दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-5

KMSRAJ51-Problem Solve

दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

अक्सर कई छात्र मेल के द्वारा या फोन के माध्यम से हमसे पूछते हैं कि हम प्रवेश परिक्षाओं में कैसे सफलता पायें या किस तरह तैयारी करें कि हमें कामयाबी मिले?  सच तो ये है कि, कामयाबी की चाह लिये हम सब अपने-अपने क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं। परन्तु अपने कार्य सम्पादन के दौरान अक्सर एक दुविधा में भी रहते हैं कि हमारे द्वारा किया गया कार्य सफल होगा या नही, ये हम कर पायेंगे या नही  इत्यादि इत्यादी. मित्रों, इस तरह की आशंकायें हमारी ऊर्जा को छींण करने का प्रयास करती हैं और स्वंय के विश्वास पर एक प्रश्न चिन्ह लगा देती हैं।  यही दुविधा सफलता की सबसे बङी बाधा है। किसी भी कार्य को करने से पहले उसके सभी पहलुओं पर विचार करना कार्य की रणनीति होती है परंतु जब नकारात्मक पहलु योजना पर हावी होता है तो यही संशय सफलता की सबसे बङी अङचन होती है। जिसके कारण हम एक कदम भी आगे नही रख पाते। जबकि जिवन का सबसे बङा सच है कि हमेशा परिस्थिति एक जैसी नही रहती, लक्ष्य की सफलता में कई रोङे आते हैं। जो इन रुकावटों को आत्मविश्वास के साथ पार करता है वो लक्ष्य हासिल करने में सफल होता है। लेकिन दूसरी ओर जो दुविधा के जंजाल में फंस जाता है, वो कभी भी आशाजनक सफलता नही अर्जित कर पाता है। ज्यादातर लोग ज्ञान और प्रतिभा की कमी से नही हारते बल्की इसलिये हार जाते हैं कि दुविधा में पङकर जीत से पहले ही मैदान छोङ देते हैं।

दुविधा तो एक द्वंद की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति निर्णय नही ले पाता और न ही स्वतंत्र ढंग से सोच पाता है। इतिहास गवाह है कि प्रत्येक सफल व्यक्तियों के रास्ते में अनेक मुश्किलें आईं किन्तु उन्होने उसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया समझा और आगे के कार्य हेतु कोशिश करते रहे। कई बार हम लोग किसी कार्य को करने से पहले इतना ज्यादा सोचते हैं कि समय पर काम नही हो पाता या हम अवसर को दुविधा के भंवर में कहीं खो देते हैं। यदि हम विद्यार्थी की बात करें तो कई बार ऐसा होता है कि कुछ छात्र विषय को लेकर इतने ज्यादा संशय में रहते हैं कि वो फार्म भरने में लेट हो जाते हैं या आशंकाओं के चक्कर में गलत विषय का चयन कर लेते हैं। जबकि सच तो ये है कि सभी विषय में मेहनत करनी होती है तभी अच्छे अंक मिलते हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि एक बुद्धिमान व्यक्ति भी लंबे समय तक दुविधाग्रस्त रहता है तो उसका भी मानसिक क्षरण हो जाता है। जिसके कारण सक्षम व्यक्ति भी उन्नति नही कर पाता। दुविधा सफलता की राह में सबसे बङी अङचन है। अत्यधिक संशय आत्मविश्वास को भी कमजोर बना देता है। यदि हम एक परशेंट असफल भी होते हैं, तो भी हमारे अनुभव में इजाफा ही होता है और अनुभव से आत्मविश्वास बढता है। मन में ये विश्वास रखना भी जरूरी है कि सब कुछ संभव है।

स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं कि,  संभव की सीमा जानने का सबसे अच्छा तरीका है, असंभव से भी आगे निकल जाना।

जो लोग सफलता की इबारत लिखे हैं उन्हे भी दुविधाओं के कोहरे से गुजरना पढा है परन्तु ऐसे में उन लोगों ने परिस्थिति को इस तरह ढाला कि वे अपनी योजनाएं  स्वयं निर्धारित कर सके। सफलता के लिये ये भी आवश्यक है कि हम हर परिस्थिति में स्वंय को तैयार रखें। किसी भी सफलता के लिये ये जरूरी है कि हम निर्णय लेने की भूमिका में आगे बढें; क्योंकि एक कदम भी आगे बढाने के लिये निर्णय तो लेना ही पङता है, तद्पश्चात जिंदगी हमें धीरे-धीरे खुद ही निर्णय लेना सीखा देती है। अतः सबसे पहले हम दुविधापूर्ण मनः स्थिति के शिकार न होते हुए स्वंय को संतुलित रखते हुए दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें, जिससे आशंकाओं और दुविधाओं का तिमिर नष्ट हो तथा सफलता की और हमसब का कदम अग्रसर हो।

डॉ.ए.पी.जे. कलाम के अनुसार,  Confidence & hard work is the best medicine to kill the disease called failure. It will make you a successful person. 

Post inspired by Mrs. अनिता शर्मा जी

Educational & Inspirational VIdeos (9.8 lacs+ Views):  YouTube videos Link

(http://www.youtube.com/channel/UCRh-7JPESNZWesMRfjvegcA?feature=watch)

Blog:  http://roshansavera.blogspot.in/

E-mail ID:  voiceforblind@gmail.com

अनीता जी नेत्रहीन विद्यार्थियों के सेवार्थ काम करती हैं।

एक अपील

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।

I am grateful to Anita Ji for sharing this wonderful article with KMSRAJ51 Readers.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

———– @ Best of Luck @ ———–

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“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥”

 ~KMSRAJ51

 

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

http://wp.me/p3gkW6-1dk

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

http://wp.me/p3gkW6-mn

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

http://wp.me/p3gkW6-1ep

 

 

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Meditation – Experiencing My Original Home

kmsraj51 की कलम से…..

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Meditation – Experiencing My Original Home (Part 1)

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In meditation, I focus my mind and intellect on that region which is called by names like soul world, paramdham, nirvandham, shantidham and so on. In fact, this is the region where the soul stays, when it has no body. Here the soul stays in the form of a star-like point of light, untouched by matter (five elements including the body). In this world, there exists neither thought, word nor action; just complete stillness, sweet silence and peace. When I first take a physical body, it is from here that I the soul come down into the material world i.e. the earth, which is the field of action.

With the practice of meditation, my third eye (eye of the mind) opens; and I see and experience my original home as an infinite (very large, unmeasurable) world of very subtle (light) golden-red light, situated beyond the physical world of five elements, beyond the sun, moon and stars.


 

Meditation – Experiencing My Original Home (Part 2)

Along with reading over the following words slowly and silently, make a sincere effort to create images of them in the eye of your mind:

I focus myself on the self, the soul, a golden point of light……..
I stay between the eyebrows in the middle of the forehead……..
I radiate golden rays of peace, purity and love in all directions……..
In this awareness of I the soul, with the power of my mind I can travel beyond the limits of my physical organs……..
I visualize myself gradually going out from this physical body……..
I, the sparkling star like energy, fly into the night sky……..
I see myself floating above thousands of buildings and lights……..
Slowly I rise higher and higher to enter space……..
I am surrounded by millions of stars and planets……..
Slowly I see myself flying beyond the world of five elements……..
I, the golden star, enter another world, a soft golden-red light world……..
A world of sweet silence and peace……..
full of peaceful light stretching very very far away……..
I feel pure warmth here, surrounded by light……..
I the point of light shine in this sixth element……..
I am free of all tensions, extremely light………
This is where I belong,
This is my home……..
I recognize this place……..
I had forgotten it, but now I have rediscovered it……..
Spend a few minutes in this positive experience and then gradually come downwards to take your seat back in the physical body.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

brahmakumaris-kmsraj51

 

Note::-

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love-rose-kmsraj51Picture Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

Book-Red-kmsraj51

 

 

 

100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए –

 

(100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

 

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

Soulword_kmsraj51 - Change Y M T

“सफल लोग अपने मस्तिष्क को इस तरह का बना लेते हैं कि उन्हें हर चीज सकारात्मक व खूबसूरत लगती है।”
-KMSRAJ51

“हमारी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपने जीवन का कुछ सेकंड, प्रतिघंटा और प्रतिदिन कैसे बिताते हैं”
-KMSRAJ51

-A Message To All-

मत करो हतोत्साहित अपने शब्दों से ……आने वाली नयी पीढ़ी को ,
वो भी करेंगे कुछ ऐसा एक दिन…. जिसे देखेगा ज़माना ….पकड़ती हुई नयी सीढ़ी को ॥

कुछ भी आप के लिए संभव है ॥

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

~kmsraj51

95+ देश के पाठकों द्वारा पढ़ा जाने वाला हिन्दी वेबसाइट है,, –

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मैं अपने सभी प्रिय पाठकों का आभारी हूं…..  I am grateful to all my dear readers …..

“तू न हो निराश कभी मन से” book

~Change your mind thoughts~

@2014-all rights reserve under kmsraj51.

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“Understanding And Expressing Your Potential”

kmsraj51 की कलम से …..

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

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Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

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Soul Sustenance 19-04-2014
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Understanding And Expressing Your Potential – Part 1 

A free being is the one who recognizes their potential; they care for it, nourish it, use it and express it. It is an awakened being. It has stopped blaming, complaining and making excuses. It has taken on its full responsibility and has an attitude of gratitude at each moment. It is a relaxed being, but it does not get too comfortable in comfort zones or laziness. Out of peacefulness and spiritual strength, it rises above beliefs that limit their potential to grow and shine. 

Its energy is full of love, courage and determination. It is a concentrated energy that governs their mind and emotions; it is not distracted by the unimportant, it does not lose sight of the important and does not allow itself to be trapped by anything or anybody. Therefore, their energy is fully centred and has great power. Not the false power that comes from stress, adrenaline, pride and ego, but rather the power that arises from a being whose conscience, decisions and actions are aligned. From a being that knows that nothing or nobody can prevent it from being free and express their full potential. A free mind is a mind without limits, open to everything and closed to nothing. It is a mind that clings on to nothing and, because of this, is relaxed with everything. A mind is closed because it gets stuck on something; it is blocked by fears or disturbed by worries. A person with a busy, closed and clinging mind will get disturbed, they will fluctuate, they will lose their emotional stability and they will be easily offended. This doesn’t happen to a person with a free, open and relaxed mind because they never lose sight of the true meaning of who they are. 
 

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Message for the day 19-04-2014
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To search for solutions is to use resources for the right cause. 

Expression: Usually a lot of energy and time is wasted to find the cause of something that goes wrong. But thinking about that only wastes the resources that could be used for finding solutions. So it is not necessary to understand the causes but to find solutions. So the one who understands this fact is able to make the best use of available resources to correct the situation. 

Experience: Being focused on the solution rather than on the problem, I am able to use all my inner resources in the right way. I am free from complaints and am able to put in effort to do the best in the given situation. I am constantly happy and content because I know that there is a solution for every problem. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

 

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Continued …..

 

Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

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Soul Sustenance 20-04-2014
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Understanding And Expressing Your Potential – Part 2 

A person with a free mind (discussed yesterday) can use all of their creative capacity in order to live out their dreams. 

To use one’s creative capacity fully means: 

• Being aware of the power of the imagination and channeling it in a constructive way. 

• Being able and to be open to discovering and to learning. 

• Becoming aware and dissolving self-limiting beliefs. 

• Being attracted by excellence, embracing the experiences of superior quality and letting go of the desires and experiences of lesser quality. 

• Having good discrimination power thanks to which one has a good power of decision. 

• Having the will power and discipline to apply decision. 

• Having the courage to be different and to overcome obstacles. 

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Message for the day 20-04-2014
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To forgive is to give correction. 

Expression: When there is forgiveness, the harm of the mistake is forgotten. The mistake itself is remembered only to the extent that the correction is to be given. So there are no negative feelings expressed even while giving correction. And the words that are used are few but prove to be very effective. 

Experience: When I learn the art of forgiving I am able to be free from the burden of negative and waste thinking. So there is never any difficulty in giving correction when necessary. The mind is free from the attitudes of the past and it creates harmony in relationships even if the opinions or personalities don’t match. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

 

 

 

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Success Life_kmsraj51

Picture Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए – (100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

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