बोर्ड परीक्षा की तैयारी ~ Board Exam preparation methods !!

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कुछ छात्रों में बोर्ड परीक्षा को लेकर एक अजीब सा डर रहता है। पूरी तैयारी के बावजूद भी उन्हें मुश्किलें आती हैं। बोर्ड परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी के अलावा जरूरी है कि इसे पूर्ण रूप से नियोजित बनाएँ।

व्यवस्थित रूप से की गई पढ़ाई द्वारा कोई भी विद्यार्थी परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकता है। यह आवश्यक है कि पहले अपेक्षाकृत आसान अध्यायों का अध्ययन करके, उसके पश्चात उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम अंक प्राप्त कर सकें। तत्पश्चात अपेक्षाकृत कठिन अध्यायों की ओर जाना चाहिए। परीक्षा में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने के लिए निम्न बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक है-

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* हमेशा लिखकर याद करें। इससे गलतियों की संभावना कम होगी।

* रटकर याद करने से बचें। इससे आशंका पूरी तरह नहीं समाप्त होती है। किसी भी विषय के मूल को पहले समझने का प्रयास करें।
कुछ छात्रों में बोर्ड परीक्षा को लेकर एक अजीब सा डर रहता है। पूरी तैयारी के बावजूद भी उन्हें मुश्किलें आती हैं।
बोर्ड परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी के अलावा जरूरी है कि इसे पूर्ण रूप से नियोजित बनाएँ।

* समय-समय पर अपने पाठ को दोहराते रहें और प्रतिदिन इसके लिए कम से कम आधे घंटे का समय निकालें।

* सैंपल पेपर में से पहले उन प्रश्नों को छाँटकर निकाल लें, जिसके उत्तर आपको नहीं आ रहे हैं।

* अंकों के प्रश्न हल करते वक्त हमेशा फार्मूला लिखें, उसके बाद प्रश्न को इस फार्मूले के आधार पर हल करें।

* हल हो चुके प्रश्नों का महत्व समझें और प्रश्न करने के पश्चात अपने उत्तर को हल से अवश्य मिलाएँ।

* लॉग व एंटीलॉग प्रश्नों का अधिक अभ्यास करें।

* भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र आदि विषयों के फार्मूले बनाकर उन्हें अपने कमरे की दीवार पर लगा लें, जिससे चलते-फिरते आप उन्हें दोहरा सकें।

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विवेकानंद क्या चाहते थे? ~ Vivekananda wanted to do?

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** विवेकानंद क्या चाहते थे? ~ Vivekananda wanted to do? **

Swami-Vivekananda

शिकागो में हुए पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन्स में जब प्रत्येक धर्मावलंबी अपने-अपने धर्म को दूसरे धर्म से ऊपर दिखाने की चेष्टा कर रहा था तब विवेकानंद ने उनके इस शीतयुद्ध का निवारण एक छोटी-सी परंतु महत्वपूर्ण कहानी के द्वारा किया।

Swami Vivekanand Ji


बात 1867 की है। एक ट्यूटर उन दिनों कोलकाता के गौर मोहन मुखर्जी लेन स्थित मकान पर एक बालक को रोज पढ़ाने आते थे। तब न तो उन ट्यूटर को तथा न ही किसी अन्य को पता था कि यही बालक एक दिन विश्व-धर्म का प्रचार करेगा और युवा चेतना का एक अंतरराष्ट्रीय प्रतीक बनेगा। वैसे इस बालक की माता भुवनेश्वरी देवी को तब ही आभास हो चुका था, जब यह बालक उनकी कोख में पल रहा था कि यह संतान विश्व कल्याण के लिए ही उत्पन्न होगी। बचपन में इस बालक का नाम था नरेंद्रनाथ दत्त।

नरेंद्र के पिताजी अंगरेजी शिक्षा में दीक्षित, उदार, पश्चिमपरक तथा एक संपन्न वकील थे। धर्म के प्रति उनकी आस्था कम ही थी। इसके विपरीत नरेंद्र की मां सनातन आस्थाओं वाली धर्मपरायण महिला थी। पिता चाहते थे कि नरेंद्र भी उन्हीं का व्यवसाय अपनाकर जीवनयापन करे और इसी तारतम्य में उन्होंने उसे प्रेसीडेंसी कॉलेज तथा स्कॉटिश चर्च कॉलेज से स्नातक (बीए) करवाया। आगे उन्होंने कानून की पढ़ाई भी प्रारंभ कर दी थी, परंतु युवावस्था से ही उन्हें ‘ईश्वर की खोज’ की भी धुन सवार हो गई थी। यही धुन उन्हें एक प्रतिष्ठित वकील बनने की बजाय स्वामी रामकृष्ण परमहंस तक ले गई।

कालांतर में परमहंस के मुख्य शिष्य के रूप में संन्यास लेकर नरेंद्र ने विवेकानंद नाम ग्रहण किया। इसके पश्चात प्रारंभ हुई एक युवा की क्रांति अलख, जो डेढ़-दो दशक तक खोज, साधना, देशाटन, देशप्रेम आदि के रूप में गुजरते हुए समय से पूर्व अल्पकाल में बुझ गई, परंतु अपने पीछे छोड़ गई एक अनमोल धरोहर, एक परिवर्तन की, विश्व बंधुत्व की। यही क्रांति अलख पिछली एक शताब्दी से प्रत्येक युवा पीढ़ी के मार्गदर्शन व उत्प्रेरक का कार्य करती आ रही है। सबसे अधिक आश्चर्य की बात तो यह है कि जहाँ सौ वर्ष पुरानी अन्य बातें, पहलू व चीजें आज के दौर में लगभग अप्रासंगिक हो चुकी हैं, वहीं विवेकानंद का दर्शन न केवल आज भी उतना ही प्रासंगिक है वरन उस समय से भी आज ज्यादा सार्थक है।

आज हम कितने ही उन्नत होने के बावजूद आंतरिक रूप से खोखले होते जा रहे हैं। जाति, भाषा के आधार पर वैमनस्य, गिरते नैतिक प्रजातांत्रिक मूल्य तथा संस्कृति में हो रहे विराट व अटपटे परिवर्तन से निपटने के लिए अब पुनः युवा शक्ति को जागृत होना होगा। उसकी इस राह में स्वामी विवेकानंद का शाश्वत राष्ट्रवादी व देशप्रेमयुक्त अध्यात्म कारगर सिद्ध हो सकता है।

सन्‌ 1893 में शिकागो में हुए पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन्स (धर्म संसद) में जब प्रत्येक धर्मावलंबी अपने-अपने धर्म को दूसरे धर्म से ऊपर दिखाने की चेष्टा कर रहा था तब विवेकानंद ने उनके इस शीतयुद्ध का निवारण एक छोटी-सी परंतु महत्वपूर्ण कहानी के द्वारा किया : एक कुएं में बहुत समय से एक मेंढक रहता था। एक दिन एक दूसरा मेंढक, जो समुद्र में रहता था, वहां आया और कुएं में गिर पढ़ा। ‘तुम कहां से आए हो?’ कूपमंडूप ने पूछा। ‘मैं समुद्र से आया हूँ।’ समुद्र! भला वह कितना बड़ा है? क्या वह मेरे कुएं जितना ही बड़ा है?’ यह कहते हुए उसने कुएं में एक किनारे से दूसरे किनारे तक छलांग लगाई।

समुद्र वाले मेंढक ने कहा- ‘मेरे मित्र, समुद्र की तुलना भला इस छोटे से कुएँ से किस प्रकार की जा सकती है?’ तब उस कुएँ वाले मेंढक ने दूसरी छलाँग लगाई और पूछा, ‘तो क्या समुद्र इतना बड़ा है?’ समुद्र वाले मेंढक ने कहा- तुम कैसी बेवकूफी की बात कर रहे हो! क्या समुद्र की तुलना इस कुएँ से हो सकती है? अब कुएं वाले मेंढक ने चिढ़कर कहा- ‘जा, जा, मेरे कुएं से बढ़कर और कुछ हो ही नहीं सकता। संसार में इससे बड़ा और कुछ नहीं है। झूठा कहीं का! अरे, इसे पकड़कर बाहर निकाल दो।

विवेकानंद की इस कथा का सार न केवल धर्म की संकीर्णता दूर करने वाला है वरन इसके पीछे युवाओं को भी एक संदेश है कि प्रत्येक संभावना का विस्तार ही (बगैर कूपमंडूकता के) जीवन का मूल उद्देश्य होना चाहिए।

विवेकानंद चाहते थे कि हर समाज स्वतंत्र हो, दूसरे समाज से विचारगत, आस्थागत समायोजन हो। भारत के विषय में उनका सोचना था कि एक तरफ तो हम निष्क्रिय रहकर प्राचीन गौरव के गर्व में फंस गए, दूसरी ओर हीनता की भावना में दब गए। तीसरे, सारी दुनिया से कटकर घोंघे में बंद हो गए। वे कहते थे कि जिस प्राचीन आध्यात्मिक शक्ति पर हम गर्व करते हैं, उसे अपने भीतर जगाना होगा। यह अभी हमारे भीतर नहीं है, केवल बाहरी है।

उन्होंने यह आह्वान युवाओं से किया था कि तुम ही यह कार्य कर दिखाओ। ये युवा ही हैं, जो इस समाज को आत्मशक्ति दे सकते हैं, संपूर्ण विश्व से गर्व से संवाद व संबंध स्थापित कर सकते हैं। इसके उपरांत ही हम स्वतंत्र हो पाएंगे व सामाजिक न्याय की अवधारणा समाज में स्थापित कर सकेंगे।

ये विचार आज कहीं अधिक उपयोगी हैं, जिससे हम उस राष्ट्र को फिर जीवित कर सकें जो विवेकानंद की कल्पनाओं का था। आवश्यकता है तो बस इतनी ही कि विवेकानंद के दर्शन का प्रसार युवाओं में एक आंदोलन की भांति हो।


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Soul Sustenance & Message for the day 17-12-2013 !!

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** Soul Sustenance & Message for the day 17-12-2013 **

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Soul Sustenance 17-12-2013
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Living Life On The Surface

In an ideal situation, the thoughts that run in my mind, should be exactly those that I would like and I want. We do exert this control, that we possess, over our thoughts, but it is not complete and it is only sometimes. The more we become completely engrossed in our daily routine, the more our thoughts tend to become reactions to what goes on outside us. That’s when they go out of control and our lives move in an unfocused way. As a result things don’t work out as we might have desired. Then we develop a habit of blaming other people and circumstances, or we justify our pain by telling ourselves we are not very worthy or powerful enough. Often, these two inner strategies go together. The trouble is, both are cover ups, preventing us from going for a long-term solution.

In this way, we tend to live our lives on a very superficial level, without taking the time to find the solution to what is going on wrong inside. Deeper difficulties remain hidden inside. I move from one scene of life to another – eating, watching television, studying in college, getting married, changing jobs, buying a new car or house, etc. without ever stopping. All these are part of living, but if I make them my whole and sole, my foundation, it’s as if I skate across the surface of life without being in touch with the core. As time progresses, an inner shallowness develops. Then the feeling keeps growing inside that ‘there must be more to life than this’. I then, find that my relationships are not working out as I would have hoped and they are lacking in depth.

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Message for the day 17-12-2013
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Easy nature makes tasks easy.

Expression: The ones with an easy nature constantly think of solutions instead of problems. So such individuals are free from the burden of problems and are constantly contributing to make things easy for themselves and others too. The right environment to bring out the best result is naturally created by them.

Experience: When I have an easy nature, I am able to put a full stop in a second with great ease. I am not caught with the waste questions and exclamations. So I am able to enjoy everything that comes my way and move forward constantly with lightness.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris
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Kmsraj51 – सकारात्मक विचारों का समूह

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** ~ Krishna Mohan Singh(kmsraj51) ~ Great Thoughts of KMSRAJ51 ~ **


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** कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह ….. **


** मेरे कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

** अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

** हमेशा मन को शांत रखना …..

** दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

** हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

** हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

** हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

** हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

** आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

** आपका कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ….. मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ!! …..

** ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!


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About The Author: KMSRAJ51
Krishna Mohan Singh (kmsraj51) is the CEO and Founder of https://kmsraj51.wordpress.com/ . With a long time passion for Entrepreneurship, Self development & Success, KMSRAJ51 started his website with the intention of educating and inspiring likeminded people all over the world to always strive for success no matter what their circumstances. Kmsraj51 passion for what he does shows through the continual growth of https://kmsraj51.wordpress.com/ online community. Follow kmsraj51 on Twitter or keep upto date with him on Facebook: https://www.facebook.com/kmsraj51 & also Google+ kmsraj51 (Krishna Mohan Singh).

Thank`s & Regard`s

Krishna Mohan Singh (कृष्ण मोहन सिंह)
Spiritual Author Cum Spiritual Guru
Always Positive Thinker Cum Motivator
Sr.Administrator (IT-Software, Hardware & Networking)
ID: kmsraj51@yahoo.in

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(((((~)))))<<<>>>(((((~))))) ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! (((((~)))))<<<>>>(((((~)))))

Soul Sustenance & Message for the day 14-12-2013 !!

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Soul Sustenance 14-12-2013
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Self Empowerment

Meditation, in practice, means to enter, and re-enter, the reservoir of peace inside us whenever we need to during the course of the day. This exercise increases self-control and prevents the explosions and reactions of anger that drain our strength. The easy method is not to expect but to accept: then tolerance and respect make our life far more comfortable.

There may be many shadows and pollutants inside us, but usually our pain is centered around these: I own, I need, I want, mine and I expect. If we learn to recognize the characteristics of such a consciousness, we are in a position to overcome difficult situations and thoughts before they overwhelm us. We simply have to remain awake, and that state of alertness stops these shadows from overpowering us and making us unconscious.

Our needs and wants are truly fulfilled in a healthy way by tuning in to the original resources of the soul, because their fulfillment is not dependent on anyone, or anything from outside. When we sustain ourselves from the inside, then our well-being is secure and progressive. As a result, when we express and show our original qualities of the self to others, whether it is peace, happiness or love, they naturally increase inside. The more we give unconditionally, the more we have. This miracle of ‘quality being’ is the result of natural purity, the original state of selflessness, which God always has and good meditators aspire to return to.

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Message for the day 14-12-2013
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Real contentment spreads happiness to others too.

Expression: When one feels contentment but the others are not able to perceive that contenetment, it means that it is not true contentment. Real contentment is visible in such a way that others too are able to feel the happiness that is created. When there is real contentment, all thoughts, words and actions are filled with quality.

Experience: When I am content, others automatically recognise the contentment within me. They are able to take benefit from my state. Even in the most hopeless state, I find that I become a source of support for those around me. I am able to give hope to the hopeless and help them get back to a state of happiness.

In Spiritual Service,
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संगती का असर ~ The effect of Sangati !!

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##** संगती का असर **##

एक बार एक राजा शिकार के उद्देश्य से अपने काफिले के साथ किसी जंगल से गुजर रहा था | दूर दूर तक शिकार नजर नहीं आ रहा था, वे धीरे धीरे घनघोर जंगल में प्रवेश करते गए | अभी कुछ ही दूर गए थे की उन्हें कुछ डाकुओं के छिपने की जगह दिखाई दी | जैसे ही वे उसके पास पहुचें कि पास के पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा – ,
” पकड़ो पकड़ो एक राजा आ रहा है इसके पास बहुत सारा सामान है लूटो लूटो जल्दी आओ जल्दी आओ |”

तोते की आवाज सुनकर सभी डाकू राजा की और दौड़ पड़े | डाकुओ को अपनी और आते देख कर राजा और उसके सैनिक दौड़ कर भाग खड़े हुए | भागते-भागते कोसो दूर निकल गए | सामने एक बड़ा सा पेड़ दिखाई दिया | कुछ देर सुस्ताने के लिए उस पेड़ के पास चले गए , जैसे ही पेड़ के पास पहुचे कि उस पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा – आओ राजन हमारे साधू महात्मा की कुटी में आपका स्वागत है | अन्दर आइये पानी पीजिये और विश्राम कर लीजिये | तोते की इस बात को सुनकर राजा हैरत में पड़ गया , और सोचने लगा की एक ही जाति के दो प्राणियों का व्यवहार इतना अलग-अलग कैसे हो सकता है | राजा को कुछ समझ नहीं आ रहा था | वह तोते की बात मानकर अन्दर साधू की कुटिया की ओर चला गया, साधू महात्मा को प्रणाम कर उनके समीप बैठ गया और अपनी सारी कहानी सुनाई | और फिर धीरे से पूछा, “ऋषिवर इन दोनों तोतों के व्यवहार में आखिर इतना अंतर क्यों है |”

साधू महात्मा धैर्य से सारी बातें सुनी और बोले ,” ये कुछ नहीं राजन बस संगति का असर है | डाकुओं के साथ रहकर तोता भी डाकुओं की तरह व्यवहार करने लगा है और उनकी ही भाषा बोलने लगा है | अर्थात जो जिस वातावरण में रहता है वह वैसा ही बन जाता है कहने का तात्पर्य यह है कि मूर्ख भी विद्वानों के साथ रहकर विद्वान बन जाता है और अगर विद्वान भी मूर्खों के संगत में रहता है तो उसके अन्दर भी मूर्खता आ जाती है | इसिलिय हमें संगती सोच समझ कर करनी चाहिए |


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Some of My Personal Spiritual Motivational – Positive Thoughts !!

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सकारात्मक विचारों का समूह …..

मेरे कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

हमेशा मन को शांत रखना …..

दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

आपका कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ….. मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ!!

ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!

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ठंड में कैसे निखारे सुंदरता ~ How to Improve Your beauty in the cold !!

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ठंड के सुहाने दिन अगर ढेर सारे रंगों को पहनने की छूट देते हैं तो मेकअप के लिए कई सारे ऑप्शंस इस मौसम में अपनाए जा सकते हैं। डार्क कलर की लिपस्टिक से लेकर गहरे आईशैडो तक को इस मौसम में बेझिझक इस्तेमाल किया जा सकता है। ये तो हुई सामान्य मेकअप से जुड़ी बातें। चलिए जानते हैं इस साल के लिए विशेषज्ञ क्या विंटर ब्यूटी टिप्स देते हैं।

– सबसे पहले मेकअप के बेस के लिए एक अच्छी फेस क्रीम का उपयोग अवश्य करें। यह आपके मेकअप को लंबे समय तक टिकने में मदद करेगी, लेकिन ऐसी क्रीम के प्रयोग से बचें, जो नमी छोड़ने लगती हैं वरना आपके मेकअप को खराब होने से कोई नहीं बचा सकेगा। अगर मॉइश्चराइजर का प्रयोग कर रही हैं तो ऐसा प्रोडक्ट चुनें, जो लाइट कंसिस्टेंसी (तरल) का हो, ताकि आपकी स्किन उसे पूरी तरह सोख सके।

– झटपट तैयार होने और फ्रेश लुक के लिए आजमाया जाने वाला प्रचलित न्यूड मेकअप इस सर्दी में भी हॉट ट्रेंड बना रहेगा। इसके लिए सबसे ज्यादा ध्यान आपको फाउंडेशन के कोट पर देना है। यह कोट स्किन टोन को सूट भी करे और बहुत लाउड न हो, इसका ध्यान रखिए। नैचुरल आईशैडो और मस्करा जरूर अप्लाई करें। साथ ही हल्का-सा ब्लश और नैचुरल लिप ग्लॉस या लिप कलर आपके लुक को कम्प्लीट कर देंगे। आईलाइनर, मस्करा तथा लिपलाइनर आदि वॉटरप्रूफ ही चुनें। साधारण पावडर अप्लाई करने से बचें। इसी तरह क्रीम ब्लश के प्रयोग से भी बचें।

– ठंड के हिसाब से सिलीकॉन बेस्ड फाउंडेशन सबसे बढ़िया विकल्प होगा। बदलते मौसम के लिहाज से पावडर मेकअप फाउंडेशन भी चुना जा सकता है। तेज ठंड में लिक्विड फाउंडेशन न लगाएं।

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– न्यूड शेड से बिलकुल जुदा ‘वैम्पी लिप्स’ भी खासे प्रचलन में हैं, खासतौर पर शादी या पार्टी के लिहाज से। इसके तहत आप सुर्ख लाल से लेकर ऑरेंज, बरगंडी, पर्पल, मैजेंटा या डार्क ब्राउन कलर भी लिप्स पर अप्लाई कर सकती हैं, लेकिन ‘वैम्पी लिप्स’ रखते समय बाकी के मेकअप को बैलेंस रखें, हैवी न होने दें।

– एक अच्छी खबर उन लोगों के लिए जो आईब्रो को संवारने से बचना चाहते हैं। आजकल मोटी और लड़कों की तरह थोड़ी फैली आईब्रो फैशन में है। अगर आपकी आईब्रो पतली हैं तो आप काजल पेंसिल का सहारा भी ले सकती हैं। साथ ही स्मोकी आइज़ भी आज का हॉट ट्रेंड हैं।

इसके लिए आईशैडो का सही शेड चुनें, जो आपकी स्किन टोन से सूट करता हो और आई मेकअप को हाईलाइट करे। आईलाइनर की रेखा को आप थोड़ा बोल्ड रख सकती हैं। यह आजकल चलन में है। साथ ही आंखों के कोनों तक फैला आईलाइनर भी चलेगा। हां, अगर आप ज्यादा देर तक टिके रहने वाला लाइनर चाहती हैं तो जैल या सिलिकॉन बेस्ड लाइनर का प्रयोग करें।

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Message for the day 12-11-2013 !!

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The one who has the power to face is free from tensions.

Projection: To be good with those who are good is quite natural, but to be good with those who are bad is known as having the power to face. This naturally comes when there is the power to transform even that which in negative into something positive. When there is the power to face, there is no retaliation, no conflict. There is love given to all around.


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Solution: When I am able to transform and look at each and everything in a positive way, I will not have any difficulty with any situation. I will naturally be able to face all situations in a light and easy way. When I am able to be free from tension in this way, I am also able to give my best and thus become an inspiration for those around me.

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50 Great Quotations In Hindi !!

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** 50 अनमोल वचन हिंदी में | 50 Great Quotations In Hindi **

1. जिसने ज्न्यान को आचरण में उतार लिया , उसने ईश्वर को मूर्तिमान कर लिया – विनोबा भावे

2. अकर्मण्यता का दूसरा नाम मर्त्यु है – मुसोलिनी

3. पालने से लेकर कब्र तक ज्ञान प्राप्त करते रहो – पवित्र कुरान

4. इच्छा ही सब दूखो का मूल है – गौतम बुद्ध

5. मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अज्न्यान है – चाणक्य

6. आपका आज का पुरुषार्थ आपका कल का भाग्य है – पालशिरू

7. क्रोध एक किस्म का क्षणिक पागलपन है – महात्मा गांधी

8. ठोकर लगती है और दर्द होता है तभी मनुष्य सीख पाटा है – महात्मा गांधी

9. अप्रिय शब्द पशुओ को भी नहीं सुहाते है – गौतम बुद्ध

10. नरम शब्दों से सख्त दिलो को जीता जा सकता है – सुकरात

11. गहरी नदी का जल प्रवाह शांत व गंभीर होता है – शेक्सपीयर

12. समय और समुद्र की लहरे किसी का इंतज़ार नहीं करती – अज्ञात

13. जिस तरह जौहरी ही असली हीरे की पहचान कर सकता है , उसी तरह गुनी ही गुणवान की पहचान कर सकता है – कबीर

14. जो आपको कल कर देना चाहिए था , वही संसार का सबसे का थीं कार्य है – कन्फ्यूशियस

15. ज्ञानी पुरुषो का क्रोध भीतर ही , शान्ति से निवास करता है , बाहर नहीं – खलील जिब्रान

16. कुबेर भी यदि आय से अधिक व्यय करे तो निर्धन हो जाता है – चाणक्य

17. डूब की तरह छोटे बनाकर रहो . जब घास -पात जल जाते है तब भी डूब जस की तस बनी रहती है – गुरु नानक देव

18. ईश्वर के हाथ देने के लिए खुले है . लेने के लिए तुम्हे प्रयत्न करना होगा – गुरु नानक देव

19. जो दूसरो से घृणा करता है वह स्वय पतित होता है – स्वामी विवेकानंद

20. जो जैसा शुभ व अशुभ कार्य करता है , वो वैसा ही फल भोगता है – वेदव्यास

21. मनुष्य की इच्छाओ का पेट आज तक कोइ नहीं भर सका है – वेदव्यास

22. नम्रता और मीठे वचन ही मनुष्य के सच्चे आभूषण होते है – तिरूवल्लुवर

23. खुदा एक दरवाजा बंद करने से पहले दूसरा खोल देता है , उसे प्रयत्न कर देखो – शेख सादी

24. बुरे आदमी के साथ भी भलाई करनी चाहिए – कुत्ते को रोटी का एक टुकड़ा डालकर उसका मुंह बंद करना ही अच्छा है – शेख सादी

25. अपमानपूर्वक अमरत पीने से तो अच्छा है सम्मानपूर्वक विषपान – रहीम

26. थोड़े से धन से दुष्ट जन उन्मत्त हो जाते है – जैसे छोटी , बरसाती नदी में थोड़ी सी वर्षा से बाढ़ आ जाती है – गोस्वामी तुलसीदास

27. ईश प्राप्ति (शान्ति ) के लिए अंत: कारन शुद्ध होना चाहिए – रविदास

28. जब मई स्वय पर हँसता हूँ तो मेरे मन का बोज़ हल्का हो जाता है – टैगोर

29. जन्म के बाद मर्त्यु , उत्थान के बाद पतन , संयोग के बाद वियोग , संचय के बाद क्षय निश्चित है . ज्ञानी इन बातो का ज्न्यान कर हर्ष और शोक के वशीभूत नहीं होते – महाभारत

30. जननी जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढाकर है – अज्ञात

31. भरे बादल और फले वर्कश नीचे ज़ुकारे है , सज्जन ज्न्यान और धन पाकर विनम्र बनाते है – अज्ञात

32. सोचना, कहना व करना सदा सम्मान हो – अज्ञात

33. न कल की न काल की फिकर करो , सदा हर्षित मुख रहो – अज्ञात

34. स्व परिवर्तन से दूसरो का परिवर्तन करो – अज्ञात

35. ते ते पाँव पसारियो जेती चादर होय – अज्ञात

36. महान पुरुष की पहली पहचान उसकी विनम्रता है – अज्ञात

37. बिना अनुभव कोरा शाब्दिक ज्न्यान अँधा है – अज्ञात

38. क्रोध सदैव मूर्खता से प्रारम्भ होता है और पश्चाताप पर समाप्त – अज्ञात

39. नारी की उन्नति पर ही राष्ट्र की उन्नति निर्धारित है – अज्ञात

40. धरती पर है स्वर्ग कहा – छोटा है परिवार जहा – अज्ञात

41. दूसरो का जो आचरण तुम्हे पसंद नहीं , वैसा आचरण दूसरो के प्रति न करो – अज्ञात

42. नम्रता सारे गुणों का दर्द स्तम्भ है – अज्ञात

43. बुद्धिमान किसी का उपहास नहीं करते है – अज्ञात

44. हर अच्छा काम पहले असंभव नजर आता है – अज्ञात

45. पुस्तक प्रेमी सबसे धनवान व सुखी होता है – अज्ञात

46. सबसे उत्तम बदला क्षमा करना है – अज्ञात

47. आराम हराम है – अज्ञात

48. दो बच्चो से खिलाता उपवन , हंसते -हंसते कटता जीवन – अज्ञात

49. अगर चाहते सुख समर्द्धि , रोको जनसंख्या वर्द्धि – अज्ञात

50. कार्य मनोरथ से नहीं , उद्यम से सिद्ध होते है . जैसे सोते हुए सिंह के मुंह में मुर्गे अपने आप नहीं चले जाते – विष्णु शर्मा!

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Note::-


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भटके तो अटके ~ So get lost, stuck !!

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** भटके तो अटके ~ So get lost, stuck !! **

टाइम टेबल बनाकर पढ़ने के लिए किताबें लेकर बैठ जाना ही काफी नहीं होता है। इससे ज्यादा जरूरी है कि कम या ज्यादा जितनी देर भी आपने पढ़ाई की है उस दौरान के विषयों को आत्मसात कितना पर पाए हैं। अमूमन ऐसे छात्र, जो नियमित पढ़ाई में विश्वास नहीं रखते और सिर्फ परीक्षा सिर पर आने की स्थिति में ही पुस्तकों की धूल झाड़ते नजर आते हैं, को इस प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है।

कहने को तो 18 घंटे की पढ़ाई होती है पर असल में ध्यान नहीं लगा पाने के कारण अधिकांश बातें याद नहीं रह पाती हैं। चूंकि संपूर्ण कंसंट्रेशन के साथ पढ़ाई करने की आदत नहीं होती है इसीलिए दिमाग और मन भटकाव की स्थिति में रहते हुए चंचल व्यवहार करता है।

पुस्तक सामने होने के बावजूद यार दोस्तों, हंसी मजाक अन्यथा अन्य बातें रह रह कर मन में आती हैं और जाहिर है, इससे ध्यान उलझ जाता है। प्रस्तुत लेख में कुछ इस तरह की परेशानियों के निदान के संबंध में आसान से टिप्स देने का प्रयास किया जा रहा है।

1. पढ़ाई के प्रारंभिक दिनों में जानबूझकर आसान टॉपिक्स का चयन करना चाहिए। इससे विषय समझने में ज्यादा मुश्किल नहीं होगी और साथ ही साथ दिमाग भी पढ़ाई के प्रति अभ्यस्त होता जाएगा।

2. नए और कठिन विषयों की शुरुआत से पहले अपने सहपाठियों अथवा अध्यापकों की मदद से अपने मन में उक्त विषय के प्रति दिलचस्पी जगाने का प्रयत्न करें। इससे विषय का परिचय मिलता है और स्वयं पढ़ाई करने में समझना आसान हो जाता है।

3. लिखकर विभिन्न विषयों को समझने का क्रम आमतौर से ध्यान भटकने से रोकने में काफी सहायक माना जाता है।

4. ध्यान बाँटने वाले तमाम कारक जैसे मोबाइल फोन, कंप्यूटर, इंटरनेट, वीडियो गेम्स टेलीविजन आदि से जितनी दूरी बना सकें, उतनी ही आसानी होगी ध्यान केंद्रित करने में।

5. हमेशा ताजगी भरे दिमाग और पर्याप्त आराम के बाद ही पढ़ाई के लिए बैठना उपयुक्त होता है। इससे थकान नहीं होती और मुश्किल टॉपिक्स भी सरलता से समझ आने लगते हैं।

6. ध्यान केंद्रित करने के लिए चाय या कॉफी अथवा किसी नए प्रकार के सहारे से नुकसान ज्यादा और फायदा कहीं कम होता है।

7. सही जगह का ही अध्ययन के लिए चुनाव करना चाहिए। घर का कोई भी ऐसा शांत कोना जहां शोरगुल कम से कम हो तथा टीवी- रेडियो “म्यूजिक की आवाज से बचा जा सके। इस तरह के अध्ययन के लिए उपयुक्तकहा जा सकता है।

8. स्टडी टेबल पर आते समय ढेर सारे काम या पढ़ाई का बोझ डालना उचित नहीं है। इससे पढ़ाई में कम और इस मानसिक बोझ पर ध्यान ज्यादा लगा रहता है।

9. ब्रह्ममुहूर्त या तड़के सुबह का समय (4 बजे प्रातः) अध्ययन करने की दृष्टि से सर्वाधिक उपयुक्त कहा जा सकता है। रात भर की नींद के बाद तन-मन और दिमाग में ताजगी होती है और साथ में इस वक्त बिलकुल शांति होती है।

10. संपूर्ण दिन एक ही विषय की पढ़ाई करते रहने से दिमागी थकान होनी स्वाभाविक है। इसीलिए तीन विषयों की पढ़ाई समय बांट कर करना अधिक प्रभावी होगा।

11. किसी विषय के प्रति दिमाग में फोबिया नहीं पालें और थोड़ा-थोडा पढ़ने से कुछ समय बाद यही विषय सबसे आसान प्रतीत होने लगेगा।

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कैसे बचें एग्जाम फीवर से ~ How to Avoid Exam Fever !!

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** कैसे बचें एग्जाम फीवर से ~ How to Avoid Exam Fever !! **


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जैसे-जैसे बोर्ड परीक्षा के दिन नजदीक आते जा रहे हैं छात्रों की परेशानियां भी उसी रफ्तार से बढ़ रही हैं। एक ओर सिलेबस का बोझ तो दूसरी ओर मनोवैज्ञानिक समस्याएँ भी छात्रों को घेरती नजर आ रही हैं। कुछ को तो इनके होने का भ्रम भी रहता है।

परीक्षा नजदीक आते ही वे एग्जामिनेशन फीवर, त्वचा रोग, सिरदर्द की शिकायत, नींद गायब हो जाना, भूख न लगना, स्वभाव से चिड़चिड़ा हो जाना, पेट में कई तरह की समस्याएँ, आत्मविश्वास का डगमगा जाना, कमजोरी की शिकायत, आँखों में परेशानी, ऐसा भ्रम होना कि पिछला जो भी पढ़ा था सब भूल रहा है तथा घबराहट आदि न जाने कितनी छोटी-बड़ी समस्याओं से ग्रस्त हो जाते हैं।

लेकिन इनसे घबराने से काम नहीं चलेगा, पढ़ाई के साथ-साथ इनका सामना भी करना होगा और मन में यह विश्वास रखना होगा कि अगर समस्याएँ हैं तो उनका समाधान भी होगा।

मर्ज पनपे, इससे पहले ही सतर्क हो जाएँ
किसी भी समस्या के पनपने के बाद उससेनिजात पाने का हल ढूंढने से अच्छा है कि ऐसा तरीका चुनें जिससे समस्याएँ पनपने ही न पाएँ। आपके मन-मस्तिष्क में तनाव घर करे, इससे पहले ही आपको इमोशनल इंटेलीजेंस विकसित कर लेनी चाहिए यानी छात्र यह मान कर चलें कि इसके पूर्व जिन परीक्षाओं में वे बैठे हैं, यह भी उन्हीं से मिलती-जुलती परीक्षा है और इन्हें भी वे आसानी से पास कर लेंगे, बल्कि ज्यादा मेहनत की है तो नंबर भी अच्छे आएँगे।

यह सोच ही तनाव को आपके पास फटकने नहीं देगी। इसके साथ ही जो भी दिन आपके हाथ में हैं, उसी के हिसाब से प्लानर बनाएँ। अक्सर बच्चे शिकायत करते हैं कि जो भी पढ़ा था, सब धीरे-धीरे भूल रहा है। इससे बचने का सबसे अच्छा उपाय है कि पिछले छह दिन में जो भी पढ़ा, सातवें दिन उसका रिवीजन कर लें।

योग अथवा ध्यान का सहारा लें, इससे याददाश्त में वृद्धि होगी। ज्यादा देर तक बैठने से कमर दर्द या गर्दन दर्द की शिकायत हो रही है तो कमरे में टहल लें। आत्मविश्वास को बनाए रखने के लिए व्यायाम का भी सहारा लिया जा सकता है। पाचन क्रिया सही रहे, इसके लिए भोजन पर ध्यान दें तथा संयमित व्यवहार बनाए रखने के लिए पूरी नींद जरूर लें।

अभिभावक भी रहें अलर्ट
बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी विजुअलाइजिंग टेक्नीक का सहारा लेना चाहिए। छात्र आंख बंद कर यह विजुअलाइज करें कि वे परीक्षा भवन में हैं तथा प्रश्न-पत्रों को सही तरीके से हल कर रहे हैं। सीबीएसई सहित कई प्रमुख बोर्डों ने अपने यहां काउंसलरों का पैनल नियुक्त कर रखा है, जिसकी निशुल्क सेवाएँ ली जा सकती हैं।

सीबीएसई अपनी टेलीकाउंसलिंग सेवा शुरू कर चुकी है। इस समय छात्रों को आत्मीय सहारे की भी जरूरत रहती है। वह चाहता है कि उसके माता-पिता उसके इर्द-गिर्द रहें, ताकि वह खुद को अकेला न समझे। अभिभावक उनको भरोसा दिलाएँ कि वे हर परिस्थिति में उनके साथ हैं, भले ही परीक्षा में उनका रिजल्ट जैसा भी रहे। उनके इस भरोसे से बच्चे से परीक्षा रूपी भूत का दबाव छंट जाता है और वे जयादा बेहतर तरीके से तैयारी कर पाते हैं।

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कैसा हो ड्रेस-अप ~ इंटरव्यू के लिए ~ How we dress – up to ~ Interview !!

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** कैसा हो ड्रेस-अप ~ इंटरव्यू के लिए ~ How we dress – up to ~ Interview!! **


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आप बुद्धिमान हैं और अपने क्षेत्र की सभी जानकारी रखते हैं। आपकी मार्कशीट के अंक बताते हैं कि आप सर्वश्रेष्ठ हैं, पर आप इंटरव्यू के दौरान जींस की पेंट और टीशर्ट में पहुंच जाते हैं।

क्या आपका सिलेक्शन होगा? हो भी सकता है, पर नहीं होने की संभावना ज्यादा है। कहते हैं न फर्स्ट इम्प्रेशन इस द लास्ट इम्प्रेशन। हो सकता आप में से कई इस बात को नहीं मानते हो पर यह बात सही है।

हमारे पास किसी भी व्यक्ति के बारे में अंदाजा लगाने के लिए ही सही, उसका पहनावा ही आधार रहता है और यही बात इंटरव्यू के दौरान भी लागू होती है। आप किस तरह का ड्रेस पहनकर इंटरव्यू बोर्ड के सामने जाते हैं इससे काफी फर्क पड़ता है।

आइए, जानते हैं कि गर्ल्स और बॉयज के लिए इंटरव्यू के दौरान किस तरह की सावधानी रखी जानी चाहिए।

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गहरे रंग का बिजनेस सूट पहन सकते हैं और अगर पहली बार इंटरव्यू के लिए जा रहे हैं तब शर्ट भी चल सकता है, पर शर्ट का रंग बहुत ज्यादा गहरा नहीं होना चाहिए।

शर्ट लंबी बांह का हो

टाई जरूर पहनें

मोजे का रंग गहरा हो और जूते भी प्रोफेशनल वातावरण में पहनने योग्य हो।

हेयर स्टाइल भी सामान्य हो

ऑफ्टर शेव लोशन की कम मात्रा लगाएं।

हाथ में बायोडाटा और सर्टिफिकेट रखने के लिए छोटी ब्रीफकेस या अच्छा-सा फोल्डर हो।

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सूट या साड़ी जो भी पहनना हो वह बहुत ज्यादा गहरे रंग का या वर्क किया हुआ न हो।

हाई हिल्स न पहनें

ज्वेलरी का बहुत ज्यादा प्रयोग न करें

मेकअप आपके चेहरे की खूबसूरती को उभारने वाला हो और हल्का ही हो।

परफ्यूम या डियो का प्रयोग बहुत ज्यादा मात्रा में न करें।

मेनिक्यूर्ड नेल्स हो

हाथ में चमड़े या अन्य मटेरियल का फोल्डर हो जिसमें आप बायोडाटा व सर्टिफिकेट रख सकें।

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~ Steve Jobs Success Mantra !!

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** सफलता के मंत्र ~ स्टीव जॉब्स !!~ Steve Jobs Success Mantra!! **

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स्टीव जॉब्स की जिंदगी ने दुनिया भर में करोड़ों लोगों को प्रभावित किया है। उनके बातचीत करने का ढंग हो या प्रस्तुतिकरण की बात हो या फिर किसी भी उत्पाद को देखने और मार्केट करने का ढंग हो, सबकुछ बिलकुल अलग सोच लिए होता था। इसी अलग सोच ने उन्हें स्टीव जॉब्स बनाया। आइए जानते हैं कि स्टीव जॉब्स की सफलता के मूलमंत्र क्या थे।

वही काम करें जिससे आपको प्यार हो : स्टीव के अनुसार आप अगर अपने काम से प्यार करते हैं तब अच्छा है। दुनिया भर में कई लोग ऐसे हैं जो ऐसा काम कर रहे हैं जो उन्हें दिल से पसंद नहीं। अगर दुनिया भर में ऐसा हो जाए कि जिसे जो काम पसंद है वही करे तब दुनिया ही बदल जाएगी।

दुनिया को बताओ कि आप कौन हो : स्टीव के अनुसार दुनिया को पता चलना चाहिए कि आप कौन हैं और दुनिया को बदलने का माद्दा आपमें नहीं होगा तब तक दुनिया आपको नहीं पहचानेगी।

सभी क्षेत्रों में संबंध जोड़ें : जॉब्स ने अपने जीवनकाल में विभिन्न विषयों का अध्ययन किया। उन्होंने कैलिग्राफी भी सीखी और विभिन्न प्रकार के डिजाइन्स का अध्ययन किया। इतना ही नहीं उन्होंने हॉस्पिटेलिटी के क्षेत्र में भी हाथ आजमाए और उसका ज्ञान लिया। यह ज्ञान उन्हें बाद में काम भी आया।

मना करना सीखें : स्टीव ने अपनी जिंदगी में मना करना खूब सीखा था और इसका फायदा भी उन्हें मिला था। जब वे 1997 में वापस एप्पल में आए थे तब कंपनी के पास 350 उत्पाद थे। मात्र दो वर्षों में उन्होंने उत्पादों की संख्या कम करके 10 कर दी। 10 उत्पादों पर ध्यान केंद्रित किया और सफलता भी पाई।

ग्राहकों को अलग तरह का अनुभव दो : स्टीव मानते थे कि जब तक आप अपने ग्राहकों को अलग तरह का अनुभव नहीं देंगे, वे आपके उत्पादों की तरफ आकर्षित बिलकुल भी नहीं होंगे। यही कारण था कि उन्होंने एप्पल स्टोर्स को कुछ अलग तरह का बनाया। जहा पर ग्राहकों के लिए अलग तरह का अनुभव था और एप्पल कंपनी के प्रति लोगों का भावनात्मक लगाव हो गया था।

अपनी बात रखने में पीछे न रहें : स्टीव के अनुसार अगर आपके पास अच्छे आइडियाज है और आप इसे सभी के सामने रख नहीं पाए तब ऐसे आइडियाज का क्या काम। स्टीव अपनी बात प्रेजेंटेशन के दौरान रखते थे और केवल अपनी बात नहीं रखते थे बल्कि प्रेजेंटेशन के माध्यम से वे कई तरह की बातें बताते थे जिससे प्रेरणा भी मिलती थी।

सपने बेचें…उत्पाद नहीं : स्टीव हर दम यही कहते थे की अपने ग्राहकों को उत्पाद नहीं सपने बेचो। उनके अनुसार आपके ग्राहकों को आपके उत्पाद के बारे में कोई मतलब नहीं है, उन्हें उनकी आशाओं और आकांक्षाओं से मतलब है और अगर आपने उनके सपनों को उत्पाद से जोड़ा तभी आपको सफलता मिलेगी।

Note::-


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Special diets according to age !!

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** आयु अनुसार विशेष आहार – Special diets according to age !! **

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शरीर को स्वस्थ व मजबूत बनाने के लिए प्रोटीन्स, विटामिन्स व खनिज (minerals) युक्त पोषक पदार्थो की आवश्यकता जीवनभर होती है | विभिन्न आयुवर्गो हेतु विभिन्न पोषक तत्त्व जरुर्री होते है, किस उम्र में कौन-सा तत्त्व सर्वाधिक आवश्यक है यह दिया जा रहा है :

१) जन्म से लेकर ५ वर्ष की आयु तक : इस उम्र में बच्चों के स्वस्थ शरीर तथा मजबूत हड्डियों के लिए विटामिन ‘डी’ जो कैल्शियम ग्रहण करने में मदद करता है व लोह तत्त्व अत्यावश्यक होता है | विटामिन ‘डी’ की पूर्ति में दूध, घी, मक्खन, गेंहूँ, मक्का जैसे पोषक पदार्थ तथा प्रात:कालीन सूर्य की किरणें दोनों अत्यंत मददरूप होते है | किसी एक की भी कमी होने से बच्चों को हड्डियाँ कमजोर व पतली रह जाती है, वे सुखा रोग से ग्रस्त हो जाते है, अत: स्तनपान छुड़ाने के बाद बच्चों के आहार में लोह व विटामिन ‘डी’ युक्त पदार्थ जरुर शामिल करने चाहिए |

२) ६ से १९ वर्ष की आयु तक : ६ से १२ वर्ष की आयु बाल्यावस्था और १३ से १९ वर्ष की आयु किशोरवस्था है | इस आयु में शरीर तथा हड्डियों का तेजी से विकास होता है इसलिए कैल्शियम की परम आवश्यकता होती है | बड़ी उम्र में हड्डियों की मजबूती इस आयु में लिए गये कैल्शियम की मात्रा पर निर्भर रहती है | दूध, दही, छाछ, मक्खन, तिल, मूंगफली, अरहर, मुंग, पत्तागोभी, गाजर, गन्ना. संतरा, शलजम, सूखे मेवों व अश्वगंधा में कैल्शियम खूब होता है | आहार – विशेषज्ञों के अनुसार इस आयुवर्ग को कैल्शियम की आपूर्ति के लिए प्रतिदिन एक गिलास दूध अवश्य पीना चाहिए |

इस उम्र में लौह की कमी से बौद्धिक व शारीरिक विकास में रुकावट आती है | राजगिरा, पालक,मेथी, पुदीना, चौलाई, आदि हरी सब्जियों एवं खजूर, किशमिश, मनुक्का, अंजीर, काजू, खुरमानी आदि सूखे मेवों तथा करेले, गाजर, टमाटर, नारियल, अंगूर, अनार, अरहर, चना, उड़द, सोयाबीन आदि पदार्थो के उपयोग से लौह तत्त्व की आपूर्ति सहजता से की जा सकती है |
किशोरावस्था में प्रजनन क्षमता के विकास हेतु जस्ता (zinc) एक महत्त्वपूर्ण खनिज है | सभी अनाजों में यह पाया जाता है | इस आयु में खनिज की कमी से बालकों का स्वभाव हिंसक व क्रोधी हो जाता है तथा बालिकाओं में भूख की कमी एवं मानसिक तनाव पैदा होता है | अनाज, दालों, सब्जियों व कन्दमुलों (गाजर, शकरकंद, मुली, चुकंदर आदि) में खनिज विपुल माता में होते है |

३) २० से ३० वर्ष की आयु तक : इस युवावस्था में सर्वाधिक आवश्यकता होती है लौह तत्त्व, एंटी-ऑक्सीडेटस, फ़ॉलिक एसिड तथा विटामिन ‘ई’ व ‘सी’ की |

(क) लौह तत्त्व : मासिक धर्म के कारण पुरुषो की अपेक्षा स्त्रियों को लौह तत्त्व की दोगुनी जरूरत होती है |

(ख) एंटी-ऑक्सीडेटस : कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से बचाने हेतु तथा स्त्री-पुरुषों के प्रजनन-संस्थान को स्वस्थ बनाये रखने के लिए एंटी-ऑक्सीडेटस आवश्यक होते है | आँवला, मुनक्का, अंगूर, अनार, सेवफल, जामुन, बेर, नारंगी, आलूबुखारा, स्ट्रोबेरी, रसभरी, पालक, टमाटर में एंटी-ऑक्सीडेटस अधिक मात्रा में पाये जाते है | फलों के छिलके व बिना पकाये पदार्थ जैसे सलाद, चटनी आदि में भी ये विपुल मात्रा में होते है | अन्न को अधिक पकाने से वे घट जाते है |

(ग) फ़ॉलिक एसिड : महिलाओं में युवावस्था व प्रारम्भिक गर्भावस्था में फ़ॉलिक एसिड की भी आवश्यकता होती है | यह फूलगोभी, केला, संतरा, सेम, पत्तेदार हरी सब्जियों, खट्टे-रसदार फलों, आडू, मटर, पालक, फलियों व शतावरी आदि में पाया जाता है |

(घ) विटामिन ‘ई’ : पुरुषों में पुंसत्वशक्ति व स्त्रियों में गर्भधारण क्षमता बनाये रखने के लिए इसकी आवश्यकता होती है | यह ह्रदय व रक्तवाहिनियों को स्वस्थ रखकर रक्तदाब नियंत्रित रखता है | इससे गम्भीर ह्रदयरोगों में रक्षा होती है | अंकुरित अनाज, वनस्पतिजन्य तेल (तिल, मूंगफली, सोयाबीन, नारियल तेल आदि) व सुकहे मेवे विटामिन ‘ई’ के अच्छे स्त्रोत है | एक चुटकी तुलसी के बीज रात का भिगोकर सुबह सेवन करने से भी विटामिन ‘ई’ प्राप्त होता है |

(ड) विटामिन ‘सी’ : रक्त को शुद्ध व रक्तवाहिनियों को लचीला बनाये रखने तथा हड्डियों की मजबूती के लिए यह आवश्यक है | संतरा, आँवला, नींबू, अनन्नास आदि खट्टे व रसदार फल, टमाटर, मुली, पपीता, केला, अमरुद, चुकंदर आदि में यह अच्छी मात्रा में पाया जाता है |


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(४) ३१ से ५० वर्ष की आयु तक : इस प्रोढ़ावस्था के दौरान कैल्शियम, विटामिन ‘ई’ और फ़ॉलिक एसिड की आवश्यकता अधिक होती है | फ़ॉलिक एसिड व विटामिन ‘ई’ ह्रदयरोगों की संभावनाओं को कम करते है |
महिलाओ में रजोनिवृत्ति के बाद इस्ट्रोजन हार्मोन स्त्रावित होना बंद हो जाता है, जिसके आभाव में कैल्शियम का अवशोषण मंद पड जाता है, अत: रजोनिवृत्ति के बाद हड्डियों को कमजोर होने से बचाने के लिए कैल्शियमयुक्त पदार्थों की जरूरत अधिक होती है |

(५) ५१ से ७० वर्ष या इससे ऊपर की आयु : इस उम्र के दौरान कोशिकाओं में होनेवाले वार्धक्यजन्य परिवर्तनों को रोकने के लिए एंटी-ऑक्सीडेटस सहायक तत्त्व है | इनके अभाव में लकबा, ह्रदयरोग तथा ज्ञानतंतु व ज्ञानेंद्रियों की दुर्बलता (neurodegenerative changes) एवं कैंसर होने की सम्भावना अधिक होती है | वृद्धावस्था में रक्तचाप को सामान्य रखने में पोटेशियमयुक्त पदार्थ लाभदायी हैं | फलों और सब्जियों, खुरमानी, आलूबुखारा, आडू, मुनक्का, खजूर, सूखे नारियल आदि में पोटेशियम समुचित मात्रा में मौजूद होता है | इस आयु में दूध, फल और सब्जियों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए |
इस प्रकार आयु अनुसार आहार लेने से व्यक्ति स्वस्थ व रोगमुक्त रहता है |

~ IN-ENGLISH ~

Nutritional requirements by life Stage Group
Nutritious diet rich in proteins, vitamins & minerals is essential to keep the body strong and healthy all throughout the life. Nutrient needs vary throughout the life cycle. Various age groups need different nutrients. The requirement of nutrients during different life stage groups is given below:

1) Life stage group: 1 through 5 years : Children of this age group need, particularly vitamin D which helps in mineralization of bones for development of bones, and iron for optimum growth of the body, Adequate exposure to ultraviolet light of morning sun and foods like milk, ghee, butter, wheat, maize are very helpful in providing vitamin D. deficiency of vitamin D can result in insufficient mineralization of the growing bones and they tend to develop rickets in children characterized by imperfect calcification, softening and distortion of the bones. Deficiency of iron may have an effect on mental development and may result in cognitive and behavioral problems. So after weaning the baby must be given substances rich in vitamin D and iron in their diet.

2) Life stage group: 6 through 19 years: The life-stage between 6-12 years is called childhood; and between 13-19 years is called adolescence. During this stage of life, the body and bones develop rapidly. Hence they need abundant quantity of calcium. The strength of bones during old age depends upon the intake of calcium taken during this stage of life Milk, buttermilk, curds, butter, sesame-seed, moong (green gram), cabbage, carrot, sugarcane, orange, turnip, dry fruits and ashwagandha (Withania somnifera) are rich dietary sources of calcium. According to dieticians the people of this age group must take a glass of milk everyday as a calcium supplement.
Deficiency of iron in the body during this stage of life retards physical and mental development. If we take these rich sources of iron in our diet we can easily get the needed amount of iron. They are : green leafy vegetables such as Rajgira (amaranthus paniculatus), spinach, fenugreek, mint, chaulai (amaranthus polygrmus), dry fruits like dates, currants, raisins, figs, cashew nut, apricots, etc. and certain other sources as bitter gourd, carrot, tomato, coconut, grapes, pomegranate, pigeon-pea (Cajanus Indicus), grams, urad (black gram) soya beans etc.
Zinc is an important mineral required for sexual maturation during adolescence which is easily obtained from all grains. Deficiency of zinc can cause aggressive and violent behavior in adolescent boys, and poor appetite and stress in adolescent girls. Food grains, pulses, vegetables and tuber roots (carrot, sugar potato, radish, beet root etc.) are rich sources of minerals.


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3) Life stage group: 20 through 30 years : Iron, anti-oxidants, folic acid, vitamin E and vitamin C are required in abundant amounts during youth. (a)Iron: On account of excessive losses of iron from menstruation, women need double the amount of iron than men. (b) Anti-Oxidants: Anti-oxidants are required to prevent cell damage and maintain the male and female reproductive systems in perfect health. Amla (the emblic myrobalan), currants, pomegranate, black plums, berries, oranges, plums, strawberry, raspberry, spinach and tomatoes are rich sources of anti-oxidants. The skins of fruits & uncooked foods such as salads, chutneys etc. Are also rich in anti-oxidants. They are lost significantly when the food is overcooked. (c) Folic Acid : Women need folic acid during youth and in the early stages of pregnancy. Important sources of folic acid are cauliflower, banana, orange, beans, dark green leafy vegetables, citrus fruits, peach, peas, spinach, pods, asparagus etc. (d) Vitamin ‘E’ : It is required for virility in men and fertility in women. It also reduces the risk of cardiovascular diseases. Sprouted grains, vegetable oils (sesame, groundnut, soya bean, coconut oils etc.) and dry fruits are rich sources of vitamin E. Soak a pinch of tulsi seeds at night. Take it in the morning to get vitamin ‘E’. (e) Vitamin ‘C’ : It purifies blood, keeps blood vessels resilient, and strengthens the bones. Orange, amla, lemon, pineapple, citrus fruits, tomato, radish, papaya, banana, guava, beet-root etc. are good sources of vitamin ‘C’.

(4) Life stage group: 31 through 50 years: During this mature stage of life calcium, vitamin E and folic acid are much required. Folic acid & vitamin E reduce the risk of developing heart diseases. After menopause there is less secretion of estrogen in females. It reduces the absorption of calcium. So they need foods rich in calcium to prevent osteoporosis.

(5) Life stage group: 51 through 70 years and above: Anti oxidants are much needed to prevent degenerative changes in the cells of the body associated with senility. Their deficiency can increase the chances of developing paralysis, heart disease, neuro-degenerative changes and cancer. In order to maintain the blood-pressure of the body, a diet rich in potassium is quite beneficial in old age. Fruits and vegetables, apricot, plums, peach, currents, dates, dry coconut are rich sources of potassium. During this age one should specifically take milk, vegetable & fruits.
Diet plan according to the life-stage group helps in maintaining the body hale & hearty and also in prevention of many diseases.

Note::-


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