21 ऐसे महावाक्य जो आपके जिंदगी को बदल दे।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ 21 ऐसे महावाक्य जो आपके जिंदगी को बदल दे। ϒ

प्यारे दोस्तों – ज़िंदगी बहुत छोटी है इसलिए समय बर्बाद मत करो। समय के महत्व काे समझे व समय के साथ-२ चलने का अभ्यास करें। अपने Mind काे कुछ इस तरह से खुराक दें।

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  • जीवन में जब भी समस्याये आती है, हमारी साेई हुई मानसिक शक्तियों काे जगाकर जाती हैं।〈1〉
  • कहते है सत्य काे चाहे जितना भी छिपाने कि कोशिश करलाे, पर एक ना एक दिन सत्य प्रत्यक्ष हाे ही जाता हैं। इसलिए सत्य को कभी भी छिपाने की कोशिश ना करें।〈2〉
  • करुणा व शील किसी भी इंसान काे सत्य की गहराई तक ले जाता हैं।〈3〉
  • अपने स्‍वप्‍नाें काे अपने Mind में सदैव स्मरण(याद) करते रहाे और उसी अनुसार तीव्र गति से आगे बढ़ते रहाे।〈4〉
  • यह शरीर (हम मनुष्यों का शरीर) पांच तत्वों (Five Elements) से मिलकर बना है, शरीर सदैव ही इन्हीं पांच तत्वों(पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु व आकाश) की माँग करता है, इस शरीर काे इन पांच तत्वों के अलावा और कुछ भी नहीं चाहिए।〈5〉
  • आत्मा इस शरीर रूपी कार का चालक(Driver) है, जब तक शरीर रूपी कार सही है- तब तक आत्मा इसे चलाती रहती हैं।〈6〉
  • हर एक इंसान(मनुष्य) कि यहीं सोच हाे, की उसकी वजह से कभी भी किसी काे कोई दुःख ना पहुँचे।〈7〉
  • हर इंसान(मनुष्य) के अंदर असीमित शक्तिया निहित(भरी) है। अपनी आंतरिक शक्तियों काे समय प्रमाण Use करना सीखें।〈8〉
  • आपकाे अपने और अपने कार्य के ऊपर पूर्ण विश्वास हैं ताे आपकाे अपने लक्ष्य तक पहुंचने से काेई भी(इंसान या शक्ति) राेक नहीं सकता।〈9〉
  • इस पृथ्वी पर सबसे ज्यादा अगर काेई पूज्यनीय है ताे वह है माता-पिता।〈10〉
  • अपने संकल्प और कर्म में दृढ़ता लाये, कोई भी निर्णय सोच-समझ कर ही लें।〈11〉
  • शरीर यदि बीमार है ताे आप मन से बीमार न हाे जाये, जाे मन से बीमार नहीं हाेता, उसके शरीर की बीमारी भी अतिशीघ्र ही दुर हाे जाती हैं।〈12〉
  • चिंता करने से मन और बुद्धि क्षीण हो जाती है। जिसके परिणाम स्वरूप ना ही सही सोच पाते हैं, ना ही सही निर्णय ले पाते हैं।〈13〉
  • जीवन में कभी भी सीखना(learn)बंद ना करें। हर एक क्षेत्र (Sector) का ज्ञान रखना अपने आप काे Present time में Secure रखने जैसा हैं।〈14〉
  • जीवन में हर एक चीज का बैलेंस बनाकर चलें।〈15〉
  • खान-पान और संग का असर मन पर बहुत ज्यादा पड़ता है। खान-पान में शुद्धि हाे और संग अच्छाें का हाे ताे ही अच्छा हैं।〈16〉
  • अच्छे व सच्चे इंसान काे आज के समय में सब नहीं पहचान पाते। अंतरज्ञानी आत्मा ही सच्चे इंसान काे पहचान पाती हैं।〈17〉
  • जीवन में जब भी बाेलाे सत्य ही बाेलाे, अन्यथा बाेलाे ही ना ताे ही अच्छा।〈18〉
  • चाहे काेई कितना भी बड़ा विकर्मी क्यो न हाे उसके अंदर भी कोई ना कोई गुण और विशेषताएं अवश्य हाेगी। गुणाे काे ग्रहण करना सीखें, चाहे परिस्थिति व स्थान कैसा भी हाे।〈19〉
  • अपनी सोच पर “विचार सागर मंथन” करना सीखें।〈20〉
  • अगर जीवन में कुछ करने की ठान लें, तो पीछे ना हटे।〈21〉

अपने आप को आप स्वयं रोकते है।~सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

जमी अगर प्यासी है तो गगन मे घटा बहुत है।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ जमी अगर प्यासी है तो गगन मे घटा बहुत है। ϒ

किसी भी चीज़ का कमी नही है जीवन मे।
रास्ते बहुत है तो मंज़िले भी बहुत है।
जमी अगर प्यासी है तो गगन मे घटा बहुत है॥

कुछ लाेग डालते है जीवन मे बाधाये।
उन्हे शायद इस बात की ख़बर नही है कि…
सफ़र की अगर इच्छा हो तो जीवन मे रास्ते बहुत है॥

°*****°°*****°

कुछ लोग अपनी।

ईगो की वजह से…

ना जाने कितने,

रिश्तों को खो देते है।

°*****°°*****°

तीन चीजें अधिक…
समय तक नहीं छिप सकती।
सूरज, चंद्रमा और सत्य॥

चाहे लाख झूठ बोलो।
लेकिन एक सच्चाई के आगे…
लाख झूठ टिक नही सकता॥

°*****°°*****°

कौन कहता है कि इंसान रंग नहीं बदलता।
किसी के मुँह पर सच बोल कर तो देखिये॥

°*****°°*****°

सुंदरता और सरलता की तलाश…
इंसान सारी दुनिया मे करता है लेकिन,

चाहे सारी दुनिया घूम कर सुंदरता और…
सरलता की तलाश कर ले।

लेकिन अगर वो हमारे अंदर नही है तो…..
फिर वो सारी दुनिया मे कही नही॥

°*****°°*****°

किसी से नफरत तभी करना…
जब आप उसके बारे मे सब जानते हो॥

°*****°°*****°

बनी हुई बात को निभाना…
मुशकिल काम नही है।

मगर बिगड़ी हुई बात को…
बनाना बहुत मुशकिल काम है।

°*****°°*****°

एक बार हम निर्णय ले-ले कि।

हमे गलत राह पर नही जाना और…

हम अगर हम गलत राह पर…

चलना छोड़ दे तो सही राह अपने…..

आप मिल ही जाती है।

°*****°°*****°

अपने वो नहीं होते।
जो रोने पर आते है।अपने वो होते है जो…
कभी रोने नही देते।

°*****°°*****°

चेहरे अजनबी हो जाये तो कोई बात नही।
लेकिन रवैया अजनबी हो जाये तो बहुत तकलीफ़ देते है॥

°*****°°*****°

अच्छे के साथ अच्छा और बुरे के साथ बुरा नही…

क्योंकि कीचड़ से कीचड़ साफ़ नही किया जा सकता॥

°*****°°*****°

मुस्कान थके हुये के लिये विश्राम है।

उदास के लिये दिन का प्रकाश है॥

तथा कष्ट मे किसी के लिये प्रकृति का सर्वाेतम…

उपहार है, मुस्कान से बहुत से फायदे है।

सदा मुस्कुराते रहिये – खुश रहिये॥

°*****°°*****°

दिल पर जब चोट लगती है।
तो उसका कोई इलाज नही होता॥

एक वक़्त ही है जो दिल पर लगी।
चोट का मरहम बन इलाज कर देता है॥

धीरे – धीरे इंसान वक़्त के साथ।
चलते – चलते अपना गम भूल सा जाता है॥

°*****°°*****°

मंजिल चाहे कितनी भी ऊँची हो।
लेकिन रास्ते हमेशा पैरों के नीचे ही होते है॥

°*****°°*****°

दिमाग़ से बनाये रिश्ते सिर्फ।
थोड़ी दूर तक ही चलते है और…
जुदा हो जाते है लेकिन दिल से बनाये॥

रिश्ते मरते दम तक साथ – साथ चलते है।
और साथ देते है।
दिल के रिश्ते ज्यादा मज़बूत होते है॥

°*****°°*****°

©- विमल गांधी 
Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी Quotes साझा करने के लिए।

विमल गांधी जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “विमल गांधी जी” की Quotes के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। Quotes छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन Quotes काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

जीवन को बदलने वाले अनमोल वचन।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-KMS

ϒ जीवन को बदलने वाले अनमोल वचन। ϒ

वहम भी एक तरह से बहुत बड़ी…
बीमारी है, इससे कई अच्छे-अच्छे।

घर टूट जाते है, एक बार वहम दिल मे…
बैठ गया तो दीमक के जैसे पूरे।

रिश्तो को खा जाता है बरबाद कर देता है।
वहम को कभी दिल मे बसने ना दो।

♦««¤»»««¤»»♦

शुभ विचार करना, बहुत अच्छी बात है।
और उससे भी अच्छी बात है उस पर चलना।

जिंदगी मे उसे हर पल अमल करना।
कई लोग बातें तो बहुत अच्छी-अच्छी करते है।

लेकिन असल जिंदगी में बिलकुल विपरीत…
दिशा में चलते है और कर्म कुछ अलग ही करते है।

♦««¤»»««¤»»♦

कभी किसी से प्यार मत करना।
अगर प्यार हो जाये तो इनकार मत करना।

निभा सकते हो अगर तो चलना उस राह पर।
वरना किसी की जिंदगी यूँ ही बरबाद मत करना।

♦««¤»»««¤»»♦

खामोश चेहरे पर हज़ारों पहरे होते है।
हँसती आँखों में भी ज़ख़्म गहरे होते है।

जिनसे अक्सर रूठ जाते है हम।
असल मे उनसे ही रिश्ते…
बहुत गहरे होते है।

♦««¤»»««¤»»♦

जरूरी नही की हर वक्त।
लबो पर खुदा का नाम आये।

वो लम्हा भी इबादत का होता है।
जब इंसान किसी के काम आये।

♦««¤»»««¤»»♦

कोई इतना अमीर नहीं होता कि…
अपना गुजरा हुआ वक्त ख़रीद सके।

और कोई इतना भी गरीब नहीं होता कि…
अपना आने वाला कल बदल ना सके।

♦««¤»»««¤»»♦

माता-पिता की सेवा सबसे बड़ी पूजा है।

♦««¤»»««¤»»♦

ना कुछ तेरा ना कुछ मेरा।
यह संसार है बस इक रैन बसेरा।

सब कुछ छूट जायेगा।
लेकिन जो कर्म किये जीवन भर…
बस वही साथ मे जायेगा।

♦««¤»»««¤»»♦

मनुष्य के चेहरे पर जो भाव…
रहते है वो…..
उसकी आँखों के द्वारा प्रकट होते हैं।

वे उसके मन की अनुकृति होते हैं।
उन्हें देवता भी नहीं छुपा सकते।

♦««¤»»««¤»»♦

आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते।
पर आप अपनी आदते ज़रूर बदल सकते है।

और निश्चित रूप से आपकी आदते, अगर
बदल गयी तो…
आपका भविष्य भी ज़रूर बदल सकता है।

♦««¤»»««¤»»♦

भाग्य और दूसरों को क्या दोष देना।
जब सपने हमारे है इचछाये हमारी है।

तो कोशिश भी हमारी ही होनी चाहिए।
इसके लिए दूसरा कोई क्यो कोशिश करेगा।

♦««¤»»««¤»»♦

खुशी मे आंसुओं को कभी रूकने ना देना।
गम मे कभी आंसूऔ को बहने ना देना।

यह जिंदगी ना जाने कब रुक जायेगी।
मगर यह प्यारी सी दोस्ती कभी टूटने ना देना।

♦««¤»»««¤»»♦

कोई भी व्यक्ति हमारा।
मित्र और शत्रु बन कर, इस…
संसार मे नही आता।

हमारा व्यवहार और…
शब्द ही संसार मे लोगों को…
हमारे मित्र और शत्रु बनाते है।

♦««¤»»««¤»»♦

कोई भी लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं होता।

♦««¤»»««¤»»♦

बुदिमान व्यक्ति छिपाकर रखता है अपना ज्ञान।
वो कभी भी प्रदर्शन नही करता, अपने ज्ञान की।
ना ही वो दूसरों के सामने गुणगान करता है।
अपने ज्ञान की।

लेकिन मूर्ख हमेशा अपनी मूर्खता का…
प्रदर्शन करता फिरता है, हर जगह।

♦««¤»»««¤»»♦

जैसे सूर्योदय के होते ही, अंधकार दूर हो जाता है।
वैसे ही मन की प्रसन्नता से, सारी बाधाये शान्त हो जाती है॥

खुश रहने का मतलब यह नहीं है, कि सब कुछ उत्तम है।
इसका मतलब है कि हमने कमियों से, ऊपर उठने का निर्णय कर लिया है॥

♦««¤»»««¤»»♦

ज्यादा बोलने से कभी-कभी…
रिश्तो मे खटास सी आ जाती है।

बेहतर है कि कम बोले या चुप रहे।
किसी से कुछ ना कहे शांत रहे।
उसमे ही सबका भला छुपा रहता है।

♦««¤»»««¤»»♦

धैर्य होना अति आवश्यक है।
अगर…
माली किसी पेड़ को सौ घड़े पानी से भी सींचे।
लेकिन फल तो मौसम आने पर ही लगेगा।

♦««¤»»««¤»»♦

अज्ञानी होना उतना शर्मनाक नही।
जितना कि ना सीखने की इच्छा रखना शर्मनाक है॥

उम्र चाहे जो भी हो कुछ ना कुछ सीखते रहना ही जीवन है।
ज्ञान काे बढ़ाना ही जीवन है॥

♦««¤»»««¤»»♦

बुरे शब्द किसी को शारीरिक चोट नही पहुंचाते पर…
दिल को तोड़ देते है॥

♦««¤»»««¤»»♦

इस संसार में एक माँ का प्रेम ही निस्वार्थ है।

©- विमल गांधी 
Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी Quotes साझा करने के लिए।

विमल गांधी जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “विमल गांधी जी” की कविताआे या Quotes के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं या Quotes काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

———– © Best of Luck ® ———–

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यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

Kmsraj51 की कलम से…..
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ϒ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51 ϒ

51 LCQof KMSRAJ51

Δ मानव मस्तिष्क असीमित शक्तियों से भरा हैं, लेकिन ये शक्तियां सुषुप्त अवस्था में है, बस ज़रूरत है इन सुषुप्त शक्तियों काे जगाने की। {1}

Δ आत्मा कि मुख्यतः तीन शक्तिया है, प्रथम – मन, द्वितीय – बुद्धि(विवेक) और तृतीय संस्कार। मन सोचने का कार्य करती है, बुद्धि(विवेक) निर्णय(Judgment) करने का कार्य करती है तथा बुद्धि के निर्णय अनुसार मानव शरीर की कर्मइंद्रियाे द्वारा जाे कर्म हाेता है वही  संस्कार के रूप में आत्मा के अंदर रिकॉर्ड हाेता रहता हैं, और संस्कार अनुसार ही काेई भी आत्मा नया शरीर(पुनर्जन्म) लेती हैं। {2}

Δ “सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।” {3}

Δ मनुष्य सदैव मनुष्य के ही रूप में जन्म लेता हैं, हा बस फ़र्क इतना ही पड़ता है कि हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर – नारी शरीर के रूप में जन्म लेती है और नारी शरीर हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर के रूप में जन्म लेती है। यह परिवर्तन चक्र हर तीन जन्म पर हाेता रहता हैं। {4}

Δ “अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे”। {5}

Δ “अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।” {6}

Δ जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।
स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥ {7}

Δ अगर कुछ बदलना है ताे सबसे पहले अपने सोच, कर्म व अपने आप काे बदलें। {8}

Δ काेई भी ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता – हा इंसान बुरे हाे सकते हैं। {9}

Δ सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता। {10}

Δ आत्मबल और मन को शक्तिशाली बनाने के लिए – आत्मा को ईश्वरीय स्मृति और सकारात्मक विचार रूपी शक्ति का भोजन दो। {11}

Δ स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत। {12}

Δ जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। {13}

Δ हमेशा अच्छे कार्य के लिए समर्थन व सहयाेग करें। चाहे उस अच्छे कार्य की अगुआई आपके दुश्मन(Eनेम्य्) के द्वारा ही हाे रही हाे। {14}

Δ मूर्खाें कि एक खासियत हाेती हैं, ओ किसी एक बात काे लेकर लंबे समय तक बैठे रहते है, और मूर्खाें काे बात-बात पर बिना किसी मतलब के भी हंसी खुब आती हैं। {15}

Δ समय न गवाये वरना पछताने के अलावा कुछ न बचेगा जीवन में। {16}

Δ आप अपने अतीत काे नही बदल सकते, लेकिन अपने वर्तमान और भविष्य काे बदलना आपके अपने हाथ में हैं। इसलिए जाे बीत गया उसे याद कर, अपने वर्तमान और भविष्य काे समाप्त ना करें। {17}

Δ आज के समय में ९७% मनुष्य यही साेचते है, कि मेरे किस्मत में जाे हाेगा वही मिलेगा और ऐसा साेचकर वह बैठ जाते हैं। आचार्य चाणक्य जी ने कितनी अच्छी बात कही हैं। “क्या पता किस्मत में ही लिखा हाे की काेशिश करने से ही मिलेगा।” {18}

Δ हमेशा अपनी सोच काे अन्य लोगों(दुसराें) से अलग रखाें तभी आपकी अपनी कुछ अलग पहचान बन पायेगी। {19}

Δ आप रहाे या ना रहाे, लेकिन ऐसा कर्म कराें जीवनभर की आपके कर्म सदैव आपकाे जिवित रखें। {20}

Δ जीवन में एक बार की हुई गलती को बार-बार सोचना अर्थात दाग पर दाग लगाना इसलिए बीती को बिन्दी लगाओ(Full Stop), और आगे बढ़ाे। {21}

Δ किस्मत, नसीब़ और लक के भराेसे रहने पर किसी काे सफलता नहीं मिलती, सफलता ताे सच्चे मन से निरन्तर कार्य करने से ही मिलती हैं। इसलिए जीवन में निरन्तर कार्य करते हुए आगे बढ़ते चलाे। {22}

Δ केवल एक ही बुरा कर्म, किसी भी मनुष्य का शानाें, शाैंकत और इज़्ज़त यू मिनटाें में मिट्टी में मिला देता हैं। जैसे रेत से बना घर त्त्वरित गिर जाता हैं। {23}

Δ बुरी बातें ना खुद सुनो, ना ही किसी काे सुनाओं। {24}

Δ सच्चा ब्राह्मण वह है जो पूर्ण शुद्धि और विधि पूर्वक हर कार्य करे। {25}

Δ ज्ञान और ध्यान का हाेना जरूरी हैं जीवन में। बिना ज्ञान और ध्यान के दिमाग शांत नहीं हाे सकता, साे जीवन में, ज्ञान और ध्यान का हाेना बहुत जरूरी हैं। {26}

Δ “आत्मविश्वास किसी भी इंसान के लिए सर्वश्रेष्ठ आत्मिक शक्ति है। अगर वह स्वयं पर विश्वास रखकर कोई कर्म करता है तो कोई भी मुश्किल उसका रास्ता नहीं रोक सकती”। {27}

Δ चोट लगाने वाले का काम है चोट लगाना और आपका काम है अपने को सदैव बचा लेना। {28}

Δ ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता, इंसान(जीवआत्मा) आैर इंसान के कर्म बुरे हाे सकते हैं। {29}

Δ किसी भी मनुष्य का परम धर्म है, सात्त्विक आहार, सात्त्विक विचार और सात्त्विक जीवन। जिससे निराेगी काया(तन-Body), दिघा॔यु जीवन और स्वस्थ मन काे प्राप्त हाे। {30}

Δ “अगर अपनी अलग पहचान बनानी है तो कुछ अलग कीजिए। जब तक दूसरों से डिफरेंट और अच्छा नहीं करेंगे, तब तक आगे बढ़ना मुश्किल है। अलग करने से रिस्क तो होता है पर कंपीटिशन भी तो कम ही रहता है।” {31}

Δ मन को प्रभू की अमानत समझकर उसे सदा श्रेष्ठ कार्य में लगाओ। {32}

Δ सदैव याद रखें जीवन का सबसे बड़ा शान है सदा खुश रहना और खुशी बांटना-यही सबसे बड़ा शान है। {33}

Δ संकल्पों की शक्ति-संकल्पों को बचाओ तो समय, बोल सब स्वत: ही बच जायेंगे। {34}

Δ अगर जीवन में सफल हाेना चाहते हैं ताे अवसर का लाभ उठाओ, समय की कद्र करो, और शब्दों को सोच समझ कर खर्च करो। {35}

Δ आत्मा रूपी पुरूष को श्रेष्ठ बनाने वाले ही सच्चे पुरूषार्थी हैं। सबसे बड़े ज्ञानी वह हैं जो सदैव आत्म-अभिमानी रहते हैं। {36}

Δ जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।
उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥ {37}

Δ सदैव याद रखें किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है। जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता। {38}

Δ अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे। {39}

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

Δ जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है। {40}

Δ जीवन में सदैव शांत मन से साेंच समझ़ कर हीं काेई निर्णय लें, और जाे निर्णय एकबार लें उसका जीवन में दृढ़ता से पालन करें। {41}

Δ याद रखें प्रत्यक्ष प्रमाण वह है जिसका हर कर्म सर्व को प्रेरणा देने वाला हाे। {42}

Δ पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है।
यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है।
यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है॥ {43}

Δ मास्टर(मालिक) का अर्थ है कि जिस शक्ति का जिस समय आह्वान करो वो शक्ति उसी समय प्रैक्टिकल स्वरूप में अनुभव हो। आर्डर किया और हाजिर। ऐसे नहीं कि आर्डर करो सहनशक्ति को और आये सामना करने की शक्ति, तो उसको मास्टर नहीं कहेंगे। तो ट्रायल करो कि जिस समय जो शक्ति आवश्यक है उस समय वही शक्ति कार्य में आती है? एक सेकण्ड का भी फर्क पड़ा तो जीत के बजाए हार हो जायेगी। {44}

Δ काेई भी इंसान जितना अध्ययन करता हैं, उतना ही उसे अपने अज्ञान का आभास होता जाता है। {45}

Δ सदैव याद रखें जीवन में सबसे बड़ी ख़ुशी तथा चुनाैती उस काम काे करने में है जिसे लाेग कहते हैं कि “तुम नहीं कर सकते” या “तुम्हारे बस की बात नहीं”। {46}

Δ मनुष्य के विचार बहते हुए पानी की तरह है, यदि हम उसमें गदंगी मिलाएँगे ताे वह नाला बन जाएगा आैर यदि ज्ञान व ध्यान रूपी सुगंध मिला देंगे ताे वही पवित्र बन जाएगा। {47}

Δ हम अपने असली स्वरूप काे भुल गये है, जिस कारण हमे अपने निजी गुण और संस्कार भी याद नही हैं। यह भुल ही सभी दुःखाे का कारण हैं।आत्मा की तीन मुख्य शक्तिया हाेती हैं। {48}

“प्रथम-मन, द्वितीय-बुद्धि और तृतीय-संस्कार।”

Δ अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,
१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥ {49}

Δ मन कि शक्ति काे सही समय पर उपयोग करें।

मन में वह असिमित शक्ति भरी हैं, जिसका सही उपयोग कर, हर असंभव कार्य काे सरलता पूर्वक संभव में बदला जा सकता हैं। मन कि शक्तियाे काे सही समय पर और सही दिशा में उपयोग करना सीखें। {50}

Δ आत्मा के सात माैलिक गुण हाेते हैं।

1. शांति (Shanti),

2. सुख (Sukh),

3. प्रेम (Prem),

4. शक्ति (Power),

5. ज्ञान (Gyan),

6. पवित्रता (शुद्धि-Purity),

7. आनंद (आत्मिक खुशी-Anand), {51}

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

Playing My Part As A Hero Actor

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

 Playing My Part As A Hero Actor Part 1 

While just as beings we reside in the soul world, as human beings we play our many roles through many physical bodies in this beautiful world drama on this amazing, colorful and round stage called planet Earth. Each day is filled with multi-million scenes in different locations on this very big stage. Some scenes are directly related to us, some indirectly and a lot many aren’t related at all. Each scene that we are directly involved is an opportunity to not only play our role in the best possible way but also as a result shape the role in the most appropriate way possible. Therefore, we are all hero actors who by playing our roles as well as possible, create the script of our own life i.e. create our own destiny.

And do remember doing this has a positive influence on others’ scripts also, which rebounds back to us and in return helps us in our making our scripts better. While we have been given a role to live the entire birth right from childhood to old age, we possess the power, the remote control to dictate and control as to how exactly we will live the day, the year and each year of our present birth, our present role. Each day offers us multiple options as to not only how we act but also how we respond to the world around us and our script or destiny gets shaped up according to the options we make. Our destiny is decided not by what happens to us or around us, but by (i) how we act (sometimes the actions are responses to external events and sometimes they are not) and (ii) how we respond to a million events and circumstances which we encounter as we make this complete journey of life.

Message

To have inner strength in all circumstances is to ensure progress.

Expression: To have inner strength is to be so powerful within that there is a capacity to mould myself in all the variety that life brings. The more I know how to pave my way forward and also have the power to do it, I ensure progress. Like a blade of grass I need to be rooted yet knowhow to mould myself according to the wind.

Experience: Today I will make the effort to find a way to deal with someone or something that I haven’t been able to. I will find something in me that I can use to deal with what is difficult outside. There is surely something in me; I just need to find it. Even if I can’t find something, let me at least take the thought that I have the power within me to do it. And as I keep practicing I will surely get success.

 Playing My Part As A Hero Actor Part 2 

Some of us do not like this idea because we have been taught since we were small that life is all about luck, but this incorrect belief does not let us realize the immense internal power or potential that we possess of shaping up our destiny, our future. By resigning ourselves to a life of luck, we do not use our potential and conveniently avoid doing the inner work of becoming awake and aware of who we are as spiritual beings and the masters of our own destiny. This is why waking up from the sleep of this wrong belief is the first step towards empowering ourselves, towards taking responsibility for our life, for our present, our future.

Also there are some of us who hold the belief that the course taken by each one of our lives is not written by luck but is decided by God, so it is egoistic on our part if we believe that we can write our own scripts, interfering with the plan that God has in his mind for us. So in times of challenges in our lives, although its not wrong to pray to God at those times, we commonly use words like – if God would like it, I shall overcome this obstacle or I will be successful in this particular task or my health will get okay or I will pass this exam etc. In times of happiness, although it’s not wrong to thank God at those times, we completely submit ourselves to God’s will, thinking that it is he and he alone responsible for what good that is happening in my life. In the case of the sorrow we forget that although God can help us to some extent, whether we will surpass the sorrow or not is very largely dependent on our past actions which are influencing the present situation. In the case of the happiness, we forget that though God’s blessings do help and work, our past actions are a very important dominant factor which is creating situations of positivity in our present lives.

Message 

To have a vision of seeing specialities is to pave the way for progress.

Thought to ponder: When I have a vision of seeing specialities, I am able to encourage people to do better. Firstly, I am free from negative or waste thoughts. And most importantly, I am able to help people discover their strengths and give them the power to use them. This ensures progress for them as well as me.

Point to practice: Today I will encourage at least one person with my positive words. I will observe something good in that person and appreciate. This practice will help us experience continuous progress, in spite of difficult circumstances or mistakes.

 Playing My Part As A Hero Actor Part 3 

Already discussed how some of us believe that our life script has been written by God and we do not play any role in the same. In this regard, it is very important to state that respecting, thanking and remembering God in good as well as bad times is obviously very very good and the right karma but submitting ourselves blindly to God’s will is an inactive response which prevents each of us from using our free will to make any choice at any moment and shape our future. While there is a master plan which is being played out on the stage of the world, a part of the plan is that we each have free will and an opportunity to decide our actions and responses. We need to realize that each one of us possesses an intellect, which absorbs the capacity to discriminate right from wrong, good from bad, from God and decides how to act on the world stage.

In this regard, there are two aspects. The first aspect is – God writes my life script completely for me without me playing any role in the same. The other aspect is – I perform actions and create my responses, based on God’s knowledge of good and badkarmas which he has given me, so as to shape my destiny and write my life script accordingly. There is a fine difference between these two aspects, the second aspect being the correct one. This knowledge given to me by God is stored in my intellect; I am the master of it and can decide how to use it to play my part.

Message 

The biggest service is to ensure that if any one comes to us, they don’t go away empty handed.

Expression: When someone comes to me I need to ensure they don’t go away empty handed. That is, I need to find something to give them that will make them feel benefitted. Something that will make them feel better. They need to feel that they have gained something from the interaction they had with us.

Experience: Today I will have special attention that if anyone comes to me, I will give them something that will make them better. This need not be any physical thing, but it could be an encouraging word, a pat on the back, a solution, a suggestion or even a good wish in the mind.

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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Yoga – A Lifestyle

Kmsraj51 की कलम से…..

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 Yoga – A Lifestyle  Part 1 

International Yoga Day, which was declared by the United Nations General Assembly, was celebrated the world over on June 21st, 2015 with large gatherings participating. This is a special 3 part message on yoga –

All of us are constantly living a life of yoga, which in spiritual terms is called a link or connection between two entities i.e. the one which remembers and the other one which is remembered. Examples of what we have yoga with could be a person or God (called rajyoga) or your actions (called karma yoga) or spiritual knowledge (called gyan yoga) or bhakti (called bhakti yoga) or your breath (calledpranayama) or your physical body (called hath yoga) or even a physical object like a candle flame. So, yoga is life and should not be limited to sitting in a particular posture for a few minutes at a particular time of the day. Basically, remembering anything or anyone is yoga. The word yoga should not be limited to exercise which is a narrow definition of yoga. Focusing on one’s own body is extremely important, but only one aspect of a yogi lifestyle. A complete or comprehensive yogi lifestyle is focusing on pure and constructive sources right through the day including God, because yoga means union or link, a union which will benefit the soul and body positively.

We all live our lives in search of peace, love and happiness and also inner powers which we as spiritual beings are lacking in. So yoga i.e. our mental energy correctly channeled and connected with something positive provides us with that. People also call performing actions as yoga which is called karma yoga, but only performing selfless actions with complete dedication nowadays with the stresses and strains of everyday living can be depleting on a mental energy level unless the karma yoga as it is called is accompanied by a mental union or link with the Supreme while performing the actions, which helps us in remaining unaffected by the stress caused due to being over-busy in those actions. That in the true sense is karma yoga i.e. selfless karmas performed in the remembrance of God. This link between me, the spiritual child and God, the spiritual parent, nourishes me continuously and gives me the strength to perform actions with complete accuracy and get the desired success filled result.

ð Message ð

To receive respect from others comes more with responsibility than as a right.

Expression: The one who gets respect is the one who becomes worthy of it rather than the one who just expects it. True respect comes from how well a task is done rather than what is done. The more one’s speciality is expressed, the more one becomes worthy of respect.

Experience: When I go on giving my best in whatever is expected of me, I will start receiving respect from those around me. I will then never expect from others but will naturally be able to give respect to all. This further makes me earn their love and regard.

 Yoga – A Lifestyle  Part 2 

All of us are living beings with a mind and an intellect, which we use to connect to various objects, people and events throughout the day. This is called our mental energy. This mental energy travels extremely fast and can reach another person in much less than a second. Very often we focus our mental energy on the physical body for mental peace and physical fitness through the medium of yog asanas or yogic postures to attain the desired purpose. That for us is a way of letting go of our stresses and negative energies stored in the body. It makes our mind and body healthy. We also focus our mental energies on our breath through the medium of pranayama whereby flawless and smooth breathing is experienced which benefits our physical body immensely and also gives us mental energy.

If you are new at the Brahma Kumaris, and if you are practicing yog asanas and pranayama for their physical and emotional health benefits, from before, you don’t need to stop them. This is because both these are extremely important mediums for this purpose and widely acclaimed and proven successful techniques which have saved many people from the most serious of illnesses and also reduced the intensity of many illnesses. There are lakhs of people all over the world who share their experiences confirming this. But the Brahma Kumaris add another dimension to this physical side of yoga – a spiritual yoga i.e. connecting the mind and intellect to the supreme source of spiritual energy or God, which is also called yoga or connection with a non-physical pure entity – God. So those who have been practicing yog asanas and pranayama, if they desire, can continue to do the same but add the spiritual yoga in their lifestyles. Those who have not been practicing yog asanas and pranayama concentrate only on the spiritual yoga, which not only purifies the soul but also has immense benefits for the physical systems of the body and helps in purifying them. This is because a pure mind means a mind full of the seven qualities of peace, joy, love, bliss, purity, power and knowledge, which in turn influences the main systems of the body and makes them free of illnesses.

ð Message ð

To have a powerful intellect is to take the positive and leave out waste.

Expression: I need to make my intellect powerful like a swan (it only takes jewels and leaves out the pebbles). I need to recognize and accept what is good for me and reject what is not good for me. With practice I find that it becomes a habit to see only that which is good for me. This will make me positive in all my future interactions too.

Experience: Today I will make a conscious effort to find some aspect of my life that is positive. This I need to remember consciously and remind myself from time to time so that I can carry it through the day. This will ensure a touch of positivity to all I do.

 Yoga – A Lifestyle  Part 3 

The mechanism of how the mind affects the different body systems. The practice of spiritual yoga or connecting the mind with a higher source of spiritual power i.e. God, causes His spiritual energy to enter our mind and fill our minds with the seven primary qualities – peace, joy, love, bliss, purity, power and knowledge. These qualities nourish all our body systems and make them free of illnesses. Each time we experience an impure or negative emotion, its negative effect travels to all these systems and this causes the birth of illnesses in these systems. Spiritual yoga, which at the Brahma Kumaris is called Rajyoga meditation and is karma yoga, because it can be done while performing any action, does the opposite. Because Rajyoga is a yoga with the Highest power existing in the universe, it is given that name. This Highest power is God and He is the Highest because He is an overflowing source of all these seven qualities mentioned above. So a link with such a source gives us an experience of these qualities and as a result these qualities flow to each cell of all the systems of the body and causes these cells to heal and become full of pure spiritual and as a result physical energy. Also, each one of us has a target organ or system which is most prone to disease. What this organ or system is for each one is connected with the karmas of the soul performed in this and previous births, which reflect in the systems of the body. Rajyoga meditation, as taught by the Brahma Kumaris, because of the mechanism explained above, helps in keeping this target organ healthy and also brings with it mental peace and a stress life.

Lastly, as you follow the path of spiritual yoga, take care that physical health issues are also addressed since a healthy body finds it easier to meditate correctly and also perform actions in the remembrance of the Supreme Being with comfort. On one side the meditation helps in clearing up the negative sanskaras of the soul which are created in the soul when a negative action is performed either in this or previous births, and are the primary cause of all our illnesses. At the same time, on the other side care should also be taken of the physical body through the mediums of a right diet, exercise and sleep, so that the spiritual journey is smooth and obstacle free; a journey on which we welcome all of you.

ð Message ð

To make effort and get the fruit is to ensure real progress.

Thought to ponder: Sometimes, things come easy and sometimes they don’t. When we put in a lot of effort and then get the result of it, there is double benefit. One is of course the result as a positive outcome and the satisfaction is much more because I have earned it. The other is the many trials that I had to make would let me gain many experiences and I end up getting richer with these experiences.

Point to practice: Today I will take up something I had started with enthusiasm or wanted to start. I will give my thought, time and energy to it and make sure that I make it happen. I will take a thought today not to leave it mid way but see it through till I succeed.

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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इन तीनों काे जीवन में ग्रहण कीजिए।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ इन तीनों काे जीवन में ग्रहण कीजिए। ϒ

इन तीनों को ग्रहण कीजिए।
👇 👇 👇
होशियारी, सज्जनता और सहनशीलता।

चरित्र के उत्थान एवं आत्मिक शक्तियों के उत्थान के लिए इन तीनों सद्गुणों-होशियारी, सज्जनता और सहनशीलता-का विकास अनिवार्य है।

🌼 1यदि आप अपने दैनिक जीवन और व्यवहार में निरन्तर जागरुक, सावधान रहें, छोटी छोटी बातों का ध्यान रखें, सतर्क रहें, तो आप अपने निश्चित ध्येय की प्राप्ति में निरन्तर अग्रसर हो सकते हैं। सतर्क मनुष्य कभी गलती नहीं करता, असावधान नहीं रहता। कोई उसे दबा नहीं सकता।

🌼 2सज्जनता एक ऐसा दैवी गुण है जिसका मानव समाज में सर्वत्र आदर होता है। सज्जन पुरुष वन्दनीय है। वह जीवन पर्यंत पूजनीय होता है। उसके चरित्र की सफाई, मृदुल व्यवहार, एवं पवित्रता उसे उत्तम मार्ग पर चलाती हैं।

🌼 2सहनशीलता दैवी सम्पदा में सम्मिलित है। सहन करना कोई हँसी खेल नहीं प्रत्युत बड़े साहस और वीरता का काम है केवल महान आत्माएँ ही सहनशील होकर अपने मार्ग पर निरन्तर अग्रसर हो सकती हैं।

Δ पं॰ श्रीराम शर्मा आचार्य जी।

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सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

 ~KMSRAJ51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51

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इन तीन काे जीवन में बनाये रखें।

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ϒ इन तीन काे जीवन में बनाये रखें। ϒ

इन तीन को हासिल कीजिए।
👇 👇 👇
सत्यनिष्ठा, परिश्रम और अनवरतता।

🌼 1) सत्यनिष्ठ व्यक्ति की आत्मा विशालतर बनती है। रागद्वेष हीन श्रद्धा एवं निष्पक्ष बुद्धि उसमें सदैव जागृत रहती है। वह व्यक्ति वाणी, कर्म, एवं धारणा प्रत्येक स्थान पर परमेश्वर को दृष्टि में रख कर कार्य करता है। जो वाणी, कर्तव्य रूप होने पर हमारे ज्ञान या जानकारी को सही सही प्रकट करती है और उसमें ऐसी कमीवेशी करने का यत्न नहीं करती है कि जिससे अन्यथा अभिप्राय भासित हो, वह सत्यवाणी है। विचार में जो सत्य प्रतीत हो, उसके विवेकपूर्ण आचरण का नाम ही सत्यकर्म है।

🌼 2) परिश्रम एक ऐसी पूजा है, जिसके द्वारा कर्म पथ के सब पथिक अपने पथ को, जीवन और प्राण को ऊँचा उठा सकते हैं। कार्लाइल का कथन है कि परिश्रम द्वारा कोई भी बड़े से बड़ा कार्य, उद्देश्य या योजना सफल हो सकती है।

🌼 3) अनवरतता अर्थात् लगातार अपने उद्योग में लगे रहना मनुष्य को सफलता के द्वारा पर लाकर खड़ा कर देता है। पुनःपुनः अपने कर्तव्य एवं योजनाओं को परिवर्तित करने वाला कभी सफलता लाभ नहीं कर सकता।

Δ पं॰ श्रीराम शर्मा आचार्य जी।

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सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

 ~KMSRAJ51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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मानव जीवन विचारों का प्रतिबिम्ब।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ मानव जीवन विचारों का प्रतिबिम्ब। ϒ

संसार एक शीशा है। इस पर हमारे विचारों की जैसी छाया पड़ेगी वैसा ही प्रतिबिम्ब दिखाई देगा। विचारों के आधार पर ही संसार सुखमय अनुभव होता है। पुरोगामी उत्कृष्ट उत्तम विचार जीवन को ऊपर उठाते हैं, उन्नति, सफलता, महानता का पथ प्रशस्त करते हैं तो हीन, निम्नगामी, कुत्सित विचार जीवन को गिराते हैं।

विचारों में अपार शक्ति है। जो सदैव कर्म की प्रेरणा देती है। वह अच्छे कार्यों में लग जाय तो अच्छे और बुरे मार्ग की ओर प्रवृत्त हो जाय तो बुरे परिणाम प्राप्त होते हैं। विचारों में एक प्रकार की चेतना शक्ति होती है। किसी भी प्रकार के विचारों में एक स्थान पर केन्द्रित होते रहने पर उनकी सूक्ष्म चेतन शक्ति घनीभूत होती जाती है। प्रत्येक विचार आत्मा और बुद्धि के संसर्ग से पैदा होता है। बुद्धि उसका आकार- प्रकार निर्धारित करती है तो आत्मा उसमें चेतना फूँकती है।। इस तरह विचार अपने आप में एक सजीव किन्तु सूक्ष्म तत्त्व है। मनुष्य के विचार एक तरह की सजीव तरंगें हैं जो जीवन संसार और यहाँ के पदार्थों को प्रेरणा देती रहती है। इन सजीव विचारों का जब केन्द्रीयकरण हो जाता है तो एक प्रचण्ड शक्ति का उद्भव होता है। स्वामी विवेकानन्द ने विचारों की इस शक्ति का उल्लेख करते हुए बताया है- ‘‘कोई व्यक्ति भले ही किसी गुफा में जाकर विचार करे और विचार करते- करते ही वह मर भी जाय तो वे विचार कुछ समय उपरान्त गुफा की दीवारों का विच्छेद कर बाहर निकल पड़ेंगे और सर्वत्र फैल जायेंगे। वे विचार तब सबको प्रभावित करेंगे।’’ मनुष्य जैसे विचार करता है, उनकी सूक्ष्म तरंगें विश्वाकाश में फैल जाती हैं। सम स्वभाव के पदार्थ एक- दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं, इस नियम के अनुसार उन विचारों के अनुकूल दूसरे विचार आकर्षित होते हैं और व्यक्ति को वैसे ही प्रेरणा देते हैं। एक ही तरह के विचार घनीभूत होते रहने पर प्रचण्ड शक्ति धारण कर लेते हैं और मनुष्य के जीवन में जादू की तरह प्रकाश डालते हैं।

🍁  पं श्रीराम शर्मा आचार्य 🍁

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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इन तीन का ध्यान रखिए।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ इन तीन का ध्यान रखिए। ϒ

उत्पादन की जड़ इन तीनों को सदैव अपने अधिकार में रखिये-

अपना क्रोध, अपनी जिह्वा और अपनी वासना। ये तीनों ही भयंकर उत्पादक की जड़ हैं।

🍁  क्रोध के आवेश में मनुष्य कत्ल करने तक नहीं रुकता। ऊटपटाँग बक जाता है और बाद में हाथ मल मल कर पछताता है।

🍁  जीभ के स्वाद के लालच में भक्ष्य अभक्ष्य का विवेक नष्ट हो जाता है। अनेक व्यक्ति चटपटे मसालों, चाट पकौड़ी और मिठाइयाँ खा खाकर अपनी पाचन शक्ति सदा के लिये नष्ट कर डालते हैं।

🍁  सबसे बड़े मूर्ख वे हैं जो अनियंत्रित वासना के शिकार हैं। विषय-वासना के वश में मनुष्य का नैतिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक पतन तो होता ही है, साथ ही गृहस्थ सुख, स्वास्थ्य और वीर्य नष्ट होता है। समाज ऐसे भोग विलासी पुरुष को घृणा की दृष्टि से अवलोकता है। गुरुजन उसका तिरस्कार करते हैं। ऐसे पापी मदहोश को स्वास्थ्य लक्ष्मी और आरोग्य सदा के लिये त्याग देते हैं। इन तीनों ही शत्रुओं पर पूरा पूरा नियंत्रण रखिये।

©पं॰ श्रीराम शर्मा आचार्य जी।

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Is God Really Present Everywhere?

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

 Is God Really Present Everywhere Part 1 ?

Is it really true that the Supreme Soul (God) is present everywhere, in each atom in the entire universe? The sun is in one place yet its influence can be felt throughout the solar system to different degrees in different places, providing a source of heat and light, needs absolutely essential for our physical life. The closer one is to the sun, the greater the effect. In the same way God, the one who is the ocean of perfect characteristics, the source of all spiritual needs, does not have to be omnipresent (present everywhere) in order to be with us wherever we are. He can be in one location and we can still experience his closeness.

If God were literally omnipresent and thus in every atom, where is this love, peace, joy and wisdom? Are they present in every atom in this human world? If God is present inside me, how could ignorance have come to me in the first place? Can ignorance come to God? If God is omnipresent to where or to whom do I turn my thoughts? Just as a radio transmitter emanates waves throughout the world and a receiver, if tuned in, will pick them up, so too if the mind is tuned totally to the material world and physical activities, then I am unable to experience God practically in my daily life. Even though He always radiates His qualities, I can only pick up those transmissions if I am soul-conscious and if I turn my thoughts in His direction to His location. If God were omnipresent, there would be no meaning to the tradition throughout all cultures to have special places set aside (e.g. temples and churches) for worship. In those special places, is God more omnipresent than in other non-sacred places? If God were omnipresent, are the ones who are so-called God-realised beings more God than the ones who have not realised?

ð Message ð

A powerful stage is like a switch which finishes darkness of negativity in a second.

Expression: Darkness is dispelled when a light is switched on. Similarly, a powerful stage is also a light switch. When this switch is on, one can put an end to all wasteful darkness and no longer have to labour to stop any wasteful thoughts. By becoming powerful, one can naturally become a donor, as there is nothing waste within.

Experience: When I am aware of my positive qualities and what I can contribute to others, I am able to be powerful. This naturally enables me to be light and spread the inner light to others. I am never influenced negatively with any kind of waste or negative, but am always able to maintain my own positivity and that of others too.

 Is God Really Present Everywhere Part 2 ?

If the Supreme Soul (God) were omnipresent there would be no need for knowledge and no need to search for peace. The One who is the ocean of peace and the ocean of knowledge would be everywhere. Perhaps the strongest point against the idea of literal omnipresence is the point of relationship. In the heart of every soul – there is a distinct memory – I am the child, God is my Father. If God is omnipresent, does that mean that the Father is present inside the child?

God is also the supreme teacher, guide, liberator, friend and purifier of human souls. That is why everyone turns their thoughts to Him in their hours of sorrow. The idea that God is omnipresent is indeed the ultimate excuse and greatest escape from responsibility of the mistakes that human souls have made and continue to make. After all, if God were omnipresent (present in everyone) He would be responsible for good as well as evil karmas that humans commit. An omnipresent God implies that we have nothing to complete in ourselves for we are already God. Am I really God? One could not seriously admit to such a claim. It is only through deep and concentrated meditation that one can enter the spiritual dimension where His presence is truly felt.

ð Message ð

You will be truly successful when you are loving and detached with the ones you come into contact with.

Expression: With all the people that you come into contact with throughout the day, check if you are able to have a balance between being loving and detached. Detachment doesn’t mean to stay away from people, but to be with them and yet be detached.

Experience: Make the practice of seeing only specialities, your own and that of others. This will enable you to maintain your self-respect and you will be able to find yourself both loving and detached.

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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The Spiritual Director And The Actor

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT08

ϒ The Spiritual Director And The Actor ϒ

Spirituality adds great depth and value to Shakespeare’s famous words – All the world’s a stage, and all the men and women merely players. Through spirituality, I realize and experience myself as a soul, separate from the body, playing a part on the stage of the world through my physical body costume. The difference between the actor and the role is clearly understood. An added dimension then, to this consciousness is that God or the Supreme Being is the Spiritual Director of the play we are enacting.

The Director – God looks at the entire drama and every actor’s part from a broader perspective. His vision is not just limited to the present but stretches from the past (past not limited to this birth) to the future (future not limited to this birth) of each one’s part. I learn from the Director how to play my own part with accuracy, now as well as his training helps me for the future. Like any good actor, I need to have a lot of respect, appreciation, loyalty and love for the Director and immense faith in him. The Director is like a mentor or guide for an actor, to whom he surrenders completely. He knows that by doing that, his act will be of the highest quality. If he doesn’t do that and he performs his act his own way, his act will suffer and he will experience pain. As a result he will not be as successful as one who is willing to listen and learn from the Director. If I keep a little distance between me and my role, so I don’t lose sight of the Spiritual Director’s instructions and the way the play is moving, my part will be much easier to perform, better appreciated by all, and I will be extremely successful. Positive appreciation for a performance for an actor’s performance by the spectators is of great value to any actor, sometimes even more important than commercial success. So surrendering to the soul’s Director and having a strong relationship of mutual trust with him is particularly helpful at this time, when there is a lot of confusion on the stage of the Earth with billions of actors crowded here and our acts not exactly of the highest quality. So I, the spiritual actor need someone at this time who can tell me about mistakes committed by my in my past acts and improve my act of the present which will result in a positive present as well as future. Spirituality introduces me to that someone.

Message 

To have a positive conversation with the self is to empower oneself.

Expression: Everyone is irritated with a person who nags or talks negative all the time, especially if they are really close to us. During negative situations, we too tend to nag or have continuous negative talk with ourselves. Since we are our constant companions, we tend to end up getting irritated or upset by the end of the day.

Experience: Today I will talk positively to myself. I will encourage and explain to myself. I will not nag myself, but will have a positive conversation with myself. I will help myself become better by learning from my mistakes and encouraging my successes.

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Self Responsibility

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

Self ResponsibilityPart 1 

There are certain laws which are involved in our actions and interactions. They are not human laws requiring lawyers to interpret or the police to put into action. They are natural laws which are constantly operating in every relationship. They are often called the Laws of Karma (action): briefly described by the saying – As you sow, so you shall reap, described by Isaac Newton as the Third Law of Motion i.e. for every action, there is an equal and opposite reaction. The Laws of Karma remind us that whatever quality of energy we give out, we get back. This might not be exactly tit for tat, but if we give happiness to someone, it will come back to us; if we give pain or sorrow, it will come back, perhaps not today or tomorrow, but at some time in the future.

Most of us are conditioned by the idea that we are responsible for some of our actions, but not all of them. For example, we would consider ourselves responsible for the actions which improved our company’s business but would not consider ourselves responsible for not being on good terms with our spouse. If, as parents, we worked hard in educating our children and they grew up to become well placed and successful individuals in their lives, we would consider ourselves responsible. If on the other hand they don’t make it to the top and are not so successful, we will blame our children for not putting enough effort or maybe the education system for the same. So we are selective in taking responsibility for our actions.

Through spirituality, we are reminded of the unchangeable laws of cause and effect, which awakens our awareness of our true responsibility for each and every action that we perform.

© Message ©

Faith in one’s progress brings contentment.

Expression: Even when the situation is not according to what is expected, there is contentment for the one who has faith in his own progress. Such a person will not just sit back waiting for things to change nor will he just curse his fate. Instead he’ll do his best and use all his resources in bettering the situation.

Experience: The understanding that all life’s situations are a training for me, automatically keeps me content in all situations. There is naturally an experience of constant progress and a feeling of having gained something from all situations.

Self ResponsibilityPart 2 

Because we have forgotten the principle of karmic returns (discussed yesterday), we have learned to avoid taking responsibility for many of our actions. We fail to see the impact of our actions upon others and we fail to see that the real meaning of responsibility is responding correctly. Life can be seen as a series of responses which we each create in our interactions with other people and events. As is the quality of our ability to respond (energy given), so will be the quality of the return (energy received). The Laws of Karma also serve to remind us that the situations in our life, the quality of our body, wealth, relationships etc. and the type of person we are today are the result of what we thought and did yesterday, last month, last year, perhaps in our last birth. Many people do not like this idea or find it difficult to accept because most of us have been taught that our destiny lies in someone else’s hands or in the hands of fate or luck, about which we can do nothing. The Law of Karma or the Law of Reciprocity teaches us that there is no such thing as luck and that whatever happens to us today is the result of our positive or negative actions in the past. If you spend a few moments reflecting on events in your life, without being judgmental, you will begin to see connections between actions and results, causes and effects. When you see how all effects have their causes, you will then be convinced that this universal law is at work in your life at all times.

© Message ©

The ones who are constantly happy are truly fortunate.

Expression: Whatever the kind of situations needed to be faced, whoever the people and the different kind of personalities they come into contact with, the ones who are fortunate constantly enjoy. They also continue to take benefit and bring benefit to others too. Their fortune lies in their ability to perceive the positive aspect in everything and take benefit accordingly.

Experience: When I am able to be happy under all circumstances, I am able to make the best use of whatever I have with me. I then find myself full of all resources. I don’t think of what I don’t have but I am aware of and make the best use of what I have. So I find myself to be always lucky. I constantly move forward.

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Taking Responsibility, Overcoming Guilt

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Taking Responsibility, Overcoming Guilt Part – 1

When you free yourself of guilt, you live in peace within. You take on responsibility and stop sentencing (punishing) yourself internally with feelings of guilt. Taking on responsibility is constructive; it allows all your potential to remain awake and flow. You feel free and unburdened. When you get it wrong, you can find different methods to relieve yourself of the burden that it might imply. For example, being sorry for or feeling sad for something that you have done means that you are aware that you have acted against your own wellbeing or that of another. Realizing it is good; it is the base for any positive change. The important thing is not to sentence (punish) yourself. Learn the lesson. Say sorry, if it is the right thing. Put it right.

Remember that yesterday has already passed. The past cannot be changed. You can’t swallow the words that you said, since you already said them. You can’t repeat the scene from yesterday in a different way because it already happened and stayed recorded on the film of this world drama. Therefore, don’t repeat the words or the scene in your mind over and over again; doing that, you keep alive something that is dead, since yesterday already stayed behind. Learn from the error and commit yourself to you and to your life, promising to yourself that you will not fall over the same stone again. You will think about it before speaking or acting.

– Message –

Happiness is earned by those whose actions and attitudes are pure and selfless.

Expression: When the actions are pure and selfless there is no trace of negativity. Where there is no negativity, the mind becomes free from feelings of guilt, fear etc. This automatically ensures constant happiness.

Application: If there is no happiness, there is definitely some kind of negativity. So check the actions that you perform. Let them be not only for your benefit but also for the benefit of all and you will find that you are able to be in constant happiness.

Taking Responsibility, Overcoming Guilt Part – 2

If there are people or situations that lead you to fall over the same stone i.e. they lead you to make the same mistake, which was committed earlier, again, perhaps you will have to avoid them for a few days or a time, until you have strengthened yourself and have the inner security that they will not influence you. This is not running away; it is wise knowing your weaknesses and knowing that to get into similar situations with the same people is only to repeat the same errors and to worsen your wellbeing and that of the other. Trust in yourself. You can overcome these mistakes and stop making them. It is a question of loving yourself and living. Out of love, you stop hurting yourself and hurting the other.

Crying over past mistakes, you don’t mend anything. Open yourself to forgiveness. Raise the level of your thoughts so that they don’t keep you in a state of sadness and loss of hope. Don’t allow your inner judge to sentence (punish) you each time that you act, since that way you won’t feel free. Your judge that you carry within makes your life bitter; however, it is you that gives this judge the capacity to exist.If the inner judge is in harmony with our conscience, it is good, because it wants to protect us. On creating guilt it warns us that we have broken a rule of our code of beliefs, values or behaviors. It alerts us to the fact that we are acting against something important of ourselves. At those moments it helps us to observe and question what is real, true, important and even sacred in our life and for us.

– Message –

The one who is truly happy knows the importance of taking happiness as much as he knows how to give happiness to others.

Expression: In order to be fully happy, it is important not to take sorrow from situations or people. Usually we pay attention not to give sorrow but it is now equally important to just take happiness from whatever happens.

Application: Today take the thought in your mind that you will just give happiness and take happiness from each and every person you meet. Think of something nice to say to every person you meet. Then you will find that you are constantly happy because you are not expecting from them but you are giving.

Taking Responsibility, Overcoming Guilt Part – 3

There is a difference between when we have established our own code of values or beliefs in life, and when we feel obliged (forced) to obey an imposed code of beliefs. It is important for us to accept on an inner level the code by which we think we should be guided and act.When we act out of obligation (compulsion), by following a code of beliefs or behaviors that we feel have been imposed but aren’t accepted as our own, we should ask ourselves why we act out of obligation (compulsion), basing ourselves on a code we have not accepted. Are we perhaps afraid that, if we don’t do it, we will feel guilty?

When we violate the codes of belonging to a group, family, social class or community, generally we feel guilty. If this guilt leads us to question ourselves about what is right for our conscience, we progress in our personal growth and improve our clarity. It is necessary to respect ourselves, being clear about what the beliefs are on which we base our life, think, feel and evaluate. This will help us to avoid the gap between what we should and what we want to do. Until the should and the want are joined, we leave an open space for guilt.

When we act according to how we feel we should, we will feel guilt for not doing what we want. While we act according to what we want, we will feel guilt for not doing what we should.
When guilt warns us that there is something to check and correct within us and we are willing to see it, have a dialogue with the self and clarify, we are on the right path. Sometimes guilt acts as an excuse for us to apologize without really taking on the responsibility for what happened; we pass on the responsibility to the established norms, norms that in this case we haven’t accepted as our own. In any case, the solution to guilt is to take on self-responsibility.

– Message –

Happiness comes when there is self-sovereignity.

Expression: Being a self-sovereign enables you to have total control over yourself. If not, when there are negative or difficult situations, there would be sorrow. When you are in control you will not expect situations to change but you will have the courage to change yourself.

Application: When things go wrong, instead of worrying or waiting for things to change, tell yourself that you are a self-sovereign and you can bring about a change in yourself. When you work on yourself and change you can be happy.

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आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

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Experiencing The Stage Of Being A Detached Observer

Kmsraj51 की कलम से…..

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Experiencing The Stage Of Being A Detached Observer

Experience the stage of being a detached observer by gradually creating the following thoughts:

I am aware of the present moment and of time… The whole world is out there… I let go for a moment of what is happening around me… It is as if the world continues to turn, but I have stopped for a few minutes and turned into an observer… Mentally, I take a step back… I look around me as if I were in the inside of a room… the room of my mind… In this place, I can be with myself… at peace… calm… free… Here I do not have pressures, or worries, or fears… Nothing and nobody can influence me… I can think… see things as they really are…

I am sitting like an observer, seeing through two windows… These windows are my eyes… I am not my eyes… I am aware of who is looking through these eyes, a tiny sparkling star like energy, the soul… I am different from everything I am seeing… I perceive that separation between the observer and the observed… I observe the things that surround me without judging, without analyzing… I simply observe, remaining at peace with myself…

I see this world as a stage of a great unlimited theatre play… each human being is an actor, a soul playing their own role via their physical body… I simply observe from my inner room… things come and go… nothing is permanent… I do not need to worry about anything or anybody… I let things be… flow… I am at peace… calmed… I share this vibration of peace with all that surrounds me.

– Message –

When you have the faith that things will turn out to be the best you can enjoy whatever life brings your way.

Contemplation: Throughout the day you will come across a lot of seemingly difficult situations. But if you have the faith that whatever happened was good, and whatever is happening is better, you will be able to enjoy each and every moment. You will also be able to learn from your mistakes.

Application: At the end of each day think of all those things that happened wrong and see what you have learnt from them. When you are sure that you have learnt something you will understand what has happened was for the good.

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