The Energy Of Thought And Feeling

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT04

सोच और महसूस की ऊर्जा

The Energy Of Thought And Feeling

Like so many other energies like sound energy, light energy, electrical energy, etc. which are primarily invisible forms of energy and come under the realm of matter or the 5 elements, the energy of thought and feeling is also a form of invisible energy.The only difference is that it is an energy which transcends the limits of matter or the 5 elements and is metaphysical or non-physical and extremely subtle in nature. It is a living or conscient energy which originates from the conscient soul, as compared to the other energies which are non-living or non-conscient in nature. But at the same time, it is important not to forget that it is closely connected with the physical body and can only express itself through a physical body. The other energies cannot express themselves since they are non-living. Also, we perceive this energy only when we are inside the physical body.

It is an energy which has kept going and going for as long as we have lived, life after life, in many wrong directions a lot of times. It is this energy which we need to learn to channelize, control, manage, discipline etc. because by doing that we experience our original virtues of peace, love, joy and power, which is our only and only desire, for which we use various different methods, but many times is not fulfilled, because we forget this basic and most important method. This is something which we have not been able to do since a long time, and something which a lot of people have desired to achieve since thousands of years. The technique of meditation is one technique which helps us in doing that. The channelization of this energy will also improve the state of our physical body as it has a positive effect on the various body systems, the quality of all roles that we play and the success we achieve while playing them and very importantly our relationships – not only with others but with our self and the Supreme Being or God also.

– Message –

To be in the awareness of my own speciality is to be free from negativity.

Expression: When I percieve negativity in others, I find myself very easily influenced by it. I then react negatively to them and am not able to maintain my own positivity. All my specialities remain hidden in such a negative atmosphere and I continue to be negative too.

Experience: Like a rose I need to maintain my originality and uniqueness while being amongst the thorns. Instead of blaming others and their negativity for my own negativity, I need to practice being positive and working with my original qualities. Then I will never complain but will always use my own specialities.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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In-English…..

Purity is the foundation of true peace & happiness,

It is your most valuable Property in your life,

Preserve it at any cast. !!

~KMSRAJ51

In-Hindi…..

पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है.

यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

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KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT08

कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह …..

:- गहराई से सोचना प्रत्येक शब्द 

मेरे(kmsraj51) कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

हमेशा मन को शांत रखना …..

दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

आपका कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ….. मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ!! …..

** ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

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आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,, http://kmsraj51.com/

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कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥”

 ~KMSRAJ51

 

 

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क्या बनना चाहेंगे आप : Fault Finder या Solution Seeker ?

kmsraj51 की कलम से …..
SOLUTION

यह पोस्ट गोपाल मिश्रा द्वारा प्रस्तुत है …..


बात बहुत पुरानी है , 13-14 साल पुरानी ….मैं Gorakhpur से Lucknow या शायद Lucknow से Gorakhpur जा रहा था …train मुसाफिरों से भरी हुई थी , गप लड़ाने वालों के ठहाकों और चाय -समोसा बेचने वालों के शोर के बीच एक तीखी आवाज़ कान के पर्दों को लगभग चीरते हुए मुझसे टकराई ….”सरकार चोर है. ”

और उसके बाद ऐसी लाइनों की झड़ी सी लग गयी ,क्या युवा , क्या अधेड़ और क्या बुजुर्ग हर एक व्यक्ति system को कोसने में लग गया …मैं वहीँ बैठा ये सब सुन रहा था , कुछ देर सुनता रहा , पर किसी को positively बात ना करते देख मुझसे रहा नहीं गया और मैं भी discussion में शामिल हो गया .

मैंने कहा , “ system तो हमी लोगों से बना है , अगर ये गड़बड़ है तो इसे ठीक भी हमी को करना होगा .”
“ हम कैसे ठीक कर सकते हैं , हमारे हाथ में क्या है , ये तो सरकार की जिम्मेदारी है …” ’ उधर से जवाब आया और ऐसे करते-करते बात बहस में बदल गयी …जहाँ तक मुझे याद है मेरी last lines कुछ ऐसे थीं ….”आप नहीं बदल सकते तो न सही मैं बदलूँगा system को …”

Friends, भारत में Fault Finders की कमी नहीं है …करोड़ों हैं …ज़रुरत तो Solution Seekers की है …किसी समस्या को देखकर उसे लगातार कोसना आपको part of problem बना देता है , and in fact ऐसा करके आप problem को बढाते ही हैं घटाते नहीं …so never be a part of problem try to be a part of solution.

क्या होता है जब हम Fault Finding में लगे रहते हैं ?

हम negative सोचते हैं , अपनी energy का गलत इस्तेमाल करते हैं , अपने life में और भी अधिक stress और tension attract करते हैं और सबसे बड़ी चीज हम fault को fault ही रहने देते हैं.

क्या होता है जब हम Solution Seeking में लगे रहते हैं ?

हम positive सोचते हैं , अपनी energy का सही इस्तेमाल करते हैं ,अपनी life में और भी अधिक happiness और self satisfaction attract करते हैं और सबसे बड़ी चीज हम fault को fault नहीं रहने देते उसका solution निकाल लेते हैं .

तो फिर क्या बनना पसंद करेंगे आप Fault Finder या Solution seeker?

फैसला आसान है , हर कोई यही कहेगा की वो solution seeker बनना पसंद करेगा . पर ये बोलने जितना आसान नहीं है . कोई बरसो से fault finding में लगा हो तो ये चीज उसकी habit में आ जाती है .

तो सबसे पहले आप ऐसा करिए की खुद को observe करिए , कहीं ये संक्रमण आपके अन्दर तक तो नहीं फ़ैल गया है , कहीं आप चाय में चीनी कम होने जैसी छोटी सी fault से लेकर चीनीयों की घुसपैठ जैसी गंभीर समस्या तक हर जगह fault ही तो नहीं find करते रहते ???

अब आपको इस संक्रमण को दूर करना होगा , आप इसे कई तरीकों से कर सकते हैं :

For instance जैसे ही आपको लगे कि आपने fault finding चालू कर दी है तो topic को नयी दिशा देते हुए उसके solution के बारे में बात करना शुरू कर दीजिये …. “ सरकार निठल्ली है , भला चीन कैसे हमारी सीमा में घुस सकता है …., हमें अपनी सीमा पर और सैनिक लगाने चाहिए और satellite से नज़र रखनी चाहिए …हमें International community में भी lobbying करनी चाहिए …”
आप मन ही मन ये निश्चय कर सकते हैं कि आज से आप हर एक चीज, हर एक situation चाहे वो कितनी बुरी ही क्यों न हो कुछ न कुछ अच्छा खोज कर दिखायेंगे…
अगर आदत कुछ ज्यादा ही लग गयी है तो आप अपनी फाल्ट फाइंडिंग को लिमिट भी कर सकते हैं…मैं हर रोज अधिक से अधिक तीन बातों पर negatively बात करूँगा..कोटा पूरा होते ही मैं सिर्फ और सिर्फ positive aspects पर फोकस करूँगा….and so on …
Well, हो सकता है कि “ fault finding” आपको आम सी बात लगे , और आप इसे seriously न लें पर यकीन जानिये अगर आप इससे suffer कर रहे हैं तो ये आपके personal development में एक बहुत बड़ा bottleneck है …क्योंकि जब आप अपने mind को fault find करने के लिए train कर देते हैं तो वो सिर्फ सरकार और देश की ही नहीं आपकी अपने लाइफ की भी fault गिनाता रहता है , आप ना जाने कब औरों को कोसते -कोसते खुद को भी कोसने लगते हैं …और इसी का बिगड़ा हुआ रूप depression में बदल जाता है ….मैं आपको डरा नहीं रहा , बस alert कर रहा हूँ , Fault Finder नहीं Solution Seeker बनिए …क्योंकि हर कोई यही चाहता है …आपका देश , आपकी company , आपकी family और आपका inner -self हर कोई यही चाहता है ….so don’t be a Fault Finder be a Solution Seeker.

All the best 🙂

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Post inspired by AKC. I am grateful to Mr. Gopal Mishra & AKC (http://www.achhikhabar.com/) Thanks a lot !!


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क्यों बचें Facebook से ? 7 reasons !!

kmsraj51 की कलम से …..


Facebook (Fb) world की दूसरी सबसे ज्यादा visit की जाने वाली site है …(पहली Google है ).

Dislike-Facebook-150x150Facebook Over-use

इसे बनाने वाले दुनिया के youngest billionaire Mark Zukerberg ने भी कभी नहीं सोचा था की ये इतनी जल्दी इतनी popular हो जाएगी . In fact , अगर आप Fb पे नहीं हैं तो लोग आपको आश्चर्य से देखते हैं . ..” Fb पे नहीं है ………….जी कैसे रहा है …… 🙂 !!!” and all that.

आज Fb पे 1 billion+ registered user हैं, यानि दुनिया का हर सातवाँ आदमी Fb पे है and in all probability आप भी उन्ही में से एक होंगे . और शौक से Fb use करते होंगे . पर जो सोचने की बात है वो ये कि क्या आप Fb use करते ; overuse करते हैं …या फिर कहीं आप इसके addict तो नहीं !

Let’s say use करने का मतलब है कि आप Fb पर daily 1 घंटे से कम समय देते हैं , और overuse करने का मतलब है 1 घंटे से ज्यादा . और हाँ , use करने से बस ये मतलब नहीं है कि आप physically system के सामने या अपने smart phone को हाथ में लेकर use करते हैं even अगर आप Fb के बारे में सोचते हैं तो वो भी time usage में count होगा after all वो उतने देर के लिए आपका mind space occupy कर रहा है .

और अगर आप सोच रहे हैं कि कहीं मैं addict तो नहीं हूँ तो इन traits को देखिये , अगर ये आपमें हैं तो आप addict हो सकते हैं :

आप का दिमाग अकसर इसी बात में लगा रहता है कि आपकी पोस्ट की गयी चीजों पर क्या कमेंट आया होगा, कितने लोगों ने लाइक किया होगा.
आप बिना मतलब बार-बार फेसबुक स्क्रीन रिफ्रेश करते हैं कि कुछ नया दिख जाए.
अगर थोड़ी देर आपका internet नहीं चला तो आप updates चेक करने साइबर कैफे चले जाते हैं या दोस्त को फ़ोन करके पूछते हैं.
आप टॉयलेट में भी मोबाइल या लैपटॉप लेकर जाते हैं कि Fb use कर सकें
आप सोने जाने से पहले सभी को Good Night करते हैं और सुबह उठ कर सबसे पहले ये देखते हैं की आपकी गुड नाईट पर क्या reactions आये.
अब मैं आपको अपने usage के बारे में बताता हूँ , on an average मैं daily 10 minutes से भी कम Fb use करता हूँ including Fb के बारे में सोचने का time. हाँ, इसे आप under usage भी कह सकते हैं . 🙂 In my opinion ideally Fb आधे घंटे से अधिक नहीं use करना चाहिए पर फिर भी मैंने over usage को 1 घंटे से ऊपर रखा है .

और अब आपकी बात करते हैं , आप कितनी देर Fb use करते हैं ?

Well, अगर ये daily 1/2 घंटे से अधिक है तो आप अपना time waste कर रहे हैं , unless until आप purposefully ऐसा कर रहे हैं . Purposefully means आप अपना बिज़नस प्रमोट कर रहे हैं, किसी social cause के लिए campaign चला रहे हैं या कोई और meaningful काम कर रहे हैं , इन cases में अपना टाइम देना worth है .

किस तरह के लोग Fb ज़रुरत से अधिक use करते हैं :

In my opinion :

• जिनके पास कोई meaningful goal नहीं है …… the wanderers

• जो लोगोंका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं करना चाहते हैं ….the attention seekers.

• जो अपनी life से अधिक दूसरों की life में interest रखते हैं …..the peepers

क्या नुकसान कर सकता है Facebook का over usage ?

इसकी लिस्ट तो बहुत लम्बी है लेकिन आज मैं आपके साथ 7 ऐसे points share कर रहा हूँ , तो आइये देखते हैं इन्हें :

1) आप unknowingly अपनी happiness का control दूसरों को दे देते हैं ?

कैसे ? दरअसल अब आपकी happiness इस बात पर depend करने लगती है कि Fb पे आपकी बातों , आपकी pics को कितने लोग like कर रहे हैं , कितने लोग उसपर comments कर रहे हैं …कैसे comments कर रहे हैं …etc. For instance आपने एक नई watch ली और उसकी photo post की …obviously आपको watch बहुत पसंद थी इसलिए आपने ली …पर जब Fb पे उसे अधिक लोग like नहीं करते और कोई उसका मज़ाक बना देता है तो आप दुखी हो जाते हैं . और उसका उल्टा भी सही है …आप को कोई चीज पसंद नहीं है पर बाकी लोग उसको अच्छा कह देते हैं तो आप खुश हो जाते हैं …so in a way आप अपनी happiness का control अपने Fb friends को दे देते हैं . मैं ये नहीं कहता कि ये सभी के साथ होता है पर इतना ज़रूर है कि हम कहीं न कहीं इन चीजों से affect होते हैं .

And over a long period of time ये छोटे छोटे इफेक्ट्स बड़े होते जाते हैं और हमें पता भी नहीं चलता कि हम अपना real self कहाँ छोड़ आये.

2) आपको दूसरों की blessings और अपनी shortcomings दिखाई देने लगती है ?

Fb पर लोग generally अपनी life की अच्छी अच्छी बातें ही share करते हैं …लोग अपने साथ हो रही अच्छी चीजें बताते हैं , उनके status कुछ ऐसे होते हैं “ My new machine” , “ Lost in London”..etc

In reality आप भी ऐसा ही करते हैं , पर अन्दर ही अन्दर आप अपनी असलीयत भी जानते हैं , पर दूसरों के case में आप वही देखते हैं जो वो आपको दिखाते हैं , आपको उनकी नई car नज़र आती है पर उसके साथ आने वाला EMI नहीं , आपको friend का swanky office तो दीखता है पर उसके साथ मिलने वाली tension नहीं . और ऐसा होने पर आप उनकी खुशियों को अपने ग़मों से compare करने लगते हैं और ultimately low feel करने लगते हैं .

Fb की वजह से depression में जाने वालों की संख्या दिन ब दिन बढती जा रही है , just beware कि आप भी इसके शिकार न हो जाएं .

3) Real Friends और relationships suffer करते हैं :

कई बार लोग बहुत proudly बताते हैं , “ Fb पे मेरे 500 friends हैं …” I am sure उनमे से आधे अगर सामने से गुजर जाएं तो वो उन्हें पहचान भी नहीं पायंगे . हकीकत में Fb पे हमारे friends कम और acquaintances ज्यादा होते हैं . खैर ये कोई खराब बात नहीं है …लेकिन अगर हम इन more or less fake relations को ज़रुरत से अधिक time देते हैं तो कहीं न कहीं हमें अपनी family और friends को जो time देना चाहिए उससे compromise करते हैं . I know हमारे close friends और relations भी Fb पे होते हैं , but frankly speaking Fb पर वो भी हमारे लिए आम लोगों की तरह हो जाते हैं , क्योंकि Fb तो एक भीड़ की तरह है …और भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता ….जो सामने पड़ा …like किया , comment दिया और आगे बढ़ गए ….individuals को attention देना ये Fb की आत्मा में ही नहीं है .

4) आप mainly addicts से communicate करने लगते हैं :

शायद आपने Pareto principle के बारे में सुना होगा …इस principle का कहना है कि 80% चीजों के लिए 20% चीजें जिम्मेदार होती हैं .

For eg. किसी company की 80 % sales 20% customers की वजह से होती है .

ऐसा ही कुछ Fb पे भी होता है …80% updates 20% लोगों द्वारा ही की जाती है …और आप बार बार उन्ही से linkup होते रहते हैं …and basically ये वही Addict kind of लोग होते हैं जो बस Fb से चिपके ही रहते हैं . और ऐसे लोगों से interact करना शायद ही कभी आपको काम की चीजें बता पाएं . ये mostly waste of time ही होता हैं .

5) आपको Socially active होने का भ्रम हो जाता है और reality इसके उलट होती है :

Facebook पे होने से कई लोग खुद को socially active समझने लगते हैं , और friends को hi -bye कर के अपना role पूरा समझ लेते हैं . धीरे -धीरे ये बिलकुल mechanical हो जाता है …आप Fb पे तो hi करते हैं लेकिन जब उसी दोस्त से college या office में मिलते हैं तो react भी नहीं करते …it is like आपकी online presence मायने रखती हो पर आपका खुद का मौजूद होना बेमानी हो .

और जब आप ऐसे behave करते हैं तो लोग आपको avoid करने लगते हैं और कहीं न कहीं आपको fake समझने लगते हैं . यानि आपको तो लगता है कि आप सबसे touch में हैं पर इसके उलट आप अपना touch खोते जाते हैं .

6) आपकी health पर बुरा असर पड़ता है :

Fb पर लगे रहने से आपको फिजिकल और मेंटल दोनों तरह की प्रॉब्लम हो सकती हैं. आपकी आँखें कमजोर पड़ सकती हैं, गलत posture में बैठने से आपको स्पॉन्डिलाइटिस हो सकता है . और डिप्रेशन में जाने का खतरा तो हमेशा ही बना रहता है.

7) आप अपनी life के सबसे energetic days lazy entertainment में लगा देते हैं :

Fb use करने वालों की demography देखी जाए तो इसे सबसे अधिक teens और twenties के young लोग use करते हैं . अगर आप इस age group से बाहर हैं तो ये point आपके लिए applicable नहीं है.

Teenage और twenties life का वो time होता है जब आपके अन्दर energy की कोई कमी नहीं होती …कभी सोचा है कि इस वक्त भगवान् आपको सबसे अधिक energy क्यों देते है ….क्योंकि ये हमारे life making years होते हैं ….इस समय आपके सामने करने को बहुत कुछ होता है …..पढाई का बोझ या घर की जिम्मेदारी उठाने का challenge…अपना career chose करने और competition beat करने की कशमकश …अपने दिल कि सुनकर कुछ कर गुजरने की चाहत …parents के सामने हाथ फैलाने की जगह उनका हाथ थामने कि जिद्द …और ये सब करने के लिए उर्जा चाहिए …energy चाहिए ; but unfortunately Fb का over usage करने वाले उसे गलत जगह invest करते हैं . जहाँ उनके पास करने को इतने ज़रूरी काम हैं वो एक कोने में बैठ कर , and in ,most of the cases लेट कर …अपनी life के ये energetic days एकदम unproductive चीज में लगा देते हैं .

Friends अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि Fb एक शोर -शाराबे से भरे mall की तरह है …यहाँ थोडा वक़्त बीतायेंगे तो अच्छा लगेगा लेकिन अगर वहीँ घर बना कर रहने लगेंगे तो आपकी ज़िन्दगी औरों की आवाज़ के शोर में बहरी हो जाएगी . उसे बहरा मत होने दीजिये ….अपना time अपनी energy कुछ बड़ा , कुछ valuable , कुछ शानदार करने में लगाइए और जब आप ऐसा करेंगे तो आपके इस काम को सिर्फ आपके friends ही नही बल्कि पूरी दुनिया Like करेगी , और ऊपर वाला comment देगा , “gr8 job my son”

All the best!

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कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह ~ Great Thoughts of KMSRAJ51 in Hindi !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

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** ~ Krishna Mohan Singh(kmsraj51) ~ Great Thoughts of KMSRAJ51 ~ **


::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..
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kmsraj51

** कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह ….. **

:: Imp. Note :: ** ~ गहराई से सोचना प्रत्येक शब्द ~ **


** मेरे(kmsraj51) कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

** अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

** हमेशा मन को शांत रखना …..

** दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

** हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

** हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

** हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

** हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

** आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

** आपका कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ….. मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ!! …..

** ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!

** ~ kmsraj51 – (my personal picture/photo) ~ **

KMS-2014-51

KMSRAJ51


DSCN0881

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##### ~ ::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) ….. ~ #####

कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह ~ Great Thoughts of KMSRAJ51 in Hindi !!

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** ~ Krishna Mohan Singh(kmsraj51) ~ Great Thoughts of KMSRAJ51 ~ **

 


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** कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह ….. **

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** मेरे(kmsraj51) कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

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** हमेशा मन को शांत रखना …..

** दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

** हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

** हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

** हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

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** आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

** आपका कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ….. मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ!! …..

** ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!

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सूफी संत ज़ुन्नुन से जुड़ा प्रसंग।

Kmsraj51 की कलम से…..

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सूफी संत ज़ुन्नुन से जुड़ा प्रसंग

बहुत पुरानी बात है. मिस्र देश में एक सूफी संत रहते थे जिनका नाम ज़ुन्नुन था. एक नौजवान ने उनके पास आकर पूछा, “मुझे समझ में नहीं आता कि आप जैसे लोग सिर्फ एक चोगा ही क्यों पहने रहते हैं!? बदलते वक़्त के साथ यह ज़रूरी है कि लोग ऐसे लिबास पहनें जिनसे उनकी शख्सियत सबसे अलहदा दिखे और देखनेवाले वाहवाही करें”.

ज़ुन्नुन मुस्कुराये और अपनी उंगली से एक अंगूठी निकालकर बोले, “बेटे, मैं तुम्हारे सवाल का जवाब ज़रूर दूंगा लेकिन पहले तुम मेरा एक काम करो. इस अंगूठी को सामने बाज़ार में एक अशर्फी में बेचकर दिखाओ”.
नौजवान ने ज़ुन्नुन की सीधी-सादी सी दिखनेवाली अंगूठी को देखकर मन ही मन कहा, “इस अंगूठी के लिए सोने की एक अशर्फी!? इसे तो कोई चांदी के एक दीनार में भी नहीं खरीदेगा!”
“कोशिश करके देखो, शायद तुम्हें वाकई कोई खरीददार मिल जाए”, ज़ुन्नुन ने कहा.
नौजवान तुरत ही बाज़ार को रवाना हो गया. उसने वह अंगूठी बहुत से सौदागरों, परचूनियों, साहूकारों, यहाँ तक कि हज्जाम और कसाई को भी दिखाई पर उनमें से कोई भी उस अंगूठी के लिए एक अशर्फी देने को तैयार नहीं हुआ. हारकर उसने ज़ुन्नुन को जा कहा, “कोई भी इसके लिए चांदी के एक दीनार से ज्यादा रकम देने के लिए तैयार नहीं है”.

ज़ुन्नुन ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तुम इस सड़क के पीछे सुनार की दुकान पर जाकर उसे यह अंगूठी दिखाओ. लेकिन तुम उसे अपना मोल मत बताया, बस यही देखना कि वह इसकी क्या कीमत लगाता है”.
नौजवान बताई गयी दुकान तक गया और वहां से लौटते वक़्त उसके चेहरे पर कुछ और ही बयाँ हो रहा था. उसने ज़ुन्नुन से कहा, “आप सही थे. बाज़ार में किसी को भी इस अंगूठी की सही कीमत का अंदाजा नहीं है. सुनार ने इस अंगूठी के लिए सोने की एक हज़ार अशर्फियों की पेशकश की है. यह तो आपकी माँगी कीमत से भी हज़ार गुना है!”

ज़ुन्नुन ने मुस्कुराते हुए कहा, “और वही तुम्हारे सवाल का जवाब है. किसी भी इन्सान की कीमत उसके लिबास से नहीं आंको, नहीं तो तुम बाज़ार के उन सौदागरों की मानिंद बेशकीमती नगीनों से हाथ धो बैठोगे. अगर तुम उस सुनार की आँखों से चीज़ों को परखने लगोगे तो तुम्हें मिट्टी और पत्थरों में सोना और जवाहरात दिखाई देंगे. इसके लिए तुम्हें दुनियावी नज़र पर पर्दा डालना होगा और दिल की निगाह से देखने की कोशिश करनी होगी. बाहरी दिखावे और बयानबाजी के परे देखो, तुम्हें हर तरफ हीरे-मोती ही दिखेंगे”.

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

http://wp.me/p3gkW6-1ep

 

 

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