मित्रता दिवस – सच्चा दोस्त।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

♥ एक वास्तविक दोस्त। 

मित्रता दिवस विशेष – किसी भी इंसान काे उसके जन्म के साथ ही सारे रिश्ते मिल जाते है, केवल एक दोस्ती के रिश्ते काे छाेड़कर।
दोस्ती का रिश्ता ही वह रिश्ता है, जिसे अपने जीवन में हर इंसान स्वयं(Self) बनाता हैं।

हर काेई एक ऐसा दोस्त चाहता है, जाे उसके साथ सदैव रहें। जीवन में चाहे दुखः हाे या सुख। एक अच्छा और सच्चा दोस्त कभी साथ नहीं छाेड़ता।

५० दोस्त बनाना आसान हैं, लेकिन एक हीं दोस्त से ५० वर्षों तक सच्चें मन से दोस्ती निभाना

कठिन लगता हैं आजकल सबको॥

पढ़े – दोस्ती के दिन पर विशेष विचार – यहा Click करें।

मित्रता दिवस (एक वास्तविक दोस्त)।

 

“मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।”

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”

(“The biggest source of success”)

मेरे प्यारे दोस्तों आज मैं (कृष्ण मोहन सिंह) आप सबके साथ जीवन में सफल हाेने का सबसे मूल्यवान (Valuable) सूत्र Share कर रहा हूँ। यह सूत्र मेरे जीवन (राजयाेग जीवन) के अनुभव का अनमाेल निचाेड़ हैं। यह सूत्र मेरे ३ वर्ष से लेकर २४ वर्ष तक के जीवन का अनमाेल अनुसंधान का परिणाम हैं। जिस किसी ने भी मेरे इस सूत्र काे गहराई से समझकर अपने जीवन में धारण़(पालन) किया, आज (Present Time) वह सभी अपने-अपने क्षेत्र में निश-दिन सफलता की नई ऊचाईया चढ़ रहें हैं।

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

“Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaen solar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.”

 ~KMSRAJ51(“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

~KMSRAJ51

जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

~KMSRAJ51

 

In-English…..

Purity is the foundation of true peace & happiness,

It is your most valuable Property in your life,

Preserve it at any cast. !!

 

In-Hindi…..

पवित्रता सच शांति और खुशी का धार है.

यह पके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

~KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

 ~KMSRAJ51

जीवन में सदैव शांत मन से साेंच समझ़ कर हीं काेई निर्णय लें।

और जाे निर्णय एकबार लें उसका जीवन में दृढ़ता से पालन करें।

 ~KMSRAJ51

जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है।

 ~KMSRAJ51

– गहराई से सोचना प्रत्येक शब्द –

मेरे (kms) कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

हमेशा मन को शांत रखना …..

दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की पहली आवाज) आवाज सुनो …..

हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

Kmsraj51 की कलम से …..

Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब)…..

“तू ना हो निराश कभी मन से”

—–

मन काे कैसे नियंत्रण में करें।

मन के विचारों काे कैसे नियंत्रित करें॥

विचारों के प्रकारएक खुशी जीवन के लिए।

अपनी सोच काे हमेशा सकारात्मक कैसे रखें॥

“मन के बहुत सारे सवालाें का जवाब-आैर मन काे कैसे नियंत्रित कर उसे सहीं तरिके से संचालित कर शांतिमय जीवन जियें”

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-Kmsraj51

 

प्रश्न :- दोस्त क्या है?\मित्र क्या है?

उत्तर :- “एक आत्मा जाे दाे शरीराें में निवास करती है”

 

“तू ना हो निराश कभी मन से”

आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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* चांदी की छड़ी।

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Positive Consciousness While Performing Actions

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Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

Positive Consciousness While Performing Actions

1. The seeds, the inspirations, planted in sitting meditation should be carried into action. Powerful thoughts carried straight away into action always yield powerful results.

2. The remembrance should be that the soul is the child and student of the Supreme Being (Supreme Soul) and should reflect the father and teacher through its actions.

3. The remembrance of the Supreme Soul as a constant companion sustains an internal relationship with Him whilst performing actions.

4. Churn (think deeply) over points of spiritual knowledge by relating them to your immediate karmas (actions).

5. Practice going beyond sound in one second. At different times during the day, stop, pack up all worldly thoughts and spend a few minutes in meditation. This is a really powerful way to strengthen the intellect. After a few minutes, return to the world of sound with the reinforced awareness of being an actor.

6. Practice seeing all those who come into contact with you as souls, tiny points of conscient (living energy) light situated at the centre of the forehead. In this way we will not be pulled into body consciousness, and will avoid negative interactions with others.

– Message –

Determination is the best companion.

Expression: When things go wrong, the first reaction is of fear. Because of this, I can’t put in any effort to better the situation. I start looking for a companion, a support who can provide me help. But I rarely get help from outside.

Experience: When I have to look for something to rely on, the only support I get is from my own determined thought. I need to make it my companion, not letting go of it till I succeed. This will help me overcome my fear and move towards success.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-Kmsraj51

जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है।

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Body Polishing At Home

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Kmsraj51-CYMT-Oct-14-3

Body Polishing At Home

We come across many tempting spa packages which offer body polishing services, amongst others. Lets see what exactly is done in a body polishing session.

What is Body Polishing?

It is a process of exfoliating the body skin, and also moisturizing it, in order to get healthy, glowing skin. It can be compared to a facial. The steps would essentially remain the same. The most commonly used materials for preparing a body polish at home are sugar, salt, honey, oats, walnut shell powder, olive oil, etc.

Why Body Polishing?

Body polishing aims at removing dead skin from the surface, and allows new cells to grow. It helps in skin firming, moisturising, repairing sun-damage, improving oxygen supply to the skin, repairing damaged and dehydrated skin, etc.

How can I get my body polished?

You may get your body polished at your favorite spa, or you can prepare a homemade body polishing kit for yourself (details in a subsequent post).

How much does it cost?

In a spa, a body polishing session will cost you anything between 2000-5000 bucks, depending on where you get it done from.

Is it safe and effective?

Yes, it is safe and very effective, if done by trained therapists, and following the right procedure. Also, using the right products, according to your skin type, is very important.

How frequently can I get it done?

It is generally advisable to get a body-polish done once a month.

What is the body polishing process?

A typical in-salon body polishing session will comprise of the following steps:

You will be taken to a sauna cubicle, with a therapy table. You will be asked to lie down, and allow the steam to open up all pores on the skin, and prepare the skin for the steps to follow.

A scrub suitable for your skin type will then be applied on the body, and the body will be scrubbed gently. This will remove all dead skin cells, and any toxins that may have come to the surface from

Step -1 above.

The body will then be wiped with a hot, moist towel.

Next, the body will be massaged with aromatic essential oils, like lavender, patchouli, etc, depending on your skin type. This will moisturize the skin, and the aromatics will lead to relaxation.

After 10-15 minutes, you will be required to take a shower with warm water. Using soap or body shower gel is not advisable at this time, as we want to keep the oils on the skin. You may wipe the body with warm, damp towel, alternatively.

Tips for in-salon body polishing sessions:

  • Always go only to a reputed salon, your safety is as important as the hygiene concerns.
  • Before getting into the therapy room/ sauna room/ shower cubicle, ensure that the room has been properly cleaned and sanitized. You don’t want to get an infection from somebody who was in the room before you.
  • Always ask for fresh laundry. No compromises here.
  • For your satisfaction, you may check the products that will be used on your body before-hand. You have the right to do this!
  • Ensure that your spa therapist has clean uniform and hands. Ask her to sanitize her hands before starting the session.

Sounds so very luxurious, doesn’t it! And once in a while, it is heavenly to head to a spa, but considering the cost, making this a routine is impossible for everyone! So here we tell you how you can do it yourself at home!

Why natural body polishing at home?

Natural body polishing at home with home remedies can save you on travel time, money, and you won’t be under any pressure about reaching the spa on time! And you know what exactly is going into the body polish, and you can customize the products to best suit your body, with some experience.

Below are some methods for you to easily do body polishing procedure at home:

The basic steps, using a loofah/ pumice stone:

You will need:

  • A loofah or pumice stone
  • Olive oil
  • Home-made body scrub or ready made scrub which suits your skin

Method: Take a warm water shower first. Then apply warm olive oil onto your skin and massage for 5-10 minutes. Now exfoliate the skin using a body scrub. Do this for 5-10 minutes. Be very gentle on your skin. You may use a loofah and body wash alternatively. Next, gently scrub the hard patches on your skin, like elbows, knees and heels using a pumice stone to get rid of dead skin. Take a shower again, and apply dollops of your favorite moisturizer on your skin.

Some recipes for home-made body scrubs:

  • Salt, Sugar and Honey body polish: Mix half a cup each of salt (preferably organic) and sugar, with half cup of honey, in a bowl. Use this on your body after a warm shower to gently exfoliate and moisturize the skin.
  • Sugar, orange and olive oil polish: Mix together 2/3rdcup of brown sugar (or white sugar), ½ cup of dried and powdered orange peel, and ½ cup olive oil to prepare a scrub. Use this on the body after a warm shower, and then rinse off.
  • Strawberry and sugar body polish: Blend 4-5 strawberries and ½ cup of sugar with some honey in a blender, and use it on the body.

So, go ahead and make your own homemade body polishes..Happy blending!

Source: http://www.stylecraze.com/

For more health article visit at http://www.stylecraze.com/

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Meditation For Overcoming Fear

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Kmsraj51-CYMT-Oct-14-3

Meditation For Overcoming Fear

Breathe deeply. You should say to yourself “relax, calm yourself”. Repeat until you are peaceful and centered. Become serene and feel a sensation of peace and wellbeing. Maintain this serenity on breathing. Free yourself of worries on breathing out. Now slowly create the following thoughts:

I sit comfortably like an observer in silence… I let go of every-thing around me… objects, people, responsibilities, places… I focus my mind on the present moment… I let the serenity… the peacefulness… envelop me… In this calm I can see the dark corners of my inner self… Like shadows, I can see the fears, anxieties, guilt, unhappiness, weaknesses that lie hidden there… Fear has poisoned my being; it has stolen my peace, my happiness and my self-respect…

I accept that there is fear within me… I observe it and I realize that I am not that fear… I am not that weakness… it is not real, it is a shadow… I focus now on what is real: it is love… it is peace… it is wellbeing… it is the purity of the soul, what is real, authentic and true… I only have to access these original qualities and allow these energies to heal and strengthen my soul… To do this, I continue to observe calmly… with patience… I do not allow my mind to judge, or analyze what is happening to me… everything that has happened to me forms part of the past… I have learned from my mistakes… I forgive myself… I forgive others…

Create the following thoughts:

I continue to go forward… I only observe feeling who I am… I am a being of light… a peaceful being… like a small candle that lights up a dark room I radiate light and remove the darkness inside. Conscious of who I am… I imagine that I am in the presence of a generous Being of Light that radiates infinite love, peace and happiness… It is a powerful ocean of love that can dissolve all my fears, the pain and suffering that there is inside my soul…

I open my heart… and mentally I say: “here are my fears… They are yours… They are no longer useful to me… I hand them over to you… I absorb your light… I absorb your love and let it reach each dark corner of my inner self… I feel how your powerful light, full of love, touches my fears… they dissolve and I am freed… I let go of all worries… The weaknesses and problems no longer have power over me… I feel that the Supreme Being is with me… that He accepts me as I am… He comforts me… I feel safe… at peace… in an immense peace… and free of worries…”

I enjoy this present moment in His company and I share this peace and love with the world.

– Message –

To be constantly enthusiastic is to experience freedom.

Expression: When everything is going on well I find myself enthusiastic and have the interest to move forward. But when even a little thing goes wrong, I lose all enthusiasm to do anything else. This creates a bondage for me and I find it difficult to move forward.

Experience: I need to remind myself that to be enthusiastic in all situations is to be like a free bird reaching great heights. To lose enthusiasm according to difficult situations is to be like a caged bird.

__

A deep understanding and an attitude of pure feelings results in positive thinking.

Expression: When we talk about positive thinking, it is usually just ‘think positive’ and ‘be positive’. But just saying this, either to others or to myself, doesn’t help to change my thoughts permanently, in fact usually, not even temporarily.

Experience: Real positive thinking is much deeper than just to think positive. For this I need to understand and see things as they are, without colouring them with my own attitudes. Then I can deal with things in the most appropriate way, having understood everything accurately.

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

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जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है।

 ~KMSRAJ51

तैयारी इतनी खामोशी से करो की सफलता शोर मचा दे |

 ~KMSRAJ51

जीवन में सदैव शांत मन से साेंच समझ़ कर हीं काेई निर्णय लें।

और जाे निर्णय एकबार लें उसका जीवन में दृढ़ता से पालन करें।

 ~KMSRAJ51

 

 

 

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मन से कभी भी जीवन में निराश ना हाेना।

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“कभी भी मन से निराश हाेकर जीवन में बैठ ना जाना,
माना कि समस्यायें ताे जीवन में बहुत आयेगी,
लेकिन काेई भी समस्या लंबे समय तक, टिक नहीं सकती।”

-KMSRAJ51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं,

ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

हर एक शब्द दो-अर्थी (Positive “or” Negative) हाेता हैं,
यह ताे साेंचने वाले पर निर्भर करता है।
की वह क्या (Positive “or” Negative) साेंच रहा हैं॥

-KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे”

-Kmsraj51 

अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-KMSRAJ51

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 –KMSRAJ51

जिस बात काे आप (स्वयं) अपने आप तक सिमित नहीं रख सकते,
भला काेई आैर कैसे, उस बात काे अपने आप तक सिमित रख सकता हैं।

 –KMSRAJ51

“अपने मन काे इतना संयमित करले कि जिस समय जाे भी कार्य करें,
उस कार्य काे करने में इस कदर खाे जायें कि, उस कार्य के अलावा,
उस समय आपकाे आैर कुछ भी ना सुझे॥”

 –KMSRAJ51

जीवन का लक्ष्य पता करें, उसे पाने की इच्छा पैदा करें।

ऐसा नहीं करेंगे तो आप एक काम छोड़कर दूसरा और फिर तीसरा करते रहेंगे और खुद को नाकाम मानने लगेंगे। 

-KMSRAJ51

काम या लक्ष्य पर दृढ़ न रहना मानसिक थकावट को बताता है।

महत्वपूर्ण मौके पर पीछे हट गए। जबकि यह सफलता के सबसे करीब पहुंचने की स्थिति होती है। 

-KMSRAJ51

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कहीं आप monkey business में तो नहीं लगे हैं?

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Beware-of-Monkey-Business

Beware of Monkey Business

कहीं आप Monkey Business में तो नहीं लगे हैं? 

एक  समय  की  बात  है , एक  गाँव  में  एक  आदमी  आया  और  उसने  गाँव  वालों  से  कहा कि  वो  बन्दर  खरीदने  आया  है , और  वो  एक  बन्दर  के  10 रुपये  देगा . चूँकि  गाँव  में  बहुत  सारे  बन्दर  थे  इसलिए  गाँव  वाले  तुरंत  ही  इस  काम  में  लग  गए .

उस  आदमी  ने  10 रूपये  की  rate से  1000 बन्दर  खरीद  लिए  अब  बंदरों  की  supply काफी  घट  गयी  और  धीरे  धीरे  गाँव  वालों  ने  बन्दर  पकड़ने  का  प्रयास  बंद  कर  दिया . ऐसा  होने पर  उस  आदमी  ने  फिर  घोषणा  की  कि  अब  वो  20 रूपये  में  एक  बन्दर  खरीदेगा . ऐसा  सुनते  ही गाँव  वाले  फिर  से  बंदरों  को  पकड़ने  में  लग  गए .

बहुत  जल्द  बंदरों  की  संख्या  इतनी  घाट  गयी  की  लोग  ये  काम  छोड़  अपने  खेती -बारी  में  लगने  लगे . अब  एक  बन्दर  के  लिए  25 रुपये  दिए  जाने  लगे , पर  उनकी  तादाद  इतनी  कम  हो  चुकी  थी  की  पकड़ना  तो  दूर  उन्हें  देखने  के  लिए  भी  बहुत  मेहनत  करनी  पड़ती  थी .

तब  उस  आदमी  ने  घोषणा  की  कि  वो  एक  बन्दर  के  50 रूपये  देगा . पर  इस  बार  उसकी  जगह  बन्दर  खरीदने  का  काम  उसका  assistant करेगा  क्योंकि  उसे  किसी  ज़रूरी  काम  से  कुछ  दिनों  के  लिए  शहर  जाना  पद  रहा  है . उस  आदमी  की  गैरमौजूदगी   में  assistant ने  गाँव  वालों  से  कहा  कि  वो  पिंजड़े  में  बंद  बंदरों  को  35 रुपये  में  उससे  खरीद  लें  और  जब  उसका  मालिक  वापस  आये  तो  उसे  50 रुपये  में  बेंच  दें .

फिर  क्या  था  गाँव  वाले  ने  अपनी  जमा  पूँजी   बदारों  को   खरीदने  में  लगा  दी . और  उसके  बाद  ना  कभी  वो  आदमी  दिखा  ना  ही  उसका  assistant, बस  चारो  तरफ  बन्दर  ही  बन्दर  थे .

दोस्तों  कुछ  ऐसा  ही  होता  है  जब  Speak Asia जैसी  company अपना  business  फैलाती  है . बिना  ज्यादा  मेहनत  के  जब  पैसा  आता  दीखता  है तो  अच्छे-अच्छे  लोगों  की  आँखें  चौंधिया  जाती  हैं  और  वो  अपने  तर्क  सांगत  दिमाग  की  ना  सुनकर  लालच  में  फँस  जाते  हैं .

जब  Speak Aisa आई  थी  तो  मुझे  भी  कई  लोगों  ने  इस  join करने  के  लिए  कहा  था , पर  मैंने  join नहीं  किया  क्योंकि  मैं  उनके  business model से  संतुष्ट  नहीं  हो  पाया . और  यकीन  जानिये  ज्यादातर  लोग  संतुष्ट  नहीं  हो  पाते  , जब  बहुत  आसानी  से  पैसा  आता  दीखता  है  तो  कहीं  ना  कहीं  आपके  अन्दर  से  आवाज़  आती  है  कि  कहीं  कुछ  गड़बड़  है , पर  हम  ये  सोच  के  पैसे  लगा  देते  हैं  की  अगर  company 6 महीने  और  नहीं  भागी   तो  भी  मेरा  पैसा  निकल  जायेगा .

कई  लोगों  का  पैसा  निकल  भी  जाता  है , पर  जहाँ  एक  आदमी  को  फायदा  होता  है  वहीँ  10 लोगों  का  नुकसान  भी  होता  है  यानि  यदि  आप  अपने  लाभ  के  लिए  किसी  ऐसी  company से  जुड़ते  हैं  तो  आप  कई  लोगों  का  नुकसान  भी  कराते हैं . और  अधिकतर  नुकसान  उठाने  वाले  लोग  आपके  करीबी  होते  हैं . इसलिए  कभी  भी  ऐसे  लुभावने  वादों  में  मत  आइये ; आप  पैसे  तो  गवाएंगे  ही  साथ  में  रिश्तों  में  भी  दरार  पड़  जायेगी .

तो  अब  जब  कभी  कोई  आपसे  बिना  मेहनत  के  पैसा  कमाने   की  बात  करे  आप  उसे  इस  Monkey Business की कहानी सुना  दीजिये  और  अपना  पल्ला  झाड  लीजिये :)

*Monkey Business means mischievous, suspect, dishonest, or meddlesome behaviour or acts

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नोट:- Post inspired by AKC (http://www.achhikhabar.com/). We are grateful to My dear friend Mr. Gopal Mishra & AKC for sharing this inspirational story in Hindi for http://kmsraj51.com/ readers.

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जीवन में सबसे बड़ी ख़ुशी तथा चुनाैती उस काम काे करने में है जिसे लाेग कहते हैं कि “तुम नहीं कर सकते”।

-पूज्य आचार्य श्री बाल कृष्ण जी महाराज

 

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The Creations Of The Mind

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT08

The Creations Of The Mind

Scientists have learned a lot about our physical functioning, but most admit that what actually keeps a human being alive is a mystery not completely solved. Rising above being just a product of chemical and electrical activity in the brain, as believed by many of us, spirituality orients me and trains me to come close to my real self, my spiritual self. Before I was a stranger to my own self, unaware of what is going inside my consciousness and distant from my own self. The first step in coming close to myself is that I learn to use the energy of my mind in the most effective way possible. For this, I decide to find a place where, each day, I can sit for a few minutes without interruptions, in order to focus on the self and explore the inner world of the creations of the mind – my thoughts, feelings, attitudes and emotions.

There has been a lot of conflicting views in the world about what the mind is and how it works. In the teachings of meditation by the Brahma Kumaris, the mind, which gives rise to my thoughts, feelings, attitudes and emotions, is seen as a faculty of the soul, not the body. It is rather like the difference between a television set and the movies seen on that set. The movies originate in the minds of the directors, not in the television set itself. The television set is just a medium for displaying the movies. So it is with all these four creations (thoughts, feelings, attitudes and emotions). These originate in the non-physical consciousness and not in the physical brain. The brain is just a processor of them and the body is a medium via which all four are displayed or brought onto expressions, physical gestures, words and actions. When I realize this, and really understand this difference, it very empowering. I am then able to use the power of discrimination to make choices between thoughts, feelings, attitudes and emotions that are useful and empowering for myself and others, and those that bring me down.

– Message –

Truth is effective when it is combined with tact.

Expression: I usually react when something goes wrong. In the heat of the moment I give corrections and others don’t seem to understand. Then I tend to become confused, as it is difficult to make a choice whether to leave the situation as it is or to prove my point to the others.

Experience: Unless truth is combined with tact I cannot make people realise their mistakes. When I find something going wrong, I need to wait for the right time for saying what I have to. I also need to tell it in a way that the other person can understand. Only then will my words have their impact on others.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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 -पूज्य आचार्य श्री बाल कृष्ण जी महाराज

 

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Saying Goodbye To Anger

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT04

Saying Goodbye To Anger 

‘I expect’ is the great illusion, which converts itself into demanding rights without due respect for others.

Anger in all its forms is a direct result of an expectation not being fulfilled and brings cries (although sometimes silent ones) of * They should have done this * Why did this happen? or * Don’t you know better? Disappointment, accusations and demands are violent energies, which we throw around very naturally and easily in our daily life when our expectations are not fulfilled. They are like a burning fire that eats away at our original spiritual qualities, turning them to a dust that pollutes the self and others.

Instead, let us continue to practise returning our thoughts to the self and remembering our original source of peace. In that experience of deep, natural peace, we will find balance and clarity and the ability to tolerate and adjust to the unexpected.

One of the keys of meditation practice is to quickly gather our thought energy and take it inside to connect to our original qualities, no matter what may be happening outside, or even inside!

Let me disconnect from the external and plug in to the internal energies that support me and then I will be able to say goodbye to anger very easily.

– Message –

The one with contentment is neither upset nor upsets others.

Expression: Many times I find that my words, actions or behaviour tends to upset others inspite of my not wanting to hurt them. I seem to be very happy with the situation, but others don’t seem to be. At that time I am not really able to understand the reason for this and I consider the others to be unreasonable.

Experience: I need to check myself when others are getting upset with me. I need to make effort to check and change myself constantly so that I am able to move along with the demands of time. This is what will bring about true contentment – such contentment that neither will I be upset nor will I upset others.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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जितना अध्ययन करते हैं, उतना ही हमें अपने अज्ञान का आभास होता जाता है।

-Kmsraj51

 

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Making Your Dream A Reality (Visualization)

Kmsraj51 की कलम से…..

अपना सपना सच (दृश्य) बनाना 

Making Your Dream A Reality (Visualization)

I relax my body… I let go of all tensions… I reduce the speed of my thoughts… I relax my mind, my thinking… I let go of what doesn’t let me be well…

What is it that I the soul truly long for? What do I want in my life?

I listen to the answer that arises from the inside of the self… I let the answer come out spontaneously… I don’t worry about it…

I visualize what I want and where I want to reach… Now I fly; I fly towards the destiny that I dream of… I visualize myself being what I want to be, doing what I want to do… Without fears, without strings that hold me… I am who I want to be… I see myself like that, having achieved it… I enjoy some moments of this experience… I experience my dream…

I can achieve my dream… I have to visualize it as if I had already achieved it… This strengthens my capacity to achieve it…

Now I return to the present moment… I prepare myself to enter into action with this conviction… I will make my dream a reality…

– Message –

The one who is a giver, has attention constantly on giving fully.Expression: When the system that I am working in doesn’t let me give maximum benefit to the people around me or deprives them of their natural right, I tend to react negatively. I tend to become upset which doesn’t help either of us in anyway.Experience: When I remember and maintain the awareness that I am a giver, instead of complaining about the restrictions that society or people around me impose I continue to give those around me something that will make them happy. This could be in the form of kind and supportive words or at least an understanding smile. When I give in this way, it will make others too free from negative thoughts.In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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kmsraj51 की कलम से …..

Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब)…..

“तू ना हो निराश कभी मन से”

CYMT-KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

खुद को साबित करने के लिए मौका मिलने के आप हकदार हैं। सफलता की नींव आप खुद हैं। 

दूसरे क्या सोच रहे हैं, इस बारे में अनुमान लगाते रहना नकारात्मक सोच की निशानी है।

-Kmsraj51

 

 

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The Three Root Causes Of Anger

Kmsraj51 की कलम से…..

क्रोध के तीन मूल कारण

The Three Root Causes Of Anger – Part – 1

Any time we sense irritation, frustration or anger emerging inside our consciousness, if we take a close look at it, we will notice we are fighting a war in our consciousness with one of these three: either with another person, most obviously or with the past or with our self.

We are at war with the past because our anger is always towards something that has already happened and looking at it we react emotionally which means we are trying to change it, which is impossible. Any scene that has taken place a year ago, a month ago or even a second ago cannot be changed. We may be completely convinced and we may believe we can. That’s because we hold this belief subconsciously. Somewhere and sometime in the past, we have picked up and absorbed the belief that the world and its circumstances should shape up exactly as we want.

When our internal desire of a certain type of circumstances is not fulfilled, or in other words something against this belief happens, our instant reaction is one of the various forms of anger and we tend to try and change the incidentthat has happened in a far-off past or a past that has just gone by. We keep replaying a revised incident, with words and actions that we would have liked and that suit our convenience and we also keep nullifying the actual incident or remain in a un-acceptance mode towards it. This is like fighting a war with the incident. We tend to do this inside our minds, repeatedly, even realizing somewhere deep within, that it is impossible.

– Message –

With the balance of love and discipline, energy can be saved while speaking. Expression: Throughout the day I find myself having to give explanations or corrections to so many people. When I do this I find that I have to spend a lot of words. In the process I tend to lose a lot of my energy and find myself tired.

Experience: In order to save my energy and to use fewer words I need to have the balance of love and discipline. Discipline will enable me to give the right directions while love will make my directions effective. So I find that just a few words would be enough to get my message across.

The Three Root Causes Of Anger – Part – 2

We are at a subtle war with another person when he/she has done something which we perceive or judge to be wrong and our anger is an attempt to change them or take revenge. This is the second belief (we had mentioned the first one in yesterday’s message) that is embedded very deeply in our consciousness that the world, including its entire people, should do exactly what we want them to, or what we think they should do. Perhaps we have not yet realized that it is impossible to control others and make them change. The lack of awareness and realization of this truth, which we will definitely realize at some point or the other, doesn’t let us become anger-free very easily. People will always make their own decisions and control their own actions, always. They can definitely be influenced, but they cannot be controlled. When our internal desire of a certain type of behavior from people is not fulfilled, or in other words something against the above belief happens, our instant reaction is one of resentment or irritation or frustration or hatred which are all forms of anger.

One of the most important attributes of a great soul is the ability to not have even a trace of desire for revenge inside and the ability to forgive someone who has supposedly wronged him in anyway. Don’t we all acknowledge that such an individual who has freed himself completely from all anger forms earns our and everyone else’s respect and deepest admiration, and we give him the medal of greatness inside our minds and even physically? So doesn’t that mean we intuitively know that this anger is an incorrect emotion and peace, good wishes and forgiveness are the correct ones, in harmony with the basic nature of the human spirit?

– Message –

Inner satisfaction brings creativity.

Expression: Quite often I find myself trying to keep pace with the things that I have always been doing. I seem to be caught up in the routine to the extent that I experience monotony. I then cannot think of any newness that I can bring in my life.

Experience: It is only with my inner satisfaction that can I bring creativity in my life. For this, while doing the routine jobs that I am involved in throughout the day, I need to make special effort to keep myself content with the things that are going on and also think of new ways of doing what I am already doing. Then I will never experience boredom in my life.

The Three Root Causes Of Anger – Part – 3

We are at war with our self when we fail to make the world do exactly what we want, or we believe we have let our self down. An e.g. of a war with one self is – Suppose you are standing in a queue waiting for your chance to arrive, only to discover an hour later, just when your chance is about to arrive, that the time for the counter to close has come and the counter has closed. You get upset, but with whom? Perhaps the person at the counter at first and may be with the other people in the queue and then with yourself, for not having found out the time of closing of the counter. There are two failures that make you uneasy here. First you failed to ask someone early enough, which would have saved you the hour time loss. Second, you failed to control your emotions of anger. Although you might not externally admit that you failed, inside you know. Because of these two failures, you then start to getangry with yourself. The thought pattern that goes inside your mind: to fail is to lose, to lose is to be sorrowful, to be sorrowful causes me to become angry, as you look for an external cause of your sadness which, in this case, is initially the person at the counter and the other people in the queue (who would have known the time of closing and could have told you). So you demonstrate to others your justified anger towards them. But deep inside you know it is you yourself that has made you sorrowful.

As the anger builds up inside you, again, after a while, you find someone else outside on whom you vent out your anger. You seem to feel better as a result, but it’s only temporary. The next time you become angry; interrupt the pattern of your anger by asking yourself two simple questions: Who are you fighting a war with? Answer: Yourself. Who is suffering the most due to the war? Answer: Yourself. And if your anger is directed at yourself for your own supposed failure then just tell yourself, “There is no such thing as failure, only a different result from the one that I expected and results are not going to be exactly as I want, expect or desire. That is a rule of the game of life.”

– Message –

To serve with the heart, with love is to guarantee success.

Expression: When I have to be of help to others, I sometimes find myself doing it with force. I don’t seem to be really interested in doing it but situations or people seem to be forcing me to do it. I then don’t enjoy what I do and also don’t find the benefit of it either to others or to myself.

Experience: I need to consciously make an effort to see what people are benefitting when I am helping them. With this conscious effort I am able to help others with love without feeling the heaviness of what I have to do. Thus I find my actions to be much more fruitful.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-Kmsraj51

Quotes by:-

“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब(ग्रंथ) से,

 

 

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Balance Between Masculine and Feminine Qualities

Kmsraj51 की कलम से…..

पुरुष और स्त्री गुणों के बीच बैलेंस

Balance Between Masculine and Feminine Qualities

These are some examples of masculine and feminine qualities:

Masculine
Logical, Verbal, Brave, Enthusiastic, Enterprising, Flexible, Creative, Responsible, Self-confident, Jovial, Detached

Feminine
Intuitive, Silent, Affectionate, Serene (Peaceful), Patient, Tolerant, Inspiring, Optimistic, Resistant, Mature, Sweet

Opening up to the spiritual consciousness (or the consciousness of the soul) makes the masculine and feminine qualities emerge from our inner selves. As we become more conscious and attentive, we come across a balance between masculine and feminine qualities, achieving greater harmony in our lives and in our relationships. When we are only aware of the physical form, a part of our being may remain hidden. For example, if a man only identifies with his masculine form (I am a man), his feminine qualities do not develop. In the same way, many women have not developed their masculine qualities due to the thought: “I am (only) a woman”. E.g. in a family where the father is often absent and cannot provide his support for long periods of time, the role of the mother takes on another broader dimension. She can make the masculine qualities emerge, combining authority and bravery with her more feminine aspects.

Addiction to relationships, in other words, the dependency on other people, is to a large extent due to an imbalance of masculine and feminine qualities in our inner selves. The main reason why this happens is that we do not develop the qualities that we are missing internally and we seek the company of others who have these qualities. We try to compensate for our weaknesses and fill our defects by taking what we are missing, from other people, thus becoming dependent on them.

– Message –

The power of silence makes the impossible achievable.

Expression: When I am faced with a difficult situation, my mind is flooded with thoughts. I also begin to talk about it a lot, describing the problem to all I meet. Then the problem looks so big that I feel I could do nothing to change it.

Experience: I need learn the art of silence(mental and verbal). Internal silence brings the right solutions because my mind is calm. And when I don’t describe the problem too much to people I will know there is a solution and I will be able to find it too.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

~KMSRAJ51

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

-KMSRAJ51 

Quotes by :-

“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से,

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-Kmsraj51

“तू ना हो निराश कभी मन से” 

विचारों की शक्ति से कुछ भी करना संभव है। मन जब शांत हाेगा, कुछ भी स्मरण रखना भी आसान हाेगा। मन शांत रहने से स्मरण शक्ति अतितीव्र हाे जाती हैं।

http://wp.me/p3gkW6-1dk

  1. मन के विचारों की शक्ति,
  2. कैसे मन के विचारों काे नियंत्रण में करें,
  3. मन के अंदर चलने वाले विचारों काे कैसे पढ़ें,

अब बहुत जल्द प्रकाशित हाेने वाला है…..

कृष्ण मोहन सिंह(Krishna Mohan Singh) द्वारा लिखित किताब,, 

“तू ना हो निराश कभी मन से” 

“मन के विचारों और शक्तियाें” पर लिखी गई एक अनमाेल ग्रंथ,, 

मन काे कैसे नियंत्रण में करें।

मन के विचारों काे कैसे नियंत्रित करें॥

विचारों के प्रकार-एक खुशी जीवन के लिए।

अपनी सोच काे हमेशा सकारात्मक कैसे रखें॥

“मन के बहुत सारे सवालाें का जवाब-आैर मन काे कैसे नियंत्रित कर उसे सहीं तरिके से संचालित कर शांतिमय जीवन जियें”

Thoughts: “तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से,,

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

खुद को साबित करने के लिए मौका मिलने के आप हकदार हैं। सफलता की नींव आप खुद हैं। 

दूसरे क्या सोच रहे हैं, इस बारे में अनुमान लगाते रहना नकारात्मक सोच की निशानी है।

 

 

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‘‘सच्चा शिष्य’’

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT08

‘‘सच्चा शिष्य’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

बहुत पुरानी बात है। एक विद्वान आचार्य थे। उनका एक गुरूकुल था।

प्राचीन काल में आचार्य विद्यार्थीयाें को निशुल्क शिक्षा दिया करते थे।

एक दिन आचार्य जी ने गुरूकुल के सारे विद्यार्थियों को अपने पास बुलाया और कहा-

‘‘प्रिय विद्यार्थियों मेरी कन्या विवाह योग्य हो गयी है। परन्तु इसका विवाह करने के लिए मेरे पास धन नही है। मेरी समझ में नही आ रहा है कि कैसे इसका विवाह करूँ।’’

कुछ विद्यार्थी जिनके माता-पिता धनवान थे।

उनसे बोले- ‘‘गुरू जी! हम लोग अपने माता‘पिता से कह कर आपको धन दिलवा देंगे।’’

आचार्य जी बोले- ‘‘शिष्यों! मुझे संकोच होता है, मैं लालची आचार्य नही कहाना चाहता।’’ फिर बोले कि मैं अपनी पुत्री का विवाह अपने शिष्यों के धन से ही करना चाहता हूँ। परन्तु ध्यान रहे कि तुममे से कोई भी धन माँग कर नही लायेगा। जो विद्यार्थी धनी परिवारों के नही थे उनसे आचार्य जी ने कहा कि तुम लोग भी अपने घरों से कुछ न कुछ ले आना परन्तु किसी को पता नही लगना चाहिए और उस वस्तु पर किसी की दृष्टि भी नही पड़नी चाहिए।”

कुछ ही दिनों में आचार्य जी के पास पर्याप्त धन व वस्तुएँ एकत्रित हो गयी।

तभी आचार्य जी के पास एक अत्यन्त धनी परिवार का शिष्य आकर बोला-

‘‘आचार्य जी मेरे घर में किसी प्रकार की कमी नही है, परन्तु मैं आपके लिए कुछ भी नही ला पाया हूँ।’’

आचार्य जी बोले- ‘‘ क्यों ? क्या तुम गुरू की सेवा नही करना चाहते हो?’’

शिष्य ने उत्तर दिया- ‘‘नही गुरू जी! ऐसी बात नही है। आपने ही तो कहा था कि कोई वस्तु या धन लाते हुए किसी को पता नही लगना चाहिए और उस वस्तु पर किसी की दृष्टि भी नही पड़नी चाहिए। मुझे वह स्थान नही मिला, जहाँ कोई देख न रहा हो।’’

आचार्य जी बोले- ‘‘तुम झूठ बोलते हो। कहीं तो कोई ऐसा समय व स्थान रहा होगा जब तुम्हें कोई देख नही रहा होगा।’’

शिष्य आँखों में आँसू भर कर बोला- ‘‘गुरू जी! ऐसा समय व स्थान तो अवश्य मिला परन्तु मैं भी तो उस समय अपने इस कृत्य को देख रहा था।’’

आचार्य जी ने उस शिष्य को गले से लगा लिया और बोले-

‘‘तू ही मेरा सच्चा शिष्य है। मुझे अपनी कन्या के लिए विवाह के लिए धन की आवश्यकता नही थी। मैं तो उसके वर के रूप में तेरे जैसा ही सदाचारी वर खोज रहा था।’’

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

We are grateful to DR. Rupcndra Shastri ‘Mayank Ji for sharing this very inspirational Hindi story with KMSRAJ51 readers.

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

DR. Rupcndra Shastri ‘Mayank` Blog:- http://powerofhydro.blogspot.in/

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“सपने देखना बेहद जरुरी है, लेकिन केवल सपने देखकर ही मंजिल को हासिल नहीं किया जा सकता,
सबसे ज्यादा जरुरी है जिंदगी में खुद के लिए कोई लक्ष्य तय करना|”

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