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परमाणु ऊर्जा विभाग
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भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र मुम्बई
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परमाणु ऊर्जा शिक्षण संस्था
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टाटा मूलभूत अनुसंधान केंद्र मुम्बई
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School of Mathematics, TIFR Mumbai
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School of Natural Sciences, TIFR Mumbai
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School of Technology and Computer Science, TIFR Mumbai
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Graduate Studies, TIFR Mumbai
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National Centre for Biological Science, Bangalore
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National Centre for Radio Astrophysics, Pune
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होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केन्द्र, मुम्बई
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होमी भाभा प्राथमिक विज्ञान पाठ्यक्रम
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विज्ञान ओलम्पियाड, मुम्बई
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भारत सरकार
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भारत का राष्ट्रीय पोर्टल
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भारत विकास प्रवेशद्वार
http://www.indg.gov.in

विदेश मंत्रालय
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हिन्दी फोन्ट, हिन्दी सॉफ्टवेयर, राजभाषा विभाग
राजभाषा विभाग भारत सरकार
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भारतीय भाषाऔं के लिये प्रौद्योगिकी विकास (फोन्ट एवं साफ्टवेयर)
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सूचना प्रौद्योगिकी विभाग
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http://salrc.uchicago.edu/resources/fonts/available/hindi/
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माईक्रोसॉफ्ट भाषा इण्डिया
http://www.bhashaindia.com/ilit/Hindi.aspx

फॉण्ट परिवर्तक
http://www.kavitakosh.org/convertfonts

वेबदुनिया का ‘डेटा कनवर्टर – यहाँ सैकड़ों फॉन्ट से यूनिकोड में बदलने की आनलाइन सुविधा है
http://utilities.webdunia.com/dataconversion.php

सम्पूर्ण फाइल (.txt) के फोण्ट को यूनिकोड फोण्ट में बदलने हेतु
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ओपन आफिस में हिन्दी वर्तनी जाँचक (Spell Check) संस्थापित करने हेतु मार्गदर्शन
http://raviratlami.blogspot.com/2006/10/blog-post_07.html

विश्वविद्यालय
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC)
http://www.ugc.ac.in

नकली विश्वविद्यालय की राज्यवार सूची
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भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU)
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डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, म.प्र.
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अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद
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राष्ट्रीय प्रतिभा खोज (National Talent Search)
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CENTRE FOR THE STUDY OF CULTURE AND SOCIETY
http://cscs.res.in/fellowships

भारत की अन्य छात्रवृत्तियों की सूची
http://www.scholarshipsinindia.com/
http://www.dst.gov.in/whats_new/advertisements.htm

सर रतन टाटा ट्रस्ट
http://www.srtt.org

राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र
राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं सूचना स्रोत संस्थान (NISCAIR)
http://www.niscair.res.in

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST)
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विज्ञान प्रसार
http://www.vigyanprasar.gov.in/sitenew/

विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय परिषद (NCSTC)
http://dst.gov.in/scientific-programme/s-t_ncstc.htm

राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (National Council of Science Museums)
http://www.ncsm.gov.in

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भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, नई दिल्ली
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भारतीय विज्ञान अकादमी, बेंगलौर
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राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, इलाहाबाद
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हिन्दी भाषा में कार्यरत संस्थाएं
केंद्रीय हिन्दी संस्थान, अगरा
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राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, मैसूर
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भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर
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शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाएं/गैर सरकारी संगठन (NGO)
एकलव्य
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नवनिर्मिति

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अक्षरा
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http://www.azimpremjifoundation.org/

सेन्टर फॉर एन्वायरमेन्ट एजुकेशन
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मुस्कान
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मराठी विज्ञान परिषद्
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Jidnyasa Trust Thane
http://www.jidnyasa.org.in/

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विज्ञान आश्रम
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मुक्त आंगन विज्ञान शोधिका (पुलस्तय) IUCAA’s Children’s Science Centre
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विनिमय
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हिन्दी विज्ञान/साहित्यिक पत्रिकाएँ
कविता कोश
http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=कविता_कोश_मुखपृष्ठ

संदर्भ – शिक्षा की त्रैमासिक पत्रिका (एकलव्य)
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स्रोत (एकलव्य)
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चकमक (एकलव्य)
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भारत-दर्शन, हिन्दी साहित्यिक पत्रिका
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अनुभूति
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नवनिर्मिति

http://www.navnirmiti.org

दिगंतर
http://www.digantar.org

विक्रम ए साराभाई कम्मुनिटी साइंस सेंटर
http://www.vascsc.org

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट
http://www.dorabjitatatrust.org/

ईस्ट एण्ड वेस्ट एजुकेशनल सोसायटी
http://www.eastwestindia.org

प्रथम
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अक्षरा
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अजीम प्रेमजी फॉउण्डेशन
http://www.azimpremjifoundation.org/

सेन्टर फॉर एन्वायरमेन्ट एजुकेशन
http://www.ceeindia.org/cee/index.html

मुस्कान
http://www.muskan.org/

idiscoveri
http://www.idiscoveri.com/

मराठी विज्ञान परिषद्
http://www.mavipamumbai.org/

कृष्णमूर्ती फॉउण्डेशन
http://www.kfionline.org/

सेन्टर फॉर लर्निंग
http://www.cfl.in/

Jidnyasa Trust Thane
http://www.jidnyasa.org.in/

ग्राम मंगल
http://www.grammangal.org/

EnviroVigil
http://envirovigil.org/Homepage.html

डोरस्टेप स्कूल
http://www.doorstepschool.org/

विज्ञान आश्रम
http://www.vigyanashram.com/

अगस्तय फॉउन्डेशन
http://www.agastya.org/

नवनिर्मिति
http://www.navnirmiti.org/

मुक्त आंगन विज्ञान शोधिका (पुलस्तय) IUCAA’s Children’s Science Centre
http://www.iucaa.ernet.in/~scipop/Pulastya/index.html

विनिमय
http://www.vinimaytrust.org/

हिन्दी विज्ञान/साहित्यिक पत्रिकाएँ
कविता कोश
http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=कविता_कोश_मुखपृष्ठ

संदर्भ – शिक्षा की त्रैमासिक पत्रिका (एकलव्य)
http://www.eklavya.in/go/index.php?option=com_content&task=category&sectionid=13&id=51&Itemid=72

स्रोत (एकलव्य)
http://eklavya.in/go/index.php?option=com_content&task=category&sectionid=13&id=56&Itemid=81

चकमक (एकलव्य)
http://eklavya.in/go/index.php?option=com_content&task=category&sectionid=13&id=57&Itemid=84

भारत-दर्शन, हिन्दी साहित्यिक पत्रिका
http://www.bharatdarshan.co.nz

वागर्थ हिन्दी मासिक पत्रिका
http://www.bharatiyabhashaparishad.com

अनुभूति
http://www.anubhuti-hindi.org

अभिव्यक्ति
http://www.abhivyakti-hindi.org

अन्यथा
http://www.anyatha.com

हिन्दी नेस्ट डॉट कॉम
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शिक्षा विमर्श
http://www.digantar.org/vimarsh

हिन्दी चेतना (कनाडा)
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गीता-कविता
http://www.geeta-kavita.com/Default.asp

हिन्दी मुक्त ज्ञानकोष (Hindi Wikipedia)
हिन्दी मुक्त ज्ञानकोष (wikipedia)
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हिन्दी विकि-शब्दकोश
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हिन्दी वेब साइट की सूची
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विविध रोचक एवं उपयोगी लिंक
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भोजपुरी मुक्त ज्ञानकोष (wikipedia)
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The Life and Times of Gautama Buddha in Hindi

Kmsraj51 की कलम से…..

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हिन्दी में गौतम बुद्ध के जीवन और समय का विस्तार

 सामान्य व्यक्ति से महापुरुष तक का सफर – महात्मा बुद्ध 

भारत की पवित्र भूमि पर ऐसे कई महापुरुषों ने जन्म लिया है, जिन्होंने अपने कृत्यों और सिद्धांतों के बल पर मानव जीवन के भीतर छिपे गूढ़ रहस्यों को उजागर किया. इन्हीं में से एक हैं महात्मा बुद्ध, जिन्होंने सामान्य मनुष्य के रूप में जन्म लेकर अध्यात्म की उस ऊंचाई को छुआ जहां तक पहुंचना किसी आम व्यक्ति के लिए मुमकिन नहीं है. ऐसे महान पुरुष के दिखलाए गए मार्ग को लोगों ने एक धर्म के रूप में ग्रहण किया जिसके परिणामस्वरूप भारत समेत सभी बड़े देशों में बौद्ध धर्म एक प्रमुख धर्म के रूप में स्वीकृत कर लिया गया.

महात्मा बुद्ध का वास्तविक नाम सिद्धार्थ था किंतु गौतमी द्वारा पाले जाने के कारण उन्हें गौतम भी कहा गया. बुद्धत्व की प्राप्ति के बाद उनके नाम के आगे बुद्ध उपसर्ग जोड़ दिया गया और धीरे-धीरे वे महात्मा बुद्ध के तौर पर प्रख्यात हो गए. गौतम बुद्ध के आदर्शों और बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए आज का दिन बेहद खास है. मान्यताओं के अनुसार बैसाख मास की पूर्णिमा के दिन महात्मा बुद्ध पृथ्वी पर अवतरित हुए थे और इसी दिन उन्हें बुद्धत्व के साथ-साथ महापरिनिर्वाण की भी प्राप्ति हुई थी.

महात्मा बुद्ध का जीवन

सिद्धार्थ का जन्म शाक्य गणराज्य की राजधानी कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन के घर हुआ था. जन्म के सात दिन के भीतर ही सिद्धार्थ की मां का निधन हो गया था. उनका पालन पोषण शुद्धोधन की दूसरी रानी महाप्रजावती ने किया. सिद्धार्थ के जन्म के समय ही एक महान साधु नेब यह घोषणा कर दी थी कि यह बच्चा या तो एक महान राजा बनेगा या फिर एक बेहद पवित्र मनुष्य के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा.

इस भविष्यवाणी को सुनकर राजा शुद्धोधन ने अपनी सामर्थ्य की हद तक सिद्धार्थ को दुःख से दूर रखने की कोशिश की. लेकिन छोटी सी आयु में ही सिद्धार्थ जीवन और मृत्यु की सच्चाई को समझ गए. उन्होंने यह जान लिया कि जिस प्रकार मनुष्य का जन्म लेना एक सच्चाई है उसी प्रकार बुढ़ापा और निधन भी जीवन की कभी ना टलने वाली हकीकत है. संसार की सबसे बड़ी सच्चाई जानने के बाद महात्मा बुद्ध सांसारिक खुशियों और विलासिता भरे जीवन से पूरी तरह विमुख हो गए. राज पाठ के साथ, पत्नी और पुत्र को छोड़कर उन्होंने एक साधु का जीवन अपना लिया !!

बुद्धत्व की प्राप्ति 

दो अन्य ब्राह्मणों के साथ सिद्धार्थ ने अपने भीतर उपज रहे प्रश्नों के हल ढूंढ़ने शुरू किए. लेकिन समुचित ध्यान लगाने और कड़े परिश्रम के बाद भी उन्हें अपने प्रश्नों के हल नहीं मिले. हर बार असफलता हाथ लगने के बाद उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ कठोर तप करने का निर्णय लिया. छ: वर्षों के कठोर तप के बाद भी वह अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर पाए. इसके बाद उन्होंने कठोर तपस्या छोड़कर आर्य अष्टांग मार्ग, जिसे मध्यम मार्ग भी कहां जाता है, ढूंढ़ निकाला. वह एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए और निश्चय किया कि अपने प्रश्नों के उत्तर जाने बिना वह यहां से उठेंगे नहीं. लगभग 49 दिनों तक ध्यान में रहने के बाद उन्हें सर्वोच्च ज्ञान की प्राप्ति हुई और मात्र 35 वर्ष की उम्र में ही वह सिद्धार्थ से महात्मा बुद्ध बन गए!!

ज्ञान की प्राप्ति होने के बाद महात्मा बुद्ध दो व्यापारियों, तपुसा और भलिका, से मिले जो उनके पहले अनुयायी भी बने. वाराणसी के समीप स्थित सारनाथ में उन्होंने अपना पहला धर्मोपदेश दिया !!

बुद्ध का महापरिनिर्वाण 

बौद्ध धर्म से जुड़े साहित्य के अनुसार 80 वर्ष की आयु में महात्मा बुद्ध ने यह घोषित कर दिया था कि बहुत ही जल्द वह महापरिनिर्वाण की अवस्था में पहुंच जाएंगे. इस कथन के बाद महात्मा बुद्ध ने एक लुहार के हाथ से आखिरी निवाला खाया. इसके बाद वह बहुत ज्यादा बीमार हो गए. लुहार को लगा कि उसके हाथ से खाने के कारण महात्मा बुद्ध की यह हालत हुई है इसीलिए महात्मा बुद्ध ने अपने एक अनुयायी को कुंडा नामक लुहार को समझाने भेजा. वैद्य ने भी यह प्रमाणित कर दिया था कि उनका निधन वृद्धावस्था के कारण हुआ है ना कि विशाक्त खाद्य के कारण!!

बौद्ध धर्म की मुख्य-शिक्षा 

सम्यक दृष्टि – सम्यक दृष्टि का अर्थ है कि जीवन में हमेशा सुख-दुख आता रहता है हमें अपने नजरिये को सही रखना चाहिए. अगर दुख है तो उसे दूर भी किया जा सकता है!!

सम्यक संकल्प – इसका अर्थ है कि जीवन में जो काम करने योग्य है, जिससे दूसरों का भला होता है हमें उसे करने का संकल्प लेना चाहिए और ऐसे काम कभी नहीं करने चाहिए जो अन्य लोगों के लिए हानिकारक साबित हो!!

सम्यक वचन – इसका अर्थ यह है कि मनुष्य को अपनी वाणी का सदैव सदुपयोग ही करना चाहिए. असत्य, निंदा और अनावश्यक बातों से बचना चाहिए!!

सम्यक कर्मांत – मनुष्य को किसी भी प्राणी के प्रति मन, वचन, कर्म से हिंसक व्यवहार नहीं करना चाहिए. उसे दुराचार और भोग विलास से दूर रहना चाहिए!!

सम्यक आजीविका – गलत, अनैतिक या अधार्मिक तरीकों से आजीविका प्राप्त नहीं करना!!

सम्यक व्यायाम – बुरी और अनैतिक आदतों को छोडऩे का सच्चे मन से प्रयास करना चाहिए. मनुष्य को सदगुणों को ग्रहण करने के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए!!

सम्यक स्मृति – इसका अर्थ यह है कि हमें कभी भी यह नहीं भूलना चाहिए कि सांसारिक जीवन क्षणिक और नाशवान है!!

सम्यक समाधि – ध्यान की वह अवस्था जिसमें मन की अस्थिरता, चंचलता, शांत होती है तथा विचारों का अनावश्यक भटकाव रुकता है!!

 

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The Life and Times of Gautama Buddha in Hindi ~ हिन्दी में गौतम बुद्ध के जीवन और समय का विस्तार !!

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** हिन्दी में गौतम बुद्ध के जीवन और समय का विस्तार **


BUDDHA - KMSRAJ51


gautam-buddha

** सामान्य व्यक्ति से महापुरुष तक का सफर – महात्मा बुद्ध **

buddha --

भारत की पवित्र भूमि पर ऐसे कई महापुरुषों ने जन्म लिया है, जिन्होंने अपने कृत्यों और सिद्धांतों के बल पर मानव जीवन के भीतर छिपे गूढ़ रहस्यों को उजागर किया. इन्हीं में से एक हैं महात्मा बुद्ध, जिन्होंने सामान्य मनुष्य के रूप में जन्म लेकर अध्यात्म की उस ऊंचाई को छुआ जहां तक पहुंचना किसी आम व्यक्ति के लिए मुमकिन नहीं है. ऐसे महान पुरुष के दिखलाए गए मार्ग को लोगों ने एक धर्म के रूप में ग्रहण किया जिसके परिणामस्वरूप भारत समेत सभी बड़े देशों में बौद्ध धर्म एक प्रमुख धर्म के रूप में स्वीकृत कर लिया गया.

महात्मा बुद्ध का वास्तविक नाम सिद्धार्थ था किंतु गौतमी द्वारा पाले जाने के कारण उन्हें गौतम भी कहा गया. बुद्धत्व की प्राप्ति के बाद उनके नाम के आगे बुद्ध उपसर्ग जोड़ दिया गया और धीरे-धीरे वे महात्मा बुद्ध के तौर पर प्रख्यात हो गए. गौतम बुद्ध के आदर्शों और बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए आज का दिन बेहद खास है. मान्यताओं के अनुसार बैसाख मास की पूर्णिमा के दिन महात्मा बुद्ध पृथ्वी पर अवतरित हुए थे और इसी दिन उन्हें बुद्धत्व के साथ-साथ महापरिनिर्वाण की भी प्राप्ति हुई थी.


buddha_nature

** महात्मा बुद्ध का जीवन **

सिद्धार्थ का जन्म शाक्य गणराज्य की राजधानी कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन के घर हुआ था. जन्म के सात दिन के भीतर ही सिद्धार्थ की मां का निधन हो गया था. उनका पालन पोषण शुद्धोधन की दूसरी रानी महाप्रजावती ने किया. सिद्धार्थ के जन्म के समय ही एक महान साधु नेब यह घोषणा कर दी थी कि यह बच्चा या तो एक महान राजा बनेगा या फिर एक बेहद पवित्र मनुष्य के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा.

इस भविष्यवाणी को सुनकर राजा शुद्धोधन ने अपनी सामर्थ्य की हद तक सिद्धार्थ को दुःख से दूर रखने की कोशिश की. लेकिन छोटी सी आयु में ही सिद्धार्थ जीवन और मृत्यु की सच्चाई को समझ गए. उन्होंने यह जान लिया कि जिस प्रकार मनुष्य का जन्म लेना एक सच्चाई है उसी प्रकार बुढ़ापा और निधन भी जीवन की कभी ना टलने वाली हकीकत है. संसार की सबसे बड़ी सच्चाई जानने के बाद महात्मा बुद्ध सांसारिक खुशियों और विलासिता भरे जीवन से पूरी तरह विमुख हो गए. राज पाठ के साथ, पत्नी और पुत्र को छोड़कर उन्होंने एक साधु का जीवन अपना लिया !!


Cosmic_Buddha

** बुद्धत्व की प्राप्ति **

दो अन्य ब्राह्मणों के साथ सिद्धार्थ ने अपने भीतर उपज रहे प्रश्नों के हल ढूंढ़ने शुरू किए. लेकिन समुचित ध्यान लगाने और कड़े परिश्रम के बाद भी उन्हें अपने प्रश्नों के हल नहीं मिले. हर बार असफलता हाथ लगने के बाद उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ कठोर तप करने का निर्णय लिया. छ: वर्षों के कठोर तप के बाद भी वह अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर पाए. इसके बाद उन्होंने कठोर तपस्या छोड़कर आर्य अष्टांग मार्ग, जिसे मध्यम मार्ग भी कहां जाता है, ढूंढ़ निकाला. वह एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए और निश्चय किया कि अपने प्रश्नों के उत्तर जाने बिना वह यहां से उठेंगे नहीं. लगभग 49 दिनों तक ध्यान में रहने के बाद उन्हें सर्वोच्च ज्ञान की प्राप्ति हुई और मात्र 35 वर्ष की उम्र में ही वह सिद्धार्थ से महात्मा बुद्ध बन गए!!

ज्ञान की प्राप्ति होने के बाद महात्मा बुद्ध दो व्यापारियों, तपुसा और भलिका, से मिले जो उनके पहले अनुयायी भी बने. वाराणसी के समीप स्थित सारनाथ में उन्होंने अपना पहला धर्मोपदेश दिया !!


** बुद्ध का महापरिनिर्वाण **

बौद्ध धर्म से जुड़े साहित्य के अनुसार 80 वर्ष की आयु में महात्मा बुद्ध ने यह घोषित कर दिया था कि बहुत ही जल्द वह महापरिनिर्वाण की अवस्था में पहुंच जाएंगे. इस कथन के बाद महात्मा बुद्ध ने एक लुहार के हाथ से आखिरी निवाला खाया. इसके बाद वह बहुत ज्यादा बीमार हो गए. लुहार को लगा कि उसके हाथ से खाने के कारण महात्मा बुद्ध की यह हालत हुई है इसीलिए महात्मा बुद्ध ने अपने एक अनुयायी को कुंडा नामक लुहार को समझाने भेजा. वैद्य ने भी यह प्रमाणित कर दिया था कि उनका निधन वृद्धावस्था के कारण हुआ है ना कि विशाक्त खाद्य के कारण!!

bbuddha

** बौद्ध धर्म की मुख्य-शिक्षा **

=> सम्यक दृष्टि – सम्यक दृष्टि का अर्थ है कि जीवन में हमेशा सुख-दुख आता रहता है हमें अपने नजरिये को सही रखना चाहिए. अगर दुख है तो उसे दूर भी किया जा सकता है!!

=> सम्यक संकल्प – इसका अर्थ है कि जीवन में जो काम करने योग्य है, जिससे दूसरों का भला होता है हमें उसे करने का संकल्प लेना चाहिए और ऐसे काम कभी नहीं करने चाहिए जो अन्य लोगों के लिए हानिकारक साबित हो!!

=> सम्यक वचन – इसका अर्थ यह है कि मनुष्य को अपनी वाणी का सदैव सदुपयोग ही करना चाहिए. असत्य, निंदा और अनावश्यक बातों से बचना चाहिए!!

=> सम्यक कर्मांत – मनुष्य को किसी भी प्राणी के प्रति मन, वचन, कर्म से हिंसक व्यवहार नहीं करना चाहिए. उसे दुराचार और भोग विलास से दूर रहना चाहिए!!

=> सम्यक आजीविका – गलत, अनैतिक या अधार्मिक तरीकों से आजीविका प्राप्त नहीं करना!!

=> सम्यक व्यायाम – बुरी और अनैतिक आदतों को छोडऩे का सच्चे मन से प्रयास करना चाहिए. मनुष्य को सदगुणों को ग्रहण करने के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए!!

=> सम्यक स्मृति – इसका अर्थ यह है कि हमें कभी भी यह नहीं भूलना चाहिए कि सांसारिक जीवन क्षणिक और नाशवान है!!

=> सम्यक समाधि – ध्यान की वह अवस्था जिसमें मन की अस्थिरता, चंचलता, शांत होती है तथा विचारों का अनावश्यक भटकाव रुकता है!!

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गौतम बुद्ध के जीवन और समय का विस्तार।

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गौतम बुद्ध के जीवन और समय का विस्तार।

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सामान्य व्यक्ति से महापुरुष तक का सफर – महात्मा बुद्ध।

buddha --

भारत की पवित्र भूमि पर ऐसे कई महापुरुषों ने जन्म लिया है, जिन्होंने अपने कृत्यों और सिद्धांतों के बल पर मानव जीवन के भीतर छिपे गूढ़ रहस्यों को उजागर किया। इन्हीं में से एक हैं महात्मा बुद्ध।

जिन्होंने सामान्य मनुष्य के रूप में जन्म लेकर अध्यात्म की उस ऊंचाई को छुआ जहां तक पहुंचना किसी आम व्यक्ति के लिए मुमकिन नहीं है। ऐसे महान पुरुष के दिखलाए गए मार्ग को लोगों ने एक धर्म के रूप में ग्रहण किया जिसके परिणामस्वरूप भारत समेत सभी बड़े देशों में बौद्ध धर्म एक प्रमुख धर्म के रूप में स्वीकृत कर लिया गया।

महात्मा बुद्ध का वास्तविक नाम सिद्धार्थ था, किंतु गौतमी द्वारा पाले जाने के कारण उन्हें गौतम भी कहा गया। बुद्धत्व की प्राप्ति के बाद उनके नाम के आगे बुद्ध उपसर्ग जोड़ दिया गया और धीरे-धीरे वे महात्मा बुद्ध के तौर पर प्रख्यात हो गए।

गौतम बुद्ध के आदर्शों और बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए आज का दिन बेहद खास है। मान्यताओं के अनुसार बैसाख मास की पूर्णिमा के दिन महात्मा बुद्ध पृथ्वी पर अवतरित हुए थे, और इसी दिन उन्हें बुद्धत्व के साथ-साथ महापरिनिर्वाण की भी प्राप्ति हुई थी।

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महात्मा बुद्ध का जीवन।

सिद्धार्थ का जन्म शाक्य गणराज्य की राजधानी कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन के घर हुआ था। जन्म के सात दिन के भीतर ही सिद्धार्थ की मां का निधन हो गया था। उनका पालन पोषण शुद्धोधन की दूसरी रानी महाप्रजावती ने किया।

सिद्धार्थ के जन्म के समय ही एक महान साधु नेब यह घोषणा कर दी थी कि यह बच्चा या तो एक महान राजा बनेगा या फिर एक बेहद पवित्र मनुष्य के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा।

इस भविष्यवाणी को सुनकर राजा शुद्धोधन ने अपनी सामर्थ्य की हद तक सिद्धार्थ को दुःख से दूर रखने की कोशिश की। लेकिन छोटी सी आयु में ही सिद्धार्थ जीवन और मृत्यु की सच्चाई को समझ गए।

उन्होंने यह जान लिया कि जिस प्रकार मनुष्य का जन्म लेना एक सच्चाई है उसी प्रकार बुढ़ापा और निधन भी जीवन की कभी ना टलने वाली हकीकत है। संसार की सबसे बड़ी सच्चाई जानने के बाद महात्मा बुद्ध सांसारिक खुशियों और विलासिता भरे जीवन से पूरी तरह विमुख हो गए। राज पाठ के साथ, पत्नी और पुत्र को छोड़कर उन्होंने एक साधु का जीवन अपना लिया।

Cosmic_Buddha

बुद्धत्व की प्राप्ति।

दो अन्य ब्राह्मणों के साथ सिद्धार्थ ने अपने भीतर उपज रहे प्रश्नों के हल ढूंढ़ने शुरू किए। लेकिन समुचित ध्यान लगाने और कड़े परिश्रम के बाद भी उन्हें अपने प्रश्नों के हल नहीं मिले। हर बार असफलता हाथ लगने के बाद उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ कठोर तप करने का निर्णय लिया।

छ: वर्षों के कठोर तप के बाद भी वह अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने कठोर तपस्या छोड़कर आर्य अष्टांग मार्ग, जिसे मध्यम मार्ग भी कहां जाता है, ढूंढ़ निकाला।

वह एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए और निश्चय किया कि अपने प्रश्नों के उत्तर जाने बिना वह यहां से उठेंगे नहीं। लगभग 49 दिनों तक ध्यान में रहने के बाद उन्हें सर्वोच्च ज्ञान की प्राप्ति हुई और मात्र 35 वर्ष की उम्र में ही वह सिद्धार्थ से महात्मा बुद्ध बन गए।

ज्ञान की प्राप्ति होने के बाद महात्मा बुद्ध दो व्यापारियों, तपुसा और भलिका, से मिले जो उनके पहले अनुयायी भी बने। वाराणसी के समीप स्थित सारनाथ में उन्होंने अपना पहला धर्मोपदेश दिया।

बुद्ध का महापरिनिर्वाण।

बौद्ध धर्म से जुड़े साहित्य के अनुसार 80 वर्ष की आयु में महात्मा बुद्ध ने यह घोषित कर दिया था कि बहुत ही जल्द वह महापरिनिर्वाण की अवस्था में पहुंच जाएंगे। इस कथन के बाद महात्मा बुद्ध ने एक लुहार के हाथ से आखिरी निवाला खाया।

इसके बाद वह बहुत ज्यादा बीमार हो गए। लुहार को लगा कि उसके हाथ से खाने के कारण महात्मा बुद्ध की यह हालत हुई है इसीलिए महात्मा बुद्ध ने अपने एक अनुयायी को कुंडा नामक लुहार को समझाने भेजा। वैद्य ने भी यह प्रमाणित कर दिया था कि उनका निधन वृद्धावस्था के कारण हुआ है ना कि विशाक्त खाद्य के कारण।

bbuddha

बौद्ध धर्म की मुख्य-शिक्षा।

सम्यक दृष्टि – सम्यक दृष्टि का अर्थ है कि जीवन में हमेशा सुख-दुख आता रहता है हमें अपने नजरिये को सही रखना चाहिए। अगर दुख है तो उसे दूर भी किया जा सकता है।

सम्यक संकल्प – इसका अर्थ है कि जीवन में जो काम करने योग्य है, जिससे दूसरों का भला होता है हमें उसे करने का संकल्प लेना चाहिए और ऐसे काम कभी नहीं करने चाहिए जो अन्य लोगों के लिए हानिकारक साबित हो।

सम्यक वचन – इसका अर्थ यह है कि मनुष्य को अपनी वाणी का सदैव सदुपयोग ही करना चाहिए। असत्य, निंदा और अनावश्यक बातों से बचना चाहिए।

सम्यक कर्मांत – मनुष्य को किसी भी प्राणी के प्रति मन, वचन, कर्म से हिंसक व्यवहार नहीं करना चाहिए। उसे दुराचार और भोग विलास से दूर रहना चाहिए।

सम्यक आजीविका – गलत, अनैतिक या अधार्मिक तरीकों से आजीविका प्राप्त नहीं करना।

सम्यक व्यायाम – बुरी और अनैतिक आदतों को छोडऩे का सच्चे मन से प्रयास करना चाहिए. मनुष्य को सदगुणों को ग्रहण करने के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।

सम्यक स्मृति – इसका अर्थ यह है कि हमें कभी भी यह नहीं भूलना चाहिए कि सांसारिक जीवन क्षणिक और नाशवान है।

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होमी भाभा प्राथमिक विज्ञान पाठ्यक्रम
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विज्ञान ओलम्पियाड, मुम्बई
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भारत सरकार
भारत सरकार
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भारत का राष्ट्रीय पोर्टल
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भारत विकास प्रवेशद्वार
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विदेश मंत्रालय
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हिन्दी फोन्ट, हिन्दी सॉफ्टवेयर, राजभाषा विभाग
राजभाषा विभाग भारत सरकार
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भारतीय भाषाऔं के लिये प्रौद्योगिकी विकास (फोन्ट एवं साफ्टवेयर)
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सूचना प्रौद्योगिकी विभाग
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प्रगत संगणन विकास केन्द्र
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डाउनलोड हिन्दी फोन्ट
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डाउनलोड यूनिकोड हिन्दी फोन्ट
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माईक्रोसॉफ्ट भाषा इण्डिया
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फॉण्ट परिवर्तक
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वेबदुनिया का ‘डेटा कनवर्टर – यहाँ सैकड़ों फॉन्ट से यूनिकोड में बदलने की आनलाइन सुविधा है
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सम्पूर्ण फाइल (.txt) के फोण्ट को यूनिकोड फोण्ट में बदलने हेतु
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ओपन आफिस में हिन्दी वर्तनी जाँचक (Spell Check) संस्थापित करने हेतु मार्गदर्शन
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विश्वविद्यालय
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC)
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नकली विश्वविद्यालय की राज्यवार सूची
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भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU)
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इंदिरा गाँधी राष्ट्रिय मुक्त विश्वविद्यालय
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मुक्त विश्वविद्यालयों/संस्थानों की सूची
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दूरस्थ शिक्षा परिषद (Distance Education Council)
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उच्चतर शिक्षा विभाग
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राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन विश्वविद्यालय
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केन्द्रीय विश्वविद्यालय
केन्द्रीय विश्व विद्यालय सूची
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद, उ.प्र.
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़
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असम विश्वविद्यालय, सिलचर
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अंग्रेजी एवं विदेशी भाषाऐं विश्वविद्यालय, हैदराबाद
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बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ, उ.प्र.
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बनारस (काशी) हिन्दु विश्वविद्यालय, बनारस, उ.प्र.
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दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
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हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद
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जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
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महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र
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मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद
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मणिपुर विश्वविद्यालय, इम्फाल, मणिपुर
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मिजोरम विश्वविद्यालय, आइजॉल, मिजोरम
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नागालैण्ड विश्वविद्यालय, कोहिमा, नागालैण्ड
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नोर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, शिलांग, मेघालय
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पांडिचेरी विश्वविद्यालय, पांडिचेरी
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राजीव गांधी विश्वविद्यालय, ईटानगर, अरूणाचल प्रदेश
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सिक्किम विश्वविद्यालय, गंगटोक, सिक्किम
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तेजपुर विश्वविद्यालय, नापाम, तेजपुर, असम
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त्रिपुरा विश्वविद्यालय, सूर्यमणिनगर, त्रिपुरा (पश्चिम)
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विश्व भारती, बिरभुम, पश्चिम बंगाल
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डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, म.प्र.
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गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
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हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर, उत्तराखण्ड
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फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची
नकली विश्वविद्यालय की राज्यवार सूची
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स्कूल/विद्यालयीन शिक्षा
स्कूल रिपोर्ट कार्ड
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स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग
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केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड
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केन्द्रीय विद्यालय संगठन
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नवोदय विद्यालय समिति
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परमाणु ऊर्जा शिक्षण संस्था
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तकनीकी शिक्षा विभाग
तकनीकी शिक्षा
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अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद
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छात्रवृत्ति एवं शिक्षा ऋण
राष्ट्रीय प्रतिभा खोज (National Talent Search)
http://www.ncert.nic.in/programmes/talent_exam/index_talent.html

किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना (KVPY)
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छात्रवृत्ति एवं शिक्षा ऋण
http://education.nic.in/scholarship/scholarship.asp

J N Tata Endowment (विदेश में उच्च शिक्षा के लिए)
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CENTRE FOR THE STUDY OF CULTURE AND SOCIETY
http://cscs.res.in/fellowships

भारत की अन्य छात्रवृत्तियों की सूची
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http://www.dst.gov.in/whats_new/advertisements.htm

सर रतन टाटा ट्रस्ट
http://www.srtt.org

राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र
राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं सूचना स्रोत संस्थान (NISCAIR)
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विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST)
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विज्ञान प्रसार
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विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय परिषद (NCSTC)
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राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (National Council of Science Museums)
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विज्ञान अकादमी
भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, नई दिल्ली
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भारतीय विज्ञान अकादमी, बेंगलौर
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राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, इलाहाबाद
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हिन्दी भाषा में कार्यरत संस्थाएं
केंद्रीय हिन्दी संस्थान, अगरा
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राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, मैसूर
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भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर
http://www.ciil.org

शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाएं/गैर सरकारी संगठन (NGO)
एकलव्य
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नवनिर्मिति

http://www.navnirmiti.org

दिगंतर
http://www.digantar.org

विक्रम ए साराभाई कम्मुनिटी साइंस सेंटर
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सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट
http://www.dorabjitatatrust.org/

ईस्ट एण्ड वेस्ट एजुकेशनल सोसायटी
http://www.eastwestindia.org

प्रथम
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अक्षरा
http://www.akshara.org.in/

अजीम प्रेमजी फॉउण्डेशन
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सेन्टर फॉर एन्वायरमेन्ट एजुकेशन
http://www.ceeindia.org/cee/index.html

मुस्कान
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idiscoveri
http://www.idiscoveri.com/

मराठी विज्ञान परिषद्
http://www.mavipamumbai.org/

कृष्णमूर्ती फॉउण्डेशन
http://www.kfionline.org/

सेन्टर फॉर लर्निंग
http://www.cfl.in/

Jidnyasa Trust Thane
http://www.jidnyasa.org.in/

ग्राम मंगल
http://www.grammangal.org/

EnviroVigil
http://envirovigil.org/Homepage.html

डोरस्टेप स्कूल
http://www.doorstepschool.org/

विज्ञान आश्रम
http://www.vigyanashram.com/

अगस्तय फॉउन्डेशन
http://www.agastya.org/

नवनिर्मिति
http://www.navnirmiti.org/

मुक्त आंगन विज्ञान शोधिका (पुलस्तय) IUCAA’s Children’s Science Centre
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विनिमय
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हिन्दी विज्ञान/साहित्यिक पत्रिकाएँ
कविता कोश
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संदर्भ – शिक्षा की त्रैमासिक पत्रिका (एकलव्य)
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स्रोत (एकलव्य)
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चकमक (एकलव्य)
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भारत-दर्शन, हिन्दी साहित्यिक पत्रिका
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अनुभूति
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अन्यथा
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शिक्षा विमर्श
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विवेकानंद क्या चाहते थे? ~ Vivekananda wanted to do?

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** विवेकानंद क्या चाहते थे? ~ Vivekananda wanted to do? **

Swami-Vivekananda

शिकागो में हुए पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन्स में जब प्रत्येक धर्मावलंबी अपने-अपने धर्म को दूसरे धर्म से ऊपर दिखाने की चेष्टा कर रहा था तब विवेकानंद ने उनके इस शीतयुद्ध का निवारण एक छोटी-सी परंतु महत्वपूर्ण कहानी के द्वारा किया।

Swami Vivekanand Ji


बात 1867 की है। एक ट्यूटर उन दिनों कोलकाता के गौर मोहन मुखर्जी लेन स्थित मकान पर एक बालक को रोज पढ़ाने आते थे। तब न तो उन ट्यूटर को तथा न ही किसी अन्य को पता था कि यही बालक एक दिन विश्व-धर्म का प्रचार करेगा और युवा चेतना का एक अंतरराष्ट्रीय प्रतीक बनेगा। वैसे इस बालक की माता भुवनेश्वरी देवी को तब ही आभास हो चुका था, जब यह बालक उनकी कोख में पल रहा था कि यह संतान विश्व कल्याण के लिए ही उत्पन्न होगी। बचपन में इस बालक का नाम था नरेंद्रनाथ दत्त।

नरेंद्र के पिताजी अंगरेजी शिक्षा में दीक्षित, उदार, पश्चिमपरक तथा एक संपन्न वकील थे। धर्म के प्रति उनकी आस्था कम ही थी। इसके विपरीत नरेंद्र की मां सनातन आस्थाओं वाली धर्मपरायण महिला थी। पिता चाहते थे कि नरेंद्र भी उन्हीं का व्यवसाय अपनाकर जीवनयापन करे और इसी तारतम्य में उन्होंने उसे प्रेसीडेंसी कॉलेज तथा स्कॉटिश चर्च कॉलेज से स्नातक (बीए) करवाया। आगे उन्होंने कानून की पढ़ाई भी प्रारंभ कर दी थी, परंतु युवावस्था से ही उन्हें ‘ईश्वर की खोज’ की भी धुन सवार हो गई थी। यही धुन उन्हें एक प्रतिष्ठित वकील बनने की बजाय स्वामी रामकृष्ण परमहंस तक ले गई।

कालांतर में परमहंस के मुख्य शिष्य के रूप में संन्यास लेकर नरेंद्र ने विवेकानंद नाम ग्रहण किया। इसके पश्चात प्रारंभ हुई एक युवा की क्रांति अलख, जो डेढ़-दो दशक तक खोज, साधना, देशाटन, देशप्रेम आदि के रूप में गुजरते हुए समय से पूर्व अल्पकाल में बुझ गई, परंतु अपने पीछे छोड़ गई एक अनमोल धरोहर, एक परिवर्तन की, विश्व बंधुत्व की। यही क्रांति अलख पिछली एक शताब्दी से प्रत्येक युवा पीढ़ी के मार्गदर्शन व उत्प्रेरक का कार्य करती आ रही है। सबसे अधिक आश्चर्य की बात तो यह है कि जहाँ सौ वर्ष पुरानी अन्य बातें, पहलू व चीजें आज के दौर में लगभग अप्रासंगिक हो चुकी हैं, वहीं विवेकानंद का दर्शन न केवल आज भी उतना ही प्रासंगिक है वरन उस समय से भी आज ज्यादा सार्थक है।

आज हम कितने ही उन्नत होने के बावजूद आंतरिक रूप से खोखले होते जा रहे हैं। जाति, भाषा के आधार पर वैमनस्य, गिरते नैतिक प्रजातांत्रिक मूल्य तथा संस्कृति में हो रहे विराट व अटपटे परिवर्तन से निपटने के लिए अब पुनः युवा शक्ति को जागृत होना होगा। उसकी इस राह में स्वामी विवेकानंद का शाश्वत राष्ट्रवादी व देशप्रेमयुक्त अध्यात्म कारगर सिद्ध हो सकता है।

सन्‌ 1893 में शिकागो में हुए पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन्स (धर्म संसद) में जब प्रत्येक धर्मावलंबी अपने-अपने धर्म को दूसरे धर्म से ऊपर दिखाने की चेष्टा कर रहा था तब विवेकानंद ने उनके इस शीतयुद्ध का निवारण एक छोटी-सी परंतु महत्वपूर्ण कहानी के द्वारा किया : एक कुएं में बहुत समय से एक मेंढक रहता था। एक दिन एक दूसरा मेंढक, जो समुद्र में रहता था, वहां आया और कुएं में गिर पढ़ा। ‘तुम कहां से आए हो?’ कूपमंडूप ने पूछा। ‘मैं समुद्र से आया हूँ।’ समुद्र! भला वह कितना बड़ा है? क्या वह मेरे कुएं जितना ही बड़ा है?’ यह कहते हुए उसने कुएं में एक किनारे से दूसरे किनारे तक छलांग लगाई।

समुद्र वाले मेंढक ने कहा- ‘मेरे मित्र, समुद्र की तुलना भला इस छोटे से कुएँ से किस प्रकार की जा सकती है?’ तब उस कुएँ वाले मेंढक ने दूसरी छलाँग लगाई और पूछा, ‘तो क्या समुद्र इतना बड़ा है?’ समुद्र वाले मेंढक ने कहा- तुम कैसी बेवकूफी की बात कर रहे हो! क्या समुद्र की तुलना इस कुएँ से हो सकती है? अब कुएं वाले मेंढक ने चिढ़कर कहा- ‘जा, जा, मेरे कुएं से बढ़कर और कुछ हो ही नहीं सकता। संसार में इससे बड़ा और कुछ नहीं है। झूठा कहीं का! अरे, इसे पकड़कर बाहर निकाल दो।

विवेकानंद की इस कथा का सार न केवल धर्म की संकीर्णता दूर करने वाला है वरन इसके पीछे युवाओं को भी एक संदेश है कि प्रत्येक संभावना का विस्तार ही (बगैर कूपमंडूकता के) जीवन का मूल उद्देश्य होना चाहिए।

विवेकानंद चाहते थे कि हर समाज स्वतंत्र हो, दूसरे समाज से विचारगत, आस्थागत समायोजन हो। भारत के विषय में उनका सोचना था कि एक तरफ तो हम निष्क्रिय रहकर प्राचीन गौरव के गर्व में फंस गए, दूसरी ओर हीनता की भावना में दब गए। तीसरे, सारी दुनिया से कटकर घोंघे में बंद हो गए। वे कहते थे कि जिस प्राचीन आध्यात्मिक शक्ति पर हम गर्व करते हैं, उसे अपने भीतर जगाना होगा। यह अभी हमारे भीतर नहीं है, केवल बाहरी है।

उन्होंने यह आह्वान युवाओं से किया था कि तुम ही यह कार्य कर दिखाओ। ये युवा ही हैं, जो इस समाज को आत्मशक्ति दे सकते हैं, संपूर्ण विश्व से गर्व से संवाद व संबंध स्थापित कर सकते हैं। इसके उपरांत ही हम स्वतंत्र हो पाएंगे व सामाजिक न्याय की अवधारणा समाज में स्थापित कर सकेंगे।

ये विचार आज कहीं अधिक उपयोगी हैं, जिससे हम उस राष्ट्र को फिर जीवित कर सकें जो विवेकानंद की कल्पनाओं का था। आवश्यकता है तो बस इतनी ही कि विवेकानंद के दर्शन का प्रसार युवाओं में एक आंदोलन की भांति हो।


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10 गुना इंटरनेट स्पीड देगा गूगल का नया डाटा सेंटर ~ Google’s new data center offers internet speeds 10 times !!

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** 10 गुना इंटरनेट स्पीड देगा गूगल का नया डाटा सेंटर!! **


ggl

इंटरनेट की दुनिया की सबसे मशहूर कंपनी गूगल ने हाल ही में एशिया में अपने दो नए डाटा सेंटर खोले हैं। टैक्नोलॉजी की दुनिया भर के बाजारों में बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी ने ये कदम उठाया है। एक डाटा सेंटर काउंटी ताइवान और दूसरा जुरोंग वेस्ट, सिंगापुर में खोला गया है। कंपनी ने इन दोनों सेंटर को तैयार करने में कुल मिलाकर 2440 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इन डाटा सेंटरों की मदद से अब इंटरनेट डाटा ट्रैफिक के लोड को कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही गूगल अपने यूजर्स को अब और भी ज्यादा डाटा मुहैया करा सकेगा और इंटरनेट पर सर्च करना 10 गुना तक फास्ट और आसान हो जाएगा।

kms-google
रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान, हांगकांग और सिंगापुर जैसे देश टेक कंपनियों के संचालन के लिए उपयुक्त स्थान माने जाते हैं। इन देशों में डाटा सेंटर का संचालन करने के लिए अच्छे कानून, मजबूत बिजली व्यवस्था, कुशल कर्मचारी और फाइबर ब्रॉडबैंड जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।


google-kms
डा़टा सेंटर एक ऐसी जगह होती है, जहां ढेर सारे कंप्यूटर लगे होते हैं। इन कंप्यूटरों में दुनिया भर के जरूरी डाटा स्टोर किए जाते हैं, जिसकी मदद से दुनिया के कोने-कोने में इंटरनेट यूजर्स को डाटा मुहैया कराया जाता है। इंटरनेट पर मिलने वाली सभी जानकारियां इन्हीं डाटा सेंटरों से आती हैं।

4
गूगल की स्थापना 1998 में लैरी पेज और सेर्गे ब्रिन ने की थी। आज 15 साल बाद कंपनी की कुल संपत्ति 5,80,415 करोड़ रुपए हो चुकि है। अब गूगल अपने बिजनेस को बढ़ाते हुए ताइवान के डाटा सेंटर के संचालन के लिए 3712 करोड़ रुपए निवेश कर रही है। इसकी मदद से दुनिया भर में बढ़ रही टैक्नोलॉजी की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।


5
लगभग 3,10,503 करोड़ रुपए की सालाना (2012) रेवेन्यू वाली कंपनी का ताइवान का ये डाटा सेंटर काफी प्रभावशाली है और पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है।


6
इस डाटा सेंटर को रात के समय कंपनी के अंदर के वातावरण को ठंडा रखने और थर्मल ऊर्जा स्टोर करने के लिहाज से बनाया गया है।

7
आमतौर पर डाटा सेंटर का वातावरण ठंडा होना चाहिए क्योंकि कंप्यूटरों से निकलने वाली गर्मी सिस्टम को क्षति पहुंचा सकती है। गूगल के मुताबिक, इस कंपनी का कूलिंग सिस्टम इंसुलेटेड टैंक्स के जरिए चलाया जाता है।

8
इस डाटा सेंटर में कुल 60 लोगों की टीम के साथ कुछ फुल और पार्ट टाइम कांट्रेक्टर 24 घंटे साइट को चलाते हैं, जिसमें से कुछ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स, मैकेनिकल इंजीनियर्स, कंप्यूटर तकनीशियन और कैटरर भी शामिल हैं।

9
एशिया में 2014 तक मोबाइल डाटा ट्रेफिक 68 प्रतिशत तक बढ़ने का अंदेशा है। ये डाटा सेंटर इस ट्रेफिक को नियंत्रित करने में काफी सहयोग करेगी।

10
कंपनी के उपाध्यक्ष डाटा सेंटर में सुरक्षा द्वारों की जांच करते हुए।

11
दुनिया के सबसे बेहतरीन सर्वर के एक कंप्यूटर के गर्म हो जाने के बाद गूगल की कर्मचारी उसकी जांच करती हुईं।

12
कंप्यूटर के खराब मदरबोर्ड की मरम्मत करता हुआ गूगल का कर्मचारी। इस डाटा सेंटर में खराब होने के बाद पुर्जों की पहले मरम्मत की जाती है अगर वो ठीक न हो सकें तो फिर उन्हें तोड़कर रिसाइकिल के लिए दे दिया जाता है।

13
जेनरेटर की मरम्मत करते गूगल के तकनीशियन।

14
डाटा सेंटर को ठंडा रखने वाले पाइप लाइन की जांच करता गूगल कर्मचारी।

15
बैटरी की जांच करते हुए गूगल कर्मचारी। समय-समय पर बैटरियों की जांच की जाती है की वो ठीक से चार्ज हो रहे हैं या नहीं।

16
इस डाटा सेंटर में नए जमाने के लिहाज से बनाए गए अति आधुनिक सर्वर देखे जा सकते हैं।

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Soul Sustenance & Message for the day 17-12-2013 !!

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** Soul Sustenance & Message for the day 17-12-2013 **

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Soul Sustenance 17-12-2013
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Living Life On The Surface

In an ideal situation, the thoughts that run in my mind, should be exactly those that I would like and I want. We do exert this control, that we possess, over our thoughts, but it is not complete and it is only sometimes. The more we become completely engrossed in our daily routine, the more our thoughts tend to become reactions to what goes on outside us. That’s when they go out of control and our lives move in an unfocused way. As a result things don’t work out as we might have desired. Then we develop a habit of blaming other people and circumstances, or we justify our pain by telling ourselves we are not very worthy or powerful enough. Often, these two inner strategies go together. The trouble is, both are cover ups, preventing us from going for a long-term solution.

In this way, we tend to live our lives on a very superficial level, without taking the time to find the solution to what is going on wrong inside. Deeper difficulties remain hidden inside. I move from one scene of life to another – eating, watching television, studying in college, getting married, changing jobs, buying a new car or house, etc. without ever stopping. All these are part of living, but if I make them my whole and sole, my foundation, it’s as if I skate across the surface of life without being in touch with the core. As time progresses, an inner shallowness develops. Then the feeling keeps growing inside that ‘there must be more to life than this’. I then, find that my relationships are not working out as I would have hoped and they are lacking in depth.

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Message for the day 17-12-2013
—————————————–

Easy nature makes tasks easy.

Expression: The ones with an easy nature constantly think of solutions instead of problems. So such individuals are free from the burden of problems and are constantly contributing to make things easy for themselves and others too. The right environment to bring out the best result is naturally created by them.

Experience: When I have an easy nature, I am able to put a full stop in a second with great ease. I am not caught with the waste questions and exclamations. So I am able to enjoy everything that comes my way and move forward constantly with lightness.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris
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Kmsraj51 – सकारात्मक विचारों का समूह

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** ~ Krishna Mohan Singh(kmsraj51) ~ Great Thoughts of KMSRAJ51 ~ **


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** कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह ….. **


** मेरे कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

** अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

** हमेशा मन को शांत रखना …..

** दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

** हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

** हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

** हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

** हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

** आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

** आपका कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ….. मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ!! …..

** ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!


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About The Author: KMSRAJ51
Krishna Mohan Singh (kmsraj51) is the CEO and Founder of https://kmsraj51.wordpress.com/ . With a long time passion for Entrepreneurship, Self development & Success, KMSRAJ51 started his website with the intention of educating and inspiring likeminded people all over the world to always strive for success no matter what their circumstances. Kmsraj51 passion for what he does shows through the continual growth of https://kmsraj51.wordpress.com/ online community. Follow kmsraj51 on Twitter or keep upto date with him on Facebook: https://www.facebook.com/kmsraj51 & also Google+ kmsraj51 (Krishna Mohan Singh).

Thank`s & Regard`s

Krishna Mohan Singh (कृष्ण मोहन सिंह)
Spiritual Author Cum Spiritual Guru
Always Positive Thinker Cum Motivator
Sr.Administrator (IT-Software, Hardware & Networking)
ID: kmsraj51@yahoo.in

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(((((~)))))<<<>>>(((((~))))) ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! (((((~)))))<<<>>>(((((~)))))

Soul Sustenance & Message for the day 14-12-2013 !!

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Soul Sustenance 14-12-2013
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Self Empowerment

Meditation, in practice, means to enter, and re-enter, the reservoir of peace inside us whenever we need to during the course of the day. This exercise increases self-control and prevents the explosions and reactions of anger that drain our strength. The easy method is not to expect but to accept: then tolerance and respect make our life far more comfortable.

There may be many shadows and pollutants inside us, but usually our pain is centered around these: I own, I need, I want, mine and I expect. If we learn to recognize the characteristics of such a consciousness, we are in a position to overcome difficult situations and thoughts before they overwhelm us. We simply have to remain awake, and that state of alertness stops these shadows from overpowering us and making us unconscious.

Our needs and wants are truly fulfilled in a healthy way by tuning in to the original resources of the soul, because their fulfillment is not dependent on anyone, or anything from outside. When we sustain ourselves from the inside, then our well-being is secure and progressive. As a result, when we express and show our original qualities of the self to others, whether it is peace, happiness or love, they naturally increase inside. The more we give unconditionally, the more we have. This miracle of ‘quality being’ is the result of natural purity, the original state of selflessness, which God always has and good meditators aspire to return to.

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Message for the day 14-12-2013
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Real contentment spreads happiness to others too.

Expression: When one feels contentment but the others are not able to perceive that contenetment, it means that it is not true contentment. Real contentment is visible in such a way that others too are able to feel the happiness that is created. When there is real contentment, all thoughts, words and actions are filled with quality.

Experience: When I am content, others automatically recognise the contentment within me. They are able to take benefit from my state. Even in the most hopeless state, I find that I become a source of support for those around me. I am able to give hope to the hopeless and help them get back to a state of happiness.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris


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Strong Will Power ~ (दृण इच्छाशक्ति) !!

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** Strong Will Power(दृण इच्छाशक्ति) **

वर्तमान का समय प्रतियोगिता का समय है। आज हर कोई एक दूसरे से आगे बढना चाहता है। आगे बढने की प्रवृत्ति विकास के राह को आसान करती है। विद्यार्थी हो या व्यपारी, शोध-कर्ता हो या किसान हर कोई अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रर्दशन करना चाहता है। परन्तु कुछ लोग अपनी इच्छा के अनुरूप परिणाम को प्राप्त कर लेते हैं, तो कुछ लोग चाहत के अनुसार अपने लक्ष्य को हासिल नही कर पाते। जो अपने कार्य को दृण इच्छा शक्ति से पूर्ण करता है वो लक्ष्य को निःसंदेह हासिल करता है। नेपोलियन बोनापार्ट का कहना था कि, असम्भव शब्द मेरे शब्दकोश में नही है। लाल बहादुर शास्त्री, गाँधी जी, सुभाष चन्द्र बोस, अब्राहम लिंकन, आइंस्टाइन, सरदार पटेल, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम इत्यादि बङे-बङे महापुरूष अपनी दृण इच्छा शक्ति से ही उच्चतम शिखर पर पहुँचे और आज भी सभी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

कहने का आशय ये है कि यदि मनुष्य चाहे तो सब कुछ सम्भव है। उसे अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए कार्य को ईमानदारी से और दृण संकल्प के साथ करना चाहिए। मजबूत इच्छा विपरीत परिस्थीति में भी आगे बढने की प्रेरणा देती है। मनुष्य का मन बहुत चंचल होता है, नित नई इच्छाएं जन्म लेती रहती हैं।अतः मन की चंचलता को नियन्त्रित करने के लिए इच्छा शक्ति की दृणता अनिवार्य होती है। गीता में कहा गया है कि, “मन को वश में करना कठिन जरूर है पर असम्भव नही है।“
दृण इच्छा शक्ति के बल पर ही तेनसिहं और बछेन्द्री पाल जैसे पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट पर विजय पताका फहराई। इंग्लिश चैनल और उत्तरी ध्रुव के बर्फिले सागर को दृण इच्छा शक्ति के बल पर ही पार किया गया। लक्ष्य के प्रति दृण इच्छा रखने वाले संकल्पवान लोग इतिहास की धारा बदल देते हैं।

सफलता के लिए दृण संकल्प का होना आवशयक है किन्तु आज आगे बढना तो हर कोई चाहता है परन्तु विषम परिस्थिती में संघर्ष करना नही चाहता। परिश्रम करने से भागता है और शार्टकट तरीके से सबकुछ पाना चाहता है। लक्ष्य के प्रति दृण इच्छाशक्ति का अभाव इंसान की सबसे बङी कमजोरी है। ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि, “गहरी इच्छा हर उपलब्धि का शुरूवाती बिन्दु होती है, जिस तरह आग की छोटी लपटें अधिक गर्मी नही दे सकती वैसे ही कमजोर इच्छा बङे नतीजे नही दे सकती।“ मजबूत इरादों से ही लक्ष्य की राह आसान होती है।

गाँधी जी ने कहा था कि, “Strength Dose not come from Physical capacity. It comes from an Indomitable will.”

अपनी दृण इच्छाशक्ति और अटूट विश्वास के बल पर भारत की पहली महिला आई. पी. एस. अधिकारी किरण बेदी ने अनेकों कठिनाईयों के बावजूद अपने लछ्य को हासिल किया। एशिया का सबसे बङा ‘मेग्सस पुरस्कार’ प्राप्त कर भारत को भी गौरवान्वित किया। अनेक लोगों की प्रेरणा स्रोत किरण बेदी को संयुक्त राष्ट्र संघ में पुलिस सलाहाकार नियुक्त किया गया। (Strong will power )दृण इच्छा शक्ति से कैंसर जैसी जानलेवा बिमारी से भी जीता जा सकता है। यदि इरादे मजबूत होते हैं तो उम्र की सीमा और विकलांगता भी बाधा नही बनती। प्रेमलता अग्रवाल 48 वर्ष की उम्र में एवरेस्ट पर फतह हासिल करने वाली सबसे अधिक उम्र की पहली महिला हैं। हेलेन केलर की दृण इच्छा शक्ति के आगे उनकी दृष्टीबाधिता नत्मस्तक हो गई।

स्वामी विवेकानंद जी का कहना था कि, “पवित्र और दृण इच्छा सर्वशक्तिमान है, अतः प्रबल इच्छा को कठिन अभ्यास एवं संकल्प शक्ति द्वारा प्राप्त करना चाहिए।“

सफलता की कामना करना उत्तम विचार है। उसकी पूर्णता के लिए कार्य के आरंभ में ही दृण इच्छा को अपने में समाहित कर लेना चाहिए। ईमानदारी के साथ कार्य पूर्ण करने में अपनी सारी शक्ति लगा देनी चाहिए। दृण इच्छाशक्ति मार्ग की बाधाओं को पार कर देती है और सफलता के शिखर पर पहुँचना आसान कर देती है। अतः अपनी सोच को साकार रूप देने के लिए दृण इच्छा शक्ति (Strong Will Power) को रग-रग में संचारित कर लें।

“कुछ कर गुजरने के लिए मौसम नही मन चाहिए, साधन सभी जुट जाएंगे, संकल्प का धन चाहिए, गहन संकल्प से ही संभव है पूर्ण सफलता।”

Note::- Post inspired by : http://roshansavera.blogspot.in/

Lots of thank to “Mrs.Anita Sharma”.
Anita Sharma


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** Tu Na Ho Nirash Kabhi Man Se ….. **
Tu Na Ho Nirash Kabhi Man Se(kmsraj51)

** AUM SWEET AUM ** SUMREME SOUL GOD SHIVA **

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853 साल बाद कल बनेगा ये अद्भुत संयोग, नहीं देख पाएंगे फिर कभी ~ Tomorrow will be an amazing coincidence that 853 years later, will not see ever again !!

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** 853 साल बाद कल बनेगा ये अद्भुत संयोग, नहीं देख पाएंगे फिर कभी!! **

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साल 2013 अपनी समाप्ति की ओर है। साल के अंतिम महीने दिसंबर में आंकड़ों का एक अद्भुत योग बन रहा है। यह योग कल यानी 11 दिसंबर, बुधवार को बनेगा। ऐसा योग हजारों सालों में एक बार ही बनता है। यानी जो लोग ये योग दिसंबर में देख पाएंगे वह दोबारा यह योग कभी नहीं देख पाएंगे। इस बार आंकड़ों का यह संयोग 823 साल बाद बनने जा रहा है।

2


आंकड़ों का यह संयोग बनेगा 11 दिसंबर को। जब सुबह व रात को घड़ी में 8 बजकर 9 मिनट व 10 सेंकेंड होंगे तो उस वक्त तारीख 11 होगी, महीना 12वां होगा और साल 13। यानी इस समय 8, 9, 10, 11, 12, 13 अंक का अभूतपूर्व संयोग बनेगा। इतना ही नहीं, दिसंबर में पांच रविवार, पांच सोमवार व पांच मंगलवार भी होंगे। इस संयोग को मनी बैग्स भी कहा जाता है। आंकड़ों का यह संयोग दिलचस्प होगा।

3


यह संयोग अपने आप में ऐतिहासिक है। इस संयोग का महत्व समझने वाले इस पल को यादगार बनाने व यादें संजोने का भरसक प्रयत्न करेंगे। यह बात अलग है कि सब अपने-अपने तरीके से इस पल को संजोएंगे। कोई इस लग्न में शादी करना चाहेगा। हालांकि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस दिन विवाह के लिए कोई शुभ मूहूर्त नहीं है। यूं तो हर कोई इस अनूठे संयोग को यादगार बनाने की कोशिश करता है लेकिन कुछ संयोग निश्चित हैं। इस संयोग में जो जन्म लेने वाले बच्चों की जन्मतिथि भी इस अद्भुत संयोग में दर्ज हो जाएगी।

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पहली व अंतिम बार आएगा
अंकों का यह खेल इस शताब्दी में पहली और आखिरी बार आएगा। दिनांक 11 अर्थात अंक 2 चंद्रमा ग्रह का अंक है, इसे अति शुभ माना जाता है। शगुन देते समय भी 11 या 101 को प्रमुखता दी जाती है ताकि कार्य शुभ हो व प्रायोजन सफल हो। महीना 12 अर्थात अंक 3 जो गुरु ग्रह का अंक है। वर्ष 2013 अंक 6 को दर्शाता है जो शुक्रग्रह का अंक है।

5

संघर्ष का परिचायक
एक महीने में तीन वारों का पांच बार आना संघर्ष का परिचायक है। ऐसी स्थिति में किसी केंद्रीय नेता का अपमानित होना, दल-बदल की स्थिति से सरकार पर संकट आना, सीमावर्ती देशों से द्वंद्व की स्थिति बनना आम बात है। हालांकि, यह स्थिति शीतकालीन फसलों के लिए लाभदायक रहती है।

6


जन्मदिन होगा यादगार
आंकड़ों के इस संयोग का ज्योतिषीय दृष्टिकोण से तो इतना महत्व नहीं है। क्योंकि इस दिन शादियों का भी कोई मूहूर्त नहीं है लेकिन यह एक यादगार पल है। इसे हर कोई अपने-अपने ढंग से दर्ज कराना चाहेगा। इस मौके पर जन्म लेने वाले बच्चों की जन्मतिथि भी अपने आप में ऐतिहासिक होगी।

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संगती का असर ~ The effect of Sangati !!

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##** संगती का असर **##

एक बार एक राजा शिकार के उद्देश्य से अपने काफिले के साथ किसी जंगल से गुजर रहा था | दूर दूर तक शिकार नजर नहीं आ रहा था, वे धीरे धीरे घनघोर जंगल में प्रवेश करते गए | अभी कुछ ही दूर गए थे की उन्हें कुछ डाकुओं के छिपने की जगह दिखाई दी | जैसे ही वे उसके पास पहुचें कि पास के पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा – ,
” पकड़ो पकड़ो एक राजा आ रहा है इसके पास बहुत सारा सामान है लूटो लूटो जल्दी आओ जल्दी आओ |”

तोते की आवाज सुनकर सभी डाकू राजा की और दौड़ पड़े | डाकुओ को अपनी और आते देख कर राजा और उसके सैनिक दौड़ कर भाग खड़े हुए | भागते-भागते कोसो दूर निकल गए | सामने एक बड़ा सा पेड़ दिखाई दिया | कुछ देर सुस्ताने के लिए उस पेड़ के पास चले गए , जैसे ही पेड़ के पास पहुचे कि उस पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा – आओ राजन हमारे साधू महात्मा की कुटी में आपका स्वागत है | अन्दर आइये पानी पीजिये और विश्राम कर लीजिये | तोते की इस बात को सुनकर राजा हैरत में पड़ गया , और सोचने लगा की एक ही जाति के दो प्राणियों का व्यवहार इतना अलग-अलग कैसे हो सकता है | राजा को कुछ समझ नहीं आ रहा था | वह तोते की बात मानकर अन्दर साधू की कुटिया की ओर चला गया, साधू महात्मा को प्रणाम कर उनके समीप बैठ गया और अपनी सारी कहानी सुनाई | और फिर धीरे से पूछा, “ऋषिवर इन दोनों तोतों के व्यवहार में आखिर इतना अंतर क्यों है |”

साधू महात्मा धैर्य से सारी बातें सुनी और बोले ,” ये कुछ नहीं राजन बस संगति का असर है | डाकुओं के साथ रहकर तोता भी डाकुओं की तरह व्यवहार करने लगा है और उनकी ही भाषा बोलने लगा है | अर्थात जो जिस वातावरण में रहता है वह वैसा ही बन जाता है कहने का तात्पर्य यह है कि मूर्ख भी विद्वानों के साथ रहकर विद्वान बन जाता है और अगर विद्वान भी मूर्खों के संगत में रहता है तो उसके अन्दर भी मूर्खता आ जाती है | इसिलिय हमें संगती सोच समझ कर करनी चाहिए |


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हाथी और छह अंधे व्यक्ति ~ Elephant and six blind men !!

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@@ ** हाथी और छह अंधे व्यक्ति ** @@

6 BLIND MAN
कैसा होता है हाथी ?

बहुत समय पहले की बात है , किसी गावं में 6 अंधे आदमी रहते थे. एक दिन गाँव वालों ने उन्हें बताया , ” अरे , आज गावँ में हाथी आया है.” उन्होंने आज तक बस हाथियों के बारे में सुना था पर कभी छू कर महसूस नहीं किया था. उन्होंने ने निश्चय किया, ” भले ही हम हाथी को देख नहीं सकते , पर आज हम सब चल कर उसे महसूस तो कर सकते हैं ना?” और फिर वो सब उस जगह की तरफ बढ़ चले जहाँ हाथी आया हुआ था.

सभी ने हाथी को छूना शुरू किया.

” मैं समझ गया, हाथी एक खम्भे की तरह होता है”, पहले व्यक्ति ने हाथी का पैर छूते हुए कहा.

“अरे नहीं, हाथी तो रस्सी की तरह होता है.” दूसरे व्यक्ति ने पूँछ पकड़ते हुए कहा.

“मैं बताता हूँ, ये तो पेड़ के तने की तरह है.”, तीसरे व्यक्ति ने सूंढ़ पकड़ते हुए कहा.

” तुम लोग क्या बात कर रहे हो, हाथी एक बड़े हाथ के पंखे की तरह होता है.” , चौथे व्यक्ति ने कान छूते हुए सभी को समझाया.

“नहीं-नहीं , ये तो एक दीवार की तरह है.”, पांचवे व्यक्ति ने पेट पर हाथ रखते हुए कहा.

” ऐसा नहीं है , हाथी तो एक कठोर नली की तरह होता है.”, छठे व्यक्ति ने अपनी बात रखी.

और फिर सभी आपस में बहस करने लगे और खुद को सही साबित करने में लग गए.. ..उनकी बहस तेज होती गयी और ऐसा लगने लगा मानो वो आपस में लड़ ही पड़ेंगे.

तभी वहां से एक बुद्धिमान व्यक्ति गुजर रहा था. वह रुका और उनसे पूछा,” क्या बात है तुम सब आपस में झगड़ क्यों रहे हो?”

” हम यह नहीं तय कर पा रहे हैं कि आखिर हाथी दीखता कैसा है.” , उन्होंने ने उत्तर दिया.

और फिर बारी बारी से उन्होंने अपनी बात उस व्यक्ति को समझाई.

बुद्धिमान व्यक्ति ने सभी की बात शांति से सुनी और बोला ,” तुम सब अपनी-अपनी जगह सही हो. तुम्हारे वर्णन में अंतर इसलिए है क्योंकि तुम सबने हाथी के अलग-अलग भाग छुए

हैं, पर देखा जाए तो तुम लोगो ने जो कुछ भी बताया वो सभी बाते हाथी के वर्णन के लिए सही बैठती हैं.”

” अच्छा !! ऐसा है.” सभी ने एक साथ उत्तर दिया . उसके बाद कोई विवाद नहीं हुआ ,और सभी खुश हो गए कि वो सभी सच कह रहे थे.

दोस्तों, कई बार ऐसा होता है कि हम अपनी बात को लेकर अड़ जाते हैं कि हम ही सही हैं और बाकी सब गलत है. लेकिन यह संभव है कि हमें सिक्के का एक ही पहलु दिख रहा हो और उसके आलावा भी कुछ ऐसे तथ्य हों जो सही हों. इसलिए हमें अपनी बात तो रखनी चाहिए पर दूसरों की बात भी सब्र से सुननी चाहिए , और कभी भी बेकार की बहस में नहीं पड़ना चाहिए. वेदों में भी कहा गया है कि एक सत्य को कई तरीके से बताया जा सकता है. तो , जब अगली बार आप ऐसी किसी बहस में पड़ें तो याद कर लीजियेगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आपके हाथ में सिर्फ पूँछ है और बाकी हिस्से किसी और के पास हैं !!

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