मित्रता दिवस – सच्चा दोस्त।

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♥ एक वास्तविक दोस्त। 

मित्रता दिवस विशेष – किसी भी इंसान काे उसके जन्म के साथ ही सारे रिश्ते मिल जाते है, केवल एक दोस्ती के रिश्ते काे छाेड़कर।
दोस्ती का रिश्ता ही वह रिश्ता है, जिसे अपने जीवन में हर इंसान स्वयं(Self) बनाता हैं।

हर काेई एक ऐसा दोस्त चाहता है, जाे उसके साथ सदैव रहें। जीवन में चाहे दुखः हाे या सुख। एक अच्छा और सच्चा दोस्त कभी साथ नहीं छाेड़ता।

५० दोस्त बनाना आसान हैं, लेकिन एक हीं दोस्त से ५० वर्षों तक सच्चें मन से दोस्ती निभाना

कठिन लगता हैं आजकल सबको॥

पढ़े – दोस्ती के दिन पर विशेष विचार – यहा Click करें।

मित्रता दिवस (एक वास्तविक दोस्त)।

 

“मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।”

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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समाज के वास्तविक शिल्पकार होते हैं शिक्षक

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05-09-2014 – शिक्षक दिवस विशेष पर

किसी मनुष्य के विकास में जितना योगदान उसके माता-पिता का होता है कमोबेश उस व्यक्ति के भविष्य को बनाने में उतना ही बड़ा योगदान उसके टीचर का भी होता है। एक टीचर की महत्ता दुनिया की सारी सभ्यताओं और संस्कृतियों में एक जैसी है। भारत में कल शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है, इस मौके पर हम आपको दुनिया के ऐसे ही कुछ टीचर्स के नाम और उनके योगदान के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
एशिया हो या यूरोप। करीब-करीब हर जगह टीचर की अहमियत खास है। दुनियाभर के ये टीचर उल्लेखनीय हैं। ऐसे टीचर्स जिनका योगदान आज भी याद किया जाता है।
कन्फ्यूशियस :  कन्फ्यूशियस (ईसा पूर्व 551-479) का जन्म ईसा मसीह के जन्म से करीब 478 वर्ष पहले चीन के शानदोंग प्रांत में हुआ था। इन्हें भगवान महावीर और गौतम बुद्ध का समकालीन माना जाता है। कई विषयों में पंडित कन्फ्यूशियस को 17 वर्ष की उम्र में एक सरकारी नौकरी मिली थी। लेकिन कुछ ही वर्षों से इनका मन नौकरी से उचट गया और इन्होंने खुद को अध्यापन कार्य में लगा दिया। घर में ही एक विद्यालय खोलकर विद्यार्थियों को शिक्षा देना शुरू कर दिया।
कन्फ्यूशियस मौखिक रूप से विद्यार्थियों को इतिहास, काव्य, दर्शनशास्त्र और नीतिशास्त्र की शिक्षा देते थे। कन्फ्यूशियस ने काव्य, इतिहास, संगीत और नीतिशास्त्र पर कई पुस्तकों की रचना भी की। कन्फ्यूशियस ने एक नए धर्म की नींव भी रखी थी। चीन में आज भी कन्फ्यूशियस का दर्शन वहां के समाज और शिक्षा का बड़ा आधार है।
1
सुकरात (ईसा पूर्व 399- 469)
सुकरात को पश्चिम का एक महान टीचर और विचारक माना जाता है। सुकरात का जन्म 469 ईसा पूर्व एथेंस में हुआ था। शुरुआती जीवन में सुकरात ने अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाया लेकिन बाद में उन्होंने कुछ दिनों के लिए सेना की नौकरी भी की। बता दें कि एक सैनिक के तौर पर सुकरात ने पैटीडिया के युद्ध में हिस्सा लिया था। बहरहाल सुकरात को दुनिया उनके इन कामों के लिए नहीं बल्कि दार्शनिक विचारों और ज्ञान-विज्ञान के प्रसार के लिए याद करती है। गौरतलब है कि तत्कालीन एथेंस के समाज में सुकरात वैज्ञानिक विचारधारा का सूत्रपात किया करते थे। अपने शिष्यों के साथ ही एथेंस के अन्य लोगों को ज्ञान और विज्ञान की बातें समझाया करते थे। इस सिलसिले में कई बार वे अपने तर्कों द्वारा स्थापित मान्यताओं को खारिज कर देते थे। तब एथेंस में अधिकांश, सुकरात की विचारधारा को समझ ही नहीं पाए और उनकी जान के दुश्मन बन गए।
उनके उपदेशों से आजिज उनके दुश्मनों ने सुकरात को ख़त्म करने की ठानी और सुकरात पर मुकदमा थोप दिया। उनके ऊपर देवताओं की उपेक्षा और एथेंस के युवाओं को भ्रष्ट करने का आरोप लगा। आखिरकार दुनिया के इस महान शिक्षक को जहर का प्याला देकर मार दिया गया। बावजूद आज भी सुकरात के विचार प्रासंगिक बने हैं। उल्लेखनीय है कि सुकरात के बाद उनके एक शिष्य प्लेटो ने पश्चिमी विचारधारा को हिलाकर रख दिया था।
2
रोजर बैकन (1214-1292)
रोजर बैकन का जन्म इंग्लैंड में हुआ था। रोजर कई विषयों के विशेषज्ञ थे जिनमें ऑप्टिक, मैथ, रसायन प्रमुखता से शुमार किए जा सकते हैं। रोजर की गणना दुनिया के महान टीचर्स में होती है। इन्होंने अपने समय में दर्शन और विज्ञान का विस्तार से अध्ययन करने के साथ ही इसमें कई प्रयोग भी किए। इस दिलचस्प टीचर को अपने तार्किक ज्ञान और विज्ञान परक लेखन के कारण रोजर को शासकीय यातना भी झेलनी पड़ी। बता दें कि ओकल्टीज़्म के आरोप में रोजर को 15 साल कारावास भुगतना पड़ा।
3
नाथन हेल (1755-1766)
नाथन हेल को एक शिक्षक के साथ ही एक अमेरिकी योद्धा के रूप में भी याद किया जाता है। गौरतलब है कि नाथन ने अमेरिका के रिवोल्यूशनरी वार में हिस्सा लिया था। वे ब्रिटिश सेना द्वारा पकड़े गए और मात्र 21 साल की उम्र में फांसी चढ़ा दिए गए। बहरहाल नाथन के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य यह है अपनी उम्र के 18 वें वर्ष में ही वे एक अध्यापक भी बन गए थे। उन्हें अमेरिका में महिलाओं के शिक्षा की वकालत करने वाले प्रमुख व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है। तत्कालीन अमेरिका में महिला शिक्षा की हालत बहुत खराब थी। ऐसे दौर में नाथन सुबह-सुबह महिलाओं और लड़कियों को पढ़ाते थे जबकि इसी दिन दोपहर के समय में लड़कों को पढ़ाने का काम किया करते थे।
4
एन्नी सुलिवान (1866-1936)
एन्नी सुलिवान का जन्म मैसाचुसेट्स में 14 अप्रैल 1866 को हुआ था। जन्म के चौथे साल में ही एक बीमारी की वजह से उन्हें ब्लाइंडनेस की दिक्कत का सामना भी करना पड़ा। एन्नी को जन्मजात टीचर माना जाता है। दुनिया एन्नी को गूंगी और पूरी तरह से बहरी लड़की हेलन केलर के साथ किए गए उनके काम के लिए याद करती है। बता दें कि एन्नी ऐसी पहली शख्स थी जिन्होंने हेलन के रूप में किसी गूंगे-बहरे छात्र को पढ़ाने में सफलता हासिल की।
5
एलन ब्लूम (1930-1992)
एलन ब्लूम ने कई स्कूलों में अध्यापन का काम किया था, जिसमें एल यूनिवर्सिटी, कॉर्नल यूनिवर्सिटी, और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो प्रमुखता से शामिल है। एलन ब्लूम ने शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कई इतिहास प्रसिद्ध चर्चित किताबें भी लिखी।
6
जैमी इस्केलेंटी (1930-2010)
जैमी इस्केलेंटी (Jaime Escalante) का जन्म बोलिविया में हुआ था। जैमी को कैलिफोर्निया के गारफील्ड हाईस्कूल में मैथमेटिक की शिक्षा के लिए जाना जाता है। आधुनिक दौर में जेमी ने गणित की सरलता के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। इस वजह से उन्हें पुरस्कृत भी किया गया।
7

शिक्षक दिवस

भारत भूमि पर अनेक विभूतियों ने अपने ज्ञान से हम सभी का मार्ग दर्शन किया है। उन्ही में से एक महान विभूति शिक्षाविद्, दार्शनिक, महानवक्ता एवं आस्थावान हिन्दु विचारक डॉ. सर्वपल्लवी राधाकृष्णन जी ने शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है। उनकी मान्यता थी कि यदि सही तरीके से शिक्षा दी जाय़े तो समाज की अनेक बुराईयों को मिटाया जा सकता है।

ऐसी महान विभूति का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाना हम सभी के लिये गौरव की बात है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के व्यक्तित्व का ही असर था कि 1952 में आपके लिये संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति का पद सृजित किया गया। स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति जब 1962 में राष्ट्रपति बने तब कुछ शिष्यों ने एवं प्रशंसकों ने आपसे निवेदन किया कि  वे उनका जनमदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाना चाहते हैं। तब डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने कहा कि मेरे जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने से मैं अपने आप को गौरवान्वित महसूस करूंगा। तभी से 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ज्ञान के सागर थे। उनकी हाजिर जवाबी का एक किस्सा आपसे Share कर रहे हैः—

एक बार एक प्रतिभोज के अवसर पर अंग्रेजों की तारीफ करते हुए एक अंग्रेज ने कहा – “ईश्वर हम अंग्रेजों को बहुत प्यार करता है। उसने हमारा निर्माण बङे यत्न और स्नेह से किया है। इसी नाते हम सभी इतने गोरे और सुंदर हैं।“ उस सभा में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी भी उपस्थित थे। उन्हे ये बात अच्छी नही लगी अतः उन्होने उपस्थित मित्रों को संबोधित करते हुए एक मनगढंत किस्सा सुनाया—

“मित्रों, एक बार ईश्वर को रोटी बनाने का मन हुआ उन्होने जो पहली रोटी बनाई, वह जरा कम सिकी। परिणामस्वरूप अंग्रेजों का जन्म हुआ। दूसरी रोटी कच्ची न रह जाए, इस नाते भगवान ने उसे ज्यादा देर तक सेंका और वह जल गई। इससे निग्रो लोग पैदा हुए। मगर इस बार भगवान जरा चौकन्ने हो गये। वह ठीक से रोटी पकाने लगे। इस बार जो रोटी बनी वो न ज्यादा पकी थी न ज्यादा कच्ची। ठीक सिकी थी और परिणाम स्वरूप हम भारतियों का जन्म हुआ।“

ये किस्सा सुनकर उस अग्रेज का सिर शर्म से झुक गया और बाकी लोगों का हँसते हँसते बुरा हाल हो गया।

मित्रों, ऐसे संस्कारित एवं शिष्ट माकूल जवाब से किसी को आहत किये बिना डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने भारतीयों को श्रेष्ठ बना दिया। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का मानना था कि व्यक्ति निर्माण एवं चरित्र निर्माण में शिक्षा का विशेष योगदान है। वैश्विक शान्ति, वैश्विक समृद्धि एवं वैश्विक सौहार्द में शिक्षा का महत्व अतिविशेष है। उच्चकोटी के शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को भारत के प्रथम राष्ट्रपति महामहीम डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने भारतरत्न से सम्मानित किया।

महामहीम राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के विचारों को ध्यान में रखते हुए, मित्रों मेरा ये मानना है कि शिक्षक दिवस के पुनित अवसर पर हम सब ये प्रण करें कि शिक्षा की ज्योति को ईमानदारी से अपने जीवन में आत्मसात करेंगे क्योंकि शिक्षा किसी में भेद नही करती, जो इसके महत्व को समझ जाता है वो अपने भविष्य को सुनहरा बना लेता है।

सम्सत शिक्षकों को हम निम्न शब्दों से नमन करते हैं—

ज्ञानी के मुख से झरे, सदा ज्ञान की बात।

हर एक पांखुङी फूल, खुशबु की सौगात।।

जयहिन्द

अनिता शर्मा

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एक अपील– आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई  दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है।आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है।मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma”  लिख कर देखा जा सकता है।

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 HAPPY TEACHER’s DAY 

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सच्चें मन से अगर कुछ करने की ठान लाे, ताे आपकाे सभी काम में सफलता मिल जाती हैं।

जीवन में जाे भी काम कराें पुरे मन से कराें, ताे सफलता आपकाे जरूर मिलेगी।

-कृष्ण मोहन सिंह ५१

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लिए समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

 

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अर्श रोग (बवासीर)-Piles – का आयुर्वेदिक उपचार

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अर्श रोग (बवासीर)-Piles 

Piles -अर्श रोग - बवासीर

अर्श रोग (बवासीर)-Piles

बवासीर गुदा मार्ग की बीमारी है । यह मुख्यतः दो प्रकार की होती है — खूनी बवासीर और बादी बवासीर। इस रोग के होने का मुख्य कारण ” कोष्ठबद्धता ” या ”कब्ज़ ” है। कब्ज़ के कारण मल अधिक शुष्क व कठोर हो जाता है और मल निस्तारण हेतु अधिक जोर लगाने के कारण बवासीर रोग हो जाता है। यदि मल के साथ बूंद -बूंद कर खून आए तो उसे खूनी तथा यदि मलद्वार पर अथवा मलद्वार में सूजन मटर या अंगूर के दाने के समान हो और मल के साथ खून न आए तो उसे बादी बवासीर कहते हैं। अर्श रोग में मस्सों में सूजन तथा जलन होने पर रोगी को अधिक पीड़ा होती है।

बवासीर का विभिन्न औषधियों द्वारा उपचार —

१- जीरा – एक ग्राम तथा पिप्पली का चूर्ण आधा ग्राम को सेंधा नमक मिलाकर छाछ के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से बवासीर ठीक होती है।

२- जामुन की गुठली और आम की गुठली के अंदर का भाग सुखाकर इसको मिलाकर चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में हल्के गर्म पानी या छाछ के साथ सेवन से खूनी बवासीर में लाभ होता है। 

३- पके अमरुद खाने से पेट की कब्ज़ दूर होती है और बवासीर रोग ठीक होता है।

४- बेल की गिरी के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर , ४ ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ मिलता है।

५- खूनी बवासीर में देसी गुलाब के तीन ताज़ा फूलों को मिश्री मिलाकर सेवन करने से आराम आता है।

६ – जीरा और मिश्री मिलकर पीस लें। इसे पानी के साथ खाने से बवासीर (अर्श ) के दर्द में आराम रहता है।

७- चौथाई चम्मच दालचीनी चूर्ण एक चम्मच शहद में मिलाकर प्रतिदिन एक बार लेना चाहिए। इससे बवासीर नष्ट हो जाती है।

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पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज

मैं श्री आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज का बहुत आभारी हूँ!!

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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पिपरमिंट (Peppermint)

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पिपरमिंट (Peppermint) –

पिपरमिंट (Peppermint) -

पिपरमिंट (Peppermint)

यह विश्व में यूरोप,एशिया,उत्तरी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। समस्त भारत में यह बाग़-बगीचों में विशेषतः उत्तर भारत तथा कश्मीर में लगाया जाता है। यह अत्यंत सुगन्धित क्षुप होता है। इसके तेल,सत तथा स्वरस आदि का चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। इसके पुष्प बैंगनी,श्वेत अथवा गुलाबी वर्ण के तथा पुष्पदण्ड के अग्र भाग पर लगे होते हैं। इसके फल चिकने अथवा खुरदुरे तथा बीज छोटे होते हैं। इसका पुष्पकाल एवं फलकाल सितम्बर से अप्रैल तक होता है।

पिपरमिंट का औषधीय प्रयोग –

१- पिपरमिंट के क्रिस्टल को दांतों के बीच में रखकर दबाने से दांत दर्द में लाभ होता है ।

२- पिपरमिंट को छाती पर लगाने से श्वसन संस्थान गत सूजन में लाभ होता है ।

३- पिपरमिंट क्रिस्टल का सेवन करने से उलटी,अतिसार,आध्मान तथा अजीर्ण में लाभ होता है ।

४- २५ ग्राम पिपरमिंट सत में शक्कर मिलाकर सेवन करने से पेटदर्द तथा पेट के विकार ठीक होते हैं ।

५- पिपरमिंट के पत्तों को पीसकर लगाने से चींटी आदि कीटों के काटने से होने वाली वेदना का शमन होता है ।

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दमा (श्वास रोग ) Asthma – आयुर्वेदिक उपचार

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दमा (श्वास रोग) अस्थमा-

दमा (श्वास रोग ) Asthma

दमा (श्वास रोग) अस्थमा

आज के समय में दमा तेज़ी से स्त्री – पुरुष व बच्चों को अपना शिकार बना रहा है । साँस लेने में दिक्कत या कठिनाई महसूस होने को श्वास रोग कहते हैं । फेफड़ों की नलियों की छोटी-छोटी पेशियों में जब अकड़न युक्त संकुचन उत्पन्न होता है तो फेफड़ा, साँस को पूरी तरह अंदर अवशोषित नहीं कर पाता है जिससे रोगी पूरा श्वास खींचे बिना ही श्वास छोड़ने को विवश हो जाता है । इसी स्थिति को दमा या श्वास रोग कहते हैं ।

दमा को पूर्ण रूप से ठीक करने हेतु प्राणायाम का अभ्यास सर्वोत्तम है ।

विभिन्न औषधियों से दमे का उपचार :-

१- अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटने से श्वास , खांसी व जुक़ाम में लाभ होता है ।

२- प्याज़ का रस , अदरक का रस , तुलसी के पत्तों का रस व शहद ३-३ ग्राम की मात्रा में लेकर सुबह-शाम सेवन करने से अस्थमा रोग नष्ट होता है ।

३- काली मिर्च – २० ग्राम , बादाम की गिरी – १०० ग्राम और खाण्ड – ५० ग्राम लें | तीनों को अलग – अलग बारीक़ पीस कर चूर्ण बना लें , फिर तीनों को अच्छी तरह से मिला लें | इस मिश्रण की एक चम्मच लें और रात को सोते समय गर्म दूध से लें , लाभ होगा ।

विशेष :- जिनको मधुमेह हो वे खाण्ड का प्रयोग न करें तथा जिनको अम्लपित्त [acidity ] हो वे काली मिर्च १० ग्राम की मात्रा में प्रयोग करें।

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पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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Exercise On Self Discovery

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Exercise On Self Discovery

Mera Baba

मेरा बाबा

Exercise On Self Discovery – Part 1

Many people today do not have a clear sense of identity. In fact, when you ask people about the image they have of themselves, it is usually negative, and they see their weaknesses (negative sanskaras) and mistakes committed in the past more easily than their qualities (positive sanskaras) and achievements. This negative image of oneself leads us to an identity crisis. A negative image causes feelings of dissatisfaction to accumulate within oneself. Then our lifestyle is affected by the need for recognition and approval, by the need to justify ourselves, of obtaining material achievements and success.

Given below is an exercise to experience your true self:
Sit back and observe yourself. What is the image you have of yourself? How do you see yourself? Who are you really? What is there left when you have removed all the labels? Are you thoughts, feelings, free will, energy, ideas, being, conscience, intellect, life? What do the majority have in common? They are internal, incorporeal and invisible: they are non-physical aspects. The true self is incorporeal and invisible.

Now experience your ideal self: Make a list of which qualities you think your ideal self should have, the self you deeply long to be and experience in your life. The list may include qualities such as: joyful, tolerant, generous, fearless, free, loving, among others.

— Message —

To see specialities in all is to become special.

Projection: Most of the time, I’m caught up in looking at people’s negativity. When I see some negative quality in someone, I immediately make his specialities a background and start focusing on his negative traits. The more I think of these negative qualities, the more they occupy my conscious mind, changing my reactions too.

Solution: It is natural to be coloured or influenced by what I see. If I see specialities, I’ll take on a little of that and if I see weaknesses, I’ll take on a little of that too. So I need to make an attempt to look at only specialities and encourage others too to use their specialities.

 


 

Exercise On Self Discovery – Part 2

Think about which qualities you need to possess as a professional or as a homemaker e.g. qualities of a team leader in a corporate organization would be: efficiency, responsibility, focus, precision, determination, etc. Then, leaving aside the professional aspect, explore your basic, innate qualities. Reflect on your inner and spiritual values. Which values make you happy? Look deep into your inner self. Take some time in this and note down three of these essential values in your life. What conclusion have you come to? What are these values?

The more we really understand ourselves, with our defects, weaknesses, virtues and values, the better our relationships will be with others. We will understand when they have little understanding of themselves and others. Knowing oneself in-depth, taking into account everything described above as well as in yesterday’s message, requires time, effort, observation and the practice of silence. In silence one can begin a conversation with oneself. In this way we can gradually discover our inner beauty and strength, and be aware of the basis of our value and dignity as human beings. When we relearn to see ourselves with our original qualities and innate values, it is also easier to recognise these qualities in others.

— Message —

To do a task with love is to be constantly successful.

Projection: When I start with something new, I usually notice that I’m successful for sometime, but I do not experience long lasting success. This is because I did the task on being told or being forced by the situation. External force makes me use my resources with commitment for sometime.

Solution: Love brings constant success because once I’ve experienced the joy of doing the task itself, I’ll never give it up. Because it is done with love, I’ll put in all my resources and do my best. So I’ll experience constant success.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

आपका दोस्त

कृष्ण मोहन सिंह ५१

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पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है.

यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लिए समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

 

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मेंहदी (Henna) – आयुर्वेद टिप्स

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मेंहदी (Henna)

mehandi

मेंहदी (Henna)

मेंहदी की पत्तियों का प्रयोग रंजक द्रव्य के रूप में किया जाता है तथा इसकी सदाबहार झाड़ियाँ बाड़ के रूप में लगाई जाती हैं | यह समस्त भारत में मुख्यतः पंजाब,गुजरात,मध्य प्रदेश तथा राजस्थान के शुष्क पर्णपाती वनों में पायी जाती है | स्त्रिओं के श्रृंगार प्रसाधनों में विशिष्ट स्थान प्राप्त होने के कारण,मेंहदी बहुत लोकप्रिय है | मेंहदी की पत्तियों को सुखाकर बनाया हुआ महीन पाउडर बाजारों में पंसारियों के यहां तथा अन्य विक्रेताओं के यहाँ आकर्षक पैक में बिकता है | इसके पत्ते मलने से चिकने तथा लुआबदार हो जाते हैं | इसके कोमल पत्तों को सुखाकर,पीस्सकर मेंहदी के नाम से बेचा जा सकता है | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जुलाई से दिसंबर तक होता है |

मेंहदी का विभिन्न रोगों में उपयोग –

१- लगभग ४.५ ग्राम मेंहदी के फूलों को पानी में पीसकर कपड़े से छान लें,इसमें ७ ग्राम शहद मिलाकर कुछ दिन पीने से गर्मी से उत्पन्न सिरदर्द शीघ्र ही ठीक हो जाता है |

२- मेंहदी में दही और आंवला चूर्ण मिलाकर २- ३ घंटे बालों में लगाने से बल घने,मुलायम,काले और लम्बे होते हैं |

३- दस ग्राम मेंहदी के पत्तों को २०० मिली पानी में भिगोकर रख दें,थोड़ी देर बाद छानकर इस पानी से गरारे करने से मुँह के छाले शीघ्र शांत हो जाते हैं |

४- मेंहदी के बीजों को बारीक पीसकर,घी मिलाकर ५०० मिग्रा की गोलियां बना लें | इन गोलियों को सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से खुनी दस्तों में लाभ होता है |

५- लगभग ५ ग्राम मेंहदी के पत्ते लेकर रात को मिटटी के बर्तन में भिगो दें और प्रातःकाल इन पत्तियों को मसलकर तथा छानकर रोगी को पिला दें | एक सप्ताह के सेवन से पुराने पीलिया रोग में अत्यंत लाभ होता है |

६- मेंहदी और एरंड के पत्तों को समभाग पीसकर थोड़ा गर्म करे घुटनों पर लेप करने से घुटनों की पीड़ा में लाभ होता है |

७- अग्नि से जले हुए स्थान पर मेंहदी की छाल या पत्तों को पीसकर गाढ़ा लेप करने से लाभ होता है |

Post inspired by:

Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj-KMSRAJ51

पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज

मैं श्री आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज का बहुत आभारी हूँ!!

आपको दिल से शुक्रिया;

Ayurveda Product Available on;-

http://patanjaliayurved.org/

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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