मन का एंटी-वायरस। 

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ मन का एंटी-वायरस। ϒ

सम्पूर्ण मन की शक्तियों को जागृत कर –
उसे सही तरीके से उपयोग कर, जीवन में सच्चे आनंद खुशी व पवित्रता का अनुभव करें।

जैसे कंप्यूटर में एंटीवायरस सॉफ्टवेयर अपना काम निरंतर करता रहता है, भीतर की सफार्इ करता है और बाहर से अवांछित चीजों को कम्प्युटर में प्रवेश करने से रोकता है।

वैसे ही हमारे मन-मस्तिष्क में प्रभु भक्ति, आत्म-ज्ञान व् ध्यान और प्रभु सानिद्ध भी बुराइयों की सफार्इ करता है और बाहर से अवांछित बुराइयां और विकार के लिए प्रवेश निषेध कर देता है।

एक मंदिर है जहां साफ सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है। मैं रोजाना वहां मंदिर सेवकों को नियमित सफाई करते, पोछा लगाते देखता हूँ। निरंतर मंदिर प्रांगण में पौछा लगते रहने पर भी रोजाना पौछे का पानी काला एवं मैला हो जाता है, यानी मैल निकल ही आता है। मैनें कभी ऐसा नहीं देखा कि पोछे का पानी, पोछा लगने के बाद साफ रहा हो।

मैं वो दिन देखना चाहता हूँ जब पोछे के बाद पानी एकदम स्वच्छ दिखे (यानी कोई गंदगी नहीं निकले), पर यह संभव नहीं लगता।क्योंकि दिन भर मंदिर में दर्शनार्थी का, सामान-सामग्री का आना जाना लगा रहता है।

ऐसे ही हमारे मन में भी सभी प्रकार के संसारिक विचारों का निरंतर आना-जाना लगा रहता है और इससे गंदगी होता रहता है।

शुद्ध अवस्था(शुद्ध स्थिति) के मन को भी मैला होते देर नहीं लगता।

उदाहरण स्वरूप – आप देखें कि एक बच्चे की २-३ वर्ष की अवस्था में मन कितना शुद्ध और विकार रहित होता है, फिर हर बढ़ते वर्ष में अशुद्धि बढ़ती जाती है।

अपने से बड़ों को देखकर बच्चा झूठ बोलना सीखता है, अन्य बहुत सारी बुराइयां आती जाती रहती है।

अच्छार्इ को देखकर सिखने में और अच्छार्इ को अपने मन-मस्तिष्क में उतारने में बड़ा श्रम है पर बुराइयां बिना श्रम ही मन में उतर कर, चिपक जाते है।

अच्छाई को ग्रहण करना और बनाये रखना बड़ा कठिन है, पर बुराइयों को ग्रहण करना और अपनाये रखना बड़ा आसान है क्योंकि यह स्वत: होने वाली प्रक्रिया है, इसमें हमारे श्रम की आवश्यकता नहीं होती।

बुराइयां हमसे चिपके नहीं, इसकी सावधानी रखने में श्रम की जरूरत होती है, और जो बुराइयां हमारे मन-मस्तिष्क में वास कर रही हैं, उन्हें त्यागने में भी श्रम की जरूरत होती है।

इसलिए सबसे सरलतम उपाय है, सबसे सरलतम साधन है कि नित्य प्रभु भक्ति व ज्ञान-ध्यान के द्वारा प्रभु सानिद्ध में रहकर मन-मस्तिष्क को पोछते रहना, भक्ति- ज्ञान-ध्यान का पोछा लगाते हुए स्वच्छ रखना। प्रभु सानिद्ध की एक विलक्षण और अदभूत शक्ति है कि स्वत: ही हमारे मन-मस्तिष्क का शुद्धिकरण और सफार्इ करता रहता है।

बिलकुल वैसे ही – जैसे कंप्यूटर में एंटीवायरस सॉफ्टवेयर अपना काम निरंतर करता रहता है, भीतर की सफार्इ करता है और बाहर से अवांछित चीजों को कम्प्युटर में प्रवेश करने से रोकता है।

वैसे ही हमारे मन-मस्तिष्क में प्रभु भक्ति व ज्ञान-ध्यान एवं प्रभु सानिद्ध भी बुराइयों की सफार्इ करता है और बाहर से अवांछित बुराइयां और विकार के लिए प्रवेश निषेध कर देता है।

विश्व के किसी भी व्यक्ति व अन्य वस्तु में सामर्थ्य नहीं, किसी भी चीज में इतनी ताकत नहीं कि वह हमारे मन-मस्तिष्क को शुद्ध कर सके।
यह ताकत – या सामर्थ्य सिर्फ और सिर्फ प्रभु सानिद्ध में ही है।

संसार में रहकर ऐसा दिन कभी भी नहीं आएगा कि हमारा मन मैला ही न हो। संसार तो हमेशा गंदगी देगा और प्रभु सानिद्ध से ही उसकी सफार्इ संभव है।

अशुद्ध विचार, अवांछित र्इच्छाओं, वासनाओं व् विकारो को मन-मस्तिष्क से दूर रखने का एकमात्र और सरलतम उपाय है – प्रभु की सच्चे मन से प्रभु की भक्ति….व ज्ञान-ध्यान और साधना करना जिससे प्रभु का सानिध्य सदैव ही प्राप्त हो।

प्रभु की भक्ति….ज्ञान-ध्यान और साधना ही सर्व शक्तियों, सम्पूर्ण पवित्रता और सच्चे आत्मिक आनंद का स्त्रोत है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

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जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51 ϒ

51 LCQof KMSRAJ51

Δ मानव मस्तिष्क असीमित शक्तियों से भरा हैं, लेकिन ये शक्तियां सुषुप्त अवस्था में है, बस ज़रूरत है इन सुषुप्त शक्तियों काे जगाने की। {1}

Δ आत्मा कि मुख्यतः तीन शक्तिया है, प्रथम – मन, द्वितीय – बुद्धि(विवेक) और तृतीय संस्कार। मन सोचने का कार्य करती है, बुद्धि(विवेक) निर्णय(Judgment) करने का कार्य करती है तथा बुद्धि के निर्णय अनुसार मानव शरीर की कर्मइंद्रियाे द्वारा जाे कर्म हाेता है वही  संस्कार के रूप में आत्मा के अंदर रिकॉर्ड हाेता रहता हैं, और संस्कार अनुसार ही काेई भी आत्मा नया शरीर(पुनर्जन्म) लेती हैं। {2}

Δ “सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।” {3}

Δ मनुष्य सदैव मनुष्य के ही रूप में जन्म लेता हैं, हा बस फ़र्क इतना ही पड़ता है कि हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर – नारी शरीर के रूप में जन्म लेती है और नारी शरीर हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर के रूप में जन्म लेती है। यह परिवर्तन चक्र हर तीन जन्म पर हाेता रहता हैं। {4}

Δ “अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे”। {5}

Δ “अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।” {6}

Δ जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।
स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥ {7}

Δ अगर कुछ बदलना है ताे सबसे पहले अपने सोच, कर्म व अपने आप काे बदलें। {8}

Δ काेई भी ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता – हा इंसान बुरे हाे सकते हैं। {9}

Δ सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता। {10}

Δ आत्मबल और मन को शक्तिशाली बनाने के लिए – आत्मा को ईश्वरीय स्मृति और सकारात्मक विचार रूपी शक्ति का भोजन दो। {11}

Δ स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत। {12}

Δ जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। {13}

Δ हमेशा अच्छे कार्य के लिए समर्थन व सहयाेग करें। चाहे उस अच्छे कार्य की अगुआई आपके दुश्मन(Eनेम्य्) के द्वारा ही हाे रही हाे। {14}

Δ मूर्खाें कि एक खासियत हाेती हैं, ओ किसी एक बात काे लेकर लंबे समय तक बैठे रहते है, और मूर्खाें काे बात-बात पर बिना किसी मतलब के भी हंसी खुब आती हैं। {15}

Δ समय न गवाये वरना पछताने के अलावा कुछ न बचेगा जीवन में। {16}

Δ आप अपने अतीत काे नही बदल सकते, लेकिन अपने वर्तमान और भविष्य काे बदलना आपके अपने हाथ में हैं। इसलिए जाे बीत गया उसे याद कर, अपने वर्तमान और भविष्य काे समाप्त ना करें। {17}

Δ आज के समय में ९७% मनुष्य यही साेचते है, कि मेरे किस्मत में जाे हाेगा वही मिलेगा और ऐसा साेचकर वह बैठ जाते हैं। आचार्य चाणक्य जी ने कितनी अच्छी बात कही हैं। “क्या पता किस्मत में ही लिखा हाे की काेशिश करने से ही मिलेगा।” {18}

Δ हमेशा अपनी सोच काे अन्य लोगों(दुसराें) से अलग रखाें तभी आपकी अपनी कुछ अलग पहचान बन पायेगी। {19}

Δ आप रहाे या ना रहाे, लेकिन ऐसा कर्म कराें जीवनभर की आपके कर्म सदैव आपकाे जिवित रखें। {20}

Δ जीवन में एक बार की हुई गलती को बार-बार सोचना अर्थात दाग पर दाग लगाना इसलिए बीती को बिन्दी लगाओ(Full Stop), और आगे बढ़ाे। {21}

Δ किस्मत, नसीब़ और लक के भराेसे रहने पर किसी काे सफलता नहीं मिलती, सफलता ताे सच्चे मन से निरन्तर कार्य करने से ही मिलती हैं। इसलिए जीवन में निरन्तर कार्य करते हुए आगे बढ़ते चलाे। {22}

Δ केवल एक ही बुरा कर्म, किसी भी मनुष्य का शानाें, शाैंकत और इज़्ज़त यू मिनटाें में मिट्टी में मिला देता हैं। जैसे रेत से बना घर त्त्वरित गिर जाता हैं। {23}

Δ बुरी बातें ना खुद सुनो, ना ही किसी काे सुनाओं। {24}

Δ सच्चा ब्राह्मण वह है जो पूर्ण शुद्धि और विधि पूर्वक हर कार्य करे। {25}

Δ ज्ञान और ध्यान का हाेना जरूरी हैं जीवन में। बिना ज्ञान और ध्यान के दिमाग शांत नहीं हाे सकता, साे जीवन में, ज्ञान और ध्यान का हाेना बहुत जरूरी हैं। {26}

Δ “आत्मविश्वास किसी भी इंसान के लिए सर्वश्रेष्ठ आत्मिक शक्ति है। अगर वह स्वयं पर विश्वास रखकर कोई कर्म करता है तो कोई भी मुश्किल उसका रास्ता नहीं रोक सकती”। {27}

Δ चोट लगाने वाले का काम है चोट लगाना और आपका काम है अपने को सदैव बचा लेना। {28}

Δ ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता, इंसान(जीवआत्मा) आैर इंसान के कर्म बुरे हाे सकते हैं। {29}

Δ किसी भी मनुष्य का परम धर्म है, सात्त्विक आहार, सात्त्विक विचार और सात्त्विक जीवन। जिससे निराेगी काया(तन-Body), दिघा॔यु जीवन और स्वस्थ मन काे प्राप्त हाे। {30}

Δ “अगर अपनी अलग पहचान बनानी है तो कुछ अलग कीजिए। जब तक दूसरों से डिफरेंट और अच्छा नहीं करेंगे, तब तक आगे बढ़ना मुश्किल है। अलग करने से रिस्क तो होता है पर कंपीटिशन भी तो कम ही रहता है।” {31}

Δ मन को प्रभू की अमानत समझकर उसे सदा श्रेष्ठ कार्य में लगाओ। {32}

Δ सदैव याद रखें जीवन का सबसे बड़ा शान है सदा खुश रहना और खुशी बांटना-यही सबसे बड़ा शान है। {33}

Δ संकल्पों की शक्ति-संकल्पों को बचाओ तो समय, बोल सब स्वत: ही बच जायेंगे। {34}

Δ अगर जीवन में सफल हाेना चाहते हैं ताे अवसर का लाभ उठाओ, समय की कद्र करो, और शब्दों को सोच समझ कर खर्च करो। {35}

Δ आत्मा रूपी पुरूष को श्रेष्ठ बनाने वाले ही सच्चे पुरूषार्थी हैं। सबसे बड़े ज्ञानी वह हैं जो सदैव आत्म-अभिमानी रहते हैं। {36}

Δ जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।
उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥ {37}

Δ सदैव याद रखें किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है। जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता। {38}

Δ अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे। {39}

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

Δ जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है। {40}

Δ जीवन में सदैव शांत मन से साेंच समझ़ कर हीं काेई निर्णय लें, और जाे निर्णय एकबार लें उसका जीवन में दृढ़ता से पालन करें। {41}

Δ याद रखें प्रत्यक्ष प्रमाण वह है जिसका हर कर्म सर्व को प्रेरणा देने वाला हाे। {42}

Δ पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है।
यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है।
यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है॥ {43}

Δ मास्टर(मालिक) का अर्थ है कि जिस शक्ति का जिस समय आह्वान करो वो शक्ति उसी समय प्रैक्टिकल स्वरूप में अनुभव हो। आर्डर किया और हाजिर। ऐसे नहीं कि आर्डर करो सहनशक्ति को और आये सामना करने की शक्ति, तो उसको मास्टर नहीं कहेंगे। तो ट्रायल करो कि जिस समय जो शक्ति आवश्यक है उस समय वही शक्ति कार्य में आती है? एक सेकण्ड का भी फर्क पड़ा तो जीत के बजाए हार हो जायेगी। {44}

Δ काेई भी इंसान जितना अध्ययन करता हैं, उतना ही उसे अपने अज्ञान का आभास होता जाता है। {45}

Δ सदैव याद रखें जीवन में सबसे बड़ी ख़ुशी तथा चुनाैती उस काम काे करने में है जिसे लाेग कहते हैं कि “तुम नहीं कर सकते” या “तुम्हारे बस की बात नहीं”। {46}

Δ मनुष्य के विचार बहते हुए पानी की तरह है, यदि हम उसमें गदंगी मिलाएँगे ताे वह नाला बन जाएगा आैर यदि ज्ञान व ध्यान रूपी सुगंध मिला देंगे ताे वही पवित्र बन जाएगा। {47}

Δ हम अपने असली स्वरूप काे भुल गये है, जिस कारण हमे अपने निजी गुण और संस्कार भी याद नही हैं। यह भुल ही सभी दुःखाे का कारण हैं।आत्मा की तीन मुख्य शक्तिया हाेती हैं। {48}

“प्रथम-मन, द्वितीय-बुद्धि और तृतीय-संस्कार।”

Δ अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,
१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥ {49}

Δ मन कि शक्ति काे सही समय पर उपयोग करें।

मन में वह असिमित शक्ति भरी हैं, जिसका सही उपयोग कर, हर असंभव कार्य काे सरलता पूर्वक संभव में बदला जा सकता हैं। मन कि शक्तियाे काे सही समय पर और सही दिशा में उपयोग करना सीखें। {50}

Δ आत्मा के सात माैलिक गुण हाेते हैं।

1. शांति (Shanti),

2. सुख (Sukh),

3. प्रेम (Prem),

4. शक्ति (Power),

5. ज्ञान (Gyan),

6. पवित्रता (शुद्धि-Purity),

7. आनंद (आत्मिक खुशी-Anand), {51}

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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Fulfilling Desires By Changing Your Belief System

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

Fulfilling Desires By Changing Your Belief System – Part 1 

One most important characteristic that differentiates the Supreme Soul from human souls is that the Supreme Soul is the only entity that exists in this World Drama that is completely desire-less and remains that way eternally. If we were to make a list of desires that human beings have, we would name a lot many and various different types of desires. Whatever karma or action any soul performs at different points in the World Drama, whether positive or even negative, pure or even impure, they are all performed to fulfill these different types of desires. But when seen from a spiritual perspective, whatever the external form of the desire may be, the internal desire is always very simple – to go back to its eternal (or inert) state of peace or original state of peace, love, joy and power. The eternal or inert state of each soul is the state in which it exists before it begins its journey of birth and rebirth, when it resides in the soul world and the original state of each soul is the state in which it exists when it has just begun its journey of birth and rebirth i.e. at the beginning of the birth-rebirth cycle. Even negative karmas based on the personality traits of anger, greed, ego, lust, etc. may externally seem to be filled with violence or impurity, but internally, each time any soul performs such karmas, all it desires is a return to its eternal and original state (we shall explain this in tomorrow’s message). But it does not realize how these karmas take the soul away and not close to these states.

This is where the role of the Supreme Soul comes in. The Supreme Soul is completely desire-less and possesses the capability, knowledge and power to fulfill these desires of the soul. Being the Supreme Teacher, He guides and teaches us what are the right karmas or actions that can help us fulfill our desires and take us closer to our eternal and original state and which actions, take us away from it. Also He is the only one who can teach us how to connect with Him so that these desires are fulfilled, because he is the Ocean of all the qualities that exist inside us in our eternal and original state and connecting with Him fills us with these qualities. The connection and the right actions, both, are vital for our progress.

© Message ®

As is the aim so is the qualification.

Thought to ponder: If I have a high aim, I will set high standards for myself. I will make efforts to reach that aim. So the qualities that I imbibe will be of a great standard too. So, it is important that I constantly set high standards for myself and make my life qualitatively better.

Point to practice: Today I will, in any one aspect, set an aim for myself. I will then check to see if I can do a bit better than what I think I can do right now. I will make sure I will set an aim for myself a bit higher than what I normally do. This will increase my qualities and will automatically keep me prepared for higher things.

Fulfilling Desires By Changing Your Belief System – Part 2 

We have been holding a lot of incorrect beliefs as to what can lead us to back to our eternal and original state and many of our actions are based on these beliefs. We have mentioned a few examples of incorrect beliefs below. There are many more, which you could reflect on.

Lust and attachment increases love in a relationship.

Anger is necessary for success in relationships and is important for getting work done and gaining respect. It provides a mental upsurge of energy.

Greed attracts physical prosperity and brings happiness.

Ego is power; a person with no ego is generally timid or submissive.

Worry prepares us for the worst, worrying for someone close is expressing our love for them.

Being emotional and crying for our loved ones in bad times, is expressing love for them. Being emotional and crying in good times is expressing and experiencing joy.

Gossiping increases social bonding and gives one an experience of joy.

Jealousy inspires us to do better and achieve more.

The Supreme Teacher changes our belief system and not only makes us aware of these incorrect beliefs but reconditions us by incorporating correct beliefs inside us so that we start performing karmas or actions based on them and start progressing towards our eternal and original state.

© Message ®

To end waste means to be free from defeat.

Thought to ponder: The one with faith in the intellect always remains at a distance from waste, whether it is waste thoughts, wste words or waste actions. To move away from waste means to be victorious. The one who is free from waste is busy with the positive and useful. Such a person is constantly searching for solutions and trying to make the best out of the situation.

Point to practice: It is because of waste that I sometimes experience defeat and sometimes victory. If I am able to finish waste, I am able to finish defeat. Because whatever the situation may be, however challenging it may be, if I am able to finish waste I am able to recognise the benefit that is merged within it and so I am able to experience being constantly victorious.

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The Law of Belief

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  The Law of Belief 

Beliefs are concepts that you consider real and true, and you do not question them, even though they have no logical explanation. If we believe in something strongly, if we think that we can achieve something, then we will. What we believe will come true.

We can classify beliefs into five groups:

Beliefs about defects and weaknesses: These beliefs produce thoughts in our consciousness like: I am no good, I cannot do this, I am useless, I won’t manage to complete it.

Beliefs of survival: These beliefs produce thoughts such as: Life is short. Get whatever you can at any cost whenever you can. Life’s decisions are taken based on these beliefs without taking into the account the repercussions (effects) they may have on our health, our relationships and our future.

Beliefs that create blocks: When we label someone, we are no longer open to try and understand them. For example: My boss is really egoistic. This type of belief blocks the flow of our positive energy and stops us from connecting openly with these people.

Beliefs that strengthen the self: For example: I am capable, I can do it, There is nothing I cannot be or do if I really want to, I will overcome the difficulties and meet the challenge.

True beliefs about ourselves: They are connected to eternal certain truths, such as: I am a spiritual being, I am eternal. God is my spiritual father.

To assure us that a belief is true, we must first believe in it. Then we check it in our consciousness and if a belief is true it will become an experience. If this does not happen, we are doing something wrong or this belief is not correct.

 Message 

To accept advice is to ensure self-progress.

Expression: The natural state of the self is to ensure progress. Everything that is done by the self is for its progress. But the one who rejects advice rejects the progress of the self. To accept advice means to take the chance for whatever benefit that comes my way.

Experience: When someone corrects me or gives me an advice or suggestion, if I accept it in the right spirit, I’ll constantly learn from it. This will enable me to experience constant progress. I am also naturally able to give regard to everyone I come into contact with and remain in constant happiness.

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

 

 

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Meditation For Experiencing Soul Consciousness

Kmsraj51 की कलम से…..

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Meditation For Experiencing Soul Consciousness 

Read over the following words slowly and silently. Using the power of visualization, aim to experience them in your mind:

I withdraw my attention away from the physical limbs and sense organs……..
I focus on myself……..
I am listening through these ears……..
I am looking through these eyes……..
This instrument of mine, the physical body, is a precious vehicle……..
a valuable instrument, a medium……..
But, that which is more valuable and more precious is the being (soul) making this instrument function……..
Within this assembly of bones and muscles and amazing organs is a being of light……..
In the centre of the forehead is a point of light ……
I am this being of light……..
I the being of light express myself through this body……..
But the body is not I……..
I am light……..
I spread rays of peace in all directions……..
I become aware of the power within this point of light……..
Within I the being of light is everything that I am and everything that I have……..
Within my own being are my qualities, my powers, my talents……..
In the awareness of who I am I radiate this light within……..
and in the awareness of this inner light……..
I hold my head held high in self-respect……..

Message 

Humility enables one to serve others.

Expression: The one who is humble is the one who is complete and full. So just like a tree which is laden with fruit, bowing down and offering all it has humbly, the one who is full is ready for service. He is available for others to take benefit from whatever resources are there with him. This humility earns respect from others and gives happiness to all.

Experience: When I am able to bow down with the awareness of what I have, I am fully in the stage of my self-respect. the more I am able to bow, the more others also bow down with regard to me and respect my fortune. This enables me to be a giver to those around me and experience contentment – constantly.

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

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Living A Life In Supra-Consciousness

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Living A Life In Supra-Consciousness – Part 1 

Life with a higher consciousness starts with taking two primary steps – one is the complete purity or holistic celibacy of the mind and the other is a strong love filled connection with a spiritual power giving source. Both contribute equally in creating a mind-field in which strongly charged thoughts (thoughts charged with strength) can emerge which contribute to success in every sphere of karma or action.

Many historians have pondered (given a thought to) over the success of many important and high profile individuals down the history lane – not only what success they achieved and how they achieved it, but also the reasons behind their success. These individuals include kings and queens of a high caliber, with rich capabilities; also many sportsmen and women which the world remembers a lot; also high class politicians from different countries all across the globe who etched (wrote) their names on not only hearts of people whom they led but also people who saw them do that from a distance i.e. people from countries other than their native countries. Also let us not forget the success stories created by scientists and engineers who set an example by dedicating their lives to bringing new inventions to society on which the world is thriving till the present day. There were writers also of different natures who wrote tons of pages on different subjects and are followed by millions of people all over the world for their prowess (skills) with the simple pen. The world also saw artists in different spheres like music, theatre, painting, sculpture, architecture and photography, bringing the world to their feet with their creative spirit. What was the common Aha factor in the lives of all of them – mental strength and also a solitude or silence filled intellect. Today, we have all achieved success on a material level but forgotten the basics of a higher spiritual consciousness or supra-consciousness and how it can bring in our favour the tag (label) of so called successful people.

Message 

Commitment for truth brings constant happiness.

Expression: For the one who is constantly with the truth, there will be no fluctuations in the happiness – experienced by the self and expressed to the others. So there is benefit for both the self and others through this. Only when there is no truth, the support of falsehood is taken to prove and defend oneself. So the happiness is not retained constantly.

Experience: When I am committed towards living by the truth, I will not be influenced by the different situations that I am faced with, but will be able to experience constant happiness. I will never be influenced negatively by negative situations and allow myself to lose my happiness. Also I naturally find my happiness rising constantly.

 Living A Life In Supra-Consciousness – Part 2 

Achievement is measured by many parameters in life. Successful people fulfill all these parameters in their respective fields to emerge as the special ones and not remain as the ordinary or the mundane. An architect thinks deeply to come up with the design of a new structure. The mind needs to be completely free from waste and negativity and completely silent and concentrated for the complete powers of the mind to be harnessed (used). A charismatic leader like Mahatma Gandhi took the vow of complete purity and ahimsa (or non-violence) which not only inspired others but also served as a power behind getting the country liberated from the British Empire. A living legend Pele, who passed through a poverty filled childhood in Brazil, surpassed all records and became known as the most amazing footballer of all times through the power of determination. Jesus Christ was the founder of Christianity. Called the son of God, his secret was the power of love and capacity to tolerate, for which he is remembered by not only 200 crore plus Christians whose hearts are devoted to him, but revered (respected) by the complete world. King Vikramaditya, known for his wisdom, bravery and big-heartedness was the first king who started the worship of the bodiless Supreme godfather Shiva by building the first Jyotirlingam shrine out of the 12 existing Jyotirlingams in India – the Somnath temple in Gujarat, India. He was followed by millions all over India who not only worship Shiva but are an inspiration to many many people all over the world who worship God as non-physical or a subtle point of supreme energy, depicted in different religions in different ways. Pythagoras, a Greek philosopher and one of the oldest mathematicians of our times, led the way by inventing one of the most famous theorems of mathematics – the Pythagoras’s theorem by diving into the depths of ancient Greek wisdom and reflecting internally.

All the above and many many more luminaries (celebrities) of different fields had a supra-consciousness, that something above the ordinary consciousness which shaped their lives and their destiny and made them heroes remembered for their achievements.

Message 

Life’s situations are a game for the one who is prepared to face challenges.

Expression: For the one who is a skilled player, every situation, however challenging it may be, seems like a game. Even the most difficult situation is faced bravely, knowing that it has come to teach something and increase the skill within. So such a person becomes a source of support to those around during difficult times.

Experience: When I am aware of my own skills and specialities, I am able to face all life’s situations with lightness and confidence. I enjoy everything that comes my way. I also am able to experience progress as I use all situations as a means for further increasing my own potential.

 Living A Life In Supra-Consciousness – Part 3 

Living a life in supra-consciousness will give us the power to bring the aims and objectives in our respective fields, whether it be in the professional sector or on a family relationship level or in any extra-curricular activity like a hobby or a sport or on a social activity level like service to mankind or for achieving an objective for the physical body like overcoming a serious ailment (illness) or for some the purpose of earning wealth through different means. A higher spiritual consciousness or supra-consciousness is not only a powerful thought or the power of determination but also an inculcation of a particular virtue or power through self-assessment and nurturing the virtue or power through pure thoughts and feelings. It is an emerged consciousness for a purpose or as a natural nature characteristic focused towards the fulfillment of a significant aim in our life and is the opposite of sub-consciousness which is more of a hidden consciousness and a merged one, but equally important. The conscious mind is the average or the centre between the supra-conscious mind and the sub-conscious mind.

Also, the complete celibacy of the mind, which means a clean and clear transparent water like mind with no trace of anger, lust, jealousy, animosity (hatred), greed or ego; but on the other hand a mind in which the pure lotuses of positive qualities, personality specialties, talents and skills flourish – is a primary requirement for a supra-consciousness to do its work. Along with the requirement of a clean mind, the other potent (powerful) force for a supra-consciousness is the fuel of a powerful and clear connection with the Almighty Father or God, whose power is the highest and strongest in the world. This fuel lifts the consciousness to amazingly high levels and increases its capacity to the levels of God’s consciousness which can achieve success in the most difficult tasks that exist on the planet Earth. And a supra-consciousness is the key to injecting the energy of positivity into any task and contribute to its fulfillment.

Message 

Love for positivity brings progress.

Expression: When I have love for positivity, I will not be able to have negative thoughts for a long time. I will naturally put in effort, both internally and externally to come back to positivity. So this positivity spreads around to others too and serves in creating a positive environment.

Experience: Because of my love for positivity, I begin to enjoy creating and maintaining positive thoughts. When there is experience of positivity within, there is the natural desire to sustain it. Then no negative thoughts or feelings are encouraged. Slowly I find myself being only positive.

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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Fulfilling The Criteria Of Positivity

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Fulfilling The Criteria Of Positivity – Part 1 

What is the best way to define positivity? What, for you, is a positive thought, word or action? We could define positivity as something which leads me as well as others towards to a state of truth. A state of truth for me as well as any and every soul is a state in which it is an embodiment of the virtues of peace, love, joy, purity and power i.e. a state in which these virtues exist inside the soul to the fullest extent. As a result, in this state of truth everything that flows out of the soul or everything that it radiates or every thought, feeling, word or action that it creates, speaks or performs, is filled with these qualities. This state of truth is the original state of every soul.

All these qualities are connected with each other. One quality attracts the remaining qualities towards itself automatically. So, when I, through any medium, bring myself and others, whom I interact with, close to this state, to whatever extent, then that is positivity. If my thought, word or action takes me and others away from this state of truth, then that is the opposite i.e. negativity.

Message 

Mercy means to give courage.

Expression: The one who is merciful is able to give courage to the ones who are weak, because of the ability to look at the positive qualities in them. The weak ones are never made weaker with negative and discouraging talk, but are encouraged to discover and use the strengths that are hidden within. So real mercy will give the courage to the other person to change too.

Experience: When I have mercy on others, I will never lose hope on anyone, but will continue to have good wishes for everyone. Whatever the kind of person, even with the most negative situation, I will find my stock of good wishes to always be full. So I am able to be free from the expectation from the others to bring about a change immediately.

Fulfilling The Criteria Of Positivity – Part 2 

Further elaborating, negativity hides my truth, and causes me to take incorrect steps during the day, without realizing, hurting myself and others yet not knowing how or why. At the level of non-physical spiritual vibrations, we are all connected with each other, as a result of which if I help others to come close to the experience of truth, a state in which the other is an embodiment of the virtues of peace, love, joy, purity and powerI will also help myself: whereas if I bring others down into a state of falsehood, the opposite, that will also bring me down. Whenever I give another soul an experience of any of these virtues, the virtue first flows through me and then touches the other. As a result there is an increase in the virtue inside me first and then the other is benefitted.

In the entire day, my words and actions may be numbered, but my thoughts are in thousands. My mind works, even when I sleep, even though I am not active physically at that time. The quality of my thoughts at that time is largely influenced by the quality of my thoughts, words and actions during the day. So I need to be aware throughout the day as to how much is each thought, word and action of mine fulfilling the criteria of positivity i.e. bringing me and others closer to a state of truth. The more my thoughts, words and actions do so; the result is an increase in an experience of inner and outer lightness in the self and a similar experience from me to those who come into my contact or whom I interact with.

Message 

The language of silence is more powerful than the sound of words.

Expression: When something is expressed in silence, it is with the power of thoughts. Such thoughts spread positive vibrations and reach out to the others, in such a way that even the words can’t. Also when such kind of positive actions are added to the positive thoughts, the desired effect of that is seen. Then the words are not needed to express good intentions and good wishes.

Experience: When I am able to express myself through the language of silence, I am able to be free from expectations for others to listen to what I am saying. I will only be silently communicating whatever I have to through my good wishes and inspiring others through my positive actions. So I am able to remain content and light, even when I have not yet seen the result of my communication.

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