Reflection

Kmsraj51 की कलम से…..

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Reflection (thinking deeply)

Reflection (thinking deeply) is a necessary step in digesting knowledge. Reflection is an exercise of the mind and intellect that goes into the depths of understanding an idea, or realization, or point of knowledge with the aim of practicing it in daily life.
Values in my life are a sign that knowledge has been digested; without this, knowledge simply remains a beautiful aspect, appreciated, interesting information in my intellect but without the ability to give me strength because it is still external; it has not been internalised.

All quality action (quality action is that action which is truly appropriate to person, circumstance and the need of the moment), all newness of perception (understanding), all new insights, or vision, require a space for silent reflection as a preliminary step. Normally, we are lost in the business of action, its routine and ritual that make our life so mechanical and hence dull and boring, or demanding and hectic. A mind and intellect that do not give time and attention to reflective silence (meditation) become lazy, though externally there is lots of activity for hours and hours. No new heights are reached because there is no depth of awareness in what we are doing, no reflection on purpose. As a result, we get trapped by routine.

To be dictated to by external situations, which make us run around without stopping internally, brings about unnecessary stress on the mind, which keeps us tied to the strings of the external, like a puppet pulled, pressed and pushed by circumstances. To break free from this force, to relieve the mind of the weight of stress and waste and routine, I need to step inside and reflect (think) on who I am and where I am going and reassess my value system. Otherwise, life becomes like a wheel that keeps spinning faster and faster until we become dizzy – we want to get off but it is going so fast we do not know how. Reflection and taking time to understand spiritual knowledge bring us to the essence of everything.

– Message –

Your power of truth will enable you to learn from your mistakes.

Expression: The power of truth within you will enable you to learn from all situations. When things go wrong you will be able to check yourself and improve instead of giving excuses to yourself and others. When you give excuses you will not be able to learn and progress.

Experience: Take any situation that went wrong today. Check within yourself what your part was in the situation because of which things went wrong. Then correct yourself based on this understanding.

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

Swami Vivekananda-kmsraj51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

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किसी भी इंसान को बर्बाद कर सकते हैं ये तीन काम।

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श्री राम चरित मानस-KMSRAJ51

श्री राम चरित मानस।

सभी लोगों में अलग-अलग गुण-दोष होते हैं। गुण व्यक्ति को सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं, जबकि दोष (बुराइयां या गलत काम) व्यक्ति को दुख और परेशानियों का सामना करवाते हैं। श्रीरामचरित मानस में तीन ऐसे काम बताए गए हैं जो किसी भी पुरुष को बर्बाद कर सकते हैं। यहां जानिए ये तीन काम कौन-कौन से हैं और किस प्रकार पनपते हैं… इनसे किस प्रकार बचा जा सकता है…

श्रीरामचरित मानस के अयोध्या काण्ड में श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि-

तात तीनि अति प्रबल खल काम क्रोध अरु लोभ।
मुनि बिग्यान धाम मन करहिं निमिष महुँ छोभ।।
इस दोहे में श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि काम, क्रोध और लोभ- ये तीन किसी भी इंसान के लिए प्रबल शत्रु हैं। ये ही सबसे बड़ी बुराइयां हैं जो श्रेष्ठ और ज्ञान-विज्ञान के जानकार मुनियों को भी पलभर में ही बर्बाद कर सकती हैं। श्रीराम कहते हैं कि किसी भी श्रेष्ठ पुरुष के मन में काम भावना स्त्रियों को देखते ही पनप सकती है। कामदेव को सिर्फ स्त्रियों का ही बल प्राप्त है।
जानिए कैसे पनपती हैं ये तीन बुराइयां
श्रीराम लक्षण से कहते हैं कि-
लोभ कें इच्छा दंभ बल काम कें केवल नारि।
क्रोध कें परुष बचन बल मुनिबर कहहिं बिचारि।।
इस दोहे में श्रीराम ने बताया है कि लोभ यानी लालच, इच्छाओं और घमंड के कारण पनपता है। किसी भी पुरुष के मन में जब तक असीमित इच्छाएं रहती हैं, जब तक अलग-अलग सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए मन सोचता रहता है, तब तक लोभ से मुक्ति नहीं मिल सकती है। अपनी धन-संपत्ति के कारण ही व्यक्ति के मन में घमंड समा जाता है। इसी घमंड को बनाए रखने के लिए पुरुष लोभ वश और अधिक धन प्राप्त करने के लिए प्रयास करते रहता है। लोभ वश होकर व्यक्ति सही और गलत काम का भेद भी भूल जाता है। अत: इस बुराई से कोई भी पुरुष बर्बाद हो जाता है।
काम को है केवल स्त्री का बल
श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि काम वासना भी बहुत बड़ी बुराई है। इस बुराई में फंसकर बड़े-बड़े ज्ञानी-विद्वान भी नष्ट हो गए हैं। कामदेव के लिए सिर्फ स्त्री ही सबसे शक्तिशाली शस्त्र है। इसी शस्त्र से कामदेव ने कई बार ऋषि-मुनियों की तपस्या को भी खंडित किया है। इससे बुराई से बचने का सिर्फ एक ही उपाय है और वह है भगवान की भक्ति में मन लगाना। जो लोग भगवान की भक्ति में मन लगा लेते हैं, वे काम वासना पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।
आज के समय में इस बुराई के कारण काफी लोग परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कई लोगों का जीवन बर्बाद हो चुका है। अत: किसी भी पुरुष के लिए काम भावना पर नियंत्रण रखना ही सबसे श्रेष्ठ और कल्याणकारी उपाय है।
क्रोध को कठोर वाणी का बल प्राप्त है
क्रोध को इंसान का सबसे बड़ा शत्रु माना जाता है। क्रोध के आवेश में व्यक्ति अपनी वाणी पर नियंत्रण नहीं रख पाता है और कठोर शब्दों का प्रयोग कर बैठता है। इन शब्दों से सामने वाले व्यक्ति के मन को ठेस भी पहुंचती हैं और जब क्रोध शांत होता है तो व्यक्ति स्वयं भी पछताता है। अत: क्रोध को नियंत्रित करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है वाणी से सीधे मन पर चोट लगती है और इसी कारण आपसी रिश्तों में भी तनाव उत्पन्न हो जाता है। मित्र, शत्रु बन जाते हैं।
इन बुराइयों के संबंध में शंकर जी पार्वती जी से कहते हैं कि-
क्रोध मनोज लोभ मद माया। छूटहिं सकल राम की दाया।।
सो नर इंद्रजाल नहिं भूला। जा पर होइ सो नट अनुकूला।।
शंकर जी कहते हैं कि क्रोध, काम, लोभ, मद और माया- ये सभी दोष श्रीरामजी की कृपा से दूर हो सकते हैं। श्रीराम जिन लोगों पर प्रसन्न हो जाते हैं, वे इंद्रजाल यानी माया से प्रभावित नहीं होते हैं। अत: इन बुराइयों से बचने के लिए व्यक्ति को श्रीरामजी की भक्ति में ही मन लगाए रखना चाहिए। श्रीराम की भक्ति भी सभी सुखों को देने वाली है और कल्याण करने वाली है।

लेख- श्री राम चरित मानस से

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सदा खुश रहना और खुशी बांटना-यही सबसे बड़ा शान है।

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A Spiritual Perspective Of Near Death Experiences

Kmsraj51 की कलम से…..

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A Spiritual Perspective Of Near Death Experiences – Part 1

Introduction

A very interesting phenomenon that closely points not only to the existence of the soul and Supreme Soul but also to their form and qualities is the phenomenon of Near Death Experience (NDE) and Out Of Body Experience (OBE).

What Is A Near Death Experience (NDE)?

A near-death experience (NDE) is the experience reported by a person who nearly died or who was medically dead and then revived or in a situation where death is likely or expected. Some of the common circumstances in which an NDE can occur are:

• serious illness such as cardiac arrest or brain hemorrhage;
• complications before an operation;
• injury, such as from a car accident, shock, electrocution, asphyxia (condition which results from interruption of respiration due to suffocation or drowning);
• suicide attempt;
• coma;
• serious depression, etc.

The most important feature of an NDE is that the person’s consciousness is not in his or her physical body. It might function independently of brain activity, which suggests the existence of the soul. The physical body is usually stationary, while the consciousness of the person experiences an extraordinary freedom of movement, completely independent of the physical body.

– Message –

You will be truly successful when you are loving and detached with the ones you come into contact with.

Checking: With all the people that you come into contact with throughout the day, check if you are able to have a balance between being loving and detached. Detachment doesn’t mean to stay away from people, but to be with them and yet be detached.

Practice: Make the practice of seeing only specialities, your own and that of others. This will enable you to maintain your self-respect and you will be able to find yourself both loving and detached.

A Spiritual Perspective Of Near Death Experiences – Part 2

The Existence Of The Soul

During a Near Death Experience (NDE), the dying often have an Out of Body Experience (OBE), in which there is a sensation of rising up and floating above their own body while the body is surrounded by a medical team, and watching it down below, while feeling comfortable. While people are dying, they may be in intense pain, but as soon as they have this experience i.e. they experience leaving the body, the pain goes away and they experience peace, joy, bliss and a feeling of complete wellbeing.

Doctors who have been conducting research on NDE over the past few decades have in their studies noted that in the Out of Body Experience (OBE) state, many who have ‘physically’ died can, on revival, tell the doctors, nurses, operation room team and relatives exactly what they were saying or doing during the revival process from apparent death or from unconsciousness – both conditions in which a person is not physically active enough to see or hear what is going on around them. Many actually hear the doctors announcing them dead.

Many of the patients who have been revived are able to describe in great technical detail exactly what went on in the operating room while they were supposedly unconscious or dead. e.g. A 44-year old patient, while in a deep coma, later told the doctor that a particular nurse had placed his dentures on the side. The patient accurately described the revival room, those in the room, as well as describing the attitude in the room that everyone was close to giving up on revival efforts.

All this suggests the existence of the consciousness (soul) as a non-physical energy independent of the physical body – in the Out of Body Experience, the consciousness is active and can hear and see, while the physical body is inactive or unconscious or in a coma or apparently dead (as perceived by the medical team).

– Message –

Become a destroyer of obstacles and not an obstacle.

Checking: Check what kind of feelings you are having when you are faced with an obstacle. Do you have the courage to overcome it or do you yourself become an obstacle stopping others’ and your own progress with your negative thoughts.

Practice: Make this practice firm whatever the situation you are in, “I am victorious and success is my birthright” when you remember that obstacles come to teach you for the future and make you progress, you will be free from negative thoughts.

A Spiritual Perspective Of Near Death Experiences – Part 3

The Meeting With A Being Of Light

The most incredible common feature in the majority of NDE and OBE experiences, as stated by the ones who go through the experience, is a meeting with a very bright light. This light is normally a highly radiant golden-white light, a powerful spiritual being of light. Usually, the experience involves being drawn into darkness through a tunnel, at an extremely high speed, until reaching this light. This feature, without doubt, has the deepest impact upon the Near Death Experiencer (NDEr).

In the medical research studies conducted, very different kinds of tunnels are described by NDErs. The commonest one is a void, a blackness: a floating, a moving, a going towards the light. The structure of the tunnel, if anything, is minimal. One person had a tunnel in the form of a great big pipe. Other people go through swirling, whirling tunnels, but they themselves do not turn; the tunnel simply turns around them, while they themselves float through it.

This light that all NDErs encounter appears dim at its first appearance, but it rapidly gets brighter until it finally reaches a supernatural brilliance. They normally express in their experiences that it was a being, a very very personal being of light, with a very beautiful and sweet personality of its own. The warmth and love which radiate from this being to the dying person are just unimaginable and very difficult to describe. They feel extremely secure and loved in its presence and experience an uncontrollable magnetic attraction to this light.

It is important to note that this experience of meeting with a bright light is at the consciousness level, which functions outside the physical body in an Out of Body Experience. The physical body in these experiences is unconscious or in a coma or seemingly dead (as perceived by the medical team). The experience is shared by the Near Death Experiencer after regaining consciousness.

– Message –

When you are full with the treasure of good things that you have imbibed you begin to donate to others too.

Checking: Check if you are expecting either from others or from situations or you are yourself a donor. Where there is any kind of emptiness within there is expectation and you will not be able to give others.

Practice: Practice looking at your own specialities and see what you can contribute to others from this treasure. When you make the practice of sharing the good things you have, you’ll stop expecting from others.

A Spiritual Perspective Of Near Death Experiences – Part 4

The Existence Of The Supreme Soul

Near Death Experiencers identify the being of light which they encounter or meet in various different ways depending upon their religious and cultural background and existing beliefs of this life. They normally say that they did not hear any physical voice or sounds coming from it, nor did they respond to the light through sounds, but there was a direct, uninterrupted transfer of thoughts and emotions in such a clear way that there is no possibility whatsoever of misinterpreting what the light has to communicate to them. This uninterrupted exchange does not even take place in the native language of the NDEr, yet, he understands perfectly. He cannot even translate the thoughts and exchanges which took place while he was near death into the human language, once he returns from the experience.

The Being of Light, as if an all knowledgeable entity, makes a presentation of sorts in front of the dying, in which a complete review of everything they have ever done in this life is projected. Interestingly, some of the common thoughts that the light (being) directs to the person are: * Are you ready to die? * What have you done with your life that is sufficient enough? * Is it worth it? and * What have you done with your life to put across to me?

A very important point to note though is that all NDErs insist that these questions, though emotionally very strong, are not at all asked as if to accuse or threaten or criticize the dying. On the other hand, no matter what their answer may be, they feel an extraordinary acceptance coming from the light, which they have never experienced in any human relationship. The light, rather than being a ‘checker’ (or having a strict personality) shows an all loveful personality, which is highly overwhelming. The light sometimes tells the person that they must return to life. Sometimes, they are given a choice of staying or returning. In either case, the NDErs as taken over as they are by this experience are not willing to return. Some people who do not believe in the existence of God actually come back from this saying very strongly that although prior to this they had no religious or spiritual beliefs, now they believe that there’s a God, and there’s a life after death.

The above experiences strongly suggest the existence of a Supreme Being or Supreme Soul or God and points to the form of this Supreme Energy as being a spiritual point of light with qualities like unlimited peace, love, bliss and power.

– Message –

Become the ones who make efforts continuously and experience constant self-progress.

Checking: Check if there is any doubt within you whether you’ll succeed or not. If there is any such doubt it means that your effort is not continuous. Where there is constant effort you experience constant progress.

Practice: Each day remind yourself of at least one thing that you have achieved for the day. When you make a habit in this way, you will be able to notice and experience the fruit of the effort that you put in.

A Spiritual Perspective Of Near Death Experiences – Part 5

Our Basic Experience

Spirituality teaches us how to practice the art of Soul Consciousness and Supreme Soul Consciousness in our day to day lives. We have through our daily practice perceived and experienced the soul to be a conscient being of light, a tiny pin point of sparkling star like energy full of peace, bliss, love, purity and power residing in the centre of the brain, an entity completely independent of the physical body, containing a conscient mind, an intellect and a definite personality. On the other hand the Supreme Soul or God is perceived and experienced to be the same in form as the soul i.e. a golden white pin point of spiritual light and might, but an ocean of the above mentioned virtues; containing a conscient mind, intellect and personality of his own.

The world in which we play our part and the one on which we are now living is known as the physical world. This is because all living beings here have a physical form. Here the laws of science come into play and time, history and geography are important parameters of life. It is a world of action, experience and expression.

Beyond the physical world of action lies an infinite, timeless dimension of complete silence. This is the original home of all souls, the non-physical soul world, a soft golden red light world where we once stayed, as a soul in a state of total peace and bliss. In meditation we turn our mind and intellect away from the material world and travel to the incorporeal or soul world, the supreme region of highest consciousness with the eye of the mind or the ‘third eye’ and connect them with the Supreme Soul, a resident of the soul world and the fountain of eternal peace. Through this mental exercise or connection we harness his vast resources of spiritual energy and experience super-sensual bliss. This experience is similar to an Out of Body Experience and Near Death Experience. The experience will be explained in tomorrow’s message.

– Message –

You can remain stable when you learn to apply a full-stop.

Checking: In any difficult situation, check if you are having thoughts like, “why do things happen with me like this or why is this person behaving in this way” etc. you can never remain stable when you have such questions.

Practice: Tell yourself that it is much easier to put a full-stop(.) than putting a question mark(?). understand the difference between worrying and finding solutions and worrying. If there is a solution, find it, if there isn’t let things take care of themselves and put a full-stop.

A Spiritual Perspective Of Near Death Experiences – Part 6

Experiencing The Supreme Soul

Read over the following words slowly and silently. Using the power of visualization, aim to experience them in your mind:

I focus on myself, a soul, a golden star like point of light……..
I reside between the eyebrows, in the middle of the forehead……..
I radiate golden rays of peace, purity and love in all directions……..
In this awareness of I the soul, with the power of my mind I can travel beyond the limits of my physical senses……..
I visualize myself gradually going beyond this physical body……..
I, the sparkling star like energy, fly into the night sky……..
I see myself floating above a vast ocean of buildings and lights……..
Slowly I rise higher and higher to enter space……..
I am surrounded by millions of stars and planets……..
Slowly I see myself flying beyond the physical world of five elements……..
I, the golden star, full of peace, enter another dimension, a soft golden-red light world……..
A world of sweet silence and peace,……..
full of peaceful light stretching far far away……..
I feel pure warmth here, surrounded by light……..
I the being of light sparkle in this element……..
I am free of all tensions, extremely light………
This is where I belong,
This is my home……..
I recognize this place……..
I had forgotten it, but now I have rediscovered it……..
In front of me there is a brilliant point of light just like myself……..
I come closer and closer to this Supreme Being of Light……..
The Supreme Soul radiates golden rays of the light of unlimited peace in all directions……..
He is an Ocean of peace……..
I feel the waves of peace passing over me, I absorb the light of sweet peace……..
I bathe under the shower of golden peaceful light……..
All burdens are being washed away……..
It is so soothing, calming and relaxing……..

Spend a few minutes in this positive experience and then gradually come downwards to take your seat back in the physical body.

– Message –

Continuously fill your intellect with good things and it will be empty of waste.

Checking: Each day check how much of good things you are giving your intellect as food. Also check if you find yourself thinking of waste, of things that are not necessary.

Practice: Each day take out some time for yourself and make it a point to read and think of good things. When you continue to fill your intellect with good food in this way, there will no place for anything waste and it will remain healthy.

A Spiritual Perspective Of Near Death Experiences – Part 7

Conclusion

The experience shared in yesterday’s message in which we feel the Supreme Being’s love in the soul world is a very powerful and overwhelming one. The soul doesn’t actually leave the body. It is only a visualization exercise, a journey through levels of consciousness; we simple change our consciousness from one of the physical world to one of the non-physical or soul world.

On the physical level, the memory of our physical home and our childhood experiences in this birth is always within our sub conscious mind right till the end of our lifetime. Sometimes we go back to see the place where we were brought up and played as children. We re-experience the special feelings and important moments. On the spiritual level, the call of our spiritual home and our original state of consciousness is always there in our sub conscious mind in every birth. For every soul in the world there is a spiritual home (where the soul stayed before it came on the earth) and a spiritual Father that calls us to return. For every soul in the world there was a spiritual childhood in the company of the Supreme Father in the soul world – filled with joy, purity, love and bliss. It is a place of pure peace and contentment, a dimension beyond time and space. It is a journey of no distance and it takes only one second to experience it through the medium of meditation!

– Message –

Be enthusiastic and make the best use of your fortune.

Checking: When things go wrong, check if you ever have the thought, “It’s my fate that is stopping me from progressing.” If there is any such thought you are stopping your progress.

Practice: Each day start the day with a thought, “I will make the best use of everything that comes my way. The future is in my hands and I will make the best use of the present to make the best fortune for myself.”

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

 

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-Kmsraj51

जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है।

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एक सफल जीवन के लिए-आत्मा का दैनिक भोजन

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English Murli

Essence: Sweet children, remembrance begets remembrance. The Father also experiences the pull of the children who remember Him with love.

Question: What is the sign of your mature stage? What is the effort to reach that stage?
Answer: When you children reach your mature stage, all your physical organs will become calm. You won’t perform any wrong deeds through your physical organs. Your stage will become unshakeable and immovable. By having an unshakeable stage at this present time, your physical organs will be controlled for 21 births. In order to reach this stage, check yourself. By noting it down you will be cautious. Only with the power of yoga can you control your physical organs. Yoga alone will make your stage mature.

Essence for dharna:
1. Become a conqueror of the physical organs with the power of yoga and become completely pure. In order to attain this stage, continue to check yourself.
2. Always keep it in your intellect that you were Brahmins who became deities. You have now come here again to become deities. This is why you have to understand about sin and charity and be very cautious when you have an exchange with others.

Blessing: May you be a self-transformer with realization in the heart and receive blessings from the Comforter of Hearts.

In order to transform the self, there has to be realization with a true heart in two things.
1. Realisation of your own weaknesses. 2. Realisation of the situations and desires and the feelings in the minds of those who become instruments. Know the reason for the test paper in any situation and let there be the realization of your elevated form in order for you to pass that. Your original stage is elevated and the situation is just a test paper. This realization will easily bring about transformation and when you have realization with a true heart, you will receive blessings from the Comforter of Hearts.

Slogan: An heir is one who is ever ready and says “Ha ji, my lord I am present” every task.

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Hindi Murli

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – याद से याद मिलती है, जो बच्चे प्यार से बाप को याद करते हैं उनकी कशिश बाप को भी होती है”

प्रश्न:- तुम्हारे परिपक्व अवस्था की निशानी क्या है? उस अवस्था को पाने का पुरूषार्थ सुनाओ?
उत्तर:- जब तुम बच्चों की परिपक्व अवस्था होगी तो सब कर्मेन्द्रियां शीतल हो जायेगी। कर्मेन्द्रियों से कोई उल्टा कर्म नहीं होगा। अवस्था अचल-अडोल बन जायेगी। इस समय की अडोल अवस्था से  21 जन्म के लिए कर्मेन्द्रियाँ वश हो जायेंगी। इस अवस्था को पाने के लिए अपनी जांच रखो, नोट करने से सावधान रहेंगे। योगबल से ही कर्मेन्द्रियों को वश करना है। योग ही तुम्हारी अवस्था को परिपक्व बनायेगा।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) योगबल से कर्मेन्द्रिय जीत बन सम्पूर्ण पवित्र बनना है। इस अवस्था को पाने के लिए अपनी जांच करते रहना है।
2) सदा बुद्धि में याद रखना है कि हम ही ब्राह्मण सो देवता थे, अब फिर देवता बनने के लिये आये हैं इसलिए बहुत खबरदारी से पाप और पुण्य को समझकर लेन-देन करनी है।

वरदान:- दिल की महसूसता से दिलाराम की आशीर्वाद प्राप्त करने वाले स्व परिवर्तक भव
स्व को परिवर्तन करने के लिए दो बातों की महसूसता सच्चे दिल से चाहिए 1- अपनी कमजोरी की महसूसता  2- जो परि¬स्थिति वा व्यक्ति निमित्त बनते हैं उनकी इच्छा और उनके मन की भावना की महसूसता। परिस्थिति के पेपर के कारण को जान स्वयं को पास होने के श्रेष्ठ स्वरूप की महसूसता हो कि स्वस्थिति श्रेष्ठ है, परिस्थिति पेपर है – यह महसूसता सहज परिवर्तन करा लेगी और सच्चे दिल से महसूस किया तो दिलाराम की आशीर्वाद प्राप्त होगी।

स्लोगन:- वारिस वह है जो एवररेडी बन हर कार्य में जी हज़ूर हाज़िर कहता है।

Hinglish Murli

Murli Saar : – Meethe Bacche – Yaad Se Yaad Milti Hai, Jho Bacche Pyaar Se Baap Ko Yaad Karte Hai Unki Kashish Baap Ko Bhi Hoti Hai”

Prashna : – Tumhare Paripakva Avastha Ki Nishani Kya Hai ? Us Avastha Ko Paane Ka Pursharth Sunao ?

Uttar : – Jab Tum Baccho Ki Paripakva Avastha Hogi Toh Sab Karmendriya Sheetal Ho Jayegi. Karmendriyon Se Koi Ulta Karm Nahi Hoga. Avastha Achal – Adol Ban Jayegi. Is Samay Ki Adol Avastha Se 21 Janm Ke Liye Karmendriya Vash Ho Jayengi. Is Avastha Ko Paane Ke Liye Apni Janch Rakho, Note Karne Se Savdhan Rahenge. Yogbal Se Hi Karmendriyon Ko Vash Karna Hai. Yog Hi Tumhari Avastha Ko Paripakva Banayega.

Dharan Ke Liye Mukhya Saar : –

1 ) Yogbal Se Karmendriya Jeet Ban Sampurn Pavitra Bannna Hai. Is Avastha Ko Paane Ke Liye Apni Janch Karte Rehna Hai.

2 ) Sada Buddhi Mei Yaad Rakhna Hai Ki Hum Hi Brahman So Devta Thay, Aab Phir Devta Banne Ke Liye Aaye Hai Isliye Bahut Khabardari Se Paap Aur Punya Ko Samajkar Len – Den Karni Hai.

Vardan : – Dil Ki Mahususta Se Dilaram Ki Aashirwad Prapt Karne Wale Swa Parivartan Bhav

Swa Ko Parivartan Karne Ke Liye Do Baaton Ki Mahususta Sacche Dil Se Chahiye 1 – Apni Kamzori Ki Mahususta 2 – Jho Paristithi Va Vyakti Nimit Bante Hai Unki Ichaa Aur Unke Mann Ki Bhaavna Ki Mahususta. Paristithi Ke Paper Ke Karan Ko Jaan Swayam Ko Paas Hone Ke Shrest Swarup Ki Mahususta Ho Ki Swa Stithi Shrest Hai, Paristithi Paper Hai – Yah Mahususta Sahaj Parivartan Kara Lagi Aur Sacche Dil Se Mahsus Kiya Toh Dilaram Ki Aashirwad Prapt Hogi.

Slogan : – Varis Vah Hai Jho Ever-ready Ban Har Karya Mei Ji Hazoor Hazir Kahta Hai.

आध्यात्मिक सेवा में, 
ब्रह्माकुमारी

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pink-sky-kmsraj51-10-Words for a success ful life

 

Picture Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

Book-Red-kmsraj51

100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए –

(100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

Soulword_kmsraj51 - Change Y M T

कुछ भी आप के लिए संभव है ॥

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

~kmsraj51

95+ देश के पाठकों द्वारा पढ़ा जाने वाला हिन्दी वेबसाइट है,, –

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मैं अपने सभी प्रिय पाठकों का आभारी हूं…..  I am grateful to all my dear readers …..

“तू न हो निराश कभी मन से” book

~Change your mind thoughts~

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मन के हारे हार है मन के जीते जीत !!

kmsraj51 की कलम से …..
nature_KMSRAJ51

“मन के हारे हार है मन के जीते जीत”

दोस्तों ,

बहुत दिनों से आप अपने आपको थका हुआ और कमजोर महसूस कर रहे हैं! मन में भी नकारात्मक भाव आ रहे हैं ,कोई उमंग महसूस नहीं हो रही है ! जिंदगी बोझिल सी हो रही है! ऐसे में आप किसी डॉक्टर के पास जाते हैं! वो आपकी पूरी जांच करने के बाद गंभीर स्वर में आपसे कहता है,–‘माफ़ कीजिएगा! लेकिन आपकी reports देख कर मुझे लगता है की अगले एक साल में आपको diabetes और heart problem होने वाली है,थोडा अपना ध्यान रखिए!!

आप ये सुन कर shocked हो जाते हैं! लेकिन अब इसके बाद जो आपकी प्रतिक्रिया होती है,वो महत्वपूर्ण है!

इस खबर को सुनने के बाद आप दो तरह से प्रतिक्रिया कर सकते हैं!

पहला, ये सुनते ही आपका मन कहता है, देखा, मैं तो पहले ही कह रहा था कुछ तो गड़बड़ है! तुम बीमार होने वाले हो! आप तुरंत doctor के prediction के आगे हथियार डाल देते हैं! आपकी नकारात्मक सोच आपकी उम्र को 10 साल आगे की स्थिति में पहुंचा देती है!!

आप हताश और निराश से कुर्सी से उठते हैं! किसी पराजित आदमी की तरह अपने कंधे झुका कर clinic से बाहर निकलते हैं! घर आकर चुपचाप या तो बिस्तर या TV के आगे बैठ जाते हैं!

आपके मन में ये prediction मजबूती से बैठ गई है की ये तो होना ही है तो क्यों मैं सुबह जल्दी उठूं ,व्यायाम करूँ, सही आहार लूँ, मेहनत करूँ! ये विचार आपके मनोमस्तिक्ष पर इतनी बुरी तरह हावी हो जाते हैं की सोते, जागते खाते-पीते आप बस ये ही सोचते रहते हैं की अब तो मुझे diabetes और heart problem होने वाली है आखिर अब तो doctor ने भी ये कह दिया है!

आप निरुत्साहित से अपने काम करते हैं! चिंता में TV के सामने बैठ कुछ ना कुछ खाते रहते हैं! आप अपनी चिंता को खाने की आड़ में दबाने की कोशिश करते हैं! फिर ऐसे ही हताशा, निराशा और आलस से भरी आपकी दिनचर्या हो जाती है!!

फिर एक दिन अचानक आपकी तबियत ज्यादा खराब हो जाती है! आप डॉक्टर के यहाँ जाते हैं! आपका सारा checkup करने के बाद doctor बड़े ही निराशा भरे स्वर में कहता है,– ‘मुझे अफ़सोस है! लेकिन मैं आपको ये बताना चाहता हूँ की आपको high BP, diabetes और heart problem हो चुका है! अगर अब भी आप अपना अच्छे से ख्याल नहीं रखेंगे तो गाडी ज्यादा देर और दूर तक नहीं चल पाएगी! आप shocked से सामने दिवार पर लगा कैलेंडर देखते हैं! अरे अभी तो केवल 5 महीने ही गुजरे हैं, डॉक्टर ने तो 1 साल की कहा था! आपकी सोच और मन की हार ने उस भविष्यवाणी को समय से पहले ही सच साबित कर दिया! आप फिर पहले से भी ज्यादा हताश, निराश और झुके हुए कन्धों के साथ clinic से बाहर निकलते हैं! और ये कहानी दोस्तों फिर ज्यादा लम्बी नहीं चलती है ……..!!

वहीं दूसरी तरफ doctor के ये कहते ही, की अगले एक साल में आपको diabetes और heart problem होने वाली है, आपको आपकी अंतरात्मा को एक झटका सा लगता है! आप इस बात को एक चुनोती की तरह लेते हैं! तुरंत आपका मन और आत्मबल एक निर्णय लेते हैं, की अरे ये सिर्फ एक prediction ही तो है, हकीकत नहीं है, और मैं इसे हकीकत बनने भी नहीं दूंगा! आप मन ही मन संकल्पित होते हैं, अपनी पिछली जिंदगी की कमियों, लापरवाहियों और आलस पर एक नजर डालते हैं और तुरंत निर्णय लेते हैं, बस अब और नहीं! अब मेरी जिंदगी, मेरी सेहत मेरे हाथ में है! आपकी सोच पूरा u-turn ले लेती है! आप ये ठान लेते हैं की आज से बल्कि अभी से मैं अपने आप को, अपनी आदतों को बदल दूंगा! इस prediction को मैं झूठा साबित कर के रहूँगा! आप एक संकल्प और मन के विश्वास के साथ कुर्सी से उठते हैं और clinic से बाहर निकलते हैं!!

आप अपनी दिनचर्या को पूरी तरह से बदल देते हैं! जल्दी उठना, ध्यान, व्यायाम, सही आहार, सकारात्मक सोच, श्रद्धा, आशावादिता, उमंग ,उत्साह और पर्याप्त मेहनत को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लेते हैं! कुछ दिनों के बाद जब मन में निराशा के भाव आने लगते हैं, आलस पुनः आप पर हावी होना चाहता है! तो डॉक्टर की भविष्यवाणी को याद कर आप अपनी हताशा को पीछे धकेल देते हैं!

आपका ये संकल्प की इस prediction को मैं सही साबित नहीं होने दूंगा, आप को वापस अपने सेहत के रास्ते पर अग्रसर कर देता है!!

फिर आप कई साल बाद ऐसे ही अपने routine checkup के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं! डॉक्टर बड़ी गर्मजोशी और उमंग से कहता है, -क्या बात है! आपने तो अपना कायाकल्प ही कर लिया है! आप तो पहले से भी ज्यादा सेहतमंद और जवान हो गए हैं! आप मुस्कुरा कर डॉक्टर से हाथ मिलाते हैं और सीटी बजाते हुए क्लिनिक से बाहर आ जाते हैं! और ये कहानी बहुत अच्छे तरीके से बहुत लम्बी चलती है!!

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तो दोस्तों ,
कहानी कैसी लगी? वैसे ये कहानी है ही नहीं! हकीकत है! हम लोगों में से 90 से 95 % लोग पहले वाली सोच के होते हैं, है ना? केवल 5 या 10 % लोग ही दूसरे नजरिये वाले होते हैं! जो अपने पुरुषार्थ, मनोबल और मेहनत से भविष्यवाणी को भी बदल देते हैं! आपके मन की नकारात्मक सोच आपको समय से पहले डूबा भी सकती हैं और सकारात्मक सोच अनेकों ऊँचाइयों तक उठा भी सकती है! इसलिए जिंदगी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और तदुपरांत सार्थक प्रयत्न आपकी सफल, सेहत भरी जिंदगी और उज्जवल भविष्य के लिए अति आवश्यक है! है ना?

तो मन का कैसा नजरिया रखना चाहेंगे आप? आखिर ………..

जैसा नजरिया है आपका, वैसी जिंदगी है आपकी ……………

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“एक क्रोध आपको कितनी तरह की हानि पहुंचाता है”


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“एक क्रोध आपको कितनी तरह की हानि पहुंचाता है”

कई लोगों का स्वभाव होता है बात बात पर उत्तेजित हो जाना। मर्यादाएं भूल जाना। किसी पर भी फूट पडऩा। ऐसे लोग अक्सर सिर्फ नुकसान ही उठाते हैं। खुद के स्वास्थ्य का भी, संबंधों का भी और छवि का भी। हमेशा ध्यान रखें अपनी छवि का। लोग अक्सर अपनी छवि को लेकर लापरवाह होते हैं। हम जब भी परिवार में, समाज में होते हैं तो भूल जाते हैं कि हमारी इमेज क्या है और हम कैसा व्यवहार कर रहे हैं। निजी जीवन में तो और भी ज्यादा असावधान होते हैं। अच्छे-अच्छे लोगों का निजी जीवन संधाड़ मार रहा है।

अगर आप बार-बार गुस्सा करते हैं तो सबसे पहले जो चीज खोते हैं वह है आपके संबंध। क्रोध की आग सबसे पहले संबंधों को जलाती है। पुश्तों से चले आ रहे संबंध भी क्षणिक क्रोध की बलि चढ़ते देखे गए हैं। दूसरी चीज हमारे अपनों की हमारे प्रति निष्ठा। रिश्तों में दरार आए तो निष्ठा सबसे पहले दरकती है। फिर जाता है हमारा सम्मान। अगर आप बार बार किसी पर क्रोध करते हैं तो आप उसकी नजर में अपना सम्मान भी गंवाते जाते हैं। इसके बाद बारी आती है अपनी विश्वसनीयता की। हम पर से लोगों का विश्वास उठता जाता है। फिर स्वभाव और स्वास्थ्य। कहने को लोग हमारे साथ दिखते हैं, लेकिन वास्तव में वे होते नहीं है।

समाधान में चलते हैं। हमेशा चेहरे पर मुस्कुराहट रखें। कोई भी बात हो, गहराई से उस पर सोचिए सिर्फ क्षणिक आवेग में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त ना करें। सही समय का इंतजार करें। कृष्ण से सीखिए अपने स्वभाव में कैसे रहें। उन्होंने कभी भी क्षणिक आवेग में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। हमेशा परिस्थिति को गंभीरता से देखते थे। शिशुपाल अपमान करता रहा लेकिन वे सही वक्त का इंतजार करते रहे। वक्त आने पर ही उन्होंने शिशुपाल को मारा।

अपनी दिनचर्या में मेडिटेशन को और चेहरे पर मुस्कुराहट को स्थान दें। ये दोनों चीजें आपके व्यक्तित्व में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं। कभी भी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए आपको तैयार रखेगी।

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mantra of success life !!

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“जीवन में सबसे कठिन दौर यह नहीं है जब कोई तुम्हें समझता नहीं है,
बल्कि यह तब होता है जब तुम अपने आप को नहीं समझ पाते “

ladali


“जीवन में हमेशा उड़ने की कोशिश कीजिए,
उड़ नहीं सकते तो भागने की कोशिश कीजिए,
भाग नहीं सकते तो चलने की कोशिश कीजिए,
चल नहीं सकते तो सरकने की कोशिश कीजिए,
क्योंकि सफलता उन्ही के हाथ लगती है,
जो निरंतर आगे बड़ने का प्रयत्न करते रहते है I”

“आज दुनिया में महान बनने की चाहत तो हर एक में है, पर पहले इन्सान बनना अक्सर लोग भूल जाते है”

“जिंदगी कितनी खुबसूरत है ये देखने के लिए हमें ज्यादा दूर जाने की जरुरत नहीं है, जहाँ हम अपनी आंखे खोल ले वहीँ हम इसे देख सकते है”

” बुरी संगत उस कोयले के समान है, जो गर्म हो तो हाथ को जला देता है और ठंडा हो तो काला कर देता है ”

” भलाई के काम में एक बूंद अहंकार की पड़ जाए तो वह बुराई में तबदील हो जाता है ”

” अक्सर लोग झूठी प्रशंसा के मोह जाल में फंस कर खुद को बर्बाद तो कर लेते है पर आलोचना सुनकर खुद को संभालना भूल जाते है ”

” दूसरों के दुख पर अपनी खुशी का निर्माण करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए ”

” सफलता आपको मिलेगी या नहीं, यह केवल इस बात पर निर्भर करता है कि आप स्वयं सफलता के लिए कितने इच्छुक है “

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