अपनी आदतों को कैसे बदलें।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ अपनी आदतों को कैसे बदलें। ϒ

ज़िंदगी बहुत छोटी है इसलिए समय बर्बाद मत करो। 

प्यारे दोस्तों – ज़िंदगी बहुत छोटी है इसलिए समय बर्बाद मत करो। समय के महत्व काे समझे व समय के साथ-२ चलने का अभ्यास करें। अपने Mind काे कुछ इस तरह से खुराक दें।

how-to-change-your-habits-kmsraj51

  • अधिकतर लाेग अपनी आदताें काे खुद पर नियंत्रण करने की अनुमति दे देते हैं। अगर वे आदतें बुरी हाें, ताे उनके नज़रियाें पर नकारात्मक असर डालती हैं।
  • किसी भी इंसान के Mind काे काेई भी दृढ़ आदत डालने में कम से कम 21 दिन लगते हैं।
  • इंसान का Mind किसी भी प्रकार के कर्म काे निरंतर 21 दिनों तक करता रहता है ताे – आगे वह कर्म स्वतः ही बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के निरंतर चलता रहता हैं।
  • आज के मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या यह है कि काेई भी आदत डालने का संकल्प ताे ले लेते है, पर वह संकल्प दृढ़ नहीं हाेता – जिस कारण किसी भी नई आदत काे प्रारंभ करने के 3-7 दिन या ज्यादा से ज्यादा 15 दिनों तक ही करता है, उसके बाद अपने उन्हीं पुरानी आदताें पर वापस आ जाता हैं।  नये वर्ष (New Year’s) के प्रारंभ हाेने पर जिन नये आदताें काे डालने का संकल्प लिए जाते है वो इसी श्रेणी(category) में आते है।
  • किसी भी नई आदत काे डालने का सबसे कारगर तरिका यह है की उस आदत के लिये Mind काे आंतरिक रूप से तैयार करें।
  • काेई भी नई आदत डालने में आजकल के लाेग सबसे बडी गलती यह करते है कि पहले ही दिन से ज्यादा समय देना चाहते है उस आदत काे डालने के लिये। For Example ….. A संकल्प लेता है कि अब मैं प्रतिदिन सुबह जल्दी उठूंगा, 4 बजे भाेर में ही, पर हाेता क्या हैं, पहले दिन….. दूसरे दिन ….. उठता है ….. तीसरे दिन साेया ही रहता है। अब गलती कहाँ पर हुई …(याद रखें कि – A पहले सुबह 6 बजे उठता था।) A से गलती यह हुई की उसने पहले ही दिन से 4 बजे उठने की काेशिश की, जबकी ऐसा नहीं करना था। …. काे सुबह 4 बजे उठने के लिये कुछ इस तरह से अभ्यास करना चाहिए था… पहले दिन 5:45 पर… दूसरे दिन 5:30 पर …. तीसरे दिन 5:15 पर … चाैथे दिन 5:00 पर …. व पांचवें दिन 4:45 पर ….. तथा आगे के दिनों में 15 मिनट कम करते-करते आठवे दिन 4 बजे उठने लगता।
  • 15 मिनट पहले उठने के अंतर काे इंसानी शरीर सरलता पूर्वक सह लेता है इससे ज़्यादा नहीं।
  • परिवर्तन की चुनाैती के प्रेम में पड़ें और परिवर्तन की इच्छा काे बढ़ते हुए देखें।
  • बुरी आदतों काे धीरे-धीरे छाेडते जाये व उनकी जगह एक-एक अच्छी आदतों काे डालते जाये। एक दिन ऐसा आयेगा जब आपके Mind के अंदर मात्र अच्छी आदतों का भंडार हाेगा।

नज़रिया और कुछ नहीं, विचार की आदत है। चाहे वे अच्छी हाें या बुरी, आदत डालने की प्रक्रिया समान रहती है। सफल हाेने की आदत डालना भी उतना ही आसान है, जितना कि असफल हाेने की आदत डालना।

हम सभी अपनी आदतों की वजह से अपनी ज़िंदगी में खुशियाँ पा सकते हैं या फिर मुश्किल में भी पड़ सकते हैं।~Kmsraj51

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Head Editor, Founder & CEO
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

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अच्छी आदतें कैसे डालें।

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ϒ अच्छी आदतें कैसे डालें। ϒ

नज़रिया और कुछ नहीं, विचार की आदत है। चाहे वे अच्छी हाें या बुरी, आदत डालने की प्रक्रिया समान रहती है। सफल हाेने की आदत डालना भी उतना ही आसान है, जितना कि असफल हाेने की आदत डालना।

How to enter good habits-kmsraj51

आदतें सहज प्रवृत्ति की तरह जन्मजात नहीं हाेती; वे सीखे गए कार्य या प्रतिक्रियाएँ हाेती हैं। वे अकारण उत्पन्न नहीं हाेती हैं; उनका काेई न काेई कारण हाेता है। एक बार जब किसी आदत के मूल कारण का पता चल जाता है, ताे उसे स्वीकार या अस्वीकार करना आपकी शक्ति में हाेता है। अधिकतर लाेग अपनी आदताें काे खुद पर नियंत्रण करने की अनुमति दे देते हैं। अगर वे आदतें बुरी हाें, ताे उनके नज़रियाें पर नकारात्मक असर डालती हैं।

बुरी आदतों को अच्छी आदत में बदलने के तरीके:

How to change bad habits into good habits:

क़दम # १ : अपनी बुरी आदतों की सूची बनाएँ।

क़दम # २ : मूल कारण क्या था?

क़दम # ३ : सहायक कारण काैन से थे?

क़दम # ४ : बुरी आदत की जगह लेने वाली एक सकारात्मक अच्छी आदत तय करें।

क़दम # ५ : अच्छी आदत, उसके लाभाें और परिणामाें के बारे में साेचें।

क़दम # ६ : इस आदत काे डालने के लिए कार्य करें।

क़दम # ७ : इस आदत काे बलवान करने के लिए इस पर प्रतिदिन काम करें।

क़दम # ८ : अपनी अच्छी आदत के एक लाभ पर ग़ाैर करके खुद काे पुरस्कार दें।

अपनी साेचने की नज़रिया काे बदले:

अपनी साेचने की शब्दावली बदलकर यह प्रक्रिया शुरु कर दें:

∇ इन शब्दाें काे पूरी तरह से मिटा दें:                             ∇ इन शब्दाें काे अपनी शब्दावली का हिस्सा बनाएँ:

  1. मैं नहीं कर सकता                                                                   1. मैं कर सकता हूँ
  2. काश                                                                                      2. मैं करूँगा
  3. शंका                                                                                      3. सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद
  4. मुझे नहीं लगता                                                                       4. मैं जानता हूँ
  5. मेरे पास समय नहीं है                                                               5. मैं समय निकाल लूँगा
  6. शायद                                                                                     6. पक्का
  7. मुझे डर है                                                                               7. मुझे विश्वास है
  8. मैं यकीन नहीं करता                                                                8. मुझे यकीन है
  9. (कम करें) मैं                                                                           9. (बढ़ावा दें) आप
  10. यह असंभव है                                                                         10. सभी चीज़े संभव हैं

बदलने की इच्छा रखें:

बदलने की इच्छा आपके नज़रिये के परिवर्तन की सफलता काे जितना तय करेगी, उतना काेई दूसरा चयन नहीं करेगा। जब सब कुछ असफल हाे जाता है, तब भी सिर्फ इच्छा आपकाे सही दिशा में बनाए रख सकती है। कई लाेग खुद काे बेहतर बनाने के लिए अजेय दिखने वाली बाधाओं काे पार कर चुके हैं, जब उन्हे यह अहसास हुआ कि परिवर्तन संभव है, बशर्ते वे इसे शिद्दत से चाहें। मैं इसका एक उदाहरण देना चाहूँगा।

  • एक दिन एक मेंढक उछलते हुए एक देहाती सड़क पर बने बहुत बड़े गड्ढे में पहुँच गया। कूदकर बाहर निकलने की उसकी सारी काेशिशें बेकार गईं। जल्द ही एक ख़रगाेश गड्ढे में फँसे मेंढक के पास आया और उसने उसे बाहर निकालने का प्रयास किया। वह भी नाकाम हाे गया। जंगल के कई जानवराें ने बेचारे मेंढक काे बाहर निकालने के तीन-चार साहसिक प्रयास किए़, लेकिन आख़िरकार उन्हाेंने काेशिश छाेड़ दी। उन्हाेंने कहा, “हम अब लाैटकर जाते हैं और तुम्हारे लिए कुछ भाेजन ले आते हैं। ऐसा लगता है कि तुम कुछ समय तक यहीं रहने वाले हाे।” बहरहाल, जब वे भाेजन लेने जा रहे थे, तभी कुछ समय बाद उन्हाेंने मेंढक के अपने पीछे फुदकने की आवाज सुनी। उन्हें इस पर यकीन नहीं हुआ। उन्हाेंने अचरज से कहा, “हमने ताे साेचा था कि तुम बाहर नहीं निकल सकते!” मेंढक ने जवाब दिया, “ओह, मैं नहीं निकल सकता था। लेकिन देखाे, एक बड़ा सा ट्रक बिलकुल मेरी ही ओर चला आ रहा था और मुझे निकलना ही पड़ा।”
  • परिवर्तन की चुनाैती के प्रेम में पड़ें और परिवर्तन की इच्छा काे बढ़ते हुए देखें।
  • जब हमें “जीवन के गड्ढाें से बाहर निकलना ही हाेता है,” तभी हम बदलते हैं।
  • हम सभी अपनी आदतों की वजह से अपनी ज़िंदगी में खुशियाँ पा सकते हैं या फिर मुश्किल में भी पड़ सकते हैं।

Source : Book – Attitude 101 – जॉन सी॰ मैक्सवेल

मेरे प्यारे दोस्तों यह Inspirational Article मैंने “जॉन सी॰ मैक्सवेल” की Book “Attitude 101″ से ली हैं। नज़रिये काे बदलने के बारे में और ज्यादा जानकारी चाहते है, ताे My all time favorite – Book “Attitude 101″  जरूर पढ़े। वैसे मैं समय-समय पर आप सभी के लिए “नज़रिये काे बदलने” से संबंधित  Article लेकर आता रहुँगा।

  • हम सभी अपनी आदतों की वजह से अपनी ज़िंदगी में खुशियाँ पा सकते हैं या फिर मुश्किल में भी पड़ सकते हैं। ~Kmsraj51

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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उदारता और ज्यादा क्यों ना की जीवन में।

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उदारता और ज्यादा क्यों ना की जीवन में।

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उदारता और ज्यादा क्यों ना की जीवन में।

एक काफिला सफ़र के दौरान अँधेरी सुरंग से गुजर रहा था। उनके पैरों में कंकरिया चुभी, कुछ लोगों ने इस ख्याल से कि किसी और को ना चुभ जाये, नेकी की खातिर उठाकर जेब में रख ली । कुछ ने ज्यादा उठाई कुछ ने कम । जब अँधेरी सुरंग से बाहर आये तो देखा वो हीरे थे। जिन्होंने कम उठाये वो पछताए कि ज्यादा क्यों नहीं उठाए । जिन्होंने नहीं उठाए वो और पछताए । दुनिया में जिन्दगी की मिसाल इस अँधेरी सुरंग जैसी है और नेकी यहाँ कंकरियों की मानिंद है । इस जिंदगी में जो नेकी की वो आखिर में हीरे की तरह कीमती होगी और इन्सान तरसेगा कि और ज्यादा क्यों ना की। 

इसलिए मित्राें जीवन में जितना भी ज्यादा से ज्यादा हाे सके दूसराे का भी नेकी(भलाई) करें।

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दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

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Kmsraj51-CYMT-Oct-14-5

KMSRAJ51-Problem Solve

दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

अक्सर कई छात्र मेल के द्वारा या फोन के माध्यम से हमसे पूछते हैं कि हम प्रवेश परिक्षाओं में कैसे सफलता पायें या किस तरह तैयारी करें कि हमें कामयाबी मिले?  सच तो ये है कि, कामयाबी की चाह लिये हम सब अपने-अपने क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं। परन्तु अपने कार्य सम्पादन के दौरान अक्सर एक दुविधा में भी रहते हैं कि हमारे द्वारा किया गया कार्य सफल होगा या नही, ये हम कर पायेंगे या नही  इत्यादि इत्यादी. मित्रों, इस तरह की आशंकायें हमारी ऊर्जा को छींण करने का प्रयास करती हैं और स्वंय के विश्वास पर एक प्रश्न चिन्ह लगा देती हैं।  यही दुविधा सफलता की सबसे बङी बाधा है। किसी भी कार्य को करने से पहले उसके सभी पहलुओं पर विचार करना कार्य की रणनीति होती है परंतु जब नकारात्मक पहलु योजना पर हावी होता है तो यही संशय सफलता की सबसे बङी अङचन होती है। जिसके कारण हम एक कदम भी आगे नही रख पाते। जबकि जिवन का सबसे बङा सच है कि हमेशा परिस्थिति एक जैसी नही रहती, लक्ष्य की सफलता में कई रोङे आते हैं। जो इन रुकावटों को आत्मविश्वास के साथ पार करता है वो लक्ष्य हासिल करने में सफल होता है। लेकिन दूसरी ओर जो दुविधा के जंजाल में फंस जाता है, वो कभी भी आशाजनक सफलता नही अर्जित कर पाता है। ज्यादातर लोग ज्ञान और प्रतिभा की कमी से नही हारते बल्की इसलिये हार जाते हैं कि दुविधा में पङकर जीत से पहले ही मैदान छोङ देते हैं।

दुविधा तो एक द्वंद की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति निर्णय नही ले पाता और न ही स्वतंत्र ढंग से सोच पाता है। इतिहास गवाह है कि प्रत्येक सफल व्यक्तियों के रास्ते में अनेक मुश्किलें आईं किन्तु उन्होने उसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया समझा और आगे के कार्य हेतु कोशिश करते रहे। कई बार हम लोग किसी कार्य को करने से पहले इतना ज्यादा सोचते हैं कि समय पर काम नही हो पाता या हम अवसर को दुविधा के भंवर में कहीं खो देते हैं। यदि हम विद्यार्थी की बात करें तो कई बार ऐसा होता है कि कुछ छात्र विषय को लेकर इतने ज्यादा संशय में रहते हैं कि वो फार्म भरने में लेट हो जाते हैं या आशंकाओं के चक्कर में गलत विषय का चयन कर लेते हैं। जबकि सच तो ये है कि सभी विषय में मेहनत करनी होती है तभी अच्छे अंक मिलते हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि एक बुद्धिमान व्यक्ति भी लंबे समय तक दुविधाग्रस्त रहता है तो उसका भी मानसिक क्षरण हो जाता है। जिसके कारण सक्षम व्यक्ति भी उन्नति नही कर पाता। दुविधा सफलता की राह में सबसे बङी अङचन है। अत्यधिक संशय आत्मविश्वास को भी कमजोर बना देता है। यदि हम एक परशेंट असफल भी होते हैं, तो भी हमारे अनुभव में इजाफा ही होता है और अनुभव से आत्मविश्वास बढता है। मन में ये विश्वास रखना भी जरूरी है कि सब कुछ संभव है।

स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं कि,  संभव की सीमा जानने का सबसे अच्छा तरीका है, असंभव से भी आगे निकल जाना।

जो लोग सफलता की इबारत लिखे हैं उन्हे भी दुविधाओं के कोहरे से गुजरना पढा है परन्तु ऐसे में उन लोगों ने परिस्थिति को इस तरह ढाला कि वे अपनी योजनाएं  स्वयं निर्धारित कर सके। सफलता के लिये ये भी आवश्यक है कि हम हर परिस्थिति में स्वंय को तैयार रखें। किसी भी सफलता के लिये ये जरूरी है कि हम निर्णय लेने की भूमिका में आगे बढें; क्योंकि एक कदम भी आगे बढाने के लिये निर्णय तो लेना ही पङता है, तद्पश्चात जिंदगी हमें धीरे-धीरे खुद ही निर्णय लेना सीखा देती है। अतः सबसे पहले हम दुविधापूर्ण मनः स्थिति के शिकार न होते हुए स्वंय को संतुलित रखते हुए दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें, जिससे आशंकाओं और दुविधाओं का तिमिर नष्ट हो तथा सफलता की और हमसब का कदम अग्रसर हो।

डॉ.ए.पी.जे. कलाम के अनुसार,  Confidence & hard work is the best medicine to kill the disease called failure. It will make you a successful person. 

Post inspired by Mrs. अनिता शर्मा जी

Educational & Inspirational VIdeos (9.8 lacs+ Views):  YouTube videos Link

(http://www.youtube.com/channel/UCRh-7JPESNZWesMRfjvegcA?feature=watch)

Blog:  http://roshansavera.blogspot.in/

E-mail ID:  voiceforblind@gmail.com

अनीता जी नेत्रहीन विद्यार्थियों के सेवार्थ काम करती हैं।

एक अपील

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।

I am grateful to Anita Ji for sharing this wonderful article with KMSRAJ51 Readers.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥”

 ~KMSRAJ51

 

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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प्रेरणा का स्रोत!!

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प्रेरणा का स्रोत

प्रेरणा का स्रोत

दोस्तों ,जिंदगी है तो संघर्ष हैं,तनाव है,काम का pressure है, ख़ुशी है,डर है !लेकिन अच्छी बात यह है कि ये सभी स्थायी नहीं हैं!समय रूपी नदी के प्रवाह में से सब प्रवाहमान हैं!कोई भी परिस्थिति चाहे ख़ुशी की हो या ग़म की, कभी स्थाई नहीं होती ,समय के अविरल प्रवाह में विलीन हो जाती है!

ऐसा अधिकतर होता है की जीवन की यात्रा के दौरान हम अपने आप को कई बार दुःख ,तनाव,चिंता,डर,हताशा,निराशा,भय,रोग इत्यादि के मकडजाल में फंसा हुआ पाते हैं  हम तत्कालिक परिस्थितियों के इतने वशीभूत हो जाते हैं  कि दूर-दूर तक देखने पर भी हमें कोई प्रकाश की किरण मात्र भी दिखाई नहीं देती , दूर से चींटी की तरह महसूस होने वाली परेशानी हमारे नजदीक आते-आते हाथी के जैसा रूप धारण कर लेती है  और हम उसकी विशालता और भयावहता के आगे समर्पण कर परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी हो जाने देते हैं,वो परिस्थिति हमारे पूरे वजूद को हिला डालती है ,हमें हताशा,निराशा के भंवर में उलझा जाती है…एक-एक क्षण पहाड़ सा प्रतीत होता है और हममे से ज्यादातर लोग आशा की कोई  किरण ना देख पाने के कारण  हताश होकर परिस्थिति के आगे हथियार डाल देते हैं!

अगर आप किसी अनजान,निर्जन रेगिस्तान मे फँस जाएँ तो उससे निकलने का एक ही उपाए है ,बस -चलते रहें!   अगर आप नदी के बीच जाकर हाथ पैर नहीं चलाएँगे तो निश्चित ही डूब जाएंगे !  जीवन मे कभी ऐसा क्षण भी आता है, जब लगता है की बस अब कुछ भी बाकी नहीं है ,ऐसी परिस्थिति मे अपने  आत्मविश्वास और साहस के साथ सिर्फ डटे रहें क्योंकि-

“हर चीज का हल होता है,आज नहीं तो कल होता है|”

एक बार एक राजा की सेवा से प्रसन्न होकर एक साधू नें उसे एक ताबीज दिया और कहा की राजन  इसे अपने गले मे डाल लो और जिंदगी में कभी ऐसी परिस्थिति आये की जब तुम्हे लगे की बस अब तो सब ख़तम होने वाला है ,परेशानी के भंवर मे अपने को फंसा पाओ ,कोई प्रकाश की किरण नजर ना आ रही हो ,हर तरफ निराशा और हताशा हो तब तुम इस ताबीज को खोल कर इसमें रखे कागज़ को पढ़ना ,उससे पहले नहीं!

राजा ने वह ताबीज अपने गले मे पहन लिया !एक बार राजा अपने सैनिकों के साथ शिकार करने घने जंगल मे गया!  एक शेर का पीछा करते करते राजा अपने सैनिकों से अलग हो गया और दुश्मन राजा की सीमा मे प्रवेश कर गया,घना जंगल और सांझ का समय ,  तभी कुछ दुश्मन सैनिकों के घोड़ों की टापों की आवाज राजा को आई और उसने भी अपने घोड़े को एड लगाई,  राजा आगे आगे दुश्मन सैनिक पीछे पीछे!   बहुत दूर तक भागने पर भी राजा उन सैनिकों से पीछा नहीं छुडा पाया !  भूख  प्यास से बेहाल राजा को तभी घने पेड़ों के बीच मे एक गुफा सी दिखी ,उसने तुरंत स्वयं और घोड़े को उस गुफा की आड़ मे छुपा लिया !  और सांस रोक कर बैठ गया , दुश्मन के घोड़ों के पैरों की आवाज धीरे धीरे पास आने लगी !  दुश्मनों से घिरे हुए अकेले राजा को अपना अंत नजर आने लगा ,उसे लगा की बस कुछ ही क्षणों में दुश्मन उसे पकड़ कर मौत के घाट उतार देंगे !  वो जिंदगी से निराश हो ही गया था , की उसका हाथ अपने ताबीज पर गया और उसे साधू की बात याद आ गई !उसने तुरंत ताबीज को खोल कर कागज को बाहर निकाला और पढ़ा !   उस पर्ची पर लिखा था —“यह भी कट जाएगा “

राजा को अचानक  ही जैसे घोर अन्धकार मे एक  ज्योति की किरण दिखी , डूबते को जैसे कोई सहारा मिला !  उसे अचानक अपनी आत्मा मे एक अकथनीय शान्ति का अनुभव हुआ !  उसे लगा की सचमुच यह भयावह समय भी कट ही जाएगा ,फिर मे क्यों चिंतित होऊं !  अपने प्रभु और अपने पर विश्वासरख उसने स्वयं से कहा की हाँ ,यह भी कट जाएगा !

और हुआ भी यही ,दुश्मन के घोड़ों के पैरों की आवाज पास आते आते दूर जाने लगी ,कुछ समय बाद वहां शांति छा गई !  राजा रात मे गुफा से निकला और किसी तरह अपने राज्य मे वापस आ गया !

दोस्तों,यह सिर्फ किसी राजा की कहानी नहीं है यह हम सब की कहानी है !हम सभी परिस्थिति,काम ,तनाव के दवाव में इतने जकड जाते हैं की हमे कुछ सूझता नहीं है ,हमारा डर हम पर हावी होने लगता है ,कोई रास्ता ,समाधान दूर दूर तक नजर नहीं आता ,लगने लगता है की बस, अब सब ख़तम ,है ना?

जब ऐसा हो तो २ मिनट शांति से बेठिये ,थोड़ी गहरी गहरी साँसे लीजिये !  अपने आराध्य को याद कीजिये और स्वयं से जोर से कहिये –यह भी कट जाएगा !   आप देखिएगा एकदम से जादू सा महसूस होगा , और आप उस परिस्थिति से उबरने की शक्ति अपने अन्दर महसूस करेंगे !  आजमाया हुआ है ! बहुत कारगर है !

आशा है जैसे यह सूत्र मेरे जीवन मे मुझे प्रेरणा देता है ,आपके जीवन मे भी प्रेरणादायक सिद्ध होगा !!

नोट:- Post inspired by AKC (http://www.achhikhabar.com/). We are grateful to My dear friend Mr. Gopal Mishra & AKC for sharing this inspirational story in Hindi for http://kmsraj51.com/ readers.

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ईश्वर पर विश्वास रखें

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ईश्वर पर विश्वास रखें!

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ईश्वर पर विश्वास रखें!

एक दिन एक छोटे बच्चे ने अपनी माँ को उपवास करते देखा। उसने माँ से पुछा कि वो खा क्यो नही रही है और उसे पेट दर्द हो रहा होगा, तो माँ ने कहा कि मै ये
इसलिए कर रही हूँ ताकि भगवान हमारी मनोकामना पूरी करेंगे। बच्चे ने सोचा हो सकता है खुद को तकलीफ देने से उसे भी जो चाहिए वो मिल जाएगा। अगले
दिन माँ ने देखा कि उसका बेटा कड़ी धूप मे खड़ा है। माँ ने कारण पूछा तो बच्चे ने कहा, उसे एक खिलौना चाहिए इसलिए वह अपने आपको तकलीफ दे रहा था। तो माँ ने कहा, बेटे अगर तुम मुझसे प्यार से मांगते तो मै तुम्हे खिलौना ला देती, मुझ पर विश्वास करो ऒर तुम्हे अपने आप को दर्द देने की जरुरत नही। मै तुमसे प्यार करती हूँ और इस तरह तुम्हे नही देख सकती। तो बच्चे ने कहा, क्या भगवान तुमसे प्यार नही करते ? वह तुम्हे उपवास करते और तकलीफ लेते देख खुश होते है? तुम भी तो उनसे प्यार से, बिना दर्द लिए, जो चाहिए मांग सकती हो!!


ईश्वर पर विश्वास रखें…..

सामान्य जीवन जियें…

विनम्रता से चलें और..

ईमानदारी पूर्वक प्यार करें…

आपका दोस्त

कृष्ण मोहन सिंह ५१

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Simple Exercise To Identify Your Hidden Fears

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Simple Exercise To Identify Your Hidden Fears 

If you want to overcome and overpower fears that exist inside you, you have to first take a look at your feelings and hidden emotions. After realizing your feelings and emotions, you have to know how to manage them and finally correct or overcome them. Given below is a simple exercise that will help you to achieve that. This exercise will help you identify the conscious and sometimes sub-conscious (very subtle) fears that lie inside you. Choose an area of your life that you feel is negative and needs some improvement. Now, ask yourself these three questions:

1. What do I really want, what is my aim and objective?
2. What obstacle/obstacles are stopping me from achieving my objectives?
3. What prevents me from dealing with or overcoming that obstacle?

For each fear that comes to you in response to the question no. 3, ask yourself the following questions:
A. What is the worst that can happen, if what I fear occurs?
B. What is the best possible result for me and for others, if I do it even though I feel afraid of doing it?
C. Keeping in front of you the answer to question B and comparing it with the answer to question A will inspire you to overcome the fears that lie inside you.

Message

To forgive the self is to have the ability to forgive others too.

Projection: I sometimes find it very difficult to forgive the mistakes committed by others. I do try to understand but am not able to understand the other person’s behaviour and so find it difficult to forgive them.

Solution: When I have love for myself and am able to learn from all that happens, I am able to forgive myself. When I know to do this, I can understand the other person too from his perspective and can easily forgive him.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

Mera Baba

मेरा बाबा

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