हर चीज की सीमा निर्धारित होनी चाहिए।

Kmsraj51 की कलम से…..

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हर चीज की सीमा निर्धारित होनी चाहिए।

हर चीज की सीमा निर्धारित होनी चाहिए। जैसे रोजाना के जीवन में खाने-पीने काम करने, दौड़ भाग करने, खेलने-कूदने, मनोरंजन आदि सबकी सीमा निर्धारित हो, तो समय का सही नियोजन और उपयोग होगा। समय ही जीवन है। एक-एक क्षण मिलकर जीवन बनता है। जीवन थोक नहीं है, चिल्हरों से बनता है जैसे एक-एक पैसे से रुपया फिर रुपये से सौ, हजार, लाख, करोड़ बनते हैं तो सब इकाई से शुरू होता है इसी तरह जीवन है एक-एक सोच मतलब रखती है।

सोच का संग्रह ही लेखन है, उद्बोधन है, कार्य है चाहे जिस क्षेत्र में हो सब एक सोच से प्रारंभ होता है। अब इसमें आता है, सही दिशा में सही सोच जिसे सकारात्मक सोच कहते हैं। गलत दिशा में सोचा गया तो उसे नकारात्मक सोच कहते हैं। पर हम समय प्रबंधन, व्यवसाय या नौकरी प्रबंधन, स्वास्थ्य प्रबंधन और अन्य कई प्रबंधन जो जीवन में होते हैं या हम करते हैं, वे सब सोच से प्रारंभ होते हैं। हमें सोच की सीमा तय करना आना चाहिए। कोई सदस्य घर का बीमार है, हमें सोचना है उसके इलाज के बारे में, डॉक्टर दवा के बारे में उसे सांत्वना देता है कि कोई बात नहीं, जल्दी ठीक हो जाओगे यदि हम सोचते ही रहे कुछ नहीं किया तो सोच चिंता में बदल जायेगा एक चिन्ता घुसी मन में तो वह अपने पूरे रिश्तेदारों को बुला लेती है भय, मोह, आसक्ति, हड़बड़ी आदि।

मैंने एक डॉक्टर को अपनी विवाहिता पुत्री के डिलवरी पेन दर्द के समय इतना चिंतित भयभीत और हड़बड़ी करते देखा कि मुझे आश्चर्य हुआ कि ये कैसे डॉक्टर हैं जो घर के एक सदस्य के प्रसूति दर्द से इतने परेशान हो गये तो मरीज या उसके सदस्यों का क्या हाल हुआ होगा। मैं मानता हूं कि डॉक्टर भी आखिर इंसान होता है पर उसे इतनी जल्दी घबराना नहीं चाहिए। वह अपने मरीजों को कैसे दिलासा देगा। हर चीज की सीमा तय होनी चाहिए। सीमा से बाहर उसका प्रभाव ऋणात्मक हो सकता है। ऋणात्मकता बहुत नुकसान दायक है, आपके पूरे वजूद को हिला देती है। हम पर हमारा मन ही शासन करता है उसे सुधार लें सकारात्मकता से भर लें तो सब ठीक हो जायेगा।

श्रीमत-भागवत गीता अनुसार-

चिन्ता मत करें चिन्तन करें और व्यथा को स्थान न दें व्यवस्था करें।

छोटे-छोटे से शब्द हैं पर जीवन को नया मतलब देते हैं। यही तो है जीवन प्रबंधन जिस पर महान चिन्तक विजय शंकरजी मेहता हमेशा बोलते लिखते रहते हैं। उनकी किताबें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। सब कुछ उपलब्ध है दुनिया में अच्छे विचार, अच्छी किताबें, अच्छे लोग, अच्छे कैसेट, रेडियो, टी.व्ही. के कुछ चैनल आस्था और संस्कार अच्छी चीजें परोस रहे हैं। आपको शांत रहकर पढ़ना-सुनना, सोचना करना, चलना है तो ही आप मंजिल पर पहुंचेंगे। बस कोशिश करिये। सोचिये और सोच की सीमा तय करिये। अच्छी सोच बढ़ाइए, घटिया सोच को घटा कर शून्य कर दीजिए, बस यही मेरा संदेश है।

In English

Everything should be set limit.

Everything must be kisimanirdharit. Such as daily life to race to work, food, play-jump, entertainments etc all the time limit sahiniyojnaauraupyoghoga. Samyahi life. A-together life is a moment. Life is not, wholesale chilharon is made from a money like rupee then bucks hundred, thousand, million, million are made then all unit begins with a similar life thinking holds meaning.
Thinking is only a collection of writings, is whether the served area, exhortations seemed all starts with a thought. Now it comes in the right direction are correct thinking jiseskaratmak sochkahte. Are the usenkaratmak sochkahte been thought in the wrong direction. We at time management, business or job management, health management and other management who are in life or we do they start sabsochse. We must come to frame of thinking. No member of the House is sick we have to think about her treatment, doctors give him consolation about the drug that’ll be no problem, quick fix if we think there are only a few will turn into concern didn’t think exactness in mind so he takes his entire relatives calling haibhay, infatuation, attachment, hadbadiadi.
I married a daughter of dilvari your pen do so fearful and worried about the pain of time rush saw that surprised me was how doctor who is a member of the House have become so upset the patient obstetrics pain or what its members have occurred. I recognize that even doctors finally is on the person so quickly should not go haywire. How will the console my patients. Everything should be fixed limits. Out of bounds is the effect may be negative. Rinatmakta is your whole existence to dayak much damage is nodding. We rule our mind itself is so filled with bike repair positivity will be all right.

According to Shrimat-Bhagwat Gita-

“Do not worry, do not put in place to meditate and soreness.”

Small little words mean to give new life. That is the great life management thinkers speak vijyashankarji Mehta always keep writing. His books have also been published. Everything is available in the world, good ideas, good books, good people, good cassette, radio, TV … Whee. Some are serving faith & values channel, good stuff. Do you think staying calm walk, listen to read-only if you will on the floor. Just try some.Imagine some of the thinking and frame. Boost good thinking, let the poor thinking minus zero, that is my message.

Priyank Dubey

Roorkee-Uttarakhand

We are grateful to Priyank Dubey Ji for sharing this inspirational Hindi story with KMSRAJ51 readers.

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सफलता कठोर मेहनत और खुद पर भरोसा करने से मिलती है।

यह गिफ्ट में या धनी परिवार में पैदा होने से नहीं मिलती है।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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* चांदी की छड़ी।

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अधूरापन ज़रूरी है जीने के लिए।

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अधूरापन ज़रूरी है जीने के लिए

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Incompleteness is necessary to live

अधूरापन शब्द सुनते ही मन में एक negative thought आ जाती है. क्योंकि यह शब्द अपने आप में जीवन की किसी कमी को दर्शाता है। पर सोचिये कि अगर ये थोड़ी सी कमी जीवन में ना हो तो जीवन खत्म सा नहीं हो जायेगा?

अगर आप ध्यान दीजिए तो आदमी को काम करने के लिए प्रेरित ही यह कमी करती है. कोई भी कदम, हम इस खालीपन को भरने की दिशा में ही उठाते हैं। Psychologists का कहना है कि मनुष्य के अंदर कुछ जन्मजात शक्तियां होती हैं जो उसे किसी भी नकारात्मक भाव से दूर जाने और available options में से best option चुनने के लिए प्रेरित करती हैं। कोई भी चीज़ जो life में असंतुलन लाती है, आदमी उसे संतुलन की दिशा में ले जाने की कोशिश करता है।

“अगर कमी ना हो तो ज़रूरत नहीं होगी, ज़रूरत नहीं होगी तो आकर्षण नहीं होगा, और अगर आकर्षण नहीं होगा तो लक्ष्य भी नहीं होगा।”

अगर भूख ना लगे तो खाने की तरफ जाने का सवाल ही नहीं पैदा होता। इसलिए अपने जीवन की किसी भी कमी को negative ढंग से देखना सही नहीं है।असल बात तो ये है कि ये कमी या अधूरापन हमारे लिए एक प्रेरक का काम करता है।

कमियां सबके जीवन में होती हैं बस उसके रूप और स्तर अलग-अलग होते हैं, और इस दुनिया का हर काम उसी कमी को पूरा करने के लिए किया जाता रहा है, और किया जाता रहेगा। चाहे जैसा भी व्यवहार हो , रोज का काम हो, office जाना हो, प्रेम सम्बन्ध हो या किसी से नए रिश्ते बनाने हो सारे काम जीवन के उस खालीपन को भरने कि दिशा में किये जाते है। हाँ, ये ज़रूर हो सकता है कि कुछ लोग उस कमी के पूरा हो जाने के बाद भी उसकी बेहतरी के लिए काम करते रहते हैं।

आप किसी भी घटना को ले लीजिए आज़ादी की लड़ाई, कोई क्रांति, छोटे अपराध, बड़े अपराध या कोई परोपकार, हर काम किसी न किसी अधूरेपन को दूर करने के लिए हैं। कई शोधों से तो ये तक proof हो चुका है कि व्यक्ति किस तरह के कपड़े पहनता है, किस तरह कि किताब पढता है, किस तरह का कार्यक्रम देखना पसंद करता है और कैसी संस्था से जुड़ा है ये सब अपने जीवन की उस कमी को दूर करने से सम्बंधित है।

महान psychologist Maslow (मैस्लो) ने कहा है कि व्यक्ति का जीवन पांच प्रकार कि ज़रूरतों के आस – पास घूमता है।

पहली मौलिक ज़रूरतें – भूख, प्यास और सेक्स की।
दूसरी – सुरक्षा की।
तीसरी – संबंधों या प्रेम की।
चौथी आत्मा – सम्मान की।
और पांचवी – आत्म सिद्धि (Self-accomplishment) की जिसमे व्यक्ति अपनी क्षमताओं का पूरा प्रयोग करता है।

ज़रूरी नहीं की हम अपने जीवन में Maslow’s Hierarchy of needs में बताई गयी सारी stages तक पहुँच पाएं और हर कमी को दूर कर पाएं, पर प्रयास ज़रूर करते हैं.
कई घटनाएँ ऐसी सुनने में आती हैं जहाँ लोगों ने अपने जीवन की कमियों को अपनी ताकत में बदला हैं और जिसके कारण पूरी दुनियां उन्हें जानती है जिसमे Albert Einstein और Abraham Lincoln का नाम सबसे ऊपर आता है.
Albert Einstein जन्म से ही learning disability का शिकार थे , वह चार साल तक बोल नहीं पाते थे और नौ साल तक उन्हें पढ़ना नहीं आता था। College Entrance के पहले attempt में वो fail भी हो गए थे. पर फिर भी उन्होंने जो कर दिखाया वह अतुलनीय है।
Abraham Lincoln ने अपने जीवन में health से related कई problems face कीं। उन्होंने अपने जीवन में कई बार हार का मुंह देखा यहाँ तक की एक बार उनका nervous break-down भी हो गया, पर फिर भी वे 52 साल की उम्र में अमेरिका के सोलहवें राष्ट्रपति बने।

“सच ही है अगर इंसान चाहे तो अपने जीवन के अधूरेपन को ही अपनी प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बना सकता है।
जो अधूरापन हमें जीवन में कुछ कर गुजरने की प्रेरणा दे , भला वह Negative कैसे हो सकता है।”

“ज़रा सोचिये! कि अगर ये थोडा सा अधूरापन हमारे जीवन में न हो तो जीवन कितना अधूरा हो जाये।”

In English

– Incompleteness is necessary to live –

Adhurapna shabd melody is a negative thought in mind. Because the term itself refers to a loss of life. But imagine that if it’s not in the slightest bit short life will not end life?

If you give notice to the person to work it does lack. Any steps we take in the direction of filling emptiness.Psychologists say that humans have innate powers which something inside her move away from any negative sense and available options to choose the best option simulates. Any thing life brings imbalance in men it is carrying koshishkarta towards balance.
If not then do not need shortage won’t have the draw will not, and will not, will not target if charm. if hunger took the side of the asylum right question arises. Therefore lack any of your life watching negative manner is not correct. The real thing is that these lack or incompleteness of a motivator for us.
Drawbacks are just as her life and everybody levels vary. And of this world every thing is to meet the shortage and will continue to be. Even as the work of the practice day, go to office, love relationship or a new relationship may only fill the emptiness of all things life that are made in that direction. Yes, these may of course that some people even after the reduction is completed his work for better living.
You collect any event freely fight, no revolution, no big small crime, guilt or benevolence, nailed every thing adhurepan to remove these from the proof many are oversees research has been that person wears, what kind of fabric that is, what kind of program book padhta likes to watch and what institution is connected to all of your life to overcome the constraints associated with the Is.
The great psychologist Maslow (maislo) said that five types of life that revolve around needs – pass.
Pahlimaulik needs; Hunger, thirst, and sex.
Dusrisurksha chauthiatma-tisrisambandhon or of love, honor aurpanchaviatmasiddhi (self-actualization) of which uses his abilities of the person.
Not we your life Maslow Hierarchy of needs ‘ s added in all the stages reached by e-mail and every vulnerability able, make sure to try on.
Many events in such hearing where people in your life are changed and the shortcomings of its strength due to which the whole world’s best parathas Albert Einstein and Abraham Lincoln that they know the name comes at the top.
Albert Einstein was a victim of the learning disability since birth, she cannot speak and four years nine years did not read them. In the first attempt fail College Entrance were also. Still, he showed that he is incomparable.
Abraham Lincoln did face many problems related to health in their lives did. He looked lost at times in my life mouth even once his nervous break-down is also done, but still they are 52-year-old American President as sixteenths.
True if the person wants your life adhurepan your motivation could make the largest source.
Do the things in life that inspire the passage of incompleteness give us, how could he not negative.
“Just imagine! If it’s a little bit not incompleteness in our lives should be so incomplete life!

Priyank Dubey

Roorkee-Uttarakhand

We are grateful to Priyank Dubey Ji for sharing this inspirational Hindi Quotes-Story with KMSRAJ51 readers.

“अगर सच्चे-मन से जीवन में कुछ करने की ठान लाे, ताे सफलता आपकाे जरुर मिलेगी। -KMSRAJ51”

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यह गिफ्ट में या धनी परिवार में पैदा होने से नहीं मिलती है।

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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