“प्रेरणादायक हिन्दी उद्धरण और विचार”

Coming Soon Public Book …..

“तू ना हो निराश कभी मन से”
baby-TU NA HO NIRASH KABHI MAN SE

Some Topic of “तू ना हो निराश कभी मन से”

Change your mind thoughts “अपने मन के विचारों को बदलें”

“सफल लोग अपने मस्तिष्क को इस तरह का बना लेते हैं कि उन्हें हर चीज सकारात्मक व खूबसूरत लगती है।”

“हमेशा अपनी आत्मा की पहली आवाज सुनो”

“प्रत्येक कार्य आत्मा की पहली आवाज के अनुसार करो”

“एक अच्छा दिमाग हमेशा जानने के लिए उत्सुक …..”

“कुछ भी आप के लिए संभव है”

“ज्ञान हमेशा शुद्ध और पूरा हो”

“खुशी और सफल जीवन का मार्ग”

“अपने जीवन में निराशाजनक कुछ भी नहीं”

“अपने जीवन में हमेशा सफलता के निकटतम …..

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kmsraj51 की कलम से …..
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“विचार से कार्य की उत्पत्ति होती है, कर्म से आदत की उत्पत्ति होती है और चरित्र से आपके भाग्य की उत्पत्ति होती है।”
– बौद्ध कहावत

“हर सुबह मैं अपनी आँखे खोलता हूँ उस भविष्य को सँवारने के लिए जो मेरे लिए खास है। हर रात मैं अपनी आँखे बंद कर लेता हूँ और देखता हूँ कि मेरा लक्ष्य थोड़ा और मेरे पास है।”
-kmsraj51

“सफल लोग अपने मस्तिष्क को इस तरह का बना लेते हैं कि उन्हें हर चीज सकारात्मक व खूबसूरत लगती है।”
-kmsraj51

“असल में सफल लोग अपने निरंतर विश्वास से जीतते हैं लेकिन वे असफलताओं का मुकाबला भी उसी विश्वास से करते हैं। सफलता के लिए विश्वास पैदा कीजिये। असफल होने पर भी उस विश्वास को कायम रखिये।”
-kmsraj51

“सफल व्यक्ति सकारात्मक ढंग से प्रशंसा करते हैं और हँसी मजाक पर बुरा नहीं मानते। वे उत्साह फैलाते हैं। उनकी सकारात्मकता चारो तरफ़ फैलती है और उसकी खुशबु हर जगह बिखरती रहती है।”
-kmsraj51

“सफल लोग सबकी परवाह करते हैं। उनका यह लिहाज भी उन्हें दूसरों से अलग बनाता है।”
-kmsraj51

“प्रयासों को प्रोत्साहित कीजिये। तुम मुझे प्रोत्साहित करो, में तुम्हें कभी नहीं भूलूंगा।”
-kmsraj51

“बदलती मनः स्थिति ही एक स्वस्थ व रचनाशील व्यक्तित्त्व की निशानी है।”
-kmsraj51

“प्रयास करें अपने मन के छिद्रों को पहचान कर उन्हें भरने का”
-kmsraj51

“सोचें और लिखें : मेरी विशेषताएँ बदलाव की आवश्यकता मैं कैसे बदलाव करना चाहता हूँ जीवन में।”
-kmsraj51

“हम जो भी हैं, जो कुछ भी करते हैं, वह तभी होता है जब हम उसे वास्तव में करना चाहते हैं।”
-kmsraj51

जहाज समंदर के किनारे सर्वाधिक सुरक्षित रहता है। मगर क्या आप नहीं जानते कि उसे किनारे के लिए नहीं, बल्कि समंदर के बीच में जाने के लिए बनाया गया है ?
-kmsraj51

“हमारी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपने जीवन का कुछ सेकंड, प्रतिघंटा और प्रतिदिन कैसे बिताते हैं”
-kmsraj51

“जिसने अपने को वश में कर लिया है, उसकी जीत को देवता भी हार में नहीं बदल सकते”
– महात्मा बुद्ध

“अपनी सृजनात्मकता को तराशते रहिये।”
-kmsraj51

“सफलता सार्वजनिक उत्सव है, जबकि असफलता व्यक्तिगत शोक।”
-kmsraj51

“एकाग्र रहने वाला सदा सफलता का वरण करता है”
-kmsraj51

“कोई भी काम एक दिन में नहीं सफल होता। काम एक पेड़ की तरह होता है। पहले उसकी आत्मा में एक बीज बोया जाता है, हिम्मत की खाद से उसे पोषित किया जाता है और मेहनत के पानी से उसे सींचा जाता है, तब जाकर सालों बाद वह फल देने के लायक होता है”
-kmsraj51

“सफलता के लिए इन्तजार करना आना चाहिए। पौधे से फल की इच्छा रखना मूर्खता से अधिक कुछ भी नही है”
-kmsraj51

“असफलता सफलता प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपने मस्तिष्क को अपना रास्ता स्वयं खोजने की शक्ति दीजिये।
मेहनत कीजिये लेकिन बिना योजना के नहीं”
-kmsraj51

“आकांक्षा क्षणिक नहीं होती, न ही उन्मादी होती है। आवेग कहता है,- रुको मत, चलते रहो। ढ्लो मत, निखरते रहो।”
-kmsraj51

“किसी से अत्यधिक नफ़रत करने का सबसे बुरा असर यह होता है कि आप भी उस व्यक्ति की तरह बनने लगते है।”
– kmsraj51

“ये जरुरी बात नहीं है कि जो लोग आपके सामने आपके बारे में अच्छा बोलते है, वह आपके पीछे भी आपके बारे में यही राय रखते हों।”
-kmsraj51

“जीवन में जोश इस भावना से आता है कि आप उस काम का हिस्सा है जिसमें आप विश्वास रखते है, कुछ ऐसा जो अपने आप से भी बड़ा है।”
-kmsraj51

“अपने गुणों पे घमंड के कारण, व्यक्ति दूसरों के अवगुणों को देखता है और दूसरों के अवगुणों को देख कर, व्यक्ति का घमंड और अधिक मजबूत हो जाता है।”
-kmsraj51

“जब आप एक कठिन दौर से गुजरते हैं, जब सब कुछ आप का विरोध करने लगता है, जब आपको लगता है कि आप एक मिनट भी सहन नहीं कर सकते हैं, कभी हार न माने ! क्योंकि यही वह समय और स्थान है जब आपका अच्छा समय शुरू होगा”
-रूमी

“अगर आप उम्मीद नहीं करेंगे तो आप वह हासिल नहीं कर पाएंगे जो उम्मीद से ज्यादा है। ”
-kmsraj51

“जीवन में कभी भी आशा को न छोड़े क्योंकि आप कभी यह नहीं जान सकते कि आने वाला कल आपके लिए क्या लाने वाला है”
-kmsraj51

“असफलताएँ जीवन का एक हिस्सा है, अगर आप कभी असफल नहीं होंगे तो आप कभी सीखेगें नहीं। जब आप सीखेगें नहीं, परिणाम सवरूप आप में बदलाब नहीं आएगा और न ही आप नई चीज़े सीख पाएंगे ।”
-kmsraj51


“सभी शक्ति तुम्हारे भीतर है, आप उस में विश्वास कर सकते हैं”
-kmsraj51

“हर स्कूल अपने छात्रों के चरित्र में परिलक्षित हो जाता है”
-kmsraj51

“जो तुम्हारी बात सुनते हुए इधर-उधर देखे, उस पर कभी विश्वास न करो”
-चाणक्य

“मेरा ‘डर’ मेरा ही एक हिस्सा है और शायद सबसे सुंदर हिस्सा”
-फ्रांज़ काफ्का”

“जीवन में सफल होना इस लिए भी मुश्किल है कि ज्यादातर लोग आपको आगे बढ़ाने की जगह पीछे खींचना पसंद करते है”
-kmsraj51

“जब ये आपका अपना जीवन है तो आप इसको अपने तरीके से क्यों नहीं जी रहे है”
-kmsraj51

“जिंदगी कितनी खुबसूरत है ये देखने के लिए हमें ज्यादा दूर जाने की जरुरत नहीं है, जहाँ हम अपनी आंखे खोल ले वहीँ हम इसे देख सकते है”
-kmsraj51


Note::-
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“Soul Sustenance & Message for the day 26-01-2014”

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Soul Sustenance 26-03-2014
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The Life Jacket Of Hope

In the midst of the constant changes of life and confusing or chaotic situations, hope, becomes our life jacket, which helps us to keep afloat and not to drown in the hurricane that at times causes unexpected or sudden changes. Without hope, we expect the worst. Our vision gets cloudy; we do not find or see any ray of light to see by. The mind fills with questions, allowing it to be overpowered by doubts and insecurity. Fear takes control of us and everything turns into a mountain or an un-climbable wall. It seems to us that we will not be able to get out of the difficult and critical moments, or it will be difficult for us to get out of the “hole”. We feel incapable of going forward. Fear and doubt paralyze us and prevent us from deciding with clarity and acting with determination. We need to find support or help and, when we don’t get it, we go even further down.

Living with hope keeps us awake. With hope we are open to the opportunities that life offers us. We overcome fear and expect the best. With hope our forces are joined in order to deal with and overcome difficulties. We maintain the vision that everything will get better and things will streamline themselves, giving out benefits to all. Hope helps us to keep the meaning of our life alive.

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Message for the day 26-03-2014
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Cooperation brings beauty and growth.

Expression: Everyone seeks for cooperation from others, but the beauty lies in cooperating with others. True cooperation is that which is given with the heart and touches the lives of others positively. It inspires others to be cooperative too. This is the true help that one can extend to others.

Experience: When I am able to be cooperative with others and provide them with the help that they require, I am able to enjoy the joy of giving unconditionally. I am free from expectations from others and I am able to enjoy the growth that I perceive in others. I don’t expect others to change for me but because they can improve.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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“Soul Sustenance & Message for the day 24-01-2014”

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Soul Sustenance 24-03-2014
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The Two Close Companions Of Peace (A Meditation)

Sit comfortably and relax… Remind yourself of your spiritual form as a soul – a point of subtle light (non-physical light), a sparkling star, situated between the two eyebrows… Now visualize your star-like form and emerge the feelings of peace looking at this form with your mind’s eye… experience stability and contentment in this inner value of peace, peace is your own treasure… Fully let go off all your concerns, tensions and worries and allow all of yourself to become deeply peaceful… Now, feel the vibrations (energy waves) of your peaceful light form radiating outwards into the world… Be aware that the vibration of your peaceful form is like a gift… Consciously transmit this gift of peace with the pure desire of calming and relieving the stress and peacelessness of others…

As you radiate the power of your peace into the world, you do so with great love… As you give the gift of peace, with love, you are aware that you are able to serve others, reach out to others, in this invisible but extremely significant way… This awareness brings about a new sense of meaning in your life and you experience deep feelings of happiness within your heart… It is a happiness which takes the form of bliss, a bliss or satisfaction experienced as an invisible fruit received in return of unconditional serving… You realize that your peace does not live alone… True peace is that which is shared with others… it always has with it its closest companions… an experience of love and a feeling of pure happiness…

Our basic spiritual characteristics of peace, love and happiness are values that can be compared to the primary colors of the soul. While the soul can experience these values, it is only when they are mixed together (to give different shades) that they emerge though our attitudes and behaviors as virtue. Virtuous thoughts, words and actions restore balance and harmony to our inner life and to our external relationships.

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Message for the day 24-03-2014
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To be strong is to be free from the influence of the body.

Expression: To allow the body to influence the mind is to be doubly ill. The one who allows himself to be doubly ill is not able to deal with the illness of the body. On the other hand, the one who is powerful in the mind is able to maintain the inner strength in spite of the disease and so has the power to put in effort to finish it.

Experience: Instead of being conscious of the disease of the body, all I need to do is to maintain the consciousness of being powerful internally. Then I would not be afraid of the disease of the body but will have the courage to deal with it. I am able to see the disease as something temporary and will soon find myself rid of the illness, as I am powerful within.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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KMSRAJ51 Celebrate ~ Happy Anniversary!! Month
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KRISHNA MOHAN SINGH
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Happy Anniversary!!

Happy Anniversary!!
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Happy Anniversary!!
09-March-2013 to 09-March-2014
Completed ONE (1) Year Successfully Journey
KMSRAJ51 –ALWAYS POSITIVE THINKER
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Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!!

Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!!

जीवन में सबसे कठिन दौर यह नहीं है जब कोई तुम्हें समझता नहीं है, बल्कि यह तब होता है जब तुम अपने आप को नहीं समझ पाते.

All of my dear reader`s & friend`s lots of thanks’
Coverage 95+ Country Reader`s
India Top Hindi Website =>
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Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!!

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तुम्हारे न रहने पर
थोड़ा-थोड़ा करके
सचमुच हमने पूरा खो दिया तुम्हें
पछतावा है हमें
तुम्हें खोते देखकर भी
कुछ भी नहीं कर पाये हम,
अब हमारी ऑंखें सूनी हैं,
जिन्हें नहीं भर सकतीं
असंख्य तारों की रोशनी भी
और न ही है कोई हवा
मौजूद इस दुनिया में
जो महसूस करा सके
उपस्‍थिति तुम्हारी,
एक भार जो दबाये रखता था
हर पल हमारे प्रेम के अंग
उठ गया है, तुम्हारे न रहने से
अब कितने हल्के हो गये हैं हम
तिनके की तरह पानी में बहते हुए ।

Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!!

Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!!

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Thank`s & Regard`s

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Krishna Mohan Singh51(कृष्ण मोहन सिंह51)
Spiritual Author Cum Spiritual Guru
Always Positive Thinker Cum Motivator
Sr.Administrator (IT-Software, Hardware & Networking)
ID: kmsraj51@yahoo.in
Founder & CEO

Of: https://kmsraj51.wordpress.com/

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अब हमारी ऑंखें सूनी हैं,
जिन्हें नहीं भर सकतीं
असंख्य तारों की रोशनी भी
और न ही है कोई हवा
मौजूद इस दुनिया में
जो महसूस करा सके
उपस्‍थिति तुम्हारी,
एक भार जो दबाये रखता था
हर पल हमारे प्रेम के अंग
उठ गया है, तुम्हारे न रहने से
अब कितने हल्के हो गये हैं हम
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Life Management in Hindi !!


::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..
KMS-2014-51

kmsraj51 की कलम से …..
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अच्छे लोग और अपने हितैषियों को हम पहचान नहीं पाते और अपने विरोधियों के प्रति पूरी तरह शत्रुता, इन्कारने का भाव रख लेते हैं। इसे चिंतन दोष कहा जाएगा। न कोई पूरी तरह अच्छाई से भरा है और नहीं बुराइयों से भरपूर होगा। मनुष्य गुण-दुर्गुण का मिलाजुला रूप है। हमें इस संतुलन के विचार को सावधानी से उपयोग में लाना चाहिए। अपने विरोधियों के विचार जानते रहना चाहिए, खासतौर पर जब वे आपके लिए व्यक्तिगत टिप्पणी कर रहे हों।

यदि इसका निष्पक्ष विश्लेषण करें तो हमें बहुत सी काम की और हितकारी बातें हाथ लग सकती हैं। इस प्रयोग को झेन फकीरों ने बखूबी किया है। जब भी कोई शिष्य उनसे दीक्षित होता, तो गुरु कहते जाओ, हमने पा लिया, हमारे हो गए, अब कुछ दिन जरूरी रूप से हमारे विरोधी के पास जाकर रहो। हमारा दूसरा पक्ष वहां नजर आएगा, लेकिन जाना निष्पक्ष होकर। इस बात की पूरी संभावना रहेगी कि विरोधी कुछ मामले में सही भी हो।

हमारा और विरोधी का पक्ष मिलकर एक तीसरा नया पक्ष बन जाए जो और भी श्रेष्ठ हो सकता है। यदि तुम्हारा इरादा नेक होगा तो हमारे और हमारे विरोधी दोनों की गलत बात को नकार कर तुम एक नई सही बात प्राप्त कर लोगे। इसलिए विरोधी विचार या व्यक्ति से शत्रुता न पाली जाए। यदि नेक इरादे से चलेंगे तब जो आज शत्रु है कल मित्र हो सकता है। यदि अपने भीतर की आध्यात्मिक योग्यता को विकसित करना है तो विरोधी के विचार को सम्मान देना सीख जाएं। स्वयं के व्यक्तित्व को अपने ही विचारों में बांधें न बल्कि विरोधी के विचारों से खोलना भी सीखें।


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स्वस्थ रहने की 10 अच्छी आदतें ~ 10 Good Habits of Healthy Living !!

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* ~ स्वस्थ रहने की 10 अच्छी आदतें ~ *


facts-about-healthy-food1

* कहीं भी बाहर से घर आने के बाद, किसी बाहरी वस्तु को हाथ लगाने के बाद, खाना बनाने से पहले, खाने से पहले, खाने के बाद और बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। यदि आपके घर में कोई छोटा बच्चा है तब तो यह और भी जरूरी हो जाता है। उसे हाथ लगाने से पहले अपने हाथ अच्छे से जरूर धोएं।

* घर में सफाई पर खास ध्यान दें, विशेषकर रसोई तथा शौचालयों पर। पानी को कहीं भी इकट्ठा न होने दें। सिंक, वॉश बेसिन आदि जैसी जगहों पर नियमित रूप से सफाई करें तथा फिनाइल, फ्लोर क्लीनर आदि का उपयोग करती रहें। खाने की किसी भी वस्तु को खुला न छोड़ें। कच्चे और पके हुए खाने को अलग-अलग रखें। खाना पकाने तथा खाने के लिए उपयोग में आने वाले बर्तनों, फ्रिज, ओवन आदि को भी साफ रखें। कभी भी गीले बर्तनों को रैक में नहीं रखें, न ही बिना सूखे डिब्बों आदि के ढक्कन लगाकर रखें।

* ताजी सब्जियों-फलों का प्रयोग करें। उपयोग में आने वाले मसाले, अनाजों तथा अन्य सामग्री का भंडारण भी सही तरीके से करें तथा एक्सपायरी डेट वाली वस्तुओं पर तारीख देखने का ध्यान रखें।

* बहुत ज्यादा तेल, मसालों से बने, बैक्ड तथा गरिष्ठ भोजन का उपयोग न करें। खाने को सही तापमान पर पकाएं और ज्यादा पकाकर सब्जियों आदि के पौष्टिक तत्व नष्ट न करें। साथ ही ओवन का प्रयोग करते समय तापमान का खास ध्यान रखें। भोज्य पदार्थों को हमेशा ढंककर रखें और ताजा भोजन खाएं।

* खाने में सलाद, दही, दूध, दलिया, हरी सब्जियों, साबुत दाल-अनाज आदि का प्रयोग अवश्य करें। कोशिश करें कि आपकी प्लेट में ‘वैरायटी ऑफ फूड’ शामिल हो। खाना पकाने तथा पीने के लिए साफ पानी का उपयोग करें। सब्जियों तथा फलों को अच्छी तरह धोकर प्रयोग में लाएं।

* खाना पकाने के लिए अनसैचुरेटेड वेजिटेबल ऑइल (जैसे सोयाबीन, सनफ्लॉवर, मक्का या ऑलिव ऑइल) के प्रयोग को प्राथमिकता दें। खाने में शकर तथा नमक दोनों की मात्रा का प्रयोग कम से कम करें। जंकफूड, सॉफ्ट ड्रिंक तथा आर्टिफिशियल शकर से बने ज्यूस आदि का उपयोग न करें। कोशिश करें कि रात का खाना आठ बजे तक हो और यह भोजन हल्का-फुल्का हो।

* अपने विश्राम करने या सोने के कमरे को साफ-सुथरा, हवादार और खुला-खुला रखें। चादरें, तकियों के गिलाफ तथा पर्दों को बदलती रहें तथा मैट्रेस या गद्दों को भी समय-समय पर धूप दिखाकर झटकारें।

* मेडिटेशन, योगा या ध्यान का प्रयोग एकाग्रता बढ़ाने तथा तनाव से दूर रहने के लिए करें।

* कोई भी एक व्यायाम रोज जरूर करें। इसके लिए रोजाना कम से कम आधा घंटा दें और व्यायाम के तरीके बदलते रहें, जैसे कभी एयरोबिक्स करें तो कभी सिर्फ तेज चलें। अगर किसी भी चीज के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे तो दफ्तर या घर की सीढ़ियां चढ़ने और तेज चलने का लक्ष्य रखें। कोशिश करें कि दफ्तर में भी आपको बहुत देर तक एक ही पोजीशन में न बैठा रहना पड़े।

* 45 की उम्र के बाद अपना रूटीन चेकअप करवाते रहें और यदि डॉक्टर आपको कोई औषधि देता है तो उसे नियमित लें। प्रकृति के करीब रहने का समय जरूर निकालें। बच्चों के साथ खेलें, अपने पालतू जानवर के साथ दौड़ें और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मनोरंजन का भी समय निकालें।


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Complete Chanakya Niti in Hindi !!


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2014-kms


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$$ चाणक्य नीति हिन्दी में $$

Chanakya


शक्तिशाली लोगों के लिए कौनसा कार्य कटीं है ? व्यापारिओं के लिए कौनसा जगह दूर है, विद्वानों के लिए कोई देश विदेश नहीं है, मधुभाषियों का कोई शत्रु नहीं!!

राजा लोग अपने आस पास अच्छे कुल के लोगो को इसलिए रखते है क्योंकि ऐसे लोग ना आरम्भ मे, ना बीच मे और ना ही अंत मे साथ छोड़कर जाते है!!

जिस तरह सारा वन केवल एक ही पुष्प अवं सुगंध भरे वृक्ष से महक जाता है उसी तरह एक ही गुणवान पुत्र पुरे कुल का नाम बढाता है!!

जिस प्रकार केवल एक सुखा हुआ जलता वृक्ष सम्पूर्ण वन को जला देता है उसी प्रकार एक ही कुपुत्र सरे कुल के मान, मर्यादा और प्रतिष्ठा को नष्ट कर देता है!!

कुल की रक्षा के लिए एक सदस्य का बिलदान दें,गाव की रक्षा के लिए एक कुल का बिलदान दें, देश की रक्षा के लिए एक गाव का बिलदान दें, आतमा की रक्षा के लिए देश का बिलदान दें!!

ऐसे अनेक पुत्र किस काम के जो दुःख और निराशा पैदा करे. इससे तो वह एक ही पुत्र अच्छा है जो समपूणर घर को सहारा और शान्ति पर्दान करे!!

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उस देश मे निवास न करे जहा आपकी कोई इजजत नहीं, जहा आप रोजगार नहीं कमा सकते,
जहा आपके कोई मित्र नहीं और जहा आप कोई ज्ञान आर्जित नहीं कर सकते।।

वहा एक दिन भी ना रके जहा ये पाच ना हो!!
धनवान व्यक्ति ,
विदान व्यक्ति जो शास्त्रों को जानता हो,
राजा,
नदियाँ,
और चिकित्सक !!

बुद्धिमान व्यक्ति ऐसे देश कभी ना जाए जहा …
रोजगार कमाने का कोई माधयम ना हो!
जहा लोग किसी से डरते न हो!
जहा लोगो को किसी बात की लज्जा न हो!!
जहा लोगो के पास बुद्धिमत्ता न हो!
जहा के लोगो की वृत्ति दान धरम करने की ना हो!!

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इन बातो को बार बार गौर करे…
सही समय
सही मित्र
सही ठिकाना
पैसे कमाने के सही साधन
पैसे खर्चा करने के सही तरीके
आपके उर्जा स्रोत!!

आत्याधिक सुन्दरता के कारन सीताहरण हुआ,
अत्यंत घमंड के कारन रावन का अंत हुआ,
अत्यधिक दान देने के कारन रजा बाली को बंधन में बंधना पड़ा,
अतः सर्वत्र अति को त्यागना चाहिए!!

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यदि कर्म का फल तुरन्त नहीं मिलता तो इससे यह नहीं समझ लेना चाहिए कि उसके भले-बुरे परिणाम से हम सदा के लिए बच गयें । कर्म-फल एक ऐसा अमिट तथ्य है जो आज नहीं तो कल भुगतना अवश्य ही पड़ेगा । कभी-कभी इन परिणामों में देर इसलिये होती है कि ईश्वर मानवीय बुद्धि की परीक्षा करना चाहता है कि व्यक्ति अपने कर्तव्य-धर्म समझ सकने और निष्ठापूर्वक पालन करने लायक विवेक बुद्धि संचित कर सका या नहीं । जो दण्ड भय से डरे बिना दुष्कर्मों से बचना मनुष्यता का गौरव समझता है और सदा सत्कर्मों तक ही सीमित रहता है, समझना चाहिए कि उसने सज्जनता की परीक्षा पास कर ली और पशुता से देवत्व की और बढऩे का शुभारम्भ कर दिया ।

लाठी के बल पर जानवरों को इस या उस रास्ते पर चलाया जाता है और अगर ईश्वर भी बलपूर्वक अमुक मार्ग पर चलने के लिए विवश करता तो फिर मनुष्य भी पशुओं की श्रेणी में आता, इससे उसकी स्वतंत्र आत्म-चेतना विकसित हुई या नहीं इसका पता ही नहीं चलता । भगवान ने मनुष्य को भले या बुरे कर्म करने की स्वतंत्रता इसीलिए प्रदान की है कि वह अपने विवेक को विकसित करके भले-बुरे का अन्तर करना सीखे और दुष्परिणामों के शोक-संतापों से बचने एवं सत्परिणामों का आनन्द लेने के लिए स्वत: अपना पथ निर्माण कर सकने में समर्थ हो । अतएव परमेश्वर के लिए यह उचित ही था कि मनुष्य को अपना सबसे बड़ा बुद्धिमान और सबसे जिम्मेदार बेटा समझकर उसे कर्म करने की स्वतंत्रता प्रदान करे और यह देखे कि वह मनुष्यता का उत्तरदायित्व सम्भाल सकने मे समर्थ है या नहीं ? परीक्षा के बिना वास्तविकता का पता भी कैसे चलता और उसे अपनी इस सर्वश्रेष्ठ रचना मनुष्य में कितने श्रम की सार्थकता हुई यह कैसे अनुभव होता । आज नहीं तो कल उसकी व्यवस्था के अनुसार कर्मफल मिलकर ही रहेगा । देर हो सकती है अन्धेर नहीं । ईश्वरीय कठोर व्यवस्था, उचित न्याय और उचित कर्म-फल के आधार पर ही बनी हुई है सो तुरन्त न सही कुछ देर बाद अपने कर्मों का फल भोगने के लिए हर किसी को तैयार रहना चाहिए ।

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हर मित्रता के पीछे कुछ स्वार्थ जरूर छिपा होता है। दुनिया में ऐसी कोई दोस्ती नहीं जिसके पीछे लोगों के अपने हित न छिपे हों, यह कटु सत्य है, लेकिन यही सत्य है। और जो मित्र आपके सामने चिकनी-चुपड़ी बातें करता हो और पीठ पीछे आपके कार्य को बिगाड़ देता हो, उसे त्याग देने में ही भलाई है। चाणक्य कहते हैं कि वह उस बर्तन के समान है, जिसके ऊपर के हिस्से में दूध लगा है परंतु अंदर विष भरा हुआ होता है।

चाणक्य कहते है कि जो व्यक्ति अच्छा मित्र नहीं है उस पर तो विश्वास नहीं करना चाहिए, परंतु इसके साथ ही अच्छे मित्र के संबंद में भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है। अत: सावधानी अत्यंत आवश्यक है।

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=> अपने शत्रु को हमेशा भर्म मे रखो! यदि हम कमजोर है तो अपने शत्रु को दिखाओ की हम ताकतवर है , अगर हम ताकतवर है तो अपने शत्रु को दिखाओ की हम कमजोर है।

=> अगर आप उस के पास ( नजदीक ) हँ तो उसे एहसास दिलाओ की आप उस से दूर है! यदि आप उससे दूर हँ तो उसे एहसास दिलाओ की आप उस से पास है हमेसा शत्रु क मन में भर्म की स्थिति पैदा कर के रखे!

=> अगर कोई सांप जहरीला नहीं है, तब भी उसे फुफकारना नहीं छोड़ना चाहिए। उसी तरह से कमजोर व्यक्ति को भी हर वक्त अपनी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।

=> सबसे बड़ा गुरुमंत्र : कभी भी अपने रहस्यों को किसी के साथ साझा मत करो, यह प्रवृत्ति तुम्हें बर्बाद कर देगी।

=> किसी भी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिए। सीधे तने वाले पेड़ ही सबसे काटे जाते हैं और बहुत ज्यादा ईमानदार लोगों को ही सबसे ज्यादा कष्ट उठाने पड़ते हैं।

=> अपने बच्चे को पहले पांच साल दुलार के साथ पालना चाहिए। अगले पांच साल उसे डांट-फटकार के साथ निगरानी में रखना चाहिए। लेकिन जब बच्चा सोलह साल का हो जाए, तो उसके साथ दोस्त की तरह व्यवहार करना चाहिए। बड़े बच्चे आपके सबसे अच्छे दोस्त होते हैं।

=> दिल में प्यार रखने वाले लोगों को दुख ही झेलने पड़ते हैं। दिल में प्यार पनपने पर बहुत सुख महसूस होता है, मगर इस सुख के साथ एक डर भी अंदर ही अंदर पनपने लगता है, खोने का डर, अधिकार कम होने का डर आदि-आदि। मगर दिल में प्यार पनपे नहीं, ऐसा तो हो नहीं सकता। तो प्यार पनपे मगर कुछ समझदारी के साथ। संक्षेप में कहें तो प्रीति में चालाकी रखने वाले ही अंतत: सुखी रहते हैं।

=> हर मित्रता के पीछे कुछ स्वार्थ जरूर छिपा होता है। दुनिया में ऐसी कोई दोस्ती नहीं जिसके पीछे लोगों के अपने हित न छिपे हों, यह कटु सत्य है, लेकिन यही सत्य है।

=> ऐसा पैसा जो बहुत तकलीफ के बाद मिले, अपना धर्म-ईमान छोड़ने पर मिले या दुश्मनों की चापलूसी से, उनकी सत्ता स्वीकारने से मिले, उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए।

=> नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुंचाने वाली, उनके विश्वासों को छलनी करने वाली बातें करते हैं, दूसरों की बुराई कर खुश हो जाते हैं। मगर ऐसे लोग अपनी बड़ी-बड़ी और झूठी बातों के बुने जाल में खुद भी फंस जाते हैं। जिस तरह से रेत के टीले को अपनी बांबी समझकर सांप घुस जाता है और दम घुटने से उसकी मौत हो जाती है, उसी तरह से ऐसे लोग भी अपनी बुराइयों के बोझ तले मर जाते हैं।

=> जो बीत गया, सो बीत गया। अपने हाथ से कोई गलत काम हो गया हो तो उसकी फिक्र छोड़ते हुए वर्तमान को सलीके से जीकर भविष्य को संवारना चाहिए।

=> असंभव शब्द का इस्तेमाल बुजदिल करते हैं। बहादुर और बुद्धिमान व्यक्ति अपना रास्ता खुद बनाते हैं।

=> संकट काल के लिए धन बचाएं। परिवार पर संकट आए तो धन कुर्बान कर दें। लेकिन अपनी आत्मा की हिफाजत हमें अपने परिवार और धन को भी दांव पर लगाकर करनी चाहिए।

=> भाई-बंधुओं की परख संकट के समय और अपनी स्त्री की परख धन के नष्ट हो जाने पर ही होती है।

=> कष्टों से भी बड़ा कष्ट दूसरों के घर पर रहना है।

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=> चाणक्य कहते है कि जो व्यक्ति अच्छा मित्र नहीं है उस पर तो विश्वास नहीं करना चाहिए, परंतु इसके साथ ही अच्छे मित्र के संबंद में भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है। अत: सावधानी अत्यंत आवश्यक है।

=> चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति को कभी अपने मन का भेद नहीं खोलना चाहिए। उसे जो भी कार्य करना है, उसे अपने मन में रखे और पूरी तन्मयता के साथ समय आने पर उसे पूरा करना चाहिए।

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$$ Chanakya story in hindi $$


एक दिन चाणक्य का एक परिचित उनके पास आया और उत्साह से कहने लगा, ‘आप जानते हैं, अभी-अभी मैंने आपके मित्र के बारे में क्या सुना?’

चाणक्य अपनी तर्क-शक्ति, ज्ञान और व्यवहार-कुशलता के लिए विख्यात थे। उन्होंने अपने परिचित से कहा, ‘आपकी बात मैं सुनूं, इसके पहले मैं चाहूंगा कि आप त्रिगुण परीक्षण से गुजरें।’
उस परिचित ने पूछा, ‘ यह त्रिगुण परीक्षण क्या है?’

चाणक्य ने समझाया , ‘ आप मुझे मेरे मित्र के बारे में बताएं, इससे पहले अच्छा यह होगा कि जो कहें, उसे थोड़ा परख लें, थोड़ा छान लें। इसीलिए मैं इस प्रक्रिया को त्रिगुण परीक्षण कहता हूं। इसकी पहली कसौटी है सत्य। इस कसौटी के अनुसार जानना जरूरी है कि जो आप कहने वाले हैं, वह सत्य है। आप खुद उसके बारे में अच्छी तरह जानते हैं?’

‘नहीं,’ वह आदमी बोला, ‘वास्तव में मैंने इसे कहीं सुना था। खुद देखा या अनुभव नहीं किया था।’

‘ठीक है,’ – चाणक्य ने कहा, ‘आपको पता नहीं है कि यह बात सत्य है या असत्य। दूसरी कसौटी है -‘ अच्छाई। क्या आप मुझे मेरे मित्र की कोई अच्छाई बताने वाले हैं?’
‘नहीं,’ उस व्यक्ति ने कहा। इस पर चाणक्य बोले,’ जो आप कहने वाले हैं, वह न तो सत्य है, न ही अच्छा। चलिए, तीसरा परीक्षण कर ही डालते हैं ।’

‘तीसरी कसौटी है – उपयोगिता। जो आप कहने वाले हैं, वह क्या मेरे लिए उपयोगी है?’

‘नहीं, ऐसा तो नहीं है।’ सुनकर चाणक्य ने आखिरी बात कह दी।’ आप मुझे जो बताने वाले हैं, वह न सत्य है, न अच्छा और न ही उपयोगी, फिर आप मुझे बताना क्यों चाहते हैं?’

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अग्निहोत्र बिनु वेद नहिं, यज्ञ क्रिया बिनु दान ।
भाव बिना नहिं सिध्दि है, सबमें भाव प्रधान ॥

Hindi Meaning –>

बिना अग्निहोत्र के वेदपाठ व्यर्थ है और दान के बिना यज्ञादि कर्म व्यर्थ हैं ।
भाव के बिना सिध्दि नहीं प्राप्त होती इसलिए भाव ही प्रधान है ॥१॥

English Meaning –>
Chanting of the Vedas without making ritualistic sacrifices to the Supreme Lord through the medium of Agni, and sacrifices not followed by bountiful gifts are futile. Perfection can be achieved only through devotion (to the Supreme Lord) for devotion is the basis of all success.

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Life Management in Hindi !!


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अच्छे लोग और अपने हितैषियों को हम पहचान नहीं पाते और अपने विरोधियों के प्रति पूरी तरह शत्रुता, इन्कारने का भाव रख लेते हैं। इसे चिंतन दोष कहा जाएगा। न कोई पूरी तरह अच्छाई से भरा है और नहीं बुराइयों से भरपूर होगा। मनुष्य गुण-दुर्गुण का मिलाजुला रूप है। हमें इस संतुलन के विचार को सावधानी से उपयोग में लाना चाहिए। अपने विरोधियों के विचार जानते रहना चाहिए, खासतौर पर जब वे आपके लिए व्यक्तिगत टिप्पणी कर रहे हों।

यदि इसका निष्पक्ष विश्लेषण करें तो हमें बहुत सी काम की और हितकारी बातें हाथ लग सकती हैं। इस प्रयोग को झेन फकीरों ने बखूबी किया है। जब भी कोई शिष्य उनसे दीक्षित होता, तो गुरु कहते जाओ, हमने पा लिया, हमारे हो गए, अब कुछ दिन जरूरी रूप से हमारे विरोधी के पास जाकर रहो। हमारा दूसरा पक्ष वहां नजर आएगा, लेकिन जाना निष्पक्ष होकर। इस बात की पूरी संभावना रहेगी कि विरोधी कुछ मामले में सही भी हो।

हमारा और विरोधी का पक्ष मिलकर एक तीसरा नया पक्ष बन जाए जो और भी श्रेष्ठ हो सकता है। यदि तुम्हारा इरादा नेक होगा तो हमारे और हमारे विरोधी दोनों की गलत बात को नकार कर तुम एक नई सही बात प्राप्त कर लोगे। इसलिए विरोधी विचार या व्यक्ति से शत्रुता न पाली जाए। यदि नेक इरादे से चलेंगे तब जो आज शत्रु है कल मित्र हो सकता है। यदि अपने भीतर की आध्यात्मिक योग्यता को विकसित करना है तो विरोधी के विचार को सम्मान देना सीख जाएं। स्वयं के व्यक्तित्व को अपने ही विचारों में बांधें न बल्कि विरोधी के विचारों से खोलना भी सीखें।


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Soul Sustenance & Message for the day 14-12-2013 !!

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Soul Sustenance 14-12-2013
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Self Empowerment

Meditation, in practice, means to enter, and re-enter, the reservoir of peace inside us whenever we need to during the course of the day. This exercise increases self-control and prevents the explosions and reactions of anger that drain our strength. The easy method is not to expect but to accept: then tolerance and respect make our life far more comfortable.

There may be many shadows and pollutants inside us, but usually our pain is centered around these: I own, I need, I want, mine and I expect. If we learn to recognize the characteristics of such a consciousness, we are in a position to overcome difficult situations and thoughts before they overwhelm us. We simply have to remain awake, and that state of alertness stops these shadows from overpowering us and making us unconscious.

Our needs and wants are truly fulfilled in a healthy way by tuning in to the original resources of the soul, because their fulfillment is not dependent on anyone, or anything from outside. When we sustain ourselves from the inside, then our well-being is secure and progressive. As a result, when we express and show our original qualities of the self to others, whether it is peace, happiness or love, they naturally increase inside. The more we give unconditionally, the more we have. This miracle of ‘quality being’ is the result of natural purity, the original state of selflessness, which God always has and good meditators aspire to return to.

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Message for the day 14-12-2013
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Real contentment spreads happiness to others too.

Expression: When one feels contentment but the others are not able to perceive that contenetment, it means that it is not true contentment. Real contentment is visible in such a way that others too are able to feel the happiness that is created. When there is real contentment, all thoughts, words and actions are filled with quality.

Experience: When I am content, others automatically recognise the contentment within me. They are able to take benefit from my state. Even in the most hopeless state, I find that I become a source of support for those around me. I am able to give hope to the hopeless and help them get back to a state of happiness.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris


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Strong Will Power ~ (दृण इच्छाशक्ति) !!

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** Strong Will Power(दृण इच्छाशक्ति) **

वर्तमान का समय प्रतियोगिता का समय है। आज हर कोई एक दूसरे से आगे बढना चाहता है। आगे बढने की प्रवृत्ति विकास के राह को आसान करती है। विद्यार्थी हो या व्यपारी, शोध-कर्ता हो या किसान हर कोई अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रर्दशन करना चाहता है। परन्तु कुछ लोग अपनी इच्छा के अनुरूप परिणाम को प्राप्त कर लेते हैं, तो कुछ लोग चाहत के अनुसार अपने लक्ष्य को हासिल नही कर पाते। जो अपने कार्य को दृण इच्छा शक्ति से पूर्ण करता है वो लक्ष्य को निःसंदेह हासिल करता है। नेपोलियन बोनापार्ट का कहना था कि, असम्भव शब्द मेरे शब्दकोश में नही है। लाल बहादुर शास्त्री, गाँधी जी, सुभाष चन्द्र बोस, अब्राहम लिंकन, आइंस्टाइन, सरदार पटेल, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम इत्यादि बङे-बङे महापुरूष अपनी दृण इच्छा शक्ति से ही उच्चतम शिखर पर पहुँचे और आज भी सभी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

कहने का आशय ये है कि यदि मनुष्य चाहे तो सब कुछ सम्भव है। उसे अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए कार्य को ईमानदारी से और दृण संकल्प के साथ करना चाहिए। मजबूत इच्छा विपरीत परिस्थीति में भी आगे बढने की प्रेरणा देती है। मनुष्य का मन बहुत चंचल होता है, नित नई इच्छाएं जन्म लेती रहती हैं।अतः मन की चंचलता को नियन्त्रित करने के लिए इच्छा शक्ति की दृणता अनिवार्य होती है। गीता में कहा गया है कि, “मन को वश में करना कठिन जरूर है पर असम्भव नही है।“
दृण इच्छा शक्ति के बल पर ही तेनसिहं और बछेन्द्री पाल जैसे पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट पर विजय पताका फहराई। इंग्लिश चैनल और उत्तरी ध्रुव के बर्फिले सागर को दृण इच्छा शक्ति के बल पर ही पार किया गया। लक्ष्य के प्रति दृण इच्छा रखने वाले संकल्पवान लोग इतिहास की धारा बदल देते हैं।

सफलता के लिए दृण संकल्प का होना आवशयक है किन्तु आज आगे बढना तो हर कोई चाहता है परन्तु विषम परिस्थिती में संघर्ष करना नही चाहता। परिश्रम करने से भागता है और शार्टकट तरीके से सबकुछ पाना चाहता है। लक्ष्य के प्रति दृण इच्छाशक्ति का अभाव इंसान की सबसे बङी कमजोरी है। ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि, “गहरी इच्छा हर उपलब्धि का शुरूवाती बिन्दु होती है, जिस तरह आग की छोटी लपटें अधिक गर्मी नही दे सकती वैसे ही कमजोर इच्छा बङे नतीजे नही दे सकती।“ मजबूत इरादों से ही लक्ष्य की राह आसान होती है।

गाँधी जी ने कहा था कि, “Strength Dose not come from Physical capacity. It comes from an Indomitable will.”

अपनी दृण इच्छाशक्ति और अटूट विश्वास के बल पर भारत की पहली महिला आई. पी. एस. अधिकारी किरण बेदी ने अनेकों कठिनाईयों के बावजूद अपने लछ्य को हासिल किया। एशिया का सबसे बङा ‘मेग्सस पुरस्कार’ प्राप्त कर भारत को भी गौरवान्वित किया। अनेक लोगों की प्रेरणा स्रोत किरण बेदी को संयुक्त राष्ट्र संघ में पुलिस सलाहाकार नियुक्त किया गया। (Strong will power )दृण इच्छा शक्ति से कैंसर जैसी जानलेवा बिमारी से भी जीता जा सकता है। यदि इरादे मजबूत होते हैं तो उम्र की सीमा और विकलांगता भी बाधा नही बनती। प्रेमलता अग्रवाल 48 वर्ष की उम्र में एवरेस्ट पर फतह हासिल करने वाली सबसे अधिक उम्र की पहली महिला हैं। हेलेन केलर की दृण इच्छा शक्ति के आगे उनकी दृष्टीबाधिता नत्मस्तक हो गई।

स्वामी विवेकानंद जी का कहना था कि, “पवित्र और दृण इच्छा सर्वशक्तिमान है, अतः प्रबल इच्छा को कठिन अभ्यास एवं संकल्प शक्ति द्वारा प्राप्त करना चाहिए।“

सफलता की कामना करना उत्तम विचार है। उसकी पूर्णता के लिए कार्य के आरंभ में ही दृण इच्छा को अपने में समाहित कर लेना चाहिए। ईमानदारी के साथ कार्य पूर्ण करने में अपनी सारी शक्ति लगा देनी चाहिए। दृण इच्छाशक्ति मार्ग की बाधाओं को पार कर देती है और सफलता के शिखर पर पहुँचना आसान कर देती है। अतः अपनी सोच को साकार रूप देने के लिए दृण इच्छा शक्ति (Strong Will Power) को रग-रग में संचारित कर लें।

“कुछ कर गुजरने के लिए मौसम नही मन चाहिए, साधन सभी जुट जाएंगे, संकल्प का धन चाहिए, गहन संकल्प से ही संभव है पूर्ण सफलता।”

Note::- Post inspired by : http://roshansavera.blogspot.in/

Lots of thank to “Mrs.Anita Sharma”.
Anita Sharma


Note::-
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** Tu Na Ho Nirash Kabhi Man Se ….. **
Tu Na Ho Nirash Kabhi Man Se(kmsraj51)

** AUM SWEET AUM ** SUMREME SOUL GOD SHIVA **

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