अपनी आदतों को कैसे बदलें।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ अपनी आदतों को कैसे बदलें। ϒ

ज़िंदगी बहुत छोटी है इसलिए समय बर्बाद मत करो। 

प्यारे दोस्तों – ज़िंदगी बहुत छोटी है इसलिए समय बर्बाद मत करो। समय के महत्व काे समझे व समय के साथ-२ चलने का अभ्यास करें। अपने Mind काे कुछ इस तरह से खुराक दें।

how-to-change-your-habits-kmsraj51

  • अधिकतर लाेग अपनी आदताें काे खुद पर नियंत्रण करने की अनुमति दे देते हैं। अगर वे आदतें बुरी हाें, ताे उनके नज़रियाें पर नकारात्मक असर डालती हैं।
  • किसी भी इंसान के Mind काे काेई भी दृढ़ आदत डालने में कम से कम 21 दिन लगते हैं।
  • इंसान का Mind किसी भी प्रकार के कर्म काे निरंतर 21 दिनों तक करता रहता है ताे – आगे वह कर्म स्वतः ही बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के निरंतर चलता रहता हैं।
  • आज के मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या यह है कि काेई भी आदत डालने का संकल्प ताे ले लेते है, पर वह संकल्प दृढ़ नहीं हाेता – जिस कारण किसी भी नई आदत काे प्रारंभ करने के 3-7 दिन या ज्यादा से ज्यादा 15 दिनों तक ही करता है, उसके बाद अपने उन्हीं पुरानी आदताें पर वापस आ जाता हैं।  नये वर्ष (New Year’s) के प्रारंभ हाेने पर जिन नये आदताें काे डालने का संकल्प लिए जाते है वो इसी श्रेणी(category) में आते है।
  • किसी भी नई आदत काे डालने का सबसे कारगर तरिका यह है की उस आदत के लिये Mind काे आंतरिक रूप से तैयार करें।
  • काेई भी नई आदत डालने में आजकल के लाेग सबसे बडी गलती यह करते है कि पहले ही दिन से ज्यादा समय देना चाहते है उस आदत काे डालने के लिये। For Example ….. A संकल्प लेता है कि अब मैं प्रतिदिन सुबह जल्दी उठूंगा, 4 बजे भाेर में ही, पर हाेता क्या हैं, पहले दिन….. दूसरे दिन ….. उठता है ….. तीसरे दिन साेया ही रहता है। अब गलती कहाँ पर हुई …(याद रखें कि – A पहले सुबह 6 बजे उठता था।) A से गलती यह हुई की उसने पहले ही दिन से 4 बजे उठने की काेशिश की, जबकी ऐसा नहीं करना था। …. काे सुबह 4 बजे उठने के लिये कुछ इस तरह से अभ्यास करना चाहिए था… पहले दिन 5:45 पर… दूसरे दिन 5:30 पर …. तीसरे दिन 5:15 पर … चाैथे दिन 5:00 पर …. व पांचवें दिन 4:45 पर ….. तथा आगे के दिनों में 15 मिनट कम करते-करते आठवे दिन 4 बजे उठने लगता।
  • 15 मिनट पहले उठने के अंतर काे इंसानी शरीर सरलता पूर्वक सह लेता है इससे ज़्यादा नहीं।
  • परिवर्तन की चुनाैती के प्रेम में पड़ें और परिवर्तन की इच्छा काे बढ़ते हुए देखें।
  • बुरी आदतों काे धीरे-धीरे छाेडते जाये व उनकी जगह एक-एक अच्छी आदतों काे डालते जाये। एक दिन ऐसा आयेगा जब आपके Mind के अंदर मात्र अच्छी आदतों का भंडार हाेगा।

नज़रिया और कुछ नहीं, विचार की आदत है। चाहे वे अच्छी हाें या बुरी, आदत डालने की प्रक्रिया समान रहती है। सफल हाेने की आदत डालना भी उतना ही आसान है, जितना कि असफल हाेने की आदत डालना।

हम सभी अपनी आदतों की वजह से अपनी ज़िंदगी में खुशियाँ पा सकते हैं या फिर मुश्किल में भी पड़ सकते हैं।~Kmsraj51

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

अच्छी आदतें कैसे डालें।

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ϒ अच्छी आदतें कैसे डालें। ϒ

नज़रिया और कुछ नहीं, विचार की आदत है। चाहे वे अच्छी हाें या बुरी, आदत डालने की प्रक्रिया समान रहती है। सफल हाेने की आदत डालना भी उतना ही आसान है, जितना कि असफल हाेने की आदत डालना।

How to enter good habits-kmsraj51

आदतें सहज प्रवृत्ति की तरह जन्मजात नहीं हाेती; वे सीखे गए कार्य या प्रतिक्रियाएँ हाेती हैं। वे अकारण उत्पन्न नहीं हाेती हैं; उनका काेई न काेई कारण हाेता है। एक बार जब किसी आदत के मूल कारण का पता चल जाता है, ताे उसे स्वीकार या अस्वीकार करना आपकी शक्ति में हाेता है। अधिकतर लाेग अपनी आदताें काे खुद पर नियंत्रण करने की अनुमति दे देते हैं। अगर वे आदतें बुरी हाें, ताे उनके नज़रियाें पर नकारात्मक असर डालती हैं।

बुरी आदतों को अच्छी आदत में बदलने के तरीके:

How to change bad habits into good habits:

क़दम # १ : अपनी बुरी आदतों की सूची बनाएँ।

क़दम # २ : मूल कारण क्या था?

क़दम # ३ : सहायक कारण काैन से थे?

क़दम # ४ : बुरी आदत की जगह लेने वाली एक सकारात्मक अच्छी आदत तय करें।

क़दम # ५ : अच्छी आदत, उसके लाभाें और परिणामाें के बारे में साेचें।

क़दम # ६ : इस आदत काे डालने के लिए कार्य करें।

क़दम # ७ : इस आदत काे बलवान करने के लिए इस पर प्रतिदिन काम करें।

क़दम # ८ : अपनी अच्छी आदत के एक लाभ पर ग़ाैर करके खुद काे पुरस्कार दें।

अपनी साेचने की नज़रिया काे बदले:

अपनी साेचने की शब्दावली बदलकर यह प्रक्रिया शुरु कर दें:

∇ इन शब्दाें काे पूरी तरह से मिटा दें:                             ∇ इन शब्दाें काे अपनी शब्दावली का हिस्सा बनाएँ:

  1. मैं नहीं कर सकता                                                                   1. मैं कर सकता हूँ
  2. काश                                                                                      2. मैं करूँगा
  3. शंका                                                                                      3. सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद
  4. मुझे नहीं लगता                                                                       4. मैं जानता हूँ
  5. मेरे पास समय नहीं है                                                               5. मैं समय निकाल लूँगा
  6. शायद                                                                                     6. पक्का
  7. मुझे डर है                                                                               7. मुझे विश्वास है
  8. मैं यकीन नहीं करता                                                                8. मुझे यकीन है
  9. (कम करें) मैं                                                                           9. (बढ़ावा दें) आप
  10. यह असंभव है                                                                         10. सभी चीज़े संभव हैं

बदलने की इच्छा रखें:

बदलने की इच्छा आपके नज़रिये के परिवर्तन की सफलता काे जितना तय करेगी, उतना काेई दूसरा चयन नहीं करेगा। जब सब कुछ असफल हाे जाता है, तब भी सिर्फ इच्छा आपकाे सही दिशा में बनाए रख सकती है। कई लाेग खुद काे बेहतर बनाने के लिए अजेय दिखने वाली बाधाओं काे पार कर चुके हैं, जब उन्हे यह अहसास हुआ कि परिवर्तन संभव है, बशर्ते वे इसे शिद्दत से चाहें। मैं इसका एक उदाहरण देना चाहूँगा।

  • एक दिन एक मेंढक उछलते हुए एक देहाती सड़क पर बने बहुत बड़े गड्ढे में पहुँच गया। कूदकर बाहर निकलने की उसकी सारी काेशिशें बेकार गईं। जल्द ही एक ख़रगाेश गड्ढे में फँसे मेंढक के पास आया और उसने उसे बाहर निकालने का प्रयास किया। वह भी नाकाम हाे गया। जंगल के कई जानवराें ने बेचारे मेंढक काे बाहर निकालने के तीन-चार साहसिक प्रयास किए़, लेकिन आख़िरकार उन्हाेंने काेशिश छाेड़ दी। उन्हाेंने कहा, “हम अब लाैटकर जाते हैं और तुम्हारे लिए कुछ भाेजन ले आते हैं। ऐसा लगता है कि तुम कुछ समय तक यहीं रहने वाले हाे।” बहरहाल, जब वे भाेजन लेने जा रहे थे, तभी कुछ समय बाद उन्हाेंने मेंढक के अपने पीछे फुदकने की आवाज सुनी। उन्हें इस पर यकीन नहीं हुआ। उन्हाेंने अचरज से कहा, “हमने ताे साेचा था कि तुम बाहर नहीं निकल सकते!” मेंढक ने जवाब दिया, “ओह, मैं नहीं निकल सकता था। लेकिन देखाे, एक बड़ा सा ट्रक बिलकुल मेरी ही ओर चला आ रहा था और मुझे निकलना ही पड़ा।”
  • परिवर्तन की चुनाैती के प्रेम में पड़ें और परिवर्तन की इच्छा काे बढ़ते हुए देखें।
  • जब हमें “जीवन के गड्ढाें से बाहर निकलना ही हाेता है,” तभी हम बदलते हैं।
  • हम सभी अपनी आदतों की वजह से अपनी ज़िंदगी में खुशियाँ पा सकते हैं या फिर मुश्किल में भी पड़ सकते हैं।

Source : Book – Attitude 101 – जॉन सी॰ मैक्सवेल

मेरे प्यारे दोस्तों यह Inspirational Article मैंने “जॉन सी॰ मैक्सवेल” की Book “Attitude 101″ से ली हैं। नज़रिये काे बदलने के बारे में और ज्यादा जानकारी चाहते है, ताे My all time favorite – Book “Attitude 101″  जरूर पढ़े। वैसे मैं समय-समय पर आप सभी के लिए “नज़रिये काे बदलने” से संबंधित  Article लेकर आता रहुँगा।

  • हम सभी अपनी आदतों की वजह से अपनी ज़िंदगी में खुशियाँ पा सकते हैं या फिर मुश्किल में भी पड़ सकते हैं। ~Kmsraj51

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

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* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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उदारता और ज्यादा क्यों ना की जीवन में।

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उदारता और ज्यादा क्यों ना की जीवन में।

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उदारता और ज्यादा क्यों ना की जीवन में।

एक काफिला सफ़र के दौरान अँधेरी सुरंग से गुजर रहा था। उनके पैरों में कंकरिया चुभी, कुछ लोगों ने इस ख्याल से कि किसी और को ना चुभ जाये, नेकी की खातिर उठाकर जेब में रख ली । कुछ ने ज्यादा उठाई कुछ ने कम । जब अँधेरी सुरंग से बाहर आये तो देखा वो हीरे थे। जिन्होंने कम उठाये वो पछताए कि ज्यादा क्यों नहीं उठाए । जिन्होंने नहीं उठाए वो और पछताए । दुनिया में जिन्दगी की मिसाल इस अँधेरी सुरंग जैसी है और नेकी यहाँ कंकरियों की मानिंद है । इस जिंदगी में जो नेकी की वो आखिर में हीरे की तरह कीमती होगी और इन्सान तरसेगा कि और ज्यादा क्यों ना की। 

इसलिए मित्राें जीवन में जितना भी ज्यादा से ज्यादा हाे सके दूसराे का भी नेकी(भलाई) करें।

आपका सबका प्रिय दोस्त,

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दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

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Kmsraj51-CYMT-Oct-14-5

KMSRAJ51-Problem Solve

दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

अक्सर कई छात्र मेल के द्वारा या फोन के माध्यम से हमसे पूछते हैं कि हम प्रवेश परिक्षाओं में कैसे सफलता पायें या किस तरह तैयारी करें कि हमें कामयाबी मिले?  सच तो ये है कि, कामयाबी की चाह लिये हम सब अपने-अपने क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं। परन्तु अपने कार्य सम्पादन के दौरान अक्सर एक दुविधा में भी रहते हैं कि हमारे द्वारा किया गया कार्य सफल होगा या नही, ये हम कर पायेंगे या नही  इत्यादि इत्यादी. मित्रों, इस तरह की आशंकायें हमारी ऊर्जा को छींण करने का प्रयास करती हैं और स्वंय के विश्वास पर एक प्रश्न चिन्ह लगा देती हैं।  यही दुविधा सफलता की सबसे बङी बाधा है। किसी भी कार्य को करने से पहले उसके सभी पहलुओं पर विचार करना कार्य की रणनीति होती है परंतु जब नकारात्मक पहलु योजना पर हावी होता है तो यही संशय सफलता की सबसे बङी अङचन होती है। जिसके कारण हम एक कदम भी आगे नही रख पाते। जबकि जिवन का सबसे बङा सच है कि हमेशा परिस्थिति एक जैसी नही रहती, लक्ष्य की सफलता में कई रोङे आते हैं। जो इन रुकावटों को आत्मविश्वास के साथ पार करता है वो लक्ष्य हासिल करने में सफल होता है। लेकिन दूसरी ओर जो दुविधा के जंजाल में फंस जाता है, वो कभी भी आशाजनक सफलता नही अर्जित कर पाता है। ज्यादातर लोग ज्ञान और प्रतिभा की कमी से नही हारते बल्की इसलिये हार जाते हैं कि दुविधा में पङकर जीत से पहले ही मैदान छोङ देते हैं।

दुविधा तो एक द्वंद की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति निर्णय नही ले पाता और न ही स्वतंत्र ढंग से सोच पाता है। इतिहास गवाह है कि प्रत्येक सफल व्यक्तियों के रास्ते में अनेक मुश्किलें आईं किन्तु उन्होने उसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया समझा और आगे के कार्य हेतु कोशिश करते रहे। कई बार हम लोग किसी कार्य को करने से पहले इतना ज्यादा सोचते हैं कि समय पर काम नही हो पाता या हम अवसर को दुविधा के भंवर में कहीं खो देते हैं। यदि हम विद्यार्थी की बात करें तो कई बार ऐसा होता है कि कुछ छात्र विषय को लेकर इतने ज्यादा संशय में रहते हैं कि वो फार्म भरने में लेट हो जाते हैं या आशंकाओं के चक्कर में गलत विषय का चयन कर लेते हैं। जबकि सच तो ये है कि सभी विषय में मेहनत करनी होती है तभी अच्छे अंक मिलते हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि एक बुद्धिमान व्यक्ति भी लंबे समय तक दुविधाग्रस्त रहता है तो उसका भी मानसिक क्षरण हो जाता है। जिसके कारण सक्षम व्यक्ति भी उन्नति नही कर पाता। दुविधा सफलता की राह में सबसे बङी अङचन है। अत्यधिक संशय आत्मविश्वास को भी कमजोर बना देता है। यदि हम एक परशेंट असफल भी होते हैं, तो भी हमारे अनुभव में इजाफा ही होता है और अनुभव से आत्मविश्वास बढता है। मन में ये विश्वास रखना भी जरूरी है कि सब कुछ संभव है।

स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं कि,  संभव की सीमा जानने का सबसे अच्छा तरीका है, असंभव से भी आगे निकल जाना।

जो लोग सफलता की इबारत लिखे हैं उन्हे भी दुविधाओं के कोहरे से गुजरना पढा है परन्तु ऐसे में उन लोगों ने परिस्थिति को इस तरह ढाला कि वे अपनी योजनाएं  स्वयं निर्धारित कर सके। सफलता के लिये ये भी आवश्यक है कि हम हर परिस्थिति में स्वंय को तैयार रखें। किसी भी सफलता के लिये ये जरूरी है कि हम निर्णय लेने की भूमिका में आगे बढें; क्योंकि एक कदम भी आगे बढाने के लिये निर्णय तो लेना ही पङता है, तद्पश्चात जिंदगी हमें धीरे-धीरे खुद ही निर्णय लेना सीखा देती है। अतः सबसे पहले हम दुविधापूर्ण मनः स्थिति के शिकार न होते हुए स्वंय को संतुलित रखते हुए दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें, जिससे आशंकाओं और दुविधाओं का तिमिर नष्ट हो तथा सफलता की और हमसब का कदम अग्रसर हो।

डॉ.ए.पी.जे. कलाम के अनुसार,  Confidence & hard work is the best medicine to kill the disease called failure. It will make you a successful person. 

Post inspired by Mrs. अनिता शर्मा जी

Educational & Inspirational VIdeos (9.8 lacs+ Views):  YouTube videos Link

(http://www.youtube.com/channel/UCRh-7JPESNZWesMRfjvegcA?feature=watch)

Blog:  http://roshansavera.blogspot.in/

E-mail ID:  voiceforblind@gmail.com

अनीता जी नेत्रहीन विद्यार्थियों के सेवार्थ काम करती हैं।

एक अपील

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।

I am grateful to Anita Ji for sharing this wonderful article with KMSRAJ51 Readers.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥”

 ~KMSRAJ51

 

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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प्रेरणा का स्रोत!!

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प्रेरणा का स्रोत

प्रेरणा का स्रोत

दोस्तों ,जिंदगी है तो संघर्ष हैं,तनाव है,काम का pressure है, ख़ुशी है,डर है !लेकिन अच्छी बात यह है कि ये सभी स्थायी नहीं हैं!समय रूपी नदी के प्रवाह में से सब प्रवाहमान हैं!कोई भी परिस्थिति चाहे ख़ुशी की हो या ग़म की, कभी स्थाई नहीं होती ,समय के अविरल प्रवाह में विलीन हो जाती है!

ऐसा अधिकतर होता है की जीवन की यात्रा के दौरान हम अपने आप को कई बार दुःख ,तनाव,चिंता,डर,हताशा,निराशा,भय,रोग इत्यादि के मकडजाल में फंसा हुआ पाते हैं  हम तत्कालिक परिस्थितियों के इतने वशीभूत हो जाते हैं  कि दूर-दूर तक देखने पर भी हमें कोई प्रकाश की किरण मात्र भी दिखाई नहीं देती , दूर से चींटी की तरह महसूस होने वाली परेशानी हमारे नजदीक आते-आते हाथी के जैसा रूप धारण कर लेती है  और हम उसकी विशालता और भयावहता के आगे समर्पण कर परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी हो जाने देते हैं,वो परिस्थिति हमारे पूरे वजूद को हिला डालती है ,हमें हताशा,निराशा के भंवर में उलझा जाती है…एक-एक क्षण पहाड़ सा प्रतीत होता है और हममे से ज्यादातर लोग आशा की कोई  किरण ना देख पाने के कारण  हताश होकर परिस्थिति के आगे हथियार डाल देते हैं!

अगर आप किसी अनजान,निर्जन रेगिस्तान मे फँस जाएँ तो उससे निकलने का एक ही उपाए है ,बस -चलते रहें!   अगर आप नदी के बीच जाकर हाथ पैर नहीं चलाएँगे तो निश्चित ही डूब जाएंगे !  जीवन मे कभी ऐसा क्षण भी आता है, जब लगता है की बस अब कुछ भी बाकी नहीं है ,ऐसी परिस्थिति मे अपने  आत्मविश्वास और साहस के साथ सिर्फ डटे रहें क्योंकि-

“हर चीज का हल होता है,आज नहीं तो कल होता है|”

एक बार एक राजा की सेवा से प्रसन्न होकर एक साधू नें उसे एक ताबीज दिया और कहा की राजन  इसे अपने गले मे डाल लो और जिंदगी में कभी ऐसी परिस्थिति आये की जब तुम्हे लगे की बस अब तो सब ख़तम होने वाला है ,परेशानी के भंवर मे अपने को फंसा पाओ ,कोई प्रकाश की किरण नजर ना आ रही हो ,हर तरफ निराशा और हताशा हो तब तुम इस ताबीज को खोल कर इसमें रखे कागज़ को पढ़ना ,उससे पहले नहीं!

राजा ने वह ताबीज अपने गले मे पहन लिया !एक बार राजा अपने सैनिकों के साथ शिकार करने घने जंगल मे गया!  एक शेर का पीछा करते करते राजा अपने सैनिकों से अलग हो गया और दुश्मन राजा की सीमा मे प्रवेश कर गया,घना जंगल और सांझ का समय ,  तभी कुछ दुश्मन सैनिकों के घोड़ों की टापों की आवाज राजा को आई और उसने भी अपने घोड़े को एड लगाई,  राजा आगे आगे दुश्मन सैनिक पीछे पीछे!   बहुत दूर तक भागने पर भी राजा उन सैनिकों से पीछा नहीं छुडा पाया !  भूख  प्यास से बेहाल राजा को तभी घने पेड़ों के बीच मे एक गुफा सी दिखी ,उसने तुरंत स्वयं और घोड़े को उस गुफा की आड़ मे छुपा लिया !  और सांस रोक कर बैठ गया , दुश्मन के घोड़ों के पैरों की आवाज धीरे धीरे पास आने लगी !  दुश्मनों से घिरे हुए अकेले राजा को अपना अंत नजर आने लगा ,उसे लगा की बस कुछ ही क्षणों में दुश्मन उसे पकड़ कर मौत के घाट उतार देंगे !  वो जिंदगी से निराश हो ही गया था , की उसका हाथ अपने ताबीज पर गया और उसे साधू की बात याद आ गई !उसने तुरंत ताबीज को खोल कर कागज को बाहर निकाला और पढ़ा !   उस पर्ची पर लिखा था —“यह भी कट जाएगा “

राजा को अचानक  ही जैसे घोर अन्धकार मे एक  ज्योति की किरण दिखी , डूबते को जैसे कोई सहारा मिला !  उसे अचानक अपनी आत्मा मे एक अकथनीय शान्ति का अनुभव हुआ !  उसे लगा की सचमुच यह भयावह समय भी कट ही जाएगा ,फिर मे क्यों चिंतित होऊं !  अपने प्रभु और अपने पर विश्वासरख उसने स्वयं से कहा की हाँ ,यह भी कट जाएगा !

और हुआ भी यही ,दुश्मन के घोड़ों के पैरों की आवाज पास आते आते दूर जाने लगी ,कुछ समय बाद वहां शांति छा गई !  राजा रात मे गुफा से निकला और किसी तरह अपने राज्य मे वापस आ गया !

दोस्तों,यह सिर्फ किसी राजा की कहानी नहीं है यह हम सब की कहानी है !हम सभी परिस्थिति,काम ,तनाव के दवाव में इतने जकड जाते हैं की हमे कुछ सूझता नहीं है ,हमारा डर हम पर हावी होने लगता है ,कोई रास्ता ,समाधान दूर दूर तक नजर नहीं आता ,लगने लगता है की बस, अब सब ख़तम ,है ना?

जब ऐसा हो तो २ मिनट शांति से बेठिये ,थोड़ी गहरी गहरी साँसे लीजिये !  अपने आराध्य को याद कीजिये और स्वयं से जोर से कहिये –यह भी कट जाएगा !   आप देखिएगा एकदम से जादू सा महसूस होगा , और आप उस परिस्थिति से उबरने की शक्ति अपने अन्दर महसूस करेंगे !  आजमाया हुआ है ! बहुत कारगर है !

आशा है जैसे यह सूत्र मेरे जीवन मे मुझे प्रेरणा देता है ,आपके जीवन मे भी प्रेरणादायक सिद्ध होगा !!

नोट:- Post inspired by AKC (http://www.achhikhabar.com/). We are grateful to My dear friend Mr. Gopal Mishra & AKC for sharing this inspirational story in Hindi for http://kmsraj51.com/ readers.

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तैयारी इतनी खामोशी से करो की सफलता शोर मचा दे |

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ईश्वर पर विश्वास रखें

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ईश्वर पर विश्वास रखें!

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ईश्वर पर विश्वास रखें!

एक दिन एक छोटे बच्चे ने अपनी माँ को उपवास करते देखा। उसने माँ से पुछा कि वो खा क्यो नही रही है और उसे पेट दर्द हो रहा होगा, तो माँ ने कहा कि मै ये
इसलिए कर रही हूँ ताकि भगवान हमारी मनोकामना पूरी करेंगे। बच्चे ने सोचा हो सकता है खुद को तकलीफ देने से उसे भी जो चाहिए वो मिल जाएगा। अगले
दिन माँ ने देखा कि उसका बेटा कड़ी धूप मे खड़ा है। माँ ने कारण पूछा तो बच्चे ने कहा, उसे एक खिलौना चाहिए इसलिए वह अपने आपको तकलीफ दे रहा था। तो माँ ने कहा, बेटे अगर तुम मुझसे प्यार से मांगते तो मै तुम्हे खिलौना ला देती, मुझ पर विश्वास करो ऒर तुम्हे अपने आप को दर्द देने की जरुरत नही। मै तुमसे प्यार करती हूँ और इस तरह तुम्हे नही देख सकती। तो बच्चे ने कहा, क्या भगवान तुमसे प्यार नही करते ? वह तुम्हे उपवास करते और तकलीफ लेते देख खुश होते है? तुम भी तो उनसे प्यार से, बिना दर्द लिए, जो चाहिए मांग सकती हो!!


ईश्वर पर विश्वास रखें…..

सामान्य जीवन जियें…

विनम्रता से चलें और..

ईमानदारी पूर्वक प्यार करें…

आपका दोस्त

कृष्ण मोहन सिंह ५१

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लिए समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

 

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Simple Exercise To Identify Your Hidden Fears

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Simple Exercise To Identify Your Hidden Fears 

If you want to overcome and overpower fears that exist inside you, you have to first take a look at your feelings and hidden emotions. After realizing your feelings and emotions, you have to know how to manage them and finally correct or overcome them. Given below is a simple exercise that will help you to achieve that. This exercise will help you identify the conscious and sometimes sub-conscious (very subtle) fears that lie inside you. Choose an area of your life that you feel is negative and needs some improvement. Now, ask yourself these three questions:

1. What do I really want, what is my aim and objective?
2. What obstacle/obstacles are stopping me from achieving my objectives?
3. What prevents me from dealing with or overcoming that obstacle?

For each fear that comes to you in response to the question no. 3, ask yourself the following questions:
A. What is the worst that can happen, if what I fear occurs?
B. What is the best possible result for me and for others, if I do it even though I feel afraid of doing it?
C. Keeping in front of you the answer to question B and comparing it with the answer to question A will inspire you to overcome the fears that lie inside you.

Message

To forgive the self is to have the ability to forgive others too.

Projection: I sometimes find it very difficult to forgive the mistakes committed by others. I do try to understand but am not able to understand the other person’s behaviour and so find it difficult to forgive them.

Solution: When I have love for myself and am able to learn from all that happens, I am able to forgive myself. When I know to do this, I can understand the other person too from his perspective and can easily forgive him.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

Mera Baba

मेरा बाबा

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लिए समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

 

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खुशी संसार में नहीं

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 खुशी संसार में नहीं

 एक बार की बात है कि एक शहर में बहुत अमीर सेठ रहता था| अत्यधिक धनी होने पर भी वह हमेशा दुःखी ही रहता था| एक दिन ज़्यादा परेशान होकर वह एक ऋषि के पास गया और उसने अपनी सारी समस्या ऋषि को बताई | उन्होने सेठ की हुई बात ध्यान से सुनी और सेठ से कहा कि कल तुम इसी वक्त फिर से मेरे पास आना , मैं कल ही तुम्हें तुम्हारी सारी समस्याओं का हल बता दूँगा |

सेठ खुशी खुशी घर गया और अगले दिन जब फिर से ऋषि के पास आया तो उसने देखा कि ऋषि सड़क पर कुछ ढूँढने में व्यस्त थे| सेठ ने गुरु जी से पूछा कि महर्षि आप क्या ढूँढ रहे हैं , गुरुजी बोले कि मेरी एक अंगूठी गिर गयी है मैं वही ढूँढ रहा हूँ पर काफ़ी देर हो गयी है लेकिन अंगूठी मिल ही नहीं रही है|
यह सुनकर वह सेठ भी अंगूठी ढूँढने में लग गया, जब काफ़ी देर हो गयी तो सेठ ने फिर गुरु जी से पूछा कि आपकी अंगूठी कहाँ गिरी थी| ऋषि ने जवाब दिया कि अंगूठी मेरे आश्रम में गिरी थी पर वहाँ काफ़ी अंधेरा है इसीलिए मैं यहाँ सड़क पर ढूँढ रहा हूँ| सेठ ने चौंकते हुए पूछा कि जब आपकी अंगूठी आश्रम में गिरी है तो यहाँ क्यूँ ढूँढ रहे हैं| ऋषि ने मुस्कुराते हुए कहा कि यही तुम्हारे कल के प्रश्न का उत्तर है, खुशी तो मन में छुपी है लेकिन तुम उसे धन में खोजने की कोशिश कर रहे हो| इसीलिए तुम दुःखी हो, यह सुनकर सेठ ऋषि के पैरों में गिर गया|
              तो मित्रों, “यही बात हम लोगों पर भी लागू होती है जीवन भर पैसा इकट्ठा करने के बाद भी इंसान खुश नहीं रहता क्यूंकि हम पैसा कमाने में इतना मगन हो जाते हैं और अपनी खुशी आदि सब कुछ भूल जाते हैं |”

Post share by: Pratush Tripathi

We are grateful to Pratush Tripathi Ji for sharing the inspirational story in Hindi.

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Kmsraj51 की कलम से …..

Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब)…..

“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

 

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कैसे पायें पढ़ाई में सफ़लता ? 20 Tips

 kmsraj51 की कलम से

Soulword_kmsraj51 - Change Y M T

बोर्ड की परीक्षाओं का परिणाम आते ही जहाँ सामान्यतः चारों तरफ़ विद्यार्थियों में ख़ुशी की लहर दौड़ जाती है, वहीं   न्यूज़ पेपर्स और टीवी चैनल्स पर कुछ दुखद समाचार भी सामने आते हैं, जहाँ विद्यार्थी अच्छे नंबर ना आने और

Kids_Education-KMSRAJ51मानसिक दबाव के कारण आत्महत्या तक कर बैठते हैं | यह एक बहुत ही गंभीर विषय है क्योंकि विद्यार्थी आत्महत्या के मामलों में हम प्रथम स्थान पर हैं |

दोस्तों, कहा जाता है कि “अभ्यास में जितना अधिक पसीना बहाओगे, युद्ध में उतना ही खून कम बहेगा” |

वैसे आज के प्रतियोगिता भरे युग में, पढ़ाई करना और अच्छे नम्बरों से पास होना किसी लड़ाई से कम नहीं रह गया है | बात तो बहुत सीधी सी है कि अगर आपको ये लड़ाई जीतनी है तो इसके लिए पहले से रणनीति बनाने और उसके अनुरूप तैयारी करने की आवश्यकता है |

आमतौर पर सही मार्गदर्शन के अभाव में विद्यार्थी ठीक ढ़ंग से तैयारी नहीं कर पाते और परीक्षा का समय नजदीक आते ही उनमें चिंता और घबराहट बढ़ने लगती है | किसी भी परीक्षा की तैयारी करने और सफल होने के कुछ सूत्र यहाँ दिए गए हैं |

 

सफ़लता के सूत्र

1. काम को टालने की आदत छोड़े

मित्रों, यदि आप वास्तव में सफल होना चाहतें हैं तो आपको कार्यों को टालने की आदत का त्याग करना होगा | जो कार्य ज़रूरी है , उसे सही समय पर करें | आपने सुना होगा कि “काल करे सो आज कर , आज करे सो अब , पल में परलय होएगी ,बहुरि करेगा कब” | जिसका मतलब है कि हमें कल के काम को आज और आज के काम को अभी कर लेना चाहिए |

लेकिन आज के युवाओं ने एक नए दोहे को जन्म दे दिया है | उनका कहना है कि “आज करे सो काल कर , काल करे सो परसों, इतनी जल्दी क्यों करे , अभी पड़े हैं बरसों” | दोस्तों पर सच्चाई क्या है , ये हम सभी जानते है | इसलिए हमें काम को टालना नहीं चाहिए बल्कि सभी जरूरी काम समय पर करने चाहियें |

2. अध्ययन के लिए उपयुक्त स्थान का चयन करें

पढ़ाई करने के लिए एक उपयुक्त एवं शांत जगह का चुनाव करना बहुत ज़रूरी है | पढ़ाई का स्थान ऐसा होना चाहिए जहाँ पर पूरी एकाग्रता और शांत मन से बैठकर पढ़ा जा सके | यदि घर छोटा हो या घर में ऐसा कोई उपयुक्त स्थान ना हो तो घर के बाहर किसी शांत जगह , किसी दोस्त के घर या किसी पुस्तकालय (Library) में जाकर पढ़ना ज्यादा अच्छा होगा |

3. पढ़ाई के लिए समय सारणी बनाएं

जो भी विद्यार्थी सफल होना चाहता है उसके लिए आवश्यक है कि वह पढ़ाई के लिए निर्धारित किये गए समय की एक समय सारणी (Time Table) बनाएं | उस समय सारणी में हर विषय के लिए एक निश्चित समय आवंटित करें | एक सही समय सारणी बनाने पर ही आप हर विषय पर सही ध्यान दे पायेंगे | दोस्तों , केवल समय सारणी बना लेना ही पर्याप्त नहीं है , उसका पालन करना भी ज़रूरी है |

4. खेल कूद एवं मनोरंजन के लिए समय दें

एक विद्यार्थी के सर्वांगिक विकास (Comprehensive Development ) के लिए ज़रूरी है कि उसे पढ़ाई के साथ साथ खेल कूद और अपने मनोरंजन के लिए भी समय देना चाहिए | खेल कूद से शारीरिक विकास होता है |

घर के अन्दर भी आप बुद्धिवर्धक खेलों ( Memory Improvement Games ) का आनंद ले सकते हैं |

5. बड़े कार्यों को छोटे छोटे भागों में बाँटें

कोई भी बड़ा कार्य जब हम करने लगते हैं तो शुरुआत में बहुत कठिन और असंभव लगता है | लेकिन जब हम उसे छोटे छोटे टुकड़ों में बाँट देते हैं और तो वही काम आसान हो जाता है | इसी प्रकार पढ़ाई में भी बड़े Chapter या Formula को छोटे भागों में बाँट कर आसान बनाया जा सकता है | इससे पढ़ना आसान और रुचिकर हो जाता है |

6. अपने ऊर्जा स्तर को जानें

दिन में अलग अलग समय पर हर व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक उर्ज़ा का स्तर अलग हो सकता है | उदाहरण के तौर पर कुछ लोग सुबह के समय ज्यादा Fresh और Energetic महसूस करते हैं तो कुछ लोग शाम को या फिर रात के समय | कुछ लोगों को सुबह उठ कर पढ़ा हुआ ज्यादा याद रहता है तो कुछ को देर रात को पढ़ा हुआ | तो जिस समय आप अपने को ज्यादा Fresh और उर्ज़ावान महसूस करते हैं, वह समय आप अपनी पढ़ाई के लिए रखें |

7. पढ़ाई के बीच अल्प विश्राम लें

पढ़ाई करते समय आपका दिमाग थक जाता है | जब भी आप थकान महसूस करें तो एक अल्प विश्राम (Short Break) ज़रूर लें | आमतौर पर पढ़ाई करते समय 30 से 40 मिनट के बाद आपको थोड़ा आराम करना चाहिए |

8. मुख्य बिन्दुओं को Highlight करें

जब भी आप पढ़ाई करने बैठें, तो अपने साथ एक Highlighter Pen हमेशा रखें | अगर आपको कोई महत्वपूर्ण नाम, तिथि, स्थान या वाक्य दिखाई देता है तो तुरंत उसे Highlight कर लीजिये | इस तरह से Revision करते समय आपको काफ़ी मदद मिलेगी |

9. अपना लक्ष्य निर्धारित करें

जीवन में अपनी पढ़ाई के लक्ष्य निर्धारित कीजिये | आप कौन सा Chapter या किताब कितने दिनों में ख़त्म करना चाहते हैं, कौन से Subjects पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है अथवा अपने मनपसंद कॉलेज में जाने के लिए कितने प्रतिशत अंकों की ज़रूरत होगी | इस प्रकार अपनी पढ़ाई के लक्ष्यों तो तय करना बहुत ज़रूरी है | अगर आप हर हफ्ते, महीने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए पढ़ाई करेंगे तो साल के अंत में बिना घबराहट के सही ढंग से परीक्षा की तैयारी कर पायेंगे |

10. सभी ज्ञानेन्द्रियों (Senses) को सम्मिलित करें

अपनी पाँचों ज्ञानेन्द्रियों (कान, नाक, आँख, जीभ और त्वचा) का यथासंभव प्रयोग अपनी पढ़ाई में करें | किताब में छपे पिक्चर और चार्ट्स आदि को ध्यान से देखें | यदि संभव हो तो लैब में Practical करें या विषय से सम्बंधित मॉडल को छू कर देखें | आजकल किताबों के साथ CD भी आती है | इन CDs से भी विषय को समझने में काफ़ी मदद मिलती है |

11. बुद्धिवर्धक तकनीकों का प्रयोग करें

यदि आप बुद्धिवर्धक तकनीकों (Memory Improvement Techniques) के बारे में जानते हैं या आपने इन्हें कहीं से सीखा है, तो इनका प्रयोग अपनी पढ़ाई में ज़रूर करिये | ये Techniques बहुत ही वैज्ञानिक और रिजल्ट ओरिएंटेड होती हैं |

12. संतुलित भोजन करें

एक पुरानी कहावत है “जैसा अन्न , वैसा मन”, जिसका अर्थ है कि व्यक्ति जैसा अन्न खाता है वैसा ही उसका मन और शरीर बनता है | यह बहुत ज़रूरी है कि आप संतुलित भोजन लें | कोल्ड ड्रिंक्स और पिज़्ज़ा व बर्गर जैसे जंक फ़ूड से बचें | भोजन का सही तरीका है कि आप सुबह का नाश्ता भारी , दोपहर का भोजन उससे हल्का और रात का भोजन उससे भी हल्का लें | यदि संभव हो तो रात के भोजन में केवल सलाद (Salad) और द्रव्य पदार्थ (Liquids) ही लें |

13. शरीर को स्वस्थ रखें

क्योंकि एक स्वस्थ शरीर में ही एक स्वस्थ मन निवास करता है, इसलिए सुबह के समय सैर पर जायें और अपने सामर्थ्य के अनुसार व्यायाम(Exercise) करें | जितना स्वस्थ आपका शरीर होगा, उतने ही आप एक्टिव और आत्मविश्वास से भरे रहेंगे |

14. प्रश्नों का उत्तर खोजें

यदि आपके मन में कोई प्रश्न है या किसी प्रश्न का उत्तर आपको समझ नहीं आता तो निसंकोच अपने अध्यापक से सहायता मांगें | हो सकता है कि ज्यादा या बार बार प्रश्न पूछने के लिए आपके अध्यापक आपको डांट दें, पर विश्वास कीजिये कि जो विद्यार्थी वास्तव में सीखने की इच्छा रखता है उसे सभी टीचर्स पसंद करते हैं और उसकी मदद के लिए सदा तैयार रहते हैं |

15. सभी संसाधनों का प्रयोग करें

पढ़ाई के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों (Resources) का भरपूर प्रयोग करें | किताबों को ध्यान से पढ़ें, पुस्तकालय (Library) में जायें, अपने अध्यापकों और अभिभावकों से सहायता लें, दोस्तों और बड़े भाई-बहन से मदद मांगें, इन्टरनेट और टेलीविज़न आदि सभी उपलब्ध संसाधनों का सकारात्मक प्रयोग अपनी पढ़ाई के लिए करें |

16. ब्लेंक कार्ड्स (Blank Cards) का प्रयोग करें

पढ़ते समय किसी विशेष बात या किसी उत्तर के मुख्य बिन्दुओं (Main Points) को लिखने के लिए आप छोटे छोटे साइज़ के ब्लेंक कार्ड्स या पर्चियों का प्रयोग कर सकते है | ये कार्ड्स आपको revision करते समय काफ़ी मददगार साबित होंगे | परंतु सावधान, इसका अर्थ यह नहीं निकाला जाना चाहिए की आप इन्हें परीक्षा के समय नकल (Cheat Notes) के रूप में प्रयोग करें |

17. स्वयं को प्रोत्साहित करें

परीक्षा भवन में जाने से पूर्व स्वयं को प्रोत्साहित (Motivate) करें | जीवन की उन घटनाओं को याद करें, जब आप सफल हुए थे | अपने आप को विश्वास दिलाएं कि आप पहले भी कठिन परिस्थितियों एवं परीक्षाओं में सफल हो चुके हैं | इस परीक्षा में भी आप ज़रूर अच्छे अंकों के साथ सफल होंगे | इस प्रकार के सकारात्मक विचारों से आपका मनोबल बढ़ेगा और आप परीक्षा में अधिक बेहतर प्रदर्शन कर पायेंगे |

18. प्रश्नपत्र को ध्यान पूर्वक पढ़ें

जब भी आप कोई परीक्षा देते हैं तो उत्तर लिखना शुरू करने से पहले, प्रश्नपत्र को कम से कम दो बार ध्यानपूर्वक पढ़ लें | यह सुनिश्चित कर लें कि प्रश्न क्या है और उसका सही उत्तर क्या होगा | कई बार घबराहट में हम प्रश्न समझ ही नहीं पाते और गलत उत्तर लिख देते हैं |

19. अधिक मात्रा में जल लें

विज्ञान इस बात को प्रमाणित कर चुका है कि शरीर में जल का स्तर जितना अधिक रहता है, उतना ही हमारा मस्तिष्क अधिक कुशलता के साथ कार्य करता है | इस लिए अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिये | पढ़ाई करते समय अपने पास पानी की एक बोतल रखनी चाहिए | अगर संभव हो तो परीक्षा केंद्र (Examination Centre) में भी अपने साथ एक पानी की बोतल ले कर जायें और समय-समय पर पानी पीते रहें |

20. शांत हो जायें

परीक्षा में यदि उत्तर याद करने में कठिनाई हो तो घबराने कि आवश्यकता नहीं है | घबराहट से स्थिति और अधिक  बिगड़ सकती है | आँखें बंद करके कुछ पल के लिए चुपचाप बैठ जायें और गहरी सांस लें | इससे आपके मन को शांत करने में सहायता मिलेगी | फिर धीरे-धीरे उत्तर याद करने की कोशिश करें | जो भी मुख्य बिंदु (Main Point) याद आये उसे कागज़ पर लिख लें |

ऊपर दिए गए सभी टिप्स की एक संक्षिप्त और आकर्षक Ebook आप हमारी वेबसाइट www.praveenacademy.com/downloads..htm से Free Download कर सकते हैं | यह हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में उपलब्ध है |

आज के इस प्रतिस्पर्धा से भरे युग में हर व्यक्ति प्रथम स्थान पर आना चाहता है | हर व्यक्ति सफल होना चाहता है | सफ़लता की परिभाषा हर किसी के लिए अलग – अलग हो सकती है और होनी भी चाहिए | जब भी हम छोटी – छोटी सफलताएं अर्जित करते हैं तो हमारा आत्मविश्वास बढ़ता चला जाता है , परन्तु जब हमें किसी हार का सामना करना पड़ता है तो हम हतोत्साहित हो जाते हैं | हमें यह समझने की आवश्यकता है कि जीवन एक ई.सी.जी. ग्राफ की तरह है | जब तक ई.सी.जी. ग्राफ ऊपर नीचे जाता रहता है , तब तक हमारा ह्रदय काम करता रहता है परन्तु जब एक सीधी रेखा दिखाई देने लगती है तो हृदय काम करना बंद कर देता है और जीवन का अंत हो जाता है |

उसी प्रकार यदि जीवन में उतार- चढ़ाव न हों तो जीवन रसहीन हो जाता है | इसलिए जीवन में असफलताओं का होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की सफलताओं का | असफलताओं से लड़ते हुए जब आदमी सफ़लता प्राप्त करता है, तभी वह उसका पूर्ण आनंद ले सकता है |

जीवन में सफ़लता प्राप्त करने की लिए यह अति आवश्यक है कि हम अपने मन को असफलता के डर से ग्रसित न होने दें | क्योंकि जिस व्यक्ति की मन में यह भय बैठ जाता है की वह जीवन में कुछ नहीं कर पाएगा, तो फिर उसके लिए सफल होना कठिन हो जाता है | इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि हम इस तरह की मानसिकता का त्याग आज और अभी कर दें |

आपके उज्जवल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ |

Praveen K Singhप्रवीण कुमार सिंह

माईंड ट्रेनर एंड लाइफ कोच

अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट www.praveenacademy.com  पर जायें या हमें mail@praveenacademy.com पर ईमेल करें.

 

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We are grateful to Praveen Ji for sharing this valuable Hindi article on how to succeed in studies. We wish him a great success in all his endeavors.

and

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20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य

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HD - KMSRAJ51

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दोस्तों आज https://kmsraj51.wordpress.com/ पर मैं आपके साथ कुछ special share करने जा रहा हूँ . Special इसलिए क्योंकि आज मैंने जो article Hindi में translate किया है वो एक ऐसे व्यक्ति द्वारा लिखा गया है जिन्हें मैं अपना on-line गुरु मानता हूँ . उनका नाम है Steve Pavlina. उन्होंने अपने articles से करोड़ों लोगों के जीवन में एक positive बदलाव लाया है . और आज जो article मैं आपसे share कर रहा हूँ वो उनके द्वारा लिखे गए सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले articles में से एक है . इसे बड़े धयन से पढ़िए क्योंकि यहाँ से आप जान सकते हैं अपने जीवन का उद्देश्य .

How to Discover Your Life Purpose in About 20 Minutes

लगभग 20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य

आप अपने जीवन का असली उद्देश्य कैसे पता करेंगे ? मैं आपकी job के बारे में बात नहीं कर रहा हूँ , या फिर आपकी रोज़मर्रा की जिम्मेदारियों या आपके long term goals के बारे में भी बात नहीं कर रहा हूँ . मेरा मतलब उस असली वजह से है जिसके लिए आप यहाँ हैं —वो वजह जिसके
लिए आप exist करते हैं .

या शायद आप एक नास्तिक व्यक्ति हैं जो ये सोचता है कि उसके जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है , और ज़िन्दगी का कोई मतलब नहीं है . इससे कोई फरक नहीं पड़ता . इस बात में यकीं रखना की life का कोई purpose नहीं है आपको इसे discover करने से नहीं रोकता , ठीक वैसे ही जैसे गुरुत्वाकर्षण में यकीं नहीं होना आपको घूमने-घामने से नहीं रोक सकता . यकीं ना होने से बस समय थोडा ज्यादा लगेअगा , तो अगर आप इस तरह के व्यक्ति हैं तो इस पोस्ट के Title में जो नंबर है उसे 20 से बढ़ा कर 40 कर दें (या 60 अगर आप सच -मुच जिद्दी हैं ). ज्यादा chance है कि अगर आप ये believe करते हैं कि आपकी life का कोई purpose नहीं है तो मैं जो कुछ कह रहा हूँ आप उसमे भी believe नहीं करेंगे , पर फिर भी , एक घंटा देने में क्या जाता है , क्या पता कुछ पता ही चल जाये ?

Bruce Lee के बारे में एक छोटी सी कहानी बात कर मैं इस छोटी सी exercise का stage सेट करता हूँ . एक martial artist ने Bruce से कहा कि तुम martial arts के बारे में जो कुछ भी जानते हो मुझे सिखा दो .Bruce ने पानी से भरे दो कप लिए और कहा “ पहला कप martial arts के बारे में जो भी तुम्हारा ज्ञान है उसे दर्शाता है , दूसरा कप martial srts के बारे में मेरे ज्ञान को दर्शाता है . अगर तुम अपना कप मेरे ज्ञान से भरना चाहते हो तो पहले तुम्हे अपने कप का ज्ञान कहली करना होगा .”

यदि आप अपनी ज़िन्दगी का असली मकसद जानना चाहते हैं तो पहले आपको सिखाये गए सभी व्यर्थ के मकसदों (including कि आपकी ज़िन्दगी का कोई मकसद ही नहीं है ) को अपने दिमाग से निकलना होगा .

तो आप अपने जीवन का उद्देश्य कैसे पता करेंगे ? वैसे तो यह पता करने के कई तरीके हैं , पर यहाँ मैं आपको एक बहुत ही simple तरीका बताऊंगा जो कोई भी अपना सकता है . आप इस तरीके को जितना ज्यादा accept करंगे , जितना ज्यादा इसके काम करने की अपेक्षा करेंगे यह उतनी ही तेजी से आपके लिए काम करेगा .पर यदि आप इससे ज्यादा उम्मीद ना भी करें , या इसपे कुछ doubt करें , यह सोचें कि ये तो बेवकूफी है , समय की बर्वादी है तो भी यह अप्पके लिए काम करेगा , बस ज़रुरत है कि आप इसके साथ लगे रहिये .—पर हाँ , समय कुछ अधिक लगेगा .

आपको ये करना है :

1) एक blank page ले लीजिये या फिर एक word file खोल लीजिये .

2) Top पर लिखिए , “ मेरी जीवन का असली उद्देश्य क्या है ?”

3) कोई उत्तर लिखिए (कुछ भी ) जो आपके दिमाग में आ रहा हो . पूरा sentence लिखने की ज़रुरत नहीं है . एक छोटा सा phrase काफी है .

4) Step 3 को तब तक repeat कीजिये जब तक की आप कोई ऐसा उत्तर ना लिख लें जिससे आपको रोना आ जाये . यही आपके जीवन का उद्देश्य है .

बस इतना ही . इससे कोई मतलब नहीं है की आप counselor हैं engineer हैं या कोई bodybuilder हैं .कुछ लोगों को ये exercise बिलकुल उपयुक्त लगेगी , कुछ लोगो को कोरी बकवास . Life का purpose क्या है इसको लेकर हमारे मन में जो भी हलचल है और अपनी Social conditioning की वजह से हम जो कुछ भी इस विषय में सोचते हैं उसे clear करने में आम तौर पे 15-20 मिनट लगेंगे.गलत उत्तर आपकी memory और mind से आयेंगे . लेकिन जब आपको सही उत्तर मिल जायेगा , आपको अहसास होगा कि यह उत्तर किसी बिलकुल ही अलग जगह से आ रहा है .

वो लोग जो अपनी जड़े जागरूकता के बिलकुल निचले स्तर पर जमा चुके हैं , उन्हें सभी गलत उत्तर निकालने में काफी वक़्त लगेगा , शायद एक घंटे से भी ज्यादा . लेकिन यदि आप , 100, 200 या 500 उत्तर के बाद भी लगे रहेंगे तो आपको वो उत्तर मिल जायेगा जो आपकी भावनाओं को बढ़ा देगा , जो आपको रुला देगा .यदि आपने पहले कभी ये नहीं किया है तो शायद ये आपको बहुत मूर्खतापूर्ण लगे . लगने दीजिये पर इसे करिए ज़रूर .

आप जैसे -जैसे इस प्रोसेस से गुजरेंगे , आपके कुछ उत्तर बहुत एक जैसे लगेंगे , आप चाहें तो पुराने उत्तर दुबारा भी लिख सकते हैं . आप अचानक एक नयी दिशा में सोच सकते हैं और 10-20 नए उत्तर भी लिख सकते हैं . That’s OK. आपके दिमाग में जो उत्तर आये आप वो लिख सकते हैं बशर्ते आप लिखना चालू रखिये .

इस दौरान एक समय ऐसा भी आएगा ( लगभग 50-100 answers के बाद ) जब आप quit करना चाहें , और आप खुद को उस उत्तर तक पहुचते ना देख प् रहे हों . आप को ऐसा लग सकता है कि आप किसी बहाने से उठ कर कुछ और करने लगें . ये normal है . इस अवरोध को पार कीजिये , और बस लिखते रहिये . अवरोध का अहसास कुछ देर में ख़तम हो जायेगा .

शायद आपको बीच में कुछ ऐसे उत्तर मिलें जो आपको थोडा emotional कर दें , पर वो आपको रुला ना पाएं — ऐसे answers को highlight करते हुए आगे बढिए , ताकि बाद में आप इनपर वापस आकर नए संयोग बना सकें . हर एक उत्तर आपके purpose के एक हिस्से को दर्शाता है , पर खुद में वो पूर्ण नहीं है . जब आपको ऐसे उत्तर मिलना शुरू हो जायें तो इसका मतलब है कि आप warm-up हो रहे हैं . बस आगे बढ़ते रहिये .

यह ज़रूरी है कि आप इसे अकेले बिना किसी रूकावट के करिएँ .यदि आप नास्तिक हैं तो आप इस उत्तर से शुरआत कर सकते है कि , “ मेरे जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है ,” या “ जीवन निरर्थक है ,’ और वहां से आगे बढिए , यदि आप लगे रहेंगे तो आपको उत्तर ज़रूर मिलेगा .

जब मैंने यह exercise की तो मुझे लगभग 25 मिनट लगे , और मैं अपने final answer तक 106 वें step में पहुंचा . उत्तर के कुछ parts ( जब मैं थोडा emotional हो गया ) मुझे step no. 17,39 और 53 में मिले .और सबसे ज्यादा step 100-106 में मुझे अपना answer मिला और refine होता गया .. मुझे step 55-60 के आस – पास बहुत अवरोध मह्शूश हुआ , लगा कि मैं ये छोड़ के कुछ और करूँ , लगा कि ये process fail हो जायेगा , मैंने काफी impatient और irritating feel किया . Step no. 80 के बाद मैंने 2 मिनट का break ले लिया , आँखे बंद कर के थोडा relax किया ,अपने mind को clear किया और इस बात पर focus किया कि मेरी intention जवाब पाने की है . –ये मददगार साबित हुआ क्योंकि break के बाद मुझे और भी clear answers मिलने लगे .

Here was my final answer: to live consciously and courageously, to resonate with love and compassion, to awaken the great spirits within others, and to leave this world in peace.

मेरा final answer था : जागरूकता और साहस के साथ जीवन जीना ,प्रेम और दया को अपनाना , दूसरों के अन्दर की महान आत्माओं को जगाना , और इस दुनिया को शांतिमय बनाकर छोड़ना.

जब आपको अपना उत्तर मिल जायेगा कि आप यहाँ क्यों हैं , तब आप feel करेंगे की वो आपके अंत -मन को छू रहा है . वो शब्द आपको energetic लगेंगे , और आप जब भी उन्हें पढेंगे तो आप उस energy को feel करेंगे .

उद्देश्य को जान लेना आसान है . कठिन तो यह है कि उसे हर रोज़ अपने साथ रखना और खुद पर काम करना कि एक दिन आप खुद वो उद्देश्य बन जायें .

अगर आप यह पूछना चाहते हैं कि यह process काम क्यों करता है तो आप पहले इस question को तब तक side में रख दीजिये जब तक आप इस excercise को सफलतापूर्वक complete नहीं कर लेते . और जब आप ये करलेंगे तो शायद आपके पास अपना खुद का एक जवाब होगा कि ये काम क्यों करता है . यदि आप 10 ऐसे लोगों से ( जिन्होंने इस process को successfully complete कर लिया है ) येही प्रश्न करें तो ज्यादा chance है कि आपको दस अलग -अलग उत्तर मिलेंगे , जो उनके अपने belief system के हिसाब से होगा , और हर एक में सच्चाई कि अपनी ही छवि होगी .

जाहिर है कि अगर आप final answer आने से पहले ही quit कर गए तो ये process आपके लिए काम नहीं करेगा . मेरा अनुमान है कि 80-90% लोगों को उत्तर 1 घंटे के अन्दर मिल जायेगा . अगर आप अपनी धारणाओं में बहुत ही ज्यादा उलझे हुए हैं तो शायद आपको 5 sessions लगें और कुल 3 घंटे का वक़्त लगे , पर मुझे संदेह है कि ऐसे व्यक्ति पहले ही quit कर जायेंगे ( शायद पहले 15 मिनट में ) या फिर वो इस attempt ही ना करें . लेकिन आप इस blog को पढने के प्रति आकर्षित हुए हैं ( और अभी तक इस अपने life से बन करने के बारे में नहीं सोचा है ), तो शायद ही आप इस group को belong करें .

निवेदन : यदि यह लेख आपके लिए लाभप्रद रहा हो तो कृपया कृपया comment के माध्यम से मुझे ज़रूर बताएं.

Post inspired by : http://www.achhikhabar.com/ (Lots of thanks to AKC & Mr. Gopal Mishra)
Post main source :: http://www.stevepavlina.com/blog/2011/06/living-your-life-purpose/ (Also Lots of thanks to Mr.Pavlina)

Note::-
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Strong Will Power ~ (दृण इच्छाशक्ति) !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

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** Strong Will Power(दृण इच्छाशक्ति) **

वर्तमान का समय प्रतियोगिता का समय है। आज हर कोई एक दूसरे से आगे बढना चाहता है। आगे बढने की प्रवृत्ति विकास के राह को आसान करती है। विद्यार्थी हो या व्यपारी, शोध-कर्ता हो या किसान हर कोई अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रर्दशन करना चाहता है। परन्तु कुछ लोग अपनी इच्छा के अनुरूप परिणाम को प्राप्त कर लेते हैं, तो कुछ लोग चाहत के अनुसार अपने लक्ष्य को हासिल नही कर पाते। जो अपने कार्य को दृण इच्छा शक्ति से पूर्ण करता है वो लक्ष्य को निःसंदेह हासिल करता है। नेपोलियन बोनापार्ट का कहना था कि, असम्भव शब्द मेरे शब्दकोश में नही है। लाल बहादुर शास्त्री, गाँधी जी, सुभाष चन्द्र बोस, अब्राहम लिंकन, आइंस्टाइन, सरदार पटेल, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम इत्यादि बङे-बङे महापुरूष अपनी दृण इच्छा शक्ति से ही उच्चतम शिखर पर पहुँचे और आज भी सभी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

कहने का आशय ये है कि यदि मनुष्य चाहे तो सब कुछ सम्भव है। उसे अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए कार्य को ईमानदारी से और दृण संकल्प के साथ करना चाहिए। मजबूत इच्छा विपरीत परिस्थीति में भी आगे बढने की प्रेरणा देती है। मनुष्य का मन बहुत चंचल होता है, नित नई इच्छाएं जन्म लेती रहती हैं।अतः मन की चंचलता को नियन्त्रित करने के लिए इच्छा शक्ति की दृणता अनिवार्य होती है। गीता में कहा गया है कि, “मन को वश में करना कठिन जरूर है पर असम्भव नही है।“
दृण इच्छा शक्ति के बल पर ही तेनसिहं और बछेन्द्री पाल जैसे पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट पर विजय पताका फहराई। इंग्लिश चैनल और उत्तरी ध्रुव के बर्फिले सागर को दृण इच्छा शक्ति के बल पर ही पार किया गया। लक्ष्य के प्रति दृण इच्छा रखने वाले संकल्पवान लोग इतिहास की धारा बदल देते हैं।

सफलता के लिए दृण संकल्प का होना आवशयक है किन्तु आज आगे बढना तो हर कोई चाहता है परन्तु विषम परिस्थिती में संघर्ष करना नही चाहता। परिश्रम करने से भागता है और शार्टकट तरीके से सबकुछ पाना चाहता है। लक्ष्य के प्रति दृण इच्छाशक्ति का अभाव इंसान की सबसे बङी कमजोरी है। ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि, “गहरी इच्छा हर उपलब्धि का शुरूवाती बिन्दु होती है, जिस तरह आग की छोटी लपटें अधिक गर्मी नही दे सकती वैसे ही कमजोर इच्छा बङे नतीजे नही दे सकती।“ मजबूत इरादों से ही लक्ष्य की राह आसान होती है।

गाँधी जी ने कहा था कि, “Strength Dose not come from Physical capacity. It comes from an Indomitable will.”

अपनी दृण इच्छाशक्ति और अटूट विश्वास के बल पर भारत की पहली महिला आई. पी. एस. अधिकारी किरण बेदी ने अनेकों कठिनाईयों के बावजूद अपने लछ्य को हासिल किया। एशिया का सबसे बङा ‘मेग्सस पुरस्कार’ प्राप्त कर भारत को भी गौरवान्वित किया। अनेक लोगों की प्रेरणा स्रोत किरण बेदी को संयुक्त राष्ट्र संघ में पुलिस सलाहाकार नियुक्त किया गया। (Strong will power )दृण इच्छा शक्ति से कैंसर जैसी जानलेवा बिमारी से भी जीता जा सकता है। यदि इरादे मजबूत होते हैं तो उम्र की सीमा और विकलांगता भी बाधा नही बनती। प्रेमलता अग्रवाल 48 वर्ष की उम्र में एवरेस्ट पर फतह हासिल करने वाली सबसे अधिक उम्र की पहली महिला हैं। हेलेन केलर की दृण इच्छा शक्ति के आगे उनकी दृष्टीबाधिता नत्मस्तक हो गई।

स्वामी विवेकानंद जी का कहना था कि, “पवित्र और दृण इच्छा सर्वशक्तिमान है, अतः प्रबल इच्छा को कठिन अभ्यास एवं संकल्प शक्ति द्वारा प्राप्त करना चाहिए।“

सफलता की कामना करना उत्तम विचार है। उसकी पूर्णता के लिए कार्य के आरंभ में ही दृण इच्छा को अपने में समाहित कर लेना चाहिए। ईमानदारी के साथ कार्य पूर्ण करने में अपनी सारी शक्ति लगा देनी चाहिए। दृण इच्छाशक्ति मार्ग की बाधाओं को पार कर देती है और सफलता के शिखर पर पहुँचना आसान कर देती है। अतः अपनी सोच को साकार रूप देने के लिए दृण इच्छा शक्ति (Strong Will Power) को रग-रग में संचारित कर लें।

“कुछ कर गुजरने के लिए मौसम नही मन चाहिए, साधन सभी जुट जाएंगे, संकल्प का धन चाहिए, गहन संकल्प से ही संभव है पूर्ण सफलता।”

Note::- Post inspired by : http://roshansavera.blogspot.in/

Lots of thank to “Mrs.Anita Sharma”.
Anita Sharma


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** Tu Na Ho Nirash Kabhi Man Se ….. **
Tu Na Ho Nirash Kabhi Man Se(kmsraj51)

** AUM SWEET AUM ** SUMREME SOUL GOD SHIVA **

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आत्म निरीक्षण ~ Intussusception ~ Motivational Hindi Story !!

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आत्म निरीक्षण

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** आत्म निरीक्षण **

एक छोटा सा लड़का जो कि लगभग ११-१२ वर्ष का रहा होगा ,एक दवाई कि दुकान में गया और उसके मालिक से एक फ़ोन मिलाने कि आज्ञा ली.फिर उसने एक बड़ा सा बक्सा खिसकाया और उस पर चढ़ गया जिससे कि वह ऊपर रखे हुए फ़ोन तक पहुँच सके . दुकान का मालिक चुपचाप उस लड़के कि बातचीत सुनने लगा .बालक ने एक महिला को फ़ोन मिलाया और बोला , ” क्या आप मुझे अपना बगीचा और लॉन काटने का काम दे सकती हैं ?”

इस पर वह महिला फ़ोन के दूसरी ओर से बोली ,” मेरे लॉन कि कटाई का काम पहले से कोई कर रहा है . बालक , ” किन्तु ,मैं आपके लॉन कि कटाई का काम उससे आधे दाम पर करने के लिए तैयार हूँ .”

महिला , ” जो लड़का मेरे लॉन की कटाई का काम कर रहा है , मैं उसके काम से पूरी तरह संतुष्ट हूँ . ”

इस पर वह बालक ओर अधिक निश्चय पूर्वक बोला , ” मैं आप के लॉन के चारों ओर का रास्ता भी साफ़ कर दिया करूँगा ओर आप के घर के बाहर के शीशे
भी साफ़ कर दिया करूंगा .”

महिला बोली ,” नहीं , मुझे किसी की आवश्यकता नहीं है ,धन्यवाद ,” यह सुन कर वह बालक मुस्कुराया ओर उसने फोन रख दिया .”

दुकान का मालिक जो कि उस लड़के कि बातचीत सुन रहा था , उसकी ओर आया ओर बोला ,”बेटा ,मुझे तुम्हारा आत्मविश्वास ओर सकारात्मक दृष्टिकोण देख कर बहुत अच्चा लगा .

मुझे तुम्हे नौकरी पर रख कर वास्तव मैं ख़ुशी होगी .क्या तुम मेरे लिए काम करना पसंद करोगे ?”इस पर वह बालक बोला,”धन्यवाद,पर मैं कोई नौकरी नहीं करना चाहता .”

दुकान का मालिक बोला,” लेकिन , बेटा तुम तो अभी-अभी फोन पर नौकरी के लिए गिडगिडा रहे थे .”

इस पर बालक बोला,” नहीं महोदय , मैं तो केवल अपनी कार्यकुशलता का परीक्षण कर रहा था . दरअसल , जिस महिला को मैंने फोन किया था मैं उसी के लिए कार्य करता हूँ .”

वह आगे बोला,” ओर , उससे बात करने के पश्चात यह जान कर मुझे बहुत अधिक आत्मसंतोष मिल रहा है कि वेह महिला मेरे कार्य से पूर्ण रूप से संतुष्ट है .”

क्या हम लोग इस छोटे से बालक से आत्म निरीक्षण करने की प्रेरणा प्राप्त कर सकते हैं ?

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