बच्चों पर पढाई का दबाव ना डालें।

Kmsraj51 की कलम से…..
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ϒ बच्चों पर पढाई का दबाव ना डालें। ϒ

5th सितं शिक्ष दि मुबार हो मेरे भी प्रि पाकों काे।

किसी शहर में एक महिला थी। वह शादीशुदा थी और उसकी 16 साल की एक बच्ची भी थी। उसके पति दूसरे शहर में नौकरी करते थे। वह महिला बिलकुल आम अभिभावकों की तरह थी उसने अपनी बेटी से बड़ी उम्मीदें लगा रखी थी और बेटी की छोटी सी गलती भी उससे बर्दाश्त नहीं होती थी।

जब बेटी की परीक्षाएं चल रही थी तब माँ ने उसे ताकीद कर दी थी उसे मेरिट लिस्ट में आना ही हैं। मेरिट से कम कुछ भी स्वीकार नहीं होगा, यहाँ तक की प्रथम श्रेणी भी फ़ैल होने की तरह मानी जाएगी।

लड़की मेधावी थी लेकिन थी तो किशोरी ही, जब उम्मीदों का दबाव बढ़ा तो वह परेशान हो गयी। जैसे तैसे परीक्षाएं निबटी और अब रिजल्ट का इंतज़ार होने लगा।

आखिर वह दिन आ ही गया। माँ की उम्मीद शिखर पे थी लेकिन बेटी का हौसला रसातल में जा पहुंचा था। माँ को सुबह सुबह काम पर जाना था सो बेटी रिजल्ट लेने गयी और माँ अपने ऑफिस।

ऑफिस से उसने कई बार घर पर फोन लगाया लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। हैरान परेशान माँ भोजन अवकाश में घर पहुंची। उसने देखा की दरवाजे की कुण्डी चढ़ी हुई थी।

उसे लगा की बेटी अपनी सहेलियों के साथ घूम फिर रही होगी। बहरहाल, वह अन्दर गयी। उसने देखा की बेटी के कमरे के टेबल पर कोई कागज़ रखा हुआ हैं।

शायद कोई चिट्ठी थी।

उसके मन में ढेरो शंकाएं उमड़ने घुमड़ने लगी उसने धडकते दिल से कागज़ उठाया। वह माँ के नाम बेटी का ही पत्र था।

उसमे लिखा था :

प्रिय माँ,
“मुझे बताते हुए बड़ा संकोच हो रहा हैं की मैंने घर छोड़ दिया हैं और मैं अपने प्रेमी के साथ रहने चली गयी हूँ मुझे उसके साथ बड़ा अच्छा लगता हैं। उसके वो स्टाइलिश टैटू ,कलरफुल हेयर स्टाइल ….. मोटरसाइकिल की रफ़्तार, वे हैरतअंगेज करतब….. वाह!!
उस पर कुर्बान जाऊ। मेरे लिए ख़ुशी की एक और बात हैं। माँ, तुम नानी बनने वाली हो। मैं उसके घर चली गयी, वह एक झुग्गी बस्ती में रहता हैं। माँ उसके ढेर सारे दोस्त हैं। रोज शाम को वो सब इकठ्ठा होते हैं और फिर खूब मौज मस्ती होती हैं। माँ एक और अच्छी बात हैं अब मैं प्रार्थना भी करने लगी हूँ। माँ मेरी चिंता मत करना।

अब मैं 16 साल की हो गयी हूँ और अपना ध्यान खुद रख सकती हूँ। माँ तुम अपने नाती -नातिन से मिलने आया करोगी ना ?
तुम्हारी बेटी फिर कुछ नीचे लिखा था…..”

नोट : माँ, परेशान होने की जरूरत नहीं हैं। यह सब झूठ हैं।
मैं तो पडोसी के यहाँ बैठी हूँ। मैं सिर्फ यही दर्शाना चाहती थी की मेज़ की दराज में पड़ी मेरी Marksheet ही सबसे बुरी नहीं हैं, इस दुनिया में और भी बुरी बातें हो सकती है।

दोस्तों, 

बच्चों से उम्मीद तो रखे पर दबाव ना डालें। कही ऐसा ना हो की दबाव और डांट डपट के चलते वे कोई गलत कदम उठा ले। दोस्तों मैं बस इस कहानी के द्वारा यही बताना चाहता हूँ….. 

की किसी एक चीज के न होने से जिन्दगी खत्म नही हो जाती। अगर आप स्वयं अभिभावक हैं तो स्वयं इस बात का ख्याल रखे की अपने बच्चो पर अतिरिक्त दवाव न डाले और बच्चे इसे अपने अभिभावकों को अवश्य सुनाएँ जिससे उनकी भी सोच मैं बदलाव आ सके।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

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समाज के वास्तविक शिल्पकार होते हैं शिक्षक

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05-09-2014 – शिक्षक दिवस विशेष पर

किसी मनुष्य के विकास में जितना योगदान उसके माता-पिता का होता है कमोबेश उस व्यक्ति के भविष्य को बनाने में उतना ही बड़ा योगदान उसके टीचर का भी होता है। एक टीचर की महत्ता दुनिया की सारी सभ्यताओं और संस्कृतियों में एक जैसी है। भारत में कल शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है, इस मौके पर हम आपको दुनिया के ऐसे ही कुछ टीचर्स के नाम और उनके योगदान के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
एशिया हो या यूरोप। करीब-करीब हर जगह टीचर की अहमियत खास है। दुनियाभर के ये टीचर उल्लेखनीय हैं। ऐसे टीचर्स जिनका योगदान आज भी याद किया जाता है।
कन्फ्यूशियस :  कन्फ्यूशियस (ईसा पूर्व 551-479) का जन्म ईसा मसीह के जन्म से करीब 478 वर्ष पहले चीन के शानदोंग प्रांत में हुआ था। इन्हें भगवान महावीर और गौतम बुद्ध का समकालीन माना जाता है। कई विषयों में पंडित कन्फ्यूशियस को 17 वर्ष की उम्र में एक सरकारी नौकरी मिली थी। लेकिन कुछ ही वर्षों से इनका मन नौकरी से उचट गया और इन्होंने खुद को अध्यापन कार्य में लगा दिया। घर में ही एक विद्यालय खोलकर विद्यार्थियों को शिक्षा देना शुरू कर दिया।
कन्फ्यूशियस मौखिक रूप से विद्यार्थियों को इतिहास, काव्य, दर्शनशास्त्र और नीतिशास्त्र की शिक्षा देते थे। कन्फ्यूशियस ने काव्य, इतिहास, संगीत और नीतिशास्त्र पर कई पुस्तकों की रचना भी की। कन्फ्यूशियस ने एक नए धर्म की नींव भी रखी थी। चीन में आज भी कन्फ्यूशियस का दर्शन वहां के समाज और शिक्षा का बड़ा आधार है।
1
सुकरात (ईसा पूर्व 399- 469)
सुकरात को पश्चिम का एक महान टीचर और विचारक माना जाता है। सुकरात का जन्म 469 ईसा पूर्व एथेंस में हुआ था। शुरुआती जीवन में सुकरात ने अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाया लेकिन बाद में उन्होंने कुछ दिनों के लिए सेना की नौकरी भी की। बता दें कि एक सैनिक के तौर पर सुकरात ने पैटीडिया के युद्ध में हिस्सा लिया था। बहरहाल सुकरात को दुनिया उनके इन कामों के लिए नहीं बल्कि दार्शनिक विचारों और ज्ञान-विज्ञान के प्रसार के लिए याद करती है। गौरतलब है कि तत्कालीन एथेंस के समाज में सुकरात वैज्ञानिक विचारधारा का सूत्रपात किया करते थे। अपने शिष्यों के साथ ही एथेंस के अन्य लोगों को ज्ञान और विज्ञान की बातें समझाया करते थे। इस सिलसिले में कई बार वे अपने तर्कों द्वारा स्थापित मान्यताओं को खारिज कर देते थे। तब एथेंस में अधिकांश, सुकरात की विचारधारा को समझ ही नहीं पाए और उनकी जान के दुश्मन बन गए।
उनके उपदेशों से आजिज उनके दुश्मनों ने सुकरात को ख़त्म करने की ठानी और सुकरात पर मुकदमा थोप दिया। उनके ऊपर देवताओं की उपेक्षा और एथेंस के युवाओं को भ्रष्ट करने का आरोप लगा। आखिरकार दुनिया के इस महान शिक्षक को जहर का प्याला देकर मार दिया गया। बावजूद आज भी सुकरात के विचार प्रासंगिक बने हैं। उल्लेखनीय है कि सुकरात के बाद उनके एक शिष्य प्लेटो ने पश्चिमी विचारधारा को हिलाकर रख दिया था।
2
रोजर बैकन (1214-1292)
रोजर बैकन का जन्म इंग्लैंड में हुआ था। रोजर कई विषयों के विशेषज्ञ थे जिनमें ऑप्टिक, मैथ, रसायन प्रमुखता से शुमार किए जा सकते हैं। रोजर की गणना दुनिया के महान टीचर्स में होती है। इन्होंने अपने समय में दर्शन और विज्ञान का विस्तार से अध्ययन करने के साथ ही इसमें कई प्रयोग भी किए। इस दिलचस्प टीचर को अपने तार्किक ज्ञान और विज्ञान परक लेखन के कारण रोजर को शासकीय यातना भी झेलनी पड़ी। बता दें कि ओकल्टीज़्म के आरोप में रोजर को 15 साल कारावास भुगतना पड़ा।
3
नाथन हेल (1755-1766)
नाथन हेल को एक शिक्षक के साथ ही एक अमेरिकी योद्धा के रूप में भी याद किया जाता है। गौरतलब है कि नाथन ने अमेरिका के रिवोल्यूशनरी वार में हिस्सा लिया था। वे ब्रिटिश सेना द्वारा पकड़े गए और मात्र 21 साल की उम्र में फांसी चढ़ा दिए गए। बहरहाल नाथन के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य यह है अपनी उम्र के 18 वें वर्ष में ही वे एक अध्यापक भी बन गए थे। उन्हें अमेरिका में महिलाओं के शिक्षा की वकालत करने वाले प्रमुख व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है। तत्कालीन अमेरिका में महिला शिक्षा की हालत बहुत खराब थी। ऐसे दौर में नाथन सुबह-सुबह महिलाओं और लड़कियों को पढ़ाते थे जबकि इसी दिन दोपहर के समय में लड़कों को पढ़ाने का काम किया करते थे।
4
एन्नी सुलिवान (1866-1936)
एन्नी सुलिवान का जन्म मैसाचुसेट्स में 14 अप्रैल 1866 को हुआ था। जन्म के चौथे साल में ही एक बीमारी की वजह से उन्हें ब्लाइंडनेस की दिक्कत का सामना भी करना पड़ा। एन्नी को जन्मजात टीचर माना जाता है। दुनिया एन्नी को गूंगी और पूरी तरह से बहरी लड़की हेलन केलर के साथ किए गए उनके काम के लिए याद करती है। बता दें कि एन्नी ऐसी पहली शख्स थी जिन्होंने हेलन के रूप में किसी गूंगे-बहरे छात्र को पढ़ाने में सफलता हासिल की।
5
एलन ब्लूम (1930-1992)
एलन ब्लूम ने कई स्कूलों में अध्यापन का काम किया था, जिसमें एल यूनिवर्सिटी, कॉर्नल यूनिवर्सिटी, और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो प्रमुखता से शामिल है। एलन ब्लूम ने शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कई इतिहास प्रसिद्ध चर्चित किताबें भी लिखी।
6
जैमी इस्केलेंटी (1930-2010)
जैमी इस्केलेंटी (Jaime Escalante) का जन्म बोलिविया में हुआ था। जैमी को कैलिफोर्निया के गारफील्ड हाईस्कूल में मैथमेटिक की शिक्षा के लिए जाना जाता है। आधुनिक दौर में जेमी ने गणित की सरलता के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। इस वजह से उन्हें पुरस्कृत भी किया गया।
7

शिक्षक दिवस

भारत भूमि पर अनेक विभूतियों ने अपने ज्ञान से हम सभी का मार्ग दर्शन किया है। उन्ही में से एक महान विभूति शिक्षाविद्, दार्शनिक, महानवक्ता एवं आस्थावान हिन्दु विचारक डॉ. सर्वपल्लवी राधाकृष्णन जी ने शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है। उनकी मान्यता थी कि यदि सही तरीके से शिक्षा दी जाय़े तो समाज की अनेक बुराईयों को मिटाया जा सकता है।

ऐसी महान विभूति का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाना हम सभी के लिये गौरव की बात है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के व्यक्तित्व का ही असर था कि 1952 में आपके लिये संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति का पद सृजित किया गया। स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति जब 1962 में राष्ट्रपति बने तब कुछ शिष्यों ने एवं प्रशंसकों ने आपसे निवेदन किया कि  वे उनका जनमदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाना चाहते हैं। तब डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने कहा कि मेरे जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने से मैं अपने आप को गौरवान्वित महसूस करूंगा। तभी से 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ज्ञान के सागर थे। उनकी हाजिर जवाबी का एक किस्सा आपसे Share कर रहे हैः—

एक बार एक प्रतिभोज के अवसर पर अंग्रेजों की तारीफ करते हुए एक अंग्रेज ने कहा – “ईश्वर हम अंग्रेजों को बहुत प्यार करता है। उसने हमारा निर्माण बङे यत्न और स्नेह से किया है। इसी नाते हम सभी इतने गोरे और सुंदर हैं।“ उस सभा में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी भी उपस्थित थे। उन्हे ये बात अच्छी नही लगी अतः उन्होने उपस्थित मित्रों को संबोधित करते हुए एक मनगढंत किस्सा सुनाया—

“मित्रों, एक बार ईश्वर को रोटी बनाने का मन हुआ उन्होने जो पहली रोटी बनाई, वह जरा कम सिकी। परिणामस्वरूप अंग्रेजों का जन्म हुआ। दूसरी रोटी कच्ची न रह जाए, इस नाते भगवान ने उसे ज्यादा देर तक सेंका और वह जल गई। इससे निग्रो लोग पैदा हुए। मगर इस बार भगवान जरा चौकन्ने हो गये। वह ठीक से रोटी पकाने लगे। इस बार जो रोटी बनी वो न ज्यादा पकी थी न ज्यादा कच्ची। ठीक सिकी थी और परिणाम स्वरूप हम भारतियों का जन्म हुआ।“

ये किस्सा सुनकर उस अग्रेज का सिर शर्म से झुक गया और बाकी लोगों का हँसते हँसते बुरा हाल हो गया।

मित्रों, ऐसे संस्कारित एवं शिष्ट माकूल जवाब से किसी को आहत किये बिना डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने भारतीयों को श्रेष्ठ बना दिया। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का मानना था कि व्यक्ति निर्माण एवं चरित्र निर्माण में शिक्षा का विशेष योगदान है। वैश्विक शान्ति, वैश्विक समृद्धि एवं वैश्विक सौहार्द में शिक्षा का महत्व अतिविशेष है। उच्चकोटी के शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को भारत के प्रथम राष्ट्रपति महामहीम डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने भारतरत्न से सम्मानित किया।

महामहीम राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के विचारों को ध्यान में रखते हुए, मित्रों मेरा ये मानना है कि शिक्षक दिवस के पुनित अवसर पर हम सब ये प्रण करें कि शिक्षा की ज्योति को ईमानदारी से अपने जीवन में आत्मसात करेंगे क्योंकि शिक्षा किसी में भेद नही करती, जो इसके महत्व को समझ जाता है वो अपने भविष्य को सुनहरा बना लेता है।

सम्सत शिक्षकों को हम निम्न शब्दों से नमन करते हैं—

ज्ञानी के मुख से झरे, सदा ज्ञान की बात।

हर एक पांखुङी फूल, खुशबु की सौगात।।

जयहिन्द

अनिता शर्मा

E-mail ID:  voiceforblind@gmail.com                                                                                                                  City :  Indore

एक अपील– आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई  दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है।आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है।मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma”  लिख कर देखा जा सकता है।

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 HAPPY TEACHER’s DAY 

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सच्चें मन से अगर कुछ करने की ठान लाे, ताे आपकाे सभी काम में सफलता मिल जाती हैं।

जीवन में जाे भी काम कराें पुरे मन से कराें, ताे सफलता आपकाे जरूर मिलेगी।

-कृष्ण मोहन सिंह ५१

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लिए समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

 

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