बहाने Vs सफलता।

Kmsraj51 की कलम से…..

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बहाने Vs सफलता।

1. मुझे उचित शिक्षा लेने का
अवसर नही मिला…
उचित शिक्षा का अवसर
फोर्ड मोटर्स के मालिक
हेनरी फोर्ड को भी नही मिला ।

2. मै इतनी बार हार चूका ,
अब हिम्मत नही…
अब्राहम लिंकन 15 बार
चुनाव हारने के बाद राष्ट्रपति बने।

3. मै अत्यंत गरीब घर से हूँ …
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी
गरीब घर से थे।

4. बचपन से ही अस्वस्थ था…
आँस्कर विजेता अभिनेत्री
मरली मेटलिन भी बचपन से
बहरी व अस्वस्थ थी।

5. मैने साइकिल पर घूमकर
आधी ज़िंदगी गुजारी है…
निरमा के करसन भाई पटेल ने भी
साइकिल पर निरमा बेचकर
आधी ज़िंदगी गुजारी।

6. एक दुर्घटना मे
अपाहिज होने के बाद
मेरी हिम्मत चली गयी…
प्रख्यात नृत्यांगना
सुधा चन्द्रन के पैर नकली है ।

7. मुझे बचपन से मंद बुद्धि
कहा जाता है…
थामस अल्वा एडीसन को भी
बचपन से मंदबुद्धि कहा जता था।

8. बचपन मे ही मेरे पिता का
देहाँत हो गया था…
प्रख्यात संगीतकार
ए.आर.रहमान के पिता का भी
देहांत बचपन मे हो गया था।

9. मुझे बचपन से परिवार की
जिम्मेदारी उठानी पङी…
लता मंगेशकर को भी
बचपन से परिवार की जिम्मेदारी
उठानी पङी थी।

10. मेरी लंबाई बहुत कम है…
सचिन तेंदुलकर की भी
लंबाई कम है।

आज आप जहाँ भी है,
या कल जहाँ भी होगे।
इसके लिए आप किसी और को
जिम्मेदार नही ठहरा सकते।
इसलिए आज चुनाव करिये,
सफलता और सपने चाहिए
या खोखले बहाने।

Please Share your comment`s.

आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

———– @ Best of Luck @ ———–

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

CYMT-100-10 WORDS KMS

भावुकता और सतर्कता में संतुलन की आवश्यकता है और यह संतुलन ध्यान से आता है।

A balance between sensitivity and sensibility is required and this balance comes from meditation.

~Sri Sri Ravi Shankar Ji

निश्चय ही आप विजयी होंगे, यदि आप अपनी दुर्बलता (Weakness) को अपनी ताकत में तब्दील करना सीख लें।

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51

 

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सफलता का आधार है, आत्मविश्वास..

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सफलता का आधार है, आत्मविश्वास

Self Confidence

स्वामी विवेकानंद जी

मित्रों, जीवन  में हम सभी अपने-अपने लक्ष्य को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करते रहते हैं। विद्यार्थी अच्छे नम्बरों से पास होकर एक अच्छी नौकरी का सपना लिये आगे बढने की कोशिश करते हैं। व्यपारी अपने कारोबार को आगे बढाने का सपना देखते हैं, खिलाङी सर्वश्रेष्ठ प्रर्दशन का सपना संजोते हैं। ऐसे ही अनेक लोग अपने-अपने  क्षेत्रों में अपना बेस्ट देने का प्रयास करते हैं और सफलता अर्जित करना चाहते हैं। किन्तु अक्सर देखा जाता है कि सभी को सफलता आसानी से मिल जाये ये मुमकिन नही होता। परेशानियां और अङचने तो आ ही जाती हैं, जिसके कारण उत्साह में थोङी उदासीनता आना स्वाभाविक है परंतु ऐसी विषम परिस्थिति में हमारा आत्मविश्वास ही एक जादूई पारस पत्थर की तरह हमें आगे बढने में मदद करता है। आत्मविश्वास अर्थात स्वयं पर विश्वास। हम लोग अक्सर एक शब्द सुनते हैं इच्छा-शक्ति इस इच्छा और शक्ति के बीच छुपा हुआ जो प्रकाश पुंज है वही है आत्मविश्वास। किसी कार्य को करने की कामना अर्थात इच्छा रखना बहुत अच्छी बात है परंतु आत्मविश्वास की ज्योति के बिना किसी काम में सफलता की कामना करना अपने आप को धोखा देने के समान है।

स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं कि, “जिसमें आत्मविश्वास नही उसमें अन्य चीजों के प्रति कैसे विश्वास हो सकता है ? ”

आत्मविश्वास तो सफलता की नॉव का एक ऐसा सशक्त मल्लाह है, जो डूबती नॉव को उलझनों एवं कठिनाईंयों की प्रचंड लहरों के बीच, पतवार के सहारे नही बल्कि अपने विश्वास रूपी हाँथों के सहारे बाहर ले आता है। गाँधी जी एवं अनेक देशभक्तों के आत्मविश्वास का ही परिणाम है भारत की आजादी। स्वामी विवेकानंद जी अपने आत्मविश्वास के बल पर ही शिकागो धर्म सभा में भारत को गौरवान्वित कर सके, जबकि विदेष में उन्हे अपनी वेश-भूषा के कारण उपहास का पात्र बनना पङा था। बुद्ध, ईसा, सुकरात जैसे लोगों ने तो अपने आत्मविश्वास के बल पर युगों के प्रवाह को ही मोङ दिया। मानव जीवन के इतिहास में महापुरुषों के आत्मविश्वास का असीम योगदान है। महाराणा प्रताप अपने बच्चों के साथ भूखे-प्यासे जंगल-जंगल भटक रहे थे। अकबर की विशाल सेना उनके पीछे पङी हुई थी। उन्हे अकबर द्वारा कई प्रलोभन दिया गया। उनके पास समर्पण का भी प्रस्ताव भेजा गया जिसके बदले में उनका राज्य उन्हे लौटाने की बात कही गई, परंतु आत्मविश्वासी महाराणा प्रताप किसी भी प्रलोभन के चंगुल में नही फंसे और अंत तक युद्ध करते रहे। उनकी विरता की गाथा और स्वाभिमान राजस्थान का गौरव है।

स्वामी रामतीर्थ कहते हैंः-  “धरती को हिलाने के लिए धरती से बाहर खङे होने की जरूरत नही है। आवश्यकता है, आत्मा की शक्ति को जानने और जगाने की।” 

सुदृढ विश्वास किसी भी चुनौति से घबराता नही है, बल्कि उससे पार पाने के लिए अपनी राह निकालकर आगे की ओर अग्रसर हो जाता है। खिलाङी हो या सैनिक दोनों ही अपने आत्मविश्वास से ही जीत हासिल करते हैं। पूरे एक वर्ष की पढाई को व्यक्त करने के लिए तीन घंटे की परिक्षा का समय कितना कम होता है!  और तो और कभी-कभी तो कुछ ऐसे प्रश्न भी आ जाते हैं जो उनके कोर्स का नही होता है। ऐसी स्थिती में जो विद्यार्थी अपना पूरा ज्ञान,  संयम और आत्मविश्वास के साथ ध्यान करता है वो लगभग सभी प्रश्नों के उत्तर सफलता से देकर अच्छे अंकों को प्राप्त करता है। वहीं जो विद्यार्थी ऐसे  अप्रत्याशी प्रश्नों को देखकर घबरा जाते हैं, वो याद किया हुआ उत्तर भी सही ढंग से नही लिख पाते उनका आत्मविश्वास डगमगा जाता है, जिससे उन्हे उनकी आशा के अनुरूप अंक नही मिलपाते। आत्मविश्वास तो ऐसी मनः स्थिति है, जो प्रकृति, संस्कृति, परिस्थिति एवं नियति (भाग्य) किसी के भी विरुद्ध खङी हो सकती है, भले ही मार्ग नया हो।  पर जिसके भी साथ होती है, उसकी अपनी नई ऊर्जा के साथ होती है।

रामधारी सिंह दिनकर कहते हैंः-  “सियाही देखता है, देखता है तु अंधेरे को,
                                                 किरण को घेरकर छाए हुए विकराल घेरे को,
                                                 उसे भी देख, जो इस बाहरी तम को बहा सकती है।
                                                 दबी तेरे लहु में रौशनी की धार है साथी,
                                                 उसे भी देख, जो भीतर भरा अंगार है साथी।” 

आत्मविश्वास, किसी टिमटिमाते दिपक की लौ के समान नही होता, जो फूंक मारने से भी कंपित हो जाये; बल्कि वो तो ऐसा दावानल है, जो आँधी और तुफान से बुझने के बजाय और भी प्रज्वलित हो जाता है। आत्मविशवास हमारी सफलता का अभिन्न अंग है, परंतु अति आत्मविशवास एक बिमार मानसिकता का प्रतीक है, जिससे हम सबको बचना चाहिए।

ए.पी. जे. अब्दुल्ल कलाम के अनुसारः- ‘Confidence & Hard work is the best medicine to kill the disease called failure. It will make you a successful person.’ 

आत्मविश्वास रूपी प्रेरणा कुछ आन्तरिक संक्लपों से निर्मित होती है तो कुछ बाह्य कारणों से निर्मत होती है, जिसे अंग्रेजी में नेचर बनाम नर्चर का नाम दिया जाता है। एक बच्चा या बच्ची जब साइकिल चलाना सिखते हैं तो उनके अभिभावक पिछे से साइकिल को पकङे रहते हैं, बच्चे को भी विश्वास होता है अपने अभिभावक पर और वो आगे देखकर साइकिल चलाने लगता है। कुछ पल बाद जब अभिभावक को लगता है कि बच्चा अपना बैलेंस बना ले रहा है तो, वह अपने को साइकिल से दूर कर लेते हैं और बच्चा अकेले ही साइकिल चलाने लगता है क्योंकि उसे विश्वास होता है कि उसके अभिभावक उसे पकङे हुए हैं। जब उसे सत्य स्थिति का बोध होता है तो एकबार थोङा लङखङाता है किन्तु दूसरे ही पल आत्मविश्वास के साथ पुनः साइकिल चलाने लगता है। विश्वास हमारे व्यक्तित्व की ऐसी विभूति है, जो आश्चर्यजनक ढंग से हमसे बङे सा बङा कार्य करवा लेती है। आज की अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनिक, मंगल की यात्रा हो या पुराने समय के मिस्र के पिरामिड, पनामा नहर और दुर्गम पर्वतों पर बने भवन और सङक मार्ग इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देते हैं।

स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं, “कभी कमजोर नही पङें, आप अपने आपको शक्तिशाली बनाओ, आपके भीतर अनंत शक्ति है।” 

जीवन में जब कठिनाईयां आती हैं तो कष्ट होता है, लेकिन जब यही कठिनाईयां जाती हैं तो प्रसन्नता के साथ-साथ एक आत्मविश्वास को भी जगा जाती हैं। जो कष्ट की तुलना में अधिक मूल्वान है।  नाकामयाबी को सिर्फ सङक का एक स्पीड ब्रेकर समझें जिसके बाद हम पुनः अपनी आत्मशक्ति रूपी ऊर्जा से आगे बढें। आत्मविश्वास की कूंजी से हम सब अपने-अपने लक्ष्यों का ताला सफलता से खोल सकेगें क्योंकि सफलता की नींव है, मेहनत और विश्वास।  अतः मित्रों, आत्मविश्वास रूपी बीज का अंकुरण अवश्य करें उसे अपनी सकारत्मक सोच और मेहनत की खाद से पोषित करें क्योंकि आत्मविश्वास सम्पूर्ण सफलताओं का आधार है।

“Self Confidence the foundation of all great success & achievement.”

नोट: Post inspired by- Mrs. ,,

Anita Sharma

एक अपील

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।
श्रीमती. अनीता शर्मा जी का तहे दिल से आभारी हुँ। for sharing great Hindi quotes “Self Confidence”.
Mrs. Anita Sharma Blog:- http://roshansavera.blogspot.in/

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जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

-KMSRAJ51 

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अंग्रेजी और हिंदी में मुरली…..

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हिंदी मुरली (21-Sep-2014)

प्रात: मुरली ओम् शान्ति ’अव्यक्त-बापदादा“ रिवाइज: 19-12-78 मधुबन

रीयल्टी ही सबसे बड़ी रॉयल्टी है

वरदान:- मनमनाभव के मन्त्र द्वारा मन के बन्धन से छूटने वाले निर्बन्धन, ट्रस्टी भव
कोई भी बंधन ापिंजड़ा है। ापिंजड़े की मैना अब निर्बन्धन उड़ता पंछी बन गयी। अगर कोई तन का बंधन भी है तो भी मन उड़ता पंछी है क्योंकि मनमनाभव होने से मन के बन्धन छूट जाते हैं। प्रवृत्ति को सम्भालने का भी बन्धन नहीं। ट्रस्टी होकर सम्भालने वाले सदा निर्बन्धन रहते हैं। गृहस्थी माना बोझ, बोझ वाला कभी उड़ नहीं सकता। लेकिन ट्रस्टी हैं तो निर्बन्धन हैं और उड़ती कला से सेकण्ड में स्वीट होम पहुंच सकते हैं।

स्लोगन:- उदासी को अपनी दासी बना दो, उसे चेहरे पर आने न दो।

English Murli (21-Sep-2014)

Reality is the Greatest Royalty.

Question: Who can maintain permanent intoxication? What are the signs of those who have permanent intoxication?
Answer: Only those who are seated on BapDada’s heart-throne can have permanent intoxication. The place for the elevated confluence-aged souls is the Father’s heart-throne. You cannot find such a throne throughout the whole cycle. You will continue to receive the throne of the kingdom of the world or the kingdom of a state, but you will not find such a throne again. This is such an unlimited throne that, whether you are walking around, eating or sleeping, you are on the throne. Those children who are seated on the throne in this way have forgotten the old bodies and the bodily world and, while seeing, do not see anything.

Question: On the basis of which dharna can you remain constantly merged in the ocean of happiness?
Answer: Be introverted. Those who are introverted are always happy. Residents of Indore means those who are introverted and are constantly happy. The Father is the Ocean of Happiness and so the children would also remain merged in love in the ocean of happiness. The children of the Bestower of Happiness would also be bestowers of happiness, the ones who distribute the treasures of happiness to all souls. Whoever comes and with whatever loving feeling they come, they should have them fulfilled through you. So, become images that are complete and perfect. Just as nothing is lacking in the Father’s treasure-store, similarly, children would also be fully satisfied souls, the same as the Father.

Achcha. Om shanti.

Blessing: May you be a trustee who is free from bondage and with the mantra of manmanabhav, become free from any bondage of the mind.
Any type of bondage is a cage. A caged bird has now become a bondage free, flying bird. Even if there is any bondage of the body, the mind is a flying bird because, by your being manmanabhav, any bondages of the mind are broken. There is no bondage even in looking after matter. Those who look after everything as trustees are free from bondage. A householder means to have a burden and those who have a burden can never fly. If you are a trustee, you are free from bondage and you can reach your sweet home with your flying stage in a second.

Slogan: Make unhappiness your servant and do not let it show on your face.

आध्यात्मिक सेवा में ब्रह्मकुमारी,

In Spiritual Service Brahmakumari,

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

 ~KMSRAJ51

 

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Practical Exercise On Intellect Reawakening And Empowerment

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Practical Exercise On Intellect Reawakening And Empowerment

Mera Baba

मेरा बाबा

It has been estimated that for around 80% of our daily routine we are ruled by habits. This means that most of the time we go straight from thought (created by the mind) to action, without checking the quality of our thoughts. In this way, we bypass the intellect, and do not use our capacity to judge right from wrong and to make conscious decisions. What we need to do now is reawaken, use and empower the intellect, which is true spiritual empowerment.

Practical Exercise
Withdraw your attention from everything around you. Create a simple thought in your mind. Concentrate on the thought. Then use your intellect to judge to what extent the thought is right or wrong and what the quality of that thought is (is it a negative thought, a waste or unnecessary thought, a necessary thought, a positive one etc.?). If you decide it is not a good thought, leave it and create a better thought. In this way, you consciously exercise control of your mind and intellect thereby strengthening your mental and intellectual capacities. This will also help you regain your feelings of rule over the self.

If thoughts or images come from your memories or from sources outside your own mind while you are busy in this inner exercise, don’t give them any mental energy. Let them go and bring your attention back to your own ‘conscious’ creation (mentioned above).

Once, you have mastered this in this exercise; try the same process while you busy in your daily routine.

Message

The one with contentment is neither upset nor upsets others.

Projection: Many times I find that my words, actions or behaviour tends to upset others inspite of my not wanting to hurt them. I seem to be very happy with the situation, but others don’t seem to be. At that time I am not really able to understand the reason for this and I consider the others to be unreasonable.

Solution: I need to check myself when others are getting upset with me. I need to make effort to check and change myself constantly so that I am able to move along with the demands of time. This is what will bring about true contentment – such contentment that neither will I be upset nor will I upset others.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

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Purity is the foundation of true peace & happiness…..

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पवित्रता

पवित्रता सच शांति और खुशी का धार है.

In-English…..

 

Purity is the foundation of true peace & happiness,

It is your most valuable Property in your life,

Preserve it at any cast. !!

 

In-Hindi…..

 

पवित्रता सच शांति और खुशी का धार है.

यह पके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

 

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Virtues / Values / Qualities

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Mera Baba

मेरा बाबा

Virtues / Values / Qualities

Take one of the following virtues or values (qualities) per day and spend five minutes thinking about its meaning and its application during the day.

Harmony (Unity)
Forgiveness
Trust
Flexibility
Courage
Gentleness
Freedom
Understanding
Benevolence (Kindness)
Patience
Enthusiasm
Tolerance
Serenity (Peacefulness)
Co-operation
Generosity
Humility (Egolessness)

 

Message

The one who is constantly flying with zeal and enthusiasm brings progress in others too.

Projection: Whenever problems come my way, I tend to feel heavy with waste and negative thoughts. At that time I am not able to feel free and light. When there is heaviness in my mind, I can’t move forward with enthusiasm and thereby find it difficult to contribute for others’ progress too.

Solution: Whatever the circumstances I am faced with, I need to make special effort not to reduce my enthusiasm in any way. The more I am able to be enthusiastic, the more I am able to contribute to the progress of others too along with my own progress.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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The Power To Transform Emotions

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Mera Baba

मेरा बाबा

The Power To Transform Emotions – (Part 1) 

As with feelings, when emotions are aroused, there are physical changes inside the body in the form of chemical and electrical activity. In fact, strong emotions don’t just affect the body; they also have an impact on the soul. When the soul suffers emotional trauma, from which there is lasting impact, the emotional trauma brings about an immense strain on the brain and body. Brain chemical production is likely to be affected, and there may also be feelings of depression and tiredness. But the real trauma at the root of these physical effects is at a deeper level within the soul itself, and the resulting emotional sensitivity will also arise from the soul.

e.g. I suffer a series of losses or setbacks in my business that causes a lack of confidence and self-respect inside me. A sanskara of low self-esteem is created inside. As a result I become emotionally unstable and sensitive. I’ll show a tendency to react emotionally with extreme sorrow (may be in the form of depression) or extreme anger (sometimes in the form of an outburst) whenever there is a similar setback that touches this sensitivity. A person who has not suffered similarly in the past and does not have a sanskara of low self esteem, and as a result does not have this tendency, will not react in a similar fashion under similar circumstances.

 

— Message —

The power of silence makes the impossible achievable. 
Projection: When I am faced with a difficult situation, my mind is flooded with thoughts. I also begin to talk about it a lot, describing the problem to all I meet. Then the problem looks so big that I feel I could do nothing to change it.

Solution: I need learn the art of silence(mental and verbal). Internal silence brings the right solutions because my mind is calm. And when I don’t describe the problem too much to people I will know there is a solution and I will be able to find it too.

 

The Power To Transform Emotions – (Part 2)

Mera Baba

मेरा बाबा

Thoughts may be temporary. Feelings (either positive or negative), accompanying repeated thought-patterns, stay a bit longer inside us. But when a soul suffers a major setback, loss or failure in life that it is not able to deal with, it becomes emotionally damaged and the results of that can be extreme.

Suppose I lose a loved one all of a sudden. If the feelings that come to me because of this loss can be taken care of at that time, through any means like the remembrance of God, meditation, developing a positive hobby to divert my mind, spending more time in the positive company of other family members, etc.; I will deal with the feelings and move on. If however, I am unable to deal with my feelings through any of the means mentioned, the experience of loss I feel is going to cause a lot of deep damage on the emotional level. Then it will not just be a feeling of loss, but it will actually have wounded the soul emotionally. Until that wound has healed, I’ll carry it with me long after the loss has suffered. The emotions linked to it will come to the surface repeatedly, though I may have no idea where my sorrow is coming from. Due to the emotional wound, I’ll be unable to stay happy, no matter how positive my circumstances may be today.

Meditation does not require me to go into the subconscious roots of my pain. Instead, through thought,meditation enables me to take conscious control of my feelings and emotions, so as to displace the negative, which brings sorrow; with positive, which brings happiness. It helps me experience pure, powerful emotions and loveful feelings to such an extent that the wounds left by past experiences are healed.Raja Yoga means ‘royal union’ – it means having a loveful relationship with God. The experience of God’s love is a soothing balm for my emotions, and a remedy for the emotional pain the soul feels.

 

— Message —

All desires end when there is the one desire to experience progress.

Projection: It is believed normally that in order to progress one needs to have desires. But desires are not always fulfilled and unhappiness is experienced because of it. Then I am not able to appreciate whatever comes my way.

Solution: I need to replace all my desires with one desire, i.e., the desire to experience progress. With this thought, I will be able to make the best use of what I get in the right way. When I move forward in this way making the best use of everything I will be able to experience constant progress.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

Mera Baba

मेरा बाबा

 

Note::-

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“तू ना हो निराश कभी मन से”
“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

तू ना हो निराश कभी मन से

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

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तीन बातें-अनमोल वचन

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अनमोल वचन

तीन बातें

तीन बातें कभी न भूलें – प्रतिज्ञा करके, क़र्ज़ लेकर और विश्वास देकर। – महावीर

तीन बातें करो – उत्तम के साथ संगीत, विद्वान् के साथ वार्तालाप और सहृदय के साथ मैत्री। – विनोबा

तीन अनमोल वचन – धन गया तो कुछ नहीं गया, स्वास्थ्य गया तो कुछ गया और चरित्र गया तो सब गया। – अंग्रेजी कहावत

तीन से घृणा न करो – रोगी से, दुखी से और निम्न जाती से। – मुहम्मद साहब

तीन के आंसू पवित्र होते हैं – प्रेम के, करुना के और सहानुभूति के। – बुद्ध

तीन बातें सुखी जीवन के लिए- अतीत की चिंता मत करो, भविष्य का विश्वास न करो और वर्तमान को व्यर्थ मत जाने दो।

तीन चीज़ें किसी का इन्तजार नहीं करती – समय, मौत, ग्राहक।

तीन चीज़ें जीवन में एक बार मिलती है – मां, बांप, और जवानी।

तीन चीज़ें पर्दे योग्य है – धन, स्त्री और भोजन।

तीन चीजों से सदा सावधान रहिए – बुरी संगत, परस्त्री और निन्दा।

तीन चीजों में मन लगाने से उन्नति होती है – ईश्वर, परिश्रम और विद्या।

तीन चीजों को कभी छोटी ना समझे – बीमारी, कर्जा, शत्रु।

तीनों चीजों को हमेशा वश में रखो – मन, काम और लोभ।

तीन चीज़ें निकलने पर वापिस नहीं आती – तीर कमान से, बात जुबान से और प्राण शरीर से।

तीन चीज़ें कमज़ोर बना देती है – बदचलनी, क्रोध और लालच।

 

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

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पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी – “गुरु जी” – के महान विचार!!

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=> समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।  

=> निर्धनता मनुष्य के लिए बेइज्जती का कारण नहीं हो सकती। यदि उसके पास वह सम्पत्ति मौजूद हो, जिसे ‘सदाचार्’ कहते है। 

=> कर्मयोग का अर्थ है – लोकमंगल के उच्च स्तरीय प्रयोजनों में पुरुषार्थ को नियोजित किए रहना। 

=> मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है; परन्तु इनके परिणामों में चुनाव की कोई सुविधा नहीं।    

=> वही अनशन, तप, श्रेष्ठ है जिससे कि मन अमंगल न सोचे, इन्द्रियों की क्षति न हो और नित्य प्रति की योग धर्म क्रियाओं में विघ्न न आए।

=> ईश्वर पाप से बहुत कुढ़ता है और हमारी चौकीदारी के लिए अदृश्य रूप से हर घडी़ साथ रहता है। 

=> भगवान् उन्हें ही सर्वाधिक प्यार करते हैं, जो तप- साधना की आत्म- प्रवंचना में न डूबे रहकर सेवा- साधना को सर्वोपरि मानते हैं। 

=> दूसरों की सहायता वे ही लोग कर सकते हैं, जिनके पास अपना वैभव और पराक्रम हो। 

=> मनन और चिंतन के बिना न आत्म- साक्षात्कार होता है और न ईश्वर ही मिलता है। 

=> “नारी”   परिवार को श्रेष्ठता से अभिपूरित, धरती को स्वर्ग बनाती है। 

=> सच्चाई के अनुयायी एक हजार हाथियों की ताकत है.

The follower of truth has the strength of a thousand elephants.

=> शुभ काम दिखावे के लिए न करें। 

=> मनुष्य जैसा सोचता है ठीक वैसा ही बनता जाता है। 

=> सच्चे उपदेशक वाणी से नहीं, जीवन से सिखाते हैं। 

=> भाग्य बदलने की एकमात्र शर्त है- उन्नति के लिए सच्चा और निरन्तर संघर्ष। 

=> अध्यात्मवाद वह महाविज्ञान है, जिसकी जानकारी के बिना भूतल के समस्त वैभव निरर्थक हैं और जिसकेथोडा़– सा भी प्राप्त होने पर जीवन आनन्द से ओतप्रोत हो जाते है। 

 

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Self Empowerment

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Self Empowerment 

Our internal strengths create the foundation on which we make our decisions in life, how we relate to others and how we understand ourselves. For most people their strengths are understood but never made very conscious. They lie below the surface and are not openly talked about. Bringing them into our conscious understanding improves our process of self-empowerment.

To realize and review your strengths, sit comfortably in a pleasant atmosphere and answer silently the following questions:
A. Look back into the past and remember the times when you experienced your greatest successes. List the unique talents or strengths, which you made use of at those times.
B. List the specific features, which you admire in yourself.
C. If you were to take the opinion of your family, friends and colleagues, what strengths would they say that you have?
D. List your most valuable assets.
E. Now examine your answers and summarize. What are your main strengths?

Message

The one who is a giver, has attention constantly on giving fully. 

Projection: When the system that I am working in doesn’t let me give maximum benefit to the people around me or deprives them of their natural right, I tend to react negatively. I tend to become upset which doesn’t help either of us in anyway.

Solution: When I remember and maintain the awareness that I am a giver, instead of complaining about the restrictions that society or people around me impose I continue to give those around me something that will make them happy. This could be in the form of kind and supportive words or at least an understanding smile. When I give in this way, it will make others too free from negative thoughts.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris 

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Controlling Your Emotions

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Controlling Your Emotions –

There are five essential steps to emotional control and mastery. Although the complete process will finally happen in a few seconds in real life, it is essential for our learning to break it down and see what is required at every step. 

Step One Awareness 
This simply means being aware of the emergence of the subtlest (finest) of emotions, which, if left unchecked, will grow into important disturbances. For example irritation leads to frustration leads to anger leads to rage.

Step TwoAcknowledge 
Which means taking responsibility for the emotion by understanding and acknowledging that I am the creator of the emotion, not someone or something else.

Step threeAcceptance 
Fully accept the presence of the emotion without resisting (opposing) it in any way. If it is resisted it simply becomes stronger, or is suppressed for another day.

Step FourAscend 
This is the moment of full detachment from both the emotion and the inner source of emotion. In the process of detached observation the emotion is losing its power. And it is only through detached observation that the emotion will begin to dissolve.

Step FiveAttune 
This means returning our attention to the very centre of ourselves where our inner peace and power are to be found. This is the purpose of meditation.

Message 

To be in the awareness of my own speciality is to be free from negativity. 

Projection: When I percieve negativity in others, I find myself very easily influenced by it. I then react negatively to them and am not able to maintain my own positivity. All my specialities remain hidden in such a negative atmosphere and I continue to be negative too.

Solution: Like a rose I need to maintain my originality and uniqueness while being amongst the thorns. Instead of blaming others and their negativity for my own negativity, I need to practice being positive and working with my original qualities. Then I will never complain but will always use my own specialities.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris 

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Seven Techniques To Let Go Off The Past

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Seven Techniques To Let Go Off The Past – Part 1

Almost each one of us carries a heavy or subtle burden of negative events and happenings that have taken place in our life sometime in the past, either an immediate past or a far-off one; which reduce our present contentment levels immensely. The negative past could be of any form – you experienced the loss of a close loved one due to a break-up or sudden death; you went through a serious physical illness or a very lean phase of financial loss, you were abused on a mental or physical level; you were not treated properly by a colleague at office and undue advantage was taken of you; you performed an inappropriate action and you repent up till now, even after many years have passed, and many such similar and different types of incidents.

There are three different types of processes for removing negative past memories from our consciousness:

* Modifying – A negative past event is modified into a positive, beneficial form and then stored in the consciousness.

* Forgetting – Memories of a negative past event are forgotten and do not exist either in our conversations or in our conscious mind or thoughts, but traces of those memories exist in the sub-conscious mind.

* Erasing – No traces of the negative past exist in the consciousness and memories of it are completely removed from the sub-conscious also.

We need to take the help of all the different aspects or techniques of spirituality and not depend on only one or two for these removal processes. In the next two days’ messages, we will explain all these different techniques of spirituality, which if incorporated in our life, help us experience lightness and emotional freedom from the past. All of them have their own unique importance.

Message

The one who takes inspiration from others keeps moving forward.

Projection: When I look at the specialities of others, I sometimes tend to get discouraged. At such times my own weakness(es) look very prominent and my specialities remain hidden. Such comparision might not actually lead to jealousy but subtly continues to have its influence on me in a negative way.

Solution: At all times I must make sure I am constantly moving forward. Looking at others’s specialities I need to take inspiration from them. I need to see what aspect I can imbibe in myself too. When I do this I will be able to experience constant progress being free from negativity.

 

Seven Techniques To Let Go Off The Past – Part 2

Positive Information and Intoxication – The more we listen or read positive and constructive spiritual knowledge, even if it is for 10 minutes daily, and imbibe (absorb) it, the more our negative memories fade into the background. Also the regular input of knowledge lifts our consciousness to a higher level and gives us an experience of intoxication or spiritual bliss, in which the memory of our past sorrows and negative experiences gets dissolved. Even on a physical level, there are lots of people who indulge in some kind of addiction or intoxication only because it temporarily helps them to overcome and forget the negatives in their life.

Karma Realization – Another benefit of spiritual knowledge is that it makes us realize the various shades and details of the Law of Karma and its application in the World Drama, which helps us immensely in letting go of the past and concentrating on our present so that a bright future can be built, irrespective of the quality of the past.

Self and God Realization – One of the most important benefits of meditation, an important aspect of spirituality, is that it makes us realize and experience the spiritual self and the Father of the spiritual self, the Supreme Soul, accurately. This is an experience of liberation, in which there is no room for past repentances. Past repentances are more a reflection of excessive attachment to the physical or material or attachment to incorrect emotions related to body-consciousness, remembering the damage caused by it to the self and experiencing sorrow due to the same.

Connection and Relation – Also, meditation being a deep connection between me and the Supreme Father, it fills me with immense power and it is also an intense relationship, which fills me with love, happiness and peace. In the experience of these attainments, over a period of time, my past ceases to burden my consciousness.

Message

The right kind of support makes people independent.

Projection: When I provide help and support to others, sometimes I find that they become dependent on me. They continue to expect the same kind of support that they had got from me before, when I am not in a position to give. Then my good gesture becomes a bondage or difficulty for me.

Solution: When I am providing help to someone, I need to check the kind of help that I am providing. True help is to provide assistance in such a way that slowly the person learns to rely on his own resources and becomes independent. Then there will be no expectations from me.

 

Seven Techniques To Let Go Off The Past – Part 3

Correction – Memories inside the soul are like imprints or impressions on the soul. Some impressions are deep, some are not. Negative past experiences leave very deep negative impressions or scars on the soul, which sometimes take a lot of time to heal and sometime an entire lifetime can be sent without them getting healed. Negative past experience imprints and negative emotions like anger, hatred, attachment etc. are closely linked. So, correcting the self or incorporating positive sanskars fills the spiritual self with positive impressions. This, over a period of time, nullifies the effect of these negative impressions and as a result, the related negative memories.

Donation – Donation can be simply defined as the distribution of the invisible attainments one has experienced through spiritual self transformation, to others. It helps one receive blessings or positive energy of those whom we donate to and gives life a focused positive purpose, both of which help us immensely in forgetting our past. People who live only for themselves will find it more difficult to forget their past as compared to ones who spend a lot of time for others. Giving happiness to others helps us in forgetting our griefs.

Interaction – The more we interact with and remain in the company of positive minded people and have positive conversations with them, we give and receive positive energy and the more our past gets erased from my consciousness. Spirituality teaches us to look inwards and experience introvertness, which we haven’t experienced for a long time. At the same time, spirituality also teaches us to keep a balance between looking inwards and outwards. Composed and balanced extrovertness and healthy, happy relationships with virtuous people help us remain more in a present consciousness, not giving the mind to drift too much into the past.

Message

The power of positivity helps finish all negativity.

Projection: When I am faced with negativity in people or in situations, I too usually tend to have negative thoughts. When my mind is caught up with negativity of any kind-fear, anger or tension, I cannot think anything positive. I then find myself totally caught up in the situation finding no solution.

Solution: The only way to finish negativity is to work with positivity. I need to make a conscious effort to look at some positive aspect in the situation or person with whom I am facing difficulty. When I do this I can relate to them with this positivity which will slowly make the situation better again.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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Living With A Purpose

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Living With A Purpose 

How can we define heaven? Heaven could simply be described as the place to experience peace, joy and happiness. So, what is our heaven in our practical life? How can we experience it? Fulfilling our dream or true purpose or experiencing it being fulfilled is our heaven. Living out our dream and purpose is to live in our personal space of heaven here and right now. 

If everything that we do during the day and in life is directed at fulfilling our purpose – our reason for being, for existing and for living – we will be much happier in everything we do, because everything will be channeled or focused towards what we really want. On the other hand, if we do a little bit of everything, but without knowing where we are going or what our true destination is, we will be like a ship that has lost its way in the ocean. The ship’s crew steers the ship – it now goes towards the left, now to the right, goes backwards, then forwards towards the north, towards the south and in the end stays in the same place and gets nowhere, although it’s crew is busy or is working all the time. The crew lets itself be carried by the currents, the tides, the waves in the ocean and the winds above the ocean. It has lost its bearings and doesn’t know how to be guided by the stars, which would show the crew the right way. In our case, the stars being our intuition. Without our life’s course dictated by a true purpose, we let our consciousness asleep and don’t listen to our intuition, which will reveal to us our purpose.

Message

he method to get help is to take the first step of courage. 

Projection: When I set out to achieve something, I usually expect help from situations or people, but am not always able to get it. Then I tend to become disheartened and sometimes tend to give up the task altogether.

Solution: The right way to get help is to first take a step forward even in the most negative situations. With courage and faith when I start in whatever little way I can, I find the help coming to me. Then I will neither stop nor give up with the little setbacks that I am faced with.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

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मन काे कैसे नियंत्रण में करें।

मन के विचारों काे कैसे नियंत्रित करें॥

विचारों के प्रकार-एक खुशी जीवन के लिए।

अपनी सोच काे हमेशा सकारात्मक कैसे रखें॥

“मन के बहुत सारे सवालाें का जवाब-आैर मन काे कैसे नियंत्रित कर उसे सहीं तरिके से संचालित कर शांतिमय जीवन जियें”

“तू ना हो निराश कभी मन से”

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

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Negative Control And Positive Influence

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Negative Control And Positive Influence 

The power of influence in relationships is extraordinary, but it practically disappears when we try to exercise control and force.

You can influence anyone positively in many ways:

• encouraging,

• sharing,

• listening,

• communicating in the right way. 

In negative control we generate stress, frustration and anger. In positive influence the energy flows in a relaxed way with harmony and is not threatening, respecting each one for their specialty and allowing each one to be as they are.

In order to influence positively we need the power of discrimination and judgement in relation to what to say and what to do e.g. when you believe that the other person is the problem; generally the problem is not what others say or do, but rather how you perceive them. The way that you judge is what creates your negative feelings about them. We have the choice to perceive others as a threat, as a problem, or as an opportunity; an opportunity for learning, for change, for dialogue and understanding. We can choose to have compassion (kindness); to feel that the other is a problem indicates a lack of compassion.

Message for the day 08-07-2014

The way to control the mind is to talk to it with love.

Projection: Whenever I find my mind wandering I try to control it with force. I try to pull the mind and order it not to think about something. Yet I find that, the more I try to force the mind not to go in a particular direction, the more it tends to go there.

Solution: The only way to control the mind is to talk to it with love. Just as I would explain to a child, I need to explain to it with love. This will make my mind my friend and I will be able to concentrate even in any undesirable situations.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

 

 

The Invisible Impressions That Shape Me

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The Invisible Impressions That Shape Me 

While the mind and intellect are two faculties of the soul which play their role on the surface of our consciousness; at a deeper level, hidden beneath these two faculties, there lies a third faculty commonly called the sanskarasThe sanskaras is not only a store house of personality traits, as we commonly know it to be, but a store house of millions and millions of impressions or imprints. Such a large number of impressions are created by millions of experiences that I go through my sense organs not only in this life but in all my lifetimes. Everything that I hear, see, touch, taste, etc. I process or analyze or summarize in my own unique way; basically I give the experiences a unique form depending on my personality, before this form gets stored in the form of impressions inside me. I even process my subtle experiences, which are in the form of thoughts and feelings.

This process of experiencing and processing takes place during each and every second of my life including the time I sleep, when my mind may not be experiencing a lot but it is busy processing the physical and subtle experiences of the day that has gone by and storing the processed information in the form of impressions. From this, one can get an idea of the magnitude of the database of impressions stored within me, the being. These imprints which are unique to me, make up my sanskaras, and shape up my unique personality in a cyclic process. My personality shapes what type of impressions are created out of my experiences and the impressions in turn shape my personality, my thoughts, words and actions e.g. if I constantly keep the company of people who gossip, a large number of respective impressions based on the experience of gossiping keep getting stored inside me, which in turn influence my personality, the personality characteristic gets stronger and over a period of time I do not find anything wrong with it and indulge in it more and more. As a result more such impressions get stored. Thus it is a cyclic process.

 

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