बस यही बताना था

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बस यही बताना था(अनुराधा त्रिवेदी सिंह)

आज अपने बेटे को झूठ भी सिखाना है

चाँद जैसे माथे पर

असत का काला टीका, कैसे भी सजाना है

आज मुझे बेटे को झूठ भी सिखाना है ।

आज तक बताया था कुछ गलत नहीं करना

चाहे जो भी हो जाये सच से तुम नहीं डरना

सत की राह पर चलते दण्ड के भागी बनना

पर कभी तुम्हें न सिर ग्लानि से झुकाना है ।

आज मैं बताऊँगी कि कभी-कभी दुनिया

सच से रूठ जाती है, मान झूठ जाती है

आज मैं बताऊँगी कैसे कुछ सगे रिश्ते

सच से टूट जाते हैं,फिर नहीं जुड़ पाते हैं।

और ये कि जीवन में सब सही नहीं होता

एक रंग सिलेटी भी कैनवास पे होता है

हर कहीं सफ़ेदी या स्याह रंग नहीं होता।

आज वो ये जानेगा, नज़रें फेर लेने में,

भी बड़ी दिलेरी है, सबने नज़रें फेरीं हैं।

आम आदमी हैं हम, हर कथा के नायक हैं

पर हरेक मौक़े पर मूक ही रहे हैं हम

ये नहीं कि कायर थे, वक़्त का तक़ाज़ा था ।

साथ ही बताऊँगी, जब भी तुम बड़े होगे

सच का साथ ही देना

बस यही बताना था इस अनोखी दुनिया में

सबके सच अलहदा हैं, सबकी कसौटी अपनी ।

आज साँझ की बेला शीशे जैसी आँखों में

एक बाल रखना है

आज साँझ की बेला नन्ही भोली आँखों से

एक सच परखना है ।

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-Kmsraj51

 

 

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Understanding And Overcoming Repetitive Thoughts

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Understanding And Overcoming Repetitive Thoughts

Repetitive thoughts are mental dependences that arise due to a badly channeled imagination, false beliefs or mental weakness. For example, this happens when the pattern of negative repetitive thoughts makes us experience continuous feelings of guilt. Or we think, almost obsessively and continuously, that someone wants to hurt us or are after us. Or we create continuous thoughts of jealousy, hatred and violence with regards to another individual. They are negative and self-destructive habits. We fall into repetitive thoughts, which make us live in constant unhappiness.

We spend a lot of time during the day with these types of unnecessary thoughts. They are leaks of energy that weaken us. We have created the habit of thinking like that and, therefore, it is in our hands to learn to change it. We can free ourselves of these dependencies and the result is to be freer, mentally, of negative and repetitive thoughts, which are like a constant hammering. It is a question of learning to control what we think, thinking positively and in a focused manner, meditating and exercising the mind. We exercise to keep the body healthy and strong; in order to have a healthy and strong mind we have to learn exercises like meditation and relaxation that help us to free ourselves from repetitive thoughts which are nothing but bad positions or postures of the mind.

– Message –

To be free from weaknesses is to move forward constantly.Expression: Most of the times I do win over my weaknesses and achieve progress but sometimes I find that I am defeated at the wrong moment by my own weakness and I experience failure. So instead of finding the progress that I should I find that I am moving back.Experience: In order to bring benefit to others and to myself, I should recognize and remove even the last trace of weakness that is working within me. For that I need to have a constant checking about the real cause of the weakness and remove it. Such checking and changing helps me to overcome my weaknesses.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

-KMSRAJ51 

 

 

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कहीं आप monkey business में तो नहीं लगे हैं?

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Beware-of-Monkey-Business

Beware of Monkey Business

कहीं आप Monkey Business में तो नहीं लगे हैं? 

एक  समय  की  बात  है , एक  गाँव  में  एक  आदमी  आया  और  उसने  गाँव  वालों  से  कहा कि  वो  बन्दर  खरीदने  आया  है , और  वो  एक  बन्दर  के  10 रुपये  देगा . चूँकि  गाँव  में  बहुत  सारे  बन्दर  थे  इसलिए  गाँव  वाले  तुरंत  ही  इस  काम  में  लग  गए .

उस  आदमी  ने  10 रूपये  की  rate से  1000 बन्दर  खरीद  लिए  अब  बंदरों  की  supply काफी  घट  गयी  और  धीरे  धीरे  गाँव  वालों  ने  बन्दर  पकड़ने  का  प्रयास  बंद  कर  दिया . ऐसा  होने पर  उस  आदमी  ने  फिर  घोषणा  की  कि  अब  वो  20 रूपये  में  एक  बन्दर  खरीदेगा . ऐसा  सुनते  ही गाँव  वाले  फिर  से  बंदरों  को  पकड़ने  में  लग  गए .

बहुत  जल्द  बंदरों  की  संख्या  इतनी  घाट  गयी  की  लोग  ये  काम  छोड़  अपने  खेती -बारी  में  लगने  लगे . अब  एक  बन्दर  के  लिए  25 रुपये  दिए  जाने  लगे , पर  उनकी  तादाद  इतनी  कम  हो  चुकी  थी  की  पकड़ना  तो  दूर  उन्हें  देखने  के  लिए  भी  बहुत  मेहनत  करनी  पड़ती  थी .

तब  उस  आदमी  ने  घोषणा  की  कि  वो  एक  बन्दर  के  50 रूपये  देगा . पर  इस  बार  उसकी  जगह  बन्दर  खरीदने  का  काम  उसका  assistant करेगा  क्योंकि  उसे  किसी  ज़रूरी  काम  से  कुछ  दिनों  के  लिए  शहर  जाना  पद  रहा  है . उस  आदमी  की  गैरमौजूदगी   में  assistant ने  गाँव  वालों  से  कहा  कि  वो  पिंजड़े  में  बंद  बंदरों  को  35 रुपये  में  उससे  खरीद  लें  और  जब  उसका  मालिक  वापस  आये  तो  उसे  50 रुपये  में  बेंच  दें .

फिर  क्या  था  गाँव  वाले  ने  अपनी  जमा  पूँजी   बदारों  को   खरीदने  में  लगा  दी . और  उसके  बाद  ना  कभी  वो  आदमी  दिखा  ना  ही  उसका  assistant, बस  चारो  तरफ  बन्दर  ही  बन्दर  थे .

दोस्तों  कुछ  ऐसा  ही  होता  है  जब  Speak Asia जैसी  company अपना  business  फैलाती  है . बिना  ज्यादा  मेहनत  के  जब  पैसा  आता  दीखता  है तो  अच्छे-अच्छे  लोगों  की  आँखें  चौंधिया  जाती  हैं  और  वो  अपने  तर्क  सांगत  दिमाग  की  ना  सुनकर  लालच  में  फँस  जाते  हैं .

जब  Speak Aisa आई  थी  तो  मुझे  भी  कई  लोगों  ने  इस  join करने  के  लिए  कहा  था , पर  मैंने  join नहीं  किया  क्योंकि  मैं  उनके  business model से  संतुष्ट  नहीं  हो  पाया . और  यकीन  जानिये  ज्यादातर  लोग  संतुष्ट  नहीं  हो  पाते  , जब  बहुत  आसानी  से  पैसा  आता  दीखता  है  तो  कहीं  ना  कहीं  आपके  अन्दर  से  आवाज़  आती  है  कि  कहीं  कुछ  गड़बड़  है , पर  हम  ये  सोच  के  पैसे  लगा  देते  हैं  की  अगर  company 6 महीने  और  नहीं  भागी   तो  भी  मेरा  पैसा  निकल  जायेगा .

कई  लोगों  का  पैसा  निकल  भी  जाता  है , पर  जहाँ  एक  आदमी  को  फायदा  होता  है  वहीँ  10 लोगों  का  नुकसान  भी  होता  है  यानि  यदि  आप  अपने  लाभ  के  लिए  किसी  ऐसी  company से  जुड़ते  हैं  तो  आप  कई  लोगों  का  नुकसान  भी  कराते हैं . और  अधिकतर  नुकसान  उठाने  वाले  लोग  आपके  करीबी  होते  हैं . इसलिए  कभी  भी  ऐसे  लुभावने  वादों  में  मत  आइये ; आप  पैसे  तो  गवाएंगे  ही  साथ  में  रिश्तों  में  भी  दरार  पड़  जायेगी .

तो  अब  जब  कभी  कोई  आपसे  बिना  मेहनत  के  पैसा  कमाने   की  बात  करे  आप  उसे  इस  Monkey Business की कहानी सुना  दीजिये  और  अपना  पल्ला  झाड  लीजिये :)

*Monkey Business means mischievous, suspect, dishonest, or meddlesome behaviour or acts

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निवेदन : यदि  यह  लेख  आपके लिए लाभप्रद रहा हो तो कृपया  कृपया  comment के  माध्यम  से  मुझे ज़रूर बताएं. और इसे अपने Facebook friends  के साथ ज़रूर share करें .

नोट:- Post inspired by AKC (http://www.achhikhabar.com/). We are grateful to My dear friend Mr. Gopal Mishra & AKC for sharing this inspirational story in Hindi for http://kmsraj51.com/ readers.

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जीवन में सबसे बड़ी ख़ुशी तथा चुनाैती उस काम काे करने में है जिसे लाेग कहते हैं कि “तुम नहीं कर सकते”।

-पूज्य आचार्य श्री बाल कृष्ण जी महाराज

 

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हिन्दी कहानियां – नया घर~ Motivational Hindi Stories – New House !!

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कई साल किराये पर रहने के बाद आज उसने नया मकान खरीद ही लिया था।

‘चलो आज ईश्वर की कृपा से घर भी बन गया।’ माँ ने प्रसन्नता जाहिर की।

सबके बड़े-बड़े कमरे थे। माँ का कमरा भी काफी बड़ा था।

‘हाँ, इस कोने में मैं अपना मन्दिर बनाऊँगी’ माँ ने कमरे के एक कोने की ओर इशारा करते हुए कहा।
बीवी भी अपनी विशाल और अति सुंदर रसोई देख कर खुश थी।

कुछ दिन बाद पति-पत्नी को लगा की रसोई पकाने से रसोई खराब हुई जाती है और पूजा करने के कारण माँ वाले कमरे की छत काली पड़ी जा रही है। समस्या का हल निकाला गया। क्यों ना रसोई गैरेज में ही पकाई जाए और माँ का मंदिर भी वहीं बना दिया जाए।

रसोई गैरेज में पकने लगी और मंदिर भी माँ की इच्छा के विरूद्ध गैरेज में स्थापित कर दिया गया।

अब रसोई साफ-सुथरी थी और माँ का कमरा भी मंदिर बाहर लगाने से और बड़ा लगने लगा था।

बड़े घर में आने पर माँ को बेटे-बहू का दिल छोटा-छोटा दिखने लगा था।

Thanks to – रोहित कुमार ‘हैप्पी’ for sharing Motivational Short Hindi Story.

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तुम करना मुझको माफ़ ~ Do you forgive me !!

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poetryहिंदी कविता !!


एक पुरानी कविता आपके बीच रख रहा हूँ ….जो आपके मस्तिस्क में भी एक पुराना चेहरा उभार सकता है ,निवेदन करता हूँ—-

तुम करना मुझको माफ़, तुम्हे प्यार नही मै दे पाया !
जीवन के हर रंगो का, उपहार नहीं मै दे पाया !!

तुम अमलताश की पुष्पकली ,
मै पतझड़ का हूँ तीव्र शूल !
धरती के आतप में झुलसा ,
जीवन के दुःख का अदना मूल !!
तूम नही अधूरी ग़ज़ल शुभे,
तुम तुलसी के मानस सा पावन हो !
तुम हिमगिरी में सहसा कौंधी ,
बादल के बिजली सा मनभावन हो !!
उस चमक शिखा के रंगो का उपहार नही मै दे पाया…..
तुम करना मुझको माफ़ ,तुम्हे प्यार नही मै दे पाया !!!!!!


Real Art

यही कामना है मेरी की मन की ,
शैय्या का तुम्हे मनीष मिले !
किंचित पाऊ गर मै जीवन में ,
तो तुमको वह आशीष लगे !
तुम जिसकी शीतलता में शयन करो,
वह व्यक्ति नही जीवनवट हो !
जिन अधरों का चुम्बन पाओ ,
वह अधर नही गंगातट हो !
ऐसे जीवन के लघुसुख का विस्तार नही मै दे पाया…….
तुम करना मुझको माफ़ तुम्हे प्यार नही मै दे पाया!!!!!!!!

We are grateful to Mr. गौरव श्रीवास्तव “गौर” {बलरामपुर (उप्र.)} for sharing this inspirational Hindi Poetry with kmsraj51. Thank you for your support.


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मनुष्य की कीमत !!

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pen-kms


'Worth' highlighted, under 'Value'


लोहे की दुकान में अपने पिता के साथ काम कर रहे एक बालक ने अचानक ही अपने पिता से पुछा – “पिताजी इस दुनिया में मनुष्य की क्या कीमत होती है ?”

पिताजी एक छोटे से बच्चे से ऐसा गंभीर सवाल सुन कर हैरान रह गये.

फिर वे बोले “बेटे एक मनुष्य की कीमत आंकना बहुत मुश्किल है, वो तो अनमोल है.”

बालक – क्या सभी उतना ही कीमती और महत्त्वपूर्ण हैं ?

पिताजी – हाँ बेटे.

बालक कुछ समझा नही उसने फिर सवाल किया – तो फिर इस दुनिया मे कोई गरीब तो कोई अमीर क्यो है? किसी की कम रिस्पेक्ट तो कीसी की ज्यादा क्यो होती है?

सवाल सुनकर पिताजी कुछ देर तक शांत रहे और फिर बालक से स्टोर रूम में पड़ा एक लोहे का रॉड लाने को कहा.

रॉड लाते ही पिताजी ने पुछा – इसकी क्या कीमत होगी?

बालक – 200 रूपये.

पिताजी – अगर मै इसके बहुत से छोटे-छटे कील बना दू तो इसकी क्या कीमत हो जायेगी ?

बालक कुछ देर सोच कर बोला – तब तो ये और महंगा बिकेगा लगभग 1000 रूपये का .

पिताजी – अगर मै इस लोहे से घड़ी के बहुत सारे स्प्रिंग बना दूँ तो?

बालक कुछ देर गणना करता रहा और फिर एकदम से उत्साहित होकर बोला ” तब तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा हो जायेगी.”

फिर पिताजी उसे समझाते हुए बोले – “ठीक इसी तरह मनुष्य की कीमत इसमे नही है की अभी वो क्या है, बल्की इसमे है कि वो अपने आप को क्या बना सकता है.”

बालक अपने पिता की बात समझ चुका था .

Friends अक्सर हम अपनी सही कीमत आंकने मे गलती कर देते है. हम अपनी present status को देख कर अपने आप को valueless समझने लगते है. लेकिन हममें हमेशा अथाह शक्ति होती है. हमारा जीवन हमेशा सम्भावनाओ से भरा होता है. हमारी जीवन मे कई बार स्थितियाँ अच्छी नही होती है पर इससे हमारी Value कम नही होती है. मनुष्य के रूप में हमारा जन्म इस दुनिया मे हुआ है इसका मतलब है हम बहुत special और important हैं . हमें हमेशा अपने आप को improve करते रहना चाहिये और अपनी सही कीमत प्राप्त करने की दिशा में बढ़ते रहना चाहिये.


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सूफी संत ज़ुन्नुन से जुड़ा प्रसंग।

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ϒ सूफी संत ज़ुन्नुन से जुड़ा प्रसंग। ϒ

प्यारे दोस्तों – बहुत पुरानी बात है। मिस्र देश में एक सूफी संत रहते थे जिनका नाम ज़ुन्नुन था। एक नौजवान ने उनके पास आकर पूछा, “मुझे समझ में नहीं आता कि आप जैसे लोग सिर्फ एक चोगा ही क्यों पहने रहते हैं ? बदलते वक़्त के साथ यह ज़रूरी है कि लोग ऐसे लिबास पहनें जिनसे उनकी शख्सियत सबसे अलहदा दिखे और देखनेवाले वाहवाही करें।”

ज़ुन्नुन मुस्कुराये और अपनी उंगली से एक अंगूठी निकालकर बोले, “बेटे, मैं तुम्हारे सवाल का जवाब ज़रूर दूंगा लेकिन पहले तुम मेरा एक काम करो। इस अंगूठी को सामने बाज़ार में एक अशर्फी में बेचकर दिखाओ।”

नौजवान ने ज़ुन्नुन की सीधी-सादी सी दिखनेवाली अंगूठी को देखकर मन ही मन कहा, “इस अंगूठी के लिए सोने की एक अशर्फी। इसे तो कोई चांदी के एक दीनार में भी नहीं खरीदेगा।”

“कोशिश करके देखो, शायद तुम्हें वाकई कोई खरीददार मिल जाए”, ज़ुन्नुन ने कहा।

नौजवान तुरंत ही बाजार को रवाना हो गया। उसने वह अंगूठी बहुत से सौदागरों, परचूनियों, साहूकारों, यहाँ तक कि हज्जाम और कसाई को भी दिखाई पर उनमें से कोई भी उस अंगूठी के लिए एक अशर्फी देने को तैयार नहीं हुआ। हारकर उसने ज़ुन्नुन को जा कहा, “कोई भी इसके लिए चांदी के एक दीनार से ज्यादा रकम देने के लिए तैयार नहीं है।”

ज़ुन्नुन ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तुम इस सड़क के पीछे सुनार की दुकान पर जाकर उसे यह अंगूठी दिखाओ। लेकिन तुम उसे अपना मोल मत बताया, बस यही देखना कि वह इसकी क्या कीमत लगाता है।”

नौजवान बताई गयी दुकान तक गया और वहां से लौटते वक़्त उसके चेहरे पर कुछ और ही बयाँ हो रहा था। उसने ज़ुन्नुन से कहा, “आप सही थे। बाज़ार में किसी को भी इस अंगूठी की सही कीमत का अंदाजा नहीं है। सुनार ने इस अंगूठी के लिए सोने की एक हज़ार अशर्फियों की पेशकश की है। यह तो आपकी माँगी कीमत से भी हज़ार गुना है।”

ज़ुन्नुन ने मुस्कुराते हुए कहा, “और वही तुम्हारे सवाल का जवाब है। किसी भी इन्सान की कीमत उसके लिबास से नहीं आंको, नहीं तो तुम बाज़ार के उन सौदागरों की मानिंद बेशकीमती नगीनों से हाथ धो बैठोगे। अगर तुम उस सुनार की आँखों से चीज़ों को परखने लगोगे तो तुम्हें मिट्टी और पत्थरों में सोना और जवाहरात दिखाई देंगे। इसके लिए तुम्हें दुनियावी नज़र पर पर्दा डालना होगा और दिल की निगाह से देखने की कोशिश करनी होगी। बाहरी दिखावे और बयानबाजी के परे देखो, तुम्हें हर तरफ हीरे-मोती ही दिखेंगे।”

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
of,,  https://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

———– © Best of Luck ® ———–

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51