Important Thoughts For Happiness !!

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खुशी के लिए जरूरी संकल्प …..


हेलो दोस्तो! नए वर्ष का स्वागत आप इतने उत्साह और शोर-शराबे के साथ हर बार इसलिए करते हैं कि आपके दिल में कुछ पाने की उम्मीद रहती है। वे खुशियां जिनकी अपने कामना और कोशिश की पर वे न मिलीं। नया साल शुरू होते ही वे सभी अधूरे ख्वाब पूरा करने की तमन्ना प्रबल हो जाती है। ऐसा लगता है मानो जीवन ने आपको एक और मौका दिया है खुशियों को अपने पक्ष में करने का।

आप इस नए वर्ष के पहले दिन पीछे मुड़कर देखना चाहते हैं कि आखिर आपसे किस-किस क्षेत्र में चूक हुई है जिसके कारण आप मंजिल से दूर रह गए। अपने स्मृति पटल पर जोर देने पर आपको अहसास होता है कि निहायत मामूली सी कमियों व कोताहियों के कारण आप वह हासिल नहीं कर सके जिसकी आपको चाह थी।

जब आप अपनी डायरी उठाकर देखते हैं तो पाते हैं कि ज्यादातर दुखों व कष्टों का जिम्मेदार कोई और नहीं, आप खुद ही थे। शक व संशय से किसी को तकलीफ या मजा चखाने जैसे विचार और प्रवृत्ति के कारण ही आपका मन ज्यादा विचलित व बेचैन हुआ था। अपनों पर भरोसा न कर किसी दुष्ट के बहकावे में आकर अपना सुख-चैन गंवाने का नतीजा हमेशा बुरा ही निकला। इस कारण न तो आपको शांति मिली और न ही स्वास्थ्य लाभ। आपकी मूल चाहत थी खुशी।

इन सारे विश्लेषणों के बाद आपके संकल्प की सूई अब कहां जाकर रुकनी चाहिए? जी हां, खुशी के लिए संकल्प का पहला सबक यही बनता है कि अपनों पर भरोसा किया जाए। अपने बच्चे, माता-पिता, साथी, दोस्त, रिश्ते, नातेदार पर भरोसा करना सीखें, न कि उन गैर चुगलखोरों की सुनें जो आपका सुकून चुराने में माहिर हैं। किसी अपने से कोई भूल हो गई है तो उसे जीवन भर का सच न मान लें। दोस्तनुमा दुश्मन के बहकावे में आकर अपनों पर निरंतर शक करने से आप उन्हें फिर गलत करने के लिए उकसाते हैं।

कुछ कारगर संकल्प इस प्रकार करें:

– बीते समय की चीर-फाड़ कर समय बर्बाद करने के बजाय भविष्य को सुधारने के बारे में आप विचार करेंगे।

– हर किसी को माफ कर देंगे ।

– बदला लेने के लिए कोई कितना भी उकसाए, ऐसा नहीं करेंगे।

– ज्यादा भावुक हुए बिना ही जिनसे प्यार है उनका साथ देंगे।

– यथार्थ व तर्क को अहमियत देते हुए भी दिल की भी सुनेंगे।

– कोशिश करें कि छोटे-मोटे अरमान पूरे करते चलें ताकि जीने का मजा मिलता रहे।

– ज्योतिष विद्या से मिली सूचनाओं पर केवल अच्छे पहलुओं पर यकीन करें और चिंता वाली बातों को झूठा मानें ताकि गंडे-तावीज के चक्कर में आपकी जेब खाली न हो।

– इंटरनेट, फेसबुक व फोन पर पूरी तरह निर्भर नहीं होकर रूबरू होकर संवाद का मजा लें।

– अपने चाहनेवालों के सीधे संपर्क में रहें ताकि हौसला बना रहे।

– नैतिकता का वही पैमाना अपने लिए भी तय करें जो दूसरों के लिए रखें।

– अपने जलनशील स्वभाव के कारण दूसरों का सुख चैन न लूटें।

– अपने को खाने-पीने से वंचित कर त्याग व बलिदान करने जैसी कसम या संकल्प न लें, यह मूलतः अपनों को प्यार नहीं सजा देने के लिए होता है।

– किसी भी प्रकार की अति से बचने की कोशिश करें।

– बार-बार अपना मन न बदलें, एक विचार पर टिककर रहें ताकि स्थिरता रहे।

मजे की बात यह है कि ज्यादातर संकल्प आप हर बार करते हैं और वे पहले ही दिन से टूटने लगते हैं। नहीं पीने या संतुलित खाने के संकल्प, आप यह कहकर तोड़ देते हैं कि अब आज तो नया वर्ष शुरू हुआ है, आज तो जश्न का दिन है, क्या सोचना। कल से देखा जाएगा और वह कल कभी नहीं आता। इसलिए कोई सख्त इरादा करना फायदेमंद नहीं होता है। केवल मोटी-मोटी बातों की गांठ अपने जीवन में बांध लेने भर से ही जीवन की नैय्या पार लग सकती है। खुद को खुश रखना। खुशी के लिए जरूरी है कि अपनी सेहत पर ध्यान दें। दूसरों का बुरा चाहने वालों की सेहत अमूमन थोड़ी नाजुक रहती है।

किसी भी घटना या बात को बहुत ज्यादा तूल न दें। खुशी हो या गम, संयम रखें और अति उत्तेजित न हों। सामाजिक मामला हो या पारीवारिक बहुत अधिक भावना में बहकर माहौल को खराब न करें। किसी पर हाथ उठाना या अपशब्द बोलना आपको अपरिपक्व साबित करता है। अपनी मस्ती, अपनी खुशी, अपनी सफलता का पैमाना खुद तय करें। जीवन के हर क्षेत्र में आपका लक्ष्य आपका अपना होना चाहिए न कि दूसरे क्या चाहते हैं। लालच से थोड़ा बचकर चलना ही सुकून देता है।

Note::-


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कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह ~ Great Thoughts of KMSRAJ51 in Hindi !!

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** ~ Krishna Mohan Singh(kmsraj51) ~ Great Thoughts of KMSRAJ51 ~ **


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** कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह ….. **

:: Imp. Note :: ** ~ गहराई से सोचना प्रत्येक शब्द ~ **


** मेरे(kmsraj51) कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

** अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

** हमेशा मन को शांत रखना …..

** दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

** हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

** हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

** हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

** हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

** आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

** आपका कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ….. मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ!! …..

** ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!

** ~ kmsraj51 – (my personal picture/photo) ~ **

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बोर्ड परीक्षा की तैयारी ~ Board Exam preparation methods !!

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कुछ छात्रों में बोर्ड परीक्षा को लेकर एक अजीब सा डर रहता है। पूरी तैयारी के बावजूद भी उन्हें मुश्किलें आती हैं। बोर्ड परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी के अलावा जरूरी है कि इसे पूर्ण रूप से नियोजित बनाएँ।

व्यवस्थित रूप से की गई पढ़ाई द्वारा कोई भी विद्यार्थी परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकता है। यह आवश्यक है कि पहले अपेक्षाकृत आसान अध्यायों का अध्ययन करके, उसके पश्चात उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम अंक प्राप्त कर सकें। तत्पश्चात अपेक्षाकृत कठिन अध्यायों की ओर जाना चाहिए। परीक्षा में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने के लिए निम्न बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक है-

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* हमेशा लिखकर याद करें। इससे गलतियों की संभावना कम होगी।

* रटकर याद करने से बचें। इससे आशंका पूरी तरह नहीं समाप्त होती है। किसी भी विषय के मूल को पहले समझने का प्रयास करें।
कुछ छात्रों में बोर्ड परीक्षा को लेकर एक अजीब सा डर रहता है। पूरी तैयारी के बावजूद भी उन्हें मुश्किलें आती हैं।
बोर्ड परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी के अलावा जरूरी है कि इसे पूर्ण रूप से नियोजित बनाएँ।

* समय-समय पर अपने पाठ को दोहराते रहें और प्रतिदिन इसके लिए कम से कम आधे घंटे का समय निकालें।

* सैंपल पेपर में से पहले उन प्रश्नों को छाँटकर निकाल लें, जिसके उत्तर आपको नहीं आ रहे हैं।

* अंकों के प्रश्न हल करते वक्त हमेशा फार्मूला लिखें, उसके बाद प्रश्न को इस फार्मूले के आधार पर हल करें।

* हल हो चुके प्रश्नों का महत्व समझें और प्रश्न करने के पश्चात अपने उत्तर को हल से अवश्य मिलाएँ।

* लॉग व एंटीलॉग प्रश्नों का अधिक अभ्यास करें।

* भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र आदि विषयों के फार्मूले बनाकर उन्हें अपने कमरे की दीवार पर लगा लें, जिससे चलते-फिरते आप उन्हें दोहरा सकें।

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कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह ~ Great Thoughts of KMSRAJ51 in Hindi !!

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** हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

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….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

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** हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

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Soul Sustenance & Message for the day 17-12-2013 !!

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** Soul Sustenance & Message for the day 17-12-2013 **

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Soul Sustenance 17-12-2013
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Living Life On The Surface

In an ideal situation, the thoughts that run in my mind, should be exactly those that I would like and I want. We do exert this control, that we possess, over our thoughts, but it is not complete and it is only sometimes. The more we become completely engrossed in our daily routine, the more our thoughts tend to become reactions to what goes on outside us. That’s when they go out of control and our lives move in an unfocused way. As a result things don’t work out as we might have desired. Then we develop a habit of blaming other people and circumstances, or we justify our pain by telling ourselves we are not very worthy or powerful enough. Often, these two inner strategies go together. The trouble is, both are cover ups, preventing us from going for a long-term solution.

In this way, we tend to live our lives on a very superficial level, without taking the time to find the solution to what is going on wrong inside. Deeper difficulties remain hidden inside. I move from one scene of life to another – eating, watching television, studying in college, getting married, changing jobs, buying a new car or house, etc. without ever stopping. All these are part of living, but if I make them my whole and sole, my foundation, it’s as if I skate across the surface of life without being in touch with the core. As time progresses, an inner shallowness develops. Then the feeling keeps growing inside that ‘there must be more to life than this’. I then, find that my relationships are not working out as I would have hoped and they are lacking in depth.

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Message for the day 17-12-2013
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Easy nature makes tasks easy.

Expression: The ones with an easy nature constantly think of solutions instead of problems. So such individuals are free from the burden of problems and are constantly contributing to make things easy for themselves and others too. The right environment to bring out the best result is naturally created by them.

Experience: When I have an easy nature, I am able to put a full stop in a second with great ease. I am not caught with the waste questions and exclamations. So I am able to enjoy everything that comes my way and move forward constantly with lightness.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris
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Soul Sustenance & Message for the day 14-12-2013 !!

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Soul Sustenance 14-12-2013
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Self Empowerment

Meditation, in practice, means to enter, and re-enter, the reservoir of peace inside us whenever we need to during the course of the day. This exercise increases self-control and prevents the explosions and reactions of anger that drain our strength. The easy method is not to expect but to accept: then tolerance and respect make our life far more comfortable.

There may be many shadows and pollutants inside us, but usually our pain is centered around these: I own, I need, I want, mine and I expect. If we learn to recognize the characteristics of such a consciousness, we are in a position to overcome difficult situations and thoughts before they overwhelm us. We simply have to remain awake, and that state of alertness stops these shadows from overpowering us and making us unconscious.

Our needs and wants are truly fulfilled in a healthy way by tuning in to the original resources of the soul, because their fulfillment is not dependent on anyone, or anything from outside. When we sustain ourselves from the inside, then our well-being is secure and progressive. As a result, when we express and show our original qualities of the self to others, whether it is peace, happiness or love, they naturally increase inside. The more we give unconditionally, the more we have. This miracle of ‘quality being’ is the result of natural purity, the original state of selflessness, which God always has and good meditators aspire to return to.

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Message for the day 14-12-2013
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Real contentment spreads happiness to others too.

Expression: When one feels contentment but the others are not able to perceive that contenetment, it means that it is not true contentment. Real contentment is visible in such a way that others too are able to feel the happiness that is created. When there is real contentment, all thoughts, words and actions are filled with quality.

Experience: When I am content, others automatically recognise the contentment within me. They are able to take benefit from my state. Even in the most hopeless state, I find that I become a source of support for those around me. I am able to give hope to the hopeless and help them get back to a state of happiness.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris


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Strong Will Power ~ (दृण इच्छाशक्ति) !!

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** Strong Will Power(दृण इच्छाशक्ति) **

वर्तमान का समय प्रतियोगिता का समय है। आज हर कोई एक दूसरे से आगे बढना चाहता है। आगे बढने की प्रवृत्ति विकास के राह को आसान करती है। विद्यार्थी हो या व्यपारी, शोध-कर्ता हो या किसान हर कोई अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रर्दशन करना चाहता है। परन्तु कुछ लोग अपनी इच्छा के अनुरूप परिणाम को प्राप्त कर लेते हैं, तो कुछ लोग चाहत के अनुसार अपने लक्ष्य को हासिल नही कर पाते। जो अपने कार्य को दृण इच्छा शक्ति से पूर्ण करता है वो लक्ष्य को निःसंदेह हासिल करता है। नेपोलियन बोनापार्ट का कहना था कि, असम्भव शब्द मेरे शब्दकोश में नही है। लाल बहादुर शास्त्री, गाँधी जी, सुभाष चन्द्र बोस, अब्राहम लिंकन, आइंस्टाइन, सरदार पटेल, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम इत्यादि बङे-बङे महापुरूष अपनी दृण इच्छा शक्ति से ही उच्चतम शिखर पर पहुँचे और आज भी सभी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

कहने का आशय ये है कि यदि मनुष्य चाहे तो सब कुछ सम्भव है। उसे अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए कार्य को ईमानदारी से और दृण संकल्प के साथ करना चाहिए। मजबूत इच्छा विपरीत परिस्थीति में भी आगे बढने की प्रेरणा देती है। मनुष्य का मन बहुत चंचल होता है, नित नई इच्छाएं जन्म लेती रहती हैं।अतः मन की चंचलता को नियन्त्रित करने के लिए इच्छा शक्ति की दृणता अनिवार्य होती है। गीता में कहा गया है कि, “मन को वश में करना कठिन जरूर है पर असम्भव नही है।“
दृण इच्छा शक्ति के बल पर ही तेनसिहं और बछेन्द्री पाल जैसे पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट पर विजय पताका फहराई। इंग्लिश चैनल और उत्तरी ध्रुव के बर्फिले सागर को दृण इच्छा शक्ति के बल पर ही पार किया गया। लक्ष्य के प्रति दृण इच्छा रखने वाले संकल्पवान लोग इतिहास की धारा बदल देते हैं।

सफलता के लिए दृण संकल्प का होना आवशयक है किन्तु आज आगे बढना तो हर कोई चाहता है परन्तु विषम परिस्थिती में संघर्ष करना नही चाहता। परिश्रम करने से भागता है और शार्टकट तरीके से सबकुछ पाना चाहता है। लक्ष्य के प्रति दृण इच्छाशक्ति का अभाव इंसान की सबसे बङी कमजोरी है। ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि, “गहरी इच्छा हर उपलब्धि का शुरूवाती बिन्दु होती है, जिस तरह आग की छोटी लपटें अधिक गर्मी नही दे सकती वैसे ही कमजोर इच्छा बङे नतीजे नही दे सकती।“ मजबूत इरादों से ही लक्ष्य की राह आसान होती है।

गाँधी जी ने कहा था कि, “Strength Dose not come from Physical capacity. It comes from an Indomitable will.”

अपनी दृण इच्छाशक्ति और अटूट विश्वास के बल पर भारत की पहली महिला आई. पी. एस. अधिकारी किरण बेदी ने अनेकों कठिनाईयों के बावजूद अपने लछ्य को हासिल किया। एशिया का सबसे बङा ‘मेग्सस पुरस्कार’ प्राप्त कर भारत को भी गौरवान्वित किया। अनेक लोगों की प्रेरणा स्रोत किरण बेदी को संयुक्त राष्ट्र संघ में पुलिस सलाहाकार नियुक्त किया गया। (Strong will power )दृण इच्छा शक्ति से कैंसर जैसी जानलेवा बिमारी से भी जीता जा सकता है। यदि इरादे मजबूत होते हैं तो उम्र की सीमा और विकलांगता भी बाधा नही बनती। प्रेमलता अग्रवाल 48 वर्ष की उम्र में एवरेस्ट पर फतह हासिल करने वाली सबसे अधिक उम्र की पहली महिला हैं। हेलेन केलर की दृण इच्छा शक्ति के आगे उनकी दृष्टीबाधिता नत्मस्तक हो गई।

स्वामी विवेकानंद जी का कहना था कि, “पवित्र और दृण इच्छा सर्वशक्तिमान है, अतः प्रबल इच्छा को कठिन अभ्यास एवं संकल्प शक्ति द्वारा प्राप्त करना चाहिए।“

सफलता की कामना करना उत्तम विचार है। उसकी पूर्णता के लिए कार्य के आरंभ में ही दृण इच्छा को अपने में समाहित कर लेना चाहिए। ईमानदारी के साथ कार्य पूर्ण करने में अपनी सारी शक्ति लगा देनी चाहिए। दृण इच्छाशक्ति मार्ग की बाधाओं को पार कर देती है और सफलता के शिखर पर पहुँचना आसान कर देती है। अतः अपनी सोच को साकार रूप देने के लिए दृण इच्छा शक्ति (Strong Will Power) को रग-रग में संचारित कर लें।

“कुछ कर गुजरने के लिए मौसम नही मन चाहिए, साधन सभी जुट जाएंगे, संकल्प का धन चाहिए, गहन संकल्प से ही संभव है पूर्ण सफलता।”

Note::- Post inspired by : http://roshansavera.blogspot.in/

Lots of thank to “Mrs.Anita Sharma”.
Anita Sharma


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** Tu Na Ho Nirash Kabhi Man Se ….. **
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** AUM SWEET AUM ** SUMREME SOUL GOD SHIVA **

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853 साल बाद कल बनेगा ये अद्भुत संयोग, नहीं देख पाएंगे फिर कभी ~ Tomorrow will be an amazing coincidence that 853 years later, will not see ever again !!

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** 853 साल बाद कल बनेगा ये अद्भुत संयोग, नहीं देख पाएंगे फिर कभी!! **

1

साल 2013 अपनी समाप्ति की ओर है। साल के अंतिम महीने दिसंबर में आंकड़ों का एक अद्भुत योग बन रहा है। यह योग कल यानी 11 दिसंबर, बुधवार को बनेगा। ऐसा योग हजारों सालों में एक बार ही बनता है। यानी जो लोग ये योग दिसंबर में देख पाएंगे वह दोबारा यह योग कभी नहीं देख पाएंगे। इस बार आंकड़ों का यह संयोग 823 साल बाद बनने जा रहा है।

2


आंकड़ों का यह संयोग बनेगा 11 दिसंबर को। जब सुबह व रात को घड़ी में 8 बजकर 9 मिनट व 10 सेंकेंड होंगे तो उस वक्त तारीख 11 होगी, महीना 12वां होगा और साल 13। यानी इस समय 8, 9, 10, 11, 12, 13 अंक का अभूतपूर्व संयोग बनेगा। इतना ही नहीं, दिसंबर में पांच रविवार, पांच सोमवार व पांच मंगलवार भी होंगे। इस संयोग को मनी बैग्स भी कहा जाता है। आंकड़ों का यह संयोग दिलचस्प होगा।

3


यह संयोग अपने आप में ऐतिहासिक है। इस संयोग का महत्व समझने वाले इस पल को यादगार बनाने व यादें संजोने का भरसक प्रयत्न करेंगे। यह बात अलग है कि सब अपने-अपने तरीके से इस पल को संजोएंगे। कोई इस लग्न में शादी करना चाहेगा। हालांकि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस दिन विवाह के लिए कोई शुभ मूहूर्त नहीं है। यूं तो हर कोई इस अनूठे संयोग को यादगार बनाने की कोशिश करता है लेकिन कुछ संयोग निश्चित हैं। इस संयोग में जो जन्म लेने वाले बच्चों की जन्मतिथि भी इस अद्भुत संयोग में दर्ज हो जाएगी।

4

पहली व अंतिम बार आएगा
अंकों का यह खेल इस शताब्दी में पहली और आखिरी बार आएगा। दिनांक 11 अर्थात अंक 2 चंद्रमा ग्रह का अंक है, इसे अति शुभ माना जाता है। शगुन देते समय भी 11 या 101 को प्रमुखता दी जाती है ताकि कार्य शुभ हो व प्रायोजन सफल हो। महीना 12 अर्थात अंक 3 जो गुरु ग्रह का अंक है। वर्ष 2013 अंक 6 को दर्शाता है जो शुक्रग्रह का अंक है।

5

संघर्ष का परिचायक
एक महीने में तीन वारों का पांच बार आना संघर्ष का परिचायक है। ऐसी स्थिति में किसी केंद्रीय नेता का अपमानित होना, दल-बदल की स्थिति से सरकार पर संकट आना, सीमावर्ती देशों से द्वंद्व की स्थिति बनना आम बात है। हालांकि, यह स्थिति शीतकालीन फसलों के लिए लाभदायक रहती है।

6


जन्मदिन होगा यादगार
आंकड़ों के इस संयोग का ज्योतिषीय दृष्टिकोण से तो इतना महत्व नहीं है। क्योंकि इस दिन शादियों का भी कोई मूहूर्त नहीं है लेकिन यह एक यादगार पल है। इसे हर कोई अपने-अपने ढंग से दर्ज कराना चाहेगा। इस मौके पर जन्म लेने वाले बच्चों की जन्मतिथि भी अपने आप में ऐतिहासिक होगी।

Note::-
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ठंड में कैसे निखारे सुंदरता ~ How to Improve Your beauty in the cold !!

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ठंड के सुहाने दिन अगर ढेर सारे रंगों को पहनने की छूट देते हैं तो मेकअप के लिए कई सारे ऑप्शंस इस मौसम में अपनाए जा सकते हैं। डार्क कलर की लिपस्टिक से लेकर गहरे आईशैडो तक को इस मौसम में बेझिझक इस्तेमाल किया जा सकता है। ये तो हुई सामान्य मेकअप से जुड़ी बातें। चलिए जानते हैं इस साल के लिए विशेषज्ञ क्या विंटर ब्यूटी टिप्स देते हैं।

– सबसे पहले मेकअप के बेस के लिए एक अच्छी फेस क्रीम का उपयोग अवश्य करें। यह आपके मेकअप को लंबे समय तक टिकने में मदद करेगी, लेकिन ऐसी क्रीम के प्रयोग से बचें, जो नमी छोड़ने लगती हैं वरना आपके मेकअप को खराब होने से कोई नहीं बचा सकेगा। अगर मॉइश्चराइजर का प्रयोग कर रही हैं तो ऐसा प्रोडक्ट चुनें, जो लाइट कंसिस्टेंसी (तरल) का हो, ताकि आपकी स्किन उसे पूरी तरह सोख सके।

– झटपट तैयार होने और फ्रेश लुक के लिए आजमाया जाने वाला प्रचलित न्यूड मेकअप इस सर्दी में भी हॉट ट्रेंड बना रहेगा। इसके लिए सबसे ज्यादा ध्यान आपको फाउंडेशन के कोट पर देना है। यह कोट स्किन टोन को सूट भी करे और बहुत लाउड न हो, इसका ध्यान रखिए। नैचुरल आईशैडो और मस्करा जरूर अप्लाई करें। साथ ही हल्का-सा ब्लश और नैचुरल लिप ग्लॉस या लिप कलर आपके लुक को कम्प्लीट कर देंगे। आईलाइनर, मस्करा तथा लिपलाइनर आदि वॉटरप्रूफ ही चुनें। साधारण पावडर अप्लाई करने से बचें। इसी तरह क्रीम ब्लश के प्रयोग से भी बचें।

– ठंड के हिसाब से सिलीकॉन बेस्ड फाउंडेशन सबसे बढ़िया विकल्प होगा। बदलते मौसम के लिहाज से पावडर मेकअप फाउंडेशन भी चुना जा सकता है। तेज ठंड में लिक्विड फाउंडेशन न लगाएं।

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– न्यूड शेड से बिलकुल जुदा ‘वैम्पी लिप्स’ भी खासे प्रचलन में हैं, खासतौर पर शादी या पार्टी के लिहाज से। इसके तहत आप सुर्ख लाल से लेकर ऑरेंज, बरगंडी, पर्पल, मैजेंटा या डार्क ब्राउन कलर भी लिप्स पर अप्लाई कर सकती हैं, लेकिन ‘वैम्पी लिप्स’ रखते समय बाकी के मेकअप को बैलेंस रखें, हैवी न होने दें।

– एक अच्छी खबर उन लोगों के लिए जो आईब्रो को संवारने से बचना चाहते हैं। आजकल मोटी और लड़कों की तरह थोड़ी फैली आईब्रो फैशन में है। अगर आपकी आईब्रो पतली हैं तो आप काजल पेंसिल का सहारा भी ले सकती हैं। साथ ही स्मोकी आइज़ भी आज का हॉट ट्रेंड हैं।

इसके लिए आईशैडो का सही शेड चुनें, जो आपकी स्किन टोन से सूट करता हो और आई मेकअप को हाईलाइट करे। आईलाइनर की रेखा को आप थोड़ा बोल्ड रख सकती हैं। यह आजकल चलन में है। साथ ही आंखों के कोनों तक फैला आईलाइनर भी चलेगा। हां, अगर आप ज्यादा देर तक टिके रहने वाला लाइनर चाहती हैं तो जैल या सिलिकॉन बेस्ड लाइनर का प्रयोग करें।

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Message for the day 12-11-2013 !!

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The one who has the power to face is free from tensions.

Projection: To be good with those who are good is quite natural, but to be good with those who are bad is known as having the power to face. This naturally comes when there is the power to transform even that which in negative into something positive. When there is the power to face, there is no retaliation, no conflict. There is love given to all around.


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Solution: When I am able to transform and look at each and everything in a positive way, I will not have any difficulty with any situation. I will naturally be able to face all situations in a light and easy way. When I am able to be free from tension in this way, I am also able to give my best and thus become an inspiration for those around me.

Note::-


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50 Great Quotations In Hindi !!

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** 50 अनमोल वचन हिंदी में | 50 Great Quotations In Hindi **

1. जिसने ज्न्यान को आचरण में उतार लिया , उसने ईश्वर को मूर्तिमान कर लिया – विनोबा भावे

2. अकर्मण्यता का दूसरा नाम मर्त्यु है – मुसोलिनी

3. पालने से लेकर कब्र तक ज्ञान प्राप्त करते रहो – पवित्र कुरान

4. इच्छा ही सब दूखो का मूल है – गौतम बुद्ध

5. मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अज्न्यान है – चाणक्य

6. आपका आज का पुरुषार्थ आपका कल का भाग्य है – पालशिरू

7. क्रोध एक किस्म का क्षणिक पागलपन है – महात्मा गांधी

8. ठोकर लगती है और दर्द होता है तभी मनुष्य सीख पाटा है – महात्मा गांधी

9. अप्रिय शब्द पशुओ को भी नहीं सुहाते है – गौतम बुद्ध

10. नरम शब्दों से सख्त दिलो को जीता जा सकता है – सुकरात

11. गहरी नदी का जल प्रवाह शांत व गंभीर होता है – शेक्सपीयर

12. समय और समुद्र की लहरे किसी का इंतज़ार नहीं करती – अज्ञात

13. जिस तरह जौहरी ही असली हीरे की पहचान कर सकता है , उसी तरह गुनी ही गुणवान की पहचान कर सकता है – कबीर

14. जो आपको कल कर देना चाहिए था , वही संसार का सबसे का थीं कार्य है – कन्फ्यूशियस

15. ज्ञानी पुरुषो का क्रोध भीतर ही , शान्ति से निवास करता है , बाहर नहीं – खलील जिब्रान

16. कुबेर भी यदि आय से अधिक व्यय करे तो निर्धन हो जाता है – चाणक्य

17. डूब की तरह छोटे बनाकर रहो . जब घास -पात जल जाते है तब भी डूब जस की तस बनी रहती है – गुरु नानक देव

18. ईश्वर के हाथ देने के लिए खुले है . लेने के लिए तुम्हे प्रयत्न करना होगा – गुरु नानक देव

19. जो दूसरो से घृणा करता है वह स्वय पतित होता है – स्वामी विवेकानंद

20. जो जैसा शुभ व अशुभ कार्य करता है , वो वैसा ही फल भोगता है – वेदव्यास

21. मनुष्य की इच्छाओ का पेट आज तक कोइ नहीं भर सका है – वेदव्यास

22. नम्रता और मीठे वचन ही मनुष्य के सच्चे आभूषण होते है – तिरूवल्लुवर

23. खुदा एक दरवाजा बंद करने से पहले दूसरा खोल देता है , उसे प्रयत्न कर देखो – शेख सादी

24. बुरे आदमी के साथ भी भलाई करनी चाहिए – कुत्ते को रोटी का एक टुकड़ा डालकर उसका मुंह बंद करना ही अच्छा है – शेख सादी

25. अपमानपूर्वक अमरत पीने से तो अच्छा है सम्मानपूर्वक विषपान – रहीम

26. थोड़े से धन से दुष्ट जन उन्मत्त हो जाते है – जैसे छोटी , बरसाती नदी में थोड़ी सी वर्षा से बाढ़ आ जाती है – गोस्वामी तुलसीदास

27. ईश प्राप्ति (शान्ति ) के लिए अंत: कारन शुद्ध होना चाहिए – रविदास

28. जब मई स्वय पर हँसता हूँ तो मेरे मन का बोज़ हल्का हो जाता है – टैगोर

29. जन्म के बाद मर्त्यु , उत्थान के बाद पतन , संयोग के बाद वियोग , संचय के बाद क्षय निश्चित है . ज्ञानी इन बातो का ज्न्यान कर हर्ष और शोक के वशीभूत नहीं होते – महाभारत

30. जननी जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढाकर है – अज्ञात

31. भरे बादल और फले वर्कश नीचे ज़ुकारे है , सज्जन ज्न्यान और धन पाकर विनम्र बनाते है – अज्ञात

32. सोचना, कहना व करना सदा सम्मान हो – अज्ञात

33. न कल की न काल की फिकर करो , सदा हर्षित मुख रहो – अज्ञात

34. स्व परिवर्तन से दूसरो का परिवर्तन करो – अज्ञात

35. ते ते पाँव पसारियो जेती चादर होय – अज्ञात

36. महान पुरुष की पहली पहचान उसकी विनम्रता है – अज्ञात

37. बिना अनुभव कोरा शाब्दिक ज्न्यान अँधा है – अज्ञात

38. क्रोध सदैव मूर्खता से प्रारम्भ होता है और पश्चाताप पर समाप्त – अज्ञात

39. नारी की उन्नति पर ही राष्ट्र की उन्नति निर्धारित है – अज्ञात

40. धरती पर है स्वर्ग कहा – छोटा है परिवार जहा – अज्ञात

41. दूसरो का जो आचरण तुम्हे पसंद नहीं , वैसा आचरण दूसरो के प्रति न करो – अज्ञात

42. नम्रता सारे गुणों का दर्द स्तम्भ है – अज्ञात

43. बुद्धिमान किसी का उपहास नहीं करते है – अज्ञात

44. हर अच्छा काम पहले असंभव नजर आता है – अज्ञात

45. पुस्तक प्रेमी सबसे धनवान व सुखी होता है – अज्ञात

46. सबसे उत्तम बदला क्षमा करना है – अज्ञात

47. आराम हराम है – अज्ञात

48. दो बच्चो से खिलाता उपवन , हंसते -हंसते कटता जीवन – अज्ञात

49. अगर चाहते सुख समर्द्धि , रोको जनसंख्या वर्द्धि – अज्ञात

50. कार्य मनोरथ से नहीं , उद्यम से सिद्ध होते है . जैसे सोते हुए सिंह के मुंह में मुर्गे अपने आप नहीं चले जाते – विष्णु शर्मा!

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** KMSRAJ51 की कलम से 65 ~ सद्विचार **


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1. इस संसार में प्यार करने लायक दो वस्तुएँ हैं-एक दुःख और दूसरा श्रम । दुख के बिना हृदय निर्मल नहीं होता और श्रम के बिना मनुष्यत्व का विकास नहीं होता ।

2. ज्ञान का अर्थ है-जानने की शक्ति । झूठ को सच से पृथक् करने वाली जो विवेक बुद्धि है-उसी का नाम ज्ञान है ।

3. अध्ययन, विचार, मनन, विश्वास एवं आचरण द्वार जब एक मार्ग को मजबूती से पकड़ लिया जाता है, तो अभीष्ट उद्देश्य को प्राप्त करना बहुत सरल हो जाता है ।

4. आदर्शों के प्रति श्रद्धा और कर्तव्य के प्रति लगन का जहाँ भी उदय हो रहा है, समझना चाहिए कि वहाँ किसी देवमानव का आविर्भाव हो रहा है ।

5. कुचक्र, छद्म और आतंक के बलबूते उपार्जित की गई सफलताएँ जादू के तमाशे में हथेली पर सरसों जमाने जैसे चमत्कार दिखाकर तिरोहित हो जाती हैं ।
बिना जड़ का पेड़ कब तक टिकेगा और किस प्रकार फलेगा-फूलेगा ।

6. जो दूसरों को धोखा देना चाहता है, वास्तव में वह अपने आपको ही धोखा देता है ।

7. समर्पण का अर्थ है-पूर्णरूपेण प्रभु को हृदय में स्वीकार करना, उनकी इच्छा, प्रेरणाओं के प्रति सदैव जागरूक रहना और जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे परिणत करते रहना ।

8. मनोविकार भले ही छोटे हों या बड़े, यह शत्रु के समान हैं और प्रताड़ना के ही योग्य हैं ।

9. सबसे महान् धर्म है, अपनी आत्मा के प्रति सच्चा बनना ।

10. सद्व्यवहार में शक्ति है । जो सोचता है कि मैं दूसरों के काम आ सकने के लिए कुछ करूँ, वही आत्मोन्नति का सच्चा पथिक है ।

11. जिनका प्रत्येक कर्म भगवान् को, आदर्शों को समर्पित होता है, वही सबसे बड़ा योगी है ।

12. कोई भी कठिनाई क्यों न हो, अगर हम सचमुच शान्त रहें तो समाधान मिल जाएगा ।

13. सत्संग और प्रवचनों का-स्वाध्याय और सदुपदेशों का तभी कुछ मूल्य है, जब उनके अनुसार कार्य करने की प्रेरणा मिले । अन्यथा यह सब भी कोरी बुद्धिमत्ता मात्र है ।

14. सब ने सही जाग्रत् आत्माओं में से जो जीवन्त हों, वे आपत्तिकालीन समय को समझें और व्यामोह के दायरे से निकलकर बाहर आएँ । उन्हीं के बिना प्रगति का रथ रुका पड़ा है ।

15. साधना एक पराक्रम है, संघर्ष है, जो अपनी ही दुष्प्रवृत्तियों से करना होता है ।

16. आत्मा को निर्मल बनाकर, इंद्रियों का संयम कर उसे परमात्मा के साथ मिला देने की प्रक्रिया का नाम योग है ।

17. जैसे कोरे कागज पर ही पत्र लिखे जा सकते हैं, लिखे हुए पर नहीं, उसी प्रकार निर्मल अंतःकरण पर ही योग की शिक्षा और साधना अंकित हो सकती है ।

18. योग के दृष्टिकोण से तुम जो करते हो वह नहीं, बल्कि तुम कैसे करते हो, वह बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण है ।

19. यह आपत्तिकालीन समय है । आपत्ति धर्म का अर्थ है-सामान्य सुख-सुविधाओं की बात ताक पर रख देना
और वह करने में जुट जाना जिसके लिए मनुष्य की गरिमा भरी अंतरात्मा पुकारती है ।

20. जीवन के प्रकाशवान् क्षण वे हैं, जो सत्कर्म करते हुए बीते ।

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21. प्रखर और सजीव आध्यात्मिकता वह है, जिसमें अपने आपका निर्माण दुनिया वालों की अँधी भेड़चाल के अनुकरण से नहीं,
वरन् स्वतंत्र विवेक के आधार पर कर सकना संभव हो सके ।

22. वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं ।

23. बलिदान वही कर सकता है, जो शुद्ध है, निर्भय है और योग्य है ।

24. जिस आदर्श के व्यवहार का प्रभाव न हो, वह फिजूल है और जो व्यवहार आदर्श प्रेरित न हो, वह भयंकर है ।

25. भगवान जिसे सच्चे मन से प्यार करते हैं, उसे अग्नि परीक्षाओं में होकर गुजारते हैं ।

26. हम अपनी कमियों को पहचानें और इन्हें हटाने और उनके स्थान पर सत्प्रवृत्तियाँ स्थापित करने का उपाय सोचें, इसी में अपना व मानव मात्र का कल्याण है ।

27. हर वक्त, हर स्थिति में मुस्कराते रहिये, निर्भय रहिये, कर्त्तव्य करते रहिये और प्रसन्न रहिये ।

28. प्रगति के लिए संघर्ष करो । अनीति को रोकने के लिए संघर्ष करो और इसलिए भी संघर्ष करो कि संघर्ष के कारणों का अन्त हो सके ।

29. धर्म की रक्षा और अधर्म का उन्मूलन करना ही अवतार और उसके अनुयायियों का कर्त्तव्य है ।
इसमें चाहे निजी हानि कितनी ही होती हो, कठिनाई कितनी ही उठानी पड़ती हों ।

30. अवतार व्यक्ति के रूप में नहीं, आदर्शवादी प्रवाह के रूप में होते हैं और हर जीवन्त आत्मा को युगधर्म निबाहने के लिए बाधित करते हैं ।

31. शरीर और मन की प्रसन्नता के लिए जिसने आत्म-प्रयोजन का बलिदान कर दिया, उससे बढ़कर अभागा एवं दुर्बुद्धि और कौन हो सकता है?

32. जीवन के आनन्द गौरव के साथ, सम्मान के साथ और स्वाभिमान के साथ जीने में है ।


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33. आचारनिष्ठ उपदेशक ही परिवर्तन लाने में सफल हो सकते हैं । अनधिकारी धर्मोपदेशक खोटे सिक्के की तरह मात्र विक्षोभ और अविश्वास ही भड़काते हैं ।

34. इन दिनों जाग्रत् आत्मा मूक दर्शक बनकर न रहे । बिना किसी के समर्थन, विरोध की परवाह किए आत्म-प्रेरणा के सहारे स्वयंमेव अपनी दिशाधारा का निर्माण-निर्धारण करें ।

35. जो भौतिक महत्त्वाकांक्षियों की बेतरह कटौती करते हुए समय की पुकार पूरी करने के लिए बढ़े-चढ़े अनुदान प्रस्तुत करते
और जिसमें महान् परम्परा छोड़ जाने की ललक उफनती रहे, यही है-प्रज्ञापुत्र शब्द का अर्थ ।

36. दैवी शक्तियों के अवतरण के लिए पहली शर्त है- साधक की पात्रता, पवित्रता और प्रामाणिकता ।

37. आशावादी हर कठिनाई में अवसर देखता है, पर निराशावादी प्रत्येक अवसर में कठिनाइयाँ ही खोजता है ।

38. चरित्रवान् व्यक्ति ही किसी राष्ट्र की वास्तविक सम्पदा है ।

39. व्यक्तिगत स्वार्थों का उत्सर्ग सामाजिक प्रगति के लिए करने की परम्परा जब तक प्रचलित न होगी, तब तक कोई राष्ट्र सच्चे अर्थों में सार्मथ्यवान् नहीं बन सकता है ।

40. युग निर्माण योजना का लक्ष्य है-शुचिता, पवित्रता, सच्चरित्रता, समता, उदारता, सहकारिता उत्पन्न करना ।

41. भुजाएँ साक्षात् हनुमान हैं और मस्तिष्क गणेश, इनके निरन्तर साथ रहते हुए किसी को दरिद्र रहने की आवश्यकता नहीं ।

42. विद्या की आकांक्षा यदि सच्ची हो, गहरी हो तो उसके रहते कोई व्यक्ति कदापि मूर्ख, अशिक्षित नहीं रह सकता ।

43. मनुष्य दुःखी, निराशा, चिंतित, उदिग्न बैठा रहता हो तो समझना चाहिए सही सोचने की विधि से अपरिचित होने का ही यह परिणाम है ।

44. धर्म अंतःकरण को प्रभावित और प्रशासित करता है, उसमें उत्कृष्टता अपनाने, आदर्शों को कार्यान्वित करने की उमंग उत्पन्न करता है ।

45. जीवन साधना का अर्थ है- अपने समय, श्रम और साधनों का कण-कण उपयोगी दिशा में नियोजित किये रहना ।

46. निकृष्ट चिंतन एवं घृणित कर्तृत्व हमारी गौरव गरिमा पर लगा हुआ कलंक है ।

47. आत्मा का परिष्कृत रूप ही परमात्मा है ।

48. हम कोई ऐसा काम न करें, जिसमें अपनी अंतरात्मा ही अपने को धिक्कारे ।

49. अपनी दुष्टताएँ दूसरों से छिपाकर रखी जा सकती हैं, पर अपने आप से कुछ भी छिपाया नहीं जा सकता ।

50. किसी महान् उद्देश्य की ओर न चलना उतनी लज्जा की बात नहीं होती, जितनी कि चलने के बाद कठिनाइयों के भय से पीछे हट जाना ।


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51. महानता का गुण न तो किसी के लिए सुरक्षित है और न प्रतिबंधित । जो चाहे अपनी शुभेच्छाओं से उसे प्राप्त कर सकता है ।

52. सच्ची लगन तथा निर्मल उद्देश्य से किया हुआ प्रयत्न कभी निष्फल नहीं जाता ।

53. खरे बनिये, खरा काम कीजिए और खरी बात कहिए । इससे आपका हृदय हल्का रहेगा ।

54. मनुष्य जन्म सरल है, पर मनुष्यता कठिन प्रयत्न करके कमानी पड़ती है ।

55. ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।

56. सज्जनों की कोई भी साधना कठिनाइयों में से होकर निकलने पर ही पूर्ण होती है ।

57. असत् से सत् की ओर, अंधकार से आलोक की और विनाश से विकास की ओर बढ़ने का नाम ही साधना है ।

58. किसी सदुद्देश्य के लिए जीवन भर कठिनाइयों से जूझते रहना ही महापुरुष होना है ।

59. अपना मूल्य समझो और विश्वास करो कि तुम संसार के सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति हो ।

60. उत्कृष्ट जीवन का स्वरूप है-दूसरों के प्रति नम्र और अपने प्रति कठोर होना ।


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61. वही जीवति है, जिसका मस्तिष्क ठण्डा, रक्त गरम, हृदय कोमल और पुरुषार्थ प्रखर है ।

62. चरित्र का अर्थ है- अपने महान् मानवीय उत्तरदायित्वों का महत्त्व समझना और उसका हर कीमत पर निर्वाह करना ।

63. मनुष्य एक भटका हुआ देवता है । सही दिशा पर चल सके, तो उससे बढ़कर श्रेष्ठ और कोई नहीं ।

64. अपने अज्ञान को दूर करके मन-मन्दिर में ज्ञान का दीपक जलाना भगवान् की सच्ची पूजा है ।

65. जो बीत गया सो गया, जो आने वाला है वह अज्ञात है! लेकिन वर्तमान तो हमारे हाथ में है ।

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भटके तो अटके ~ So get lost, stuck !!

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** भटके तो अटके ~ So get lost, stuck !! **

टाइम टेबल बनाकर पढ़ने के लिए किताबें लेकर बैठ जाना ही काफी नहीं होता है। इससे ज्यादा जरूरी है कि कम या ज्यादा जितनी देर भी आपने पढ़ाई की है उस दौरान के विषयों को आत्मसात कितना पर पाए हैं। अमूमन ऐसे छात्र, जो नियमित पढ़ाई में विश्वास नहीं रखते और सिर्फ परीक्षा सिर पर आने की स्थिति में ही पुस्तकों की धूल झाड़ते नजर आते हैं, को इस प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है।

कहने को तो 18 घंटे की पढ़ाई होती है पर असल में ध्यान नहीं लगा पाने के कारण अधिकांश बातें याद नहीं रह पाती हैं। चूंकि संपूर्ण कंसंट्रेशन के साथ पढ़ाई करने की आदत नहीं होती है इसीलिए दिमाग और मन भटकाव की स्थिति में रहते हुए चंचल व्यवहार करता है।

पुस्तक सामने होने के बावजूद यार दोस्तों, हंसी मजाक अन्यथा अन्य बातें रह रह कर मन में आती हैं और जाहिर है, इससे ध्यान उलझ जाता है। प्रस्तुत लेख में कुछ इस तरह की परेशानियों के निदान के संबंध में आसान से टिप्स देने का प्रयास किया जा रहा है।

1. पढ़ाई के प्रारंभिक दिनों में जानबूझकर आसान टॉपिक्स का चयन करना चाहिए। इससे विषय समझने में ज्यादा मुश्किल नहीं होगी और साथ ही साथ दिमाग भी पढ़ाई के प्रति अभ्यस्त होता जाएगा।

2. नए और कठिन विषयों की शुरुआत से पहले अपने सहपाठियों अथवा अध्यापकों की मदद से अपने मन में उक्त विषय के प्रति दिलचस्पी जगाने का प्रयत्न करें। इससे विषय का परिचय मिलता है और स्वयं पढ़ाई करने में समझना आसान हो जाता है।

3. लिखकर विभिन्न विषयों को समझने का क्रम आमतौर से ध्यान भटकने से रोकने में काफी सहायक माना जाता है।

4. ध्यान बाँटने वाले तमाम कारक जैसे मोबाइल फोन, कंप्यूटर, इंटरनेट, वीडियो गेम्स टेलीविजन आदि से जितनी दूरी बना सकें, उतनी ही आसानी होगी ध्यान केंद्रित करने में।

5. हमेशा ताजगी भरे दिमाग और पर्याप्त आराम के बाद ही पढ़ाई के लिए बैठना उपयुक्त होता है। इससे थकान नहीं होती और मुश्किल टॉपिक्स भी सरलता से समझ आने लगते हैं।

6. ध्यान केंद्रित करने के लिए चाय या कॉफी अथवा किसी नए प्रकार के सहारे से नुकसान ज्यादा और फायदा कहीं कम होता है।

7. सही जगह का ही अध्ययन के लिए चुनाव करना चाहिए। घर का कोई भी ऐसा शांत कोना जहां शोरगुल कम से कम हो तथा टीवी- रेडियो “म्यूजिक की आवाज से बचा जा सके। इस तरह के अध्ययन के लिए उपयुक्तकहा जा सकता है।

8. स्टडी टेबल पर आते समय ढेर सारे काम या पढ़ाई का बोझ डालना उचित नहीं है। इससे पढ़ाई में कम और इस मानसिक बोझ पर ध्यान ज्यादा लगा रहता है।

9. ब्रह्ममुहूर्त या तड़के सुबह का समय (4 बजे प्रातः) अध्ययन करने की दृष्टि से सर्वाधिक उपयुक्त कहा जा सकता है। रात भर की नींद के बाद तन-मन और दिमाग में ताजगी होती है और साथ में इस वक्त बिलकुल शांति होती है।

10. संपूर्ण दिन एक ही विषय की पढ़ाई करते रहने से दिमागी थकान होनी स्वाभाविक है। इसीलिए तीन विषयों की पढ़ाई समय बांट कर करना अधिक प्रभावी होगा।

11. किसी विषय के प्रति दिमाग में फोबिया नहीं पालें और थोड़ा-थोडा पढ़ने से कुछ समय बाद यही विषय सबसे आसान प्रतीत होने लगेगा।

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कैसे बचें एग्जाम फीवर से ~ How to Avoid Exam Fever !!

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** कैसे बचें एग्जाम फीवर से ~ How to Avoid Exam Fever !! **


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जैसे-जैसे बोर्ड परीक्षा के दिन नजदीक आते जा रहे हैं छात्रों की परेशानियां भी उसी रफ्तार से बढ़ रही हैं। एक ओर सिलेबस का बोझ तो दूसरी ओर मनोवैज्ञानिक समस्याएँ भी छात्रों को घेरती नजर आ रही हैं। कुछ को तो इनके होने का भ्रम भी रहता है।

परीक्षा नजदीक आते ही वे एग्जामिनेशन फीवर, त्वचा रोग, सिरदर्द की शिकायत, नींद गायब हो जाना, भूख न लगना, स्वभाव से चिड़चिड़ा हो जाना, पेट में कई तरह की समस्याएँ, आत्मविश्वास का डगमगा जाना, कमजोरी की शिकायत, आँखों में परेशानी, ऐसा भ्रम होना कि पिछला जो भी पढ़ा था सब भूल रहा है तथा घबराहट आदि न जाने कितनी छोटी-बड़ी समस्याओं से ग्रस्त हो जाते हैं।

लेकिन इनसे घबराने से काम नहीं चलेगा, पढ़ाई के साथ-साथ इनका सामना भी करना होगा और मन में यह विश्वास रखना होगा कि अगर समस्याएँ हैं तो उनका समाधान भी होगा।

मर्ज पनपे, इससे पहले ही सतर्क हो जाएँ
किसी भी समस्या के पनपने के बाद उससेनिजात पाने का हल ढूंढने से अच्छा है कि ऐसा तरीका चुनें जिससे समस्याएँ पनपने ही न पाएँ। आपके मन-मस्तिष्क में तनाव घर करे, इससे पहले ही आपको इमोशनल इंटेलीजेंस विकसित कर लेनी चाहिए यानी छात्र यह मान कर चलें कि इसके पूर्व जिन परीक्षाओं में वे बैठे हैं, यह भी उन्हीं से मिलती-जुलती परीक्षा है और इन्हें भी वे आसानी से पास कर लेंगे, बल्कि ज्यादा मेहनत की है तो नंबर भी अच्छे आएँगे।

यह सोच ही तनाव को आपके पास फटकने नहीं देगी। इसके साथ ही जो भी दिन आपके हाथ में हैं, उसी के हिसाब से प्लानर बनाएँ। अक्सर बच्चे शिकायत करते हैं कि जो भी पढ़ा था, सब धीरे-धीरे भूल रहा है। इससे बचने का सबसे अच्छा उपाय है कि पिछले छह दिन में जो भी पढ़ा, सातवें दिन उसका रिवीजन कर लें।

योग अथवा ध्यान का सहारा लें, इससे याददाश्त में वृद्धि होगी। ज्यादा देर तक बैठने से कमर दर्द या गर्दन दर्द की शिकायत हो रही है तो कमरे में टहल लें। आत्मविश्वास को बनाए रखने के लिए व्यायाम का भी सहारा लिया जा सकता है। पाचन क्रिया सही रहे, इसके लिए भोजन पर ध्यान दें तथा संयमित व्यवहार बनाए रखने के लिए पूरी नींद जरूर लें।

अभिभावक भी रहें अलर्ट
बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी विजुअलाइजिंग टेक्नीक का सहारा लेना चाहिए। छात्र आंख बंद कर यह विजुअलाइज करें कि वे परीक्षा भवन में हैं तथा प्रश्न-पत्रों को सही तरीके से हल कर रहे हैं। सीबीएसई सहित कई प्रमुख बोर्डों ने अपने यहां काउंसलरों का पैनल नियुक्त कर रखा है, जिसकी निशुल्क सेवाएँ ली जा सकती हैं।

सीबीएसई अपनी टेलीकाउंसलिंग सेवा शुरू कर चुकी है। इस समय छात्रों को आत्मीय सहारे की भी जरूरत रहती है। वह चाहता है कि उसके माता-पिता उसके इर्द-गिर्द रहें, ताकि वह खुद को अकेला न समझे। अभिभावक उनको भरोसा दिलाएँ कि वे हर परिस्थिति में उनके साथ हैं, भले ही परीक्षा में उनका रिजल्ट जैसा भी रहे। उनके इस भरोसे से बच्चे से परीक्षा रूपी भूत का दबाव छंट जाता है और वे जयादा बेहतर तरीके से तैयारी कर पाते हैं।

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