“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र-स्वयं से वार्तालाप(बातचीत)”

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMY-KMSRAJ51-N

In-English…..

Purity is the foundation of true peace & happiness,

It is your most valuable Property in your life,

Preserve it at any cast. !!

In-Hindi…..

पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है.

यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

~KMSRAJ51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaen solar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

 ~KMSRAJ51

जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है।

 ~KMSRAJ51

जीवन में सदैव शांत मन से साेंच समझ़ कर हीं काेई निर्णय लें।

और जाे निर्णय एकबार लें उसका जीवन में दृढ़ता से पालन करें।

 ~KMSRAJ51

जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

 ~KMSRAJ51

मनुष्य का सारा कैरेक्टर विकारों ने बिगाड़ा है।

आत्मा रूपी पुरूष को श्रेष्ठ बनाने वाले ही सच्चे पुरूषार्थी हैं।

सबसे बड़े ज्ञानी वह हैं जो आत्म-अभिमानी रहते हैं।

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे”

 ~KMSRAJ51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं,

ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

~KMSRAJ51

“पहचान बनानी है तो कुछ अलग कीजिए। जब तक दूसरों से डिफरेंट और अच्छा नहीं करेंगे, तब तक आगे बढ़ना मुश्किल। डिफरेंट करने से रिस्क तो होता है पर कंपीटिशन भी तो कम रहता है।”

~KMSRAJ51

“सफलता हासिल करनी है तो शुरू से ही लक्ष्य निर्धारित कीजिए। सपना जरूर देखिए, क्योंकि इनके बिना हमें मालूम कैसे होगा कि हमारी मंजिल क्या है।”

~KMSRAJ51

“अपने कीमती समय से थोड़ा समय अपने परिवार के लिये भी निकालिये, क्योंकि शायद जब आपके पास समय होगा तब, आपके पास ये खूबसूरत सा परिवार नहीं होगा।”

~KMSRAJ51

निश्चय ही आप विजयी होंगे, यदि आप अपनी दुर्बलता (Weakness) को अपनी ताकत में तब्दील करना सीख लें।

~KMSRAJ51

 Krishna Mohan Singh(KMSRAJ51)

(तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब)…..

“तू ना हो निराश कभी मन से”

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Krishna Mohan Singh(KMS)
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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

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सफलता और तरक्की पाने के 7 अचूक तरीके।

Kmsraj51 की कलम से…..

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सफलता और तरक्की पाने के 7 अचूक तरीके।

सफलता हर इंसान की चाहत होती है, लेकिन अक्सर देखा जाता है कि सफलता सभी को नहीं मिलती है। आखिर ऐसा क्यों होता है? इस संबंध में कई कारण ढूंढे जा सकते हैं, लेकिन मोटे तौर कामयाबी नसीब न होने के पीछे लक्ष्य को लेकर उदासीनता, विचार और कर्म में सही तालमेल का अभाव बड़ा कारण नजर आता है। यही नहीं, सफलता में निरंतरता भी अहम होती है, क्योंकि उसके बिना तरक्की संभव नहीं। किंतु अगर मकसद साफ हो, सही विचार हो और कर्मशक्ति भी मौजूद हो तब भी सफलता और तरक्की दूर रह जाए तो फिर इसके क्या कारण हो सकते हैं?

इस सवाल का जवाब हिन्दू धर्म ग्रंथ महाभारत में बताए सफलता व तरक्की के सटीक सूत्रों में मिलता है। सफलता व तरक्की के ये 7 सूत्र जीवन में उतार साधारण इंसान भी असाधारण बन मनचाही ऊंचाइयों को पा सकता है-
हिन्दू धर्मग्रंथ महाभारत में लिखा गया है कि-
उत्थानं संयमो दाक्ष्यमप्रमादो धृति: स्मृति:।
समीक्ष्य च समारम्भो विद्धि मूलं भवस्य तु।।
इस श्लोक में जीवन में कर्म, विचार और व्यवहार से जुड़ी 7 बातें उन्नति का मूल मंत्र मानी गई है। ये बाते हैं- 
1. उद्यम
2. संयम
3. दक्षता
4. धैर्य
5. सावधानी
6. स्मृति
7. सोच विचार
उद्यम या परिश्रम – अक्सर सफलता पाने की जल्दबाजी या बेचैनी में कई लोग आसान और छोटे रास्ते या तरीकों को चुन तो लेते हैं। लेकिन मनचाही सफलता से दूर रहने पर निराशा के दौर से गुजरते हैं। असल में सफलता के लिए संकल्प, कर्म के साथ उद्यम यानी परिश्रम की भावना के तय पैमानों को अपनाए बिना कामयाबी की मंजिल को छूना व उस पर कायम रहना मुश्किल है।
संयम– छोटी या थोड़ी-सी सफलता मिलने पर मन व विचार पर काबू या उतावलेपन से बचना, क्योंकि बिना धैर्य और संयम के सफलता साथ छोड़ देती है, बल्कि तरक्की के रास्ते भी बंद हो जाते हैं।
दक्षता- सफलता को अवसरों को भुनाने व जल्द लक्ष्यों को हासिल करने के लिए किसी भी कार्य या कला में कुशलता या महारत बड़ी मददगार होती है। इसलिए बिना अहंकार के सीखने की जिज्ञासा बनाए रखें।
धैर्य- तमाम कोशिशों के बाद भी अगर मनचाहे परिणाम न मिलने या अपेक्षा पूरा न होने पर लक्ष्य से न भटकें या न उसे छोडऩे का विचार करें। बल्कि मजबूत संकल्प और दोगुनी मेहनत के साथ उसे पाने में जुट जाएं।
सावधानी – किसी भी तरह की सफलता के रास्ते में कई बाधाएं भी मुमकिन है। इसलिए सारी संभावनाओं और स्थितियों के आंकलन और विश्लेषण के साथ विषय, कार्य और स्थिति के प्रति जागरूकता व सावधानी रखें।
स्मृति – इसकी अलग-अलग अर्थों व परिस्थितियों में अलग-अलग अहमियत है। जैसे ज्ञान व स्मरण शक्ति के अलावा दूसरों के उपकारों, सहयोग या प्रेम को न भूलना आदि।
सोच-विचार – विवेक का साथ न छोडऩा। सफलता व तरक्की के लिए कोई भी कदम बढ़ाने से पहले सही और गलत की विचार शक्ति अहम होती है, जिसके लिए अधिक से अधिक ज्ञान व अनुभव बंटोरें।

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KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

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किसी भी इंसान को बर्बाद कर सकते हैं ये तीन काम।

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श्री राम चरित मानस-KMSRAJ51

श्री राम चरित मानस।

सभी लोगों में अलग-अलग गुण-दोष होते हैं। गुण व्यक्ति को सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं, जबकि दोष (बुराइयां या गलत काम) व्यक्ति को दुख और परेशानियों का सामना करवाते हैं। श्रीरामचरित मानस में तीन ऐसे काम बताए गए हैं जो किसी भी पुरुष को बर्बाद कर सकते हैं। यहां जानिए ये तीन काम कौन-कौन से हैं और किस प्रकार पनपते हैं… इनसे किस प्रकार बचा जा सकता है…

श्रीरामचरित मानस के अयोध्या काण्ड में श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि-

तात तीनि अति प्रबल खल काम क्रोध अरु लोभ।
मुनि बिग्यान धाम मन करहिं निमिष महुँ छोभ।।
इस दोहे में श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि काम, क्रोध और लोभ- ये तीन किसी भी इंसान के लिए प्रबल शत्रु हैं। ये ही सबसे बड़ी बुराइयां हैं जो श्रेष्ठ और ज्ञान-विज्ञान के जानकार मुनियों को भी पलभर में ही बर्बाद कर सकती हैं। श्रीराम कहते हैं कि किसी भी श्रेष्ठ पुरुष के मन में काम भावना स्त्रियों को देखते ही पनप सकती है। कामदेव को सिर्फ स्त्रियों का ही बल प्राप्त है।
जानिए कैसे पनपती हैं ये तीन बुराइयां
श्रीराम लक्षण से कहते हैं कि-
लोभ कें इच्छा दंभ बल काम कें केवल नारि।
क्रोध कें परुष बचन बल मुनिबर कहहिं बिचारि।।
इस दोहे में श्रीराम ने बताया है कि लोभ यानी लालच, इच्छाओं और घमंड के कारण पनपता है। किसी भी पुरुष के मन में जब तक असीमित इच्छाएं रहती हैं, जब तक अलग-अलग सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए मन सोचता रहता है, तब तक लोभ से मुक्ति नहीं मिल सकती है। अपनी धन-संपत्ति के कारण ही व्यक्ति के मन में घमंड समा जाता है। इसी घमंड को बनाए रखने के लिए पुरुष लोभ वश और अधिक धन प्राप्त करने के लिए प्रयास करते रहता है। लोभ वश होकर व्यक्ति सही और गलत काम का भेद भी भूल जाता है। अत: इस बुराई से कोई भी पुरुष बर्बाद हो जाता है।
काम को है केवल स्त्री का बल
श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि काम वासना भी बहुत बड़ी बुराई है। इस बुराई में फंसकर बड़े-बड़े ज्ञानी-विद्वान भी नष्ट हो गए हैं। कामदेव के लिए सिर्फ स्त्री ही सबसे शक्तिशाली शस्त्र है। इसी शस्त्र से कामदेव ने कई बार ऋषि-मुनियों की तपस्या को भी खंडित किया है। इससे बुराई से बचने का सिर्फ एक ही उपाय है और वह है भगवान की भक्ति में मन लगाना। जो लोग भगवान की भक्ति में मन लगा लेते हैं, वे काम वासना पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।
आज के समय में इस बुराई के कारण काफी लोग परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कई लोगों का जीवन बर्बाद हो चुका है। अत: किसी भी पुरुष के लिए काम भावना पर नियंत्रण रखना ही सबसे श्रेष्ठ और कल्याणकारी उपाय है।
क्रोध को कठोर वाणी का बल प्राप्त है
क्रोध को इंसान का सबसे बड़ा शत्रु माना जाता है। क्रोध के आवेश में व्यक्ति अपनी वाणी पर नियंत्रण नहीं रख पाता है और कठोर शब्दों का प्रयोग कर बैठता है। इन शब्दों से सामने वाले व्यक्ति के मन को ठेस भी पहुंचती हैं और जब क्रोध शांत होता है तो व्यक्ति स्वयं भी पछताता है। अत: क्रोध को नियंत्रित करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है वाणी से सीधे मन पर चोट लगती है और इसी कारण आपसी रिश्तों में भी तनाव उत्पन्न हो जाता है। मित्र, शत्रु बन जाते हैं।
इन बुराइयों के संबंध में शंकर जी पार्वती जी से कहते हैं कि-
क्रोध मनोज लोभ मद माया। छूटहिं सकल राम की दाया।।
सो नर इंद्रजाल नहिं भूला। जा पर होइ सो नट अनुकूला।।
शंकर जी कहते हैं कि क्रोध, काम, लोभ, मद और माया- ये सभी दोष श्रीरामजी की कृपा से दूर हो सकते हैं। श्रीराम जिन लोगों पर प्रसन्न हो जाते हैं, वे इंद्रजाल यानी माया से प्रभावित नहीं होते हैं। अत: इन बुराइयों से बचने के लिए व्यक्ति को श्रीरामजी की भक्ति में ही मन लगाए रखना चाहिए। श्रीराम की भक्ति भी सभी सुखों को देने वाली है और कल्याण करने वाली है।

लेख- श्री राम चरित मानस से

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सदा खुश रहना और खुशी बांटना-यही सबसे बड़ा शान है।

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महाभारत के अनुसार स्त्री और पुरुष को नहीं करना चाहिए ये ३ काम।

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महाभारत के अनुसार स्त्री और पुरुष को नहीं करना चाहिए ये ३ काम।

शरीर से होने वाले 3 महापाप : शरीर से होने वाले 3 महापाप बताए गए हैं।

इनमें से पहला पाप है हिंसा करना। किसी भी परिस्थिति में अनावश्यक रूप से हिंसा करना पाप माना गया है।

पुरुषों के लिए शरीर से होने वाला एक भयंकर महापाप है परस्त्रीगमन और स्त्रियों के अनुसार परपुरुषगमन करना। किसी भी परिस्थिति में ये कर्म महापाप माना गया है। पति-पत्नी को एक-दूसरे के प्रति ईमानदार रहते हुए वैवाहिक जीवन के नियमों का पालन करना चाहिए। एक-दूसरे के विश्वास को तोडऩा महापाप है।

शरीर से होने वाला अगला पाप है चोरी। चोरी करना भी महापाप माना गया है। व्यक्ति को खुद की मेहनत से धन आदि प्राप्त करना चाहिए। अन्य इंसानों की वस्तुएं चुराना पाप है।


 

महाभारत के अनुशासन पर्व के अनुसार वाणी से होने वाले चार पाप बताए गए हैं। व्यर्थ की बात करना यानी बकवास करना भी एक पाप है। निष्ठुर यानी कठोर वचन बोलना भी पाप की श्रेणी में आता है।
व्यक्ति को कभी भी किसी की चुगली नहीं करना चाहिए। कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। ये भी वाणी से होने वाले पाप हैं
अनुशासन पर्व के अनुसार मन से होने वाले तीन पाप इस प्रकार हैं- पहला पाप है दूसरों के धन का लालच करना और उसे हड़पने की सोचना। किसी भी व्यक्ति के धन को हड़पना और ऐसा सोचना भी पाप है।
कभी भी दूसरे लोगों से वैर का भाव नहीं रखना चाहिए। सभी प्राणियों से प्रेम का भाव रखना ही हमारा धर्म है।


मन से होने वाला तीसरा पाप है कर्म के फल पर विश्वास न करना। यदि हमें विधाता द्वारा दिए गए कर्म के फल पर विश्वास नहीं करते हैं तो यह भी एक पाप ही है।
जो लोग इन दस महापापों को या इनमें से किसी एक पाप को भी करते हैं तो उन्हें भयंकर परिणाम भोगने पड़ सकते हैं। अत: इस कार्यों से बचना चाहिए।

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