जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

Kmsraj51 की कलम से…..
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ϒ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51 ϒ

51 LCQof KMSRAJ51

Δ मानव मस्तिष्क असीमित शक्तियों से भरा हैं, लेकिन ये शक्तियां सुषुप्त अवस्था में है, बस ज़रूरत है इन सुषुप्त शक्तियों काे जगाने की। {1}

Δ आत्मा कि मुख्यतः तीन शक्तिया है, प्रथम – मन, द्वितीय – बुद्धि(विवेक) और तृतीय संस्कार। मन सोचने का कार्य करती है, बुद्धि(विवेक) निर्णय(Judgment) करने का कार्य करती है तथा बुद्धि के निर्णय अनुसार मानव शरीर की कर्मइंद्रियाे द्वारा जाे कर्म हाेता है वही  संस्कार के रूप में आत्मा के अंदर रिकॉर्ड हाेता रहता हैं, और संस्कार अनुसार ही काेई भी आत्मा नया शरीर(पुनर्जन्म) लेती हैं। {2}

Δ “सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।” {3}

Δ मनुष्य सदैव मनुष्य के ही रूप में जन्म लेता हैं, हा बस फ़र्क इतना ही पड़ता है कि हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर – नारी शरीर के रूप में जन्म लेती है और नारी शरीर हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर के रूप में जन्म लेती है। यह परिवर्तन चक्र हर तीन जन्म पर हाेता रहता हैं। {4}

Δ “अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे”। {5}

Δ “अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।” {6}

Δ जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।
स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥ {7}

Δ अगर कुछ बदलना है ताे सबसे पहले अपने सोच, कर्म व अपने आप काे बदलें। {8}

Δ काेई भी ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता – हा इंसान बुरे हाे सकते हैं। {9}

Δ सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता। {10}

Δ आत्मबल और मन को शक्तिशाली बनाने के लिए – आत्मा को ईश्वरीय स्मृति और सकारात्मक विचार रूपी शक्ति का भोजन दो। {11}

Δ स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत। {12}

Δ जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। {13}

Δ हमेशा अच्छे कार्य के लिए समर्थन व सहयाेग करें। चाहे उस अच्छे कार्य की अगुआई आपके दुश्मन(Eनेम्य्) के द्वारा ही हाे रही हाे। {14}

Δ मूर्खाें कि एक खासियत हाेती हैं, ओ किसी एक बात काे लेकर लंबे समय तक बैठे रहते है, और मूर्खाें काे बात-बात पर बिना किसी मतलब के भी हंसी खुब आती हैं। {15}

Δ समय न गवाये वरना पछताने के अलावा कुछ न बचेगा जीवन में। {16}

Δ आप अपने अतीत काे नही बदल सकते, लेकिन अपने वर्तमान और भविष्य काे बदलना आपके अपने हाथ में हैं। इसलिए जाे बीत गया उसे याद कर, अपने वर्तमान और भविष्य काे समाप्त ना करें। {17}

Δ आज के समय में ९७% मनुष्य यही साेचते है, कि मेरे किस्मत में जाे हाेगा वही मिलेगा और ऐसा साेचकर वह बैठ जाते हैं। आचार्य चाणक्य जी ने कितनी अच्छी बात कही हैं। “क्या पता किस्मत में ही लिखा हाे की काेशिश करने से ही मिलेगा।” {18}

Δ हमेशा अपनी सोच काे अन्य लोगों(दुसराें) से अलग रखाें तभी आपकी अपनी कुछ अलग पहचान बन पायेगी। {19}

Δ आप रहाे या ना रहाे, लेकिन ऐसा कर्म कराें जीवनभर की आपके कर्म सदैव आपकाे जिवित रखें। {20}

Δ जीवन में एक बार की हुई गलती को बार-बार सोचना अर्थात दाग पर दाग लगाना इसलिए बीती को बिन्दी लगाओ(Full Stop), और आगे बढ़ाे। {21}

Δ किस्मत, नसीब़ और लक के भराेसे रहने पर किसी काे सफलता नहीं मिलती, सफलता ताे सच्चे मन से निरन्तर कार्य करने से ही मिलती हैं। इसलिए जीवन में निरन्तर कार्य करते हुए आगे बढ़ते चलाे। {22}

Δ केवल एक ही बुरा कर्म, किसी भी मनुष्य का शानाें, शाैंकत और इज़्ज़त यू मिनटाें में मिट्टी में मिला देता हैं। जैसे रेत से बना घर त्त्वरित गिर जाता हैं। {23}

Δ बुरी बातें ना खुद सुनो, ना ही किसी काे सुनाओं। {24}

Δ सच्चा ब्राह्मण वह है जो पूर्ण शुद्धि और विधि पूर्वक हर कार्य करे। {25}

Δ ज्ञान और ध्यान का हाेना जरूरी हैं जीवन में। बिना ज्ञान और ध्यान के दिमाग शांत नहीं हाे सकता, साे जीवन में, ज्ञान और ध्यान का हाेना बहुत जरूरी हैं। {26}

Δ “आत्मविश्वास किसी भी इंसान के लिए सर्वश्रेष्ठ आत्मिक शक्ति है। अगर वह स्वयं पर विश्वास रखकर कोई कर्म करता है तो कोई भी मुश्किल उसका रास्ता नहीं रोक सकती”। {27}

Δ चोट लगाने वाले का काम है चोट लगाना और आपका काम है अपने को सदैव बचा लेना। {28}

Δ ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता, इंसान(जीवआत्मा) आैर इंसान के कर्म बुरे हाे सकते हैं। {29}

Δ किसी भी मनुष्य का परम धर्म है, सात्त्विक आहार, सात्त्विक विचार और सात्त्विक जीवन। जिससे निराेगी काया(तन-Body), दिघा॔यु जीवन और स्वस्थ मन काे प्राप्त हाे। {30}

Δ “अगर अपनी अलग पहचान बनानी है तो कुछ अलग कीजिए। जब तक दूसरों से डिफरेंट और अच्छा नहीं करेंगे, तब तक आगे बढ़ना मुश्किल है। अलग करने से रिस्क तो होता है पर कंपीटिशन भी तो कम ही रहता है।” {31}

Δ मन को प्रभू की अमानत समझकर उसे सदा श्रेष्ठ कार्य में लगाओ। {32}

Δ सदैव याद रखें जीवन का सबसे बड़ा शान है सदा खुश रहना और खुशी बांटना-यही सबसे बड़ा शान है। {33}

Δ संकल्पों की शक्ति-संकल्पों को बचाओ तो समय, बोल सब स्वत: ही बच जायेंगे। {34}

Δ अगर जीवन में सफल हाेना चाहते हैं ताे अवसर का लाभ उठाओ, समय की कद्र करो, और शब्दों को सोच समझ कर खर्च करो। {35}

Δ आत्मा रूपी पुरूष को श्रेष्ठ बनाने वाले ही सच्चे पुरूषार्थी हैं। सबसे बड़े ज्ञानी वह हैं जो सदैव आत्म-अभिमानी रहते हैं। {36}

Δ जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।
उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥ {37}

Δ सदैव याद रखें किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है। जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता। {38}

Δ अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे। {39}

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

Δ जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है। {40}

Δ जीवन में सदैव शांत मन से साेंच समझ़ कर हीं काेई निर्णय लें, और जाे निर्णय एकबार लें उसका जीवन में दृढ़ता से पालन करें। {41}

Δ याद रखें प्रत्यक्ष प्रमाण वह है जिसका हर कर्म सर्व को प्रेरणा देने वाला हाे। {42}

Δ पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है।
यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है।
यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है॥ {43}

Δ मास्टर(मालिक) का अर्थ है कि जिस शक्ति का जिस समय आह्वान करो वो शक्ति उसी समय प्रैक्टिकल स्वरूप में अनुभव हो। आर्डर किया और हाजिर। ऐसे नहीं कि आर्डर करो सहनशक्ति को और आये सामना करने की शक्ति, तो उसको मास्टर नहीं कहेंगे। तो ट्रायल करो कि जिस समय जो शक्ति आवश्यक है उस समय वही शक्ति कार्य में आती है? एक सेकण्ड का भी फर्क पड़ा तो जीत के बजाए हार हो जायेगी। {44}

Δ काेई भी इंसान जितना अध्ययन करता हैं, उतना ही उसे अपने अज्ञान का आभास होता जाता है। {45}

Δ सदैव याद रखें जीवन में सबसे बड़ी ख़ुशी तथा चुनाैती उस काम काे करने में है जिसे लाेग कहते हैं कि “तुम नहीं कर सकते” या “तुम्हारे बस की बात नहीं”। {46}

Δ मनुष्य के विचार बहते हुए पानी की तरह है, यदि हम उसमें गदंगी मिलाएँगे ताे वह नाला बन जाएगा आैर यदि ज्ञान व ध्यान रूपी सुगंध मिला देंगे ताे वही पवित्र बन जाएगा। {47}

Δ हम अपने असली स्वरूप काे भुल गये है, जिस कारण हमे अपने निजी गुण और संस्कार भी याद नही हैं। यह भुल ही सभी दुःखाे का कारण हैं।आत्मा की तीन मुख्य शक्तिया हाेती हैं। {48}

“प्रथम-मन, द्वितीय-बुद्धि और तृतीय-संस्कार।”

Δ अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,
१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥ {49}

Δ मन कि शक्ति काे सही समय पर उपयोग करें।

मन में वह असिमित शक्ति भरी हैं, जिसका सही उपयोग कर, हर असंभव कार्य काे सरलता पूर्वक संभव में बदला जा सकता हैं। मन कि शक्तियाे काे सही समय पर और सही दिशा में उपयोग करना सीखें। {50}

Δ आत्मा के सात माैलिक गुण हाेते हैं।

1. शांति (Shanti),

2. सुख (Sukh),

3. प्रेम (Prem),

4. शक्ति (Power),

5. ज्ञान (Gyan),

6. पवित्रता (शुद्धि-Purity),

7. आनंद (आत्मिक खुशी-Anand), {51}

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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चमत्कारिक है ओ३म् का उच्चारण।

Kmsraj51 की कलम से…..

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चमत्कारिक है ओ३म् का उच्चारण।

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चमत्कारिक है ओ३म् का उच्चारण।

१- ओ३म् के उच्चारण मात्र से मृत कोशिकाएँ जीवित हो जाती है।

२- मन के नकारात्मक भाव सकारात्मक में परिवर्तित हो जाते है।

३- तनाव से मुक्ति मिलती है।

४- स्टेरॉयड का स्तर कम हो जाता है।

५- चेहरे के भाव तथा हमारे आसपास के वातावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

६- मस्तिष्क में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं तथा हृदय स्वस्थ होता है।

७- मन में संकल्पाें(विचारों) की संख्या कम हाेने लगती हैं, और जब मन में संकल्पाें(विचारों) की संख्या कम हाेते हैं तब मन धीरे-धीरे शांत हाेने लगता हैं।

८- मन शांत हाेने से निर्णय शक्ति मजबूत(शक्तिशाली) हाे जाती हैं।

९- ओ३म् के उच्चारण मात्र से आत्मा की सुषुप्त आंतरिक शक्तियाँ जाग जाती हैं। और आत्मा की सुषुप्त हुँई शक्तियाें के जग जाने पर इस जहान(संसार) का काेई भी कार्य करना असंभव नहीं हाेता आपके लिए। अर्थात हरेक कार्य सरलता पूर्वक आप कर सकते हैं।

१०- ओ३म के लंबे समय तक उच्चारण मात्र से आपके मन, वचन(बाेल) और कर्म में पवित्रता आने लगती हैं।

११- ओ३म के लंबे समय तक उच्चारण मात्र से आपके शरीर के सारे रोम-छिद्र खुल जाते हैं। शरीर के अंदर रक्त-प्रसार तेजी से हाेने लगता हैं। आपके शरीर की त्वचा में कसावट आने लगता हैं। जिससे आपका शरीर पहले की अपेक्षा धीरे-धीरे बहुत सुंदर हाे जाता हैं।

अर्थात- केवल ओ३म के लंबे समय तक उच्चारण मात्र से आपके तन, मन, वचन(बाेल) और कर्म में पवित्रता (Purity) आ जाती हैं।

Source: “तू ना हो निराश कभी मन से” किताब(महाग्रंथ) से।

“तू ना हो निराश कभी मन से” 

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Coming soon book (जल्द ही आ रहा महाग्रंथ(किताब))…..

कृष्ण मोहन सिंह द्वारा लिखित महाग्रंथ (किताब) “तू ना हो निराश कभी मन से” बहुत जल्द ही आप सभी के पास हाेगा।

एक ऐसा महाग्रंथ जाे किसी भी साधारण इंसान काे इतना शक्तिशाली बना दें, की हर असंभव कार्य भी सरलता पूर्वक संभव कार्य में बदल दें।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

 

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Absorbing Spiritual Light

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Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

 

Absorbing Spiritual Light – Part 1 

Just as darkness is the absence of light, negativity which manifests as vices and weaknesses inside us is merely the absence of spiritual light. Through the influence of negativity, the sense organs waste away the light. The question of vice, or sin, has been of a lot of importance in religion. No matter how much political or religious control has been imposed, nothing has been able to block the internal wasting away of the “light” of the soul. Light has a source but darkness does not. Darkness is not created by any source but is rather the absence of a source. In the same way, the negative forces do not emerge from the real nature of the self, but are simply symptoms of a lack of spiritual power or light. As spiritual power declines, symptoms of negativity such as anger, greed, ego, attachment, hatred, jealousy and related vices appear. On the other hand, as the soul’s power and spiritual light increases through a union (meditation) with the Supreme, the vices automatically disappear. In fact problems are not fundamentally caused by a particular vice, it is a question of the extent of one’s power. If I am weak, the sanskars mostly related to vices dominate my experience. If I am strong they do not have a chance to affect me. 

The negative forces have often been personified as Ravana, Maya or Satan but in fact there is no such entity.Maya describes a level of consciousness. There is no outside being whom we can blame. The vices are symptoms of individual ignorance and loss of power, which appeared only when our original creative powers subsided as we came into the process of birth and rebirth. When the soul’s power fell below the level necessary to control matter and the senses; then the vices emerged inside the soul. The soul was more and more propelled by them through many births, until today when they appear to be a basic part of our real nature. 


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Message for the day
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To look closely at one’s own behaviour is to bring about a positive change. 

Expression: While it is easy to talk about what other people should do to change themselves and their behaviour, it is also important to see what one can do to bring about a change in oneself. When there is the ability to look in this way, effort is put in continuously to change old unwanted patterns of behaviour and replace with more desirable ones. 

Experience: When I am able to take a closer look at myself, I am able to see which trait in my personality is getting in the way of my progress. This knowledge helps me accept myself with my shortcomings and yet have the courage to bring about a change easily. So I have the satisfaction of working on myself. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

brahmakumaris-kmsraj51

Absorbing Spiritual Light – Part 2 

How many times do we hear, * Oh, he is always in a bad mood…, * It is my nature to be irritable…, * He will never change… This shows the extent to which the soul’s own light has faded and been replaced by the dark curtain of negativity. Therefore it is better that we do not try to deal with each vice and defect individually. As the soul fills itself with the power of spirituality, its overall condition automatically improves. 

Another significant point is that there is a deep-rooted awareness within the soul of God and Hissanskars, however much it may be covered by dirt and weakness. This is because each soul is the child of God and being his children we inherit his sanskars. These sanskars are present in us when we start playing our part in the physical world, but gradually they fade away as we take more and more births. As these sanskarsare brought to the surface of the consciousness, automatically our thoughts and behavior patterns change. 

In modern psychology it is stated that we must express all our negative emotions and note suppress them. But the fact is that letting it out leads the soul further into slavery to that emotion. Remembering that thoughts, decisions and actions are formed on the basis of sanskars, which are deepened by repetition, the soul can only cause harm by expressing any defect or vice. On the other hand, the psychological effect of suppressing negative emotions can be quite drastic. Suppression can lead to severe personality problems, even madness or insanity. The right path is that we emerge our positive sanskars with the help of meditation and other self-development techniques and the negative ones automatically vanish away. 

(To be continued tomorrow …) 

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Message for the day 29-04-2014
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Patience brings easy solutions. 

Expression: What one cannot achieve with pressure can be very easily achieved with patience. Patience brings a state of calm inside which helps in finding the answers that already lie within. It gives courage to work on the problem in a cool and relaxed way till the solution is found. It brings creativity even to mundane things. 

Experience: When I am able remain patient even in the most challenging situations, I am able to remain calm. I don’t let go of my inner peace but am able to be aware of my own inner resources. I am able to retain my inner strength which gives me courage to find the solution for every problem. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

 

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Picture Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

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100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए –

(100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

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जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

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