अपनी सोच(विचारों) काे बदलें।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ अपनी सोच(विचारों) काे बदलें। ϒ

मन साेच  व   कर्म।

समझें – मन का संबंध सोच व कर्म से। 

मन को सकारात्मक सोच या सकारात्मक सोच की ओर निर्देशित किया जा सकता हैं। याद रखें – मन को नकारात्मक सोच से हटाकर सकारात्मक सोच की ओर निर्देशित किया जा सकता हैं।

Change Your Thinking - Kmsraj51

सोच से ही सुख भी मिलें, सोच से ही दुखः भी मिलें। अगर सोच सकारात्मक हाे ताे कर्म भी सुकर्म हाेगें – ताे ही सुख मिलें, और अगर सोच नकारात्मक हाे ताे कर्म भी बुरे कर्म हाेगें – ताे दुखः ही दुखः मिलें। इसलिए सदैव अपने सोच व कर्म काे सकारात्मक रखें।

अग्नि चाहे दीपक की हो, चिराग की हो अथवा मोमबत्ती की लौ से हो, इसके दो ही कार्य है जलना और प्रकाश करना। यह हमारे विवेक के ऊपर निर्भर करता है कि हम इसका कहाँ उपयोग करें।

यही लौ मनुष्य के शरीर को शांत भी कर देती है, यही लौ अन्धकार को दूर कर सम्पूर्ण जगत को प्रकाशमय कर देती है। चिन्तन की बात यह है कि उपयोग करने के ऊपर निर्भर है वो उसी वस्तु से पुण्यार्जन कर सकता है तो थोड़ी चुक होने पर पापार्जन भी कर सकता है। सबकुछ साेच पर निर्भर हैं।

संसार में किसी भी वस्तु को, व्यक्ति को, स्थिति को कोसने की आवश्यकता नही है। जरुरत है उसका गुण, स्वभाव और प्रकृति समझकर समाज के हित में उपयोग करने की। दुनिया बड़ी खूबसूरत है इसे अपने विवेक, चिन्तन और शुभ आचरण से और अधिक सुन्दर बनाया जाये, यही सच्चा यज्ञ होगा। तभी सच्चे अर्थाें में शांति मिलेगी।

याद रखेंः- सर्वप्रथम काेई भी कर्म मन में_ब्लू-प्रिंट(विचारों) के रूप में तैयार हाेता हैं, और यही ब्लू-प्रिंट(विचार) कर्म के रूप मे प्रत्यक्ष हाेता हैं। जब ब्लू-प्रिंट(विचारों) सकारात्मक हाेगें ताे कर्म भी सुकर्म(अच्छे कर्म) हाेगें, और जब ब्लू-प्रिंट(विचारों) नकारात्मक हाेगें ताे कर्म भी विकर्म(बुरें) हाेगें।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

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जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51 ϒ

51 LCQof KMSRAJ51

Δ मानव मस्तिष्क असीमित शक्तियों से भरा हैं, लेकिन ये शक्तियां सुषुप्त अवस्था में है, बस ज़रूरत है इन सुषुप्त शक्तियों काे जगाने की। {1}

Δ आत्मा कि मुख्यतः तीन शक्तिया है, प्रथम – मन, द्वितीय – बुद्धि(विवेक) और तृतीय संस्कार। मन सोचने का कार्य करती है, बुद्धि(विवेक) निर्णय(Judgment) करने का कार्य करती है तथा बुद्धि के निर्णय अनुसार मानव शरीर की कर्मइंद्रियाे द्वारा जाे कर्म हाेता है वही  संस्कार के रूप में आत्मा के अंदर रिकॉर्ड हाेता रहता हैं, और संस्कार अनुसार ही काेई भी आत्मा नया शरीर(पुनर्जन्म) लेती हैं। {2}

Δ “सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।” {3}

Δ मनुष्य सदैव मनुष्य के ही रूप में जन्म लेता हैं, हा बस फ़र्क इतना ही पड़ता है कि हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर – नारी शरीर के रूप में जन्म लेती है और नारी शरीर हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर के रूप में जन्म लेती है। यह परिवर्तन चक्र हर तीन जन्म पर हाेता रहता हैं। {4}

Δ “अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे”। {5}

Δ “अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।” {6}

Δ जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।
स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥ {7}

Δ अगर कुछ बदलना है ताे सबसे पहले अपने सोच, कर्म व अपने आप काे बदलें। {8}

Δ काेई भी ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता – हा इंसान बुरे हाे सकते हैं। {9}

Δ सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता। {10}

Δ आत्मबल और मन को शक्तिशाली बनाने के लिए – आत्मा को ईश्वरीय स्मृति और सकारात्मक विचार रूपी शक्ति का भोजन दो। {11}

Δ स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत। {12}

Δ जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। {13}

Δ हमेशा अच्छे कार्य के लिए समर्थन व सहयाेग करें। चाहे उस अच्छे कार्य की अगुआई आपके दुश्मन(Eनेम्य्) के द्वारा ही हाे रही हाे। {14}

Δ मूर्खाें कि एक खासियत हाेती हैं, ओ किसी एक बात काे लेकर लंबे समय तक बैठे रहते है, और मूर्खाें काे बात-बात पर बिना किसी मतलब के भी हंसी खुब आती हैं। {15}

Δ समय न गवाये वरना पछताने के अलावा कुछ न बचेगा जीवन में। {16}

Δ आप अपने अतीत काे नही बदल सकते, लेकिन अपने वर्तमान और भविष्य काे बदलना आपके अपने हाथ में हैं। इसलिए जाे बीत गया उसे याद कर, अपने वर्तमान और भविष्य काे समाप्त ना करें। {17}

Δ आज के समय में ९७% मनुष्य यही साेचते है, कि मेरे किस्मत में जाे हाेगा वही मिलेगा और ऐसा साेचकर वह बैठ जाते हैं। आचार्य चाणक्य जी ने कितनी अच्छी बात कही हैं। “क्या पता किस्मत में ही लिखा हाे की काेशिश करने से ही मिलेगा।” {18}

Δ हमेशा अपनी सोच काे अन्य लोगों(दुसराें) से अलग रखाें तभी आपकी अपनी कुछ अलग पहचान बन पायेगी। {19}

Δ आप रहाे या ना रहाे, लेकिन ऐसा कर्म कराें जीवनभर की आपके कर्म सदैव आपकाे जिवित रखें। {20}

Δ जीवन में एक बार की हुई गलती को बार-बार सोचना अर्थात दाग पर दाग लगाना इसलिए बीती को बिन्दी लगाओ(Full Stop), और आगे बढ़ाे। {21}

Δ किस्मत, नसीब़ और लक के भराेसे रहने पर किसी काे सफलता नहीं मिलती, सफलता ताे सच्चे मन से निरन्तर कार्य करने से ही मिलती हैं। इसलिए जीवन में निरन्तर कार्य करते हुए आगे बढ़ते चलाे। {22}

Δ केवल एक ही बुरा कर्म, किसी भी मनुष्य का शानाें, शाैंकत और इज़्ज़त यू मिनटाें में मिट्टी में मिला देता हैं। जैसे रेत से बना घर त्त्वरित गिर जाता हैं। {23}

Δ बुरी बातें ना खुद सुनो, ना ही किसी काे सुनाओं। {24}

Δ सच्चा ब्राह्मण वह है जो पूर्ण शुद्धि और विधि पूर्वक हर कार्य करे। {25}

Δ ज्ञान और ध्यान का हाेना जरूरी हैं जीवन में। बिना ज्ञान और ध्यान के दिमाग शांत नहीं हाे सकता, साे जीवन में, ज्ञान और ध्यान का हाेना बहुत जरूरी हैं। {26}

Δ “आत्मविश्वास किसी भी इंसान के लिए सर्वश्रेष्ठ आत्मिक शक्ति है। अगर वह स्वयं पर विश्वास रखकर कोई कर्म करता है तो कोई भी मुश्किल उसका रास्ता नहीं रोक सकती”। {27}

Δ चोट लगाने वाले का काम है चोट लगाना और आपका काम है अपने को सदैव बचा लेना। {28}

Δ ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता, इंसान(जीवआत्मा) आैर इंसान के कर्म बुरे हाे सकते हैं। {29}

Δ किसी भी मनुष्य का परम धर्म है, सात्त्विक आहार, सात्त्विक विचार और सात्त्विक जीवन। जिससे निराेगी काया(तन-Body), दिघा॔यु जीवन और स्वस्थ मन काे प्राप्त हाे। {30}

Δ “अगर अपनी अलग पहचान बनानी है तो कुछ अलग कीजिए। जब तक दूसरों से डिफरेंट और अच्छा नहीं करेंगे, तब तक आगे बढ़ना मुश्किल है। अलग करने से रिस्क तो होता है पर कंपीटिशन भी तो कम ही रहता है।” {31}

Δ मन को प्रभू की अमानत समझकर उसे सदा श्रेष्ठ कार्य में लगाओ। {32}

Δ सदैव याद रखें जीवन का सबसे बड़ा शान है सदा खुश रहना और खुशी बांटना-यही सबसे बड़ा शान है। {33}

Δ संकल्पों की शक्ति-संकल्पों को बचाओ तो समय, बोल सब स्वत: ही बच जायेंगे। {34}

Δ अगर जीवन में सफल हाेना चाहते हैं ताे अवसर का लाभ उठाओ, समय की कद्र करो, और शब्दों को सोच समझ कर खर्च करो। {35}

Δ आत्मा रूपी पुरूष को श्रेष्ठ बनाने वाले ही सच्चे पुरूषार्थी हैं। सबसे बड़े ज्ञानी वह हैं जो सदैव आत्म-अभिमानी रहते हैं। {36}

Δ जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।
उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥ {37}

Δ सदैव याद रखें किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है। जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता। {38}

Δ अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे। {39}

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

Δ जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है। {40}

Δ जीवन में सदैव शांत मन से साेंच समझ़ कर हीं काेई निर्णय लें, और जाे निर्णय एकबार लें उसका जीवन में दृढ़ता से पालन करें। {41}

Δ याद रखें प्रत्यक्ष प्रमाण वह है जिसका हर कर्म सर्व को प्रेरणा देने वाला हाे। {42}

Δ पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है।
यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है।
यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है॥ {43}

Δ मास्टर(मालिक) का अर्थ है कि जिस शक्ति का जिस समय आह्वान करो वो शक्ति उसी समय प्रैक्टिकल स्वरूप में अनुभव हो। आर्डर किया और हाजिर। ऐसे नहीं कि आर्डर करो सहनशक्ति को और आये सामना करने की शक्ति, तो उसको मास्टर नहीं कहेंगे। तो ट्रायल करो कि जिस समय जो शक्ति आवश्यक है उस समय वही शक्ति कार्य में आती है? एक सेकण्ड का भी फर्क पड़ा तो जीत के बजाए हार हो जायेगी। {44}

Δ काेई भी इंसान जितना अध्ययन करता हैं, उतना ही उसे अपने अज्ञान का आभास होता जाता है। {45}

Δ सदैव याद रखें जीवन में सबसे बड़ी ख़ुशी तथा चुनाैती उस काम काे करने में है जिसे लाेग कहते हैं कि “तुम नहीं कर सकते” या “तुम्हारे बस की बात नहीं”। {46}

Δ मनुष्य के विचार बहते हुए पानी की तरह है, यदि हम उसमें गदंगी मिलाएँगे ताे वह नाला बन जाएगा आैर यदि ज्ञान व ध्यान रूपी सुगंध मिला देंगे ताे वही पवित्र बन जाएगा। {47}

Δ हम अपने असली स्वरूप काे भुल गये है, जिस कारण हमे अपने निजी गुण और संस्कार भी याद नही हैं। यह भुल ही सभी दुःखाे का कारण हैं।आत्मा की तीन मुख्य शक्तिया हाेती हैं। {48}

“प्रथम-मन, द्वितीय-बुद्धि और तृतीय-संस्कार।”

Δ अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,
१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥ {49}

Δ मन कि शक्ति काे सही समय पर उपयोग करें।

मन में वह असिमित शक्ति भरी हैं, जिसका सही उपयोग कर, हर असंभव कार्य काे सरलता पूर्वक संभव में बदला जा सकता हैं। मन कि शक्तियाे काे सही समय पर और सही दिशा में उपयोग करना सीखें। {50}

Δ आत्मा के सात माैलिक गुण हाेते हैं।

1. शांति (Shanti),

2. सुख (Sukh),

3. प्रेम (Prem),

4. शक्ति (Power),

5. ज्ञान (Gyan),

6. पवित्रता (शुद्धि-Purity),

7. आनंद (आत्मिक खुशी-Anand), {51}

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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इन्सान की 30 गलतियां।

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CYMY-KMSRAJ51-N

इन्सान की 30 गलतियां।

30 Human Errors

1. इस ख्याल में रहना कि जवानी और तन्दुरुस्ती हमेशा रहेगी।

2. खुद को दूसरों से बेहतर समझना।

3. अपनी अक्ल को सबसे बढ़कर समझना।

4. दुश्मन को कमजोर समझना।

5. बीमारी को मामुली समझकर शुरु में इलाज न करना।

6. अपनी राय को मानना और दूसरों के मशवरें को ठुकरा देना।

7. किसी के बारे में मालुम होना फिर भी उसकी चापलुसी में बार-बार आ जाना।

8. बेकारी में आवारा घुमना और रोज़गार की तलाश न करना।

9. अपना राज़ किसी दूसरे को बता कर उससे छुपाए रखने की ताकीद करना।

10. आमदनी से ज्यादा खर्च करना।

11. लोगों की तक़लिफों में शरीक न होना, और उनसे मदद की उम्मीद रखना।

12. एक दो मुलाक़ात में किसी के बारे में अच्छी राय कायम करना।

13. माँ-बाप की सेवा न करना और अपनी औलाद से सेवा की उम्मीद रखना।

14. किसी काम को ये सोचकर अधुरा छोड़ना कि फिर किसी दिन पुरा कर लिया जाएगा।

15. दुसरों के साथ बुरा करना और उनसे अच्छे की उम्मीद रखना।

16. आवारा लोगों के साथ उठना बैठना।

17. कोई अच्छी राय दे तो उस पर ध्यान न देना।

18. खुद हराम व हलाल का ख्याल न करना और दूसरों को भी इस राह पर लगाना।

19. झूठी कसम खाकर, झूठ बोलकर, धोखा देकर अपना माल बेचना, या व्यापार करना।

20. मुसिबतों में बेसब्र बन कर चीख़ पुकार करना।

21. भिक्षुकों, और गरीबों को अपने घर से धक्का देकर भगा देना।

22. ज़रुरत से ज्यादा बातचीत करना।

23. पड़ोसियों से अच्छा व्यवहार नहीं रखना।

24. बादशाहों और अमीरों की दोस्ती पर यकीन रखना।

25. बिना वज़ह किसी के घरेलू मामले में दखल देना।

26. बगैर सोचे समझे बात करना।

27. तीन दिन से ज्यादा किसी का मेहमान बनना।

28. अपने घर का भेद दूसरों से ज़ाहिर करना।

29. हर एक के सामने अपना दुख दर्द सुनाते रहना।

30. उपरोक्त लिखी जानकारी को नजर अंदाज करना।

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* चांदी की छड़ी।

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निश्चय ही आप विजयी होंगे, यदि आप अपनी दुर्बलता (Weakness) को अपनी ताकत में तब्दील करना सीख लें।

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What Is Clean Communication?

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What Is Clean Communication?

With the self covered by the clouds of so many external influences and many of its own negative beliefs and past experiences, the self is normally unclear about its own self. The light of spiritual knowledge brings clarity to the self, about the self. This helps me to communicate with others much more clearly than when I am not sure or clear about what is going on inside me. There is a direct connection between the quality of subtle activities in the form of thoughts and feelings going on inside me and the quality of my interaction and communication with others.

Very importantly, relationships are also connected with attitude and vision. Sometimes, I may feel I have said and done the right things to someone, yet still someone is not behaving towards me as I would wish. At such times I need to check my attitude towards that person and the vision with which I am seeing them. I may find inside a slight feeling of disapproval towards that person, a feeling of discomfort, a resistance to something in their personality. Neither of us may be conscious of it, but my negative feeling casts a shadow on the other person. They are not receiving the acceptance or respect from me, that they should (on a subtle level), although externally I may be showing them a lot of respect. This subtle lack of acceptance and respect from my end influences their ability to hear me clearly (on a subtle level), and the way they behave towards me. The practice of meditation enables me to clean out my thoughts, feelings, attitudes and vision, ensuring that what I share with others on a physical and on a subtle level is positive. Then it is much easier for me to connect with others and for others to connect with me in a positive way. This is called Clean Communication.

– Message –

Become the one who is special by seeing only specialities.

Expression: Throughout the day, among all the people you meet check if you are seeing any negative quality in them. Also check if you are seeing specialities in others or not.

Experience: Each day tell yourself, “I am special and I only see the specailaties in myself and others.” Then practice seeeing only the good qualities in others and you will become good too.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

http://wp.me/p3gkW6-mn

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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Becoming Responsible For My Destiny

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Becoming Responsible For My Destiny – Part 1

These are examples of some of the inner questions that emerge in our minds from time to time:

* Why is she rich and successful and I am not? * Why did he behave in that way with me; I’ve always behaved well with him. * Why does that one have easy success in life and the other, however hard he tries, fails at every step? * Why is he nice natured but is born blind and the other ill natured but has no health problems at all? * Why does she suffer so much? * She is so sweet, but yet everyone disrespects her. * Why did that child die at such a young age? She was so innocent. * Why did I get married to such a person? * Why am I here? * How is that student in my class so intelligent?

There are lot more questions like these that trouble us. In the case of sorrows, it is seen more than the sorrow, it is the question – why this sorrow exists in my life that troubles us. Why? What? How? When? Even so, they all have only one answer: karma.

I don’t need to go into minute details of each situation. If I see that nothing can happen without having had a justified cause in my past or in that of others, life becomes much easier to face, with responsibility and the power of courage.

– Message –

You can always be successful when there is a desire to serve others.

Expression: At the end of each day, check if you have done anything for others. Also check if there is any consciousness of ‘I’ in all the things that you do for others. When there is even the slightest trace of a desire for benefit for yourself you cannot experience either contentment or success.

Experience: Each day take up at least one thing that would bring benefit to others, irrespective of whether it will get you anything or not. When you serve with no selfishness you will find yourself succeeding in all you do.

Becoming Responsible For My Destiny – Part 2

Factors like any particular person, a group of people, the government, nature, even God, etc. cannot be held responsible for what has happened t0 me in my life, up to this moment. It is my and my responsibility alone. Equally, what my future holds depends on me to a very large extent. Rather, whatever I choose to do at this moment is already creating my destiny for tomorrow. I shouldn’t forget that the only real time I have for creating my future is the present, now.

Karma teaches me that at every step, I am the creator of my own little world, the creator of my future circumstances. I also am the creator of the environment immediately around me. On a bigger level I am a co-creator or partner, together with God, of a positive future of the world, of the world of tomorrow, of the world of peace, love and happiness. So my responsibility and my ability to influence the future is not restricted to my life alone.

That I can create the future of my choice – of love, peace and happiness, for myself and others, can appear as unreasonable optimism. It’s just being realistic. What I create is what is going to happen. If I choose to transmit love and peace in my interactions with others today, I create relationships, in the present and for the future, based on those qualities.

– Message –

Set your mind on the seat of stability and you will never become upset.

Expression: In all that you do throughout the day, check if you are able to stabilise your mind wherever and in whatever thought you want at the right moment. If you are not able to you will find yourself getting upset.

Experience: Each morning create a positive thought for yourself. For example, tell yourself “I am the one who is in control of my mind and I can set it the way I want to.” Now practice focusing on this one thought. Stabilise in this thought for sometime.

आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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Positive Consciousness

Kmsraj51 की कलम से…..

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Positive Consciousness

The habitual way in which you use the house you live in and its contents are all affected if you use them in a positive consciousness (mental state). The result is purification while interacting with the physical object, so that when the object is in use, it fulfills its function accurately, and it has also undergone a permanent change. This can happen when you are cleaning the house, cleaning any object in the house or preparing objects for a particular purpose. If such actions are done in a positive consciousness then the physical object will have such a vibration of peace and purity that no harm can be done with it and whatever action it is used to perform will be successful. Any other soul who comes into interaction with those objects will also feel the affect of their pure vibrations.

If we perform each action with the physical body in a positive consciousness, then the physical body gets purified and we can become free of illnesses.

In our relationships it is the same principle. First there needs to be that detachment in relations. Secondly, when there is a positive consciousness, I will find that my interactions have a purifying affect on all that I relate to and I can bring benefit to everyone I meet.

In this way a positive mental state enables all actions to be successful, whether at work or at home.

– Message –

Instead of thinking of the situation, think of your own stage.

Expression: When you find yourself questioning the things that are happening in your life, ask yourself if your own stage is good. The situation might be bad, but check if your own stage is good and if you have the power to face the situation.

Experience: Remind yourself that you are learning from the things that are happening so that you can improve your own stage.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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Innate (Basic) And Acquired Value

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Innate (Basic) And Acquired Value

Everything we see has what can be called its acquired value and its innate or basic value. The acquired value is that which it has picked up by coming into contact with external objects throughout its existence or life. The innate value is what it always is irrespective of its external interactions. For example, the acquired value of gold changes with the fluctuations of its price in the market. Its innate or real value is that it’s one of the most beautiful metals; very ductile, malleable, etc.

If we were asked about the qualities of any good, peaceful relationship with someone, we would quickly reply: love, trust, patience, respect, honesty, sincerity, tolerance, humility, sympathy, etc. How do we know this? Is it purely from experience? Can we remember having really experienced any of these qualities in any relationship completely and constantly? Probably no. Then how can we say it is from experience? In such a case, where does this urge for rightness come from? Our heart tells us it comes from a basic, inherent sense of what is true and good, of our innate value. Though these qualities are what we see as our ideal qualities; when I am in a weakened state, I’m unable to bring them into practice, when I want, according to the needs of the moment. They need to be strengthened inside. One of the most immediate benefits of the practice of meditation then, is to bring about this internal strengthening. My basic qualities are just waiting for a chance to emerge out in the open. Like a light bulb without current, possibility of lighting up my qualities exists, but they need to be connected to a source of power, which is exactly what meditation gives us.

Message

Inner satisfaction brings creativity.

Projection: Quite often I find myself trying to keep pace with the things that I have always been doing. I seem to be caught up in the routine to the extent that I experience monotony. I then cannot think of any newness that I can bring in my life.

Solution: It is only with my inner satisfaction that can I bring creativity in my life. For this, while doing the routine jobs that I am involved in throughout the day, I need to make special effort to keep myself content with the things that are going on and also think of new ways of doing what I am already doing. Then I will never experience boredom in my life.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

 ~KMSRAJ51

 

 

 

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