पुत्र भी मिल जाएगा और मुझे अपना ब्रह्मचर्य भी नही तोड़ना पड़ेगा।”

महिला हत-प्रभ होकर विवेकानंद जी को ताकने लगी और रोने लग गयी।

ये होती है महान आत्माओ की विचार धारा।

“पूरे समुंद्र का पानी भी एक जहाज को नहीं डुबा सकता, जब तक पानी को जहाज अन्दर न आने दे।”

दोस्तो – इसी तरह “दुनिया का कोई भी नकारात्मक विचार आपको नीचे नहीं गिरा सकता, जब तक आप उसे अपने अंदर आने की अनुमति न दें।”

Swami Vivekananda-kmsraj51

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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धर्म भ्रष्ट या अहंकार।

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Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ धर्म भ्रष्ट या अहंकार। ϒ

एक दिन पंडित को प्यास लगी, संयोगवश घर में पानी नही था। इसलिए उनकी पत्नी पडोस से पानी ले आई। पानी पीकर पंडित ने पूछा…..

पंडित – कहाँ से लायी हो बहुत ठंडा पानी है।

पत्नी – पडोस के कुम्हार के घर से। (पंडित ने यह सुनकर लोटा फैंक दिया और उसके तेवर चढ़ गए वह जोर-जोर से चीखने लगा).

पंडित – अरी तूने तो मेरा धर्म भ्रष्ट कर दिया, कुंभार (शुद्र) के घर का पानी पिला दिया। पत्नी भय से थर-थर कांपने लगी, उसने पण्डित से माफ़ी मांग ली।

पत्नी – अब ऐसी भूल नही होगी। शाम को पण्डित जब खाना खाने बैठा तो घर में खाने के लिए कुछ नहीं था।

पंडित – रोटी नहीं बनाई, भाजी नहीं बनाई।

पत्नी – बनायी तो थी लेकिन अनाज पैदा करनेवाला कुणबी(शुद्र) था, और जिस कढ़ाई में बनाया था वो लोहार (शुद्र) के घर से आई थी। सब फेक दिया।

पंडित – तू पगली है क्या कही अनाज और कढ़ाई में भी छुत होती है? यह कह कर पण्डित बोला की पानी तो ले आओ।

पत्नी – पानी तो नही है जी।

पंडित – घड़े कहाँ गए?

पत्नी – वो तो मेने फैंक दिए क्योंकि कुम्हार के हाथ से बने थे।

पंडित – बोला दूध ही ले आओ वही पीलूँगा।
पत्नी – दूध भी फैंक दिया जी क्योंकि गाय को जिस नौकर ने दुहा था वो तो नीची (शुद्र) जाति से था न।

पंडित – हद कर दी तूने तो यह भी नही जानती की दूध में छूत नही लगती है।

पत्नी – यह कैसी छूत है जी जो पानी में तो लगती है, परन्तु दूध में नही लगती। पंडित के मन में आया कि दीवार से सर फोड़ ले। गुर्रा कर बोला – तूने मुझे चौपट कर दिया है जा अब आंगन में खाट डाल दे मुझे अब नींद आ रही है।

पत्नी – खाट! उसे तो मैने तोड़ कर फैंक दिया है क्योंकि उसे शुद्र (सुतार) जात वाले ने बनाया था।

पंडित चीखा – ओ फुलो का हार लाओ भगवन को चढ़ाऊंगा ताकि तेरी अक्ल ठिकाने आये।

पत्नी – फेक दिया उसे माली (शुद्र) जाती ने बनाया था।

पंडित चीखा – सब में आग लगा दो, घर में कुछ बचा भी हैं या नहीं।

पत्नी – हाँ यह घर बचा है, इसे अभी तोडना बाकी है क्योंकि इसे भी तो पिछड़ी जाति के मजदूरों ने बनाया है। पंडित के पास कोई जबाब नही था। उसकी अक्ल तो ठिकाने आ गई। पंडित काे अपने अहंकार व अज्ञान का बाेध हाे गया था।

दोस्तों, कहने काे ताे २१ वीं सदी में इंसान ने बहुत तरक़्क़ी की है, लेकिन अभी भी छूत व अछूत के राेग में जक़ड़ा हुआँ हैं। आखिर कब तक इंसान इस छूत व अछूत के राेग से मुक्त हाे पायेगा।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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प्रभु ने मेरी लाज रख ली।

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ϒ प्रभु ने मेरी लाज रख ली। ϒ

‘संत कंवर राम’ की प्रभु भक्ति….. सिंध प्रांत में ‘कंवर राम’ नामक एक प्रसिद्ध संत हो गए हैं। वे गांव-गांव जाकर भगवद्भजन के माध्यम से भक्ति का प्रचार करते और लोगों को अध्यात्म, नैतिक गुणों तथा सांप्रदायिक सद्भाव की सीख देते। एक बार उनका मुकाम डहरकी नामक एक गांव में था।

एक दिन एक गरीब विधवा का एकमात्र शिशु ईश्वर को प्यारा हो गया और वह उसके वियोग में जोर-जोर से विलाप करने लगी। उसका शोक एक वृद्ध पुरुष से देखा न गया और उसने महिला से कहा : “बेटी, वृथा शोक न कर यहां संत कंवर राम नामक एक महात्मा पधारे हैं। उनका आज रात्रि में मंदिर में भजन-कीर्तन है, तू संत से उसके चिरायु होने का आशीर्वाद मांगना। उनकी कृपा से तुम्हारा शिशु जीवित हो सकता है, मगर इसके मृतक होने की बात उनसे छिपाए रखना।”

महिला ने सुना, तो उसके मन में आशा जागी और अपने मृत बालक को चादर में लपेटकर वह रात्रि को मंदिर पहुंच गई और शिशु को कंवर राम जी के चरणों पर रखकर कहा : “भगत साहिब मैं अपने इस नन्हे शिशु के चिरजीवन की कामना लिए आपके पास आई हूं। कृपया इसे भागवत्राम का मंत्र देकर मुझ अबला को कृतार्थ करें।”

महिला की बातों पर विश्वास करके संत जी ने शिशु को भागवत्राम का श्रवण कराया। मंत्र के समाप्त होने की देर थी कि बेजान शिशु के शरीर में जान आ गई और वह हाथ-पैर हिलाने लगा। यह चमत्कार देखते ही महिला संत जी के चरणों पर गिर पड़ी और उसने सारी बात बताकर असत्य बोलने के लिए क्षमा मांगी।

किंतु कंवर रामजी को बड़ा दुख हुआ उन्होंने महिला से कहा : “आपको ऐसा नहीं करना था, हमें प्रभु की करनी को’ होनी मानकर स्वीकार कर लेना चाहिए, इसी में हमारी भलाई है। यह तो अच्छा ही हुआ कि प्रभु ने मेरी लाज रख ली और मुझे दुविधा से बचा लिया।”

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शिक्षा का निचोड़ क्या है?

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ϒ शिक्षा का निचोड़ क्या है? ϒ

काशी में गंगा के तट पर एक संत का आश्रम था। एक दिन उनके एक शिष्य ने पूछा “गुरुवर, शिक्षा का निचोड़ क्या है?”

संत ने मुस्करा कर कहा….. “एक दिन तुम खुद-ब-खुद जान जाओगे।” बात आई गई हो गई।

कुछ समय बाद एक रात संत ने उस शिष्य से कहा….. “वत्स, इस पुस्तक को मेरे कमरे में तख्त पर रख दो।” शिष्य पुस्तक लेकर कमरे में गया लेकिन तत्काल लौट आया। वह डर से कांप रहा था।

संत ने पूछा….. क्या हुआ? इतना डरे हुए क्यों हो?

शिष्य ने कहा… “गुरुवर, कमरे में सांप है।”

संत ने कहा….. “यह तुम्हारा भ्रम होगा। कमरे में सांप कहां से आएगा। तुम फिर जाओ और किसी मंत्र का जाप करना। सांप होगा तो भाग जाएगा।”

शिष्य दोबारा कमरे में गया। उसने मंत्र का जाप भी किया लेकिन सांप उसी स्थान पर था। वह डर कर फिर बाहर आ गया और संत से बोला… “सांप वहां से जा नहीं रहा है।”

संत ने कहा….. “इस बार दीपक लेकर जाओ। सांप होगा तो दीपक के प्रकाश से भाग जाएगा।”

शिष्य इस बार दीपक लेकर गया तो देखा कि वहां सांप नहीं है। सांप की जगह एक रस्सी लटकी हुई थी। अंधकार के कारण उसे रस्सी का वह टुकड़ा सांप नजर आ रहा था।

बाहर आकर शिष्य ने कहा “गुरुवर, वहां सांप नहीं रस्सी का टुकड़ा है। अंधेरे में मैंने उसे सांप समझ लिया था।”

संत ने कहा….. “वत्स, इसी को भ्रम कहते हैं। यह संसार गहन भ्रम जाल में जकड़ा हुआ है। ज्ञान के प्रकाश से ही इस भ्रम जाल को मिटाया जा सकता है। यही शिक्षा का निचोड है।”

दोस्तों, वास्तव में अज्ञानता के कारण हम बहुत सारे भ्रमजाल पाल लेते हैं और आंतरिक दीपक के अभाव में उसे दूर नहीं कर पाते। यह आंतरिक दीपक का प्रकाश निरंतर स्वाध्याय और ज्ञानार्जन से मिलता है। जब तक आंतरिक दीपक का प्रकाश प्रज्वलित नहीं होगा, लोग भ्रमजाल से मुक्ति नहीं पा सकते।

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आज के युवा।

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ϒ आज के युवा। ϒ

बेटा अनुज सुन ताे जरा, अनुज क्या हुआ माँ?
मेरे सिर में दर्द हाे रहा है, दवा ला दें।

इतनी रात को कहाँ दवा मिलेगी माँ ? तुम बाम लगा के सो जाओ। उखड़ी आवाज़ से अनुज ने कहा और वापस अपने कमरे में आ गया। “हाँ जानू, बोलो।” वो अपना हेडफोन कानो में डालते हुए बोला।

“क्या हुआ था?” दुसरी ओर से मीठी आवाज आई।

“अरे कुछ नहीं, माँ को सरदर्द हो रहा था, दवाई लाने के लिए बोल रही थी।”
“तो ले आते न।”

“इतनी रात को कौनसी दूकान खुली होगी? और वैसे भी माँ के ये रोज का ही हैं। तुम जो…..” इतना कहा ही थी कि मोबाइल में बीप-बीप की आवाज आ गई।

“ओह नो! लगता हैं बैलेंस ख़त्म होने वाला हैं।”
“तो अब…..”
“रुको, मैं कुछ करता हूँ।” उसने फ़ोन रखा और बाहर निकल गया।
“कहाँ जा रहे हो बेटा…..?” माँ ने पूछा।
“तुम्हारे लिए दवाई लाने माँ…..” उसने जवाब दिया।

दोस्तो, मैं यह नही कहता कि, हर कोई ऐसा है लेकिन ऐसा भी नही कि अनुज जैसो कि दुनियाँ में कोई कमी भी हो।

दोस्तो, इस घटना को आपके सामने रखने का सिर्फ़ इतना ही मक़सद हैं कि माता-पिता अपनी सुख-सुविधाओं का त्याग कर हमारे लिए जो कुछ उन से बन पड़ता हैं वो करते हैं, और हम उनका ये ऋण कभी नही चुका सकते लेकिन हमारा भी ये फ़र्ज बनता हैं कि हम उनकी जरूरतो कि कभी भी अनदेखी न करे।

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क्या अच्छा है क्या बुरा।

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ϒ क्या अच्छा है क्या बुरा। ϒ

Two Friends-kmsraj51

दो मित्र रेगिस्तान में से जा रहे थे।

रास्ते में दोनों में किसी बात को लेकर तू – तू, मैं – मैं हो गई। बात इतनी बढ़ गई की एक मित्र ने दूसरे को ज़ोर का थप्पड़ जमा दिया।
जिसे थप्पड़ पड़ा वह झुका और वहां बालू पर लिख दिया, “आज मेरे मित्र ने मुझे थप्पड़ मारा।”

दोनों मित्र चलते रहे, उन्हें आगे एक पानी का तालाब दिखा, उन्होंने नहाने का निर्णय लिया। जिस मित्र को झापड़ पड़ा था, वह नहाते वक्त दलदल में फँस गया, किंतु उसके मित्र ने उसे बचा लिया।

तब उसने एक पत्थर पर लिखा, “आज मेरे प्रिय मित्र ने मेरी जान बचाई।”

जिसने उसे थप्पड़ मारा और जान बचाई, उसने पूछा, “जब मैंने तुम्हें मारा तो तुमने बालू में लिखा और जब मैंने तुम्हारी जान बचाई तो तुमने पत्थर पर लिखा, ऐसा क्यों?”

मित्र ने कहा, “जब कोई हमारा दिल दुखाये, तो हमें बालू में लिखना चाहिए क्योंकि उसको भुला देना ही अच्छा है, क्षमा रुपी वायु एवं जल शीघ्र ही उसे मिटा देगा।”

“किंतु जब कोई अच्छा करे, उपकार करे तो हमे उस अनुभव को पत्थर पर लिखना चाहिए जिससे कि कोई भी उसे मिटा न सके, वो हमें हमेशा याद रहे।”

दोस्तो – जिंदगी है तो अच्छे-बुरे अनुभव तो होते ही रहेगें, महत्वपूर्ण ये हैं कि हम क्या याद रखते हैं, और क्या भूल जाते हैं।

Image : by http://azcoloring.com/

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सच्चा सुख।

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ϒ सच्चा सुख। ϒ

एक युवक जो कि एक विश्वविद्यालय का विद्यार्थी था। एक दिन शाम के समय एक प्रोफ़ेसर साहब के साथ टहलने निकला हुआ था। यह प्रोफ़ेसर साहब सभी विद्यार्थियों के चहेते थे, और विद्यार्थी भी उनकी दयालुता के कारण उनका बहुत आदर करते थे। टहलते-टहलते वह विद्यार्थी प्रोफ़ेसर साहब के साथ काफ़ी दूर तक निकल गया और तभी उन दोनों की दृष्टि एक जोड़ी फटे हुए जूतों पर पड़ी। उन दोनों को वह जूते एक गरीब किसान के लगे जो कि पास के ही किसी खेत में मजदूरी कर रहा था और बस आने ही वाला था।

वह विद्यार्थी प्रोफ़ेसर साहब की ओर मुड़ा और बोला, “आइये इन जूतों को छुपा देते हैं,” और फिर हम लोग इन झाड़ियों के पीछे छुप जाते हैं। जब वह किसान काम करके वापस आएगा और अपने जूतों को ढूंढेगा तो उसे परेशान होकर इधर-उधर ढूंढ़ता देखने पर कितना मज़ा आएगा।

इस पर प्रोफेसर साहब बोले, मेरे प्यारे दोस्त।

हमें कभी भी किसी गरीब को दुखी करके ख़ुश नहीं होने चाहिए।

तुम तो काफ़ी अमीर हो और तुम्हें अच्छा ख़ासा जेब खर्च मिलता है। तुम एक काम करो। इन दोनों जूतों में तुम बीस-बीस रुपये डाल दो, और फ़िर हम लोग देखेंगे कि जब किसान को यह पैसा मिलेगा तो तुम्हें कैसा महसूस होता है। उस विद्यार्थी ने ठीक वैसा ही किया और फ़िर दोनों पास की एक झाड़ी के पीछे छुप गए।

जल्दी ही उस गरीब किसान का काम समाप्त हो गया और वह लौट कर वहीँ आया जहाँ उसने अपने फटे पुराने जूते उतारे थे। जैसे ही उसने एक पैर जूते में डाला, उसे लगा कि पैर में कोई कागज़ सा छू रहा है। जब उसने जूते में हाथ डालकर देखा तो एक बीस रुपये का नोट पाया। उसके चेहरे पर आश्चर्य के भाव स्पष्ट रूप से दिख रहे थे। उसने बीस रुपये के नोट को उलट पलट के देखा कि कहीं वह नकली तो नहीं था। फिर उसने चारों ओर देखा कि शायद कोई दिख जाये, किन्तु कोई दिखाई न दिया। अब उसने वह नोट अपनी जेब में रख लिया, और अपना पैर दूसरे जूते में डाला, किन्तु दूसरे में भी एक और नोट पाकर उसका आश्चर्य दुगना हो गया।

अब उसका अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना अत्यंत कठिन हो गया। वह अपने घुटनों के बल बैठ गया, और उसके दोनों हाथ अकस्मात् आकाश की और उठ गए। उसने आकाश की ओर देखा और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता और धन्यवाद के शब्द मानो बरबस ही उसके मुख से फूट निकले। वह दिल खोलकर बोला अपनी अस्वस्थ और असहाय पत्नी के बारे में जिसका अब वह इलाज करा पायेगा। वह बोला अपने भूख से बिलबिलाते बच्चों के बारे में जिनको वह आज भरपेट भोजन करवा पाएगा।

झाड़ियों के पीछे वह विद्यार्थी और प्रोफ़ेसर सब कुछ सुन रहे थे और उन दोनों की आँखों में ख़ुशी के आँसू थे। प्रोफ़ेसर ने विद्यार्थी से कहा, “अब बताओ यदि तुम उस गरीब किसान के फटे जूते छुपा देते तब तुम्हें ज़्यादा ख़ुशी मिलती या अब ज़्यादा ख़ुशी मिलती ?”

इस पर वह विद्यार्थी बोला, “आज आपने मुझे एक ऐसी शिक्षा दी है जो की मैं जीवन में कभी नहीं भूल पाउँगा। और, यह मैं यह पहले कभी नहीं समझ पाया था कि, जो सुख देने में है वह लेने में नहीं।”

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अपनी मदद स्वयं करें।

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ϒ अपनी मदद स्वयं करें। ϒ

एक बार तीन यात्री पहाड़ की यात्रा पर निकले। मार्ग दुश्वार था, रास्ते में धूप और थकान से उनका गला सूखने लगा। प्यासे यात्रियों की दृष्टि दूर बहते एक झरने पर पड़ी।

एक यात्री ने आसमान की ओर मुख किया और भगवान से प्रार्थना करने लगा कि वह बिना किसी प्रयास के झरने तक पहुंच जाए।

दूसरे ने मेघों को प्रसन्न करने के लिए स्तोत्र पढऩा प्रारंभ कर दिया।

तीसरा चुपचाप झरने की तरफ चल पड़ा और कुछ समय की यात्रा के बाद झरने तक पहुंच गया।
वहां उसने अपनी प्यास बुझाई और आगे की यात्रा पर निकल पड़ा।

♥ सीख ♥

भगवान भी उनकी ही सहायता करते हैं जो अपनी सहायता आप करने को तत्पर रहते हैं।

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सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

 ~KMSRAJ51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51

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सर्वश्रेष्ठ कौन है।

Kmsraj51 की कलम से…..

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© “जो दूसरों के बारे में सोंचने और उनका भला करने से नही चुकता, वही सर्वश्रेष्ठ है ।” ®

बहुत समय पहले की बात है। एक बिख्यात ऋषि गुरुकुल में बालको को शिक्षा प्रदान किया करते थे। उनके गुरुकुल में राजा महाराजा के पुत्रों से लेकर साधारण परिवार के लड़के भी पढ़ा करते थे।

वर्षो से शिक्षा प्राप्त कर रहे शिष्यों की शिक्षा आज पूर्ण हो रही थी, और सभी बड़े उत्साह के साथ अपने अपने घरो को लौटने की तैयारी कर रहे थे क़ि तभी ऋषि की तेज आवाज सभी के कानो में पड़ी, आप सभी मैदान में एकत्रित हो जाएं।

आदेश सुनते ही शिष्यों ने ऐसा किया। ऋषिवर बोले, प्रिय शिष्यों ! आज इस गुरुकुल में आपका अंतिम दिन है। मैं चाहता हूँ कि यहाँ से प्रस्थान करने से पहले आप सभी एक बाधा दौड़ में हिस्सा लें।

दौड़ शुरू हुई। वे तमाम बाधाओ को पार करते हुए, अंत में एक सुरंग के पास पहुँचे।

सुरंग में अँधेरा था और नुकीले पत्थर जैसे कुछ चमक रहे थे। जिनके चुभने से असहनीय पीड़ा का अनुभव होता था। दौड़ के बाद सभी सुरंग में अलग अलग व्यवहार कर रहे थे। दौड़ पूरा करने की होड़ में सही गलत सब कुछ भूल गए।

खैर दौड़ जैसे तैसे सभी ने पूरी की और ऋषिवर के समक्ष एकत्रित हुए। ऋषि बोले, मैं देख रहा हूँ, कुछ ने दौड़ बहुत जल्दी पूरी की और कुछ ने काफी समय लगाया। ऐसा क्यों हुआ ?

यह सुनकर एक शिष्य ने बोला, हम सभी लगभग एक ही साथ दौड़ रहे थे, पर सुरंग में पहुँचते ही स्थिति बदल गयी। कोई-कोई तो एक दूसरे को धकेलते हुए आगे बढ़ रहे थे, तो कोई संभल संभलकर आगे बढ़ रहा था।

कुछ तो ऐसे भी थे जो पैर में चुभ रहे पत्थरों को उठाकर अपनी जेब में रख रहे थे, ताकि बाद में आने वालों को पीड़ा न सहनी पड़े। इसीलिए सबने अलग-अलग समय में दौड़ पूरी की। ठीक है जिन्होंने भी पत्थर उठायें हैं वो आगे आएं और मुझे दिखाएं, ऋषि ने आदेश दिया।

कुछ शिष्य आगे आये और पत्थर निकालने लगे। पर ये क्या, जिन्हें वो पत्थर समझ रहे थे वो तो बहुमूल्य हीरे है। सभी आश्चर्य में पड़ गए। ऋषि ने कहा इन हीरों को मैंने ही सुरंग में रखा था। दुसरों के विषय में सोंचने वाले शिष्यों को ये मेरा उपहार है।

“जो दूसरों के बारे में सोंचने और उनका भला करने से नही चुकता, वही श्रेष्ठ है ।”

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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न्याय।

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ϒ न्याय। ϒ
न्याय

एक ग्वालिन नजदीक के शहर से दूध बेचकर वापस अपने गाँव आ रही थी। रास्ते में तालाब के किनारे थोड़ा – विश्राम करने बैठ गयी। वट वृक्ष की घनी छाया और पानी की ठंडी हिलोरें। थकावट के कारण ग्वालिन को नींद-सी आने लगी। उस पेड़ पर एक चंचल बन्दर का निवास था। इधर ग्वालिन को नींद आई और उधर वह बन्दर लोटे के पास रखी हुई पैसों की थैली ले भागा। जागने पर ग्वालिन को पता लगा तो उसने बहुत देर तक बन्दर के निहोरे किये, उसके बार-बार हाथ जोड़े। काफी परेशान करने के बाद बंदर ने थैली खोली। एक पैसा तालाब के पानी में फेंकता और एक पैसा उसके लोटे में। ठीक आधी पूंजी ग्वालिन के पल्ले पड़ी। ग्वालिन को मन-ही-मन बड़ा अचरज हुआ कि यह बन्दर तो अदल न्यायी निकला, दूध के पैसे दूध में और पानी के पैसे पानी में। अनजाने में ही उसने न्यायोचित फैसला कर दिया।

साभार : ‘कादम्बिनी’

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* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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