Important Thoughts For Happiness !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51)…..

kmsraj51 की कलम से …..

kms-8

kms-8

खुशी के लिए जरूरी संकल्प …..


हेलो दोस्तो! नए वर्ष का स्वागत आप इतने उत्साह और शोर-शराबे के साथ हर बार इसलिए करते हैं कि आपके दिल में कुछ पाने की उम्मीद रहती है। वे खुशियां जिनकी अपने कामना और कोशिश की पर वे न मिलीं। नया साल शुरू होते ही वे सभी अधूरे ख्वाब पूरा करने की तमन्ना प्रबल हो जाती है। ऐसा लगता है मानो जीवन ने आपको एक और मौका दिया है खुशियों को अपने पक्ष में करने का।

आप इस नए वर्ष के पहले दिन पीछे मुड़कर देखना चाहते हैं कि आखिर आपसे किस-किस क्षेत्र में चूक हुई है जिसके कारण आप मंजिल से दूर रह गए। अपने स्मृति पटल पर जोर देने पर आपको अहसास होता है कि निहायत मामूली सी कमियों व कोताहियों के कारण आप वह हासिल नहीं कर सके जिसकी आपको चाह थी।

जब आप अपनी डायरी उठाकर देखते हैं तो पाते हैं कि ज्यादातर दुखों व कष्टों का जिम्मेदार कोई और नहीं, आप खुद ही थे। शक व संशय से किसी को तकलीफ या मजा चखाने जैसे विचार और प्रवृत्ति के कारण ही आपका मन ज्यादा विचलित व बेचैन हुआ था। अपनों पर भरोसा न कर किसी दुष्ट के बहकावे में आकर अपना सुख-चैन गंवाने का नतीजा हमेशा बुरा ही निकला। इस कारण न तो आपको शांति मिली और न ही स्वास्थ्य लाभ। आपकी मूल चाहत थी खुशी।

इन सारे विश्लेषणों के बाद आपके संकल्प की सूई अब कहां जाकर रुकनी चाहिए? जी हां, खुशी के लिए संकल्प का पहला सबक यही बनता है कि अपनों पर भरोसा किया जाए। अपने बच्चे, माता-पिता, साथी, दोस्त, रिश्ते, नातेदार पर भरोसा करना सीखें, न कि उन गैर चुगलखोरों की सुनें जो आपका सुकून चुराने में माहिर हैं। किसी अपने से कोई भूल हो गई है तो उसे जीवन भर का सच न मान लें। दोस्तनुमा दुश्मन के बहकावे में आकर अपनों पर निरंतर शक करने से आप उन्हें फिर गलत करने के लिए उकसाते हैं।

कुछ कारगर संकल्प इस प्रकार करें:

– बीते समय की चीर-फाड़ कर समय बर्बाद करने के बजाय भविष्य को सुधारने के बारे में आप विचार करेंगे।

– हर किसी को माफ कर देंगे ।

– बदला लेने के लिए कोई कितना भी उकसाए, ऐसा नहीं करेंगे।

– ज्यादा भावुक हुए बिना ही जिनसे प्यार है उनका साथ देंगे।

– यथार्थ व तर्क को अहमियत देते हुए भी दिल की भी सुनेंगे।

– कोशिश करें कि छोटे-मोटे अरमान पूरे करते चलें ताकि जीने का मजा मिलता रहे।

– ज्योतिष विद्या से मिली सूचनाओं पर केवल अच्छे पहलुओं पर यकीन करें और चिंता वाली बातों को झूठा मानें ताकि गंडे-तावीज के चक्कर में आपकी जेब खाली न हो।

– इंटरनेट, फेसबुक व फोन पर पूरी तरह निर्भर नहीं होकर रूबरू होकर संवाद का मजा लें।

– अपने चाहनेवालों के सीधे संपर्क में रहें ताकि हौसला बना रहे।

– नैतिकता का वही पैमाना अपने लिए भी तय करें जो दूसरों के लिए रखें।

– अपने जलनशील स्वभाव के कारण दूसरों का सुख चैन न लूटें।

– अपने को खाने-पीने से वंचित कर त्याग व बलिदान करने जैसी कसम या संकल्प न लें, यह मूलतः अपनों को प्यार नहीं सजा देने के लिए होता है।

– किसी भी प्रकार की अति से बचने की कोशिश करें।

– बार-बार अपना मन न बदलें, एक विचार पर टिककर रहें ताकि स्थिरता रहे।

मजे की बात यह है कि ज्यादातर संकल्प आप हर बार करते हैं और वे पहले ही दिन से टूटने लगते हैं। नहीं पीने या संतुलित खाने के संकल्प, आप यह कहकर तोड़ देते हैं कि अब आज तो नया वर्ष शुरू हुआ है, आज तो जश्न का दिन है, क्या सोचना। कल से देखा जाएगा और वह कल कभी नहीं आता। इसलिए कोई सख्त इरादा करना फायदेमंद नहीं होता है। केवल मोटी-मोटी बातों की गांठ अपने जीवन में बांध लेने भर से ही जीवन की नैय्या पार लग सकती है। खुद को खुश रखना। खुशी के लिए जरूरी है कि अपनी सेहत पर ध्यान दें। दूसरों का बुरा चाहने वालों की सेहत अमूमन थोड़ी नाजुक रहती है।

किसी भी घटना या बात को बहुत ज्यादा तूल न दें। खुशी हो या गम, संयम रखें और अति उत्तेजित न हों। सामाजिक मामला हो या पारीवारिक बहुत अधिक भावना में बहकर माहौल को खराब न करें। किसी पर हाथ उठाना या अपशब्द बोलना आपको अपरिपक्व साबित करता है। अपनी मस्ती, अपनी खुशी, अपनी सफलता का पैमाना खुद तय करें। जीवन के हर क्षेत्र में आपका लक्ष्य आपका अपना होना चाहिए न कि दूसरे क्या चाहते हैं। लालच से थोड़ा बचकर चलना ही सुकून देता है।

Note::-


यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है::- kmsraj51@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

(((((::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..)))))

Advertisements

Chankya Niti – मूल चाणक्य नीति!!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..


kmsraj51 की कलम से …..
pen-kms

** मूल चाणक्य नीति/चाणक्य सूत्र **


आचार्य चाणक्य एक ऐसी महान विभूति थे, जिन्होंने अपनी विद्वत्ता और क्षमताओं के बल पर भारतीय इतिहास की धारा को बदल दिया। मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चाणक्य कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में भी विश्वविख्यात हुए।

इतनी सदियाँ गुजरने के बाद आज भी यदि चाणक्य के द्वारा बताए गए सिद्धांत और नीतियाँ प्रासंगिक हैं तो मात्र इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने गहन अध्ययन, चिंतन और जीवानानुभवों से अर्जित अमूल्य ज्ञान को, पूरी तरह नि:स्वार्थ होकर मानवीय कल्याण के उद्देश्य से अभिव्यक्त किया।

वर्तमान दौर की सामाजिक संरचना, भूमंडलीकृत अर्थव्यवस्था और शासन-प्रशासन को सुचारू ढंग से बताई गई नीतियाँ और सूत्र अत्यधिक कारगर सिद्ध हो सकते हैं। चाणक्य नीति के द्वितीय अध्याय से यहाँ प्रस्तुत हैं कुछ अंश –


1. जिस प्रकार सभी पर्वतों पर मणि नहीं मिलती, सभी हाथियों के मस्तक में मोती उत्पन्न नहीं होता, सभी वनों में चंदन का वृक्ष नहीं होता, उसी प्रकार सज्जन पुरुष सभी जगहों पर नहीं मिलते हैं।

2. झूठ बोलना, उतावलापन दिखाना, दुस्साहस करना, छल-कपट करना, मूर्खतापूर्ण कार्य करना, लोभ करना, अपवित्रता और निर्दयता – ये सभी स्त्रियों के स्वाभाविक दोष हैं। चाणक्य उपर्युक्त दोषों को स्त्रियों का स्वाभाविक गुण मानते हैं। हालाँकि वर्तमान दौर की शिक्षित स्त्रियों में इन दोषों का होना सही नहीं कहा जा सकता है।

3. भोजन के लिए अच्छे पदार्थों का उपलब्ध होना, उन्हें पचाने की शक्ति का होना, सुंदर स्त्री के साथ संसर्ग के लिए कामशक्ति का होना, प्रचुर धन के साथ-साथ धन देने की इच्छा होना। ये सभी सुख मनुष्य को बहुत कठिनता से प्राप्त होते हैं।

4. चाणक्य कहते हैं कि जिस व्यक्ति का पुत्र उसके नियंत्रण में रहता है, जिसकी पत्नी आज्ञा के अनुसार आचरण करती है और जो व्यक्ति अपने कमाए धन से पूरी तरह संतुष्ट रहता है। ऐसे मनुष्य के लिए यह संसार ही स्वर्ग के समान है।

5. चाणक्य का मानना है कि वही गृहस्थी सुखी है, जिसकी संतान उनकी आज्ञा का पालन करती है। पिता का भी कर्तव्य है कि वह पुत्रों का पालन-पोषण अच्छी तरह से करे। इसी प्रकार ऐसे व्यक्ति को मित्र नहीं कहा जा सकता है, जिस पर विश्वास नहीं किया जा सके और ऐसी पत्नी व्यर्थ है जिससे किसी प्रकार का सुख प्राप्त न हो।

6. जो मित्र आपके सामने चिकनी-चुपड़ी बातें करता हो और पीठ पीछे आपके कार्य को बिगाड़ देता हो, उसे त्याग देने में ही भलाई है। चाणक्य कहते हैं कि वह उस बर्तन के समान है, जिसके ऊपर के हिस्से में दूध लगा है परंतु अंदर विष भरा हुआ होता है।

7. जिस प्रकार पत्नी के वियोग का दुख, अपने भाई-बंधुओं से प्राप्त अपमान का दुख असहनीय होता है, उसी प्रकार कर्ज से दबा व्यक्ति भी हर समय दुखी रहता है। दुष्ट राजा की सेवा में रहने वाला नौकर भी दुखी रहता है। निर्धनता का अभिशाप भी मनुष्य कभी नहीं भुला पाता। इनसे व्यक्ति की आत्मा अंदर ही अंदर जलती रहती है।

8. ब्राह्मणों का बल विद्या है, राजाओं का बल उनकी सेना है, वैश्यों का बल उनका धन है और शूद्रों का बल दूसरों की सेवा करना है। ब्राह्मणों का कर्तव्य है कि वे विद्या ग्रहण करें। राजा का कर्तव्य है कि वे सैनिकों द्वारा अपने बल को बढ़ाते रहें। वैश्यों का कर्तव्य है कि वे व्यापार द्वारा धन बढ़ाएँ, शूद्रों का कर्तव्य श्रेष्ठ लोगों की सेवा करना है।

9. चाणक्य का कहना है कि मूर्खता के समान यौवन भी दुखदायी होता है क्योंकि जवानी में व्यक्ति कामवासना के आवेग में कोई भी मूर्खतापूर्ण कार्य कर सकता है। परंतु इनसे भी अधिक कष्टदायक है दूसरों पर आश्रित रहना।

10. चाणक्य कहते हैं कि बचपन में संतान को जैसी शिक्षा दी जाती है, उनका विकास उसी प्रकार होता है। इसलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे उन्हें ऐसे मार्ग पर चलाएँ, जिससे उनमें उत्तम चरित्र का विकास हो क्योंकि गुणी व्यक्तियों से ही कुल की शोभा बढ़ती है।

11. वे माता-पिता अपने बच्चों के लिए शत्रु के समान हैं, जिन्होंने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दी। क्योंकि अनपढ़ बालक का विद्वानों के समूह में उसी प्रकार अपमान होता है जैसे हंसों के झुंड में बगुले की स्थिति होती है। शिक्षा विहीन मनुष्य बिना पूँछ के जानवर जैसा होता है, इसलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे बच्चों को ऐसी शिक्षा दें जिससे वे समाज को सुशोभित करें।

12. चाणक्य कहते हैं कि अधिक लाड़ प्यार करने से बच्चों में अनेक दोष उत्पन्न हो जाते हैं। इसलिए यदि वे कोई गलत काम करते हैं तो उसे नजरअंदाज करके लाड़-प्यार करना उचित नहीं है। बच्चे को डाँटना भी आवश्यक है।

13. शिक्षा और अध्ययन की महत्ता बताते हुए चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य का जन्म बहुत सौभाग्य से मिलता है, इसलिए हमें अपने अधिकाधिक समय का वेदादि शास्त्रों के अध्ययन में तथा दान जैसे अच्छे कार्यों में ही सदुपयोग करना चाहिए।

14. चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अच्छा मित्र नहीं है उस पर तो विश्वास नहीं करना चाहिए, परंतु इसके साथ ही अच्छे मित्र के संबंद में भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है। अत: सावधानी अत्यंत आवश्यक है।

चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति को कभी अपने मन का भेद नहीं खोलना चाहिए। उसे जो भी कार्य करना है, उसे अपने मन में रखे और पूरी तन्मयता के साथ समय आने पर उसे पूरा करना चाहिए।

15. चाणक्य के अनुसार नदी के किनारे स्थित वृक्षों का जीवन अनिश्चित होता है, क्योंकि नदियाँ बाढ़ के समय अपने किनारे के पेड़ों को उजाड़ देती हैं। इसी प्रकार दूसरे के घरों में रहने वाली स्त्री भी किसी समय पतन के मार्ग पर जा सकती है। इसी तरह जिस राजा के पास अच्छी सलाह देने वाले मंत्री नहीं होते, वह भी बहुत समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता। इसमें जरा भी संदेह नहीं करना चाहिए।

17. चाणक्य कहते हैं कि जिस तरह वेश्या धन के समाप्त होने पर पुरुष से मुँह मोड़ लेती है। उसी तरह जब राजा शक्तिहीन हो जाता है तो प्रजा उसका साथ छोड़ देती है। इसी प्रकार वृक्षों पर रहने वाले पक्षी भी तभी तक किसी वृक्ष पर बसेरा रखते हैं, जब तक वहाँ से उन्हें फल प्राप्त होते रहते हैं। अतिथि का जब पूरा स्वागत-सत्कार कर दिया जाता है तो वह भी उस घर को छोड़ देता है।

18. बुरे चरित्र वाले, अकारण दूसरों को हानि पहुँचाने वाले तथा अशुद्ध स्थान पर रहने वाले व्यक्ति के साथ जो पुरुष मित्रता करता है, वह शीघ्र ही नष्ट हो जाता है। आचार्य चाणक्य का कहना है मनुष्य को कुसंगति से बचना चाहिए। वे कहते हैं कि मनुष्य की भलाई इसी में है कि वह जितनी जल्दी हो सके, दुष्ट व्यक्ति का साथ छोड़ दे।

19. चाणक्य कहते हैं कि मित्रता, बराबरी वाले व्यक्तियों में ही करना ठीक रहता है। सरकारी नौकरी सर्वोत्तम होती है और अच्छे व्यापार के लिए व्यवहारकुशल होना आवश्यक है। इसी तरह सुंदर व सुशील स्त्री घर में ही शोभा देती है।

Note::-


यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है::- kmsraj51@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

(((((kmsraj51 की कलम से …..)))))

Aapka kmsraj51 …..

DSCN1006

10 गुना इंटरनेट स्पीड देगा गूगल का नया डाटा सेंटर ~ Google’s new data center offers internet speeds 10 times !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

kmsraj51 की कलम से …..
pen-kms

** 10 गुना इंटरनेट स्पीड देगा गूगल का नया डाटा सेंटर!! **


ggl

इंटरनेट की दुनिया की सबसे मशहूर कंपनी गूगल ने हाल ही में एशिया में अपने दो नए डाटा सेंटर खोले हैं। टैक्नोलॉजी की दुनिया भर के बाजारों में बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी ने ये कदम उठाया है। एक डाटा सेंटर काउंटी ताइवान और दूसरा जुरोंग वेस्ट, सिंगापुर में खोला गया है। कंपनी ने इन दोनों सेंटर को तैयार करने में कुल मिलाकर 2440 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इन डाटा सेंटरों की मदद से अब इंटरनेट डाटा ट्रैफिक के लोड को कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही गूगल अपने यूजर्स को अब और भी ज्यादा डाटा मुहैया करा सकेगा और इंटरनेट पर सर्च करना 10 गुना तक फास्ट और आसान हो जाएगा।

kms-google
रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान, हांगकांग और सिंगापुर जैसे देश टेक कंपनियों के संचालन के लिए उपयुक्त स्थान माने जाते हैं। इन देशों में डाटा सेंटर का संचालन करने के लिए अच्छे कानून, मजबूत बिजली व्यवस्था, कुशल कर्मचारी और फाइबर ब्रॉडबैंड जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।


google-kms
डा़टा सेंटर एक ऐसी जगह होती है, जहां ढेर सारे कंप्यूटर लगे होते हैं। इन कंप्यूटरों में दुनिया भर के जरूरी डाटा स्टोर किए जाते हैं, जिसकी मदद से दुनिया के कोने-कोने में इंटरनेट यूजर्स को डाटा मुहैया कराया जाता है। इंटरनेट पर मिलने वाली सभी जानकारियां इन्हीं डाटा सेंटरों से आती हैं।

4
गूगल की स्थापना 1998 में लैरी पेज और सेर्गे ब्रिन ने की थी। आज 15 साल बाद कंपनी की कुल संपत्ति 5,80,415 करोड़ रुपए हो चुकि है। अब गूगल अपने बिजनेस को बढ़ाते हुए ताइवान के डाटा सेंटर के संचालन के लिए 3712 करोड़ रुपए निवेश कर रही है। इसकी मदद से दुनिया भर में बढ़ रही टैक्नोलॉजी की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।


5
लगभग 3,10,503 करोड़ रुपए की सालाना (2012) रेवेन्यू वाली कंपनी का ताइवान का ये डाटा सेंटर काफी प्रभावशाली है और पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है।


6
इस डाटा सेंटर को रात के समय कंपनी के अंदर के वातावरण को ठंडा रखने और थर्मल ऊर्जा स्टोर करने के लिहाज से बनाया गया है।

7
आमतौर पर डाटा सेंटर का वातावरण ठंडा होना चाहिए क्योंकि कंप्यूटरों से निकलने वाली गर्मी सिस्टम को क्षति पहुंचा सकती है। गूगल के मुताबिक, इस कंपनी का कूलिंग सिस्टम इंसुलेटेड टैंक्स के जरिए चलाया जाता है।

8
इस डाटा सेंटर में कुल 60 लोगों की टीम के साथ कुछ फुल और पार्ट टाइम कांट्रेक्टर 24 घंटे साइट को चलाते हैं, जिसमें से कुछ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स, मैकेनिकल इंजीनियर्स, कंप्यूटर तकनीशियन और कैटरर भी शामिल हैं।

9
एशिया में 2014 तक मोबाइल डाटा ट्रेफिक 68 प्रतिशत तक बढ़ने का अंदेशा है। ये डाटा सेंटर इस ट्रेफिक को नियंत्रित करने में काफी सहयोग करेगी।

10
कंपनी के उपाध्यक्ष डाटा सेंटर में सुरक्षा द्वारों की जांच करते हुए।

11
दुनिया के सबसे बेहतरीन सर्वर के एक कंप्यूटर के गर्म हो जाने के बाद गूगल की कर्मचारी उसकी जांच करती हुईं।

12
कंप्यूटर के खराब मदरबोर्ड की मरम्मत करता हुआ गूगल का कर्मचारी। इस डाटा सेंटर में खराब होने के बाद पुर्जों की पहले मरम्मत की जाती है अगर वो ठीक न हो सकें तो फिर उन्हें तोड़कर रिसाइकिल के लिए दे दिया जाता है।

13
जेनरेटर की मरम्मत करते गूगल के तकनीशियन।

14
डाटा सेंटर को ठंडा रखने वाले पाइप लाइन की जांच करता गूगल कर्मचारी।

15
बैटरी की जांच करते हुए गूगल कर्मचारी। समय-समय पर बैटरियों की जांच की जाती है की वो ठीक से चार्ज हो रहे हैं या नहीं।

16
इस डाटा सेंटर में नए जमाने के लिहाज से बनाए गए अति आधुनिक सर्वर देखे जा सकते हैं।

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..
kms1006

Note::-
यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है::- kmsraj51@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

@@@@@ ::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) ….. @@@@@

~ Steve Jobs Success Mantra !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

kmsraj51 की कलम से …..
pen-kms

** सफलता के मंत्र ~ स्टीव जॉब्स !!~ Steve Jobs Success Mantra!! **

steve-jobs

Steve-Jobs-dates


स्टीव जॉब्स की जिंदगी ने दुनिया भर में करोड़ों लोगों को प्रभावित किया है। उनके बातचीत करने का ढंग हो या प्रस्तुतिकरण की बात हो या फिर किसी भी उत्पाद को देखने और मार्केट करने का ढंग हो, सबकुछ बिलकुल अलग सोच लिए होता था। इसी अलग सोच ने उन्हें स्टीव जॉब्स बनाया। आइए जानते हैं कि स्टीव जॉब्स की सफलता के मूलमंत्र क्या थे।

वही काम करें जिससे आपको प्यार हो : स्टीव के अनुसार आप अगर अपने काम से प्यार करते हैं तब अच्छा है। दुनिया भर में कई लोग ऐसे हैं जो ऐसा काम कर रहे हैं जो उन्हें दिल से पसंद नहीं। अगर दुनिया भर में ऐसा हो जाए कि जिसे जो काम पसंद है वही करे तब दुनिया ही बदल जाएगी।

दुनिया को बताओ कि आप कौन हो : स्टीव के अनुसार दुनिया को पता चलना चाहिए कि आप कौन हैं और दुनिया को बदलने का माद्दा आपमें नहीं होगा तब तक दुनिया आपको नहीं पहचानेगी।

सभी क्षेत्रों में संबंध जोड़ें : जॉब्स ने अपने जीवनकाल में विभिन्न विषयों का अध्ययन किया। उन्होंने कैलिग्राफी भी सीखी और विभिन्न प्रकार के डिजाइन्स का अध्ययन किया। इतना ही नहीं उन्होंने हॉस्पिटेलिटी के क्षेत्र में भी हाथ आजमाए और उसका ज्ञान लिया। यह ज्ञान उन्हें बाद में काम भी आया।

मना करना सीखें : स्टीव ने अपनी जिंदगी में मना करना खूब सीखा था और इसका फायदा भी उन्हें मिला था। जब वे 1997 में वापस एप्पल में आए थे तब कंपनी के पास 350 उत्पाद थे। मात्र दो वर्षों में उन्होंने उत्पादों की संख्या कम करके 10 कर दी। 10 उत्पादों पर ध्यान केंद्रित किया और सफलता भी पाई।

ग्राहकों को अलग तरह का अनुभव दो : स्टीव मानते थे कि जब तक आप अपने ग्राहकों को अलग तरह का अनुभव नहीं देंगे, वे आपके उत्पादों की तरफ आकर्षित बिलकुल भी नहीं होंगे। यही कारण था कि उन्होंने एप्पल स्टोर्स को कुछ अलग तरह का बनाया। जहा पर ग्राहकों के लिए अलग तरह का अनुभव था और एप्पल कंपनी के प्रति लोगों का भावनात्मक लगाव हो गया था।

अपनी बात रखने में पीछे न रहें : स्टीव के अनुसार अगर आपके पास अच्छे आइडियाज है और आप इसे सभी के सामने रख नहीं पाए तब ऐसे आइडियाज का क्या काम। स्टीव अपनी बात प्रेजेंटेशन के दौरान रखते थे और केवल अपनी बात नहीं रखते थे बल्कि प्रेजेंटेशन के माध्यम से वे कई तरह की बातें बताते थे जिससे प्रेरणा भी मिलती थी।

सपने बेचें…उत्पाद नहीं : स्टीव हर दम यही कहते थे की अपने ग्राहकों को उत्पाद नहीं सपने बेचो। उनके अनुसार आपके ग्राहकों को आपके उत्पाद के बारे में कोई मतलब नहीं है, उन्हें उनकी आशाओं और आकांक्षाओं से मतलब है और अगर आपने उनके सपनों को उत्पाद से जोड़ा तभी आपको सफलता मिलेगी।

Note::-


यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है::- kmsraj51@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Chankya Anmol Voice !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

kmsraj51 की कलम से …..
pen-kms

** सभी शब्द के दो अर्थ होते है!! **

Chankya - KMS

Note::-

यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है::- kmsraj51@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

(((((::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..)))))

Chankya Niti – मूल चाणक्य नीति!!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..


kmsraj51 की कलम से …..
pen-kms

** मूल चाणक्य नीति/चाणक्य सूत्र **


आचार्य चाणक्य एक ऐसी महान विभूति थे, जिन्होंने अपनी विद्वत्ता और क्षमताओं के बल पर भारतीय इतिहास की धारा को बदल दिया। मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चाणक्य कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में भी विश्वविख्यात हुए।

इतनी सदियाँ गुजरने के बाद आज भी यदि चाणक्य के द्वारा बताए गए सिद्धांत और नीतियाँ प्रासंगिक हैं तो मात्र इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने गहन अध्ययन, चिंतन और जीवानानुभवों से अर्जित अमूल्य ज्ञान को, पूरी तरह नि:स्वार्थ होकर मानवीय कल्याण के उद्देश्य से अभिव्यक्त किया।

वर्तमान दौर की सामाजिक संरचना, भूमंडलीकृत अर्थव्यवस्था और शासन-प्रशासन को सुचारू ढंग से बताई गई नीतियाँ और सूत्र अत्यधिक कारगर सिद्ध हो सकते हैं। चाणक्य नीति के द्वितीय अध्याय से यहाँ प्रस्तुत हैं कुछ अंश –


1. जिस प्रकार सभी पर्वतों पर मणि नहीं मिलती, सभी हाथियों के मस्तक में मोती उत्पन्न नहीं होता, सभी वनों में चंदन का वृक्ष नहीं होता, उसी प्रकार सज्जन पुरुष सभी जगहों पर नहीं मिलते हैं।

2. झूठ बोलना, उतावलापन दिखाना, दुस्साहस करना, छल-कपट करना, मूर्खतापूर्ण कार्य करना, लोभ करना, अपवित्रता और निर्दयता – ये सभी स्त्रियों के स्वाभाविक दोष हैं। चाणक्य उपर्युक्त दोषों को स्त्रियों का स्वाभाविक गुण मानते हैं। हालाँकि वर्तमान दौर की शिक्षित स्त्रियों में इन दोषों का होना सही नहीं कहा जा सकता है।

3. भोजन के लिए अच्छे पदार्थों का उपलब्ध होना, उन्हें पचाने की शक्ति का होना, सुंदर स्त्री के साथ संसर्ग के लिए कामशक्ति का होना, प्रचुर धन के साथ-साथ धन देने की इच्छा होना। ये सभी सुख मनुष्य को बहुत कठिनता से प्राप्त होते हैं।

4. चाणक्य कहते हैं कि जिस व्यक्ति का पुत्र उसके नियंत्रण में रहता है, जिसकी पत्नी आज्ञा के अनुसार आचरण करती है और जो व्यक्ति अपने कमाए धन से पूरी तरह संतुष्ट रहता है। ऐसे मनुष्य के लिए यह संसार ही स्वर्ग के समान है।

5. चाणक्य का मानना है कि वही गृहस्थी सुखी है, जिसकी संतान उनकी आज्ञा का पालन करती है। पिता का भी कर्तव्य है कि वह पुत्रों का पालन-पोषण अच्छी तरह से करे। इसी प्रकार ऐसे व्यक्ति को मित्र नहीं कहा जा सकता है, जिस पर विश्वास नहीं किया जा सके और ऐसी पत्नी व्यर्थ है जिससे किसी प्रकार का सुख प्राप्त न हो।

6. जो मित्र आपके सामने चिकनी-चुपड़ी बातें करता हो और पीठ पीछे आपके कार्य को बिगाड़ देता हो, उसे त्याग देने में ही भलाई है। चाणक्य कहते हैं कि वह उस बर्तन के समान है, जिसके ऊपर के हिस्से में दूध लगा है परंतु अंदर विष भरा हुआ होता है।

7. जिस प्रकार पत्नी के वियोग का दुख, अपने भाई-बंधुओं से प्राप्त अपमान का दुख असहनीय होता है, उसी प्रकार कर्ज से दबा व्यक्ति भी हर समय दुखी रहता है। दुष्ट राजा की सेवा में रहने वाला नौकर भी दुखी रहता है। निर्धनता का अभिशाप भी मनुष्य कभी नहीं भुला पाता। इनसे व्यक्ति की आत्मा अंदर ही अंदर जलती रहती है।

8. ब्राह्मणों का बल विद्या है, राजाओं का बल उनकी सेना है, वैश्यों का बल उनका धन है और शूद्रों का बल दूसरों की सेवा करना है। ब्राह्मणों का कर्तव्य है कि वे विद्या ग्रहण करें। राजा का कर्तव्य है कि वे सैनिकों द्वारा अपने बल को बढ़ाते रहें। वैश्यों का कर्तव्य है कि वे व्यापार द्वारा धन बढ़ाएँ, शूद्रों का कर्तव्य श्रेष्ठ लोगों की सेवा करना है।

9. चाणक्य का कहना है कि मूर्खता के समान यौवन भी दुखदायी होता है क्योंकि जवानी में व्यक्ति कामवासना के आवेग में कोई भी मूर्खतापूर्ण कार्य कर सकता है। परंतु इनसे भी अधिक कष्टदायक है दूसरों पर आश्रित रहना।

10. चाणक्य कहते हैं कि बचपन में संतान को जैसी शिक्षा दी जाती है, उनका विकास उसी प्रकार होता है। इसलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे उन्हें ऐसे मार्ग पर चलाएँ, जिससे उनमें उत्तम चरित्र का विकास हो क्योंकि गुणी व्यक्तियों से ही कुल की शोभा बढ़ती है।

11. वे माता-पिता अपने बच्चों के लिए शत्रु के समान हैं, जिन्होंने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दी। क्योंकि अनपढ़ बालक का विद्वानों के समूह में उसी प्रकार अपमान होता है जैसे हंसों के झुंड में बगुले की स्थिति होती है। शिक्षा विहीन मनुष्य बिना पूँछ के जानवर जैसा होता है, इसलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे बच्चों को ऐसी शिक्षा दें जिससे वे समाज को सुशोभित करें।

12. चाणक्य कहते हैं कि अधिक लाड़ प्यार करने से बच्चों में अनेक दोष उत्पन्न हो जाते हैं। इसलिए यदि वे कोई गलत काम करते हैं तो उसे नजरअंदाज करके लाड़-प्यार करना उचित नहीं है। बच्चे को डाँटना भी आवश्यक है।

13. शिक्षा और अध्ययन की महत्ता बताते हुए चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य का जन्म बहुत सौभाग्य से मिलता है, इसलिए हमें अपने अधिकाधिक समय का वेदादि शास्त्रों के अध्ययन में तथा दान जैसे अच्छे कार्यों में ही सदुपयोग करना चाहिए।

14. चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अच्छा मित्र नहीं है उस पर तो विश्वास नहीं करना चाहिए, परंतु इसके साथ ही अच्छे मित्र के संबंद में भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है। अत: सावधानी अत्यंत आवश्यक है।

चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति को कभी अपने मन का भेद नहीं खोलना चाहिए। उसे जो भी कार्य करना है, उसे अपने मन में रखे और पूरी तन्मयता के साथ समय आने पर उसे पूरा करना चाहिए।

15. चाणक्य के अनुसार नदी के किनारे स्थित वृक्षों का जीवन अनिश्चित होता है, क्योंकि नदियाँ बाढ़ के समय अपने किनारे के पेड़ों को उजाड़ देती हैं। इसी प्रकार दूसरे के घरों में रहने वाली स्त्री भी किसी समय पतन के मार्ग पर जा सकती है। इसी तरह जिस राजा के पास अच्छी सलाह देने वाले मंत्री नहीं होते, वह भी बहुत समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता। इसमें जरा भी संदेह नहीं करना चाहिए।

17. चाणक्य कहते हैं कि जिस तरह वेश्या धन के समाप्त होने पर पुरुष से मुँह मोड़ लेती है। उसी तरह जब राजा शक्तिहीन हो जाता है तो प्रजा उसका साथ छोड़ देती है। इसी प्रकार वृक्षों पर रहने वाले पक्षी भी तभी तक किसी वृक्ष पर बसेरा रखते हैं, जब तक वहाँ से उन्हें फल प्राप्त होते रहते हैं। अतिथि का जब पूरा स्वागत-सत्कार कर दिया जाता है तो वह भी उस घर को छोड़ देता है।

18. बुरे चरित्र वाले, अकारण दूसरों को हानि पहुँचाने वाले तथा अशुद्ध स्थान पर रहने वाले व्यक्ति के साथ जो पुरुष मित्रता करता है, वह शीघ्र ही नष्ट हो जाता है। आचार्य चाणक्य का कहना है मनुष्य को कुसंगति से बचना चाहिए। वे कहते हैं कि मनुष्य की भलाई इसी में है कि वह जितनी जल्दी हो सके, दुष्ट व्यक्ति का साथ छोड़ दे।

19. चाणक्य कहते हैं कि मित्रता, बराबरी वाले व्यक्तियों में ही करना ठीक रहता है। सरकारी नौकरी सर्वोत्तम होती है और अच्छे व्यापार के लिए व्यवहारकुशल होना आवश्यक है। इसी तरह सुंदर व सुशील स्त्री घर में ही शोभा देती है।

Note::-


यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है::- kmsraj51@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

(((((kmsraj51 की कलम से …..)))))

Aapka kmsraj51 …..

DSCN1006

Important Thoughts For Happiness !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51)…..

kmsraj51 की कलम से …..

kms-8

kms-8

खुशी के लिए जरूरी संकल्प …..


हेलो दोस्तो! नए वर्ष का स्वागत आप इतने उत्साह और शोर-शराबे के साथ हर बार इसलिए करते हैं कि आपके दिल में कुछ पाने की उम्मीद रहती है। वे खुशियां जिनकी अपने कामना और कोशिश की पर वे न मिलीं। नया साल शुरू होते ही वे सभी अधूरे ख्वाब पूरा करने की तमन्ना प्रबल हो जाती है। ऐसा लगता है मानो जीवन ने आपको एक और मौका दिया है खुशियों को अपने पक्ष में करने का।

आप इस नए वर्ष के पहले दिन पीछे मुड़कर देखना चाहते हैं कि आखिर आपसे किस-किस क्षेत्र में चूक हुई है जिसके कारण आप मंजिल से दूर रह गए। अपने स्मृति पटल पर जोर देने पर आपको अहसास होता है कि निहायत मामूली सी कमियों व कोताहियों के कारण आप वह हासिल नहीं कर सके जिसकी आपको चाह थी।

जब आप अपनी डायरी उठाकर देखते हैं तो पाते हैं कि ज्यादातर दुखों व कष्टों का जिम्मेदार कोई और नहीं, आप खुद ही थे। शक व संशय से किसी को तकलीफ या मजा चखाने जैसे विचार और प्रवृत्ति के कारण ही आपका मन ज्यादा विचलित व बेचैन हुआ था। अपनों पर भरोसा न कर किसी दुष्ट के बहकावे में आकर अपना सुख-चैन गंवाने का नतीजा हमेशा बुरा ही निकला। इस कारण न तो आपको शांति मिली और न ही स्वास्थ्य लाभ। आपकी मूल चाहत थी खुशी।

इन सारे विश्लेषणों के बाद आपके संकल्प की सूई अब कहां जाकर रुकनी चाहिए? जी हां, खुशी के लिए संकल्प का पहला सबक यही बनता है कि अपनों पर भरोसा किया जाए। अपने बच्चे, माता-पिता, साथी, दोस्त, रिश्ते, नातेदार पर भरोसा करना सीखें, न कि उन गैर चुगलखोरों की सुनें जो आपका सुकून चुराने में माहिर हैं। किसी अपने से कोई भूल हो गई है तो उसे जीवन भर का सच न मान लें। दोस्तनुमा दुश्मन के बहकावे में आकर अपनों पर निरंतर शक करने से आप उन्हें फिर गलत करने के लिए उकसाते हैं।

कुछ कारगर संकल्प इस प्रकार करें:

– बीते समय की चीर-फाड़ कर समय बर्बाद करने के बजाय भविष्य को सुधारने के बारे में आप विचार करेंगे।

– हर किसी को माफ कर देंगे ।

– बदला लेने के लिए कोई कितना भी उकसाए, ऐसा नहीं करेंगे।

– ज्यादा भावुक हुए बिना ही जिनसे प्यार है उनका साथ देंगे।

– यथार्थ व तर्क को अहमियत देते हुए भी दिल की भी सुनेंगे।

– कोशिश करें कि छोटे-मोटे अरमान पूरे करते चलें ताकि जीने का मजा मिलता रहे।

– ज्योतिष विद्या से मिली सूचनाओं पर केवल अच्छे पहलुओं पर यकीन करें और चिंता वाली बातों को झूठा मानें ताकि गंडे-तावीज के चक्कर में आपकी जेब खाली न हो।

– इंटरनेट, फेसबुक व फोन पर पूरी तरह निर्भर नहीं होकर रूबरू होकर संवाद का मजा लें।

– अपने चाहनेवालों के सीधे संपर्क में रहें ताकि हौसला बना रहे।

– नैतिकता का वही पैमाना अपने लिए भी तय करें जो दूसरों के लिए रखें।

– अपने जलनशील स्वभाव के कारण दूसरों का सुख चैन न लूटें।

– अपने को खाने-पीने से वंचित कर त्याग व बलिदान करने जैसी कसम या संकल्प न लें, यह मूलतः अपनों को प्यार नहीं सजा देने के लिए होता है।

– किसी भी प्रकार की अति से बचने की कोशिश करें।

– बार-बार अपना मन न बदलें, एक विचार पर टिककर रहें ताकि स्थिरता रहे।

मजे की बात यह है कि ज्यादातर संकल्प आप हर बार करते हैं और वे पहले ही दिन से टूटने लगते हैं। नहीं पीने या संतुलित खाने के संकल्प, आप यह कहकर तोड़ देते हैं कि अब आज तो नया वर्ष शुरू हुआ है, आज तो जश्न का दिन है, क्या सोचना। कल से देखा जाएगा और वह कल कभी नहीं आता। इसलिए कोई सख्त इरादा करना फायदेमंद नहीं होता है। केवल मोटी-मोटी बातों की गांठ अपने जीवन में बांध लेने भर से ही जीवन की नैय्या पार लग सकती है। खुद को खुश रखना। खुशी के लिए जरूरी है कि अपनी सेहत पर ध्यान दें। दूसरों का बुरा चाहने वालों की सेहत अमूमन थोड़ी नाजुक रहती है।

किसी भी घटना या बात को बहुत ज्यादा तूल न दें। खुशी हो या गम, संयम रखें और अति उत्तेजित न हों। सामाजिक मामला हो या पारीवारिक बहुत अधिक भावना में बहकर माहौल को खराब न करें। किसी पर हाथ उठाना या अपशब्द बोलना आपको अपरिपक्व साबित करता है। अपनी मस्ती, अपनी खुशी, अपनी सफलता का पैमाना खुद तय करें। जीवन के हर क्षेत्र में आपका लक्ष्य आपका अपना होना चाहिए न कि दूसरे क्या चाहते हैं। लालच से थोड़ा बचकर चलना ही सुकून देता है।

Note::-


यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है::- kmsraj51@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

(((((::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..)))))