Q. A. W. – KMSRAJ51 – Ep.- 12th / 18-June-2017

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ Q. A. W. ~ KMSRAJ51 ϒ

ओम गंग गणपतये नमः 

श्री गणेश मंत्र ~

ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभं।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

रविवार, 18-जून-2017

Q. 1 .⇒  जीवन मैं कैसी भी परिस्थिति हो “अपने मन को सदैव ही कैसे अचल-अडोल स्थिति में रखें” ?
या
अपने Mind को कैसे अचल-अडोल स्थिती में रखें” ?

  या      अपने मन को अचल-अडोल स्थिति में रखने के लिए कैसे अभ्यास करें। ?
-कनिका शर्मा, मुंबई, (महाराष्ट्र)

                                                                                                         -सूर्य प्रताप सिंह, ग्वालियर, (मध्य प्रदेश)

A. 1 .⇒ एक बात सदैव ही – याद रखें …..

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
of,,  https://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

———– © Best of Luck ® ———–

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

* क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

 

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Q. A. W. – KMSRAJ51 – Ep.- 10th / 04-June-2017

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ Q. A. W. ~ KMSRAJ51 ϒ

ओम गंग गणपतये नमः 

श्री गणेश मंत्र ~

ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभं।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

रविवार, 04-जून-2017

Q. 1 .⇒  जीवन मैं कैसी भी परिस्थिति हो “अपने मन को सदैव ही कैसे अचल-अडोल स्थिति में रखें” ?
या
अपने Mind को कैसे अचल-अडोल स्थिती में रखें” ?

  या      अपने मन को अचल-अडोल स्थिति में रखने के लिए कैसे अभ्यास करें। ?
-कनिका शर्मा, मुंबई, (महाराष्ट्र)

                                                                                                         -सूर्य प्रताप सिंह, ग्वालियर, (मध्य प्रदेश)

A. 1 .⇒ एक बात सदैव ही – याद रखें …..

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

 

Q. A. W. – KMSRAJ51 – Ep.- 9th / 28-May-2017

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ओम गंग गणपतये नमः 

श्री गणेश मंत्र ~

ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभं।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

रविवार, 28 मई – 2017

Q. 1 .⇒  जीवन मैं कैसी भी परिस्थिति हो “अपने मन को सदैव ही कैसे अचल-अडोल स्थिति में रखें” ?
                                                                  या
            अपने Mind को कैसे अचल-अडोल स्थिती में रखें” ?

  या      अपने मन को अचल-अडोल स्थिति में रखने के लिए कैसे अभ्यास करें। ?
                                                                                                         -कनिका शर्मा, मुंबई, (महाराष्ट्र)

                                                                                                         -सूर्य प्रताप सिंह, ग्वालियर, (मध्य प्रदेश)

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

 

Q. A. W. – KMSRAJ51 – Ep.- 5th / 30-April-2017

Kmsraj51 की कलम से…..

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ओम गंग गणपतये नमः 

श्री गणेश मंत्र ~

ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभं।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

रविवार, 30 अप्रैल – 2017

Q. 1 .⇒  जीवन मैं कैसी भी परिस्थिति हो “अपने मन को सदैव ही कैसे अचल-अडोल स्थिति में रखें” ?
                                                                  या
            अपने Mind को कैसे अचल-अडोल स्थिती में रखें” ?

  या      अपने मन को अचल-अडोल स्थिति में रखने के लिए कैसे अभ्यास करें। ?
                                                                                                         -कनिका शर्मा, मुंबई, (महाराष्ट्र)

                                                                                                         -सूर्य प्रताप सिंह, ग्वालियर, (मध्य प्रदेश)

A. 1 .⇒ एक बात सदैव ही – याद रखें ….. 

अशांत मन उचित निर्णय लेने की क्षमता काे खत्म(खाे) कर देता हैं।
~Kmsraj51

मन को शांत रखने के लिए आपको अपना दैनिक लाइफ रूटीन चेंज करना होगा। अपने बुरे(खराब) हैबिट्स को छोड़ना होगा, उनकी जगह अच्छी हैबिट्स को डालना होगा – तब जाकर आप अपने मन को अचल-अडोल स्थिति में स्थित करने की ओर अग्रसर होंगे।

अपने Mind को कुछ इस तरह से खुराक दें –

♥ मन को अचल-अडोल स्थिती मैं स्थित करने के लिए सर्वप्रथम अपने मन को फालतू विचारो से मुक्त करना होगा अर्थात अपने मन से फालतु विचारो का कचरा हटाना होगा, तभी आप अपने मन के अंदर अच्छे विचारो को स्थित कर पाएंगे।

♥ सर्वप्रथम अपने मन को शांत रखना होगा। तब जाकर आप अपने मन के अंदर अच्छे विचारो को स्थित कर पाएंगे। जब मन शांत होगा तभी मन के अंदर अच्छे विचार अपना परमानेंट जगह बना पाएंगे।

♥ एक दिन में मन शांत नहीं होगा, मन को शांत करने के लिए ध्यान को जीवन में अपनाना होगा अर्थात ध्यान को अपने जीवन का महत्वपूर्ण अंग बनाना होगा, तभी आप ध्यान के लम्बे समय के अभ्यास से अपने मन को शांत रखने में सफल हो पाएंगे।

 

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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Q. A. W. – KMSRAJ51 – Ep.- 4th / 23-April-2017

Kmsraj51 की कलम से…..

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ओम गंग गणपतये नमः 

श्री गणेश मंत्र ~

ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभं।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

रविवार, 23 अप्रैल – विश्व पुस्तक दिवस 2017

Sunday, 23 April – World Book Day 2017

मेरे प्यारे दोस्तों और पाठकों –
आज – विश्व पुस्तक दिवस है – “इस संसार में सिर्फ किताबें ही किसी भी इंसान के सच्चे मित्र(दोस्त) हैं, जाे सदैव ही निस्वार्थ भाव से सिर्फ लाभ ही पहुचाती है, बिना किसी भेदभाव के” ….. KMSRAJ51

Q. 1 .⇒  क्या करें, जब कोई हमारे सपनों (dreams) काे तोड़ता हैं ?
                                                                  या
            अपने Mind को कैसे Control करें, जब अपने ही हमारे सपनों (Dreams) को ताेड़ते हैं ?

  या      अपने सपनों (Dreams) के जुनून (आग) को कैसे बरकरार रखें ?
                                                                                                         -मनीषा अग्निहोत्री, गोवा

                                                                                                         -प्रियंका पांडे, हाथरस (उत्तर प्रदेश)

A. 1 .⇒ एक बात सदैव ही – याद रखें ….. 

“”ये समाज कभी न छोड़े आपको।”

“The society will never leave you.

यह बिल्कुल सत्य है कि हमारे सपनों (Dreams) को सबसे ज्यादा अपने ही ताेड़ते हैं ? जान-पहचान के लाेग व रिश्तेदार ताे ताेड़ते की कोशिश (प्रयत्न) करते ही है, लेकिन सबसे ज्यादा – हमारे अपने ही हमारे सपनों (Dreams) को ताेड़ते हैं ?

  • जब भी कभी आपके सपनों को तोड़ने वाली बातें कोई भी कहे आपसे उसे (उस बात काे) अपने Mind के अंदर प्रवेश
    न करने दे, अर्थात – सुनते हुए भी अनसुना कर दें।
  • अपने सपनों (Dreams) की आग को अपने अंदर सदैव ही जलाये रखें। इस आग को कभी भी बुझने न दें।
  • अपने सपनों (Dreams) काे प्राप्त करने के लिए संपूर्ण रूप से, सच्चे मन से आपकाे – तन, मन व धन, से लग जाने पर ही प्राप्त हाेगा, आपका अपना Dreams.
  • किसी के सपनों को तोड़ना महापाप है। अगर आप किसी को प्रोत्साहित नहीं कर सकते तो – कम से कम उनके सपनों को तो न तोड़े।
  • अगर आपको अपने व अपने कार्य के ऊपर संपूर्ण विश्वास हैं ताे – आपके सारे सपनें अवश्य पुरें हाेगें। बस लगातार सच्चे तन, मन व धन, से लगे रहें अपने कार्य काे करने में।

काैन कहता है – कि आपके सपनें सच नहीं हाे सकते।
सच्चे मन से अपने सपनों को पाने के लिए आगे ताे बढ़ाें॥

आगे रास्ते ख़ुद-ब-ख़ुद बनते चले जायेगे – अर्थांत प्रकृति भी आपकी मदद(Help) करने लगती है। प्रकृति आपकाे आपके लक्ष्य तक पहुंचाने में सदैव ही मदद करती हैं।

अपने अवचेतन मन व चेतन मन दाेनाे काे बहुत ही ज्यादा शांत रखने की कोशिश करें। जब आपका मन पूर्ण शांत हाेगा – तभी आपकी आंतरिक(अंदरूनी) ऊर्जा बाहर निकलेगी और आप अपने सपनों(Dreams) काे सरलता पूर्वक प्राप्त कर लेगें।

चाहे अपने हाे या काेई बाहर का व्यक्ति जब भी आपके सपनों काे ताेड़ने वाली बातें आपसे करें, उनकी बातों पर जरा भी ध्यान न दें। याद रखें कि – उनकी बातें सिर्फ कचरा हैं, कचरे को अपने Mind में प्रवेश न करने दें, नहीं ताे सब कचरा-कचरा हाे जायेगा।

“कभी मैदान न छोड़े” – समस्याएं जीवन का हिस्सा है। जब तक हमें इस धरती पर रहने का सौभाग्य मिला है, हमें उन बाधाओं और चुनौतियों के साथ लगातार जूझने की कीमत चुकाना हाेगा।

जो जिंदगी हमारे सामने पेश करती है। बहरहाल अगर हम सिर्फ लगन से काम करे तो हम जित सकते है। “कभी हार न माने!”

अक्सर लक्ष्य उससे अधिक करीब होता है जो अशक्त और लड़खड़ाते आदमी को नज़र आता है। अक्सर संघर्ष करने वाला व्यक्ति हार मान लेता है, जब वह विजेता का कप जित सकता था, और उसे यह बहुत देर बाद पता चलता है, कि वह सोने के ताज के कितने करीब था।

सफलता विफलता का ही उल्टा रूप है, शंका के बदलो की सुनहरी किनारी है और आप कभी नही बता सकते की आप कितने करीब है। जब यह दूर दिखती है तो यह पास भी हो सकती है।

इसलिए जब आपको सबसे ज्यादा चोट पहुंचे तो जूझते रहे, जब चीजे ख़राब दिख रही हो – तो कभी भी मैदान न छोड़े।

एक पुरानी कहावत है कि “विजेता कभी मैदान नही छोड़ते और मैदान छोड़ने वाले कभी नही जीतते।” महान बनने के लिए आपको लगनशील बनना होगा और अपने सपनों को साकार करने की राह में कभी हार नहीं मानना।

याद रखे – जब आप हारते है, तो जीवन ख़त्म नहीं होता। जीवन तब ख़त्म होता है, जब आप मैदान छोड़ देते हैं।

याद रखे – अगर आप किसी काम का सपना देख सकते है तो आप उसे कर सकते हैं। आपको एक बेहतरीन दिन मुबारक हों।

मैंने पाया है कि महानता की सच्ची परिभाषा हैं : जब साधारण लोग असाधारण काम करें, लगातार जुटे रहे और हार मानने से इंकार कर दें। लगन हर कमी और सीमा की भरपाई कर देती हैं, जो आम तौर पर लोगो को अपने सपनों का पीछा करने से रोकती हैं। लगन वो पूंजी है – कर्म का वह कदम हैं, जो आपके सपनों को हकीकत में बदलता हैं। संकल्प एक नजरिया है, परन्तु लगन एक कर्म हैं। “कभी हार न मानने का कर्म।”

Q. 2 .⇒  अपने संकीर्ण सोच को विस्तार कैसे दें ?  या
                                         अपनी छोटी सोच को हम कैसे बड़ी करें ?  या
अपनी सकारात्मक सोच को कर्म में कैसे बदले ?  या
                                       अपने बड़े सोच को कर्म में कैसे लागू करें ?

                                                 रवि रंजन शुक्ला, सूरत (गुजरात) भूमिका गांगुली, कोलकाता (पश्चिम बंगाल),
                                                     ♦ नवनीत गुप्ता, पटना (बिहार),  निकिता शर्मा, नोएडा (उत्तर प्रदेश)

A. 2 .⇒  इस

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 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

 

Q. A. W. – KMSRAJ51 – Ep.- 2st / 09-April-2017

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ओम गंग गणपतये नमः 

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ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभं।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

Q. 1 . ⇒ चिन्ता मुक्त कैसे हो ?
                           या
               चिन्ता से बाहर कैसे निकले ?     या
               चिन्ता मुक्त होने का सहज formula क्या हैं ?
                                                                      -सपना राजवंशी, जयपुर (राजस्थान)
                                                                            -नेहा कपूर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र)

A. 1 . ⇒ सबसे पहले यह समझ ले कि चिंता क्यों होती हैं ? चिंता का मुख्य कारण है only अपनी कमजोरियों को देखना। आज की पीढ़ी की सबसे बड़ी problem है कि वह only अपनी कमजोरियों को देखते है। चिन्ता करना किसी भी problem का solution (समाधान) नहीं। कभी भी चिन्ता करने से काेई काम अच्छा नहीं हाेता। चिन्ता मुक्त बनने के लिए आपकाे सर्वप्रथम स्वयं पर व स्वयं के आंतरिक स्ट्रांग Power काे समझना और उस पर पूर्ण विश्वास करना हाेगा। अपने स्ट्रांग Power की एक लिस्ट तैयार करें। 

अपने स्ट्रांग  Power की लिस्ट में वह सबकुछ शामिल करें, जिसमें आप बेस्ट हैं। सदैव ही अपने स्ट्रांग Power के बारे में ही सोचे। जितना ज्यादा हो सके, अपने आपको अच्छे कार्यों में व्यस्त रखें।

“प्रकृति का एक बहुत ही कारगर नियम है, यदि मिट्टी में काेई बीज न बाेया जाये ताे प्रकृति उस मिट्टी काे घास-फूस से भर देती है।”

बिल्कुल यही नियम इंसान के दिमाग पर भी लागू होता हैं। अगर इंसान का दिमाग व मन अच्छे विचाराें से नहीं भरा जाये ताे उसमें नकारात्मक विचार स्वचालित रूप से अपना जगह बना लेते है और इंसान चिंताग्रस्त हाे जाता है। एक कहावत भी है –

“खाली मन शैतान का घर हाेता है।”

अच्छे works में जब अपने आपकाे busy रखेगें ताे, फालतू विचार साेचने का time ही नहीं हाेगा। “जहा तक हाे सके सदैव ही अपने मन काे अच्छे विचाराें से भरें।”

अपना संग सकारात्मक लोगों के साथ रखें। ऐसे लोगों से दोस्ती रखें जो सदैव ही सकारात्मक सोचते है। नकारात्मक सोच रखने वालों से जितना हो सके दूरी बनाकर रखें।

दोस्तों – एक कहावत है –

“एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है।”

जरुरत है उस गंदी मछली काे तालाब से बाहर निकालने की। न कि तालाब काे बार-बार साफ करने की। ठिक इसी तरह अगर आपका दोस्ताना नकारात्मक साेच रखने वालाे से है ताे, … “जरुरत है कि उनसे दूरी बना ले, न कि उन्हें बार-बार समझाने कि काेशिश करें।”

  • सदैव अपना दोस्ताना – सकारात्मक सोच रखने वालों से करें।
  • अपनी सोच व कर्म को सदैव ही सकारात्मक रखें।
  • सदैव अपने internal स्ट्रांग power काे देखें।
  • Life में एक बार जो गलती हो जाए उसे दूबारा रिवाइज न करें।
  • जीवन भर अपने पढ़ने व सीखने की आदत काे बनाये रखें। अर्थांत – इंसान काे सदैव ही सीखने के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
  • याद रखें – कभी भी काेई ज्ञान बुरा नहीं हाेता, हा इंसान बुरे हाे सकते हैं(अपने बुरे कर्माें कि वजह से)।
  • “इस संसार में ज्ञान के जितने भी स्रोत है या जितने भी ज्ञान के भंड़ार available है, सब अच्छें कार्याें के लिए है।”
  • वह ताे शैतानी(राक्षसी) साेच रखने वाले इंसानाे द्वारा गलत इस्तेमाल की वजह से लोगों काे समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • चिन्ता मुक्त होने के लिए मन काे शांत रखें। मन काे शांत रखने का तरिका है – मैडिटेशन(ध्यान), व सत्य का ज्ञान। अपने स्व शक्तियों का ज्ञान। मन काे शांत रखने के लिए, जीवन में ज्ञान व ध्यान का हाेना बहुत जरूरी हैं।

अशांत मन उचित निर्णय लेने की क्षमता काे खत्म(खाे) कर देता हैं।
~Kmsraj51

Q. 2 . ⇒  क्या इंसान का पुनर्जन्म इंसान के रूप में ही होता हैं या किसी अन्य योनि में?     `या`
            क्या काेई भी Soul(आत्मा) सदैव ही पुरुष शरीर और स्त्री शरीर काे ही धारण करती है, या कभी पुरुषकभी स्त्री शरीर ?                                                           `या`
            क्या काेई भी आत्मा जन्म और मृत्यु के चक्र से सदैव के लिए मुक्त हाे जाती हैं ?     `या`
            इंसान काे उसके कर्माें का भाेगदंड़ उसके इसी जन्म में मिलता है या अन्य जन्म में भी कर्माें का भाेगदंड़ मिलता है ?
                                                                                               -मधु शर्मा, देहरादून – (उत्तराखंड)
                                                                                                -स्मिता सिंह राजपूत, बिकानेर – (राजस्थान)
                                                                                                -स्नेहा घोष, कोलकाता – (पश्चिम बंगाल)
                                                                                                -आशीष पुरी, पुरी – (ओडिशा)

A. 2 . ⇒  इंसान सदैव ही इंसान के रूप में ही जन्म लेता हैं, कभी भी किसी अन्य योनि में उसका जन्म नहीं हाेता। “पूरे विश्व में आजतक जितने भी Rebirth के वास्तविक केस के रिसर्च सामने आये है, एक भी ऐसी आत्मा(soul) नहीं जिनका किसी अन्य योनि में जन्म हुँआ हाे। इस बात काे अब Science(विज्ञान) भी – प्रूफ कर चुकी हैं।”

  • जरा गहराई से साेचे “यदि किसी आत्मा काे अपने कर्माें का भाेगदंड़ भाेगने के लिए, किसी अन्य योनि में जन्म लेना हाेता ताे फिर – जब कोई बच्चा गर्भ में ही मर जाता है ताे, जन्म लेने से पहले ही ऐसा काैन सा बुरा कर्म कर दिया जाे गर्भ में ही मर गया।
  • क्यों कोई बच्चा जन्म से ही गर्भ में ही अंधा, बहरा, गुगां, लंगड़ा या शारीरिक रूप से पूर्ण विकलांग हाेता है ताे,  जन्म लेने से पहले ही या जन्मते ही ऐसा काैन सा पाप कर्म कर दिया जाे उसे ऐसी सजा मिली।

“जबकी सभी के बीच एक झूठा भ्रम पैदा कर दिया गया है कि बहुत ही सत्यकर्माें या अच्छें कर्माें के बाद ही मनुष्य तन मिलता हैं।”

  • मनुष्य सदैव ही मनुष्य तन में ही जन्म लेता हैं। जन्मते ही किसी भी बच्चे ने काेई बुरा कर्म नहीं किया, जिसकी वजह से वह जन्म से ही अंधा, बहरा, गुगां, लंगड़ा इत्यादि हुआ। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उसने पिछले जन्म में कर्म(बुरे कर्म) किए थे। जिसकी वजह से उसका ऐसा जन्म हुआ, या जन्म लेने से पहले ही मर गया।
  • किसी भी मनुष्य की आत्मा में सदैव ही तीन सूक्ष्म शक्तियाँ निहित हाेती हैं। जो सदैव ही आत्मा के साथ पुनर्जन्म होने पर भी साथ ही जाती हैं। वह तीन सूक्ष्म शक्तियाँ हैं मन, बुद्धि व संस्कार।
  • मन सोचने का कार्य करता हैं।
  • बुद्धि निर्णय करने का कार्य करता हैं।
  • मन के द्वारा साेचे जाने के बाद बुद्धि जाे निर्णय लेती हैं, शरीर कि कर्मेंद्रिया उसी तरह कर्म करती है, और कर्मेंद्रियाें द्वारा जाे कर्म हाेता है वही संस्कार के रूप में आत्मा के अंदर रिकॉर्ड हाेता रहता हैं। इसी रिकॉर्ड काे संस्कार कहते है, और इसी संस्कार के अनुसार ही अगला जन्म हाेता हैं।
  • हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर धारण करने वाली आत्मा, स्त्री शरीर काे धारण करती हैं। अर्थांत – तीन जन्म पुरुष शरीर, उसके बाद तीन जन्म स्त्री शरीर काे धारण करती है, यही चक्र सदैव ही चलता रहता हैं।
  • इंसान का सदैव ही पुनर्जन्म होता हैं।
  • काेई भी आत्मा जन्म-मरण के चक्र से सदैव के लिए मुक्त नहीं हाे सकती। हा यदि बहुत अच्छें कर्म है, बहुत ही पुण्य आत्मा हैं। साधना(ध्यान) के दाैरान कैवल्य कि स्थिति में मुक्त हाेने की तीव्र इच्छा हाे ताे – वह आत्मा कुछ समय के लिए जन्म नहीं लेती हैं। वह आत्मा कुछ समय के लिए परमधाम(ब्रह्मलोक) में रहती है।
  • किसी भी इंसान का यदि पुण्य का खाता बहुत ज्यादा है ताे – उसे इसी जन्म में उसके सारे कर्माें के सारे भाेगदंड़ नहीं मिलेगे। जब उसके पुण्य का खाता क्षिण होगा तब ही उस का भाेगदंड़ मिलता हैं। इंसान काे उसके बुरे कर्माें का भाेगदंड़ उसके पुण्य के खाते की वजह से कुछ समय के लिए टल जाता हैं। बहुत ज्यादा पुण्य का खाता है ताे – उसे थाेड़ा सा समय मिल जाता हैं। लेकिन भाेगदंड़ मिलेगा जरुर।

~Kmsraj51

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

Q. A. W. – KMSRAJ51 ~ Ep.- 1st / 02-April-2017

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ Q. A. W. ~ KMSRAJ51 ϒ

ओम गंग गणपतये नमः 

श्री गणेश मंत्र

ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभं।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

Q. 1 .⇒  अपने लक्ष्य(AIM) तक पहुँचने का सबसे सरल व सटीक सूत्र क्या हैं ?
                                                                  या
            अपने लक्ष्य(AIM) काे प्राप्त करने का सबसे आसान व सटीक सूत्र क्या हैं ?
                                                                                   -स्वाती अवस्थी, मध्य प्रदेश

A. 1 .⇒  किसी भी इंसान को सर्वप्रथम अपना एक लक्ष्य (AIM) निश्चित करना (Fix) चाहिए। चाहे आपका लक्ष्य कुछ भी हाे – वजन घटाना, धूम्रपान छोड़ना, उपन्यास लिखना, शारीरिक व्यायाम करना, या जीवन में सच्चे प्रेम को पाना, Govt. या Pvt. Sector में किसी अच्छे Post (पद) पर नौकरी प्राप्त करना etc…..

छोटे कार्यों से लाए जा सकते है असाधारण बड़े बदलाव … छोटे-छोटे सवाल स्वयं से पूछें – जो कार्य आप करना चाह रहे हैं उसमें क्या रुकावट(अवराेध) आ रही हैं। छोटे विचार सोचे, छोटे-छोटे प्रयास करें, छोटी-छोटी समस्याएं सुलझाएँ … अपने लक्ष्य तक पहुँचने का यह एक सटीक विज्ञान हैं। आपके द्वारा उठाये गये छोटे-छोटे कदम नई साेच के प्रति दिमाग की प्रतिराेध करने के स्वभाव काे बदलते हैं। अपने लक्ष्य तक पहुचने के लिए आपकाे, संपूर्ण रूप से अर्थांत पूर्ण रूप से “तन, मन, धन व संकल्पाें” सहित अपने हर एक पल काे Positive Way में सफल या Utilize करना हाेगा।

एक बात सदैव ही याद रखें “ज़िन्दगी में कभी भी निराश हाेकर रुकें नहीं, सदैव ही चलते रहें।” आपके पास जाे भी साधन उपलब्ध (available) हैं उन्हीं से तुरंत Start कर दें। बाकी सब कुछ खुद ब खुद(स्वतः) ही मिल जाएगा आपको।

“कभी भी रुकें नहीं बस चलते रहें।” or “Never stop, just keep walking.” Right Way में धैर्य के साथ। “आपकाे आपके लक्ष्य तक पहुँचने से काेई और नहीं, स्वयं आप ही राेकते हैं।”~KMSRAJ51

Q. 2 .⇒  क्या अपनी आदतों को हम आसानी से बदल सकते हैं ?
                                                     या
                                अपनी आदतों को कैसे बदलें ?
                                                   -गरिमा कपूर, कर्नाटक

A. 2 .⇒  ज़िंदगी बहुत छोटी है इसलिए समय बर्बाद मत करो। समय के महत्व काे समझे व समय के साथ-२ चलने का अभ्यास करें। अपने Mind काे कुछ इस तरह से खुराक दें। 

  • अधिकतर लाेग अपनी आदताें काे खुद पर नियंत्रण करने की अनुमति दे देते हैं। अगर वे आदतें बुरी हाें, ताे उनके नज़रियाें पर नकारात्मक असर डालती हैं।
  • किसी भी इंसान के Mind काे काेई भी दृढ़ आदत डालने में कम से कम 21 दिन लगते हैं।
  • इंसान का Mind किसी भी प्रकार के कर्म काे निरंतर 21 दिनों तक करता रहता है ताे – आगे वह कर्म स्वतः ही बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के निरंतर चलता रहता हैं।
  • आज के मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या यह है कि काेई भी आदत डालने का संकल्प ताे ले लेते है, पर वह संकल्प दृढ़ नहीं हाेता – जिस कारण किसी भी नई आदत काे प्रारंभ करने के 3-7 दिन या ज्यादा से ज्यादा 15 दिनों तक ही करता है, उसके बाद अपने उन्हीं पुरानी आदताें पर वापस आ जाता हैं।  नये वर्ष (New Year’s) के प्रारंभ हाेने पर जिन नये आदताें काे डालने का संकल्प लिए जाते है वो इसी श्रेणी(category) में आते है।
  • किसी भी नई आदत काे डालने का सबसे कारगर तरिका यह है की उस आदत के लिये Mind काे आंतरिक रूप से तैयार करें।
  • काेई भी नई आदत डालने में आजकल के लाेग सबसे बडी गलती यह करते है कि पहले ही दिन से ज्यादा समय देना चाहते है उस आदत काे डालने के लिये। For Example ….. A संकल्प लेता है कि अब मैं प्रतिदिन सुबह जल्दी उठूंगा, 4 बजे भाेर में ही, पर हाेता क्या हैं, पहले दिन….. दूसरे दिन ….. उठता है ….. तीसरे दिन साेया ही रहता है। अब गलती कहाँ पर हुई …(याद रखें कि – A पहले सुबह 6 बजे उठता था।) A से गलती यह हुई की उसने पहले ही दिन से 4 बजे उठने की काेशिश की, जबकी ऐसा नहीं करना था। ….काे सुबह 4 बजे उठने के लिये कुछ इस तरह से अभ्यास करना चाहिए था… पहले दिन 5:45 पर… दूसरे दिन 5:30 पर …. तीसरे दिन 5:15 पर … चाैथे दिन 5:00 पर …. व पांचवें दिन 4:45 पर ….. तथा आगे के दिनों में 15 मिनट कम करते-करते आठवे दिन 4 बजे उठने लगता।
  • 15 मिनट पहले उठने के अंतर काे इंसानी शरीर सरलता पूर्वक सह लेता है इससे ज़्यादा नहीं।
  • परिवर्तन की चुनाैती के प्रेम में पड़ें और परिवर्तन की इच्छा काे बढ़ते हुए देखें।
  • बुरी आदतों काे धीरे-धीरे छाेडते जाये व उनकी जगह एक-एक अच्छी आदतों काे डालते जाये। एक दिन ऐसा आयेगा जब आपके Mind के अंदर मात्र अच्छी आदतों का भंडार हाेगा।

नज़रिया और कुछ नहीं, विचार की आदत है। चाहे वे अच्छी हाें या बुरी, आदत डालने की प्रक्रिया समान रहती है। सफल हाेने की आदत डालना भी उतना ही आसान है, जितना कि असफल हाेने की आदत डालना।

हम सभी अपनी आदतों की वजह से अपनी ज़िंदगी में खुशियाँ पा सकते हैं या फिर मुश्किल में भी पड़ सकते हैं।~Kmsraj51

प्रिय पाठकों इस रविवार काे केवल २ प्रश्नाें के उत्तर दें रहा हुँ, अगले रविवार से ५ प्रश्नाें के उत्तर देने का प्रयत्न करेंगे। Comment`s के माध्यम से अपनी राय जरूर बताये।

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