The Subtle Role Play Of Thoughts And Images

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

-KMSRAJ51



The Subtle Role Play Of Thoughts And Images

The human soul is a subtle (non-physical) stage on which a subtle role play of thoughts and images constantly takes place throughout the day and even while sleeping. We have explained in our older messages how thoughts are of 4 main different types – positive which are based on virtues, necessary related to day-to-day activities, waste which are mainly unnecessary and related to the past and future and negative which are related to vices and other weaknesses. In the same way, we also constantly create images or scenes, which are of the same 4 types, which is why we commonly use the term ‘the eye of the mind’. The mind not only thinks or speaks subtly but visualizes or sees subtly too, almost all the time.
These two processes function, sometimes independent of each other as well as sometimes dependent on each other i.e. influencing each other e.g. think of peace and that leads to visualizations related to the same. Visualize an unpleasant scene of anger and hatred, and your thoughts are led in that direction. Sometimes these two processes function at the same time and sometimes one at a time. Sometimes neither functions at all, which happens much more frequently while sleeping as compared to when we are awake. This subtle, physically invisible role play is the foundation of the physical role play of words and actions that is visible to the self and everyone else around you.

 

What the quality of a soul’s thoughts and images (or scenes) that it creates, depends on the soul’s sanskaras. Depending on the quality, the soul experiences the various different emotions, whether positive or negative. When the soul first incarnates on the physical world stage from the soul world, the quality of this role play of thoughts and images is high, pure and positive, hence it experiences only positive emotions. As it plays its different roles and comes down in the birth-rebirth cycle, this quality reduces, leading to the experience of emotions like sorrow, peacelessness, etc.
A point worth noting is that the key to any deep emotional experience, whether positive or negative is the creation of thoughts as well as images related to that particular emotion at the same time e.g. think and visualize at the same time, the death of a close relative that took place ten years ago and you immediately have a deep experience of sorrow. Think and visualize together, a loving hug of your mother that took place in your childhood, and you immediately experience deep happiness. This type of co-ordination between these two subtle processes is true concentration. The key to any type of spiritual upliftment is the upliftment of these two processes. The meditation that is taught at the Brahma Kumaris is nothing but a spiritual thought process accompanied by a spiritual visualization process, whereby thoughts and images of the subtle, spiritual self (or soul) and the Supreme Being (or Supreme Soul) are created together to experience the original qualities of the spiritual self and the eternal qualities of the Supreme Being – purity, peace, love, happiness and power.

 

brahmakumaris-kmsraj51In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

 



 

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जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

-Kmsraj51

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सूफी संत ज़ुन्नुन से जुड़ा प्रसंग।

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सूफी संत ज़ुन्नुन से जुड़ा प्रसंग

बहुत पुरानी बात है. मिस्र देश में एक सूफी संत रहते थे जिनका नाम ज़ुन्नुन था. एक नौजवान ने उनके पास आकर पूछा, “मुझे समझ में नहीं आता कि आप जैसे लोग सिर्फ एक चोगा ही क्यों पहने रहते हैं!? बदलते वक़्त के साथ यह ज़रूरी है कि लोग ऐसे लिबास पहनें जिनसे उनकी शख्सियत सबसे अलहदा दिखे और देखनेवाले वाहवाही करें”.

ज़ुन्नुन मुस्कुराये और अपनी उंगली से एक अंगूठी निकालकर बोले, “बेटे, मैं तुम्हारे सवाल का जवाब ज़रूर दूंगा लेकिन पहले तुम मेरा एक काम करो. इस अंगूठी को सामने बाज़ार में एक अशर्फी में बेचकर दिखाओ”.
नौजवान ने ज़ुन्नुन की सीधी-सादी सी दिखनेवाली अंगूठी को देखकर मन ही मन कहा, “इस अंगूठी के लिए सोने की एक अशर्फी!? इसे तो कोई चांदी के एक दीनार में भी नहीं खरीदेगा!”
“कोशिश करके देखो, शायद तुम्हें वाकई कोई खरीददार मिल जाए”, ज़ुन्नुन ने कहा.
नौजवान तुरत ही बाज़ार को रवाना हो गया. उसने वह अंगूठी बहुत से सौदागरों, परचूनियों, साहूकारों, यहाँ तक कि हज्जाम और कसाई को भी दिखाई पर उनमें से कोई भी उस अंगूठी के लिए एक अशर्फी देने को तैयार नहीं हुआ. हारकर उसने ज़ुन्नुन को जा कहा, “कोई भी इसके लिए चांदी के एक दीनार से ज्यादा रकम देने के लिए तैयार नहीं है”.

ज़ुन्नुन ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तुम इस सड़क के पीछे सुनार की दुकान पर जाकर उसे यह अंगूठी दिखाओ. लेकिन तुम उसे अपना मोल मत बताया, बस यही देखना कि वह इसकी क्या कीमत लगाता है”.
नौजवान बताई गयी दुकान तक गया और वहां से लौटते वक़्त उसके चेहरे पर कुछ और ही बयाँ हो रहा था. उसने ज़ुन्नुन से कहा, “आप सही थे. बाज़ार में किसी को भी इस अंगूठी की सही कीमत का अंदाजा नहीं है. सुनार ने इस अंगूठी के लिए सोने की एक हज़ार अशर्फियों की पेशकश की है. यह तो आपकी माँगी कीमत से भी हज़ार गुना है!”

ज़ुन्नुन ने मुस्कुराते हुए कहा, “और वही तुम्हारे सवाल का जवाब है. किसी भी इन्सान की कीमत उसके लिबास से नहीं आंको, नहीं तो तुम बाज़ार के उन सौदागरों की मानिंद बेशकीमती नगीनों से हाथ धो बैठोगे. अगर तुम उस सुनार की आँखों से चीज़ों को परखने लगोगे तो तुम्हें मिट्टी और पत्थरों में सोना और जवाहरात दिखाई देंगे. इसके लिए तुम्हें दुनियावी नज़र पर पर्दा डालना होगा और दिल की निगाह से देखने की कोशिश करनी होगी. बाहरी दिखावे और बयानबाजी के परे देखो, तुम्हें हर तरफ हीरे-मोती ही दिखेंगे”.

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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सकारात्मक सोच का जादू।

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सकारात्मक सोच का जादू 

सकारात्मक सोच का जादू

सकारात्मक सोच का जादू

एक ऋषि के दो शिष्य थे। जिनमें से एक शिष्य सकारात्मक सोच वाला था वह हमेशा दूसरों की भलाई का सोचता था और दूसरा बहुत नकारात्मक सोच रखता था और स्वभाव से बहुत क्रोधी भी था। एक दिन महात्मा जी अपने दोनों शिष्यों की परीक्षा लेने के लिए उनको जंगल में ले गये।
जंगल में एक आम का पेड़ था जिस पर बहुत सारे खट्टे और मीठे आम लटके हुए थे। ऋषि ने पेड़ की ओर देखा और शिष्यों से कहा की इस पेड़ को ध्यान से देखो।फिर उन्होंने पहले शिष्य से पूछा की तुम्हें क्या दिखाई देता है।

शिष्य ने कहा कि ये पेड़ बहुत ही विनम्र है लोग इसको पत्थर मारते हैं फिर भी ये बिना कुछ कहे फल देता है। इसी तरह इंसान को भी होना चाहिए, कितनी भी परेशानी हो विनम्रता और त्याग की भावना नहीं छोड़नी चाहिए। फिर दूसरे शिष्या से पूछा कि तुम क्या देखते हो, उसने क्रोधित होते हुए कहा की ये पेड़ बहुत धूर्त है बिना पत्थर मारे ये कभी फल नहीं देता इससे फल लेने के लिए इसे मारना ही पड़ेगा।

इसी तरह मनुष्य को भी अपने मतलब की चीज़ें दूसरों से छीन लेनी चाहिए। गुरु जी हँसते हुए पहले शिष्य की बढ़ाई की और दूसरे शिष्य से भी उससे सीख लेने के लिए कहा। सकारात्मक सोच हमारे जीवन पर बहुत गहरा असर डालती है। नकारात्मक सोच के व्यक्ति अच्छी चीज़ों मे भी बुराई ही ढूंढते हैं।

उदाहरण के लिए:- गुलाब के फूल को काँटों से घिरा देखकर नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति सोचता है की “इस फूल की इतनी खूबसूरती का क्या फ़ायदा इतना सुंदर होने पर भी ये काँटों से घिरा है ” जबकि उसी फूल को देखकर सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति बोलता है की “वाह! प्रकर्ती का कितना सुंदर कार्य है की इतने काँटों के बीच भी इतना सुंदर फूल खिला दिया” बात एक ही है लेकिन फ़र्क है केवल सोच का।

तो मित्रों, अपनी सोच को सकारात्मक और बड़ा बनाइए तभी हम अपने जीवन में कुछ कर सकते हैं।

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सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र।

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Positive thinking is the success mantra of life.

क्या आपके पास कोई ऐसा हुनर है जो औरों से अलग है? अगर आपको लगता है “नहीं” तो आप बिल्कुल गलत हैं। क्योंकि हर इंसान को भगवान ने बनाया है और सबके पास कोई ना कोई ऐसा हुनर है जो औरों से अलग है। आमतौर पर लोग ये कहते हैं कि “हमने तो पूरी कोशिश कि पर काम नही हुआ”, दरअसल अगर आप पूरी कोशिश करेंगे तो आप असफल होंगे ही नहीं। सपने हर कोई देखता है पर पूरा हर कोई नहीं कर पाता,,,, जानते हैं क्‍यों? क्योंकि कुछ लोग बस देखते हैं, सोचते हैं और जरा सी विषम परिस्थितियां आ गयी तो उनके सपने उन्ही की तरह टूट जाते हैं। अगर आपको अपने सपनों को वाकई में पूरा करना है, तो आपको हर पल उसे ही सोचना होगा और उसे पाने के लिये हर प्रयास करना होगा। किसी ने कहा है कि “एक सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति अदृश्य को देख लेता है, अमूर्त को महसूस करता है, और असंभव को पा लेता है।” डार्विन पी. किन्सले ने कहा है कि, “यह सोचने के बजाये कि आप क्या खो रहे हैं, ये सोचने का प्रयास करें कि आपके पास ऐसा क्या है, जो बाकी सभी लोग खो रहे हैं। क्‍योंकि एक बार जब आप नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों से बदल देंगे तो आपको सकारात्मक नतीजे मिलना शुरू हो जायेंगे।” सकारात्‍मक सोच को अगर वास्‍तु से जोड़ कर देखें तो इसका सीधा तात्‍पर्य सकारात्‍मक ऊर्जा से है। वास्‍तु के मुताबिक जिस घर में ज्‍यादा प्राकृतिक रौशनी आती है, कोने साफ सुथरे रहते हैं, घर के दरवाजे पर कोई गंदगी नहीं होती, बेडरूम चमकता रहता है, पढ़ाई का कमरा ज्‍यादा प्रकाश वाला होता है और टॉयलेट मुख्‍य द्वार के ठीक सामने नहीं होता वहां पॉजिटिव एनर्जी वास करती है यानी सकारात्‍मक ऊर्जा उस घर में सदैव बनी रहती है। ऐसे घरों में लोग खुश रहते हैं और जल्‍दी बीमार नहीं पड़ते। साथ में ढेर सारी लक्ष्‍मी आती है। इसी प्रकार जिस मस्तिष्‍क में सकारात्‍मक सोच भरी होती है, जो लोग हमेशा सकारात्‍मक दृष्टि से सोचते हैं, उनका दिमाग हमेशा खुला रहता है और वे ज्‍यादा खुश रहते हैं। खुश रहने की वजह से उनके अंदर आंतरिक शांति बनी रहती है। परिवार या दोस्‍तों के बीच उनके संबंध हमेशा मधुर होते हैं। ऐसे लोग ज्‍यादा तनाव नहीं लेते, लिहाजा वे जल्‍दी बीमार नहीं पड़ते, वे खुद से संतुष्‍ट रहते हैं और दूसरों के लिए हमेशा आगे से आगे रहते हैं। ऐसे लोगों के जीवन में कम से कम रुकावटें आती हैं। करियर की बात करें तो सकारात्‍मक ऊर्जा से भरपूर लोगों का करियर या भविष्‍य हमेशा उज्‍जवल होता है।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51